भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

ताज़ा खबर

डेमोग्राफी चेंज कहां और कितना हुआ? अमित शाह ने मांगी जमीनी हकीकत...

होमताजा खबरदेश अमित शाह की सख्ती: बदलती डेमोग्राफी पर हर जिले की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश Last Updated:June 13, 2026, 17:22 IST गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर देशभर में पिछले कुछ सालों में कई जगहों पर हुए जनसंख्या अनुपात बदलाव का आंकलन करने के लिए एक कमीशन बनाया गया है जिसकी बैठक आज गृह मंत्री के साथ हुई थी. ख़बरें फटाफट अमित शाह ने अधिकारियों को डेमोग्राफी चेंज पर स्पष्ट आदेश दिया है. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. डेमोग्राफी चेंज यानि जनसंख्या अनुपात में बदलाव जिसकी जानकारी सरकार और अन्य एजेंसियों को समय समय पर मिल रही है उस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह ने डेमोग्राफी चेंज पर बनाए गए कमीशन के बैठक की अध्यक्षता की. गृह मंत्री अमित शाह ने कमीशन के सदस्यों को आदेश दिया कि सीमावर्ती इलाकों मेट्रो और इंडस्ट्रियल एरिया जो देशभर में हैं उनका दौरा कमीशन के सदस्य करें और एक रिपोर्ट बनाएं कि ऐसी जगहों पर पिछले कुछ सालों में जनसंख्या अनुपात में कितना बदलाव हुआ है. About the Author अमित पांडेयविशेष संवाददाता अमित पांडेय News 18 इंडिया से करीब डेढ़ दशक से जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के अपने इस करियर में उन्होंने क्राइम, कोर्ट, गृह मंत्रालय और संसद की गतिविधियों की रिपोर्टिंग की है. अभी स्पेशल करिस्पांडेट के तौर पर गृह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

बेकार सुजनी से बनाया फैशनेबल कोट, Gen-Z के कपड़ों में लगाया मधुबनी...

Last Updated:June 13, 2026, 08:16 IST Ranchi Gauri’s Innovative Fashion: रांची की गौरी ने मॉडर्न कपड़ों को ऐसा ट्रेडिशनल टच दिया है कि उनके बनाए कपड़े पूरे देश के साथ-साथ, कनाडा तक डिलीवर हो रहे हैं. वे सुजनी जैसी बेकार पड़ी चीजों से कोट बनाती हैं, शर्ट्स, क्रॉप टॉप वगैरह पर मधुबनी पेंटिंग करती हैं. उनका कलेक्शन युवाओं को खासतौर पर पसंद आ रहा है. ख़बरें फटाफट रांची. क्रिएटीविटी कई तरह की होती है पर जब बेकार मान ली गई चीजों का बेहतरीन इस्तेमाल कर लिया जाए तो ऐसी रचनात्मकता की बात ही कुछ और होती है. जैसे रांची की गौरी को ही लें. वे बच्चों को सुलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सुजनी से इतने सुंदर कोट बनाती हैं कि जेन जी भी उनके फैन बन गए हैं. गौरी बताती है, बिहारी घरों में खासतौर पर बच्चों को सुलाने के लिए सुजनी हाथ से बनायी जाती है, जो बाद में बेकार हो जाती है. हमने बस उसी सुजनी से फैशनेबल कोट बनाया है और कई सारे टॉप बनाए हैं. इसके अलावा आजकल के युवाओं को ध्यान में रखते हुए क्रॉप टॉप, ट्रेंच कोट इन सारी चीजों पर हमने मधुबनी पेंटिंग की है. जिससे आजकल के युवाओं के फैशन में ट्रेडिशनल पेंटिंग का भी तड़का लग गया है. गौरी बताती हैं, हमारे साथ 40 आर्टिस्ट जुड़े हुए हैं, जो हैंड प्रिंटिंग का काम करते हैं. हमारे पास आपको ऐसे यूनिक कलेक्शन मिलेंगे जो शायद ही आपने कभी कहीं देखा होगा. आलम यह है कि कनाडा से ऑर्डर आते हैं और पैन इंडिया डिलीवरी होती है. घर से ही शुरू किया सफरराजधानी रांची के कांके की रहने वाली गौरी बताती हैं, मैंने अपने घर से ही यह काम शुरू किया. अब हमारा ऑफिशियल वेबसाइट व इंस्टाग्राम पेज सब कुछ है. क्योंकि, मधुबनी पेंटिंग हमारे कल्चर का हिस्सा है. ऐसे में दादी-नानी सबको देखते आ रही हूं बनाते हुए और बाजार में कई सारे मधुबनी पेंटिंग की साड़ी और सलवार सूट आपको नजर आ जाएंगे. लेकिन युवाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा कुछ टॉप और शर्ट मुझे नजर नहीं आ रहा था. तब मैंने सोचा क्यों ना आजकल के युवा को ध्यान में रखते हुए फैशनेबल कोट, ट्राउजर, कुर्ती, लॉन्ग कुर्ती, ट्रेंच कुर्ती ये सारी चीजें उतारूं और इन पर खूबसूरत पेंटिंग बनाई जाए. ऐसे में जितनी भी ऑफिसर वर्ग की महिलाएं या फिर जो सरकारी नौकरी करने वाली महिलाएं व कॉर्पोरेट वर्ल्ड में काम करती हैं उनके बीच यह कुर्तियां काफी हिट हो रही हैं. युवाओं के लिए क्रॉप टॉप और फैशनेबल लूज शर्टइसके अलावा हम युवाओं के लिए क्रॉप टॉप, क्रॉप शर्ट, लूज फिटिंग शर्ट ये सारी चीजें बनाते हैं. इनमें खूबसूरत मधुबनी पेंटिंग आर्ट देखने को मिलेगी. राम और सीता की जोड़ी देखने को मिलेगी. मछली और शादी की हो रही पवित्र रस्म और सिंदूर दान जैसी चीज आपको अपने शर्ट पर देखने को मिलेगी, जो आपको भीड़ से एकदम अलग यूनिक लुक देगी. यही कारण है कि एक बार जो हमसे सामान ले जाता है वह दोबारा हमारे पास ही लौट कर आता है. ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों जगह से हर दिन 15-20 ऑर्डर आराम से आ जाते हैं. एक टॉप की कीमत 3 से ₹5000 की रेंज में होती है. क्योंकि, इसे बनाने में बहुत मेहनत लगती है. एक-एक शर्ट में पेंटिंग करने में एक से दो दिन का वक्त लगता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

गुमला में बाइक ने एक व्यक्ति को मारी टक्कर:सड़क क्रॉस करते वक्त...

गुमला जिले के भरनो थाना क्षेत्र अंतर्गत भरनो स्कूल चौक स्थित सर्विस रोड पर शनिवार को एक तेज रफ्तार बाइक ने सड़क पार कर रहे व्यक्ति को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में बाइक चालक सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में एक व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर किया गया है। घायलों की पहचान भरनो स्कूल चौक निवासी ठेला संचालक मोहन साहू (45), बाइक चालक खटको गांव निवासी रोपना उरांव (19) और बाइक सवार इसी गांव के महावीर उरांव (18) के रूप में हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद मोहन साहू की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रिम्स रांची भेजा गया, जबकि रोपना उरांव और महावीर उरांव को सदर अस्पताल गुमला रेफर किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोहन साहू दुकान से प्याज खरीदकर अपने घर की ओर सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान सिसई की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मोहन साहू सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। बाइक चालक रोपना उरांव और पीछे बैठे महावीर उरांव भी बाइक समेत सड़क पर गिरकर घायल हो गए। दुर्घटनाग्रस्त बाइक कुछ दूर तक घिसटते हुए गई और एक कार से भी टकरा गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्काल घायलों की मदद की और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर भरनो पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों और पुलिस के सहयोग से तीनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भरनो पहुंचाया गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बाइक को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों ने स्कूल चौक और आसपास के क्षेत्रों में तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण लगाने तथा सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। Source link

झारखंड

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ पहुंचे देवघर:बाबा बैद्यनाथ मंदिर में की पूजा,...

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ शनिवार को देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। उनके आगमन को लेकर मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें बाबा मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कराया गया। मंत्री संजय सेठ ने श्रद्धापूर्वक जलार्पण एवं पूजा कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए संजय सेठ ने कहा कि वे बाबा बैद्यनाथ के दरबार में आशीर्वाद लेने आए हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने बाबा भोलेनाथ से विशेष आशीर्वाद मांगा। उनकी प्रार्थना रही कि देश मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बने। देश ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की रक्षा राज्य मंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में देश ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। संजय सेठ ने बताया कि दुनिया के कई हिस्सों, विशेषकर मध्य-पूर्व के देशों में प्रतिकूल परिस्थितियां होने के बावजूद भारत आर्थिक, सामाजिक और सामरिक क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गरीबों, महिलाओं और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। करोड़ों परिवारों को शौचालय, आवास, गैस कनेक्शन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिला है। महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर भी सरकार लगातार कार्य कर रही है। मंदिर में पूजा के बाद संजय सेठ भाजपा कार्यालय भी पहुंचे। वहां उन्होंने फलदार पौधों का रोपण किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत एवं सम्मान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। Source link

ताज़ा खबर

400 साल पुरानी शाही बावड़ी, जिसमें छिपा है इंजीनियरिंग का अनोखा चमत्कार;...

Last Updated:June 13, 2026, 16:16 IST Royal Stepwell of Golconda Fort: हैदराबाद के ऐतिहासिक गोलकोंडा किले में स्थित शाही बावड़ी आज भी अपनी अनूठी बनावट और रहस्यमयी इतिहास के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है. यह किले की सबसे बड़ी पानी की बावड़ी मानी जाती है, जो कुतुबशाही शासनकाल की उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली का बेहतरीन उदाहरण है. इतिहासकारों के अनुसार बावली के बीच कभी एक सुंदर फव्वारा हुआ करता था, जिसके आसपास शासक बैठकर प्राकृतिक वातावरण और पानी की फुहारों का आनंद लेते थे. यह बावड़ी केवल सौंदर्य का केंद्र नहीं थी, बल्कि पूरे किले तक पानी पहुंचाने का प्रमुख स्रोत भी थी. ख़बरें फटाफट हैदराबाद. इतिहास के पन्नों को समेटे भाग्यनगर यानी हैदराबाद का ऐतिहासिक गोलकोंडा किला आज भी अपने भीतर कई ऐसे रहस्य और अचंभे छुपाए हुए हैं, जिन्हें देखकर लोग दंग रह जाते हैं. स्थापत्य कला और बेहतरीन इंजीनियरिंग के तालमेल का ऐसा ही एक उदाहरण इस किले के भीतर स्थित शाही बावड़ी है, जो पर्यटकों के लिए हमेशा से चर्चा का विषय रही है. यह बावड़ी न सिर्फ इस दुर्ग की सबसे बड़ी पानी की बावड़ी है बल्कि यह कुतुबशाही दौर के शाही वैभव और उनकी उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली की जीती-जागती गवाही भी देती है. इतिहासकारों और स्थानीय जानकारों के मुताबिक, इस विशाल बावड़ी की गहराई बहुत ज्यादा है. प्राचीन काल में इस पूरी बावड़ी के ठीक बीचों-बीच एक बेहद खूबसूरत और कलात्मक फव्वारा हुआ करता था. किले के सुल्तान और राजा अक्सर इसके सामने बने ऊंचे सुरक्षित स्थानों पर बैठकर ठंडी हवाओं के साथ इस फव्वारे के नयनाभिराम दृश्यों और पानी की फुहारों का आनंद लिया करते थे. मनोरंजन और खूबसूरती से अलग, इस बावड़ी का मुख्य काम बेहद रणनीतिक और जरूरी था. सलीके से बनाई गई प्राचीन सीढ़ियां आज भी सुरक्षित हैं पुराने समय में इस गहरी बावड़ी से ही प्राचीन स्वदेशी तकनीकों का उपयोग करके पूरे गोलकोंडा किले के भीतर पानी की निर्बाध सप्लाई की जाती थी. दुर्ग की अत्यधिक ऊंचाई पर होने के बावजूद इस अनूठी व्यवस्था से महल के कोने-कोने तक पानी पहुंचता था. वर्तमान में इस बावड़ी की बनावट को देखा जाए, तो इसके एक तरफ नीचे पानी तक उतरने के लिए बेहद सलीके से बनाई गई प्राचीन सीढ़ियां आज भी सुरक्षित हैं. चूंकि इसकी गहराई काफी ज्यादा है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह जगह संवेदनशील मानी जाती है. पर्यटकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है यह कदम पुरातत्व विभाग ने इसी वजह से आम पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गहरी बावड़ी के चारों तरफ एक मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण करा दिया है. इस दीवार के बनने से यहां आने वाले लोग और बच्चे बिना किसी खतरे के इस ऐतिहासिक और बेजोड़ धरोहर को करीब से निहार सकते हैं. गोलकोंडा किला घूमने आने वाले हर मुसाफिर के लिए यह बावड़ी अतीत के किसी सुनहरे सफर जैसी महसूस होती है. About the Author deep ranjan दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Hyderabad,Telangana Source link

झारखंड

जिस महुआ से बनता है एल्कोहल, उसी से शुगर-फ्री कुकीज-चॉकलेट बना रहीं...

Last Updated:June 13, 2026, 09:03 IST Mahua Chocolate & Cookies: रांची की सलोनी और उनकी टीम महुआ से कुकीज, चॉकलेट और सिरप जैसे बहुत से हेल्दी आइटम बना रही हैं. इन कुकीज और चॉकलेट की खासियत यह है कि ये बेहद कम कैलोरी में तैयार होती हैं और शुगर न के बराबर होती है. इससे डायबिटीज पेशेंट्स, कैलोरी कांशस लोग बिना गिल्ट इनका सेवन कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट रांची. खूंटी के जंगलों में खासतौर पर महुआ का पेड़ बहुत पाया जाता है. महुआ झारखंड में विशेष पर शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होता है. लेकिन गांव की महिलाएं इससे चॉकलेट और बिस्किट बना रही हैं, जो खाने में काफी स्वादिष्ट हैं. इनमें कैलोरी की मात्रा न के बराबर होती है और शुगर भी नहीं होती. इसीलिए ये डायबिटीज के पेशेंट के लिए भी अच्छे माने जाते हैं. साथ ही इनमें प्रोटीन और दूसरे जरूरी विटामिन का भंडार भी होता है. सारे प्रोडक्ट को दिखाते हुए सलोनी बताती हैं, खूंटी के जंगलों से खासतौर पर हम महिलाओं द्वारा यह चुनकर मंगवाते हैं. पहले ये महिलाएं इसी की शराब बनाती थी और बेचती थी. लेकिन इससे ना उनको अधिक मुनाफा होता था और यह समाज के लिए भी सही नहीं था. ऐसे में हमने महुआ में एक्सपेरिमेंट किया और आज चॉकलेट से लेकर कुकीज तक इससे बनवा रहे हैं. खाने में भी लगते हैं बहुत टेस्टीसलोनी बताती हैं, आप एक बार खाकर देखिए, आप नहीं बोल पाएंगे कि महुआ का है, खाने में तो बड़े ब्रांड के चॉकलेट को टक्कर देता है, डायबिटीज पेशेंट चाहे जितना खा लें. क्योंकि, इसमें कैलोरी 5 से 10 है, इससे अधिक नहीं. हमने इस पर रिसर्च भी की है. हमारे पास इसकी कैंडी, अचार व सिरप तक मिलेगा. मतलब आपको केक में कोई अलग फ्लेवर खाना है, तो आप इसके सिरप का इस्तेमाल कर सकते हैं. शुद्धता और सफाई का खास ध्यान रखते हैंशराब बनाने वाली चीज से महिलाओं द्वारा इतनी सारी चीज बनवाने का काम कर रहे हैं. इससे लगभग 300 महिलाओं को भी रोजगार और इनकम दोनों मिल रहा है. हमारा अपना क्लस्टर है, जहां से हम ये सारी चीजें लेकर आते हैं, महिलाएं अपने हाथों से ये सारी चीजें तैयार करती हैं. जिसमें शुद्धता और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है. क्या होती है कीमतअगर आपको इनकी कुकीज लेनी है, तो इसकी कीमत ₹50-100 की रेंज में होती है. वहीं, चॉकलेट भी इसकी रेंज में है. यानी 50 से 100 के अंदर आपको कैंडी से लेकर चॉकलेट हर एक चीज देखने को मिल जाएगी. अगर सिरप लेनी है, तो 200-250 रुपये कीमत होती है. आप अपने बजट और जरूरत के मुताबिक खरीदारी कर सकते हैं. महुआ से ऐसे आइटम बनाना इनोवेटिव तो है ही साथ ही कैलोरी कांशस और शुगर पेशेंट्स के लिए किसी वरदान जैसा है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

रामगढ़ में गैस रिसाव से चार युवकों की मौत:बंद खदान में उत्खनन...

रामगढ़ जिले के गिद्दी-रामगढ़ सीमावर्ती वन क्षेत्र में एक बंद खदान में गैस रिसाव से चार लोगों की मौत हो गई। यह घटना तब हुई, जब ये लोग खदान के भीतर उत्खनन कार्य कर रहे थे। मृतकों की पहचान आशीष रजवार (25), किशोर रवानी (35), देवा कुमार बेदिया (25) और डब्लू बेदिया (30) के रूप में हुई है। घटना के वक्त सबसे पहले एक युवक गैस रिसाव की चपेट में आया और वहीं बेहोश होकर गिर गया। एक बचाने में तीन भी आए चपेट में उसके बाकी तीन साथी उसे बचाने के लिए खदान में उतरे तो वो भी जहरीली गैस की चपेट में आकर वहीं गिर। उनके एक अन्य साथी ने गांव वालों को घटना की सूचना दी। सूचना मिलने पर ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे। चारों युवकों को तत्काल पुलिस की मदद से अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने इनमें से दो को अस्पताल पहुंचने पर मृत बताया। वहीं अन्य दो ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी किए गए तैनात घटना के बाद, पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है। मृतकों के परिजन भी वहां पहुंच गए हैं। चारों शवों का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। स्थानीय लोगों ने बताया कि एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में बाकी तीन लोग भी गैस रिसाव की चपेट में आ गए। उनका कहना है कि इस क्षेत्र की बंद खदानों में गैस रिसाव की समस्या गंभीर है। Source link

झारखंड

बोकारो से चलने वाली बसों का बढ़ा किराया:रांची का नॉन-एसी किराया 250...

बोकारो में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ा है। ईंधन के दाम बढ़ने से बसों का किराया बढ़ा दिया गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और छोटे व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बोकारो से रांची मार्ग पर किराए में अंतर देखा जा रहा है। यात्री ईबु उल्लाह ने बताया कि सरकारी वातानुकूलित 2×2 बसों में 300 रुपए किराया लिया जा रहा है, जबकि निजी बसें इसी रूट पर 350 रुपए वसूल रही हैं। उन्होंने एक ही मार्ग पर किराए में इस असमानता पर सवाल उठाया। बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर बसें चलाना संभव नहीं निजी बस कंडक्टर मोहम्मद अशरफ ने किराए में वृद्धि का कारण डीजल की बढ़ती कीमतें बताईं। उन्होंने कहा कि परिचालन लागत बढ़ने के कारण बोकारो-रांची मार्ग पर प्रति यात्री 50 रुपए किराया बढ़ाना पड़ा है। अशरफ के अनुसार, बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर बसें चलाना संभव नहीं था। टाटा रूट के टिकट काउंटर संचालक मोफीज उद्दीन ने जानकारी दी कि टाटा, गोड्डा, साहिबगंज और ललमटिया जैसे कई अन्य मार्गों पर भी किराए में 50 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन और बस संचालकों को मिलकर एक समान किराया दर निर्धारित करना चाहिए, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। धनबाद और रामगढ़ रूटों पर भी किराए में वृद्धि दर्ज की गई है। टिकट कंडक्टर मोहम्मद हुसैन के मुताबिक, रामगढ़ का नॉन-एसी किराया 150 रुपए से बढ़कर 180 रुपए हो गया है। इसी तरह, रांची का नॉन-एसी किराया 250 रुपए से बढ़ाकर 280 रुपए कर दिया गया है। बोकारो के निवासियों ने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन किराए की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता के जीवन और घरेलू बजट पर गंभीर असर पड़ेगा। Source link

ताज़ा खबर

vaibhav suryavanshi special talent revealed by uncle in samastipur thanked to bcci

होमखेलक्रिकेट वैभव सूर्यवंशी का स्पेशल टैलेंट आया सामने! चाचा ने खोला राज,BCCI का जताया आभार Last Updated:June 13, 2026, 15:09 IST Vaibhav Suryavanshi: IPL के बाद बेबी बॉस यानी वैभव सूर्यवंशी के लिए लगातार खुशियां ही मिल रही है. इंडिया ए टीम में चयन होने के बाद बीसीसीआई ने टी-20 टीम के साथ इंडियन टीम में चयन हुआ है. उन्होंने मात्र 15 साल 15 दिन में चयनित होकर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा. समस्तीपुर के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद विश्व क्रिकेट में तहलका मचा दिया है. उनकी सफलता पर उनके चाचा ने कई राज खोले हैं. साथ ही नई खुशी के लिए बीसीसीआई का धन्यवाद कहा है. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: समस्तीपुर जिले के ताजपुर से निकलकर क्रिकेट के क्षेत्र में तेजी से पहचान बना रहे कम उम्र की खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. हाल ही में टीम इंडिया में उनके चयन की खबर सामने आने के बाद हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर वैभव के अंदर ऐसी कौन सी खास बात थी जिसने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचा दिया. इस सवाल का जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने वैभव के छोटे चाचा राजीव सूर्यवंशी से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि बचपन से ही वैभव बाकी बच्चों से अलग थे. खेल के प्रति उनका जुनून, घंटों अभ्यास करने की आदत और खुद को हर दिन बेहतर बनाने की जिद ही उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आई है. परिवार को हमेशा विश्वास था कि एक दिन वह बड़ा नाम जरूर करेंगे. चाचा ने कहा-भारतीय क्रिकेट बोर्ड का आभारवैभव के छोटे चाचा राजीव सूर्यवंशी ने कहा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने जिस भरोसे के साथ उनके भतीजे को टीम में जगह दी है. उसके लिए पूरा परिवार आभारी है. उन्होंने कहा कि बोर्ड के चयनकर्ताओं ने वैभव के अंदर छिपे हुनर को पहचाना और उन्हें सही अवसर दिया. राजीव बताते हैं कि अगर वैभव ने आईपीएल में अपना दमदार प्रदर्शन नहीं किया होता तो शायद आज यह दिन देखने को नहीं मिलता. IPL में जिस तरह उन्होंने बड़े-बड़े गेंदबाजों के सामने बेखौफ बल्लेबाजी की. लगातार रन बनाए और अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया. उसी ने चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर खींचा. यही वह मंच था जिसने वैभव को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई. वजह है आईपीएल का प्रदर्शनराजीव सूर्यवंशी ने आगे कहा कि पिछले दो आईपीएल सीजन वैभव के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुए. उन्होंने कहा कि आईपीएल में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड और कई बड़े गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी ने साबित कर दिया कि वैभव बड़े मंच के खिलाड़ी हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान रॉयल्स भले खिताब नहीं जीत पाई हो, लेकिन पूरे सीजन में चर्चा सिर्फ वैभव की बल्लेबाजी की रही. यही वजह बनी कि भारतीय टीम प्रबंधन ने उनके खेल को गंभीरता से देखा और उन्हें टीम इंडिया में जगह देने का फैसला किया. आज समस्तीपुर ही नहीं, पूरा बिहार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar Source link

झारखंड

बिल्ली पालने की सोच रहे हैं? पशु चिकित्सक ने बताए 7 जरूरी...

Last Updated:June 13, 2026, 14:26 IST पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, बिल्ली खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि घर में उसके रहने के लिए पर्याप्त जगह हो. साथ ही परिवार के किसी सदस्य को बिल्ली के बालों से एलर्जी तो नहीं है, इसकी भी जांच कर लेनी चाहिए. उन्होंने बताया कि बिल्लियों को घूमने-फिरने और खेलने के लिए खुली जगह की जरूरत होती है, इसलिए उनके लिए आरामदायक और पर्याप्त जगह की व्यवस्था करना जरूरी है. इससे बिल्ली स्वस्थ और सक्रिय रहती है. बोकारो: आजकल लोगों में पालतू बिल्लियां पालने का शौक तेजी से बढ़ रहा है. खासकर देसी और विदेशी नस्ल की बिल्लियों की मांग लगातार बढ़ रही है. हालांकि, कई लोग बिना पूरी जानकारी और जांच-पड़ताल के बिल्ली खरीद लेते हैं, जिसके कारण बाद में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में बोकारो के चास स्थित एक पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने बिल्ली खरीदने और उसकी देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं. डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बिल्ली खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि घर में उसके रहने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है या नहीं. इसके साथ ही यह भी जान लेना जरूरी है कि परिवार के किसी सदस्य को बिल्ली के बालों से एलर्जी तो नहीं है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि बिल्लियों को घूमने-फिरने और खेलने के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होती है. इसलिए उनके लिए खुले और आरामदायक स्थान की व्यवस्था करनी चाहिए. साथ ही उनकी साफ-सफाई और शौच की उचित व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है. डॉ. अनिल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पर्शियन या अन्य विदेशी नस्ल की बिल्ली खरीदने की योजना बना रहा है, तो उसके लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. विदेशी नस्ल की बिल्लियां अधिक तापमान को आसानी से सहन नहीं कर पातीं, जिससे उनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसलिए उनके लिए ठंडा और आरामदायक माहौल उपलब्ध कराना बेहतर होता है. जरूरत पड़ने पर एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था भी की जा सकती है. डॉ. अनिल ने सलाह दी कि बिल्ली खरीदने से पहले उसकी शारीरिक जांच अवश्य कर लेनी चाहिए. बिल्ली के दांत, कान और आंखों की अच्छी तरह जांच करें. शरीर पर किसी प्रकार के घाव, कटने या चोट के निशान नहीं होने चाहिए, क्योंकि ये आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का कारण बन सकते हैं. नई बिल्ली को घर लाने के बाद शुरुआती दिनों में वह डरी-सहमी रह सकती है. कई बार वह सोफे, बिस्तर या घर के किसी कोने में छिप जाती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. उसे नए माहौल में खुद को ढालने के लिए समय देना चाहिए. इसके लिए डॉ. अनिल कुमार ने ‘3-3-3 नियम’ अपनाने की सलाह दी है. इसके तहत पहले 3 दिनों तक बिल्ली को नए माहौल को समझने का समय दें. अगले 3 सप्ताह में उसे घर और परिवार के सदस्यों के साथ घुलने-मिलने का अवसर दें. वहीं पहले 3 महीनों तक उसके साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाने पर ध्यान केंद्रित करें. उन्होंने कहा कि बिल्ली को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर वैक्सीनेशन और डी-वॉर्मिंग कराना बेहद जरूरी है. साथ ही उसके खेलने के लिए खिलौनों की व्यवस्था भी करनी चाहिए, क्योंकि बिल्लियों को खेलना और नई चीजों को खरोंचना पसंद होता है. डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, देसी और विदेशी दोनों नस्ल की बिल्लियों को अच्छी तरह पाला जा सकता है. हालांकि, देसी बिल्लियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है, जबकि विदेशी नस्ल की बिल्लियों को अधिक देखभाल और विशेष वातावरण की आवश्यकता पड़ती है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand Source link

Scroll to Top