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वित्त मंत्री ने लौटाईं सुरक्षा गार्ड और कारकेड की गाड़ियां:एक अतिरिक्त वाहन...

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा में तैनात सभी कर्मियों और काफिले की तीन गाड़ियां शुक्रवार को लौटा दी हैं। वह अब बिना सुरक्षा के ही क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। बिना सुरक्षाकर्मियों के ही सुबह मंत्री पहले खेल गांव स्टेडियम एक कार्यक्रम में पहुंचे और फिर वहां से प्रोजेक्ट भवन सचिवालय गए। यह कदम राज्य सरकार द्वारा सुरक्षाकर्मियों के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध न कराए जाने के बाद उठाया गया है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। डीजीपी को लिखा था पत्र यह घटनाक्रम तब शुरू हुआ, जब मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कुछ दिनों पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने सुरक्षा गार्डों के आवागमन के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने की मांग की थी। मंत्री का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में सुरक्षाकर्मियों को आने-जाने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। डीजीपी की ओर से इस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया न मिलने से मंत्री किशोर नाराज हो गए। इसी नाराजगी के कारण उन्होंने यह कदम उठाया और अपनी सुरक्षा व्यवस्था वापस कर दी। 16 पुलिस जवानों के लिए तीन वाहन 29 जून को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर डीजीपी को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘मैंने आपको 21 अप्रैल को ही सूचित किया था कि मेरी सुरक्षा के लिए कुल 16 पुलिस बल उपलब्ध कराए गए हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘पत्र के माध्यम से मैंने यह भी बताया था कि मात्र तीन सरकारी वाहनों में 16 पुलिस बलों को समायोजित करने में परेशानी होती है। वाहनों में पुलिस के जवानों को ठूंस कर बिठाना सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से उचित प्रतीत नहीं होता है। मैंने आवश्यकतानुसार 4 वाहनों के आवंटन के लिए आपको पत्र लिखा था, लेकिन इसका कोई उत्तर नहीं मिला। इसी बीच, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव पंकज कुमार सिंह द्वारा पुलिस महानिरीक्षक (प्रोविजन), महानिदेशक एव पुलिस महानिरीक्षक का कार्यलय के ज्ञापांक: 79/टी एस 11 अक्टूबर 20222 के आलोक में नोटिस निर्गत करते हुए कहा कि एक वाहन पुलिस मुख्यालय को वापस करने के लिए उपलब्ध कराया जाए। संयुक्त सचिव, वित्त विभाग द्वारा मेरे आप्त सचिव को दिए गए नोटिस मेरे लिए शर्मिंदगी का विषय है। अत: मैं वाहन सहित पुलिस बलों को वापस कर रहा हूं। Source link

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जांच पूरी होने तक चुप रहें आरोपी, करूर भगदड़ केस में सुप्रीम...

होमताजा खबरदेश जांच पूरी होने तक चुप रहें आरोपी, करूर भगदड़ केस में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK Last Updated:July 03, 2026, 17:32 IST करूर भगदड़ मामले की जांच फिलहाल सीबीआई के पास है और यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है. डीएमके की इस नई याचिका ने सीएम विजय के लिए परेशानी बढ़ा दी है. करूर रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी. (पीटीआई) नई दिल्ली. करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु की राजनीति अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर मांग की है कि मामले की जांच पूरी होने तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुना और अन्य आरोपियों को इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए. आर.एस. भारती ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करूर भगदड़ मामले की जांच कर रही है और ऐसे समय में आरोपियों द्वारा सार्वजनिक टिप्पणियां करना जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जांच पूरी होने तक सभी आरोपियों की सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगाई जाए. याचिका में यह भी मांग की गई है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य आरोपी पीड़ित परिवारों से सीधे संपर्क या मुलाकात न करें, क्योंकि इससे जांच की दिशा प्रभावित होने या गवाहों पर दबाव पड़ने की आशंका पैदा हो सकती है. डीएमके नेता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह लंबित करूर भगदड़ मामले की सुनवाई में उन्हें हस्तक्षेपकर्ता (इंटरवीनर) के रूप में शामिल करने की अनुमति दे और जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे. डीएमके की इस नई याचिका ने मामले को एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ दे दिया है. LiveLaw के अनुसार, यह अर्ज़ी उस स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) में दायर की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर, 2025 के अपने आदेश के ज़रिए करूर में 27 सितंबर, 2025 को हुई भगदड़ की जांच CBI को सौंप दी थी. इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक कमेटी कर रही है. तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की एक जनसभा के दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई और 142 लोग घायल हो गए. अर्जी में राज्य की शुरुआती जांच का ज़िक्र है, जिसमें घटना के लिए कई वजहें बताई गई हैं: उम्मीद से कम भीड़ की जानकारी देना, बताई गई संख्या से ज़्यादा कार्यकर्ताओं का जुटना, विजय का देर से पहुंचना, बुनियादी सुविधाओं की कमी, पुलिस के सुरक्षा निर्देशों का पालन न करना और पहले से ही खचाखच भरी जगह पर कैंपेन गाड़ी का ले जाना. याचिका में कहा गया है कि जिन लोगों के खिलाफ़ पहले चार्जशीट दाखिल की गई थी, उनमें से कई अब 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु कैबिनेट के सदस्य हैं. इसमें यह भी बताया गया है कि CBI ने मुख्यमंत्री विजय और TVK के कई नेताओं से पूछताछ की है और जांच अभी भी जारी है. भारती ने मंत्री आधव अर्जुन की 2 जुलाई, 2026 की कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है. इन टिप्पणियों में उन्होंने कहा था कि करूर त्रासदी का “हिसाब चुकता करना” बाकी है और पिछली DMK सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने “पुलिस के ज़रिए करूर के लोगों की जान ली.” About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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एक परिवार के 5 लोगों की रहस्यमयी मौत के बाद दहशत में...

Last Updated:July 03, 2026, 09:35 IST Palamu Sikka Village Terrorized By 5 Deaths: पलामू के सिक्का गांव में एक ही परिवार के 5 सदस्यों की रहस्यमयी मौत के बाद से पूरे गांव में डर और दहशत का माहौल है. शाम ढलते ही गांव में सन्नाटा पसर जाता है, लोग घरों में कैद हो जाते हैं. दरअसल एक ही परिवार के पांच लोगों की इन मौतों के पीछे पुलिस अभी तक ठीक वजह नहीं बता पायी तो लोगों ने इसे अनहोनी से जोड़ दिया. किसी के पास इस सवाल का जवाब नहीं है कि ये मौतें कैसे हुईं पर हर कोई डर में है. ख़बरें फटाफट पलामू. झारखंड के पलामू जिले का एक गांव इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है. आखिर पलामू के सिक्का गांव में ऐसा क्या हो रहा है कि शाम ढलते ही पूरा गांव सन्नाटे में डूब जाता है? आखिर वह कौन-सी वजह है, जिसने लोगों की रातों की नींद छीन ली है? एक ही परिवार के पांच सदस्यों की रहस्यमयी मौत के बाद गांव में ऐसा खौफ पसरा है कि लोग सूर्यास्त होते ही घरों में खुद को कैद कर लेते हैं. हालांकि किसी के पास मौत की असली वजह का जवाब नहीं है, लेकिन अफवाहों और अंधविश्वास ने लोगों के मन में ऐसा डर पैदा कर दिया है कि गांव की सामान्य जिंदगी पूरी तरह बदल गई है. हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है – आखिर इन मौतों के पीछे सच क्या है? रहस्यमयी मौतों के बाद गांव में पसरा सन्नाटादरअसल, पलामू जिले के पड़वा प्रखंड अंतर्गत सिक्का गांव इन दिनों भय और अनिश्चितता के माहौल से गुजर रहा है. एक ही परिवार के पांच लोगों की रहस्यमयी बीमारी से हुई मौत के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें फैल रही हैं. इसका असर यह है कि गांव की सामान्य दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है. शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते हैं लोगग्रामीण ने बताया कि अब सूरज डूबने के बाद गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. बाजार की अधिकांश दुकानें समय से पहले बंद हो जाती हैं और गलियां सुनसान हो जाती हैं. लोग अपने घरों के दरवाजे भीतर से बंद कर लेते हैं. रात के समय कोई भी व्यक्ति अकेले सोने की हिम्मत नहीं करता. परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर या एक ही कमरे में रात बिताते हैं. गांव में रात के समय बाहर निकलना लगभग बंद हो चुका है. ओझा-गुणी और तंत्र-मंत्र की चर्चाओं ने बढ़ाई दहशतग्रामीणों ने बताया कि मौत के स्पष्ट कारण सामने नहीं आने से गांव में अंधविश्वास तेजी से फैलने लगा है. कुछ लोग इसे तांत्रिक शक्ति या किसी अदृश्य प्रकोप से जोड़कर देख रहे हैं. बुजुर्गों का कहना है कि लोगों के मन में एक अनजाना भय बैठ गया है. वहीं, विशेष रूप से उस रास्ते और उपेंद्र महतो के घर के आसपास लोग जाने से भी बच रहे हैं, जहां यह दुखद घटना हुई थी. दिन के समय भी वहां सन्नाटा देखने को मिल रहा है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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डकैती की साजिश नाकाम, दो अपराधी गिरफ्तार:अवैध हथियार और जिंदा कारतूस बरामद,...

देवघर के कुंडा थाना पुलिस ने डकैती की बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए दो अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से अवैध हथियार और जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई चांदीडीह-सरकंडा जंगल में की गई, जहां अपराधी डकैती की योजना बना रहे थे। पुलिस को 2 जुलाई की रात गुप्त सूचना मिली थी कि चांदीडीह रोड स्थित पुल के पास चांदीडीह-सरकंडा जंगल में छह अपराधी हथियारों के साथ किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। टीम ने जंगल में घेराबंदी कर दो अपराधियों को मौके से दबोच लिया। हालांकि, अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर चार अन्य आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और पूरे गिरोह के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है। गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान चांदीडीह बसमत्ता निवासी अविनाश साह (22) और कुरमाटांड़ निवासी अमर पासवान (26) के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला कि सभी आरोपी डकैती की योजना बनाने के लिए एकत्र हुए थे। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पहले भी डकैती, लूटपाट और छिनतई जैसी कई घटनाओं को अंजाम दे चुका है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक लोहे का देसी कट्टा, 8 एमएम केएफ अंकित दो जिंदा कारतूस, दो मोबाइल फोन और तीन मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। Source link

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सबिली मस्जिद में नई कमेटी विवाद, सदस्य घायल:जुमे की नमाज के बाद...

धनबाद रेलवे स्टेशन के पास स्थित सबिली मस्जिद में नई कमेटी के गठन को लेकर चल रहा विवाद शुक्रवार को हिंसक झड़प में बदल गया। जुमे की नमाज के बाद हुई इस घटना में नई कमेटी के सदस्य वाजिद खान गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर पर गहरी चोट आई है। घायल वाजिद खान ने आरोप लगाया कि नमाज के दौरान मौलाना ने लोगों को उकसाया, जिसके बाद उन पर हमला किया गया। उन्होंने निसार खान के पुत्र सहजान खान पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। वाजिद खान ने यह भी दावा किया कि हमले के दौरान मस्जिद परिसर में उनके कमरे से करीब डेढ़ लाख रुपए नकद और लगभग चार लाख रुपए मूल्य का सामान चोरी कर लिया गया। पहले भी हुआ था नई कमेटी का विरोध वाजिद खान के अनुसार, वक्फ बोर्ड और कल्याण विभाग ने 1 अप्रैल को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कोर्ट के आदेश के आधार पर 11 सदस्यीय नई कमेटी को मस्जिद का प्रबंधन सौंपा था। उस समय भी नई कमेटी का विरोध हुआ था, लेकिन प्रशासन की मौजूदगी में कमेटी को जिम्मेदारी दी गई थी। वाजिद खान खुद को मस्जिद की जमीन का मालिक बताते हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से मस्जिद की जमीन का मालगुजारी भरते आ रहे हैं। कोर्ट के फैसले के बाद ही नई कमेटी को जिम्मेदारी मिली है। उनका आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर उन पर हमला कराया गया। इधर, घटना की सूचना मिलने पर धनबाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायल वाजिद खान को इलाज के लिए अस्पताल भेजा। धनबाद थाना प्रभारी मनोज पांडेय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। Source link

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मैंगो डिप्लोमेसी की वापसी! कूटनीति की मिठास और भरोसे की कसौटी… भारत-बांग्लादेश...

नई दिल्ली. ढाका से कोलकाता और अगरतला तक आम की मिठास जरूर पहुंची है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मिठास भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में घुली कड़वाहट को भी कम कर पाएगी? बांग्लादेश सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा को आम भेजना महज एक मौसमी सौजन्य नहीं, बल्कि एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है. इसे दक्षिण एशियाई राजनीति में एक बार फिर ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल,बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में पहले जैसी सहजता नहीं रही. शेख हसीना सरकार के हटने के बाद भारत और अंतरिम सरकार के बीच विश्वास का संकट पैदा हुआ. सबसे बड़ा कारण रहा बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों पर लगातार हुए हमले. भारत ने कई मौकों पर इन घटनाओं पर चिंता जताई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की. इससे दोनों देशों के संबंधों में स्वाभाविक रूप से तनाव बढ़ा. इसके बाद तारिक़ रहमान की अगुवाई में बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार बनी और उसने भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए. ऐसे माहौल में आम भेजना केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश भी है. दक्षिण एशिया में फलों, खासकर आम, के जरिए कूटनीति का लंबा इतिहास रहा है. पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक कई देशों ने समय-समय पर इसे रिश्तों में गर्मजोशी लाने के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया है. आम को यहां केवल फल नहीं, बल्कि सद्भाव, संवाद और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मैंगो डिप्लोमेसी से रिश्तों में आई दरार नहीं भर सकती. भारत की सबसे बड़ी चिंता बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा है. जब तक वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर प्रभावी रोक नहीं लगती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक विश्वास बहाली मुश्किल रहेगी. नई दिल्ली लगातार यह संकेत देती रही है कि दोनों देशों के संबंध केवल सांस्कृतिक या आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भी टिके हैं. दूसरी ओर, बांग्लादेश भी अच्छी तरह समझता है कि भारत उसके लिए केवल पड़ोसी नहीं, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदारों में से एक है. व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी एक-दूसरे पर निर्भर है. ऐसे में ढाका के लिए भारत के साथ रिश्तों को सामान्य रखना उसकी अपनी राष्ट्रीय आवश्यकता भी है. यही कारण है कि मैंगो डिप्लोमेसी को एक “सॉफ्ट सिग्नल” के रूप में देखा जा रहा है. यह संवाद शुरू करने का माध्यम हो सकता है, लेकिन रिश्तों की वास्तविक मरम्मत के लिए ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति, पारस्परिक विश्वास और जमीनी स्तर पर सकारात्मक कदम जरूरी होंगे. कुल मिलाकर, आम की यह टोकरी कूटनीति की भाषा में एक सकारात्मक पहल जरूर है, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों की मिठास केवल आम से नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों पर ईमानदार कार्रवाई से लौटेगी. फिलहाल यह पहल संकेत देती है कि दोनों देशों के बीच संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन उन्हें फिर से पूरी तरह खोलने के लिए सिर्फ मिठास नहीं, बल्कि भरोसे की भी जरूरत होगी. मैंगो डिप्लोमेसीएक जुलाई को विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा को “सद्भावना के तौर पर” हिमसागर और आम्रपाली प्रजाति के आम भेजे हैं. स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक बांग्लादेश की ओर से दोनों मुख्यमंत्रियों को कुल 1,100 किलोग्राम आम भेजे गए जिनमें से 500 किलोग्राम आम कोलकाता और 600 किलोग्राम आम अगरतला भेजे गए हैं. अधिकारी ने बताया कि यह खेप सोमवार को बांग्लादेश के बेनापोल और अखौरा स्थलीय बंदरगाह के जरिए दोनों भारतीय राज्यों तक पहुंचीं. बांग्लादेश 2021 से ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आम भेजता रहा है, लेकिन 2024 में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि उस समय सड़क पर हुए विरोध-प्रदर्शनों में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. हालांकि, इसके बाद बनी मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने 2025 में भारत के प्रधानमंत्री को आम भेजे थे, लेकिन इस साल उन्हें आम भेजने की कोई खबर अब तक सामने नहीं आई है. Source link

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जमशेदपुर का ये इलाका है फूड हब! स्टेशन के बाहर 50 मीटर...

होमफोटोलाइफ़फूड जमशेदपुर का ये इलाका है फूड हब! स्टेशन के बाहर 50 मीटर में मिलेंगी 50 दुकानें Last Updated:July 03, 2026, 10:44 IST Jamshedpur Famous Food Shops: जमशेदपुर के टाटानगर स्टेशन के बाहर 50 मीटर पर यात्रियों के लिए स्वादिष्ट और विविध भोजन के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें लिट्टी-चोखा, फास्ट फूड और पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं. यहां स्वाद के दीवानों की हमेशा लाइन लगी रहती है. आइये जानते हैं यहां आपको क्या-क्या मिल सकता है. झारखंड के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल टाटानगर स्टेशन से हर दिन हजारों यात्री देश के अलग-अलग शहरों के लिए सफर करते हैं. कई यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेन होती है, जबकि कई बार ट्रेनें घंटों लेट भी हो जाती हैं. ऐसे में लोगों को स्टेशन परिसर में लंबा समय बिताना पड़ता है. यात्रा के दौरान सबसे बड़ी जरूरत अच्छे और स्वादिष्ट भोजन की होती है, लेकिन अक्सर यात्री स्टेशन के अंदर उपलब्ध सीमित मेनू से संतुष्ट नहीं हो पाते. ऐसे में वे कुछ अलग और ताजा खाने की तलाश करते हैं. यदि आप भी टाटानगर स्टेशन पर हैं और अच्छा भोजन ढूंढ रहे हैं, तो आपको ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है. स्टेशन के मुख्य द्वार से बाहर निकलते ही मात्र 50 मीटर की दूरी पर खाने-पीने की कई बेहतरीन दुकानें मौजूद हैं. यहां सुबह से लेकर देर रात तक यात्रियों की भीड़ लगी रहती है. खास बात यह है कि यहां हर वर्ग और हर बजट के लोगों के लिए खाने के कई विकल्प उपलब्ध हैं. स्टेशन रोड पार करते ही सबसे पहले आपको बिहार और झारखंड का प्रसिद्ध व्यंजन लिट्टी-चोखा देखने को मिलेगा. इसके साथ सत्तू का शरबत और सत्तू से बने अन्य व्यंजन भी आसानी से मिल जाते हैं. सुबह के समय यहां गर्मागर्म आलू पराठा और दही का स्वाद लेने के लिए लोगों की अच्छी-खासी भीड़ जुटती है. कई यात्री अपनी ट्रेन का इंतजार करते हुए नाश्ते का आनंद लेते नजर आते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google जो लोग फास्ट फूड पसंद करते हैं, उनके लिए भी यहां कई विकल्प मौजूद हैं. चाऊमीन, फ्राइड राइस, मंचूरियन और अन्य इंडो-चाइनीज व्यंजन आसानी से उपलब्ध हैं. युवा वर्ग और छात्र इन दुकानों पर सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं. कम कीमत में भरपेट भोजन मिलने के कारण यह क्षेत्र यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय बन चुका है. दोपहर और रात के भोजन के लिए भी यहां पर्याप्त व्यवस्था है. चिकन बिरयानी, दाल-भात, सब्जी, भुजिया और अन्य पारंपरिक भोजन आसानी से मिल जाते है. कई दुकानदार ताजा भोजन बनाकर परोसते हैं, जिससे यात्रियों को घर जैसा स्वाद महसूस होता है. लंबी यात्रा पर निकलने वाले लोग अक्सर यहां से खाना पैक करवाकर भी ले जाते हैं. खाने के साथ-साथ नाश्ते और मिठाइयों की भी भरपूर व्यवस्था है. समोसा, कचौड़ी, जलेबी, रसगुल्ला और कई तरह की मिठाइयां यहां आसानी से मिल जाती हैं. यही वजह है कि टाटानगर स्टेशन के बाहर का यह इलाका यात्रियों के लिए एक छोटे फूड हब के रूप में पहचान बना चुका है. यदि आपकी ट्रेन लेट है या कनेक्टिंग ट्रेन का इंतजार करना है, तो स्टेशन से मात्र 50 मीटर दूर यह जगह स्वादिष्ट और विविधतापूर्ण भोजन का बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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पूर्वा एक्सप्रेस में महिला ने पुत्र को दिया जन्म:मधुपुर स्टेशन पर रेलवे-मेडिकल...

हावड़ा से जमुई जा रही पूर्वा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12303) में शुक्रवार को यात्रा के दौरान एक महिला यात्री ने पुत्र को जन्म दिया। प्रसव पीड़ा की सूचना मिलते ही मधुपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रशासन, आरपीएफ, जीआरपी और रेलवे अस्पताल की चिकित्सा टीम तुरंत सक्रिय हो गई। सभी विभागों के बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई से मां और नवजात को समय पर सुरक्षित चिकित्सा सुविधा मिली। मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेन में सफर कर रही महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसकी सूचना ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर को दी गई। स्टेशन मास्टर ने तत्काल रेलवे अस्पताल के सहायक मंडल चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया। ट्रेन के मधुपुर स्टेशन पहुंचने पर आरपीएफ पोस्ट के एएसआई यू. मंडल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्टेशन अधीक्षक, वाणिज्य विभाग के कर्मचारी, जीआरपी और रेलवे अस्पताल की चिकित्सा टीम भी तुरंत ट्रेन में मौजूद थी। रेलवे अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सनातन हाजरा के नेतृत्व में मेडिकल टीम जब ए-2 कोच की बर्थ संख्या 23 पर पहुंची, तब तक महिला ट्रेन के भीतर ही एक पुत्र को जन्म दे चुकी थी। चिकित्सकों ने तुरंत मां और नवजात की स्वास्थ्य जांच की और प्राथमिक उपचार दिया। महिला की इच्छा पर, बेहतर इलाज के लिए स्टेशन अधीक्षक के निर्देशानुसार, आरपीएफ और मेडिकल टीम ने पूरी सावधानी के साथ मां और बच्चे को ट्रेन से नीचे उतारा। इसके बाद, महिला के भाई मोहम्मद रियाज अंसारी, जो उसी कोच में यात्रा कर रहे थे, की मौजूदगी में मां और बच्चे को एंबुलेंस से सदर अस्पताल, मधुपुर भेजा गया। उन्हें वहां प्रसूति वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। पूछताछ में महिला ने अपना नाम फरहा नाशिन (31), पति आफताब आलम, निवासी निमारंग, थाना जमुई, जिला जमुई (बिहार) बताया। वह हावड़ा से जमुई जा रही थीं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं और चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। रेलवे प्रशासन, आरपीएफ, जीआरपी और चिकित्सा टीम की इस तत्परता की यात्रियों ने सराहना की। Source link

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पलामू में खिलौना पिस्टल से बाइक लूटने वाले तीन गिरफ्तार:लूटी बाइक, मोबाइल...

पलामू के रामगढ़ थाना क्षेत्र में 10 दिन पहले खिलौना पिस्टल दिखाकर बाइक और मोबाइल लूटने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से लूटी गई स्प्लेंडर प्लस बाइक, मोबाइल फोन, वारदात में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक और खिलौना पिस्टल बरामद की है। बेनीडीह निवासी सूरजदेव भुईयां ने 22 जून की शाम को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि तिनकोनिया मोड़ के पास बाइक सवार तीन युवकों ने उनका पीछा किया और रास्ता रोककर मारपीट की। आरोपियों ने पिस्टल दिखाकर उन्हें डराया और उनकी स्प्लेंडर प्लस बाइक तथा वीवो मोबाइल लूटकर फरार हो गए। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। सबसे पहले चंदन कुमार को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से लूटा गया मोबाइल और वारदात में प्रयुक्त पल्सर बाइक मिली। चंदन की निशानदेही पर अक्षय कुमार रजक और अंकुर कुमार को भी पकड़ा गया। पुलिस ने चैनपुर थाना क्षेत्र के भड़गांव स्थित एक रिश्तेदार के घर से लूटी गई स्प्लेंडर बाइक भी बरामद कर ली। छापेमारी के दौरान पुलिस ने खिलौना पिस्टल, चार अन्य मोबाइल फोन, लूटी गई बाइक का नंबर प्लेट, दोनों लुकिंग ग्लास, प्लास, स्क्रू ड्राइवर और दो रिंच भी जब्त किए। पुलिस के अनुसार, आरोपी लूटी गई बाइक की पहचान मिटाने की तैयारी में थे। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी रामगढ़ थाना क्षेत्र के बाघी (धोबी टोला) के निवासी हैं। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई रामगढ़ थाना प्रभारी ओमप्रकाश साह के नेतृत्व में की गई। Source link

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‘शोहरत की एक कीमत होती है’, आलिया को ट्रोलिंग पर सलाह नहीं...

Last Updated:July 03, 2026, 15:32 IST आलिया भट्ट इन दिनों अल्फा को लेकर चर्चा में हैं. फिल्म के प्रमोशन के लिए वह समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ में गईं. इसके लिए उन्हें ट्रोल होना पड़ा. इससे पहले कान्स 2026 के समय भी वह ट्रोल हुईं. अब उनके पिता महेश भट्ट ने इस पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चों को सलाह नहीं देते हैं. ज्यादा प्रोटेक्शन बच्चों को कमजोर बना देता है. ख़बरें फटाफट महेश भट्ट ने बेटी आलिया भट्ट के बारे में बात की. (फाइल फोटो) मुंबई. आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर स्टारर ‘अल्फा’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. आलिया को लेकर उनके पिता और फिल्ममेकर महेश भट्ट ने बात की. उनका मानना है कि स्टारडम के साथ आलोचना और नफरत भी आती है. इसलिए वह अपनी बेटी आलिया को ट्रोलिंग या आलोचनाओं से बचाने की कोशिश नहीं करते. उनका कहना है कि जीवन ही सबसे बड़ा शिक्षक है और हर इंसान को अपने अनुभवों से सीखना चाहिए. महेश भट्ट ने कहा कि वह अपने बच्चों को सलाह देने में विश्वास नहीं रखते. महेश भट्ट ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा,”मैं अपने बच्चों को कभी सलाह नहीं देता. वे मुझसे ज्यादा समझदार हैं. वे आज के दौर को बेहतर तरीके से जानते हैं और अपने अनुभवों से सीखेंगे. जिंदगी ही सबसे बड़ी शिक्षक है.” उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा प्रोटेक्शन बच्चों को कमजोर बना सकता है. महेश भट्ट ने कहा कि अगर वे हमेशा अपने बच्चों को बचाते रहेंगे, तो वे रियल वर्ल्ड के चैलेंजेस का सामना करना नहीं सीख पाएंगे. उन्होंने अपनी बात को एक उदाहरण से समझाते हुए कहा, “शोहरत की एक कीमत होती है. अगर आप धूप में खड़े होंगे तो धूप आपको झुलसाएगी भी. यही प्रसिद्धि का स्वाभाविक परिणाम है.” आलोचना और सराहना सेलेब्स के प्रोफेशन का हिस्साः महेश भट्ट महेश भट्ट ने कहा कि फिल्मी सितारों के लिए आलोचना और सराहना दोनों उनके प्रोफेशन का हिस्सा हैं और इससे बचा नहीं जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि वह अपने जीवन के अनुभव अपने बच्चों पर थोपना नहीं चाहते, क्योंकि हर पीढ़ी का समय अलग होता है. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया पहले से काफी बदल चुकी है और नई पीढ़ी को अपने फैसले खुद लेने चाहिए. माता-पिता केवल मार्गदर्शन दे सकते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी उनके बच्चों की जिंदगी जैसी नहीं हो सकती. महेश भट्ट ने दी पेरेंट्स को सलाह महेश भट्ट ने यह भी कहा कि माता-पिता को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि उनके बच्चे उनके अनुभवों को हूबहू अपनी जिंदगी में लागू करेंगे. समय बदलता रहता है और हर इंसान का सफर अलग होता है. इसलिए बच्चों को अपनी गलतियों और सफलताओं से सीखने का अवसर देना जरूरी है. About the Author रमेश कुमारSenior Sub Editor रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी काम करते हैं. इससे पहले हिंदीरश (पिंकविला) में एंटर…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mumbai,Maharashtra Source link

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