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पलामू की बिटिया ने बढ़ाया जिले का मान, पहली बार में पाई...


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Palamu Kajal BPSC Success Story: मेदिनीनगर की काजल गोस्वामी ने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में 29वीं रैंक पाई है. वे यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 भी पास कर चुकी हैं और अब मेन्स की तैयारी कर रही हैं. काजल ने बचपन से प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखा था, वे आईएएस बनना चाहती हैं.

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पलामू. आज के समय में बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, खेल और सामाजिक नेतृत्व जैसे हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं. इसी क्रम में, झारखंड के पलामू जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े इलाके से निकलकर भी बेटियां अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी सफलताएं हासिल कर रही हैं. इसका ताजा उदाहरण मेदिनीनगर की रहने वाली काजल गोस्वामी हैं, जिन्होंने पूरी तरह सेल्फ स्टडी के बल पर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा में 29वीं रैंक हासिल कर पलामू का नाम रोशन किया है. उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले का नाम रोशन हुआ है.

पहली बार में क्लियर किया एग्जाम
दरअसल, मेदिनीनगर निवासी व्यवसायी सुनील गोस्वामी की पुत्री काजल गोस्वामी ने अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा पास कर शानदार सफलता प्राप्त की है. काजल की प्रारंभिक शिक्षा मेदिनीनगर के सेक्रेड हार्ट स्कूल से हुई, जहां उन्होंने वर्ष 2015 में मैट्रिक उत्तीर्ण की. इसके बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई वाराणसी के सनबीम स्कूल, भगवानपुर से पूरी की. वर्ष 2020 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स ऑनर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की, जिसके बाद वह यूपीएससी की तैयारी में लग गईं.

यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं
काजल वर्तमान में यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं. उनका यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2026 भी पास हो चुका है और अब वह मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं. काजल गोस्वामी ने बताया कि आठवीं कक्षा में उनके शिक्षक विनोद सर ने उनकी लेखन क्षमता की सराहना करते हुए उन्हें यूपीएससी की तैयारी करने की प्रेरणा दी थी. तभी से उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना जन्मा. स्नातक के बाद उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की और दिल्ली में रहकर सेल्फ स्टडी को अपना मुख्य आधार बनाया.

यूपीएससी से मिली मदद
काजल ने आगे बताया कि बीपीएससी परीक्षा के लिए उन्हें केवल 20 दिनों का समय मिला था. यूपीएससी की तैयारी से मिले ज्ञान का उन्हें काफी लाभ मिला. उन्होंने टेलीग्राम के माध्यम से उपलब्ध अध्ययन सामग्री और टेस्ट सीरीज की मदद से तैयारी की. इंटरव्यू के दौरान शिक्षा व्यवस्था और छात्र-शिक्षक यूनियन से जुड़े सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया.

आईएएस बनना चाहती हैं
काजल की मां दुर्गा गोस्वामी बताती हैं कि उनकी बेटी बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और शांत स्वभाव की रही है. पढ़ाई के साथ-साथ वह घर के कामों में भी हाथ बंटाती थी. सुबह उठकर घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के बाद ही पढ़ाई करती थी. 27 वर्ष की उम्र में मिली इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. काजल की उपलब्धि आज पलामू की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है. उनका सपना आईएएस बनने का है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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