देवघर: अगर आप किसान हैं और कम लागत में घर बैठे अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो मशरूम की खेती आपके लिए कमाई का एक अच्छा जरिया बन सकती है. खासकर नवंबर से लेकर फरवरी तक का समय मशरूम उत्पादन के लिए काफी अनुकूल माना जाता है. इस दौरान तापमान और मौसम की स्थिति मशरूम की कई किस्मों के उत्पादन के लिए बेहतर रहती है, लेकिन मशरूम की खेती शुरू करने से पहले सबसे जरूरी है सही किस्म का चुनाव करना.
दरअसल, कई किसान ज्यादा मुनाफे की उम्मीद में सीधे बटन या मिल्की मशरूम की खेती शुरू कर देते हैं, जबकि पहली बार खेती करने वाले किसानों के लिए यह फैसला परेशानी का कारण भी बन सकता है. ऐसे में देवघर के मशरूम ट्रेनर रंजीत झा किसानों को एक ऐसी किस्म की खेती करने की सलाह दे रहे हैं, जिसमें कम लागत, कम मेहनत और कम समय में अच्छा उत्पादन लेने की संभावना रहती है.
जानें क्या कहते है मशरुम ट्रेनर
देवघर के मशरूम ट्रेनर रंजीत झा ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि नवंबर का महीना मशरूम की खेती शुरू करने के लिए काफी अच्छा है. इस समय जो किसान पहली बार मशरूम उत्पादन करना चाहते हैं, उन्हें शुरुआत में ही महंगी और ज्यादा देखभाल मांगने वाली किस्मों के पीछे नहीं भागना चाहिए. आमतौर पर किसान बटन और मिल्की मशरूम की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि इन किस्मों से ज्यादा कमाई होगी, लेकिन खेती में मुनाफा केवल बाजार भाव से तय नहीं होता, बल्कि उत्पादन की लागत, मेहनत, देखभाल और बिक्री की सुविधा भी मायने रखती है. इसलिए नए किसानों को सबसे पहले ओयेस्टर यानी ढिंगरी मशरूम की खेती से शुरुआत करनी चाहिए.
उत्पादन के लिए बहुत बड़ी जमीन की नहीं होती जरुरत
रंजीत झा बताते है कि ओयेस्टर मशरूम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके उत्पादन के लिए बहुत बड़े खेत या जमीन की जरूरत नहीं पड़ती है. किसान अपने घर के किसी खाली कमरे या छोटे से स्थान में भी इसकी खेती शुरू कर सकते हैं. इसके लिए धान का पुआल जैसे कृषि अवशेषों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे किसानों को खेती शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा पूंजी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है. वहीं, बटन मशरूम की तुलना में इसके उत्पादन की प्रक्रिया भी नए किसानों के लिए अपेक्षाकृत आसान रहती है. सही तरीके से प्रशिक्षण लेकर और तापमान, नमी तथा साफ-सफाई का ध्यान रखकर किसान छोटे स्तर से इसकी शुरुआत कर सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि किसान धीरे-धीरे अपना उत्पादन बढ़ा सकते हैं और बाजार की मांग के अनुसार खेती का विस्तार कर सकते हैं.
बाजार मे मिलता है 200 रूपये कीलों भाव
बाजार में भी ओयेस्टर मशरूम की अच्छी मांग देखने को मिलती है. रंजीत झा बताते हैं कि स्थानीय बाजारों में इसकी कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है. हालांकि, बाजार भाव जगह, मौसम और मांग के हिसाब से घट-बढ़ सकता है. ऐसे में किसानों को उत्पादन शुरू करने से पहले अपने आसपास के बाजार, होटल, रेस्टोरेंट और सब्जी विक्रेताओं से संपर्क जरूर करना चाहिए. इससे तैयार मशरूम को बेचने में परेशानी नहीं होगी और किसानों को अपने उत्पाद का सही दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी.
खेती करने से पहले सही मशरुम का करें चुनाव
अगर आप भी इस नवंबर में मशरूम की खेती शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो बिना जानकारी के सीधे बटन या मिल्की मशरूम का चुनाव न करें. पहले ओयेस्टर मशरूम की खेती को समझें, प्रशिक्षण लें और छोटे स्तर पर उत्पादन शुरू करें. कम जगह, कम शुरुआती लागत और बाजार में मिलने वाले अच्छे भाव की वजह से यह खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का रास्ता खोल सकती है. सही तकनीक और बाजार की जानकारी के साथ मशरूम उत्पादन को गांव में ही एक छोटे व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है.