गुमला|राज्य सूचना आयुक्त डॉ. तनुज खत्री से स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता आनंद किशोर पंडा ने राज्य में सूचना के अधिकार कानून की बदहाली को लेकर सवाल पूछे हैं। कहा है कि छह वर्षों के लंबे इंतजार के बाद राज्य सूचना आयोग में चार सूचना आयुक्तों ने पदभार ग्रहण कर लिया है। लेकिन इसके बावजूद आयोग में वर्षों से लंबित पड़े 23000 से अधिक आरटीआई अपीलों और शिकायतों की नियमित सुनवाई अब तक सुचारू रूप से प्रारंभ नहीं की जा सकी है। आयोग के लंबे समय तक निष्क्रिय रहने का गुमला जिले के कई जन सूचना पदाधिकारियों ने गलत फायदा उठाया है। स्थानीय आवेदकों को निर्धारित 30 दिन के भीतर सूचनाएं नहीं दी गईं। जिन मामलों में सूचना मिली भी वे काफी विलंब से। आधी-अधूरी, भ्रामक और त्रुटिपूर्ण थीं। नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ आयोग धारा 20 के तहत जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई कब शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि जिले के कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के नाम, पदनाम और संपर्क विवरण वाले नोटिस बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। वहीं सभी सरकारी विभागों के लिए यह अनिवार्य है कि वे जनहित से जुड़ी 17 प्रकार की जानकारियां अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर प्रदर्शित करें। गुमला जिले में इस नियम का खुला उल्लंघन हो रहा है।
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