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Dhaniya Tamatar Chutney Recipe: झारखंड की पारंपरिक धनिया-टमाटर की चटनी स्वाद और सेहत का खजाना है. यहां पर इसको पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है. सिलबट्टे पर बनी यह चटनी विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. जो पाचन व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है. इसे चावल, रोटी के साथ खाया जाता है. यह सादगी, स्वाद और स्वास्थ्य का संगम है. जानें इसकी आसान रेसिपी.
जमशेदपुर: झारखंड की पहचान सिर्फ उसकी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और त्योहारों से ही नहीं है, बल्कि यहां के पारंपरिक खानपान से भी है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सादा, पौष्टिक और घर में आसानी से बनने वाले भोजन को प्राथमिकता देते हैं. ऐसे ही पारंपरिक व्यंजनों में धनिया पत्ती और टमाटर की चटनी का विशेष स्थान है. यह चटनी स्वाद में जितनी लाजवाब होती है, उतनी ही स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. जानिए इसको बनाने का पारंपरिक तरीका.
झारखंड के गांवों में आज भी चटनी बनाने के लिए सिलबट्टे का उपयोग किया जाता है. सिलबट्टे पर पीसी गई चटनी का स्वाद मिक्सर में बनी चटनी से बिल्कुल अलग और अधिक प्राकृतिक होता है. माना जाता है कि सिलबट्टे पर धीरे-धीरे पीसने से सामग्री के प्राकृतिक तेल और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं, जिससे स्वाद और सुगंध दोनों बढ़ जाते हैं.
जानिए इसको बनाने का पारंपरिक तरीका
इस चटनी को बनाने के लिए सबसे पहले ताजी धनिया पत्ती को अच्छी तरह धो लिया जाता है. इसके बाद एक हरी मिर्च, एक छोटा टुकड़ा अदरक, तीन से चार लहसुन की कलियां और एक या दो हल्के जले हुए टमाटर तैयार किए जाते हैं. टमाटर को चूल्हे या आग पर हल्का भून लेने से उसमें एक खास धुएंदार स्वाद आ जाता है, जो चटनी को और भी स्वादिष्ट बना देता है. अब इन सभी सामग्रियों को सिलबट्टे पर डालकर धीरे-धीरे पीसा जाता है. स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है और कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट चटनी तैयार हो जाती है. कई लोग इसमें थोड़ा नींबू का रस भी मिलाते हैं, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है.
स्वाद के साथ सेहत के लिए वरदान
यह चटनी सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है. धनिया पत्ती में विटामिन ए, सी और के भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. अदरक पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, जबकि लहसुन शरीर को संक्रमण से बचाने में सहायक माना जाता है. वहीं टमाटर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस चटनी को गर्म-गर्म चावल, रोटी, धुस्का या मड़ुआ रोटी के साथ बड़े चाव से खाते हैं. कई परिवारों में तो साधारण चावल और यह चटनी ही पूरे भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए काफी होती है.
आज जब लोग फास्ट फूड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. ऐसे समय में झारखंड की यह पारंपरिक धनिया-टमाटर चटनी हमें सादगी, स्वाद और स्वास्थ्य का अनोखा संगम देखने को देती है. यही कारण है कि यह चटनी आज भी गांवों से लेकर शहरों तक लोगों की पसंद बनी हुई है.
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