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झारखंड

देव और शास्त्र सहज, पर गुरु का समागम दुर्लभ : मुनिश्री

ओडिशा प्रांत से तिलैया विहार के क्रम में मुनिश्री सुयश सागर महाराज का राजधानी रांची में मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 6 बजे बिरसा चौक से हरमू रोड–किशोरगंज होते हुए भुइयां टोली मार्ग से विहार कर वे करीब 8.30 बजे अपर बाजार जैन मंदिर पहुंचे। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पाद प्रक्षालन और आरती कर अगवानी की। मंदिर पहुंचने के बाद धर्मसभा में उन्होंने कहा कि रांचीवासियों का उत्साह पिछले प्रवास जैसा ही नहीं, उससे भी अधिक दिखाई दे रहा है। आगामी चतुर्मास रांची में ही जन्मे मुनि श्री 108 ज्ञेय सागर महाराज का हो रहा है। जिन धर्म का प्राप्त होना, देव शास्त्र की भक्ति प्राप्त होना सहज है, परंतु देव शास्त्र के साथ-साथ गुरु का समागम मिलना दुर्लभ है। गुरु के समागम के बिना देव शास्त्र की बातें समझ ही नहीं आती इसलिए गुरु का स्थान अग्रणी है व सर्वोत्तम है, इसलिए अरिहंत को सर्वप्रथम स्थान मिला है। प्रवचन में पद्मपुराण के प्रसंगों का उल्लेख भी किया गया। सभा में पूर्व अध्यक्ष पूरणमल सेठी, छीतरमल गंगवाल, नरेंद्र पांड्या, उपाध्यक्ष संजय छाबड़ा, पदम गोधा, कैलाश बड़जात्या स्मिता पांड्या, मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल समेत अन्य मौजूद थे। Source link

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DU Admission Without CUET UG 2026: क्या सीयूईटी के बिना डीयू में...

Last Updated:June 27, 2026, 08:37 IST DU Admission Without CUET UG 2026: क्या दिल्ली यूनिवर्सिटी में सीयूईटी यूजी के बिना भी एडमिशन मिल सकता है? इन दिनों 12वीं पास कई स्टूडेंट्स इसी सवाल से जूझ रहे हैं. DU SOL, NCWEB और कई शॉर्ट टर्म कोर्सेस में 12वीं के मार्क्स पर मेरिट से दाखिला मिलता है. जानिए एंट्रेंस टेस्ट के बिना डीयू से पढ़ाई कैसे करें. DU Admission Without CUET: दिल्ली यूनिवर्सिटी में सीयूईटी के बिना भी एडमिशन मिल सकता है नई दिल्ली (DU Admission Without CUET UG 2026). देश के लाखों स्टूडेंट्स दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का सपना देखते हैं. जब से डीयू के रेगुलर कॉलेजों में एडमिशन के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) अनिवार्य हुआ है, तब से कंपटीशन का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ गया है. कई बार स्टूडेंट्स किसी वजह से सीयूईटी यूजी परीक्षा नहीं दे पाते या उनका स्कोर उम्मीद के मुताबिक नहीं आता. ऐसे में स्टूडेंट्स निराश हो जाते हैं कि अब दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी में कुछ ऐसे शानदार कोर्स हैं, जिनमें एडमिशन लेने के लिए सीयूईटी यूजी स्कोर की अनिवार्यता नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के इन कोर्सेस में 12वीं क्लास के रिजल्ट यानी मेरिट के आधार पर एडमिशन मिल जाता है. इसके अलावा, दूसरा ऑप्शन ‘पहले आओ और पहले पाओ’ आधार का भी है. जानिए सीयूईटी यूजी के बिना दिल्ली यूनिवर्सिटी में कैसे एडमिशन ले सकते हैं. सीयूईटी यूजी के बिना भी मिल जाएगा डीयू में एडमिशन दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज्यादातर अंडर ग्रेजुएट कोर्सेस में एडमिशन के लिए सीयूईटी यूजी परीक्षा में सफल होना जरूरी है. हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि सीयूईटी यूजी के बिना आप डीयू से पढ़ ही नहीं पाएंगे. जानिए सीयूईटी यूजी के बिना दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई का मौका कैसे मिलेगा. DU SOL: डायरेक्ट एडमिशन का सबसे बड़ा सहारा अगर रेगुलर कॉलेज में जाने का सपना पूरा नहीं हो पाया तो दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (DU SOL) बेस्ट ऑप्शन है. SOL में एडमिशन के लिए किसी एंट्रेंस एग्जाम या CUET की जरूरत नहीं होती. 12वीं पास करने के बाद सीधे अप्लाई कर सकते हैं. यहां बीए (Hons), बीकॉम (Hons), बीबीए और बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज जैसे कई कोर्स उपलब्ध हैं. SOL की डिग्री की वैल्यू भी दिल्ली यूनिवर्सिटी की रेगुलर डिग्री के बराबर ही होती है. NCWEB: छात्राओं के लिए 12वीं के मार्क्स पर डायरेक्ट एंट्री छात्राओं के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी का नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (NCWEB) बेहद शानदार विकल्प है. दिल्ली में रहने वाली छात्राएं सीयूईटी दिए बिना 12वीं के बेस्ट फोर सब्जेक्ट्स के मार्क्स के आधार पर यहां एडमिशन ले सकती हैं. NCWEB हर साल कटऑफ लिस्ट जारी करता है. इसमें केवल शनिवार और रविवार को डीयू के रेगुलर कॉलेज (जैसे हंसराज, मिरांडा हाउस) में ही क्लासेस लगती हैं. यहां से छात्राएं बीए और बीकॉम जैसे कोर्स में एडमिशन ले सकती हैं. शॉर्ट टर्म और फॉरेन लैंग्वेज कोर्स का ऑप्शन दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई नामी कॉलेज (जैसे सेंट स्टीफंस, रामजस, हंसराज और दौलत राम कॉलेज) हर साल पार्ट टाइम और शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स निकालते हैं. इनमें जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश, चाइनीज जैसी विदेशी भाषाओं और डेटा साइंस या डिजिटल मार्केटिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्स शामिल हैं. इनमें एडमिशन के लिए CUET स्कोर की जरूरत नहीं होती. कॉलेज 12वीं के नंबरों के आधार पर मेरिट लिस्ट निकालते हैं. रेगुलर डिग्री के साथ या अलग से ये कोर्स करियर को मजबूत बूस्ट दे सकते हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए कब और कैसे अप्लाई करें? बिना सीयूईटी वाले इन कोर्सेस की एडमिशन प्रक्रिया आमतौर पर जून के आखिरी हफ्ते या जुलाई से शुरू होती है. DU SOL और NCWEB के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के ऑफिशियल पोर्टल्स पर जाकर अलग से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है. वहीं सर्टिफिकेट कोर्स के लिए सीधे कॉलेजों की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना पड़ता है. फॉर्म भरते समय अपनी 12वीं की मार्कशीट और जरूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें, जिससे मेरिट बनते ही एडमिशन पक्का हो सके. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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हॉस्टल में अचानक 100 लड़कियों की बिगड़ी तबीयत, एकसाथ पहुंचीं अस्पताल, मच...

Last Updated:June 27, 2026, 08:01 IST गढ़वा में एक हॉस्टल की 100 लड़कियां शुक्रवार शाम अचानक बीमार पड़ गईं. एक-एक कर सभी को उल्टी, दस्त की शिकायत हो गई. सभी एकसाथ अस्पताल जा पहुंचीं. हॉस्टल प्रशासन में हड़कंप मच गया. हैरानी की बात यह है कि उस समय हॉस्टल में सिर्फ गार्ड मौजूद थे. कोई वार्डन या अन्य स्टाफ मौजूद नहीं था. बीमार लड़कियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. गढ़वाः झारखंड के गढ़वा जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया. खरौंधी के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शुक्रवार को अचानक 100 से अधिक छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई. एक के बाद एक छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत होने लगी. आनन-फानन में सभी को भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के अस्पताल पहुंचने से इलाके में हड़कंप मच गया. जानकारी के मुताबिक, 300 छात्राओं वाले इस हॉस्टल में शुक्रवार दोपहर छात्राओं को खाने में पुआ और चावल दिया गया था. छात्राओं का आरोप है कि मुहर्रम के कारण क्षेत्र में बिजली नहीं थी. तेज धूप में छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी का पानी बेहद गर्म हो चुका था. प्यास लगने पर उन्हें वही पानी पीना पड़ा. शाम को मुरमुरा खाने के बाद भी पीने के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं की गई. इसके कुछ ही देर बाद छात्राओं की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई. कई छात्राओं को तेज पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने लगे. सिर्फ गार्ड के भरोसे था पूरा हॉस्टलछात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में जेनरेटर होने के बावजूद पानी की मोटर नहीं चलाई गई. न ही गर्मी से राहत दिलाने की कोई व्यवस्था की गई. घटना के समय हॉस्टल में वॉर्डन और अकाउंटेंट भी मौजूद नहीं थे. पूरा छात्रावास केवल गार्ड के भरोसे चल रहा था. आरोप है कि शुरुआत में प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश की और अभिभावकों को छात्राओं से मिलने तक नहीं दिया. जब परिजनों ने हंगामा किया तो पुलिस के हस्तक्षेप के बाद हॉस्टल का मुख्य गेट खोला गया. जायजा लेने अस्पताल पहुंचे बीडीओघटना की सूचना मिलते ही भवनाथपुर के बीडीओ और अंचलाधिकारी अस्पताल पहुंचे. इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया. भवनाथपुर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला फूड प्वाइजनिंग और अत्यधिक गर्मी में दूषित या गर्म पानी पीने से जुड़ा प्रतीत होता है. सभी छात्राओं का इलाज किया जा रहा है. फिलहाल उनकी स्थिति नियंत्रण में है. हालांकि कुछ छात्राओं की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन पर डॉक्टरों की विशेष निगरानी रखी जा रही है. About the Author Mahesh Amrawanshi Journalist with a sharp focus on Bihar and Jharkhand, covering politics, crime, and trending stories with a strong ground-level perspective. Passionate about listening to stories, understanding them deeply, and…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Ranchi,Jharkhand Source link

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IndiGo’s Airbus A321 develops a sudden snag

नई दिल्ली से रांची आने वाली इंडिगो की एयरबस A321 विमान (फ्लाइट 6E 2614) और इसमें 168 पैसेंजर सवार थे। इस विमान में गुरुवार दोपहर तकनीकी खराबी के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह विमान दोपहर 2.40 बजे दिल्ली से निर्धारित समय पर रवा . यात्रियों के विरोध के बाद पायलट ने आखिरी पल में रोकी उड़ान, रनवे से लौटाया विमान एक यात्री ने बताया कि इसके बावजूद विमान को रनवे तक ले जाया गया और टेकऑफ की तैयारी शुरू कर दी गई। विमान में अंदर लगातार बढ़ती गर्मी से यात्रियों को घुटन का सामना करना पड़ा। केबिन के अंदर डेढ़ घंटे तक हालात बेहद असहज बने रहे। कई यात्रियों ने क्रू मेंबर्स से शिकायत की, जिस पर उन्हें बताया गया कि टेक-ऑफ के बाद एसी सामान्य रूप से काम कर सकता है। लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, जिससे यात्रियों में नाराजगी बढ़ गई। धीरे-धीरे विमान के अंदर माहौल तनावपूर्ण हो गया और यात्रियों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। इस दौरान क्रू मेंबर्स और यात्रियों के बीच तीखी बहस भी हुई। लेकिन जब विमान टेकऑफ के बिल्कुल करीब पहुंचा, तभी पायलट ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ान को रोकने का निर्णय लिया और विमान को रनवे से वापस लौटा दिया गया। इस फैसले के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि लंबे इंतजार और असुविधा को लेकर नाराजगी बनी रही। एयरलाइन की ओर से बताया गया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और तकनीकी खराबी की जांच की जा रही है। दोपहर 2.40 बजे दिल्ली एयरपोर्ट से उड़ान भरना था, शाम 6 बजे दूसरे विमान से भेजा गया रात 8 बजे सकुशल रांची पहुंचे यात्री एयरलाइन ने बाद में यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था की और शाम करीब 6:30 बजे सभी यात्रियों को दूसरी फ्लाइट से रांची के लिए रवाना किया गया। यह विमान रात लगभग 8 बजे सुरक्षित रूप से रांची एयरपोर्ट पर उतर गया। इधर रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों के परिजन पहले से ही बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उड़ान में देरी के कारण वे काफी परेशान रहे और लगातार एयरपोर्ट पर जानकारी के लिए पूछताछ करते दिखाई दिए। विमान टेकऑफ कर जाता तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था : रीतेश सीट नंबर 19बी में बैठे यात्री रीतेश वाढेर ने बताया कि विमान में एसी काम नहीं करने के बावजूद विमान को रनवे तक ले जाया गया और टेक-ऑफ की तैयारी की गई। इस दौरान 168 यात्री विमान के अंदर मौजूद थे और उन्हें लगातार बढ़ती गर्मी और घुटन का सामना करना पड़ा। इन डेढ़ घंटों में क्रू मेंबर्स का व्यवहार यात्रियों के प्रति काफी खराब था। वे झूठ बोल रहे थे कि विमान उड़ान भरेगा, तब एसी काम करने लगेगा। इतना ही नहीं, हमें नाश्ता में भी सिर्फ दस रुपए का फ्रूटी और मिक्चर का एक छोटा पैकेट दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि पैसेंजर खूब हंगामा नहीं करते तो रास्ते में कोई बड़ा हादसा हो सकता था। Source link

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झारखंड के 24 जिलों में बारिश-बिजली का अलर्ट:3 जुलाई तक बारिश के...

रांची सहित झारखंड के विभिन्न हिस्सों में 27 जून से तीन जुलाई तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने इस अवधि के दौरान आसमान में लगातार बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी दी है। खासकर एक जुलाई को राजधानी रांची में भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। हालांकि पलामू, चतरा और गढ़वा जैसे जिलों में फिलहाल गर्मी और उमस का असर बना हुआ है। शुक्रवार को रांची में हुई हल्की बारिश के बाद मौसम जरूर सुहावना हुआ, लेकिन उमस भरी गर्मी से लोगों को पूरी राहत नहीं मिल पाई है। बारिश में भारी कमी, सामान्य से काफी पीछे राज्य इस बार मानसून की रफ्तार धीमी रहने से राज्य में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी कम दर्ज किया गया है। एक से 26 जून तक झारखंड में औसतन 149.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 59 मिमी ही वर्षा हुई है, जो सामान्य से करीब 61 प्रतिशत कम है। राजधानी रांची में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है, जहां 158.2 मिमी के मुकाबले सिर्फ 125.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 21 प्रतिशत कम है। गढ़वा, चतरा और पलामू जैसे जिलों में तो बारिश की कमी 90 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है, जिससे किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। आकाशीय बिजली गिरने से चार की मौत राज्य में वज्रपात की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे जनजीवन पर असर पड़ रहा है। शुक्रवार को अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। लोहरदगा के बगडू थाना क्षेत्र में बकरी चरा रही एक महिला की जान चली गई। वहीं कुडू और बालूमाथ क्षेत्रों में भी दो महिलाओं और एक किशोरी की मौत वज्रपात से हुई। चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड में भी एक किशोरी की मौत ने लोगों को झकझोर दिया है। इन घटनाओं के बाद ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। प्रशासन लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है। तेज हवा और तापमान में गिरावट के संकेत मौसम विभाग ने आगामी दिनों को देखते हुए राज्य के 20 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जहां 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। वहीं गढ़वा, पलामू, चतरा और लातेहार जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। जहां 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकती है। Source link

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NCERT: बदल गई क्लास 9 की सोशल साइंस, अब गाइड नहीं, असली...

Last Updated:June 27, 2026, 07:38 IST NCERT Class 9 New Social Science Textbook 2026: एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब में कई बदलाव किए हैं. अब स्टूडेंट्स 1975-77 के आपातकाल और चुनाव आयोग के SIR अभियान के बारे में पढ़ेंगे. एनसीईआरटी ने इकोनॉमिक्स विषय का सिलेबस भी बदला है. NCERT Class 9 Social Science Textbook 2026: एनसीईआरटी ने 9वीं की किताबों में बदलाव किया है नई दिल्ली (NCERT Class 9 New Social Science Textbook 2026). एनसीईआरटी ने साल 2026-27 के सेशन से 9वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में कई बड़े बदलाव किए हैं. इस नई किताब का नाम होगा- ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 1’. यह सिर्फ किताब का नाम या सिलेबस बदलने जैसी छोटी बात नहीं है. अब बच्चों को देश, लोकतंत्र, सरकारी संस्थाओं और इकोनॉमी (अर्थव्यवस्था) को नए और प्रैक्टिकल नजरिए से समझाने की तैयारी है. एनसीईआरटी की इस नई किताब से अब 9वीं के स्टूडेंट्स भी देश की राजनीति और इतिहास के वो बड़े सेगमेंट्स जानेंगे, जो पहले सिर्फ बड़ी क्लास के बच्चों को ही पढ़ाए जाते थे. इसमें चुनाव आयोग के नए अभियानों की भी बात होगी. साथ ही देश का सबसे चर्चित दौर यानी ‘आपातकाल’ भी नए कोर्स में शामिल किया गया है. इसका मकसद यही है कि बच्चे आज के भारत को सिर्फ रटें नहीं, बल्कि बहुत गहराई से और आसानी से समझ सकें. किताबों में शामिल चुनाव आयोग का ‘SIR’ फॉर्मूला बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए एक खास अभियान चलाया था. इसे ‘विशेष गहन संशोधन’ या ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) कहा गया. इस अभियान को कक्षा 9 के चुनाव वाले चैप्टर में शामिल कर लिया गया है. इसमें चुनाव आयोग को स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था बताते हुए इसके काम समझाए गए हैं. ‘SIR’ अभियान सुनिश्चित करता है कि वोटर लिस्ट में किसी भी योग्य नागरिक का नाम न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम शामिल न हो. 9वीं के छात्र पहली बार पढ़ेंगे 1975-77 का ‘आपातकाल’ नए सिलेबस का सबसे बड़ा बदलाव है देश में लगे 1975-77 के ‘आपातकाल’ की एंट्री. इससे पहले इमरजेंसी के बारे में केवल कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की ऑप्शनल किताब में पढ़ाया जाता था. लेकिन अब इसे सेकंडरी लेवल पर भी अनिवार्य कर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि अब हर स्टूडेंट को भारतीय लोकतंत्र के उस दौर के बारे में जानना होगा, जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी. इससे बच्चों में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को लेकर बेहतर समझ डेवलप होगी. अब रटने वाली नहीं, ‘कमी और चॉइस’ वाली इकोनॉमिक्स तीसरा बदलाव अर्थशास्त्र (Economics) में किया गया है. अब तक बच्चे अर्थशास्त्र को बहुत किताबी और उबाऊ तरीके से पढ़ते थे, लेकिन अब इसे ‘कमी’ (Scarcity) और ‘विकल्पों के चुनाव’ (Choices) के इर्द-गिर्द बुना गया है. इसमें समझाया गया है कि जब रिसोर्सेस सीमित होते हैं तो कोई आम इंसान, बड़ी कंपनियां और सरकारें फैसला कैसे लेती हैं. मार्केट कैसे काम करता है और उसमें सरकार की क्या भूमिका होती है, यह भी बहुत प्रैक्टिकल भाषा में समझाया गया है. यह बदलाव बच्चों को रट्टामार पढ़ाई से दूर ले जाकर उनके सोचने-समझने का दायरा बढ़ाएगा. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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एक खेत में एक साथ दो फसल, डबल कमाई! देवघर के अंबिका...

होमताजा खबरकृषि एक खेत में दो फसल, डबल कमाई! देवघर के किसान ने ओल-पपीते से पेश की मिसाल Last Updated:June 27, 2026, 07:24 IST देवघर के किसान अंबिका कुशवाहा ने एक अनोखा मॉडल तैयार किया है. उन्होंने अपने खेत में ओल और पपीते की मिश्रित खेती की है. इससे खेत की पूरी जगह का सही उपयोग हो रहा है. इस तकनीक से उनकी आमदनी दोगुनी हो गई है. अब दूर-दूर से किसान इस सफल मॉडल को देखने आ रहे हैं. ख़बरें फटाफट देवघरः देवघर जिले के किसान अब सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं. समय के साथ खेती के तरीके भी बदल रहे हैं और किसान नई-नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इसकी एक बेहतरीन मिसाल देवघर प्रखंड के गोपीडीह गांव के रहने वाले किसान अंबिका कुशवाहा हैं. उन्होंने अपने खेत में ओल और पपीते की एक साथ खेती कर ऐसा मॉडल तैयार किया है. जिसे देखने के लिए अब दूर-दूर से किसान पहुंच रहे हैं. एक ही खेत में दो फसल लेकर वे अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं और दूसरे किसानों को भी इसी तरह की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं. क्या कहते है किसान?अंबिका कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि पहले वे भी सामान्य तरीके से खेती करते थे. धान, गेहूं और दूसरी पारंपरिक फसलों से जितनी मेहनत होती थी, उसके मुकाबले आमदनी बहुत कम होती थी.ऐसे में उन्होंने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे एक ही जमीन से ज्यादा उत्पादन मिले और आमदनी भी बढ़े. इसके बाद उन्होंने पपीते का बाग लगाया. जब पपीते के पौधे बड़े होने लगे तो उन्होंने देखा कि पौधों के बीच काफी खाली जगह बच रही है. तभी उनके मन में उस खाली जगह का उपयोग करने का विचार आया और उन्होंने वहीं ओल की खेती शुरू कर दी. आज यही फैसला उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है. पपीते की खेती फायदेमंद उनका कहना है कि पपीते के पौधों के बीच ओल लगाने से दोनों फसलों को किसी तरह का नुकसान नहीं होता.पपीता ऊपर की ओर बढ़ता है, जबकि ओल जमीन के अंदर तैयार होता है. ऐसे में दोनों फसलें एक-दूसरे की जगह नहीं घेरतीं और खेत का पूरा उपयोग हो जाता है.एक ही खेत से दो अलग-अलग फसलों की पैदावार मिलने से आमदनी भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है. बाजार में पपीते की मांग पूरे साल बनी रहती है, वहीं ओल की भी अच्छी कीमत मिल जाती है. इस वजह से सालभर आय का एक बेहतर स्रोत बना रहता है. सही समय पर करें सिंचाई अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि इस खेती में सबसे जरूरी बात समय पर देखभाल करना है. खेत में नियमित सिंचाई, खरपतवार की सफाई और जैविक खाद का इस्तेमाल करने से फसल की गुणवत्ता अच्छी रहती है. उनका कहना है कि अगर किसान शुरुआत से ही सही योजना बनाकर खेती करें और कृषि विभाग के विशेषज्ञों की सलाह लेते रहें, तो कम जमीन में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. मेहनत जरूर करनी पड़ती है, लेकिन उसका परिणाम भी उतना ही अच्छा मिलता है. मिश्रित खेती से आय हुई दोगुणा गोपीडीह के किसान अंबिका कुशवाहा की यह पहल आज इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. उनकी सफलता यह बताती है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और मिश्रित खेती का तरीका अपनाएं, तो कम जमीन से भी बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. यही वजह है कि अब कई किसान भी उनके मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं. खेती में बदलाव की यह पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने का काम कर रही है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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मोरहाबादी में 60 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण का समापन

रांची | मोरहाबादी स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में पुनर्वास महानिदेशालय और पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के तत्वावधान में 60 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण का समापन हुआ। प्रशिक्षण में जल, थल और वायु सेना के 22 सेवानिवृत्त सैनिक शामिल रहे। ले. कर्नल राबिन देव आनंद ने कहा कि पशुपालन क्षेत्र में सप्लाई-डिमांड चेन प्रबंधन को समझकर सूचित और स्मार्ट निर्णय लेना जरूरी है, ताकि प्रतिभागी उद्यम के जरिए देश के विकास में योगदान दे सकें। अमित कुमार ने पोल्ट्री और डेयरी में संभावनाओं पर तकनीकी जानकारी दी और उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई। आश्रम के सचिव स्वामी भवेशानंद ने प्रशिक्षण के बाद भी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सक्रिय रहने का आह्वान किया। Source link

झारखंड

फा. आनंद डेविड खलखो का धर्माध्यक्षीय अभिषेक 8 अगस्त को, पोप लियो...

कैथोलिक कलीसिया के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो 14वें ने रांची महाधर्मप्रांत के लिए फा. आनंद डेविड खलखो को नया सहायक धर्माध्यक्ष (ऑक्सिलरी बिशप) नियुक्त किया है। इसकी आधिकारिक घोषणा रांची स्थित संत मरिया महागिरजाघर में आर्चबिशप विंसेंट आईंद ने की है। नियुक्ति के बाद अब फादर आनंद डेविड खलखो का धर्माध्यक्षीय अभिषेक कर उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अभिषेक समारोह आठ अगस्त को सुबह नौ बजे पुरुलिया रोड स्थित लोयला मैदान में आयोजित होगा। आर्चबिशप विंसेंट आईंद उन्हें अभिषेक प्रदान कर कलीसिया की जिम्मेवारी सौंपेंगे। इसमें देशभर के बिशप, पुरोहित, धर्मबहनें और विश्वासी शामिल होंगे। फा. आनंद डेविड खलखो ने कहा कि वेटिकन (रोम) से नियुक्ति के बाद तीन महीने के भीतर धर्माध्यक्षीय अभिषेक की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। उन्होंने कहा कि सहायक बिशप के रुप में वे ग्रामीण क्षेत्रों में कलीसियाई गतिविधियों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक कल्याण के कार्यों को करने में आर्चबिशप को सहयोग करेंगे। पूरे झारखंड में अंडमान-निकोबार को मिलाकर कैथोलिक कलीसिया के कुल नौ डायसिस हैं। इनमें रांची एकमात्र आर्चडायसिस है, जिसका नेतृत्व आर्चबिशप करते हैं। फा. आनंद की नियुक्ति इसी रांची आर्चडायसिस के सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में की गई है। आठ अन्य डायसिस में दुमका, डाल्टनगंज, गुमला, हजारीबाग, जमशेदपुर, खूंटी, सिमडेगा और पोर्ट ब्लेयर आते हैं। सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषेक के दौरान फा. आनंद डेविड खलखो विशेष धर्माध्यक्षीय पोशाक धारण करेंगे, जिसे पोप लियो 14वें की ओर से रोम से भेजा जाएगा। इसके साथ बिशप पद की पारंपरिक निशानियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें सिर पर पहनने वाली विशेष ऊंची और नुकीली टोपी ‘माइटर’, भले चरवाहे का प्रतीक ‘क्रोजर’ (धर्मदंड) तथा धर्माध्यक्षीय अंगूठी शामिल है। ये सभी वस्तुएं कैथोलिक कलीसिया में बिशप के आध्यात्मिक दायित्व, नेतृत्व और सेवा का प्रतीक मानी जाती हैं। सहायक धर्माध्यक्ष बनने के बाद फा. आनंद डेविड खलखो अभिषेक के बाद उनका आधिकारिक निवास बिशप हाउस होगा, जबकि सेंट मेरी कैथेड्रल के लिए नए पल्ली-पुरोहित की नियुक्ति की जाएगी। नवनियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष फा. आनंद डेविड खलखो ने बताया कि फिलहाल भारत में पोप लियो 14वें के राजदूत की नियुक्ति नहीं हुई है। यदि अभिषेक समारोह से पहले नियुक्ति हो जाती है, तो वे समारोह में शामिल होंगे। हालांकि धर्माध्यक्षीय अभिषेक की धर्मविधि आर्चबिशप के हाथों ही संपन्न होगी, जबकि राजदूत पोप का संदेश पढ़ेंगे। Source link

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हवाई यात्रियों के लिए खुशखबरी! एयर इंडिया फिर शुरू कर सकती है...

Last Updated:June 27, 2026, 06:46 IST Air India Flight : एयर इंडिया ने कई अंतरराष्‍ट्रीय रूट पर दोबारा उड़ानें शुरू करने का संकेत दिया है. कंपनी के सीईओ ने बताया कि ईंधन की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया संकट कम होने से उड़ानों को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जा रहा है. पिछले दिनों कंपनी ने 20 फीसदी से ज्‍यादा कटौती कर दी थी. एयर इंडिया ने ईंधन के दाम बढ़ने पर उड़ानों में कटौती कर दी थी. नई दिल्‍ली. एयर इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने कहा है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष कम होने के कारण हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों में ढील और विमान ईंधन की कीमतों में नरमी का मौजूदा रुख जारी रहता है, तो एयरलाइन हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौती को वापस ले सकती है. इससे कुछ शहरों के लिए उड़ानें दोबारा शुरू की जा सकती हैं. टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन ने पिछले महीने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 27 फीसदी की कटौती की थी. ईंधन महंगा होने से विदेशी मार्गों पर परिचालन लागत बढ़ गई थी. इसके अलावा, घाटे में चल रही एयरलाइन एयर इंडिया ने ईंधन की ऊंची कीमतों के प्रभाव से निपटने के लिए घरेलू उड़ानों में भी अस्थायी रूप से 22 फीसदी की कटौती की थी. अब विल्सन ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में कहा है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष कम हुआ है. हालांकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि तनाव फिर नहीं बढ़ेगा, लेकिन मौजूदा स्थिर माहौल के कारण अधिक हवाई क्षेत्र उपलब्ध हो गया है और ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है. नई उड़ानें शुरू करने का संदेशउन्होंने कहा कि यदि यह रुझान जारी रहता है, तो हाल के महीनों में उड़ानों के कार्यक्रम में की गई कुछ कटौतियों को वापस लेने में हम सक्षम हो सकते हैं. मुझे विश्वास है कि आप सब भी मेरी तरह उम्मीद कर रहे होंगे कि ऐसा जल्द से जल्द हो. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद कई हिस्सों में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाए गए थे और विमान ईंधन की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई थी. एयरलाइन की कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी 40 फीसदी से अधिक है। हालांकि, अब ईंधन की कीमतों में कुछ नरमी आई है. बेड़े में शामिल होंगे 8 नए विमानविल्सन ने कहा कि इस साल एयर इंडिया के बेड़े में आठ और नए अथवा पुनर्निर्मित चौड़ी बॉडी वाले विमान शामिल किए जाएंगे. इनमें इस सप्ताहांत आने वाला नया बी-787-9 विमान भी शामिल है. उन्होंने कहा कि इन विमानों के शामिल होने से सेवाओं में सुधार जारी रहेगा और यात्रियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है. साथ ही नए रूट पर सेवाओं को शुरू करने में भी काफी मदद मिलेगी. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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