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झारखंड

गिरिडीह में जहरीला मशरूम खाने से महिला-बच्चे बीमार:उल्टी की शिकायत पर अस्पताल...

गिरिडीह के तिसरी थाना क्षेत्र में जंगली मशरूम का सेवन करने से एक महिला और दो बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए। तीनों को उल्टी और घबराहट की शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तिसरी में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। जानकारी के अनुसार, तिसरी निवासी विजय यादव की 42 वर्षीय पत्नी सुनीता देवी और परिवार के दो बच्चों ने जंगल से लाए गए मशरूम का सेवन किया था। भोजन करने के कुछ ही देर बाद तीनों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिससे परिजनों में अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय निवासी विकास शर्मा ने तुरंत तीनों मरीजों को तीन पहिया वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तिसरी पहुंचाया। अस्पताल में डॉ. ज्ञानेंद्र और स्वास्थ्यकर्मी अनूप ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंच जाने से मरीजों की स्थिति अब नियंत्रण में है और उनकी लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है। डॉ. ज्ञानेंद्र ने बताया कि बरसात के मौसम में जंगलों में कई प्रकार के मशरूम उगते हैं। इनमें से कुछ खाने योग्य होते हैं, जबकि कई प्रजातियां अत्यंत जहरीली होती हैं। सामान्य लोगों के लिए इनकी सही पहचान करना मुश्किल होता है। जहरीले मशरूम के सेवन से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बेहोशी, लीवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा भी हो सकता है। Source link

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हजारीबाग में छात्र की नदी में डूबने से मौत:घर पर स्कूल जाने...

हजारीबाग के मुफ्फस्सिल थाना क्षेत्र में एक स्कूली छात्र की नदी में डूबने से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान डीएवी हजारीबाग के नौवीं कक्षा के छात्र हिमांशु राज के रूप में हुई है। वह कोर्रा के नूतन नगर में किराए के मकान में रहता था, जबकि उसका स्थायी निवास कटकमदाग के पसई गांव में है। परिजनों ने इस घटना को हत्या बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। बुधवार सुबह हिमांशु स्कूल के लिए निकला था, लेकिन वह स्कूल नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि वह मेरु निवासी अपने एक दोस्त के साथ जगदीशपुर नदी में नहाने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। विद्यालय के शिक्षक भारत कुमार ने पुष्टि की कि हिमांशु उस दिन स्कूल में अनुपस्थित था। घटना की सूचना मिलते ही मुफ्फस्सिल थाना प्रभारी मुकेश कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से छात्र को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। घटना के समय मौजूद एक बच्चा सदमे में था, जिसे उसके परिजन अपने साथ घर ले गए। हिमांशु के पिता झारखंड पुलिस में सेवारत अस्पताल में मृतक के परिजनों का बुरा हाल था। हिमांशु के पिता झारखंड पुलिस में सेवारत हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना के समय वहां तीन अन्य बच्चे भी मौजूद थे। उनके अनुसार, हादसे के बाद दो बच्चे मौके से भाग गए, जबकि एक बच्चा वहीं रुका रहा। इसी आधार पर परिजन पूरे मामले को संदिग्ध मानते हुए हत्या की आशंका जता रहे हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष और गहन जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है। वहीं, स्थानीय समाजसेवी मिथलेश सिंह ने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में लगातार डूबने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसलिए चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी और निगरानी की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। Source link

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CJP Protest Bihar | CJP Protest | रूस में बैठा था किशनगंज...

होमताजा खबरदेश रूस में बैठा था बिहार का सदाकत, फिर भी NEET प्रदर्शन में दर्ज हो गई FIR! Last Updated:July 29, 2026, 19:06 IST NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़ी एफआईआर को लेकर बिहार में नया विवाद सामने आया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में किशनगंज का रहने वाला एक युवक दावा कर रहा है कि वह पिछले चार महीने से रूस में है, फिर भी उसका नाम 24 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े केस में दर्ज कर दिया गया. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. सदाकत का दावा कि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम किशनगंज जिले में दर्ज एक एफआईआर में शामिल कर दिया गया. NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोज जनता पार्टी के आह्वान पर हुए जगह-जगह हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को लेकर बिहार में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक दावा कर रहा है कि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम किशनगंज जिले में दर्ज एक एफआईआर में शामिल कर दिया गया. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं और पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है. हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. वहीं पुलिस ने भी अब तक युवक के दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है. ‘चार महीने से रूस में हूं, फिर आरोपी कैसे बन गया?’ युवक ने इस वायरल वीडियो में अपना नाम मोहम्मद सदाकत बताया है. सदाकत का कहना है कि वह किशनगंज जिले के बहादुरगंज नगर पंचायत के वार्ड नंबर-12 का रहने वाला है. उसके मुताबिक, 24 जुलाई को LRP चौक पर NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के मामले में प्रशासन ने उसका नाम एफआईआर में जोड़ दिया है. If Mohammad Sadaqat has been living in Russia for the past four months, then the circumstances under which a case was registered against him deserve a fair and transparent investigation. Source link

झारखंड

हजारीबाग में दर्दनाक घटना, स्कूल जा रहे छात्र का नदी में मिला...

Last Updated:July 29, 2026, 19:19 IST Hazaribagh Student Suspicious Death: झारखंड के हजारीबाग में डीएवी स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र हिमांशु राज की जगदीशपुर स्थित नदी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. छात्र घर से स्कूल जाने के लिए निकला था, लेकिन स्कूल नहीं पहुंचा. बाद में उसका शव नदी से बरामद हुआ. परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. जगदीशपुर नदी में मिला छात्र का शव हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले से एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है. जगदीशपुर स्थित नदी में डूबने से डीएवी स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र हिमांशु राज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है. वहीं, परिजनों ने इस मामले में हत्या की आशंका जताई है और निष्पक्ष व गहन जांच की मांग की है. घर से स्कूल जाने के लिए निकला थाजानकारी के अनुसार, हिमांशु राज रोज की तरह घर से स्कूल जाने के लिए निकला था. परिवार को उम्मीद थी कि वह स्कूल पहुंच गया होगा. लेकिन कुछ समय बाद पता चला कि वह स्कूल नहीं पहुंचा. इसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की. काफी खोजबीन के बाद उसका शव जगदीशपुर स्थित नदी में मिला. घटना की सूचना मिलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई. पूरे मामले की जांच शुरूमामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इसके साथ ही पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस का कहना है कि मौत के कारणों का पता लगाने के लिए हर पहलू से जांच की जा रही है. परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ डूबने का मामला नहीं हो सकता. उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. उनका कहना है कि सच्चाई सामने आनी चाहिए. घटना के समय तीन बच्चे भी मौजूदबताया जा रहा है कि घटना के समय वहां तीन अन्य बच्चे भी मौजूद थे. पुलिस उनसे भी पूछताछ कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी. इस घटना के बाद एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं. इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं. निगरानी बढ़ाने की मांगलोगों ने प्रशासन से नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने, खतरनाक स्थानों की पहचान करने और निगरानी बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के उचित इंतजाम किए जाएं, तो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Hazaribagh,Jharkhand Source link

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पलामू में सुरक्षा गार्ड की हत्या में तीन आरोपी गिरफ्तार:एक का है...

मेदिनीनगर शहर के बाईपास रोड स्थित जेएमपी कॉम्प्लेक्स के नाइट गार्ड विनोद पांडेय की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त देशी कट्टा, दो जिंदा कारतूस और घटना में इस्तेमाल की गई स्कूटी भी बरामद की है। यह घटना 26 जुलाई की रात हुई थी, जब अपराधियों ने होटल के नाइट गार्ड विनोद पांडेय को सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कपिल चौधरी ने एक विशेष टीम का गठन किया था। बुधवार को पुलिस ने पोखराहा से चैनपुर के रामपुर निवासी अनुभूति सिंह उर्फ उड़ी (22), लातेहार के बारेसाढ़ के गोल्डन यादव (23) और चैनपुर के हरभोंगा निवासी चंदन कुमार उर्फ चंदन कमलापुरी (30) को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि 15 जुलाई की रात जेएमपी कॉम्प्लेक्स में एक जन्मदिन पार्टी का आयोजन किया गया था। इस पार्टी के दौरान होटल प्रबंधन और पार्टी में शामिल लोगों के बीच विवाद और मारपीट हुई थी। इस घटना में पार्टी आयोजित करने वाली पांकी की महिला उषा देवी का भाई विष्णु कुमार घायल हो गया था। गार्ड ने की थी मारपीट गिरफ्तार आरोपी अनुभूति और गोल्डन भी विष्णु के साथ उस पार्टी में मौजूद थे। उनका आरोप है कि होटल के मैनेजर के साथ गार्ड विनोद पांडेय ने भी उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की थी। इसी अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने विनोद पांडेय की हत्या की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, विष्णु के ड्राइवर चंदन कुमार के साथ मिलकर अनुभूति और गोल्डन ने हत्या की साजिश रची। 26 जुलाई की रात तीनों आरोपी स्कूटी से जेएमपी कॉम्प्लेक्स पहुंचे, जहां चंदन कुमार ने गार्ड विनोद पांडेय के सिर में गोली मार दी और सभी मौके से फरार हो गए। पुलिस जांच में सामने आया कि जन्मदिन पार्टी में आर्केस्ट्रा का कार्यक्रम था, जिसमें तीन डांसर शामिल थीं। पार्टी में शराब का भी सेवन किया गया था। होटल का मैनेजर भी शराब के नशे में था और देर रात किसी बात को लेकर मैनेजर और पार्टी में शामिल लोगों के बीच विवाद बढ़ गया, जो मारपीट में बदल गया। इसी घटना ने दस दिन बाद हत्या का रूप ले लिया। गिरफ्तार चंदन कमलापुरी पर पहले से हत्या के प्रयास, डकैती, रंगदारी और आर्म्स एक्ट सहित 15 आपराधिक मामले चैनपुर, रमकंडा और अन्य विभिन्न थानों में दर्ज हैं। Source link

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गोड्डा पुलिस ने चोरी का सामान बरामद किया:दो चोर गिरफ्तार, 6 समरसेबुल...

गोड्डा पुलिस ने चोरी के सामान की बरामदगी और दो आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने घाट मंजवारा और लुकलुकी क्षेत्र से चोरी हुए छह समरसेबुल पंप, बैटरी और इन्वर्टर सहित कई औजार बरामद किए हैं। ये चोरियां गोड्डा जिले के मुफस्सिल क्षेत्र में हुई थीं। ग्राम घाट मंजवारा और लुकलुकी स्कूल से समरसेबुल पंप चोरी हुए थे, जबकि लुकलुकी के दो घरों से बैटरी और इन्वर्टर चुराए गए थे। इन घटनाओं के संबंध में गोड्डा मुफस्सिल थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। मामलों की गंभीरता को देखते हुए, गोड्डा एसपी मुकेश कुमार ने चोरी के सामान की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष छापामारी दल का गठन करने का निर्देश दिया था। गठित छापामारी दल द्वारा सूचना संकलन के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि हरना चौक के पास दो लड़के कम दाम में बैटरी और इन्वर्टर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस की गाड़ी देखकर दोनों लड़के भागने लगे इस सूचना पर मुफस्सिल थाना प्रभारी आनंद साहा ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया और अपनी टीम के साथ हरना मोड़ पहुंचे। पुलिस की गाड़ी देखकर दोनों लड़के भागने लगे। सशस्त्र बल की मदद से एक लड़के को मोटरसाइकिल के साथ पकड़ लिया गया, जबकि दूसरा अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। पकड़े गए संदिग्ध लड़के की पहचान रतन कुमार मांझी के रूप में हुई, जो रामेश्वर मांझी का पुत्र और ग्राम माल डुमरिया, थाना गोड्डा मुफस्सिल का निवासी है। गहन पूछताछ के दौरान, आरोपी रतन कुमार मांझी ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर घाट मंजवारा और लुकलुकी गर्ल्स स्कूल से समरसेबुल तथा लुकलुकी ब्राह्मण टोला में दो घरों से बैटरी और इन्वर्टर चोरी करने की बात स्वीकार की। उसकी निशानदेही पर उसके घर से दो इन्वर्टर, एक बड़ी बैटरी और चोरी के समय इस्तेमाल किए गए औजार बरामद किए गए। इसके अतिरिक्त, आरोपी सोनू मिर्धा के पास और अन्य स्थानों से कुल छह समरसेबुल पंप भी बरामद किए गए। Source link

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Air India | टाटा एयरलाइंस कैसे बनी एयर इंडिया? JRD ने इन...

होमफोटोदेश टाटा कैसे बनी एयर इंडिया? JRD ने 4 नामों पर कराई थी वोटिंग, दिलचस्‍प है कहानी Last Updated:July 29, 2026, 18:13 IST क्या आप जानते हैं कि ‘एयर इंडिया’ नाम किसी सरकारी फैसले से नहीं, बल्कि एयरलाइन स्‍टाफ की वोटिंग से चुना गया था? 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया रखा गया. इससे पहले कंपनी के स्‍टाफ ने चार नामों में से वोट देकर ‘एयर इंडिया’ को चुना था. जानिए जेआरडी टाटा की पहली उड़ान से लेकर एयर इंडिया के नामकरण, राष्ट्रीयकरण और 69 साल बाद दोबारा टाटा समूह के पास लौटने तक की पूरी दिलचस्प कहानी. 69 साल बाद फिर टाटा के पास लौटी: करीब 69 साल तक सरकारी कंपनी रहने के बाद जनवरी 2022 में एयर इंडिया फिर से टाटा समूह के पास लौट आई. टाटा समूह ने इसे सरकार से खरीद लिया. यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे खास घटनाओं में से एक मानी जाती है. जिस कंपनी की शुरुआत जेआरडी टाटा ने की थी, वही एयर इंडिया कई दशक बाद फिर अपने मूल मालिकों के पास वापस पहुंच गई. (एआई इमेज) सरकार के पास चली गई एयर इंडिया: 1953 में भारत सरकार ने सभी बड़ी एयरलाइनों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया. इसके बाद एयर इंडिया सरकार के नियंत्रण में आ गई. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जिम्मेदारी एयर इंडिया के पास रही, जबकि घरेलू उड़ानों के लिए ‘इंडियन एयरलाइंस’ नाम की अलग सरकारी कंपनी बनाई गई. इस तरह कर्मचारियों द्वारा चुना गया ‘एयर इंडिया’ नाम देश की राष्ट्रीय एयरलाइन की पहचान बन गया. (एआई इमेज) दुनिया तक पहुंची भारत की उड़ान: 1947 में देश आजाद हुआ और उसके बाद भारत को अपनी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन की जरूरत महसूस हुई. 1948 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी और ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ बनाई. 8 जून 1948 को मुंबई से लंदन के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान रवाना हुई. इसके साथ ही एयर इंडिया ने दुनिया के विमानन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी. (एआई इमेज) Add News18 as Preferred Source on Google 29 जुलाई 1946 को मिला नया नाम: वोटिंग के नतीजे के बाद 29 जुलाई 1946 को ‘टाटा एयरलाइंस’ का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘एयर इंडिया’ कर दिया गया. इसी दिन कंपनी को एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में भी रजिस्‍टर्ड किया गया. यह भारतीय विमानन इतिहास का बड़ा पड़ाव था. अब यह सिर्फ टाटा समूह की कंपनी नहीं रही, बल्कि देश की नई पहचान के रूप में आगे बढ़ने लगी. (एआई इमेज) दूसरे दौर में एयर इंडिया बनी विजेता: पहले दौर के बाद सिर्फ दो नामों के बीच दोबारा वोटिंग कराई गई. कर्मचारियों को एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस में से एक नाम चुनना था. इस बार एयर इंडिया को 72 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 58 वोट मिले. इस तरह 14 वोटों से एयर इंडिया जीत गई. कर्मचारियों ने ऐसा नाम चुना, जो पूरे देश की पहचान बन सके. (एआई इमेज) पहले दौर में कांटे की टक्कर: वोटिंग पूरी होने के बाद जब पहले दौर के वोट गिने गए तो मुकाबला काफी दिलचस्प रहा. एयर इंडिया को 64 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 51 वोट मिले. बाकी दोनों नाम काफी पीछे रह गए. इससे साफ हो गया कि असली मुकाबला इन्हीं दो नामों के बीच है. कम अंतर होने की वजह से कर्मचारियों में अंतिम नतीजे को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई. (एआई इमेज) नाम के लिए रखे गए चार विकल्प: कंपनी ने कर्मचारियों के सामने चार नाम रखे. पहला था एयर इंडिया, दूसरा इंडियन एयरलाइंस, तीसरा ट्रांस-इंडियन एयरलाइंस और चौथा पैन-इंडियन एयरलाइंस. सभी कर्मचारियों को अपनी पसंद का नाम चुनने का मौका दिया गया. इन नामों के जरिए ऐसी पहचान बनाने की कोशिश थी, जो पूरे भारत और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सोच को भी दिखा सके. (एआई इमेज) कंपनी के कर्मचारियों से मांगी गई राय: जब नई कंपनी बनाने की तैयारी हुई तो उसके लिए नया नाम चुनने का फैसला किया गया. टाटा समूह चाहता था कि कंपनी सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान बने. इसी वजह से एक अनोखा कदम उठाया गया. कंपनी के कर्मचारियों से वोटिंग कराकर नया नाम चुनने का फैसला लिया गया. उस दौर में किसी बड़ी कंपनी में इस तरह का फैसला सभी को हैरान करने वाला था. (एआई इमेज) दूसरे विश्व युद्ध के बाद बदली सोच: द्वितीय विश्‍व युद्ध शुरू होने के साथ टाटा एयरलाइंस की उड़ानें थम गई थी. एयरलाइंस के सभी प्‍लेंस को सेना के साथ काम करने के लिए भेज दिया गया था. युद्ध खत्‍म होने के बाद पैसेंजर फ्लाइट्स का ऑपरेशन एक बार‍ फिर शुरू हुआ. एयरलाइंस की बढ़ती लोकप्रियता और रिस्‍पांस को देखते हुए कंपनी इसे सिर्फ टाटा संस का डिपार्टमेंट रखने की बजाय एक अलग सार्वजनिक कंपनी बनाने की फैसला ले लिया. (एआई इमेज) टाटा एयरलाइंस से हुई शुरुआत: भारत में हवाई यात्रा की शुरुआत 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने ‘टाटा एयरलाइंस’ के साथ की थी. शुरुआत में इसका काम कराची से मुंबई तक हवाई डाक पहुंचाना था. पहली उड़ान खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी. बाद में कंपनी ने पैंसेजर्स को भी ले जाना शुरू किया. उस समय यह टाटा समूह का ही हिस्सा थी और उसकी पहचान भी टाटा परिवार के नाम से जुड़ी हुई थी. (एआई इमेज) टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया तक का यह सफर कर्मचारियों की वोट, ऐतिहासिक फैसलों और एक राष्ट्रीय पहचान की कहानी है. जानिए कैसे बनी भारत की सबसे पहचानी जाने वाली एयरलाइन. (एआई इमेज) टाटा एयरलाइंस से हुई शुरुआत: भारत में हवाई यात्रा की शुरुआत 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने ‘टाटा एयरलाइंस’ के साथ की थी. शुरुआत में इसका काम कराची से मुंबई तक हवाई डाक पहुंचाना था. पहली उड़ान खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी. बाद में कंपनी ने पैंसेजर्स को भी ले जाना शुरू किया. उस समय यह टाटा समूह का ही हिस्सा थी और उसकी पहचान भी टाटा परिवार के नाम से जुड़ी हुई थी. (एआई इमेज) दूसरे विश्व युद्ध के बाद बदली सोच: द्वितीय विश्‍व युद्ध शुरू होने के साथ टाटा एयरलाइंस की उड़ानें थम गई थी. एयरलाइंस के सभी प्‍लेंस को सेना के साथ

झारखंड

जमशेदपुर में पहली बार होगी सोहराय पेंटिंग की वर्कशॉप, इंटरेस्टेड हैं तो...

Last Updated:July 29, 2026, 09:11 IST Jamshedpur Soharai Painting Workshop: जमशेदपुर के अरनव और अमरनाथ ने सोहराय पेंटिंग की वर्कशॉप शुरू की है. उनकी कोशिश है कि झारखंड की इस विलुप्त होती कला को फिर से जीवित किया जाए और युवाओं को इससे परीचित कराया जाए. 9 अगस्त को कैफे रीगल में पहली वर्कशॉप आयोजित होगी. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. झारखंड की पारंपरिक और विश्व प्रसिद्ध सोहराय पेंटिंग धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी से दूर होती जा रही है. अपनी अनूठी शैली, प्राकृतिक रंगों और आदिवासी संस्कृति की पहचान मानी जाने वाली यह कला आज संरक्षण की मांग कर रही है. इसी उद्देश्य के साथ जमशेदपुर के दो युवा अरनव और अमरनाथ एक अनोखी पहल कर रहे हैं. दोनों मिलकर पहली बार सोहराय आर्ट वर्कशॉप का आयोजन कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पारंपरिक कला को समझें, सीखें और इसे आगे बढ़ाने में अपनी भागीदारी निभाएं. फिलहाल केवल 20 को मिलेगा एडमिशनआयोजकों के अनुसार, यह उनकी पहली वर्कशॉप है. इसलिए फिलहाल इसमें केवल 20 प्रतिभागियों को ही शामिल किया जाएगा. उनका मानना है कि कम लोगों के साथ शुरुआत करने से प्रत्येक प्रतिभागी को बेहतर तरीके से प्रशिक्षण दिया जा सकेगा. वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों को सोहराय पेंटिंग का इतिहास, इसकी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी. साथ ही वे स्वयं अपने हाथों से सोहराय पेंटिंग बनाना भी सीखेंगे. प्राकृतिक रंगों का होता है इस्तेमालअरनव ने बताया कि वह एक प्रोफेशनल सोहराय आर्टिस्ट हैं और उन्हें वन स्टेट, वन आर्टिस्ट कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश में झारखंड का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी मिल चुका है. वहां उनकी कलाकृतियों को काफी सराहना और प्रोत्साहन मिला. उन्होंने बताया कि सोहराय पेंटिंग पूरी तरह प्राकृतिक रंगों से बनाई जाती है. इसमें लाल रंग गेरू मिट्टी, पीला रंग पीली मिट्टी, काला रंग कोयला युक्त मिट्टी और सफेद रंग चावल के पेस्ट से तैयार किया जाता है. यही प्राकृतिक रंग इस कला को अन्य चित्रकलाओं से अलग पहचान देते हैं. इतना लगेगा शुल्कयह विशेष सोहराय आर्ट वर्कशॉप 9 अगस्त को बिष्टुपुर स्थित कैफे रीगल में आयोजित होगी. कार्यक्रम का समय सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित किया गया है. वर्कशॉप में भाग लेने के लिए ₹649 का पंजीकरण शुल्क रखा गया है. इस शुल्क में प्रतिभागियों को कैनवस, ब्रश, पेंटिंग सामग्री, रिटर्न गिफ्ट, सहभागिता प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) और रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराया जाएगा. आयोजकों का कहना है कि यह केवल एक पेंटिंग वर्कशॉप नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है. अगर लोगों का अच्छा सहयोग मिला, तो भविष्य में इस तरह की और भी वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी. रजिस्ट्रेशन लिंक:https://forms.gle/bKhaAjY3XtZAiWCG7 About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की … और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

झारखंड

गंदगी फेंकने को लेकर दो पक्षों में हुई मारपीट

बोकारो | पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के बांधगोड़ा चौक के पास एक दुकान की गंदगी सड़क किनारे फेंकने को लेकर मारपीट हो गई। बताया जाता है कि एक होटल संचालक अपनी दुकान की सफाई करने के बाद गंदगी सड़क किनारे फेंक रहा था। इस दौरान वहीं से गुजर रहे एक व्यक्ति ने उसे ऐसा करने से रोका तो होटल के कर्मियों ने उसके साथ गाली-गलौज किया और उसे भाग जाने की धमकी दी। इस पर उक्त व्यक्ति ने उसे ​चास नगर निगम को इसकी शिकायत करने की बात कही। इसके बाद होटल के कई कर्मी आगे आ गए और उक्त व्यक्ति को धमकी देते हुए धक्का-मुक्की करने लगे। यह देखकर आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। वहीं शिकायतकर्ता के कई समर्थक आ गए और होटल संचालक व उसके कर्मियों से बहस होने लगी। लोगों की भीड़ जुटने पर होटल संचालक ने कचरा सड़क पर नहीं फेंकने की बात मानी। इसके बाद मामला शांत हुआ। Source link

शिक्षा

St Stephens College Delhi Dress Code Controversy

Hindi News Career St Stephens College Delhi Dress Code Controversy | Students Oppose Shorts Ban 2 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में नए एकेडमिक सेशन के लिए नया ड्रेस कोड तय किया है। इसके तहत स्टूडेंट्स को क्लासरूम और कैंपस के कई दूसरे हिस्सों में शॉर्ट्स पहनने के लिए मना किया गया है। कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर सुसेन एलिया ने 26 जुलाई को यह नोटिस कैंपस रेगुलेशंस एंड गाइडलाइंस के नाम से जारी किया है। इसमें सभी जूनियर मेंबर्स को कैंपस में इन नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया गया है। छात्रों ने कहा – यह मोरल पुलिसिंग कॉलेज द्वारा जारी किए गए नोटिस के अनुसार क्लासरूम, ट्यूटोरियल, लैब, लाइब्रेरी, डाइनिंग हॉल, असेंबली हॉल और चैपल में शॉर्ट्स पहनने पर रोक लगाई गई है। 28–29 जुलाई को नए सत्र की शुरुआत पर कई छात्र जानबूझकर शॉर्ट्स पहनकर कॉलेज पहुंचे और इस नियम का विरोध किया। प्रदर्शन करने वाले छात्रों का कहना है कि यह “मोरल पुलिसिंग” है और छात्रों की पर्सनल चॉइस में दखल देना है। कुछ प्रोफेसर का कहना है कि पहले कुछ क्षेत्रों में अनौपचारिक रूप से शॉर्ट्स पहनने की मनाही थी लेकिन पहली बार इसे लिखित निर्देश के रूप में जारी किया गया है। इस फैसले का ज्यादा असर खिलाड़ियों पर छात्रों के विरोध के बाद कॉलेज में ड्रेस कोड और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ गई है कॉलेज के इस नियम का असर सबसे ज्यादा स्पोर्ट्स टीमों के खिलाड़ियों पर पड़ता है, जो सुबह की प्रैक्टिस के लिए ऑफिशियल स्पोर्ट्स किट में आते हैं। आमतौर पर ये स्टूडेंट्स शॉर्ट्स पहनकर ही प्रैक्टिस के लिए आते हैं। इसके चलते इन्हें डाइनिंग हॉल में एंट्री नहीं दी जाती है। इस नियम का उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य कैंपस में अनुशासन, सम्मानजनक माहौल और संस्थान की परंपराओं को बनाए रखना है। नोटिस में छात्रों से सहयोग की अपील करते हुए कहा गया है कि सभी मिलकर कॉलेज का वातावरण गरिमामय बनाए रखें। कुछ लोगों ने कहा कि कॉलेज को अनुशासन और संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए ड्रेस कोड तय करने का अधिकार है। वहीं अन्य लोगों ने इसे छात्रों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गैर जरूरी प्रतिबंध बताया। ये खबर भी पढ़ें… JPSC की 9 परीक्षाएं रद्द:ब्लैक लिस्टेड एजेंसी से परीक्षा कराने का आरोप, CID जांच के बाद आयोग के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में चल रहे विवाद के बीच आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते का इस्तीफा राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

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