![]()
धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर डूमरजोर के समीप स्थित बाबा भूतनाथ मंदिर पिछले सात दशकों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्री अपनी यात्रा के मंगलमय होने की कामना लेकर मंदिर में शीश नवाते हैं, जबकि आसपास के गांवों के लोग सुख-दुख में आज भी बाबा भूतनाथ की शरण में पहुंचते हैं। सावन माह की पहली सोमवारी को लेकर मंदिर परिसर में विशेष उत्साह है। इसको लेकर मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है और महाभिषेक सहित विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां भी की गयी है। करीब 70 वर्ष पहले बाबा भूतनाथ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से इस मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर बनने के बाद उन्होंने यहीं रहकर जनसेवा और साधना का जीवन बिताया। मान्यता है कि बाबा के आशीर्वाद से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, जबकि सावन में हजारों भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सावन में सजता है शिव मंदिर : हर वर्ष की तरह इस बार भी पहली सोमवारी पर शिव मंदिर को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंिदर में शिवलिंग का महाभिषेक, अलौकिक शृंगार, विशेष आरती और भजन-कीर्तन होंगे। आयोजन सफल बनाने के लिए मुख्य पुजारी शंभू प्रसाद के नेतृत्व में किशन बटवाल, सुरेश, मुरारी बटवाल, बनवारी बटवाल, अनिल पांडेय, विश्वनाथ, शंकर आदि तैयारियों में जुटे हैं। चास-बोकारो गरगा नदी से जल लेकर चिड़का धाम के रवाना होते श्रद्धालु। बाबा मगन दास की समाधि पर बना मंदिर: डूमरजोर गांव में वटवृक्ष के नीचे संत बाबा मगन दास तपस्या करते थे और वहीं उन्होंने जीवित समाधि ली थी। मान्यता है कि बाबा मगन दास ने स्वप्न में बाबा भूतनाथ को इसी स्थान पर शिवलिंग स्थापित करने का निर्देश दिया। तत्पश्चात यहीं पर मंदिर का निर्माण कराया गया। तत्कालीन महंत बाबा किशोरी दास राजस्थान से आकर मंदिर की व्यवस्था संभाला। फूलों से सजाया गया डूमरजोर स्थित बाबा भूतनाथ मंदिर।
Source link