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पीएम मोदी की GEN Z वाली राखी… रक्षाबंधन पर देश की सुरक्षा...


देश की बहनों के आर्शीवाद को कलाई पर बांधकर पीएम मोदी डिप्लोमेसी का धाकड़ अध्याय शुरू करने जा रहे हैं. पीएम मोदी कल से मध्य एशिया के दौरे पर रवाना हो रहे हैं. पीएम मोदी के इस दौरे पर पूरी दुनिया की नजर होगी, क्योंकि वो SCO समिट में जा रहे हैं. वही समिट जिसमें पिछली बार मोदी पुतिन जिनपिंग की तिकड़ी ने तलहका मचा दिया था. पीएम मोदी का रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी मिलने का प्लान है. इस मुलाकात पर अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजर होगी. पुतिन के साथ मिलकर पीएम मोदी भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करेंगे. इसके अलावा पीएम मोदी उज्बेकिस्तान भी जा रहे हैं. उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी की मौजूदगी कैसे पाकिस्तान की टेंशन बढ़ाएगी ये भी आपको बताऊंगा…

उज्बेकिस्तान-किर्गिस्तान के दौरे पर पीएम मोदी

पीएम मोदी कल से चार दिनों की उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर जा रहे हैं. पीएम मोदी का ये दौरा क्यों अहम है वह बताने से पहले इस दौरे की हाईलाइट आपको बताता हूं. पीएम मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे. इसके बाद 31 और 1 सितंबर को वो किर्गिस्तान का दौरा करेंगे. किर्गिस्तान में पीएम मोदी SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.

पीएम मोदी के दौरे की सबसे बड़ी हाईलाइट SCO समिट है, क्योंकि यहां पर ही उनकी रूस के राष्ट्रपति से मुलाकात होगी. दोनों की द्विपक्षीय वार्ता भी होगी. SCO समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल होंगे. हालांकि पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति की मुलाकात को लेकर अभी कुछ साफ नहीं है.

ट्रंप को बहुत चुभा था पिछला SCO समिट

भारत, रूस, चीन के अलावा पाकिस्तान भी SCO का हिस्सा है. पिछले साल जब पीएम मोदी SCO समिट के लिए चीन गए थे, तब डॉनल्ड ट्रंप को पीएम मोदी का चीन दौरा बहुत चुभा था. इस बार अभी अगर पुतिन मोदी और जिनपिंग की तिकड़ी बनी, तो डॉनल्ड ट्रंप को फिर से झटका लग सकता है. इसके अलावा SCO समिट के जरिए भारत आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को भी घरेगा.

SCO समिट में पीएम मोदी की मौजूदगी… भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन की पिच तैयार करेगी. किर्गिस्तान में SCO समिट से पहले पीएम मोदी उज्बेकिस्तान भी जा रहे हैं. कूटनीति के लिहाज ये दौरा अहम है. मध्य एशिया तक पहुंच के लिए उज्बेकिस्तान अहम देश है. जिस तरह से पाकिस्तान ने सऊदी अरब, तुर्किए के साथ मक्का पैक्ट किया. उसके बीच पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरान बहुत अहम है.

भारत के लिए क्यों अहम उज्बेकिस्तान?

उज्बेकिस्तान मध्य एशिया के बीच में स्थित है और उसकी सीमा अफगानिस्तान से लगती है. भारत के अलावा अफ़ग़ानिस्तान के भी पाकिस्तान से रिश्ते ख़राब चल रहे हैं. ऐसे में उज़्बेकिस्तान बड़ा प्लेयर साबित हो सकता है. भारत लंबे समय से इस क्षेत्र से या इसके जरिए काम करने वाले आतंकवाद और चरमपंथी नेटवर्कों को लेकर चिंतित रहा है. ऐसे में उज्बेकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के लिए अहम है. दूसरी अहम बात कनेक्टिविटी की है, मध्य एशिया तक भारत की सीधी जमीनी पहुंच नहीं है. बीच में पाकिस्तान की अड़चन है.

इसी वजह से भारत ईरान के चाहबार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे अन्य रूट्स पर काम कर रहा है. अगर उज्बेकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत हुए तो भारत मध्य एशिया में अपना व्यापार बढ़ा सकता है. मध्य एशिया में चीन ने भी BRI (Belt and Road Initiative) के जरिये भारी निवेश किया हुआ है. उज्बेकिस्तान के साथ व्यापार, डिफेंस, टेक्नोलॉजी…और बाकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारत मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करना चाहता है.

भारत की अमेरिका से बड़ी डील

SCO समिट में पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति से मिलकर अमेरिका को भी ये मैसेज देंगे कि जितने पांव पटक लो. रूस से दोस्ती में कोई बदलाव नहीं आएगा. आप ये भी देखिए कि इधर पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति से मिलेंगे. उधर भारत अमेरिका से भी डील कर रहा है. उधर आज ही ये खबर आई है कि अमेरिका से जैवलिन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने की भी डील हो गई है.

जैवलिन एक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है. इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं. एक बार दागने के बाद मिसाइल खुद ही थर्मल टेंपरेचर से टारगेट को ढूंढ लेती है और उसे हिट करती है. इसे मुख्य रूप से टैंक और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है. इसका नया वर्जन लगभग 4 किलोमीटर तक टारगेट को भेद सकती है.

कितनी ताकतवर जैवलिन मिसाइल?

जैवलिन दो तरीके से हमला कर सकती है. पहला डायरेक्ट अटैक और दूसरा टॉप अटैक मोड… टॉप अटैक मोड में में मिसाइल ऊपर उठती है और टैंक के ऊपरी हिस्से पर हमला करती है . टैंक का फ्रंटल आर्मर आमतौर पर बहुत मजबूत होता है, जबकि ऊपर का आर्मर तुलनात्मक रूस से कमजोर होता है. इसी कमजोरी को जैवलिन टारगेट करती है.

इस मिसाइल की सबसे ज्यादा चर्चा यूक्रेन युद्ध में हुई. अमेरिका ने यूक्रेन को हजारों जैवलिन मिसाइलें दी थीं. रशियन टैक्स के खिलाफ इसका खूब इस्तेमाल हुआ है. डील के तहत भारत 100 FGM 148 जैवलिन मिसाइल राउंड्स खरीदेगा. इसके अलावा 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट भी खरीदे जाएंगे. ये डील करीब 436 करोड़ रुपये में होगी

भारत की बड़ी योजना जैवलिन को देश में बनाने की है. फरवरी 2025 में भारत डायनैमिक्स लिमिटेड और लॉकहीड मार्टिन की जैवलिन ज्वाइंट वेंचर ने भारत में निर्माण की संभावनाएं तलाशने के लिए MoU किया था. यानी भारत सिर्फ अमेरिका से हथियार खरीदेगा ही नहीं, बल्कि उसे भारत में बनाएगा



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