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Brinjal Cultivation: झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले श्याम 1 एकड़ में बैंगन की खेती करते हैं. सबसे खास बात यह है कि उन्होंने बताया आराम से 3 टन तक बैंगन निकल आता है और एक बैगन भी सड़ा हुआ नहीं निकालेगा. इस बात की भी गारंटी है. उन्होंने बताया कि हम खास तरह के खाद का इस्तेमाल करते हैं. मल्चिंग पेपर के साथ दो-तीन काम और किया जाता है. जिससे आपका एक भी बैगन वेस्ट नहीं जाएगा. आइये जानते हैं श्याम की खेती करने के तरीके के बारे में.
किसान श्याम बताते हैं कि बैंगन तब सड़ता है, जब मिट्टी की उर्वरा शक्ति सही नहीं होती है. पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं डाला जाता है. यही दो कारण होता हैं, तीसरा और कुछ नहीं. हम लोग सिंचाई तो करते ही हैं, साथ ही नीम खली, सरसों खली से खासतौर पर खाद बनाने का काम करते हैं. जिससे कीड़े बिल्कुल नहीं लगते और इन दोनों में थोड़ा सा गोमूत्र डाल देते हैं और इसे आप डालकर देखिए फिर कभी एक भी कीड़े नहीं लगेंगे.
किसान श्याम ने बताया कि हम लोग खासतौर पर मल्चिंग पेपर का इस्तेमाल करते हैं. इससे फायदा यह होता है की खरपतवार नहीं होते और सारे के सारे पानी से लेकर खाद जो भी कहते हैं, वह सीधा जड़ तक जाते हैं. तो कभी भी बैगन की खेती करें तो मल्चिंग पेपर के बगैर ना करें. इससे कीड़े लगने की संभावना काफी कम हो जाती है.
दूसरी बात, आप जब खेत में खेती करते हैं तो चारों तरफ से खेत को जाली से घेर दें, ताकि कोई भी पशु खेत में न आ सके. उन्होंने बताया कि कई बार कोई पशु जानवर आकर या छोटे जानवर आकर गंदगी फैला जाते हैं. इससे भी कीड़े मकोड़े लग जाते हैं. यह भी एक बड़ा कारण है. जो लोग नजरअंदाज करते हैं.
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इसलिए हमने चारों ओर जाली लगा के रखा है. इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी देते रहना है. हम लोग गर्मी के दिन में तो तीन टाइम सिंचाई करते हैं. बैगन के पौधे के लिए छोटे-छोटे स्टिक गाड़े हैं. ताकि पौधे को स्टिक का सहारा मिलता रहे और वह नीचे की तरफ ना जाए.
किसान श्याम बताते हैं कि बैंगन के पौधे जमीन में टच नहीं होने चाहिए. ऐसा हो जाता है तो दाग लग जाती है और कीड़े लगने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए स्टिक के भरोसे हम लोग ऊपर की तरफ रखते हैं. बस इतना ही कीजिए और फिर देखिए कि कैसे कीड़ा लगता है. बाकी जो आप अपना खाद इस्तेमाल करते हैं कि केचुआ या गोबर खाद वह इस्तेमाल करते रहिए.