संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और इस बार और भी हंगामा मचाने वाला है, क्योंकि आप देखिए कि एक तरफ कॉकरोच वाले हैं, दूसरी तरफ इंडी वाले… दोनों माहौल बना रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कैसे घेरा जाए. लेकिन पीएम मोदी तो अलग ही मेगा प्लान बनाकर बैठे हैं. ये मेगा प्लान क्या है, जिसने इंडी वालों में हड़कंप मचा दिया है. नरेंद्र मोदी क्या धमाके करने वाले हैं. क्योंकि आप देखिए कि मानसून सत्र से पहले इंडी गठबंधन की पार्टियों में गजब तोड़ फोड़ भी हो चुकी है. कांग्रेस घबराई हुई है कि नंबर गेम में नरेंद्र मोदी बहुत आगे निकल गए हैं. संसद में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटा लेने की बातें हो रही हैं. इस दो तिहाई आंकड़े से सरकार क्या करने वाली है? सवाल है कि क्या पीएम मोदी महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर विपक्ष को चौंकाने वाली है, क्योंकि ये बिल इस सत्र में पेश होगा या नहीं इसपर अभी सस्पेंस है.
विपक्ष उठाएगा NEET, राम मंदिर का मुद्दा, पीएम मोदी रखेंगे काम का लेखा-जोखा
20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में सरकार 7 बिल पेश करने की तैयारी कर रही है, तो उधर विपक्ष NEET पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद को मुद्दा बनाने की तैयारी है. लेकिन सवाल है कि NEET के तो रिजल्ट भी घोषित हो गए. चंदा चोरी विवाद को लेकर SIT सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करने वाली है तो विपक्ष इसे मुद्दे कैसे बनाएगी.
इन सात में से दो विधेयक फॉरेन कंट्रीब्यूशन और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान पुराने हैं. विदेशी चंदे से जुड़ा विधेयक 25 मार्च 2026 को और शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था. शिक्षा से जुड़े बिल को जॉइंट कमेटी के पास भेज दिया गया था. वहीं इनकम टैक्स बिल, 2026 और सुप्रीम कोर्ट में जज की संख्या बढ़ाने वाले बिल अध्यादेशों का स्थान लेंगे. जबकि जन्म-मृत्यु, वंदे मातरम के अपमान और MSME से जुड़े तीन बिल पहली बार पेश किए जाएंगे.
इस बार संसद के मानसून सत्र से पहले ही माहौल बेहद गरम है. एक तरफ सरकार का मेगा विधेयक एजेंडा तो दूसरी तरफ विपक्ष की रणनीति. लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा है वंदे मातरम् को कानूनी ढाल. कल राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अपमान से बचाने वाला ऐतिहासिक संशोधन विधेयक पेश करने जा रहे हैं.
ये बिल पास हो जाता है तो जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने वालों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई होगी. इसके दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान होगा.
सर्वदलीय बैठक में दिखी सियासी तल्खी
लेकिन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में जो हुआ वो भी कम हंगामा वाला नहीं था. राजनाथ सिंह ने 3 घंटे चली इस बैठक की अध्यक्षता की. मीटिंग में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके सहित 40 पार्टियों के नेता शामिल हुए, लेकिन बीच में विपक्ष ने सांकेतिक वॉकआउट किया. विपक्ष ने आरोप लगाए कि सरकार ने टीएमसी के बागी 20 सासंदों के गुट को बैठक में क्यों बिलाया?
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘आज पूरे विपक्ष ने विरोध में ऑल पार्टी मीटिंग से वॉकआउट किया, क्योंकि कथित NCPI मान्याता प्राप्त पार्टी नहीं है, जबकि जो लिस्ट दी गई उसमें TMC के 28 सांसद दिखाए गए, ये जो कथित 20 बागी सांसद हैं उनका विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है, अयोग्यता की 20 याचिका अभी भी पेंडिंग है, तो किस आधार पर संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें मीटिंग में बुलाया और किस आधार पर बागी मीटिंग में शामिल हुए.’
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने जवाब दिया, ‘वॉकआउट के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए रिजिजू ने कहा, ‘एनसीपीआई के 20 लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं और लोकसभा अध्यक्ष से नई पार्टी में शामिल होने और संसद में अलग बैठने की मांग की है. यह नियमों के अनुसार है और यह अध्यक्ष के विचाराधीन है. जब यह मामला अध्यक्ष के विचाराधीन है और 20 सांसद हैं, तो हम उन्हें कैसे वंचित कर सकते हैं? लोकसभा सभी की है तो हम 20 सांसदों को नहीं बुलाएंगे; ऐसा कैसे हो सकता है? उन्हें मान्यता देना या न देना एक प्रक्रिया है. लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय से जो भी होगा, उस पर मैं अभी कोई टिप्पणी नहीं कर रहा हूं.’
महिला आरक्षण और परिसीमन पर डीएमके ने अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं. (फाइल फोटो- पीटीआई)
मानसून सत्र में पेश होंगे ये 8 बिल
संसद के मानसून सत्र के लिए सरकार ने एजेंडा तय कर लिया है. इस बार सदन में 8 बिल पेश होंगे.
- आयकर संशोधन विधेयक, 2026– ये बिल पहले जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा
- सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026- जजों की संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 किया जाएगा
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026- राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण मिलेगा.
- जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026- रजिस्ट्रेशन में देरी पर जुर्माने और नियम को सख्त बनाया जाएगा.
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक, 2026 – MSME को वित्तीय राहत देने और व्यापार को आसान बनाने के लिए सुधार होंगे.
- विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक, 2026 – विदेशी चंदे के इस्तेमाल पर सख्त निगरानी होगी.
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: UGC, AICTE, NCTE की जगह एक रेगुलेटर अथॉरिटी बनाई जाएगी
दो बिल पर सबसे बड़ा सस्पेंस
लेकिन मानसून सत्र का सबसे बड़ा सस्पेंस है दो बिल… परिसीमन और महिला आरक्षण बिल… जिसपर सरकार की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है. परिसीमन बिल तो अपने आप में दो बिल का पैकेज है. इसमें लोकसभा की सीट 550 से 850 तक बढ़ने और लोकसभा क्षेत्र का आकार दोबारा तय करने का प्रवधान है.
अप्रैल 2026 में सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर इस बिल को पेश किया था और तर्क दिया था कि 2029 तक 33 फीसदी महिला आरक्षण पास करने के लिए इस बिल को पास करना जरूरी है… लेकिन विपक्ष ने इस बिल का ये कहते हुए विरोध किया कि बीजेपी इस बिल के जरिये अपना एजेंडा तय कर रही है. हालांकि लगता है इस बार कहानी कुछ बदली-बदली सी है.
क्या डीएमके ने बदल लिया मूड?
डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा, ‘महिला आरक्षण बिल मौजूदा 543 सीटों के साथ पास हो सकता है, लेकिन सरकार किस तरह से परिसीमन बिल लाना चाहती है हम नहीं जानते हैं. लेकिन अगर ये किसी भी तरह दक्षिण के राज्यों को प्रभावित करता है, तो डीएमके इसका समर्थन नहीं करेगी. दूसरी पार्टी के एक मेंबर कह रहे हैं कि हम समर्थन दे रहे हैं, ये बिलकुल सही नहीं है. मैं बार- बार कह रहा हूं कि हम दक्षिण राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, स्टालिन के नेतृत्व में दक्षिण राज्यों के सीएम की मीटिंग में हमने प्रस्ताव पास किया है कि ऐसी स्थिति में 25 साल के लिए परिसीमन को रोक देना चाहिए.’
परिसीमन बिल पर संविधान विशेषज्ञ कपिल मदान कहते हैं, ‘मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष में आपको तिखी बहस देखने को मिलेगी और मुझे लगता है कि विपक्ष वो सारी चीजें करेगा, जिससे वो ये बात हाईलाइट कर पाए कि परिसीमन एक अलग मुद्दा है, जिसमें सीटों को बढ़ाकर और सीटों को बदलकर सरकार शायद अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगी.’
क्या है लोकसभा का नंबर गेम?
तो सवाल है कि अगर सरकार अगर इस मानसून सत्र में डिलीमिटेशन यानी परिसीमन बिल ले भी आती है तो क्या नंबर NDA के पक्ष में है.
2024 में एनडीए की लोकसभा में 292 सीटें थी. जून 2026 में टीएमसी के बागी सांसद एनडीए से जुड़े. इसी महीने में यूबीटी के 6 सांसदों ने भी समर्थन दिया है. और इससे एनडीए की ताकत 318 हो गई. अगर डीएमके के 22, एनसीपी शरद गुट के 8 और JMM के तीन सांसदों ने समर्थन दिया, तो लोकसभा में NDA इस बिल के पक्ष में 351 वोट जुटा लेगी, लेकिन बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत यानी 360 की जरूत होगी. इस सूरत में भी NDA को 9 और वोटों की जरूरत होगी.
लेकिन सत्र के दौरान विपक्ष ने वॉक आउट किया तो बहुमत का आंकड़ा कम हो सकता है और सरकार के लिए बिल पास करना आसान हो जाएगा.