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झारखंड

भदानीनगर में फोरलेन किनारे दो शव मिले:खेत में जाते वक्त लोगों की...

रामगढ़ जिले के भदानीनगर ओपी क्षेत्र में फोरलेन के पास खेत में दो युवकों के शव बरामद हुए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना भदानीनगर के बनगड्ढा स्थित फोरलेन पर सड़क किनारे हुई। मृतकों की पहचान सौंदा डी जयनगर निवासी अमरजीत भुंईया और सोनू कुमार के रूप में हुई है। स्थानीय लोग इसे संदिग्ध अवस्था में हुई मौत मान रहे हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि यदि यह सड़क हादसा होता तो अभी तक बाइक बरामद नहीं हुई है। इस कारण हत्या की आशंका भी जताई जा रही है। सूचना मिलने पर भदानीनगर थाना प्रभारी अख्तर अली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों शवों को कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। ग्रामीण खेत की ओर जा रहे थे और इसी दौरान उनकी नजर इन दोनों शव पर पड़ी। लोगों ने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी। थाना प्रभारी अख्तर अली ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सड़क दुर्घटना का मामला प्रतीत होता है। आशंका है कि युवक तेज रफ्तार में रहे होंगे, जिससे अनियंत्रित होकर लगभग 200 मीटर दूर खेत में जा गिरे और पेड़ से टकराने से उनकी मौत हो गई। पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है और दुर्घटनाग्रस्त वाहन की तलाश में जुटी है। पुलिस ग्रामीणों से भी गहन पूछताछ कर रही है। Source link

शिक्षा

AI Vs Job Crisis; Jobs Market 2030 Forecast

Hindi News National AI Vs Job Crisis; Jobs Market 2030 Forecast | Artificial Intelligence Courses नई दिल्ली6 घंटे पहले कॉपी लिंक देश में आईटी, कानून, कॉमर्स,ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं। एचआर कंपनी टीमलीज का कहना है कि 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 82% बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, नौकरियां उन लोगों के पास रहेंगी, जो AI टूल का इस्तेमाल करके उत्पादकता यानी प्रोडक्टिविटी 40% तक बढ़ा सकते हैं। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट कहती है कि AI लोगों की जगह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग AI का उपयोग करते हैं, वे उनकी जगह ले लेंगे, जो इस्तेमाल नहीं करते। ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2030 तक 22% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इधर, चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए। एक्सपर्ट बोले- तरीका नहीं बदला तो डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं दैनिक भास्कर ने टेक कंपनी ‘पीपुलस्ट्रॉन्ग’ और ‘टैग्ड’ के सह-संस्थापक और एचआर पंकज बंसल से AI के असर पर चर्चा की और उनसे 10 सवाल किए। पारंपरिक डिग्री वालों का क्या होगा?पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह बेकार नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप खत्म हो रहा है। पढ़ाई का तरीका और कंटेंट नहीं बदला, तो उन डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं बचेगी। बाजार में केवल थ्योरी या रट्टा वाले औसत छात्रों की जरूरत खत्म हो रही है। अपग्रेड करना होगा। जो डिग्री ले रहे हैं, वे क्या कर सकते हैं?जो छात्र अभी सेकेंड या थर्ड ईयर में हैं, वे लाइव प्रोजेक्ट पर काम शुरू करें। AI टूल्स का प्रोफेशनल लाइसेंस लें, उस पर 6 महीने रात-दिन काम करें और सॉफ्टवेयर या वेबसाइट्स बनाएं। जो डिग्री पूरी कर चुके हैं, वे क्या करें?सबसे बेहतरीन रास्ता है- इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट। अगर आपको किसी बड़ी कंपनी में मौका नहीं मिल रहा है, तो छोटे स्टार्टअप, एनजीओ या अपने स्थानीय क्षेत्र की किसी फैक्ट्री या दुकान के पास जाएं। उनकी समस्याओं को समझें और AI से उन्हें सुलझाएं। ‘ग्रेजुएशन’ की वैल्यू कितनी बचेगी?भारत में अभी नौकरी के आवेदन शॉर्टलिस्ट करने के लिए ग्रेजुएशन की ‘स्टैम्पिंग’ जरूरी है और यह स्थिति अगले 3 से 5 साल तक बनी रहेगी। लेकिन इसके बाद न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) का ‘5.5 क्रेडिट स्कोर’ इसे रिप्लेस कर देगा, जहां प्रैक्टिकल काम और प्रोफेशनल कोर्सेज के जरिए अंक मिलेंगे। आने वाले समय में लोग पूछेंगे कि आप ‘5.5 स्केलर’ हैं या नहीं। टेक वर्ल्ड में पहली नौकरी के बाद कोई आपकी डिग्री नहीं पूछेगा। ऐसे में जॉब पाने का अच्छा तरीका क्या?सबसे अच्छा तरीका है कि आप ‘10x इंजीनियर’ या ‘10x प्रोफेशनल’ बनें यानी जो अकेले 10 सामान्य लोगों का काम संभाल सके। अगर आप AI की मदद से किसी कंपनी का समय और लागत बचा सकते हैं, तो जहां पहले 5 लाख रु. का शुरुआती पैकेज मिलता था, वहां आज कंपनियां 25 लाख रु. की शुरुआती तनख्वाह देने को तैयार हैं। कंपनियों को ‘औसत’ लोग नहीं, बल्कि काम के लोग चाहिए। AI कोर्सेज से जॉब के दावे सही हैं?बिल्कुल नहीं। नुक्कड़ पर चल रहे किसी भी संस्थान से AI का सर्टिफिकेट ले लेने से नौकरी की कोई गारंटी नहीं मिलती। AI सर्टिफिकेट सीवी को शॉर्टलिस्ट होने में मदद कर सकता है, पर नौकरी तभी मिलेगी जब बुनियादी योग्यता होगी, AI का व्यावहारिक ज्ञान होगा और असेसमेंट टेस्ट क्लियर करेंगे। एंट्री लेवल यानी फ्रेशर्स की जॉब्स पर इसका क्या और कितना असर पड़ रहा है?शुरुआती दौर में दबाव जरूर है, क्योंकि जो बुनियादी काम पहले 10 लोग मिलकर करते थे, वह अब दो लोग AI की मदद से निपटा रहे हैं। इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी ट्रेडिशनल कंपनियों ने शुरुआत में फ्रेशर्स की हायरिंग रोकी या टाली है। लेकिन यह केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेंड है, लॉन्ग-टर्म में जॉब मार्केट में नेट एडिशन (नौकरियों की बढ़ोतरी) ही होने वाला है। जब आईटी कंपनियां भर्तियां रोक रही हैं, तो नए युवाओं को जॉब कहां मिलेगी?भारत में इस समय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी GCCs की बाढ़ आई हुई है। देश में 4000 से ज्यादा GCC हैं और हर हफ्ते दो नए सेंटर खुल रहे हैं। ये सेंटर्स AI स्किल्स वाले युवाओं को बहुत भारी पैकेज और ऊंची सैलरी पर हायर कर रहे हैं। इसके अलावा धीरे-धीरे ट्रेडिशनल कंपनियों में भी नियुक्तियां दोबारा खुलने लगी हैं। क्या AI इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस कर देगा, क्या इसकी लागत इंसानों से कम है?वैश्विक संगठनों को समझ आने लगा है कि AI की कॉस्ट (टोकन और जीपीयू प्रोसेसिंग लागत) इंसानी लागत से कम नहीं है। कई स्टार्टअप्स का AI बिल इतना ज्यादा आ रहा है कि वे AI टूल्स के बजाय दो इंसानों को हायर करना बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा, जिन कामों में मानवीय निर्णय और लोगों से जुड़ने की जरूरत होती है, वहां AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता। वो कौन-सी मानवीय खूबियां और सेक्टर्स हैं, जहां इंसान ही सबसे आगे रहेंगे?AI के दौर में चार मानवीय खूबियां सबसे कीमती हो गई हैं- एग्रीगेशन एबिलिटी (चीजों को आपस में जोड़ने की समझ), डिसीजन मेकिंग (निर्णय क्षमता), हाई ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) और अपनी बात को प्रभावी ढंग से बयां करने का हुनर। अगर सेक्टर्स की बात करें, तो हॉस्पिटैलिटी, डेटा साइंसेज, सेल्स और AI-असिस्टेड स्पेशलिस्ट्स (जैसे डॉक्टर या जर्नलिस्ट जो AI जानते हों) के रोल्स हमेशा सुरक्षित और मजबूत रहेंगे। चीन ने 12 हजार डिग्रियां खत्म कीं, AI कोर्स शुरू चीन ने 4 साल में अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से ज्यादा अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम को खत्म या सस्पेंड कर दिया, जबकि करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए। इनमें से कई कटौतियां कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और प्रबंधन पर केंद्रित थीं। इसकी वजह ये है कि चीन सरकार विश्वविद्यालयों पर AI, सेमीकंडक्टर्स, रोबोटिक्स और अन्य रणनीतिक उद्योगों के लिए

झारखंड

होटल रेडिशन में शिफ्ट हुए NDA विधायक:आज से सीएम आवास में इंडिया...

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून वोटिंग है। अहमदाबाद निवासी परिमल नाथवानी के उतरने से मुकाबला रोचक बना हुआ है। राजनीतिक गलियारे में यह माना जा रहा है कि नाथवानी ‘हिसाब-किताब’ कर के ही मैदान में डटे हैं। उनके इस गणित को कांग्रेस हॉर्स ट्रेडिंग का नाम दे रही है। वहीं भाजपा इस पर चुप्पी साधे हुए है। वोटिंग से ठीक पहले सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों की मौजूदगी ने इस मुकाबले को पूरी तरह से ‘पॉलिटिकल सस्पेंस थ्रिलर’ में बदल दिया है। मैदान में सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन से झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा हैं। वैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है। मुकाबला प्रणव झा और परिमल नाथवानी के बीच ही है। रेडिशन में शिफ्ट हुए NDA विधायक इधर, चुनाव के ऐन पहले इंडिया और एनडीए दोनों ही दल विधायक को सुरक्षित करने में लगे हैं। एनडीए समर्थक परिमल नाथवानी शहर के रेडिशन ब्लू होटल में रूके हुए हैं। वहीं इसी होटल में एनडीए के तमाम विधायक भी पहुंच रहे हैं। जानकारी के मुताबिक रेडिशन ब्लू होटल में 30 से अधिक कमरे बुक किए गए हैं। होटल में ठहरने के बाद विधायकों को मतदान प्रक्रिया से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि राज्यसभा चुनाव के दौरान किसी तरह की चूक न हो। इसके बाद गुरुवार को सभी विधायक होटल से सीधे विधानसभा पहुंचकर मतदान में हिस्सा लेंगे। आज से सीएम आवास में इंडिया की बैठक इंडिया गठबंधन के सभी विधायक और प्रमुख नेता 16 और 17 जून को मुख्यमंत्री आवास में जुटेंगे। इस दौरान विधायकों से मॉक पोल भी कराया जाएगा, ताकि मतदान के दिन किसी तरह की गलती की कोई गुंजाइश न रहे। मतदान वाले दिन सभी विधायक पहले मुख्यमंत्री आवास में एकत्र होंगे। इसके बाद सभी एक साथ विधानसभा पहुंचकर मतदान में हिस्सा लेंगे। इधर, झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है। कोई हमारे विधायकों को खरीद नहीं सकता। परिमल नाथवानी एक औद्योगिक घराने से हैं, शिष्टाचार के नाते या समर्थन मांगने मुख्यमंत्री से मिल लिए तो कोई अचरज नहीं। आंकड़े हमारे पास हैं, हमलोग दोनों सीटें जीतेंगे। जानिए पेंच कहां फंस रहा राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 28-28 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होगी। इंडिया गठबंधन (झामुमो+कांग्रेस+राजद) के पास दोनों सीटें निकालने के लिए पर्याप्त बहुमत है। भाजपा के पास अपने 24 वोट हैं। ऐसे में एनडीए समर्थित नाथवानी को जीत के लिए 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। यही 4 वोटों का ‘शॉर्टफॉल’ ही इस राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं और बयानों की कड़वाहट की असली वजह है। परिमल नाथवानी द्वारा ‘अंतरात्मा की आवाज’ और ‘सोरेन परिवार’ से पुराने रिश्तों की दुहाई देना, सत्तापक्ष के खेमे में सेंधमारी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। Source link

ताज़ा खबर

‘मुस्लिम पत्नी हिन्दू बन गई है…’ गुजराती शख्स की सरकार से अपील,...

होमताजा खबरदेश ‘मुस्लिम पत्नी हिन्दू बन गई…’ गुजराती शख्स की अपील, अब मत भेजिये बांग्लादेश Agency:एजेंसियां Last Updated:June 16, 2026, 12:50 IST गुजरात के आनंद जिले में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चल रहे ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के बीच एक भावुक मामला सामने आया है. बांग्लादेश में जन्मी काजल को पुलिस ने बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रहने के आरोप में हिरासत में लिया है और उसके डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. काजल के पति तरुण पटेल का दावा है कि दोनों की मुलाकात फेसबुक पर हुई थी, बाद में उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से शादी की और अब उनके दो बच्चे हैं. तरुण पटेल की काजल से फेसबुक पर मुलाकात हुई थी, जिसके बाद प्यार पनपा और दोनों ने शादी कर ली. गुजरात में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय पहलू को भी चर्चा में ला दिया है. आनंद जिले के एक युवक ने राज्य सरकार से अपनी बांग्लादेश में जन्मी पत्नी को वापस न भेजने की अपील की है. युवक का कहना है कि उसकी पत्नी ने हिंदू धर्म अपना लिया है और अगर उसे बांग्लादेश भेजा गया तो उसकी जान को खतरा हो सकता है. आनंद जिले के लांभवेल गांव निवासी तरुण पटेल ने बताया कि उनकी मुलाकात वर्ष 2012-13 में फेसबुक के जरिये बांग्लादेश की रहने वाली काजल से हुई थी. सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. तरुण के मुताबिक दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन काजल को बांग्लादेश में पासपोर्ट नहीं मिल सका. इसी दौरान उसके परिवार की ओर से उस पर किसी और से शादी करने का दबाव बनाया जाने लगा. तरुण का दावा है कि इसी वजह से काजल करीब दस साल पहले अवैध रूप से भारत आ गई और आनंद पहुंची. यहां दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया और तब से पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं. दंपति के दो बच्चे भी हैं, जिनमें एक आठ साल और दूसरा दो साल का है. तरुण का कहना है कि भारत आने के बाद काजल ने हिंदू परंपराओं को अपनाया और नियमित रूप से मंदिरों में पूजा-अर्चना करती रही. लेकिन हाल ही में गुजरात पुलिस के ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के दौरान उसकी पहचान अवैध रूप से भारत में रह रही बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई. इसके बाद आनंद की स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने उसे हिरासत में ले लिया. फिलहाल काजल के खिलाफ डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसी को लेकर तरुण ने गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी से भावुक अपील की है. उनका कहना है कि उनकी पत्नी अब हिंदू धर्म अपना चुकी है और बांग्लादेश लौटने पर उसका परिवार उसे स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने आशंका जताई कि वहां कट्टरपंथी तत्वों से उसकी जान को भी खतरा हो सकता है. तरुण ने कहा, ‘हमारे दो छोटे बच्चे हैं. अगर उनकी मां को हमसे अलग कर दिया गया तो बच्चों का क्या होगा? वह सिर्फ मुझसे शादी करने और मेरे साथ जीवन बिताने के लिए भारत आई थी.’ उन्होंने यह भी कहा कि परिवार भारतीय नागरिकता पाने के लिए जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसका पालन करने को तैयार है. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि मानवीय आधार पर उनकी पत्नी को डिपोर्ट न किया जाए और मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए. परिवार के मुताबिक काजल फिलहाल एक महिला आश्रय गृह में रखी गई है. हिरासत में लिए जाने के बाद से बच्चे अपनी मां से नहीं मिल पाए हैं. दंपति के बड़े बेटे ध्यान ने भी प्रशासन से अपनी मां को रिहा करने की अपील की है. उसने कहा कि वह अपनी मां के बिना नहीं रह सकता और उसे जल्द घर लौटने दिया जाना चाहिए. यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब गुजरात पुलिस राज्यभर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है. पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने अब तक राज्य में 600 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया जा चुका है. इनमें से करीब 60 लोग अकेले आनंद जिले से पकड़े गए हैं. हालांकि इस विशेष मामले पर पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन यह प्रकरण कानून, मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को जरूर सामने लेकर आया है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Anand,Anand,Gujarat Source link

झारखंड

खेत में चूने का उपयोग बढ़ा देगा खरीफ की फसल का उत्पादन,...

होमताजा खबरकृषि खेत में चूने का उपयोग बढ़ा देगा खरीफ की फसल का उत्पादन, जानें सही तरीका Last Updated:June 16, 2026, 12:03 IST खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले किसान खेतों की तैयारी में जुट गए हैं. अच्छी पैदावार के लिए किसान उन्नत बीज, खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके बावजूद कई बार फसलों से उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाता. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे मिट्टी की गुणवत्ता और उसका पीएच स्तर भी एक बड़ा कारण हो सकता है. इसलिए बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच और उचित उपचार करना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. पलामू: खरीफ सीजन को लेकर किसान पूरी तरह तैयारियों में जुट गए हैं. बुवाई शुरू होने से पहले खेतों की तैयारी तेज हो गई है. अधिकांश किसान अच्छी उपज की उम्मीद में उन्नत बीज, खाद और उर्वरकों का उपयोग करते हैं. हालांकि, इन सब के बाद भी कई बार अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता. इसकी एक बड़ी वजह मिट्टी की गुणवत्ता और उसका पीएच स्तर हो सकता है. ऐसे में खरीफ फसलों की बुवाई से पहले खेत का उपचार करना बेहद जरूरी है. खासकर पलामू क्षेत्र की अम्लीय मिट्टी में भूमि सुधार के उपाय अपनाकर किसान उत्पादन बढ़ा सकते हैं. अधिकांश भूमि की प्रकृति अम्लीयकृषि विज्ञान केंद्र, चियांकी (पलामू) के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने लोकल18 को बताया कि पलामू की अधिकांश भूमि अम्लीय प्रकृति की है. ऐसी मिट्टी में कई आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होने के बावजूद वे पौधों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाते. इसका असर फसलों की वृद्धि पर पड़ता है और उत्पादन कम हो जाता है. मक्का, अरहर समेत कई खरीफ फसलों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. ऐसे में केवल खाद और उर्वरक डालना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मिट्टी का उपचार करना भी जरूरी है. फसलों की बढ़वार बेहतरउन्होंने बताया कि मिट्टी के सुधार के लिए चूना का प्रयोग एक प्रभावी उपाय है. खेत में उचित मात्रा में चूना डालने से मिट्टी का पीएच स्तर बढ़कर 6 से 7 के बीच पहुंच जाता है, जिसे अधिकांश फसलों की वृद्धि के लिए आदर्श माना जाता है. पीएच संतुलित होने पर मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्व पौधों को आसानी से उपलब्ध होने लगते हैं. इससे फसलों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है. चूना का छिड़कावडॉ. पांडे ने किसानों को सलाह दी कि वे केवल बुझा हुआ चूना (स्लेक्ड लाइम) ही इस्तेमाल करें. यह गर्मी पैदा नहीं करता और खेत के लिए सुरक्षित माना जाता है. बुवाई से लगभग 40 से 45 दिन पहले खेत में चूना का छिड़काव करना चाहिए. प्रति कट्ठा 4 से 5 किलोग्राम चूना की दर से इसे खेत में समान रूप से फैलाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं. इसके बाद जुताई कर चूना को मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए. चूना उपचार का प्रभावडॉ. पांडे के मुताबिक, चूना उपचार का प्रभाव केवल एक वर्ष नहीं, बल्कि लगभग तीन वर्षों तक बना रह सकता है. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर नत्रजन आधारित खादों की आवश्यकता भी कम हो जाती है. ऐसे में खरीफ सीजन से पहले खेत का उपचार किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है. साथ ही, कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल करने का रास्ता खोल सकता है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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गिरिडीह में सड़क किनारे लावारिस मिला नवजात:देर रात सुनाई दी रोने की...

गिरिडीह जिले के गावां थाना क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नवजात शिशु को सड़क किनारे लावारिस हालत में छोड़ दिया गया। देर रात बच्चे के रोने की आवाज सुनकर स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने तत्परता दिखाते हुए उसकी जान बचाई। जानकारी के अनुसार, रात के सन्नाटे में सड़क किनारे से लगातार रोने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वहां देखा गया कि एक नवजात शिशु कपड़े में लिपटा हुआ बेसहारा पड़ा है। आसपास की गई तलाश, नहीं मिला कोई परिजन ग्रामीणों ने तत्काल आसपास के इलाके में बच्चे के परिजनों की खोजबीन शुरू की, लेकिन काफी प्रयास के बावजूद कोई भी महिला या परिजन वहां मौजूद नहीं मिला। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत गावां थाना पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। नवजात को अपने संरक्षण में लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। हर कोई इस घटना को लेकर स्तब्ध नजर आया। अस्पताल में कराया गया भर्ती, हालत स्थिर पुलिस ने नवजात को प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल भेजा। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चे की हालत फिलहाल स्थिर है और उसे जरूरी चिकित्सकीय देखभाल दी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया कि समय रहते बच्चे को अस्पताल पहुंचा दिया गया, जिससे उसकी जान बच सकी। फिलहाल अस्पताल में उसकी निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मां की तलाश में जुटी पुलिस घटना के बाद पूरे इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों ने इसे अमानवीय कृत्य बताते हुए दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने बताया कि नवजात की मां और उसके परिजनों की पहचान करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ की जा रही है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को सौंपने की तैयारी की जा रही है, ताकि उसकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जा सके। Source link

शिक्षा

UPSC Civil Services Prelims Result 2026 Released

Hindi News Career UPSC Civil Services Prelims Result 2026 Released | DAF Form For Mains 1 घंटे पहले कॉपी लिंक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने प्रीलिम्स परीक्षा 2026 का रिजल्ट 15 जून को देर रात जारी किया। कुल 13,343 कैंडिडेट्स ने ये परीक्षा क्वालीफाई की है। अब 13,343 कैंडिडेट्स मेन्स परीक्षा में शामिल होंगे, ये परीक्षा 933 पदों के लिए हुई है। इस साल 2025 के मुकाबले कम कैंडिडेट्स क्वालीफाई हुए हैं। UPSC प्रीलिम्स परीक्षा 2025 में कुल 14,161 कैंडिडेट्स क्वालीफाई हुए थे। 24 मई को 2 शिफ्ट में हुई एग्जाम UPSC प्रीलिम्स एग्जाम 24 मई 2026 को देशभर में आयोजित की गई थी। परीक्षा ऑफलाइन मोड में ओएमआर शीट के माध्यम से दो शिफ्ट में हुई थी। पहली शिफ्ट में सामान्य अध्ययन (GS) का पेपर हुआ, जबकि दूसरी शिफ्ट में सीसैट (CSAT) हुआ था । 933 पदों पर होगी भर्ती इस साल UPSC प्रीलिम्स एग्जाम के लिए 8.19 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इंटरव्यू के बाद टोटल 933 पदों पर भर्ती की जाएगी। यह एग्जाम 83 शहरों के 2,072 सेंटर्स पर आयोजित किया गया था। । आयोग द्वारा जारी किए गए डेटा के मुताबिक 5.49 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे। मेन्स के लिए भरना होगा डीएएफ फॉर्म प्रीलिम्स परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मेन्स एग्जाम के लिए DAF-I (डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म) भरना होगा। ये फॉर्म 19 जून से ऑफिशियल वेबसाइट पर एक्टिव होगा। कैंडिडेट्स 28 जून तक इस फॉर्म को भर सकेंगे। परीक्षा के चार दिन बाद जारी हुई आंसर की इस बार UPSC ने परीक्षा के केवल चार दिन बाद 28 मई को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर एक नया कदम उठाया। पहले आमतौर पर आंसर-की पूरी परीक्षा प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जारी की जाती थी। जारी आंसर-की में यह भी बताया गया कि 100 प्रश्नों में से एक प्रश्न को हटाया गया है। 21 अगस्त को मेन्स एग्जाम UPSC द्वारा मेन्स एग्जाम का आयोजन 21 अगस्त को किया जाएगा। मेन्स में 9 क्वेश्चन पेपर होते हैं। मेन्स एग्जाम में सफल हुए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। फाइनल सिलेक्शन मेन्स और इंटरव्यू में मिले अंकों के आधार पर किया जाएगा। 21 अगल-अलग ग्रुप ए और बी सेवाओं में भर्ती UPSC सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से केंद्र सरकारी की 21 अगल-अलग ग्रुप ए और बी सेवाओं में भर्ती की जाती है। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के अलावा भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा, भारतीय कॉर्पोरेट कानून सेवा, भारतीय व्यापार सेवा जैसी अन्य सेवाएं शामिल हैं। उम्मीदवारों का फाइनल सिलेक्शन रैंक, कैटेगरी और वरीयता के आधार पर किया जाएगा। —————- ये खबर भी पढ़ें इस साल से आईआईटी कानपुर लॉन्च करेगा साइबर सिक्योरिटी कोर्स:जेईई एडवांस्ड स्कोर जरूरी नहीं, 60 सीटों पर एडमिशन IIT कानपुर अपने नए एकेडमिक सेशन से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर ने नए यूजी प्रोग्राम के तहत बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी कोर्स की शुरुआत की है। कोडिंग, एथिकल हैकिंग और डिजिटल सिक्योरिटी की दुनिया में करियर बनाने वाल कैंडिडेट्स साइबर सिक्योरिटी कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

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अंगारों पर चलकर शिवभक्तों ने दिखाई आस्था:रामगढ़ के देवरिया गांव में दिखा...

रामगढ़ जिले के भदानीनगर स्थित देवरिया गांव में मंडा पर्व पूरे उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी यह पर्व तीन दिनों तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पर्व के दौरान शिवभक्तों ने शिवालय में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद अहले सुबह नदी में स्नान कर अग्नि पूजन की परंपरा निभाई गई। पूरे आयोजन के दौरान गांव में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा। दहकते अंगारों पर नंगे पैर चले भोक्ता-शोकताइन मंडा पर्व की सबसे प्रमुख परंपरा के तहत भक्तों ने दहकते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था का प्रदर्शन किया। इस कठिन अनुष्ठान में 90 भोक्ता और 92 शोकताइन शामिल हुए, जिन्होंने नंगे पैर अंगारों पर चलकर भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाई। इस दौरान कई शोकताइन अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में उठाकर भी अंगारों पर चलीं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का अद्भुत दृश्य बन गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। छऊ नृत्य ने बांधा समा, कलाकारों ने किया मंत्रमुग्ध पर्व के अवसर पर रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। बंगाल से आए छऊ नृत्य कलाकारों की टीम ने देवी-देवताओं के मुखौटे पहनकर रामायण और महाभारत की लीलाओं का मंचन किया। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और देर रात तक लोग कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। इस आयोजन का उद्घाटन बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, मनोज राम, राजेंद्र मुंडा और रोहित मुंडा ने संयुक्त रूप से किया। लोक संस्कृति का प्रतीक है मंडा पूजा इस मौके पर विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि मंडा पूजा झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। मेले के सफल आयोजन में अध्यक्ष लाल बिहारी मांझी, कोषाध्यक्ष विजेंद्र महतो, सचिव अजय साहू समेत कई स्थानीय लोगों का अहम योगदान रहा। सभी के सहयोग से यह आयोजन शांतिपूर्ण और सफल तरीके से संपन्न हुआ। Source link

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Cough syrups News: कफ सिरप पर नई पाबंदी, बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर...

होमताजा खबरदेश अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगा कफ सिरप, सरकार का बड़ा फैसला Last Updated:June 16, 2026, 11:51 IST Cough syrups News: केंद्र सरकार ने कफ सिरप और अन्य औषधीय सिरप की बिक्री को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम 1945 में संशोधन करते हुए कुछ सिरप दवाओं की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर रोक लगा दी है. अब ऐसे कफ सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची दिखाना अनिवार्य होगा. ख़बरें फटाफट कफ सिरप पर नई पाबंदी, बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर रोक Cough syrups News: देशभर में कफ सिरप की खरीद-बिक्री को लेकर नया नियम आया है. अब बिना प्रिस्क्रिप्शन के कफ सिरप की बिक्री पर रोक लग गई है. अब तक खांसी होने पर ऐसे ही कफ सिरफ दुकान से मिल जाता था. इसके लिए किसी प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं होती थी. मगर अब किसी भी अस्पताल या दवा दुकान पर बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप नहीं मिल पाएगा. कफ सिरप को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बाबत एक नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत अब बिना प्रिस्क्रिप्शन कफ सिरप नहीं मिलेगा. दरअसल, अब कफ सिरप समेत विभिन्न औषधीय सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होगी. केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स यानी औषधि नियम 1945 में संशोधन किया है. इसके तहत सिरप की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है. यह नियम शहर में पहले से है. अब गांवों में भी इसे लागू कर दिया गया है. इसका मतलब है कि गांव से लेकर शहर तक में अब सख्ती हो गई. नए नियम लागू होने के बाद फार्मेसी से सिरप खरीदने के लिए पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन दिखाना जरूरी होगा. सरकार का कहना है कि यह कदम दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. जी हां, केंद्र सरकार ने दवाओं से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर औषधि नियम, 1945 में संशोधन किया है. नए नियमों के तहत अनुसूची के (Schedule K) में शामिल दवाओं की सूची से सिरप शब्द हटा दिया गया है. इसका मतलब है कि अब कुछ सिरप दवाएं उन विशेष छूटों के दायरे में नहीं आएंगी, जो पहले अनुसूची ‘के’ के तहत मिलती थीं. वहीं, जो कफ सिरप हैं, उसकी बिक्री के लिए डॉक्टर की पर्ची को अनिवार्य कर दिया गया है. फैसले की वजह क्या?केंद्र सरकार ने कफ सिरप की बिक्री को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं. अब कई तरह के कफ सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी होगी. इस फैसले के पीछे न केवल दवाओं के दुरुपयोग की चिंता है, बल्कि पिछले कुछ सालों में सामने आए उन मामलों का भी असर माना जा रहा है. कफ सिरप को लेकर मध्य प्रदेश से लेक कई राज्यों में हाहाकार मचा था. कफ सिरप के चलते कई लोगों की मौत भी हुई थी. इन घटनाओं ने कई सवाल खड़े किए थे. प्वाइंटर्स में समझिए सरकार का नया नियम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम 1945 में बड़ा बदलाव किया है. नए नियमों के तहत अब 1,000 से कम आबादी वाले छोटे गांवों में भी कफ सिरप की बिक्री बिना लाइसेंस के नहीं की जा सकेगी. सरकार ने अनुसूची ‘के’ (Schedule K) से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया है. पहले इस श्रेणी के तहत छोटे गांवों में कफ सिरप बेचने के लिए कुछ लाइसेंस संबंधी नियमों से छूट मिलती थी. नए बदलाव के बाद अब कफ सिरप की बिक्री और वितरण केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी के जरिए ही किया जा सकेगा. यह नियम औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और उससे जुड़े नियमों के तहत लागू होगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कफ सिरप की बिक्री और वितरण पर बेहतर निगरानी रखने, दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और जनस्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया गया है. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से देशभर में कफ सिरप की बिक्री अधिक जिम्मेदारी और तय मानकों के अनुसार हो सकेगी. मंत्रालय ने कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों, वितरकों और दवा विक्रेताओं को सभी लाइसेंस और नियामकीय नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है. About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

धान छोड़ जून-जुलाई में बोएं अरहर, सही बीज, पौधे की दूरी और...

होमताजा खबरकृषि धान छोड़ जून-जुलाई में बोएं अरहर, सही बीज, पौधे की दूरी और ड्रिप सिंचाई, जरूरी Last Updated:June 16, 2026, 11:48 IST Pigeon Pea Farming Benefits: पारंपरिक फसल जैसे धान आदि की जगह अगर जून-जुलाई में किसान अरहर बोते हैं तो मुनाफे की संभावना तगड़ी रहती है. इस दौरान बस सही बीज से लेकर सिंचाई के तरीके और खेत की देखभाल तक इन चीजों का ध्यान रखें और साथ में दूसरी फसल भी बोएं. इससे किसान बढ़िया कमाई कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट देवघर. अरहर की खेती देश के किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा मानी जाती रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अरहर की दाल की मांग पूरे साल बनी रहती है. गांव हो या शहर, लगभग हर घर की रसोई में अरहर की दाल का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है और किसानों को बेहतर मुनाफा भी होता है. इसके बावजूद कई किसान आज भी पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं, जिसके कारण उन्हें उतनी पैदावार नहीं मिल पाती जितनी मिलनी चाहिए. कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि अगर किसान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो अरहर की उपज में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है. क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञदेवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने बताया कि जून और जुलाई का महीना दलहनी फसलों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. अरहर भी प्रमुख दलहनी फसल है, जिसकी खेती इस दौरान की जाती है. उन्होंने कहा कि किसान अगर सही समय पर बुवाई करें, तो फसल का विकास बेहतर होता है और उत्पादन भी बढ़ता है. खास तौर से रोहिणी, आर्द्रा और मृगशिरा नक्षत्र के दौरान की गई बुवाई को अच्छा माना जाता है. इस समय मौसम और मिट्टी की नमी फसल के लिए अनुकूल रहती है, जिससे पौधों का विकास तेजी से होता है. पुराने बीज छोड़ उन्नत बीज का करें प्रयोगविशेषज्ञ का कहना है कि अरहर की खेती में सबसे महत्वपूर्ण बात उन्नत किस्म के बीज का चयन है. कई बार किसान अपने पास रखे पुराने बीजों का उपयोग कर लेते हैं, जिससे अंकुरण कम होता है और पौधे कमजोर रह जाते हैं. इसलिए हमेशा प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीज का ही चयन करना चाहिए. इसके साथ ही बुवाई से पहले बीज का उपचार करना भी जरूरी है. बीज उपचार करने से फसल को शुरुआती रोगों और कीटों से सुरक्षा मिलती है, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन पर अच्छा असर पड़ता है. अरहर में बीज के बीच दूरी महत्वपूर्णअरहर की खेती में पौधों के बीच उचित दूरी रखना भी बेहद जरूरी माना जाता है. बहुत घनी बुवाई करने से पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इससे फसल की बढ़वार प्रभावित होती है. कृषि विशेषज्ञ अंबिका जी का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से कतारों और पौधों के बीच दूरी रखकर बुवाई की जाए, तो पैदावार में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल में रोग लगने की संभावना भी कम हो जाती है. इस तरह की सिंचाई फायदेमंदसिंचाई के मामले में भी किसानों को नई तकनीक अपनाने की सलाह दी जा रही है. अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि ड्रिप इरिगेशन यानी बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली अरहर की खेती के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती है. इस तकनीक से पौधों की जड़ों तक सीधे पानी पहुंचता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है. साथ ही फसल को जरूरत के अनुसार नमी मिलती रहती है. कम पानी में बेहतर उत्पादन लेने के लिए यह तरीका काफी कारगर माना जाता है. मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगीउन्होंने यह भी बताया कि किसान अरहर के साथ दूसरी छोटी अवधि वाली फसलों की भी खेती कर सकते हैं. इसे अंतरवर्ती खेती कहा जाता है. अरहर के साथ मूंग, उड़द या अन्य उपयुक्त फसल लगाने से खेत का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को अतिरिक्त आमदनी भी मिलती है. अगर किसी कारण से एक फसल से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, तो दूसरी फसल नुकसान की भरपाई कर देती है. अरहर की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है. बढ़ती है मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रादलहनी फसल होने के कारण इसकी जड़ों में मौजूद जीवाणु मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाते हैं. इससे अगली फसलों को भी लाभ मिलता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है. यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल चक्र में अरहर को शामिल करने की सलाह देते हैं. सही बीज, सही समय और वैज्ञानिक तकनीकों के साथ की गई अरहर की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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