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First Greater City : भारत में ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर फरीदाबाद बन रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया का पहला ग्रेटर शहर कौन सा है. आखिर किसी शहर को ग्रेटर बनाने के पीछे क्या मकसद होता है और इसके लिए किन-किन सेक्टर्स में ग्रोथ पर जोर देना पड़ता है. भारत अपने शहरों को ग्रेटर बनाने के लिए क्या कदम उठा सकता है और उसकी क्या चुनौतियां हैं.
दुनिया का पहला ग्रेटर शहर न्यूयॉर्क है.
नई दिल्ली. ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर फरीदाबाद सहित देश में तमाम शहरों का विस्तार कर उसका नया ग्रेटर वर्जन बनाया जा रहा है. लेकिन, क्या आपको पता है कि दुनिया का पहला ग्रेटर शहर कौन सा था और उसे ग्रेटर बनाने के लिए किन-किन चीजों का विकास किया गया. ग्रेटर शहर की अवधारणा मुख्य रूप से तब शुरू की जाती है, जबकि मौजूदा शहर उसकी बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त नहीं रह जाता है. इस लिहाज से देखें तो दुनिया का वह कौन सा शहर है, जहां सबसे पहले आबादी के हिसाब से सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास किया गया.
आपको बता दें कि ग्रेटर सिटी के तहत पहली बार अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर का विस्तार किया गया था. साल 1898 में सिटी ऑफ ग्रेटर न्यूयॉर्क (City of Greater New York) बनाया गया था. तब न्यूयॉर्क शहर के आसपास की तमाम नगरपालिकाओं को मिलाकर शहर का विस्तार किया गया था. इसी तरह, दूसरा ग्रेटर शहर लंदन को बनाया गया. 1 अप्रैल, 1965 को ग्रेटर लंदन की नींव रखी गई और इस शहर का विस्तार कर आसपास के तमाम इलाकों को लंदन शहर में शामिल कर लिया गया.
5 शहरों को मिलाकर बना था ग्रेटर न्यूयॉर्क
अमेरिका ने सबसे पहले दुनिया का ग्रेटर शहर बनाया. 1 जनवरी, 1898 को 5 शहरों और क्षेत्रों को मिलाकर एक महानगर बनाया गया था. इसका मकसद सिर्फ शहर का क्षेत्रफल बढ़ाना नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, पानी, बंदरगाह, पुलिस और प्रशासन के स्तर तक बेहतर सुविधाएं विकसित करना था. तब न्यूयॉर्क में मैनहट्टन, ब्रुकलिन, ब्रॉन्क्स, क्वींस और स्टेटन आईलैंड को मिलाया गया था. इस एकीकरण से पहले तक न्यूयॉर्क का कुल क्षेत्रफल 60 वर्ग मील था, जो बाद में बढ़कर 360 वर्गमील हो गया है.
6 सेक्टर्स में ग्रोथ पर था फोकस
- सड़क नेटवर्क : ग्रेटर न्यूयॉर्क बनने के बाद मैनहट्टन को ब्रुकलिन और दूसरे क्षेत्रों से जोड़ने के लिए नए पुलों का निर्माण किया गया. इसके बाद तीन बड़े ब्रिज विलियम्सबर्ग (1903), मैनहट्टन ब्रिज (1909) और क्वींसबोरो ब्रिज (1909) में खोला गया.
- अंडग्राउंड मेट्रो : ग्रेटर न्यूयॉर्क बनने के बाद साल 1904 में पहली बार आधुनिक सब-वे लाइन शुरू की गई. भूमिगत मेट्रो चलाए जाने से मैनहट्टन और आसपास के इलाकों के बीच बड़े पैमाने पर आवाजाही संभव हो सकी.
- वॉटर सप्लाई : शहर की आबादी बढ़ी तो पानी की जरूरतें भी बढ़ने लगीं. तब बड़े जलाशय बनाने के साथ एक्वाडक्ट लाइन शुरू की ई और साल 1915 में दूरदराज के जल स्रोतों से शहर तक पानी पहुंचाया गया.
- पोर्ट और कारोबार : ग्रेटर न्यूयॉर्क के साथ न्यूयॉर्क हार्बर को भी विकसित किया गया और शहर में जहाजों की आवाजाही, माल ढुलाई और कारोबारी गतिविधियों को बेहतर बनाया गया.
- पार्क और मनोरंजन का विकास : ग्रेटर न्यूयॉर्क में तमाम पार्क और खुले स्थान के साथ मनोरंजन की सुविधाओं का भी विकास किया गया. न्यूयॉर्क का सेंट्रल पार्क पहले से ही मौजूद था, लेकिन बाद में कई और पार्क बनाए गए.
- प्रशासनिक विकास : ग्रेटर न्यूयॉर्क बनाने के लिए इसमें कई नगरपालिकाओं को मिलाया गया और एक महानगर बना. इस महानगर को बेहतर बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और टैक्स व्यवस्था को भी बेहतर बनाया गया.
भारत के लिए क्या है सबक
ग्रेटर न्यूयॉर्क शहर के मॉडल से भारत भी अपने शहरों के विकास के लिए बेहतर व्यवस्था बना सकता है. भारत की दो प्रमुख राजधानियों दिल्ली और मुंबई के आसपास ऐसा ही मॉडल विकसित किया जा रहा है. दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच बेहतर कनेक्टिवटी बनाई जा रही है. इसी तरह, मुंबई महानगर क्षेत्र का भी विस्तार किया जा रहा है और इसमें मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर बड़ा शहर बनाया जा रहा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…