![]()
भास्कर न्यूज|गुमला बरटोली स्थित नेट्रोडेम स्कूल के सभागार में रविवार को महान समाज सुधारक और शिक्षा की लौ जलाने वाली संत जूली विलियाट का 175वां जन्म दिवस बेहद श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर एक विशेष मिस्सा अनुष्ठान का आयोजन किया गया, जिसमें मसीही समुदाय के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अनुष्ठाता गुमला धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप स्वामी डॉ. लिनुश पिंगल एक्का थे, जबकि सहयोगी पुरोहित के रूप में फादर अगुस्टीन और फादर नवीन ने धार्मिक रस्मों को पूरा कराया। पीड़ितों की सेवा और शिक्षा ही सच्ची ईश्वर भक्ति है। मिस्सा अनुष्ठान के दौरान उपस्थित ख्रीस्तीयों को बिशप स्वामी डॉ. लिनुश पिंगल एक्का ने अपने संदेश में कहा कि संत जूली विलियाट के अनुकरणीय जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत जूली का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने और ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की सीख देता है। बिशप ने उनके प्रसिद्ध कथन ईश्वर कितने भले हैं को याद करते हुए कहा कि हमें भी अपने जीवन में उनके इस विश्वास को उतारना चाहिए। बिशप डॉ. एक्का ने समाज के प्रति जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए कहा कि संत जूली ने शारीरिक अक्षमताओं और गंभीर चुनौतियों के बावजूद अपना पूरा जीवन गरीब और बेसहारा बच्चियों को शिक्षित करने में समर्पित कर दिया। आज हमारे समाज को उसी सेवा भावना की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज का हर व्यक्ति पीड़ितों की मदद, कमजोरों को संबल देने और शिक्षा के प्रसार में अपनी भूमिका निभाए। दूसरों के जीवन में खुशियां लाना और दीन-दु:खियों की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। अनुष्ठान के अंत में स्कूल प्रबंधन और बच्चों द्वारा संतों के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सिस्टर, शिक्षकों और मसीही विश्वासियों का सराहनीय योगदान रहा। मौके पर फादर मुनसन बिलुंग, सुप्रियर सिस्टर श्वाति, सिस्टर शिल्पा, मीरा, सिस्टर प्रियंका, सिस्टर मकदलिना, सिस्टर पुष्पा, सिस्टर कविता समेत ख्रीस्तीय धर्मलंबी मौजूद थे।
Source link