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माकपा लीडरशिप का कहना है कि सभी चुनौतियों और झटकों के बावजूद सीपीआई(एम) वामपंथी विचारधारा के साथ आगे बढ़ती रहेगी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच व्यापक संवाद स्थापित करेगी.
माकपा ने कांग्रेस-भाजपा की ‘मिलीभगत’ का आरोप लगाया.
तिरुवनंतपुरम. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) ने आत्ममंथन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पार्टी की राज्य समिति ने चुनाव समीक्षा रिपोर्ट सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है और चुनावी नतीजों से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का फैसला किया है. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन को भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ाना है, इस पर अगस्त में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी. साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया गया है.
पार्टी के अनुसार, राज्यभर की लगभग 40 हजार इकाइयों ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट जमा की है. इन रिपोर्टों के आधार पर चुनावी हार के कारणों का विश्लेषण किया गया है. पार्टी ने स्वीकार किया कि चुनाव में उसे बड़ा झटका लगा और राज्य समिति हार की गंभीरता का सही आकलन करने में पूरी तरह सफल नहीं रही. पार्टी का मानना है कि भारत समेत दुनिया भर में दक्षिणपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है, जिसका असर केरल की राजनीति पर भी देखने को मिला.
पार्टी ने कहा कि एलडीएफ सरकार के कामकाज को आम तौर पर लोगों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन कुछ क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका. विशेष रूप से निर्माण क्षेत्र और पारंपरिक रोजगार से जुड़े लोगों में असंतोष देखने को मिला. कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा के वोट कांग्रेस नीत यूडीएफ को स्थानांतरित हुए, जबकि कुछ सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच अप्रत्यक्ष सहयोग भी देखने को मिला.
पार्टी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा. सीपीआई(एम) के अनुसार कांग्रेस नेताओं ने लगातार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को लेकर सवाल उठाए और राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की. पार्टी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के कुछ बयानों और कांग्रेस की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की प्राथमिकता केवल सत्ता हासिल करना है.
पार्टी ने यह भी माना कि सरकार की उपलब्धियों और कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में कमी रही. इसके अलावा, कुछ विवादित मुद्दों पर भी पार्टी ने आत्ममंथन किया. नेतृत्व ने स्वीकार किया कि समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले कुछ बयानों का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं किया जा सका, जिससे गलत संदेश गया. पार्टी ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादों के विपरीत फैसले लिए जा रहे हैं. निजीकरण को बढ़ावा देने और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कमजोर करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. कुछ प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं.
इस बीच पार्टी ने जनता से सीधे संवाद स्थापित करने के लिए “पुथुवाझिकल” नाम से एक व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी जारी की है. इसके माध्यम से आम लोग संगठन और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अपने सुझाव दे सकेंगे. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी चुनौतियों और झटकों के बावजूद सीपीआई(एम) वामपंथी विचारधारा के साथ आगे बढ़ती रहेगी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच व्यापक संवाद स्थापित करेगी.
वहीं, सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए देवास्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्माकुमार को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है. वीणा विजयन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजे गए नोटिस पर पार्टी ने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत है और वह स्वयं इसका जवाब देंगी. पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस मामले को सीपीआई(एम) से जोड़ने की किसी भी राजनीतिक कोशिश का विरोध किया जाएगा.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें