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दिए गए टेक्स्ट में कुछ शब्दों में मात्राओं (विशेषकर ‘ओ’, ‘औ’ की मात्राओं के बिखराव/गलती) और वाक्यों के व्याकरण में कुछ त्रुटियां थीं। नीचे मात्राएं और वर्तनी (Spellings) सही करके पूरा टेक्स्ट दिया गया है: रातू के चटकपुर स्थित पोखरटोली में शुक्रवार रात दर्दनाक हादसा हुआ। बंद कमरे में कोयले का चूल्हा जलाकर सोने के कारण दम घुटने से मां और दो साल के बेटे की मौत हो गई। मृतक की पहचान पिंकी देवी (30) और श्रवण कुमार (2) के रूप में हुई है। पिंकी की ननद 15 वर्षीय चंदा कुमारी और चार साल की बेटी प्राची कुमारी की हालत गंभीर है। दोनों को रिम्स में भर्ती कराया गया है। मृतका की सास मुन्नी देवी ने बताया कि ये चारों एक ही कमरे में सोती थीं, जबकि वह अपने पति पंचम साव के साथ बगल वाले कमरे में रहती हैं। इन चारों के कमरे में ही कोयले के चूल्हे पर खाना बनता था, फिर चूल्हा बाहर कर देते थे। शुक्रवार रात बारिश के कारण चूल्हा कमरे के अंदर ही रख दिया और सभी सो गए। शनिवार सुबह पांच बजे जब कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने बेटी-बहू को आवाज लगाई। जब कोई जवाब नहीं मिला तो पड़ोसियों की मदद से एसबेस्टस शीट तोड़ी। अंदर देखा तो चारों बेसुध पड़े थे। सभी को तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने पिंकी और श्रवण को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। मृतका के ससुर पंचम साव की शिकायत पर पुलिस ने यूडी केस दर्ज किया है। पिंकी ने 6 साल पहले किया था प्रेम विवाह पिंकी ने 6 साल पहले अपने पड़ोस में ही रहने वाले चंदन साव से प्रेम विवाह किया था। शादी के लगभग 2 साल बाद एक बेटी और 4 साल बाद बेटे का जन्म हुआ। इसी दौरान आपसी विवाद में पति चंदन साव ने दो साल पहले फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पति के आत्महत्या करने के बाद से पिंकी देवी अपनी सास मुन्नी देवी और ससुर पंचम साव के साथ पोखरटोली स्थित धन्नु यादव के घर में किराए पर रहती थी। पूरा परिवार दुख से उबरा ही था कि अचानक सबकुछ खत्म हो गया। 10 दिन पहले ही पिंकी ने शुरू की थी नौकरी… यह परिवार मूल रूप से बिहार के छपरा के महमदा गांव का है। यहां किराए के मकान में रहते हैं। सास-ससुर मजदूरी करते हैं। वहीं पिंकी ने 10 दिन पहले ही अपर बाजार स्थित एक कपड़े की दुकान में नौकरी शुरू की थी। इसी बीच यह हादसा हो गया। बारिश के कारण अंदर रखा था चूल्हा सास मुन्नी देवी के मुताबिक पिंकी रोज अपने कमरे में ही खाना बनाती थी। फिर चूल्हा बाहर निकालकर रख देती थी। शुक्रवार रात चूल्हा बाहर रखने गई तो बारिश शुरू हो गई। इसके बाद पिंकी ने कमरे के अंदर ही चूल्हा रख दिया और दरवाजा बंद कर बेटा-बेटी व ननद के साथ सो गई। और सुबह ऐसी घटना हो गई। कभी भी कमरे में चूल्हा जलाकर न सोएं कोयले के चूल्हे से जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है। लोग नींद के दौरान बेहोश हो जाते हैं और कई बार जान चली जाती है। इसलिए कमरे में कोयले का चूल्हा जलाकर न रखें। आग जलाएं तो जमीन पर न सोएं, क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड गैस नीचे जमती है। -जैसा सीसीएल अस्पताल पिपरवार की रिटायर्ड डॉ. सुशीला रानी ने बताया।
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