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झारखंड

रांची-बानो के बीच दौड़ेगी लोकल ट्रेन, बस से कम किराया व समय...

रांची और बानो के बीच जल्द लोकल ट्रेन चल सकती है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन में 1000 से अधिक यात्री यात्रा कर सकेंगे। इस ट्रेन से न सिर्फ लोगों का खर्च कम होगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। वर्तमान में रांची से बानो के बीच बस का किराया करीब 240 रुपए है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन शुरू होने के बाद किराया करीब 50 रुपए रहने की संभावना है। दोनों स्थानों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 130 किलोमीटर है। रेल मार्ग से यह दूरी करीब 94 किलोमीटर है। रांची से बानो जाने में करीब दो घंटे का समय लगेगा। जबकि अभी बस से यह दूरी तय करने में तीन घंटे लगते हैं। रांची रेल मंडल ने आधुनिक लोकल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इसी माह प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। किसानों, छात्रों और कामकाजी लोगों को होगा लाभ स्पेशल सेवा के रूप में चलेगी ट्रेन जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने बताया कि शुरुआत में ट्रेन को स्पेशल सेवा के रूप में चलाया जाएगा, जबकि स्वीकृति के बाद इसे नियमित रूप से संचालित किया जा सकेगा। इससे लोगों का लाभ होगा। ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं कुल 12 कोच होंगे। {1000 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। {किराया किफायती रखा जाएगा। {सुबह बानो से हटिया और शाम में हटिया से बानो तक परिचालित करने का प्रस्ताव है। इन स्टेशनों पर मिल सकता है ठहराव नई लोकल ट्रेन शुरू होने पर महाबुआंग, कुरकुरा, पाकरा, पोकला, बकसपुर, गोविंदपुर रोड, कर्रा, लोधमा और बालसिरिंग जैसे ग्रामीण स्टेशनों पर पर्याप्त ठहराव सुनिश्चित किया जा सकता है। Source link

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best tourist places in muzaffarpur low budget tourist places for summer vacation

Last Updated:June 12, 2026, 21:31 IST Summer Tourist Places In Muzaffarpur: गर्मी की छुट्टी में बच्चों को बाहर घुमाने के लिए बजट नहीं है? तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. अभिभावक अपने बच्चों के साथ पूरे परिवार के लिए विकेंड प्लान कर सकते हैं. आपको मुजफ्फरपुर में कम बजट घूमने वालों के लिए लेक फ्रंट, सिटी पार्क, जुब्बा सहनी पार्क, मणिका मन, इंदिरा पार्क और गरीबस्थान मंदिर जैसे लोकप्रिय स्थल आकर्षण बने हैं. यहां पर आप सुकून के पल परिवार के साथ बिता सकते हैं. बच्चो को प्रकृति के बीच खाने-पीने का खूब मजा दिला सकते हैं. गर्मी की छुट्टियों में घूमने का मन हो लेकिन बजट ज्यादा न हो, तो मुजफ्फरपुर शहर में ही कई ऐसे खूबसूरत स्थान हैं जहां परिवार, दोस्तों या बच्चों के साथ बेहतरीन समय बिताया जा सकता है. यहां प्राकृतिक सौंदर्य, मनोरंजन देखने को मिलता है.  मुजफ्फरपुर का लेक फ्रंट इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. झील के किनारे बना यह स्थान सुबह और शाम की सैर के लिए काफी प्रसिद्ध है. यहां बैठकर ठंडी हवा का आनंद लिया जा सकता है. सूर्यास्त का नजारा भी लोगों को खूब आकर्षित करता है. इसके अलावा यहां नाश्ते का भी दुकान लगा रहता हैं. जहां परिवार के साथ अपने छुट्टी के पल को और खूबसूरत बना सकते हैं.  हरियाली और शांत वातावरण के लिए सिटी पार्क जाना एक अच्छा विकल्प है. बच्चों के खेलने के लिए झूले, बैठने की व्यवस्था और सुंदर बगीचे इसे परिवारों के लिए खास बनाते हैं. छुट्टियों में यहां काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं.  Add News18 as Preferred Source on Google स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा सहनी की स्मृति में बना यह पार्क शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है. यह पार्क शहर में मिठनपुरा में स्थित हैं. यहां हरियाली के बीच टहलने और समय बिताने का अलग ही अनुभव मिलता है. बच्चों और युवाओं के लिए यह पसंदीदा जगह मानी जाती है.  शहर की भागदौड़ से दूर प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने वालों के लिए मणिका मन बेहतरीन स्थान है. यहां का शांत माहौल और प्राकृतिक दृश्य लोगों को सुकून का एहसास कराते हैं. पिकनिक और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए यह जगह काफी उपयुक्त है.  इंदिरा पार्क भी मुजफ्फरपुर के पुराने और लोकप्रिय पार्कों में गिना जाता है। यहां सुबह योग और व्यायाम करने वाले लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है। बच्चों के लिए भी यह मनोरंजन का अच्छा केंद्र है। धार्मिक दृष्टिकोण से मुजफ्फरपुर का प्रसिद्ध गरीबस्थान मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. सावन महीने में यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के लिए घूमने का यह प्रमुख स्थल है. इसके अलावा साहू पोखर, राज राजेश्वरी देवी मंदिर और बंगलामुखी मंदिर भी काफी प्रसिद्ध हैं.  न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। बिहार की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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रांची के किसान धनेश्वर की मिसाल, 16 साल पहले लगाए आम-कटहल-सागवान, अब...

Last Updated:June 12, 2026, 19:34 IST Success Story : झारखंड की राजधानी रांची से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पतरातू गांव के किसान धनेश्वर बताते हैं कि आज से 16 साल पहले उन्होंने सागवान, कटहल, नींबू और आम का भी पेड़ लगाया था. आज आलम ये है क सारे पेड़ इतने बड़े हो गए हैं कि कुछ फल भी देने लगे है. अब घर बैठे- बैठे कटहल और आम से इस सीजन में अच्छी खासी कमाई हो रही है. वहीं, सागवान के पेड़ के लकड़ी से घर के सारे फर्नीचर उन्होंने बना लिए हैं. इसके अलावा कुछ बाजार में भी बेचकर मुनाफा भी कमाए हैं. किसान धनेश्वर आगे बताते हैं कि वैसे तो उन्होंने नींबू, मिर्ची, बांस और कई सारे पेड़ लगाए थे, लेकिन सबसे ज्यादा कमाई कटहल, नींबू और आम बेचकर होता है. फिलहाल गर्मी के मौसम हर दिन की कमाई ₹1500 तक हो जाती है. सबसे बड़ा फायदा उन्हें इस बात से हुआ है कि जो सागवन की लकड़ी का फर्नीचर अगर आप बाजार में लेने जाए तो लाख रुपए से कम में नहीं मिलने वाला है, वह उन्होंने मुफ्त में ही बनवा डाला है. किसान धनेश्वर बताते हैं कि अभी फिलहाल हर दिन 20 किलो तक कटहल आराम से बेच डालते हैं. बाजार में ₹50 तक भाव होता है. ₹1000 तो इसी का हो जाता है. इसके अलावा उनके पास आम का पेड़ है, हर दिन 20 किलो आम भी बेचते हैं. कच्चा आम ₹30 किलो तक चला जाता है. ₹600 इसका भी निकल ही आता है, तो आप समझ सकते हैं हर दिन 1600 रुपये की कमाई तो ऐसे ही हो जाती है. इसके अलावा नींबू भी 100 रुपए का आराम से निकल आता है और मिर्च, धनिया की तो बात ही छोड़िए. किसान ने बताया कि 16 साल पहले की गई उनकी मेहनत आज रंग दिखा रही है. Add News18 as Preferred Source on Google इसलिए वह अपने बच्चों को भी कहते हैं कि पेड़ लगाओ पर वैसा पेड़ लगाओ जो फलदार पेड़ हो, लेकिन आजकल के बच्चे शो प्लांट लगते हैं. शो प्लांट से कुछ नहीं होगा आपको फलदार पेड़ लगाना होगा. क्योंकि, फलदार पेड़ में जमीन के अंदर पानी बचा के रखने की क्षमता काफी होती है. ऐसे में गर्मी में पानी की किल्लत भी देखने को नहीं मिलेगी. इसके अलावा यह सारे पेड़ उनके आंगन में प्राकृतिक छतरी का काम करते हैं. उनके घर में कभी ऐसी कुलर की भी जरूरत नहीं पड़ती. क्योंकि, इतने सारे पेड़ उनके आंगन को घेरे हुए हैं. ऐसे में वह आंगन में दोपहर में आकर सो जाते हैं. इसके सामने ऐसी फेल हो जाता है. अभी हम लोग और पेड़ लगा रहे हैं. वह हर साल 5 पेड़ लगाते हैं. आम, लीची और कटहल का और आने वाले जनरेशन को भी बोलते हैं कि अपने घर आंगन में खूब पेड़ लगाइए. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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लोगों के आंखों में धूल झोंक रही है कंपनी : सूरज अग्रवाल

लोहरदगा|जिला अंतर्गत लोहरदगा प्रखंड के हेसल गांव के पास हिंडाल्को कंपनी बॉक्साइट क्रसिंग का प्लांट लगाकर काम कर रही है। करोड़ों का बॉक्साइट लोहरदगा से दूसरे राज्यों में भेज दिया जा रहा है। वहीं व्यवस्था के नाम पर कई किलोमीटर तक सड़क जाम, सड़क की बर्बादी और लोगों को परेशान कर रही है। साथ ही विकास के नाम पर मोतियाबिंद का ऑपरेशन, बीज वितरण आदि कर लोगों के आंखों में धूल झोंक रही है। उक्त बातें बातें कहते हुए आजसू नेता सूरज अग्रवाल ने कहा कि हिंडाल्को कंपनी खुद से कभी सड़क नहीं बनाती है, पहाड़ी क्षेत्र से बॉक्साइट ले जाने के लिए मिट्टी मोरम की सड़क बनाती है लेकिन जो सड़क सरकार द्वारा लोगों की सुविधा के लिए बनाई है उसे भी बर्बाद करने में तुली हुई है। वहीं प्रदूषण रोकथाम के नाम पर सिर्फ एक टैंकर पानी सड़कों में पटा दिया जाता है जो दस वाहन गुजरने के बाद ही सूख जाती है। उन्होंने कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता ने अपना बहुमूल्य मत देकर लोहरदगा के विकास व अपनी सुरक्षा के लिए जिताकर भेजा है, आज वही जनप्रतिनिधि हिंडाल्को के बहती गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। दलालों के भरोसे पूरे सिस्टम को हिंडाल्को चला रही है और अपना करोड़ों का बारे न्यारे कर रही है। Source link

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जिले की 14 में तीन एंबुलेंस खराब, सिर्फ पांच ही मरीजों को...

भास्कर न्यूज | लातेहार जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस की हालत दयनीय है। जिले में उपलब्ध 14 एंबुलेंसों में तीन पूरी तरह खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी है, जबकि शेष 11 में भी अधिकांश वाहनों की स्थिति दयनीय है। हालात यह हैं कि जिले में केवल पांच एंबुलेंस ही ऐसी बची हैं जिनसे गंभीर मरीजों को रिम्स या अन्य बड़े अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। बाकी छह एंबुलेंसों का उपयोग केवल स्थानीय स्तर पर मरीजों को अस्पताल लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कई एंबुलेंसों के टायर घिस चुके हैं, तो कई के गियर बॉक्स, ब्रेक और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे खराब हैं। तकनीकी खामियों के बावजूद वाहनों का किसी तरह संचालन किया जा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। सदर अस्पताल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यहां पांच 108 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल एक एंबुलेंस ही रांची तक जाने योग्य है। बाकी चार एंबुलेंसों का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर अस्पताल की अन्य एंबुलेंस या निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। कई प्रखंडों में एंबुलेंस की भारी कमी : जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी एंबुलेंस की भारी कमी देखने को मिल रही है। महुआडांड़ में दो एंबुलेंस हैं, जिनमें से एक लगभग पांच लाख किलोमीटर चलने के बाद पूरी तरह खराब हो चुकी है। बरवाडीह, मनिका और गारू में एक-एक एंबुलेंस संचालित है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए मनिका की एक एंबुलेंस को चंदवा भेज दिया गया है। चंदवा में पहले से एक एंबुलेंस खराब पड़ी है, जबकि वर्तमान में दो एंबुलेंस सेवा में हैं। बालूमाथ में चार एंबुलेंस हैं, जिनमें दो रांची जाने योग्य हैं और दो स्थानीय सेवा में लगी हुई हैं। हेरहंज और बरियातू प्रखंड में फिलहाल एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि 108 नंबर पर कॉल करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। कई बार कॉल रिस्पॉन्स में देरी होती है, जिससे दुर्घटना और गंभीर बीमारी के मामलों में मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। ^जिले में संचालित 14 में से तीन एंबुलेंस जर्जर अवस्था में है। जो रांची के मां अम्बे मोटर गैरेज में लगी है। 11 एम्बुलेंस चल रहे हैं। लेकिन पांच ही रांची भेजने लायक है। छह की स्थिति भी खराब है। जिसे इमरजेंसी केस में लोकल स्तर पर चलाया जा रहा है। ^ अमरोज अंसारी, एसीओ, लातेहार Source link

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AI-171 प्‍लेन क्रैश की जांच पर आया अपडेट, हादसे को एक साल...

होमताजा खबरदेश AI-171 प्‍लेन क्रैश की जांच पर आया अपडेट, AAIB ने लोगों से कहा- अटकलों से बचें Last Updated:June 12, 2026, 20:26 IST एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के क्रैश को आज पूरा एक साल हो गया है. इस हादसे की जांच को लेकर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपडेट जारी किया है. ब्यूरो ने बताया कि प्‍लेन के फ्लाइट रिकॉर्डर डेटा, इंजन, तकनीकी सिस्टम, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों की गहन जांच की जा चुकी है. अंतिम निष्‍कर्षों का व्यापक विश्लेषण फिलहाल जारी है. एएआईबी ने साफ कहा है कि उसकी जांच का मकसद किसी को दोषी बताना नहीं, बल्कि एविएशन सिक्‍योरिटी को बेहतर बनाना है. एएआईबी ने अहमदाबाद प्‍लेन क्रैश को लेकर अहम अपडेट जारी की हैं. Air India AI-171 Plane Crash: 12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ सेकेंडों बाद एयर इंडिया का प्‍लेन क्रैश हो गया था. आज इस हादसे को ठीक एक साल पूरा हो गया है. बीते एक साल के दौरान हर किसी की जिज्ञासा यही जानने को लेकर रही कि इस क्रैश की असल वजह क्‍या थी. आधिकारिक तौर पर एएआईबी ने 12 जुलाई 2025 को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में इशारा किया गया कि हादसे की वजह प्‍लेन के फ्यूल स्विच की तकनीकी खराबी हो सकती है. साथ ही, इस प्रारंभिक रिपोर्ट में एक बात भी थी, जिसने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया था. दरअसल, इस रिपोर्ट में दोनों पायलटों की बीच हुई बातचीत के एक अंश का जिक्र किया गया था. इसी जिक्र को विदेशी कंपनियों ने लपक लिया. इसी बात के आधार पर इस क्रैश में जान गंवाने वाले कैप्‍टन सुमित सभरवाल पर पूरा दोष मढ़ा जाने लगा. हालात यहां तक पहुंच गए कि कैप्‍टन सुमित के वयोवृद्ध माता-पिता को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. हादसे को लेकर दो अलग अलग बातों ने सबकी निगाह एक बार फिर एएआईबी की तरफ मोड़ दी. सभी को इंतजार था कि अब एएआईबी की अंतिम रिपोर्ट के जरिए हादसे का असली सच सामने आएगा. आशा की जा रही थी कि आज यानी 12 जून को यह रिपोर्ट आ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पहली बरसी पर एएआईबी कहा- जांच किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं! बीते एक साल में चले इस पूरे घटनाक्रम को देखने के बाद एएआईबी ने AI-171 की पहली बरसी पर बेहद अहम बात कही है. प्‍लेन क्रैश में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए एएआईबी ने कहा है कि उसका मकसद किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन को दोषी ठहराना नहीं है. क्रैश इंवेस्टिगेशन का असल मकसद सबक लतेते हुए ऐसे सुरक्षा उपाय तलाशना है, जिनसे भविष्य में इस तरह की र्दुघटनाओ को रोका जा सके. साथ ही, एविएशन सिक्‍योरिटी को बेहतर और पुख्‍ता किया जा सके. एएआईबी ने अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी तरह की अटकलें न लगाई जाएं. एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने कहा है कि हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार तैयार की जाएगी. जांच पूरी के बाद सभी जरूरी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाएं को पूरा किया जाएगा. इसके बाद, रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी. ब्यूरो ने कहा है कि वह सभी पीड़ित परिवारों और प्रभावित लोगों के दुख में सहभागी है और उनकी पीड़ा को समझता है. जांच का काम पूरी गंभीरता और पेशेवर तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है. जांच को लेकर एएआईबी ने क्‍या कहा… ब्यूरो के अनुसार, जांच अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों और भारत के विमान दुर्घटना जांच नियमों के तहत की जा रही है. हादसे के एक महीने बाद 12 जुलाई 2025 को प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की गई थी. प्रारंभिक रिपोर्ट में शुरुआती तथ्य साझा किए गए थे. इसके बाद पिछले एक साल की जांच में इंवेस्टिगेशन टीम ने प्‍लेन क्रैश से जुड़े हर पहलू की गहराई से पड़ताल की है. एएआईबी ने बताया कि जांच के दौरान विमान के तकनीकी सिस्टम, फ्लाइट रिकॉर्डर से मिले डेटा, इंजन के हिस्सों, मेंटेनेंस रिकॉर्ड, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य अहम सबूतों की विस्तार से जांच की गई है. इस काम में विमान निर्माता कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य संबंधित एजेंसियों का भी सहयोग लिया गया है. ब्यूरो का कहना है कि कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं और जांच में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है. एएआईबी ने कहा कि हादसे से जुड़े सभी सबूतों और जानकारियों की अभी विस्तार से जांच की जा रही है. कई तकनीकी पहलुओं को दोबारा परखा जा रहा है और विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है. अंतिम रिपोर्ट को मजबूत तथ्यों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर तैयार किया जा रहा है. हालांकि एएआईबी की तरफ से अभी भी यह स्‍पष्‍ट नहीं किया गया है कि यह अंतिम जांच रिपोर्ट कब तक आएगी. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

साल में सिर्फ एक बार होता है पाताल बाबा का दर्शन! 300...

Last Updated:June 12, 2026, 19:39 IST भगवान शंकर के एक से बढ़कर एक भक्त हैं और इनकी महिमा की गाथाएं भी अपरंपार हैं. लोगों की भगवान शंकर में बड़ी आस्था है. भगवान शंकर को लोग मूर्ति और लिंग स्वरूप दोनों में पूजते हैं. देशभर में एक से बढ़कर एक शिवलिंग हैं और इनसे जुड़ी मान्यताएं और आस्थाएं हैं. आज हम आपको एक और रोचक शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पहुंचकर आप भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं. देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथधाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ मनोकामना लिंग हैं यानी सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा यहां पूरी होती है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग बाबाधाम आकर जलार्पण और पूजा करते हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि बाबाधाम की यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक श्रद्धालु दुमका जिले में स्थित बासुकीनाथधाम जाकर भगवान शिव का दर्शन नहीं कर लेते. बाबाधाम से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित बासुकीनाथधाम को बाबा बैद्यनाथ का दरबार पूरा करने वाला धाम माना जाता है. यहां के पुरोहितों के अनुसार, जो भक्त बाबाधाम में पूजा करने के बाद बासुकीनाथ में भी जलार्पण करते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. इसी कारण सावन हो या सामान्य दिन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोनों धामों का दर्शन करने पहुंचते हैं. बासुकीनाथ मंदिर की अपनी अलग धार्मिक महत्ता है और यहां की कई परंपराएं लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं. बासुकीनाथधाम परिसर में एक पवित्र शिवगंगा तालाब भी स्थित है. मंदिर में पूजा करने से पहले श्रद्धालु इस तालाब में स्नान कर खुद को पवित्र मानते हैं. इसी शिवगंगा की गहराई में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिसे लोग श्रद्धा से पाताल बाबा के नाम से जानते हैं. यह शिवलिंग आम दिनों में पूरी तरह पानी के अंदर डूबा रहता है, इसलिए सालभर इसके दर्शन नहीं हो पाते. यही वजह है कि पाताल बाबा के दर्शन को बेहद दुर्लभ माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले ज्येष्ठ माह में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान बासुकीनाथधाम के पुरोहित, स्थानीय ग्रामीण और प्रशासन के सहयोग से शिवगंगा तालाब का पानी निकाला जाता है तथा उसकी साफ-सफाई की जाती है. जब तालाब का जलस्तर कम होता है, तब वर्षों से जलमग्न पाताल बाबा के दर्शन श्रद्धालुओं को होते है. इस मौके का लोग पूरे साल इंतजार करते हैं. दूर-दूर से शिवभक्त केवल इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बासुकीनाथ पहुंचते हैं. हाल ही में लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पाताल बाबा के दर्शन होने पर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के पुजारियों ने षोडशोपचार विधि से भगवान शिव का विशेष पूजन कराया और भव्य श्रृंगार किया. सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालु शिवगंगा कुंड में उतरकर जलार्पण करते नजर आए. कई भक्तों ने कहा कि पता नहीं अगली बार ऐसा अवसर कब मिलेगा, इसलिए इस बार दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है. कुंड के आसपास भक्ति, श्रद्धा और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. पाताल बाबा को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच एक बेहद रोचक मान्यता भी प्रचलित है. स्थानीय तीर्थपुरोहित लम्बोदर मिश्रा बताते है कि यह स्वयंभू शिवलिंग लगभग 300 वर्ष पहले प्रकट हुआ था. हैरानी की बात यह है कि वर्षों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद बाबा पर चढ़ाए गए बिल्वपत्र, फूल, अबीर और अन्य पूजन सामग्री पूरी तरह सुरक्षित दिखाई देती है. जब शिवगंगा का पानी निकाला जाता है और पाताल बाबा के दर्शन होते हैं, तो ऐसा लगता है मानो अभी-अभी उनका श्रृंगार किया गया हो. श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य कृपा और चमत्कार मानते हैं. यही कारण है कि बासुकीनाथ का पाताल बाबा आज करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है. Source link

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में चल रही है तैयारी, लोग...

भास्कर न्यूज | सिमडेगा 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस अवसर पर भारत स्वाभिमान पतंजलि योगपीठ की ओर से योग प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए योग प्रशिक्षक भाग लेकर योग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की गई। साथ ही लोगों को योग के विशेष आसनों एवं उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देने पर जोर दिया गया। पतंजलि योग संघ एवं भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी देवेंद्र सोनी ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी प्रशिक्षक अपने-अपने क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि जिलेभर में अधिक से अधिक लोगों को नियमित रूप से योग से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षकों ने योग से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। जलडेगा के करमपाल राम ने बताया कि वे जुलाई 2023 से नियमित योग कर रहे हैं। योग उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, जिससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है। उन्होंने कहा कि योग शुरू करने के बाद से उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई है। सोनिया सिन्हा ने बताया कि पहले उन्हें शरीर में सूजन की समस्या रहती थी, लेकिन नियमित योग से यह परेशानी दूर हो गई। अब अधिक काम करने के बावजूद थकान महसूस नहीं होती। वहीं, कोलेबिरा के सौरभ बड़ाइक ने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से योग कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें केवल सामान्य सर्दी-जुकाम ही हुआ है। ठेठईटांगर के खुदीराम सिंह ने बताया कि योग अपनाने से उनके जोड़ों के दर्द सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में काफी राहत मिली है। इधर योग दिवस को सफल बनाने के लिए जिले में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। Source link

शिक्षा

Admission Open for 60 Seats in 2027

Hindi News Career IIT Kanpur Cyber Security Course: Admission Open For 60 Seats In 2027 10 मिनट पहले कॉपी लिंक IIT कानपुर अपने नए एकेडमिक सेशन से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर ने नए यूजी प्रोग्राम के तहत बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी कोर्स की शुरुआत की है। कोडिंग, एथिकल हैकिंग और डिजिटल सिक्योरिटी की दुनिया में करियर बनाने वाल कैंडिडेट्स साइबर सिक्योरिटी कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। इस प्रोग्राम की शुरुआत जुलाई 2027 से होगी। इसे वाधवानी स्कूल ऑफ AI और इंटेलिजेंट सिस्टम्स ऑफर करेगा। जुलाई में होगा लाइव हैकाथॉन जेईई मेन स्क्रीनिंग और प्रोफाइल शॉर्टलिस्टिंग के बाद चुने गए स्टूडेंट्स को जुलाई के पहले हफ्ते में आईआईटी कानपुर के कैंपस में बुलाया जाएगा। यहां लाइव हैकाथॉन होगा, जहां छात्रों को टेक्निकल और एथिकल हैकिंग स्किल्स का लाइव प्रदर्शन करना होगा। साइबर सिक्योरिटी कोर्स क्या है? आईआईटी कानपुर का ‘बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी’ प्रोग्राम 4 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स है। इसका सिलेबस स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल और लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका दिलाएगा। आईआईटी कानपुर के पास साइबर सिक्योरिटी का मजबूत इकोसिस्टम और C3i हब है, जिसका फायदा इस कोर्स में मिलेगा। 4 साल का होगा अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम यह कोर्स 4 साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम है। इसके शुरुआती दो साल में छात्रों को आईआईटी कानपुर के मेन कैंपस में बिताने होंगे। इस दौरान उन्हें साइबर सिक्योरिटी की बुनियादी और एडवांस थ्योरी पढ़ाई जाएगी। संस्थान की हाई-टेक लैबोरेटरीज के कंट्रोल्ड एनवायरमेंट में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे स्टूडेंट्स नेटवर्क सिक्योरिटी, क्रिप्टोग्राफी और थ्रेट इंटेलिजेंस जैसे टॉपिक्स को बारीकी से समझ सकेंगे। कोर्स के तीसरे और चौथे साल में स्टूडेंट्स को भारत सरकार के टॉप सुरक्षा संगठनों में इंटर्नशिप के लिए भेजा जाएगा। इस दौरान स्टूडेंट्स देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े रियल-वर्ल्ड साइबर प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। अगले हफ्ते तक लॉन्च होगा वेबपेज आईआईटी कानपुर इस कोर्स के लिए एक वेबपेज लॉन्च करने की प्रोसेस में है। इसके अगले सप्ताह तक लाइव होने की उम्मीद है। संस्थान ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी के बढ़ते महत्व और इस क्षेत्र में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की जरूरत को देखते हुए यह प्रोग्राम शुरू किया गया है। आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नेशनल सिस्टम्स की सुरक्षा के लिए एक खास क्षेत्र बन गया है। ये खबर भी पढ़ें स्कूल-कॉलेजों के समय नहीं होगी कोचिंग की अनुमति:सीएम सम्राट चौधरी की घोषणा, बिहार में कोचिंग बिल लाने की तैयारी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को कोचिंग संस्थानों के संचालन के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

रांची में 40 एमएम बारिश, सड़कें बनी तालाब, राज्य में ठनके से...

झारखंड में मानसून से पहले आंधी-बारिश ने तबाही मचाई। रांची सहित अधिकतर जिलों में गुरुवार दोपहर आंधी के साथ बारिश हुई। इससे दर्जनों पेड़ उखड़ गए। होर्डिंग्स और बैनर हवा में उड़ गए। बिजली कुल हो गई। इस दौरान ठनका गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में घाटशिला के फुलझरी निवासी धनु हेम्ब्रम (30), रामगढ़ के होन्हेटांड़ निवासी अर्जुन करमाली (18) और पोटका के हेंसलबील निवासी मुस्कान पान (22) शामिल हैं। ठनके की चपेट में आने से तीन लोग घायल हुए हैं, जबकि 10 मवेशियों की भी जान चली गई। रांची में दोपहर 1:40 बजे बारिश शुरू हुई, जो 3:40 बजे बंद हुई। इस दो घंटे में राजधानी मे सबसे अधिक 40 एमएम बारिश हुई। वहीं चाईबासा के जगन्नाथपुर में 15 एमएम और बहरागोड़ा में 10 एमएम बारिश हुई। रांची में बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया। आंधी में बेड़ो में छह गांव कोटपाली, तुतली, दिघिया, रोागडीह, पतराटोली और पाकलमेड़ी में करीब एक दर्जन घरों के छप्पर उड़ गए। तीन-चार दिन में मानसून की एंट्री संभव झारखंड में अगले तीन-चार दिन में मानसून की एंट्री हो सकती है। संथाल के रास्ते मानसून प्रवेश करेगा। इस दौरान अच्छी बारिश की संभावना है। अभी जो बारिश हो रही है, उसी का असर है। 15 जून से बारिश में कमी आएगी। लेकिन 24 घंटे के दौरान होने वाले बदलाव से स्पष्ट हो जाएगा कि मानसून कैसा रहेगा।। 18 जून तक सामान्य से कम, इसके बाद दूसरे सप्ताह से सामान्य बारिश होगी। दो दिन आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में मानसून की आहट शुरू हो गई है। गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश को प्री मानसून बारिश कह सकते हैं। अभी अगले दो दिन अच्छी बारिश के आसार है। फिलहाल एक सिस्टम भी एक्टिव है। दक्षिण पंजाब से दक्षिण बांग्लादेश की ओर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल के उपर से साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इस वजह से 12 और 13 जून को राज्य में बारिश होगी।- अभिषेक आनंद, मौसम वैज्ञानिक Source link

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