भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

सीआईडी की चार्जशीट में तत्कालीन चेयरमैन के खिलाफ सनसनीखेज खुलासा:ख्यांगते ने आपत्ति...




झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितता की जांच कर रही सीआईडी ने तत्कालीन चेयरमैन एल. ख्यांग्ते के खिलाफ अदालत में दाखिल चार्जशीट में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। सीआईडी का आरोप है कि ख्यांग्ते ने संवैधानिक पद पर रहते हुए न सिर्फ आपराधिक साजिश के तहत एक दागी और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को संरक्षण दिया, बल्कि आपत्ति जताने वाले ईमानदार अफसरों को हटाकर अपने चहेते अधिकारियों के जरिए पेपर लीक और ओएमआर शीट छेड़छाड़ का पूरा नेटवर्क चलने दिया। सीआईडी के अनुसार जांच में खुलासा हुआ कि जब तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने टीडीपीएल एजेंसी की कार्यप्रणाली और गड़बड़ियों पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई, तो चेयरमैन ने एजेंसी पर कार्रवाई करने के बजाय परीक्षा नियंत्रक से ही सारे अधिकार छीन लिए। इसके बाद परीक्षा का पूरा काम तत्कालीन डिप्टी एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता कुमारी गुप्ता को सौंप दिया गया। गवाह रुद्र प्रताप के बयान से पुष्टि हुई है कि श्वेता कुमारी गुप्ता का दूसरे विभाग में तबादला हो जाने के बाद भी ख्यांग्ते ने ही उन्हें आयोग में रोके रखा। सीआईडी ने दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया है कि लखनऊ की एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को जेएसएससी ने घोर लापरवाही और तथ्य छिपाने के आरोप में 20 मई 2025 को तीन साल के लिए काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया था। इसके बावजूद चेयरमैन रहते हुए ख्यांग्ते ने बिना किसी वैध टेंडर प्रक्रिया के नामांकन (नॉमिनेशन) के आधार पर संवेदनशील परीक्षाओं का ठेका लगातार टीडीपीएल को दिलवाया। सरकारी लैपटॉप से डेटा डिलीट व स्क्रैच करने का आरोप सीआईडी के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को जब आयोग कार्यालय पर पहली छापेमारी हुई, तो ख्यांग्ते ने तुरंत इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे कार्यालयीन लैपटॉप व पेनड्राइव अपने साथ ले गए और उन्हें रिपेयरिंग के नाम पर भेजकर डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने (डिलीशन व स्टोरेज पर स्क्रैच) का प्रयास किया। फॉरेंसिक जांच में स्टोरेज से छेड़छाड़ के पुख्ता सबूत मिले हैं। मेमो ऑफ एविडेंस और सह-आरोपियों के बयानों में चेयरमैन और अन्य अधिकारियों के बीच टीडीपीएल एजेंसी से फाइनेंशियल अरेंजमेंट की पुष्टि हुई है। इस गोरखधंधे में अभ्यर्थियों से पीटी के लिए 5 लाख और अंतिम चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपए तक वसूले जा रहे थे। सीडीआर से खुली मिलीभगत, संदिग्धों से सीधा संपर्क सीआईडी को मिले कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) से यह साबित हुआ है कि ख्यांग्ते परीक्षा में धांधली करने वाले सिंडिकेट और एजेंसी के प्रमुख सदस्यों के सीधे संपर्क में थे। जांच में सामने आया कि सिविल सेवा पीटी परीक्षा 2026 की आधिकारिक आंसर-की जारी होने से पहले ही डिप्टी कंट्रोलर श्वेता कुमारी गुप्ता ने अपने मोबाइल से टीडीपीएल कर्मी मो. उस्मान को व्हॉट्सऐप पर भेज दिया था। वहीं एफआरओ मेन्स की आंसर बुकलेट आयोग के दफ्तर से बाहर निजी कंप्यूटरों पर पाई गई। जांच में पाया गया कि सिंडिकेट ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की 350 से अधिक और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट की 150 से अधिक ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top