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झारखंड

हटिया-पुणे व हटिया एसएमवीटी ट्रेन में जल्द जुडे़गी पैंट्री कार

रांची और हटिया से चलने वाली लंबी दूरी की कई ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा नहीं होने से यात्रियों को सफर के दौरान भोजन संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को मजबूरन स्टेशनों पर बाहरी वेंडरों से खाना खरीदना पड़ता है। ऐसे में विभिन्न पैसेंजर एसोसिएशन और यात्री संगठन लगातार इन ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच कोलकाता में हुई जेडआरयूसीसी की बैठक में सदस्य अरुण जोशी की ओर से उठाए गए मुद्दे पर दक्षिण पूर्व रेलवे ने संज्ञान लिया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन संख्या 22846 हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस तथा 18637 हटिया-एसएमवीटी साप्ताहिक एक्सप्रेस में फिलहाल ट्रेन साइड वेंडिंग के माध्यम से खानपान की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन ट्रेनों में पैंट्री कार लगाने के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। रातभर की यात्रा वाली ट्रेनों में भी उठ रही पैंट्री सुविधा मांग 400 से 600 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली तपस्विनी एक्सप्रेस, हटिया-पटना और रांची-बनारस जैसी ट्रेनों में पैंट्री कार की मांग लगातार उठ रही है। यात्रियों का कहना है कि रातभर की यात्रा के दौरान गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता। तपस्विनी एक्सप्रेस से यात्रा करने वाली लिपिका गुप्ता ने बताया कि रास्ते में भोजन संबंधी असुविधा होती है और मिनी पैंट्री के जरिए मिलने वाले खाने की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रहती। वहीं, रांची- पाटलिपुत्र एक्सप्रेस के नियमित यात्री अनिमेश कुमार ने कहा कि स्टेशनों पर वेंडरों से अच्छा भोजन मिलना मुश्किल होता है। उत्सव कुमार ने कहा कि आईआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवा मदद करती है, लेकिन हर स्टेशन पर यह उपलब्ध नहीं होता। लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में हो पैंट्री की सुविधा: पैसेंजर एसोसिएशन झारखंड पैसेंजर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव प्रेम कटारूका ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर मांग की है कि रात में लंबी दूरी तय करने वाली सभी ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों को समय पर, साफ-सुथरा और उचित दर पर भोजन नहीं मिल पाता, इसलिए पैंट्री कार अनिवार्य होने से यात्रा अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित हो जाएगी। कई ट्रेनें ऐसी भी जो 400 किमी या इससे अधिक दूरी तय करती है और दोपहर में खुलती हैं। ऐसे में रात का खाना जरूरी हो जाता है। 1000 किमी. से अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों में पैंट्री नहीं यात्रियों का कहना है कि हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस, हटिया-एसएमवीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस और पु​िर्णया- आनंद विहार एक्सप्रेस जैसी 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों में भी पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। लंबी दूरी की यात्रा के बावजूद यात्रियों को भोजन के लिए साइड वेंडरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी की ट्रेनों में पैंट्री कार अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, ताकि सफर के दौरान स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके। रांची- नई दिल्ली गरीब रथ में भी पैंट्री कार नहीं है। Source link

झारखंड

रांची में 22 माह की अदिति 45 दिन से लापता:हजारीबाग में लोगों...

रांची के कोकर क्षेत्र से 45 दिन पहले लापता हुई 22 माह की बच्ची अदिति पांडे की बरामदगी की मांग को लेकर मंगलवार शाम हजारीबाग में विरोध मार्च निकाला गया। इसमें शहर के समाजसेवी, बुद्धिजीवी, युवा और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि अदिति 9 मई को अपने घर के पास से लापता हुई थी। डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ रही है। मार्च में शामिल लोगों ने तख्तियां और बैनर लेकर बच्ची की सुरक्षित वापसी की मांग की। मार्च में शामिल लोगों ने रांची पुलिस की जांच पर असंतोष व्यक्त किया। उनका आरोप है कि जांच में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है, जिससे परिवार और समाज दोनों चिंतित हैं। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि 22 माह की बच्ची का इतने लंबे समय तक लापता रहना गंभीर विषय है, जिसकी निष्पक्ष और प्रभावी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को सक्रिय कर बच्ची की तलाश तेज करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अदिति को बरामद नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों ने स्पष्ट किया कि अदिति की बरामदगी तक उनकी मांग जारी रहेगी। Source link

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शादी के सपने, बाली का प्लान और फिर मौत… कैसे होने वाली...

Last Updated:June 23, 2026, 19:17 IST पुणे के लोहागढ़ किले में 18 जून को हुई केतन अग्रवाल की मौत ने सनसनी फैला दी है. शुरुआत में केतन की मौत को हादसा माना जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में ऐसा खुलासा हुआ, जिसने सभी को चौंकने पर मजबूर कर दिया. पुलिस का दावा है कि केतन की होने वाली पत्नी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर हत्या की साजिश रची थी. आरोपी सिया ने अपने कथित प्रेमी के साथ कैसे दिया हत्‍याकांड को अंजाम जानने के लिए पढ़ें आगे… 1. शादी की तैयारियों के बीच हुआ दर्दनाक हादसा: 18 जून को पुणे जिले के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले में एक दर्दनाक घटना हुई. बिजनेसमैन के बेटे केतन अग्रवाल 400 फीट गहरी खाई में गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई. शुरुआती जांच में इसे ट्रेकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया. घटना की सूचना मिलते ही दोनों परिवार मौके पर पहुंचे. प्रारंभिक जांच के बाद लोनावला रूरल पुलिस स्टेशन में एक्सीडेंटल डेथ का मामला दर्ज किया था. उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मामला बाद में हत्या की साजिश में बदल जाएगा. 2. अनुभवी ट्रेकर होने के कारण बढ़ा शक: पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो कुछ बातें संदिग्ध लगीं. अधिकारियों को पता चला कि केतन कोई नया ट्रेकर नहीं था. वह पहले भी कई किलों और पहाड़ी इलाकों की ट्रेकिंग कर चुका था. परिवार वालों ने भी पुलिस को बताया कि केतन को ट्रेकिंग का अच्छा अनुभव था. ऐसे में उसका अचानक संतुलन बिगड़कर खाई में गिर जाना पुलिस को सामान्य हादसा नहीं लगा. यहीं से जांच की दिशा बदल गई. 3. परिवार के शक ने खोली जांच की नई राह: केतन के परिवार ने भी घटना पर सवाल उठाए. उनका मानना था कि इतना अनुभवी युवक बिना किसी वजह के खाई में नहीं गिर सकता. परिवार की आशंकाओं के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की. मोबाइल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और अन्य डिजिटल सबूत खंगाले गए. साथ ही घटनास्थल और उससे जुड़े लोगों से पूछताछ की गई. इसी दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी. Add News18 as Preferred Source on Google 4. जांच में सामने आया चेतन चौधरी का नाम: तकनीकी सबूतों और गवाहों की मदद से पुलिस की जांच सिया गोयल के करीबी दोस्त चेतन चौधरी तक पहुंची. जांच में पता चला कि सिया और चेतन एक-दूसरे को करीब एक साल से जानते थे. दोनों परिवार कारोबारी पृष्ठभूमि से जुड़े हैं. दोनों के बीच बीते एक साल से अफेयर चल रहा था. पुलिस का दावा है कि दोनों एक-दूसरे के साथ रहना चाहते थे और इसी वजह से उन्होंने केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी. 5. बाली ट्रिप में मिला था पहला संकेत: जांच के दौरान एक पुरानी घटना भी सामने आई. शादी से पहले केतन और सिया ने इंडोनेशिया के बाली में प्री-वेडिंग फोटोशूट कराने की योजना बनाई थी. इसके लिए फ्लाइट टिकट भी बुक कर लिए गए थे. लेकिन जब दोनों मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे तो केतन को अपना पासपोर्ट नहीं मिला. पासपोर्ट गायब होने की वजह से यात्रा रद्द करनी पड़ी. पुलिस को शक है कि सिया बाली नहीं जाना चाहती थी और यह घटना रिश्ते को लेकर उसकी असहमति का शुरुआती संकेत थी. 6. लोहागढ़ में रची गई कथित साजिश: पुलिस के अनुसार, 18 जून को सिया और केतन लोहागढ़ किले घूमने गए थे. इसी दौरान चेतन चौधरी भी वहां मौजूद था और दोनों का पीछा कर रहा था. पुलिस का दावा है कि पहले से बनाई गई योजना के तहत सही मौके का इंतजार किया गया. जब तीनों किले के एक सुनसान हिस्से के पास पहुंचे तो कथित तौर पर सिया और चेतन ने मिलकर केतन को खाई की ओर धक्का दे दिया. 7. 400 फीट गहरी खाई में गिरने से हुई मौत: धक्का लगने के बाद केतन करीब 400 फीट गहरी खाई में जा गिरे. गंभीर चोटों की वजह से उनकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना को हादसा दिखाने की कोशिश की गई और शुरुआत में मामला भी दुर्घटना के रूप में दर्ज हुआ. लेकिन पुलिस को मिले सबूतों ने इस कहानी को बदल दिया. पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा: पुणे ग्रामीण पुलिस के अधिकारी संदीप सिंह गिल ने बताया कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया. दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की आगे जांच जारी है. Source link

झारखंड

इलाज की जगह बना शराबियों का अड्डा..जामताड़ा के हेल्थ सेंटर को लेकर...

Last Updated:June 23, 2026, 15:58 IST ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मुरली पहाड़ी स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को अविलंब नियमित रूप से चालू कराया जाए. साथ ही यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए. साथ ही, अस्पताल परिसर में असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. चार साल से बंद पड़ा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत मुरली पहाड़ी स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह स्वास्थ्य केंद्र पिछले करीब चार वर्षों से प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रहा है. इसके कारण क्षेत्र के लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए था, वहां अब शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा है. ग्रामीणों के अनुसार, सरकार ने गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से इस हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना की थी. अस्पताल भवन पूरी तरह तैयार है और उसमें कंप्यूटर, पीसी सेटअप, इनवर्टर सहित कई आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध हैं. भवन की साफ-सफाई भी होती है, लेकिन इसके बावजूद मुख्य भवन में वर्षों से ताला लटका हुआ है. यहां नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाएं संचालित नहीं की जा रही हैं. स्वास्थ्य केंद्र के बंद रहने या पर्याप्त रूप से संचालित नहीं होने का सबसे अधिक असर आसपास के ग्रामीणों पर पड़ रहा है. छोटी-बड़ी बीमारी होने पर भी लोगों को इलाज के लिए जामताड़ा, धनबाद और अन्य दूरस्थ अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. आपातकालीन स्थिति में मरीजों को कई किलोमीटर दूर ले जाने में समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से केंद्र का समुचित उपयोग नहीं होने के कारण अस्पताल परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक, शाम होते ही यहां शराबियों का जमावड़ा लगने लगता है. इससे आसपास के लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहता है. लोगों ने प्रशासन से अस्पताल परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है. यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. इरफान अंसारी वर्तमान में झारखंड सरकार में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री हैं. ऐसे में उनके ही विधानसभा क्षेत्र में स्थित एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के वर्षों तक प्रभावी ढंग से संचालित नहीं होने के आरोप स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मुरली पहाड़ी स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को अविलंब नियमित रूप से चालू कराया जाए. साथ ही यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए. साथ ही, अस्पताल परिसर में असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. वहीं, इस मामले पर पूछे जाने पर सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने अस्पताल बंद होने की बात से इनकार किया. उन्होंने कहा कि मुरली पहाड़ी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में एएनएम और अन्य मेडिकल स्टाफ की तैनाती है तथा वे वहां आवासीय रूप से भी रहते हैं. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि केंद्र में चिकित्सकों की कमी है. सिविल सर्जन ने कहा कि राज्य स्तर से चिकित्सकों की उपलब्धता होते ही वहां डॉक्टरों की पदस्थापना कर दी जाएगी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamtara,Jharkhand Source link

झारखंड

आर्मी की ट्रेनिंग पूरी कर गांव पहुंचा जवान, भव्य स्वागत:गांव का पहला...

गिरिडीह जिले के गावां प्रखंड अंतर्गत बिरने गांव के रविदास टोला में मंगलवार को उत्सव सा माहौल रहा। गांव के पहले अग्निवीर उदय दास ट्रेनिंग पूरी कर पहली बार सेना की वर्दी में अपने घर पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। उदय दास, रविदास टोला निवासी हीराल दास के पुत्र हैं। गांव की करीब 1300 की आबादी में आज तक कोई भी युवक सेना में चयनित नहीं हुआ था। ऐसे में उदय के अग्निवीर बनने से पूरे गांव को गर्व की अनुभूति हो रही है। गांव पहुंचते ही लोगों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। पहले देखिए स्वागत से जुड़ी तस्वीरें बस स्टैंड पर पहले से लोग थे मौजूद बिरने पंचायत के मुखिया चंदन कुमार ने बताया कि उदय दास ने महाराष्ट्र के नासिक में अग्निवीर का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह ट्रेन से कोडरमा पहुंचे। वहां से बस द्वारा गावां बस स्टैंड पहुंचे, जहां गांव के लोग पहले से ही उनके स्वागत के लिए मौजूद थे। बस स्टैंड पर डीजे, ढोल-नगाड़ों और फूल-माला के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उदय को कार में बैठाकर तिरंगा यात्रा निकाली गई। गावां बस स्टैंड से लगभग 7 किलोमीटर की रैली निकालते हुए उन्हें उनके पैतृक गांव बिरने लाया गया, जहां ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई। रैली में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और डीजे के साथ भव्य रैली निकाली गई, जिसमें उदय हाथ में तिरंगा लेकर वाहन पर खड़े होकर लोगों का अभिवादन करते नजर आए। रैली में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में जुलूस निकाला गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में खासा उत्साह देखा गया। बच्चे सेना की वर्दी पहने उदय को सलामी देते नजर आए, जबकि ग्रामीणों ने उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। उदय दास की इस उपलब्धि से उनके परिजन भी बेहद भावुक और गौरवान्वित दिखे। उनकी मां निर्मला देवी ने कहा कि बेटे के इंडियन आर्मी में चयनित होने से परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने कहा कि उदय ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है। Source link

शिक्षा

30K Qualify, 15.6L Students Appeared

Hindi News Career CUET UG 2026 Result Declared: 30K Qualify, 15.6L Students Appeared 3 घंटे पहले कॉपी लिंक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी, NTA ने CUET UG 2026 रिजल्ट आज 23 जून को जारी कर दिया है। इस साल 15.6 लाख छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया था। इस बार सिर्फ एक स्टूडेंट ने अपने चुने गए पांच में से चार विषयों में 100 परसेंटाइल स्कोर किया है। वहीं 22 स्टूडेंट ने तीन सब्जेक्ट में और 180 स्टूडेंट्स ने दो सब्जेक्ट में और कुल 3,214 छात्रों ने एक-एक विषय में 100 परसेंटाइल स्कोर प्राप्त किया है। स्कोर से स्टूडेंट्स 300 से ज्यादा यूनिवर्सिटी में ले सकेंगे एडमिशन यह एग्जाम 7 जून को खत्म हुई थी। CUET रिजल्ट के बाद ही दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत देश के बड़े संस्थानों में ग्रेजुएशन कोर्सेज में एडमिशन प्रोसेस शुरू होती है। CUET UG प्रवेश परीक्षा से डीयू, जेएनयू, बीएचयू, जामिया, एएमयू, इलाहबाद यूनिवर्सिटी जैसे तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित देश की 300 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज के यूजी कोर्सेस में एडमिशन मिलेगा। CUET UG की एग्जाम 11 से 31 मई 2026 के बीच आयोजित की गई थी। कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों के चलते 31 मई, 6 जून और 7 जून को अतिरिक्त परीक्षाएं भी हुई। परीक्षा खत्म होने के बाद एनटीए ने 9 जून को प्रोविजनल आंसर की जारी की थी। 11 जून तक ऑब्जेक्शन दर्ज करने का मौका दिया गया था। सीयूईटी की परीक्षा इस बार 37 विषयों के लिए हुई। इसमें 13 लैंग्वेज, एक जनरल ऐप्टीट्यूट टेस्ट और 23 डोमेन सब्जेक्ट शामिल हैं। स्कोर कार्ड में क्या-क्या लिखा होगा : आपका नाम एप्लिकेशन नंबर सब्जेक्ट के मार्क्स पर्सेंटाइल स्कोर नॉर्मलाइज्ड मार्क्स क्वालिफिकेशन स्टेटस रिजल्ट के बाद काउंसिलिंग शुरू रिजल्ट के बाद काउंसलिंग के जरिए स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी में अपनी पसंद के कोर्स और कॉलेज में एंट्री के लिए अप्लाई करते हैं। यह प्रोसेस हर यूनिवर्सिटी अपने स्तर पर संचालित करती है। काउंसलिंग का उद्देश्य यह तय करना है कि योग्य स्टूडेंट्स को उनकी योग्यता, स्कोर और पसंद के आधार पर सीटें अलॉट की जाएं। CUET स्कोर और अन्य योग्यता की शर्तों जैसे कैटेगरी, रिजर्वेशन पॉलिसी आदि के आधार पर हर यूनिवर्सिटी अपना काउंसलिंग और एडमिशन शेड्यूल जारी करती है। स्टूडेंटस को हमेशा संबंधित यूनिवर्सिटी की वेबसाइट और काउंसलिंग पोर्टल पर अपडेट देखते रहना चाहिए। काउंसलिंग के लिए आवेदन की प्रोसेस : काउंसलिंग प्रोसेस के तहत स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी के काउंसलिंग पोर्टल पर आवेदन करते हैं। ध्यान दें कि कई यूनिवर्सिटीज का काउंसलिंग पोर्टल उनकी रेगुलर वेबसाइट से अलग होता है। उदाहरण के लिये दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की नियमित वेबसाइट www.du.ac.in है लेकिन काउंसलिंग प्रोसेस के लिए अलग पोर्टल ugadmission.uod.ac.in है। स्टूडेंट्स इस काउंसलिंग पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करते हैं, CUET स्कोर कार्ड और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करते हैं। इसके बाद स्टूडेंट अपनी पसंद के कॉलेज/संस्थान और कोर्स का प्रेफरेंस भरते हैं। ये कॉलेज यूनिवर्सिटी से संबंधित हो सकते हैं या खुद यूनिवर्सिटी के अधीन हो सकते हैं। ये खबर भी पढ़ें NEET के बाद, UPSC सिविल सर्विस भर्ती पर भी विवाद:प्रीलिम्‍स का पैटर्न बदलने का आरोप, पिछले साल से कम कैंडिडेट्स ने क्‍वालिफाई किया एग्‍जाम एजेंसी NTA के बाद अब UPSC को भी छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। 24 मई 2026 को UPSC सिविल सर्विस प्रीलिम्स का एग्जाम हुआ। उम्मीदवारों ने इस साल के पेपर को यूपीएससी का अब तक का सबसे टफ पेपर बताया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

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IAS पंकज अग्रवाल 661 करोड़ के बैंक घोटाले में गिरफ्तार:धनबाद में रह...

हरियाणा के 661 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। CBI ने इस मामले में हरियाणा कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। पंकज अग्रवाल का धनबाद में पैतृक आवास है। धनबाद के महुदा बाजार स्थित मारवाड़ी कॉलोनी में रहने वाले पंकज अग्रवाल के बड़े भाई नंदकिशोर अग्रवाल ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। नंदकिशोर अग्रवाल ने अपने भाई का बचाव करते हुए कहा कि पंकज अग्रवाल ने कभी कोई गलत काम नहीं किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका भाई निर्दोष है और आरोप लगाया कि किसी दुश्मनी या साजिश के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है। पंकज अग्रवाल हमेशा ईमानदारी से काम करते रहे हैं: भाई उन्होंने यह भी बताया कि वे पांच भाई हैं, जिनमें पंकज अग्रवाल सबसे छोटे हैं। नंदकिशोर अग्रवाल और एक अन्य भाई धनबाद में रहते हैं, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य सूरत और जयपुर में रहते हैं। नंदकिशोर के अनुसार, पंकज अग्रवाल हमेशा ईमानदारी से काम करते रहे हैं। हालांकि, नंदकिशोर ने यह भी स्वीकार किया कि नौकरी की व्यस्तताओं के कारण पिछले कुछ वर्षों में पंकज अग्रवाल से उनकी बातचीत कम हो गई थी और उनका धनबाद आना भी काफी कम हुआ था। CBI ने 661 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच के दौरान IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई की पुष्टि CBI द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से की गई है। Source link

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बंगाल के बाद बीजेपी का ‘मिशन पंजाब’, सभी 117 सीटों पर चुनाव...

होमताजा खबरदेश बंगाल के बाद बीजेपी का ‘मिशन पंजाब’, सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान Last Updated:June 23, 2026, 18:14 IST पश्चिम बंगाल के बाद अब बीजेपी ने पंजाब पर फोकस बढ़ा दिया है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया पंजाब दौरे के बाद संगठन ने राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. आने वाले दिनों में युवा और दलित वर्ग को जोड़ने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जाएंगे. ख़बरें फटाफट हाल ही में न‍ितीन नवीन राघव चड्ढा के साथ पंजाब के दौरे पर थे. नई दिल्ली/चंडीगढ़. पश्चिम बंगाल में बंपर जीत के बाद अब बीजेपी ने पंजाब को भी अपनी अगली बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया पंजाब दौरे के बाद मिले संकेत बताते हैं कि इस बार बीजेपी किसी सहयोगी दल के सहारे नहीं, बल्कि अपने दम पर राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. यह फैसला केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि पंजाब में बीजेपी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश माना जा रहा है. पार्टी का मानना है कि अगर हर सीट पर मजबूत संगठन खड़ा किया जाए तो आने वाले वर्षों में पंजाब की राजनीति में उसकी भूमिका कहीं अधिक प्रभावशाली हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि चुनाव की तैयारी केवल उम्मीदवार घोषित करने से नहीं होगी, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना होगा. इसी वजह से कार्यकर्ताओं को पार्टी विस्तार से जुड़े कार्यक्रमों को तेज करने और गांव-गांव तक संगठन पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं. अगले दो महीनों में राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेताओं के पंजाब दौरे भी इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं. इन दौरों का मकसद केवल बैठकें करना नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं को चुनावी एजेंडा समझाना और संगठन में नई ऊर्जा भरना होगा. युवा और दल‍ितों पर फोकस बीजेपी की नजर इस बार खास तौर पर दो वर्गों पर है- युवा और दलित. पंजाब में दलित आबादी का बड़ा हिस्सा है और राज्य की चुनावी राजनीति में उसका असर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. वहीं पहली बार वोट देने वाले और युवा मतदाताओं को भी पार्टी अपने साथ जोड़ना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से आने वाले दिनों में इन दोनों वर्गों को केंद्र में रखकर अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इतना ही नहीं, पार्टी की रणनीति यह भी है कि विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में युवाओं को टिकट देकर यह संदेश दिया जाए कि बीजेपी पंजाब में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. क्‍या मुद्दा लेकर जाएगी बीजेपी चुनावी मुद्दों की बात करें तो बीजेपी इस बार राष्ट्रीय एकता और ‘नशा मुक्त भारत’ को अपना प्रमुख एजेंडा बनाने की तैयारी में है. पार्टी का मानना है कि पंजाब लंबे समय से नशे के मुद्दे से जूझता रहा है और इसे चुनावी बहस के केंद्र में लाया जा सकता है. इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता जैसे मुद्दों को भी अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा. दूसरी ओर, राजनीतिक मोर्चे पर पार्टी आम आदमी पार्टी सरकार को सीधे घेरने की रणनीति पर भी काम कर रही है. सूत्रों के अनुसार, जल्द ही राज्य सरकार के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की सूची जारी की जा सकती है और उसके बाद पूरे पंजाब में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chandigarh,Chandigarh Source link

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रांची की पूर्णिमा का कमाल, हाथ से बनाई यूनिक शिवलिंग-गणेश राखी, कीमत...

Last Updated:June 23, 2026, 16:28 IST Success Story: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली पूर्णिमा बताती हैं कि रक्षाबंधन के 2 महीने पहले ही वह काफी सक्रिय हो जाती हैं. वह अपने हाथों से राखी बनाने का काम करती हैं और इतना यूनिक कलेक्शन बनाती हैं कि ऐसा दूसरा पीस आपको शायद ही देखने को मिले और दाम भी मात्र ₹40 से शुरू होता है. उन्होंने बताया हमारे पास मांगटीका राखी भाभी के लिए है तो भैया के लिए शिवलिंग और गणेश राखी है. आइये जानते हैं उनकी सफलता के बारे में. जहां पर एक-एक बार में लोग एक-एक दो-दो हजार की शॉपिंग करते हैं. आजकल सोशल मीडिया का जमाना है. ऐसे में आप इंस्टाग्राम पर पेज बनाकर अपने राखी का वीडियो डालें या फिर फेसबुक में भी इस तरह का वीडियो डाल सकते हैं. पूर्णिमा बताती हैं कि यह सारा कुछ वह अपने हाथों से बनाती हैं. उन्होंने अपना ब्रांड भी बनाया है, जिसके तहत ये बेचने का काम करती हैं. उनके ब्रांड का आलम यह है कि सिर्फ यह दो महीने में ही जुलाई व अगस्त में ही अच्छी खासी इनकम दे जाता है. इसके लिए सबसे जरूरी है कि आपके पास सबसे यूनिक कलेक्शन होना चाहिए. मतलब ऐसा दूसरा कलेक्शन किसी और के पास बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए. पूर्णिमा बताती हैं लोग राखी में अक्सर सिर्फ और सिर्फ यूनीक चीज ढूंढते हैं. उनको यूनिक थाली व राखी चाहिए. इसलिए उन्होंने शिवलिंग राखी बनाया है. अब आप बताइए ऐसा दूसरा आपको कहां पर मिलेगा. अब क्या है कि जो भी कस्टमर आते हैं. वह एक नजर में देखकर उठा लेते हैं. अगर आपको इस तरह का बिजनेस करना है तो यूनिक में कोई समझौता नहीं होना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं, दूसरी चीज, इसमें आपको बहुत ज्यादा ब्रांडिंग या फिर मार्केटिंग की जरूरत नहीं पड़ती है. साधारण तौर पर अगर आपके पास यूनिक कलेक्शन है तो आप बाजार में भी दे सकते हैं व मॉल में भी दे सकते हैं. उन्हें इतने यूनिक कलेक्शन की काफी जरूरत होती है और दूसरी बात आप मेले में अपना स्टॉल लगा सकते हैं. जैसे वह लगाती हैं. जहां पर एक-एक बार में लोग एक-एक दो-दो हजार की शॉपिंग करते हैं. आजकल सोशल मीडिया का जमाना है. ऐसे में आप इंस्टाग्राम पर पेज बनाकर अपने राखी का वीडियो डालें या फिर फेसबुक में भी इस तरह का वीडियो डाल सकते हैं. वहां से जल्दी ऑर्डर आते हैं. वहां से क्या है कि बेंगलुरु, दिल्ली व कोलकाता जैसे शहरों से आर्डर आते हैं, जैसे मुझे आते हैं. एक बात का ध्यान रखना है कि वीडियो क्वालिटी शानदार होनी चाहिए, बढ़िया से एडिट करवा लीजिए और फिर देखिए कैसे आपको ऑर्डर मिलने शुरू होते हैं. पूर्णिमा बताती हैं लोग राखी में अक्सर सिर्फ और सिर्फ यूनीक चीज ढूंढते हैं. उनको यूनिक थाली व राखी चाहिए. इसलिए उन्होंने शिवलिंग राखी बनाया है. अब आप बताइए ऐसा दूसरा आपको कहां पर मिलेगा. अब क्या है कि जो भी कस्टमर आते हैं. वह एक नजर में देखकर उठा लेते हैं. अगर आपको इस तरह का बिजनेस करना है तो यूनिक में कोई समझौता नहीं होना चाहिए. वहीं, दूसरी चीज, इसमें आपको बहुत ज्यादा ब्रांडिंग या फिर मार्केटिंग की जरूरत नहीं पड़ती है. साधारण तौर पर अगर आपके पास यूनिक कलेक्शन है तो आप बाजार में भी दे सकते हैं व मॉल में भी दे सकते हैं. उन्हें इतने यूनिक कलेक्शन की काफी जरूरत होती है और दूसरी बात आप मेले में अपना स्टॉल लगा सकते हैं. जैसे वह लगाती हैं. वहां से जल्दी ऑर्डर आते हैं. वहां से क्या है कि बेंगलुरु, दिल्ली व कोलकाता जैसे शहरों से आर्डर आते हैं, जैसे मुझे आते हैं. एक बात का ध्यान रखना है कि वीडियो क्वालिटी शानदार होनी चाहिए, बढ़िया से एडिट करवा लीजिए और फिर देखिए कैसे आपको ऑर्डर मिलने शुरू होते हैं. Source link

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पद्म भूषण गुरुजी… पत्नी रूपी सोरेन आज राष्ट्रपति के हाथों लेंगी सम्मान

मरणोपरांत शिबू सोरेन को मिलेगा देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मानः अबुआ राज की नींव रखने वाले शिबू की विरासत को देश का नमन झारखंड राज्य गठन के महानायक और आदिवासियों के हक-अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले स्व. दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मंगलवार को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्य भूषण’ से नवाजा जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान प्रदान करेंगी। गुरुजी को यह सम्मान मरणोपरांत लोक कल्याण और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण के लिए उनके ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इसकी घोषणा की थी। गौरतलब है कि लंबी बीमारी के बाद पिछले साल 4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन का निधन हो गया था। निधन के समय वे राज्यसभा सांसद थे। इससे पहले झारखंड विधानसभा से उन्हें ‘भारत रत्न’ देने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र को भेजा गया था। इस गौरवमयी पल का साक्षी बनने के लिए शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन और उनकी पुत्रवधू कल्पना सोरेन सोमवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी। सिर्फ राजनीति नहीं, शिबू सोरेन का पूरा जीवन समाज सुधार की एक पाठशाला था। लगातार 8 बार लोकसभा सांसद और संप्रग (य) सरकार में कोयला मंत्री रहे शिबू सोरेन ने जिन 5 संकल्पों पर आदिवासियों को एकजुट किया, उसने राज्य की सियासत और सामाजिक ताने-बाने को हमेशा के लिए बदल दिया। आंदोलन से बदलाव तक… गुरुजी का झारखंड मॉडल 1. नशाबंदी: ‘हड़िया-दारू’ को बताया बड़ा दुश्मन सोच: गुरुजी नशाखोरी के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने नारा दिया कि नशा गरीबों और आदिवासियों के लिए अभिशाप है। इसके कारण महाजन और साहूकार उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं। उन्होंने पूरे राज्य में नशाबंदी अभियान चलाया, जहां शराब बनाने और बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होती थी। बदलाव (फूलो-झानो योजना): 27 अगस्त 2008 को जब वे दूसरी बार मुख्यमंत्री बने, तो पहली ही कैबिनेट में महिलाओं को हड़िया-दारू के धंधे से मुक्त कर वैकल्पिक रोजगार देने की पहल की। यही सोच बाद में ‘फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान’ (शुरुआत 20 सितंबर 2020, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा) की नींव बनी। इस योजना से अब तक 36,000 ग्रामीण महिलाएं ब्याज-मुक्त लोन और ‘पलाश ब्रांड’ के जरिए स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं। 2. शिक्षा: रात्रि पाठशाला से आदिवासी बने साक्षर सोच: गुरुजी शिक्षा के अभाव को ही पिछड़ेपन की सबसे बड़ी वजह मानते थे। वे चाहते थे कि आदिवासी शिक्षा व विकास के मुख्यधारा में शामिल हों। प्रयोग: उन्होंने धनबाद के शिवलाल मुर्मू के घर से ‘चलो पढ़ो रात्रि पाठशाला’ की शुरुआत की। वे खुद रात में आदिवासियों को पढ़ाने बैठते थे और पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें शराब के नुकसान समझाते थे। इसी अभियान ने उन्हें संथाल आदिवासियों का गुरुजी बना दिया। 3. अबुआ राज: दमन-शोषण को दी चुनौती लड़ाई: गुरुजी ने आदिवासियों के सांस्कृतिक दमन, जमीन हड़पने और शोषण के खिलाफ बिगुल फूंका। उनका मानना था कि आदिवासियों का प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक होना चाहिए। इसी से अबुआ राज (हमारा राज) का विचार पैदा हुआ। -शेष पेज 11 पर Source link

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