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राहुल गांधी के शब्दों से हिली ‘इंडिया’ गठबंधन की एकता, माकपा ने...

होमताजा खबरदेश केरल चुनाव की टीस अभी बाकी! राहुल गांधी के बयान पर माकपा का तगड़ा जवाब Last Updated:June 13, 2026, 21:28 IST राहुल गांधी ने ‘इंडिया’ गठबंधन की मीटिंग में केरल की राजनीति और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को लेकर बयान दिया था. राहुल ने साफ कहा था कि वह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को गले नहीं लगा सकते हैं. अब माकपा नेता ने इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. इससे गठबंधन की एकता पर असर पड़ सकता है. ख़बरें फटाफट ‘इंडिया’ गठबंधन को लेकर माकपा ने राहुल गांधी को नसीहत दी. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा केरल की राजनीति को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में की गई टिप्पणी पर शनिवार को कहा कि उन्हें सिर्फ इतनी सलाह दी गई है कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और मोदी सरकार के लिए ‘मददगार’ बनने से बचें. माकपा महासचिव एम ए बेबी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा, “कोई भी राहुल गांधी से यह नहीं कह रहा कि वह पिनराई विजयन को गले लगाएं.” उन्होंने कहा, “इसके उलट, हम उनसे केवल यह कह रहे हैं कि वह पिनराई विजयन और अन्य विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की मांग कर ईडी और मोदी सरकार का मददगार बनने से बचें. यह विपक्ष के नेता का काम नहीं है.” बेबी की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी द्वारा आठ जून को हुई ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में उनके द्वारा दिये गए संबोधन को शुक्रवार को सार्वजनिक किए जाने के एक दिन बाद आई. राहुल गांधी ने बैठक में कहा था, “हमारे अपने राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन यदि आप मुझसे कह रहे हैं कि मैं केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को जाकर गले लगाऊं, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता और न ही करूंगा, क्योंकि मेरा उनके साथ राजनीतिक संघर्ष जारी है.” वह केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा तत्कालीन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार पर किए गए हमलों को लेकर माकपा की आपत्ति के संदर्भ में यह बात कह रहे थे. राहुल गांधी ने यह भी कहा था, “हमें लचीला रुख अपनाना होगा और यह समझना होगा कि हमारे खिलाफ पूरी ताकत से हमला किया जा रहा है, ताकि यह साबित किया जा सके कि विपक्ष कमजोर और बिखरा हुआ है.” सूत्रों के अनुसार, माकपा के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए आरोपों पर बैठक के दौरान चिंता जताई थी. कांग्रेस ने केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान वाम दल और भाजपा के बीच कथित ‘मौन सहमति’ होने का आरोप लगाया था. बैठक से पहले बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इन आरोपों पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि इस तरह के आरोप विपक्षी गठबंधन की सहयोगात्मक भावना के अनुरूप नहीं हैं. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

धालभूमगढ़ के चोयरा में सात एकड़ में फलों का साम्राज्य, बाजार में...

महेंद्र साव | धालभूमगढ़ पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ के चोयरा निवासी समाजसेवी भूतेष पंडित ने अपनी सात एकड़ जमीन पर फलों का बड़ा बागान तैयार किया है। वे राजनीति और समाजसेवा की व्यस्तता के बीच भी बागवानी का शौक निभाते हैं। बागान की खास बात यह है कि भूतेष पंडित यहां के कीमती और रसीले फल बाजार में नहीं बेचते। उनका कहना है कि बागान व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं लगाया। शौक और पर्यावरण प्रेम इसकी वजह है। बागान में आने वाला हर अतिथि, मित्र या राहगीर खाली हाथ नहीं लौटता। वे ताजे फल भेंट करके विदा करते हैं। करीब पांच साल पहले उन्होंने बागान की शुरुआत की थी। 200 से अधिक आम के पौधे लगाए थे। अब ये पौधे घने पेड़ बन चुके हैं। इस सीजन में छोटे-छोटे पेड़ों पर आम के गुच्छे इतने लदे हैं कि शाखाएं झुककर मिट्टी को छू रही हैं। बागान में दुनिया का सबसे महंगा माना जाने वाला मियाजाकी आम भी है। अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, हेमसागर, मल्लिका समेत दर्जनों किस्में हैं। यहां बारहमासी आम के पेड़ भी हैं। इनमें सालभर आम फलते हैं। आम के साथ अमरूद की कई किस्में भी हैं। सबसे अलग बैंगनी अमरूद है। इसकी पत्तियां, डालियां, फल गहरे बैंगनी और कत्थई रंग के होते हैं। इलाहाबादी अमरूद और देसी किस्मों के पेड़ों पर भी भारी मात्रा में फल आए हैं। करीब दो साल पहले वे मालदा की नर्सरी से जामरुल वाटर एप्पल के दो पौधे लाए थे। अब उन पेड़ों पर प्रचुर मात्रा में जामरुल लगे हैं। बागान में मीठी इमली, नींबू, कई प्रजातियों के कटहल, नारियल, जामुन, बेर, बेल, पपीता जैसे फलदार पेड़ भी हैं। बागान के बीचोंबीच ठहरने के लिए भवन और आलीशान फार्म हाउस बनाया गया है। शांत माहौल और फलों की खुशबू के कारण यह वीआईपी लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना है। हर साल जमशेदपुर के प्रसिद्ध अस्पताल टीएमएच के डॉक्टरों की टीम परिवार के साथ यहां पिकनिक मनाने आती है। धालभूमगढ़ और आसपास से आने वाले लोग उनके इस प्रयास, मेहनत और फलों को मुफ्त बांटने की परंपरा की तारीफ करते हैं। बागान में फल दिखाते भूतेष पंडित। Source link

झारखंड

कीटनाशक खाकर विवाहिता ने की खुदकुशी

दुमका| शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के चकलता गांव में एक 20 वर्षीय विवाहिता ने जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली है। यह घटना गुरुवार देर रात की है। स्वजन के मुताबिक मोनिका टुडू को कोई संतान नहीं थी। रात में किसी बात को लेकर वह पति से नाराज हुई। आवेश में आकर उसने कीटनाशक दवा खा ली। हालत बिगड़ने पर इलाज के लिए दुमका के फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान मौत हो गई। नगर थाना की पुलिस ने महिला के स्वजन का फर्द बयान लिया। शव का पोस्टमार्टम कराने की कार्रवाई की। पुलिस ने इस मामले में यूडी केस दर्ज किया है।नगर थाना की पुलिस ने महिला के स्वजन का फर्द बयान लिया। Source link

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50 साल से एक जैसा स्वाद, जैन साहब की चाय के बिना...

Last Updated:June 13, 2026, 20:17 IST शिवपुरी के पुराने कलेक्ट्रेट के पास स्थित ‘जैन चाय दुकान’ आज महज एक दुकान नहीं, बल्कि शिवपुरी के लोगों के दिन की पहली जरूरत बन चुकी है. शहर के रग-रग में बसे स्वाद का जादू ऐसा है कि आज भी हजारों शिवपुरी वासियों की सुबह तब तक अधूरी मानी जाती है बदलते दौर की चकाचौंध में जहां हर मोड़ पर आधुनिक कैफे और नए-नए टी-स्टॉल खुल रहे हैं. वहीं शिवपुरी के दिल में एक ऐसी जगह भी है. जिसकी खुशबू पिछले पांच दशकों से रत्ती भर भी नहीं बदली. पुराने कलेक्ट्रेट के पास स्थित ‘जैन चाय दुकान’ आज महज एक दुकान नहीं, बल्कि शिवपुरी के लोगों के दिन की पहली जरूरत बन चुकी है. शहर के रग-रग में बसे इस स्वाद का जादू ऐसा है कि आज भी हजारों शिवपुरी वासियों की सुबह तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक उनके होठों से जैन साहब की कड़क चाय की पहली चुस्की न लग जाए. पिता की छोटी सी टपरी से शुरू हुआ पांच दशकों का सफरइस स्वाद की विरासत को जिंदा रख रहे दुकान के संचालक दीपक जैन जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यादों का एक खूबसूरत कारवां सामने आ जाता है. दीपक बताते हैं कि यह सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उनके पिता के पसीने से सींची गई एक पुश्तैनी थाती है. दशकों पहले उनके पिता ने एक बेहद छोटी सी टपरी से इस सफर का आगाज किया था. उस दौर में बोया गया मेहनत, ईमानदारी और शुद्धता का बीज आज एक ऐसा वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी छांव में पूरा शिवपुरी चाय का आनंद लेता है. दीपक जैन बड़े गर्व से कहतेपिताजी ने हमेशा एक ही सीख दी कि चाहे दुनिया बदल जाए, लेकिन हमारी चाय की गुणवत्ता और ग्राहकों के प्रति हमारा आदर कभी नहीं बदलना चाहिए. यही वजह है कि आधी सदी बीत जाने के बाद भी हमारी चाय का वही पारंपरिक और ठेठ स्वाद आज भी जस का तस बरकरार है, जिसने 50 साल पहले लोगों को पहली बार अपना दीवाना बनाया था. अफसरों की गंभीर चर्चा से लेकर युवाओं के ठहाकों तकजैन साहब की चाय का सम्मोहन देखना हो, तो यहां सुबह से शाम तक उमड़ने वाले हुजूम को देखिए। इस दुकान की बेंच पर समाज का हर रंग एक साथ चाय की चुस्कियों में घुला नजर आता है. कॉलेज जाने वाले युवाओं के बेबाक ठहाके हों, फुर्सत में बैठे बुजुर्गों की पुरानी यादें हों, दिनभर की भागदौड़ के बीच सुस्ताते व्यापारी हों, या फिर कलेक्ट्रेट के गंभीर अधिकारी—हर कोई यहाँ आकर एक ही रंग में रंग जाता है. सिर्फ चाय का ठिकाना नहीं, शिवपुरी की यादों का एक जीवंत हिस्सापचास वर्षों का यह लंबा और सुहाना सफर सिर्फ चाय बेचने और मुनाफा कमाने की कहानी नहीं है। यह कहानी है शिवपुरी की तीन पीढ़ियों के आपस में जुड़ने की, उनकी खुशियों और चर्चाओं की. यहां कई ऐसे चेहरे रोज सुबह दिखाई देते हैं जो कभी अपने बचपन में पिता की उंगली थामकर यहां पहली बार चाय का स्वाद चखने आए थे, और आज वे खुद अपने बच्चों और पोतों को इस ऐतिहासिक स्वाद का हिस्सा बनाने यहाँ लेकर आते हैं.वक्त बदला, कलेक्ट्रेट पुराना हो गया, शहर की सड़कें चौड़ी हो गईं, लेकिन जैन चाय दुकान की वो चिर-परिचित खौलती चाय. उसकी महक आज भी शिवपुरी के अपनत्व, संस्कृति और पहचान का सबसे खूबसूरत प्रतीक बनी हुई है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Shivpuri,Madhya Pradesh Source link

झारखंड

मोदी सरकार के 12 वर्ष: भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शाही ने गिनाईं उपलब्धियां

भास्कर न्यूज |दुमका भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने शुक्रवार को दुमका परिसदन में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष देश के विकास और सुशासन के लिए ऐतिहासिक रहे हैं। शाही ने कहा कि वित्तीय हस्तांतरण के मामले में झारखंड को 2004-14 के दौरान 56,090 करोड़ मिले थे। 2014-24 के दौरान यह राशि बढ़कर 2,26,444 करोड़ हो गई। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक यह आंकड़ा 3,17,069 करोड़ तक पहुंच चुका है। यह 2004-14 की तुलना में 465 प्रतिशत अधिक है। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि रेलवे का वार्षिक औसत बजट 2009-14 के 457 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 7,302 करोड़ हो गया है। झारखंड को जोड़ने वाली 7 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हैं। 57 रेलवे स्टेशनों का आधुनिक पुनर्विकास जारी है। सड़क क्षेत्र में 3,633 किमी से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग निर्मित किए गए हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्होंने एम्स देवघर और दुमका सहित पांच जिलों में केंद्र द्वारा स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों का उल्लेख किया। आदिवासी कल्याण के संदर्भ में उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 79,150 करोड़ के बजट का जिक्र किया। प्रेसवार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील सोरेन, प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल, भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश मंडल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। Source link

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Bokaro-Jharkhand MEMU Trains Resume | WBCS Exam Relief

दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा मंडल ने पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS) परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों और आम यात्रियों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंडल ने 14 जून को पहले रद्द की गई कुछ मेमू ट्रेनों को फिर से चलाने का फैसला किया है . इस कदम से बोकारो, चंद्रपुरा, भोजूडीह, गोमो सहित झारखंड के कई क्षेत्रों के यात्रियों को लाभ मिलेगा। रेलवे के अनुसार, ये ट्रेनें पहले रोलिंग ब्लॉक और मरम्मत कार्यों के कारण रद्द या आंशिक रूप से रद्द की गई थीं। हालांकि, WBCS परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की यात्रा को देखते हुए, इन ट्रेनों को सामान्य रूप से बहाल करने का निर्णय लिया गया है। जिन मेमू ट्रेनों को बहाल किया गया है, उनमें आद्रा–मिदनापुर–आद्रा मेमू (68090/68089), आद्रा–विल्ली–आद्रा मेमू (68077/68078), भोजूडीह–चंद्रपुरा–भोजूडीह मेमू (68079/68080) और चक्रधरपुर–गोमो–चक्रधरपुर मेमू (18116/18115) शामिल हैं। ये सभी ट्रेनें 14 जून को अपने निर्धारित समय और मार्ग पर चलेंगी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय का उद्देश्य परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों को उनके परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में होने वाली असुविधा को दूर करना है। इससे आम यात्रियों को भी यात्रा में सुविधा मिलेगी। दक्षिण पूर्व रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रेनों की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त कर लें और रेलवे द्वारा जारी नवीनतम सूचनाओं पर ध्यान दें। इस फैसले से बोकारो और आसपास के हजारों यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। Source link

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जोरहाट IAF AN-32 क्रैश: क्‍यों जांबाजों का काल बन रहे हैं ऐसे...

होमताजा खबरदेश IAF AN-32 क्रैश: क्‍यों जांबाजों का काल बन रहे हैं ऐसे मिशन, जानें एक-एक बात Last Updated:June 13, 2026, 19:19 IST Jorhat IAF AN-32 Crash: जोरहाट में भारतीय वायुसेना के AN-32 एयरक्राफ्ट क्रैश के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर AN-32 जैसे एयरक्राफ्ट किन हालात में उड़ान भरते हैं और ऐसे मिशन इतने चुनौतीपूर्ण क्यों माने जाते हैं? भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल ने उस बातों का खुलासा किया है, जिसकी वजह से मिशंस पर गए एयरक्राफ्ट लगातार हादसे का शिकार हो रहे हैं. असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना का एयरक्राफ्ट एएन-32 क्रैश हो गया है. Jorhat IAF AN-32 Crash: असम के जोरहट एयरफोर्स स्‍टैशन पर लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एएन-32 प्‍लेन क्रैश हो गया है. इस क्रैश में भारतीय वायुसेना के पांच जांबाज शहीद हो गए हैं. शहीदों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और दानिश आलम के नाम शामिल हैं. इस हादसे के बाद एक बार उन कारणों को लेकर बहस छिड़ गई है, जिनकी वजह से मिशन के दौरान प्‍लेन क्रैश हो रहे हैं. भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल रहे एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि एएन-32 एयरक्राफ्ट पिछले चार दशकों से भारतीय वायुसेना की ट्रांसपोर्ट फ्लीट की रीढ़ रहा है. 1980 के दशक के मध्य में भारतीय वायुसेना में शामिल होने वाला यह एयरक्राफ्ट तब से लेकर आज तक लद्दाख, पूर्वोत्तर भारत, अंडमान-निकोबार सहित देश के अन्य हिस्सों में अपने मिशन्‍स को सफलतापूर्वक पूरा करता आया है. जोरहाट में भी AN-32 एयरक्राफ्ट ने अपने अलग-अलग ऑपरेशंस को अब तक सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. आखिर क्‍या हो सकते हैं हादसे के कारण? हादसे की संभावित वजहों को लेकर पूर्व एयर मार्शल का कहना है कि किसी भी फ्लाइट के दो सबसे अहम फेज ऑफ और लैंडिंग होते है. दुनिया भर में लगभग 90 प्रतिशत एयरक्राफ्ट दुर्घटनाएं इन्हीं दो फेज के दौरान होती हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान एयरक्राफ्ट अपनी परफॉर्मेंस कैपेसिटी की लिमिट के बेहद करीब काम कर रहा होता है. एयरक्राफ्ट की स्‍पीड कम होती है और पायलट को बेहद सीमित सयम में कई अहम फैसले लेने पड़ते हैं. लैंडिंग के दौरान यदि कोई गंभीर तकनीकी खराबी, इमरजेंसी सिचुएशन या कंट्रोल से संबंधित कोई दिक्‍कत सामने आ जाए तो पायलट के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय होता है. जमीन के करीब होने और स्‍पीड कम होने की वजह से दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसके अलावा, जोरहाट सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में उड़ान भरना सामान्य एयरक्राफ्टन ऑपरेशन जैसा नहीं होता है. मिलिट्री फ्लाइट्स और और कमर्शियल फ्लाइट्स में सबसे बड़ा अंतर यही है कि मिलिट्री एयरक्राफ्ट उन इलाकों में जाते हैं जहां सामान्य पैसेंजर एयरक्राफ्ट नहीं जाते हैं. AN-32 जैसे एयरक्राफ्ट घाटियों, पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में उड़ान भरते हैं, जहां कई बार रडार कवरेज भी नहीं होता है. मौसम तेजी से बदलने, बादल आने, बारिश होने या विजिबिलिटी कम होने की स्थिति में फ्लाइट ऑपेशन बेहद मुश्किल हो जाता है. ऐसे हालात में पायलटों को संकरी घाटियों के बीच से गुजरते हुए छोटे एयरस्ट्रिप तक पहुंचना पड़ता है. कई बार रनवे पूरी तरह डेवलप भी नहीं होते हैं. यही कारण है कि इस तरह के मिशंस को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. छोटी गलती भी बन सकती है बड़ा खतरा पूर्व एयर मार्शल के अनुसार, पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में मौजूद कई एयरस्ट्रिप केवल 3,000 से 3,500 फीट लंबे होते हैं. कुछ जगहों पर केवल एक दिशा से ही एयरक्राफ्ट को उतारा जा सकता है. ऐसी स्थिति में पायलट के पास गलती सुधारने की बहुत कम गुंजाइश होती है. यदि एयरक्राफ्ट तय लैंडिंग प्‍वाइंट से आगे उतरता है तो रनवे की लंबाई कम पड़ सकती है. यदि वह तय स्थान से पहले नीचे आ जाए तो पेड़ों और पहाडि़यों से टकराने का खतरा पैदा हो जाता है. यही वजह है कि इन इलाकों में लैंडिंग को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. बादल और घाटियां भी बन सकती हैं जोखिम पूर्व एयर मार्शल ने पुराने हादसों का भी जिक्र करते हुए बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम और घने बादलों के बीच उड़ान भरना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है. कई बार विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि घाटियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है. कुछ पुराने मामलों में एयरक्राफ्ट गलत घाटी में दाखिल हो गए. हालांकि पायलट्स को ऐसी परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए ट्रेंड किया जाता है. उन्‍हें उन सुरक्षित रास्‍तों के बारे में बताया जाता है, जहां से सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है. लेकिन कुछ घाटियां ऐसी भी होती हैं जहां गलती की गुंजाइश ना के बराबर भी नहीं होती है. किसना सुरक्षित है आईएएफ का एएन-32 एयरक्राफ्टपूर्व एयर मार्शल के अनुसार, केवल दुर्घटनाओं के आधार पर एएन-32 को असुरक्षित नहीं एयरक्राफ्ट कहा जा सकता है. यह एयरक्राफ्ट वर्षों से भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट विमानों में शामिल रहा है. इसका इस्तेमाल जवानों और हथियारों के साथ-साथ राशन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने में किया जाता रहा है. इसके अलावा यह एयरक्राफ्ट पैरा-असॉल्ट मिशन और सर्च एंड रेस्क्यू सहित अन्य कई मिशंस के लिए इस्‍तेमाल‍ किया जाता रहा है. समय के साथ इन एयरक्राफ्ट्स को मॉर्डन इक्‍यूपमेंट्स और नए एवियोनिक्स सिस्टम से भी लैस किया गया है. क्‍या हो सकती हैं जोरहाट में एएन-32 क्रैश की वजहफिलहाल जोरहाट में हुए एएन-32 क्रैश की असल वजहों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा. भारतीय वायुसेना सहित संबंधित एजेंसियों के अधिकारी क्रैश साइट पर पहुंच चुके हैं. मलवे से एयरक्राफ्ट के ब्‍लैक बॉक्‍स को खोजने की कवायद शुरू हो चुकी है. साथ ही, एयरक्राफ्ट के मलवे के सैंपल को भी इकट्ठा किया जा रहा है. जल्‍द ही पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर के बीच हुई बातचीत की पड़ताल भी की जाएगी. इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही एएन-32 के क्रैश की वजहों के बारे में पता चल सकेगा. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation,

झारखंड

प्रोटीन और फाइबर का पावरहाउस है मिक्स दाल चीला, मिनटों में तैयार...

X प्रोटीन और फाइबर का पावरहाउस है ये चीला, मिनटों में तैयार करें हेल्दी नाश्ता   अगर आप हेल्दी और स्वादिष्ट नाश्ते की तलाश में हैं, तो मिक्स दाल चीला अच्छा ऑप्शन हो सकता है. यह नाश्ता प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है और पूरे परिवार के लिए फायदेमंद है. मिक्स दाल चीला बनाने के लिए हरा मूंग दाल, पीला मूंग दाल, काला चना और अरवा चावल को रातभर पानी में भिगो दें. अगले दिन इसमें हरी मिर्च और अदरक मिलाकर पीस लें. ध्यान रखें कि घोल न ज्यादा पतला हो और न ज्यादा गाढ़ा. अब इसमें कद्दूकस की हुई लौकी, बारीक कटा प्याज, नमक, हल्दी, गरम मसाला और जीरा-अदरक-लहसुन-मिर्च का पेस्ट मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. इसके बाद गर्म तवे या पैन पर हल्का सरसों तेल लगाकर घोल को चीले की तरह फैलाएं और दोनों तरफ से सुनहरा व कुरकुरा होने तक सेंक लें. इसे टमाटर या धनिया की चटनी के साथ परोसें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

झारखंड

चतरा में ढाई लाख का ब्राउन शुगर जब्त, 4 गिरफ्तार:बाबा घाट के...

चतरा पुलिस ने अंतरराज्यीय ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सदर थाना पुलिस की विशेष टीम ने बाबा घाट मैदान स्थित एक खंडहरनुमा मकान में छापेमारी कर ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री करते चार तस्करों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार तस्करों की पहचान देवरिया निवासी अजीत पांडेय व लौकेश कुमार, बिंड मुहल्ला निवासी मो० इरफान और चुड़ीहार मुहल्ला निवासी मो० एजाज के रूप में की गई है। मुख्य सरगना अजीत पांडेय पर चतरा सदर थाने में एनडीपीएस एक्ट और चोरी के कुल 7 संगीन मामले पहले से दर्ज हैं। जब्त ब्राउन शुगर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब ढाई लाख रुपए आंकी गई है। एसपी को गुप्त सूचना मिली थी कि बाबा घाट मैदान के पास कुछ अपराधी नशे के कारोबार में लिप्त हैं। सूचना की पुष्टि के बाद, एसडीपीओ सन्नी वर्धन और सदर थाना प्रभारी अवधेश सिंह के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। पुलिस टीम की छापेमारी के दौरान, पुलिस ने मौके से ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री और नशा करते हुए चार शातिर तस्करों को संदिग्ध अवस्था में दबोच लिया। तलाशी में उनके पास से कुल 12.12 ग्राम अवैध ब्राउन शुगर बरामद हुआ। पुलिस की गिरफ्त में आए इन अपराधियों का पुराना और लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। Source link

झारखंड

आभूषण विक्रेता से 13 लाख के गहनों की छिनतई:गिरिडीह के सरिया में...

गिरिडीह जिले के सरिया थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात एक आभूषण विक्रेता से करीब 13 लाख रुपए मूल्य के गहनों से भरा बैग छीन लिया गया। बाइक सवार दो अपराधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, बड़की सरिया निवासी सचिन कुमार की सरिया बाजार में आभूषण की दुकान है। शुक्रवार रात दुकान बंद करने के बाद वह अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। उनके पास एक थैला था, जिसमें दुकान के कीमती आभूषण रखे हुए थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे बाइक सवार दो अपराधियों ने उनकी बाइक में जोरदार धक्का मार दिया। धक्का लगने से सचिन कुमार सड़क पर गिर पड़े। अपराधियों ने इसी का फायदा उठाकर उनके पास रखा आभूषणों से भरा थैला छीन लिया और तेजी से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि थैले में लगभग 13 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण थे। घटना की सूचना मिलते ही सरिया पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। सरिया नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि फागू पंडित भी घटनास्थल पर पहुंचे और घटना पर चिंता व्यक्त की। एसडीपीओ धनंजय कुमार राम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बाइक सवार अपराधियों द्वारा छिनतई की घटना की पुष्टि हुई है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। उन्होंने जल्द ही मामले का खुलासा करने का आश्वासन दिया। इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों ने बाजार क्षेत्र में पुलिस गश्ती बढ़ाने की मांग की है। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। Source link

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