भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

शिक्षा

छात्रों को लुभाने के लिए कंपनियां बांट रहीं फ्री गिफ्ट:सोशल मीडिया कंपनियों...

दुनिया की प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियां छात्रों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए लगातार नए तरीके अपना रही हैं। अमेरिका के 1400 स्कूलों के प्रशासनिक निकायों द्वारा मेटा, स्नैपचैट और टिक टॉक के खिलाफ दायर मुकदमों से जुड़े अंदरूनी दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि कंपनियां युवाओं का ध्यान खींचने और उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब सोशल मीडिया के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। अभिभावकों के आंदोलन, कई चर्चित किताबों और विशेषज्ञों ने अकेलेपन, बुलीइंग, खराब खान-पान की आदतों और यौन शोषण जैसी समस्याओं के लिए टेक प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार ठहराया है। पहले बहस मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव तक सीमित थी, लेकिन अब इसका फोकस कक्षाओं में पढ़ाई पर पड़ रहे असर की ओर भी बढ़ गया है। दस्तावेजों और अभिभावकों, शिक्षकों तथा टेक कंपनियों के पूर्व कर्मचारियों से हुई बातचीत के अनुसार कंपनियों ने बच्चों को स्क्रीन से जोड़े रखने के लिए पैरेंट्स,शिक्षकों और यहां तक कि अपनी ट्रस्ट एंड सेफ्टी टीमों की चिंताओं को भी नजरअंदाज किया। टिक टॉक की सुरक्षा टीम वर्षों से स्कूल समय के दौरान नोटिफिकेशन बंद करने की सिफारिश करती रही, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। वहीं, स्नैपचैट के रणनीतिक दस्तावेजों में कक्षा के दौरान फोन इस्तेमाल को “अंडर डेस्क टाइम’ कहा गया है। गूगल के प्रबंधकों को जानकारी थी कि यूट्यूब स्कूल के दौरान छात्रों को ऐसे वीडियो सुझाता है, जिनका पढ़ाई से कोई संबंध नहीं होता। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इंटरनेट सुरक्षा और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए बड़ी टेक कंपनियों की पैरेंट्स-टीचर्स संगठनों से लंबे समय से साझेदारी रही है। 22 हजार स्थानीय चैप्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल पीटीए को सोशल मीडिया कंपनियों से हर साल लगभग 2.40 करोड़ से 4.75 करोड़ रुपए तक की आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी भी दस्तावेजों में दर्ज है। लगातार नोटिफिकेशन और अलर्ट भेजे जा रहे हैं – स्नैपचैट ने पढ़ाई के दौरान फोन पर अलर्ट भेजकर बच्चों से क्लास रूम की गतिविधियों का ब्योरा शेयर करने के लिए कहा। – मेटा ने स्कूल में इंस्टाग्राम को प्रमोट करने के लिए ‘टीन एम्बेसडर्स’ को धन दिया। – टिकटॉक ने स्कूलों में उसके आयोजन के कवरेज के लिए पत्रकारों को करोड़ों रु. दिए। एप्स की लत लगाने वाली डिजाइन ने मुश्किलें बढ़ाई एक स्कूल के वकील प्रेविन वॉरेन कहते हैं,अंतहीन और विविध मनोरंजन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इतने लुभावने हैं कि लत पैदा करते हैं। छात्र स्कूल की पढ़ाई की जगह उन पर ध्यान देते हैं। वहीं इन कंपनियों का तर्क है कि एप्स की लत के लिए बच्चे, स्कूल और मोबाइल बनाने वाली कंपनियां जिम्मेदार हैं। 258 करोड़ रुपए हर्जाना देने के लिए भी कंपनियां तैयार अभी हाल में ग्रामीण केंटुकी के एक छोटे जिले ब्रीथिट काउंटी में स्कूलों को बड़ी चार कंपनियां 258 करोड़ रुपए देने के लिए सहमत हो गई हैं। मेटा 86 करोड़ और स्नैपचैट, टिकटॉक 76-76 करोड़ रुपए और गूगल 19 करोड़ रुपए देगी। Source link

झारखंड

धनबाद में छिनतई के दो शातिर अपराधी गिरफ्तार:सरायढेला पुलिस ने पर्स, नकदी...

धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र में एक महिला से छिनतई के कुछ ही समय बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार को डीएसपी प्रकाश सोय ने इसकी जानकारी दी। डीएसपी सोय ने बताया कि सोमवार शाम थाना प्रभारी मंजीत कुमार को सूचना मिली थी। इसमें बताया गया था कि बिना नंबर की पल्सर एनएस-125 बाइक पर सवार दो युवकों ने राजगंज निवासी जोशना देवी का लेडीज पर्स छीन लिया और मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही गश्ती पदाधिकारी सब-इंस्पेक्टर रजनीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तुरंत आरोपियों का पीछा करना शुरू कर दिया। बलियापुर जाने वाली सड़क पर पीड़िता जोशना देवी ने दोनों आरोपियों की पहचान की। पुलिस को देखते ही आरोपी तेजी से भागने लगे, लेकिन भागने के दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई। इसके बाद पुलिस ने दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया। डीएसपी ने बताया कि इस दुर्घटना में आरोपी चंदू कुमार विश्वकर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसका इलाज शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चल रहा है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बेलगड़िया निवासी करण कुमार वर्मा और चंदू कुमार विश्वकर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से छिनतई में इस्तेमाल की गई काले रंग की पल्सर एनएस-125 मोटरसाइकिल, लाल रंग का लेडीज पर्स (जिसमें 4,500 रुपये नकद थे) और दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। डीएसपी प्रकाश सोय ने यह भी बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस उनके आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वे अन्य छिनतई की घटनाओं में भी शामिल रहे हैं या नहीं। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। Source link

ताज़ा खबर

India Warns Pakistan : PoK Protests | ‘दुनिया देख रही है, इंसाफ...

होमताजा खबरदेश ‘दुनिया देख रही है, इंसाफ होगा’, PoK में बर्बरता पर भारत की पाक को चेतावनी Last Updated:June 09, 2026, 16:46 IST पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली जैसे बुनियादी हकों की आवाज उठा रही जनता पर मुनीर की सेना खून की होली खेल रही है. सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 30 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है. इस बर्बरता पर भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दी है कि PoK में हो रहे जुल्म को पूरी दुनिया देख रही है और मानवाधिकारों के इस हनन के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जवाबदेह होना पड़ेगा. विदेश मंत्रालय की पाकिस्तान को चेतावनी नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में इस समय जुल्म और हैवानियत का खूनी खेल चल रहा है. रोटी, बिजली और हक की आवाज उठाने वाले बेकसूर नागरिकों पर मुनीर की सेना गोलियां बरसा रही है. पाकिस्तान की आर्मी अब तक 30 से ज्यादा लोगों की लाशें बिछा चुकी है और 200 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. अब पीओके के लोगों की चीख-पुकार सुनकर भारत दहाड़ पड़ा है. विदेश मंत्रालय ने इस बर्बरता पर पाकिस्तान को सीधी और सख्त चेतावनी दी है कि दुनिया सब देख रही है और इंसाफ होना चाहिए. PoK मुनीर ने बिछाईं 30 लाशें! कब्जे वाले कश्मीर को अपना बताने वाले पाकिस्तानी हुक्मरान आज अपने ही लोगों के खून के प्यासे हो चुके हैं. रावलकोट शहर में खुलेआम नागरिकों पर गोलियां बरसाई गई हैं. सड़कों पर चारों तरफ लाशें बिछी हुई हैं और मुनीर सरकार इस बर्बरता को छुपाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. भारत की खुली चेतावनी: ‘दुनिया देख रही है, इंसाफ होगा!’ इस खूनी खेल के बाद अब भारत ने पाकिस्तान को बहुत ही कड़े शब्दों में ललकारा है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ-साफ कह दिया है कि PoK में जो कुछ भी हो रहा है, उसे पूरी दुनिया देख रही है. भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह अपने अत्याचारों और जुल्मों के लिए तैयार रहे, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे इन पापों के लिए जरूर जिम्मेदार ठहराएगा! भारत की इस दो टूक चेतावनी से इस्लामाबाद में हड़कंप मचना तय है. पाकिस्तान में नाकामी छुपाने के लिए फर्जी खबरों का ड्रामा! भारत ने पाकिस्तान के उस गंदे खेल को भी बेनकाब कर दिया है, जिसके तहत वो अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने दुनिया को बताया है कि पाकिस्तान लगातार फर्जी खबरों, एडिटेड वीडियो और झूठे प्रोपेगैंडा का सहारा ले रहा है. ये सब अपनी इज्जत बचाने और मानवाधिकारों के भयानक उल्लंघन से लोगों का ध्यान भटकाने का एक घटिया तरीका है. पाकिस्तान का ये झूठ अब किसी भी हाल में काम नहीं आने वाला है और दुनिया उनके काले कारनामों को देख रही है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है! भारत ने एक बार फिर दुनिया को ये स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है. PoK में जो बेकसूर नागरिक मारे जा रहे हैं और उन पर जो जुल्म हो रहा है, उस पर भारत की पैनी नजर है. पाकिस्तान चाहे जितने झूठ फैला ले, चाहे जितने पैंतरे बदल ले लेकिन उसके अत्याचारों का सच अब दुनिया से छुप नहीं सकता. मानवाधिकारों की सरेआम धज्जियां! PoK में इंटरनेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, ताकि जुल्म की ये खौफनाक तस्वीरें बाहर न आ सकें. वहां के लोगों का जीना मुहाल हो रखा है. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर बैन लगाकर लोगों की आवाज को हमेशा के लिए कुचलने की कोशिश की जा रही है. महंगाई, बेरोजगारी और बिजली की भारी किल्लत से जूझ रही जनता जब भी अपने हक के लिए सवाल पूछती है, तो उन्हें गोलियों से भून दिया जाता है. ये मानवाधिकारों का सबसे बड़ा और नंगा रूप है जो पाकिस्तान में चल रहा है. About the Author Utkarsha Srivastava Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of News18 Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

शिबू सोरेन की सीट पर परिवार नहीं, बैद्यनाथ राम क्यों? हेमंत सोरेन...

Last Updated:June 09, 2026, 16:18 IST Rajya Sabha Election Jharkhand: राजनीति में कई फैसले चुनाव जीतने के लिए लिए जाते हैं और कुछ फैसले भविष्य की राजनीति लिखने के लिए. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट पर बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर शायद दूसरा रास्ता चुना है. जिस सीट पर परिवार के किसी सदस्य की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही थी, वहां एक आदिवासी नेता के नाम का ऐलान हुआ. पहली नजर में यह एक साधारण राजनीतिक फैसला दिखता है, लेकिन इसके भीतर गहरी राजनीतिक तैयारी की कई परतें छिपी हुई हैं. बैद्यनाथ राम को राज्यसभा का टिकट देकर सीएम हेमंत सोरेन ने बड़ा दांव खेला है. रांची. झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस सीट की हो रही है जो झामुमो संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी. राजनीतिक गलियारों में लंबे समय तक यह चर्चा चलती रही कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इस सीट पर सोरेन परिवार के किसी सदस्य को भेज सकता है. पार्टी के भीतर और बाहर कई नामों की चर्चा भी हुई. लेकिन जब झामुमो ने लातेहार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार घोषित किया तो यह फैसला राजनीतिक रूप से कई संदेश छोड़ गया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक उम्मीदवार का चयन नहीं, बल्कि हेमंत सोरेन की दूरगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है. परिवारवाद के आरोपों को जवाब दरअसल, झामुमो पर वर्षों से यह आरोप लगता रहा है कि पार्टी का नेतृत्व और बड़े पद मुख्य रूप से सोरेन परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित रहते हैं. शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट को लेकर भी यही माना जा रहा था कि परिवार का कोई सदस्य इस सीट पर जाएगा. लेकिन बैद्यनाथ राम के नाम की घोषणा ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया. खुद बैद्यनाथ राम भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस फैसले से उस धारणा को तोड़ने का प्रयास किया है कि झामुमो केवल एक परिवार की पार्टी है. राजनीतिक तौर पर देखें तो यह संदेश सिर्फ विपक्ष के लिए नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने वालों के लिए भी शीर्ष स्तर तक पहुंचने का रास्ता खुला है. अनुसूचित जनजाति वोट बैंक को साधने की कोशिश इस फैसले में एक बड़ा संदेश यह भी है कि बैद्यनाथ राम अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं. झारखंड की राजनीति में आदिवासी समाज की भूमिका निर्णायक मानी जाती है और झामुमो की पहचान भी आदिवासी आंदोलन से जुड़ी रही है.जानकार बताते हैं कि हाल के वर्षों में भाजपा और अन्य दलों ने भी आदिवासी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है. ऐसे में राज्यसभा के लिए एक आदिवासी चेहरे को आगे कर झामुमो ने अपने परंपरागत सामाजिक आधार को मजबूत करने का संदेश दिया है. यह फैसला आदिवासी समाज के बीच यह संदेश देने की कोशिश भी माना जा रहा है कि पार्टी अभी भी उनके प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. पलामू प्रमंडल पर विशेष नजर बैद्यनाथ राम का संबंध लातेहार जिले से है, जो पलामू प्रमंडल का हिस्सा है. झामुमो की ताकत परंपरागत रूप से संथाल परगना, कोल्हान और कुछ अन्य आदिवासी इलाकों में अधिक रही है. इसके मुकाबले पलामू प्रमंडल को पार्टी का अपेक्षाकृत कमजोर क्षेत्र माना जाता रहा है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजने का फैसला इस क्षेत्र में संगठनात्मक विस्तार की रणनीति का हिस्सा है. इससे पलामू, गढ़वा और लातेहार जैसे इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और झामुमो को नए सामाजिक आधार बनाने में मदद मिल सकती है. संगठन को भी गया बड़ा संदेश बैद्यनाथ राम तीन बार विधायक और तीन बार मंत्री रह चुके हैं. लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका के बावजूद वे राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका से दूर रहे. ऐसे में उनकी उम्मीदवारी यह संकेत भी देती है कि झामुमो अब केवल नए चेहरों या पारिवारिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले नेताओं को भी अवसर देने की नीति पर आगे बढ़ रही है. यह संदेश आने वाले समय में पार्टी के दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. 2029 की राजनीति की तैयारी? राजनीति के जानकार इस फैसले को केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं मानते. उनके अनुसार हेमंत सोरेन ने 2029 और उससे आगे की राजनीति को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है. एक तरफ परिवारवाद के आरोपों को कमजोर करने की कोशिश हुई है. दूसरी तरफ आदिवासी वोट बैंक को मजबूत संदेश दिया गया है. वहीं पलामू प्रमंडल जैसे क्षेत्रों में संगठन विस्तार का आधार भी तैयार किया गया है. यही वजह है कि बैद्यनाथ राम की उम्मीदवारी को झारखंड की राजनीति में एक साधारण टिकट वितरण नहीं, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें एक साथ कई लक्ष्य साधने की कोशिश दिखाई देती है. असली परीक्षा अभी बाकी हालांकि, इस फैसले के राजनीतिक लाभ का वास्तविक आकलन आने वाले चुनावों में ही होगा. लेकिन इतना तय है कि शिबू सोरेन की खाली हुई सीट पर परिवार से बाहर जाकर बैद्यनाथ राम को चुनकर हेमंत सोरेन ने एक ऐसा संदेश दिया है, जिसकी चर्चा सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हो रही है. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह रणनीति झामुमो के संगठन और वोट बैंक को कितना मजबूत करती है और क्या यह फैसला पार्टी की राजनीतिक पहुंच को नए क्षेत्रों तक विस्तार देने में सफल होता है. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

बालूमाथ-पांकी मार्ग पर हाइवा से वृद्ध की मौत:सड़क पार करते वक्त हुई...

लातेहार जिले के बालूमाथ-पांकी मुख्य मार्ग पर झाबर ग्राम स्थित बिरहोर टोला के पास बीती रात एक सड़क दुर्घटना में एक वृद्ध की मौत हो गई। इस घटना के बाद मंगलवार को आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम कर दिया। मृतक की पहचान 60 वर्षीय इंद्रदेव बिरहोर के रूप में हुई है, जो झाबर के बिरहोर टोला के निवासी थे। जानकारी के अनुसार, इंद्रदेव रात में पानी लाने के लिए सड़क पार कर रहे थे। वापस लौटते समय सड़क किनारे खड़े उन्हें एक तेज रफ्तार हाइवा ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल वृद्ध को तत्काल बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने मंगलवार को दुर्घटनास्थल के पास बालूमाथ-पांकी मार्ग को जाम कर दिया। मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा देने की मांग सड़क जाम के कारण दोनों ओर सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ग्रामीण मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा देने और इस मार्ग पर हाइवा वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने या वैकल्पिक मार्ग से संचालन कराने की मांग कर रहे हैं। घटना की सूचना मिलने पर बालूमाथ थाना के प्रभारी अमित कुमार जाम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर सड़क जाम समाप्त करने की अपील की, लेकिन परिजन और ग्रामीण मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। Source link

शिक्षा

5863 Candidates Quit; Viral Videos Show Student Chaos

Hindi News Career UP Police Constable Exam: 5863 Candidates Quit; Viral Videos Show Student Chaos 29 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ की ओर से आयोजित यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 8 जून 2026 से शुरू हो गई। आज इस परीक्षा का दूसरा दिन है। उत्तरप्रदेश के 28 केंद्रों पर परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कर्मचारियों की भी जांच की गई। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बाद ही एग्जाम सेंटर पर एंट्री दी गई। परीक्षा ड्यूटी में एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। खिड़की से ट्रेन में घुसते छात्रों का वीडियो वायरल : इस तरह यूपी सरकार व्यवस्थित तरीके से एग्जाम का आयोजन करने का दावा कर रही है। जबकि हकीकत बयां करते ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं जिसमें भारी भीड़ के बीच छात्रों को परेशान होते देखा गया है। एग्जाम खत्म होते ही रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सरकार द्वारा किए गए सारे प्रबंध चरमराते हुए नजर आ रहे हैं। #WATCH | Gorakhpur, Uttar Pradesh: A written examination is underway for direct recruitment to the posts of Civil Police Constable and equivalent positions in the Uttar Pradesh Police. The exam is being conducted in two shifts on June 8, 9, and 10 pic.twitter.com/va7059wiCX— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 9, 2026 इस परीक्षा को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती परीक्षा के लिए यात्रा करने वाले उम्मीदवारों को बसों में 50% की छूट दी है। इन सबके बावजूद पहले ही दिन 5863 छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। 8 जून को परीक्षा खत्म होने के बाद लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ के कारण परीक्षार्थी जान जोखिम में डालकर आपातकालीन खिड़कियों के रास्ते ट्रेनों में घुसते हुए नजर आए। Lucknow witnessed massive crowds on the second day of the Uttar Pradesh Police Constable Recruitment Examination as thousands of candidates traveled to examination centers across the state. Due to heavy passenger rush at railway stations and overcrowded trains, several candidates… pic.twitter.com/Q8Yaz475mM— Dalimss News (@Dalimss_News) June 9, 2026 तूफान से ट्रेन रुकी, पैदल सेंटर पहुंचे छात्र उन्नाव में आए आंधी-तूफान के कारण कानपुर से बालामऊ जा रही ट्रेन के रास्ते में पेड़ गिर गया, जिससे घंटों ट्रेन खड़ी रही। इस रुकावट की वजह से परीक्षा देने जा रहे छात्रों को पैदल ही आगे बढ़ना पड़ा। इससे समय पर केंद्र पहुंचने को लेकर भारी परेशानी हुई। 10 हजार से ज्यादा छात्र नहीं पहुंचे एग्जाम सेंटर एग्जाम की पहली शिफ्ट में 2953 और दूसरी में 2910 छात्र अनुपस्थित रहे। इस तरह 25,536 के स्थान पर 19,673 छात्र ही एग्जाम में शामिल हुए। सुबह 10 से 12 बजे की पहली शिफ्ट में 12,768 छात्रों को शामिल होना था लेकिन 9815 छात्र ही आए। दोपहर 3 से 5 बजे की दूसरी शिफ्ट में 9858 आए। #WATCH | Lucknow, Uttar Pradesh: A written examination is underway for direct recruitment to the posts of Civil Police Constable and equivalent positions in the Uttar Pradesh Police. The exam is being conducted in two shifts on June 8, 9, and 10 pic.twitter.com/rcAFOjfICp— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 9, 2026 कपड़ों के साथ बालों की भी चेकिंग : परीक्षा में छात्रों की चेकिंग के दौरान जूते-बेल्ट तक उतरवा दिए गए। कपड़ों के अलावा उनके बाल और कानों की भी जांच की गई। एग्जाम सेंटर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की गई। छात्रों बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और रेटिना जांच के बाद ही एग्जाम हॉल में जाने दिया गया। यहां पर भी उम्मीदवारों को चेक करने के बाद प्रश्नपत्र दिया गया। गड़बड़ी के शक में एक छात्र को हिरासत में लिया : उम्मीदवारों के साथ जो पेरेंटस आए थे, उन्हें दिनभर गर्मी से परेशान होते देखा गया। आजमगढ़ में एक इंस्टाग्राम यूजर को पुलिस ने हिरासत में लिया है। हापुड़ में परीक्षा के दौरान गड़बड़ी करने के आरोप में परीक्षार्थी सचिन सिंह को गिरफ्तार किया गया। जबकि गोरखपुर में एक छात्र को परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया। खुद सुन लो छात्र खुद बता रहे है 50% किराए छूट के साथ अन्य सुविधाय भी दी योगी सरकार ने और पारदर्शी तरीके से परीक्षा पूरी हुई।छात्र नहीं अफवाह फैलाने वाले परेशान है pic.twitter.com/poGrlagKTG— Pooja Singh (@puji1110) June 9, 2026 यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल रिक्रूटमेंट परीक्षा 2026 का आयोजन 8, 9 और 10 जून को किया जाएगा। ये एग्जाम पूरे राज्य में 1100 से ज्यादा एग्जाम सेंटर्स पर हो रहे हैं। आज और कल पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। ये खबरें भी पढ़ें : UP पुलिस कॉन्स्टेबल पेपर लीक की अफवाह:बोर्ड ने टेलीग्राम चैनल पर FIR की; 10 जून तक 28 लाख कैंडिडेट्स देंगे एग्जाम उत्तर प्रदेश पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 आज से शुरू हुई है। एग्जाम शुरू होने से 2 दिन पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड (यूपीपीआरपीबी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही फर्जी पेपर लीक की खबरों के खिलाफ उम्मीदवारों को चेतावनी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

हजारीबाग में साधु के भेष में ठगी, 3 गिरफ्तार:महिला से ठगा सोने...

हजारीबाग जिले के बड़ा बाजार ओपी क्षेत्र के हुरहुरू में एक महिला से साधु के भेष में सोने के जेवर ठगकर फरार हुए तीन शातिर अपराधियों को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से ठगे गए सोने के जेवर और अन्य सामान भी बरामद किए हैं। सदर हजारीबाग के एसडीपीओ रूपक कुमार सिंह ने बताया कि 8 जून 2026 को हुरहुरू निवासी गुड़िया देवी के पति ने पुलिस को सूचना दी थी। उन्होंने बताया कि तीन व्यक्ति साधु के वेश में उनके घर आए और धार्मिक बातों में उलझाकर उनकी पत्नी से सोने का जेवर (जीतिया) ठगकर फरार हो गए। पूछताछ के आधार पर संदिग्धों की तलाश शुरू की सूचना मिलते ही पुलिस के वरीय अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई, जिसके बाद उनके निर्देश पर एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच की और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर संदिग्धों की तलाश शुरू की। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि तीन संदिग्ध साधु एक ऑटो में सवार होकर भाग रहे हैं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए क्षितिज अस्पताल के पास वाहन की घेराबंदी कर तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान उनके जवाब संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने तलाशी ली। तलाशी में गुड़िया देवी से ठगा गया सोने का जीतिया, मोती लगा माला और सोने जैसे दिखने वाले सात छोटे-छोटे लॉकेट बरामद हुए। इसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहतास जिले के अमझोर थाना क्षेत्र निवासी मलेट्री लाठौर, अखिलेश लाठौर और तितई लाठौर के रूप में हुई है। Source link

ताज़ा खबर

खेती के भविष्य को बदलने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय में शोध पर...

Last Updated:June 09, 2026, 15:55 IST कृषि विभाग की शोधार्थी नेहा टमाटर की विभिन्न किस्मों और उसके हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कर रही हैं. उनके शोध का उद्देश्य ऐसी तकनीक और किस्मों की पहचान करना है, जिससे टमाटर की गुणवत्ता बेहतर हो, उत्पादन बढ़े और किसानों को अधिक मुनाफा मिल सके. टमाटर एक ऐसी फसल है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. ऐसे में इसकी बेहतर किस्मों और उत्पादन तकनीकों पर किया जा रहा शोध किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है. ख़बरें फटाफट गोरखपुरः खेती को आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का कृषि विभाग लगातार नए प्रयोग और शोध कार्यों में जुटा हुआ है. यहां होने वाले शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है. इसी कड़ी में विभाग की दो छात्राएं इन दिनों ऐसे शोध कार्य कर रही हैं, जो भविष्य में किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं. हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कृषि विभाग की शोधार्थी नेहा टमाटर की विभिन्न किस्मों और उसके हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कर रही हैं. उनके शोध का उद्देश्य ऐसी तकनीक और किस्मों की पहचान करना है, जिससे टमाटर की गुणवत्ता बेहतर हो, उत्पादन बढ़े और किसानों को अधिक मुनाफा मिल सके. टमाटर एक ऐसी फसल है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. ऐसे में इसकी बेहतर किस्मों और उत्पादन तकनीकों पर किया जा रहा शोध किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है. ऑर्गेनिक यूरिया पर अध्ययन वहीं विभाग की दूसरी शोधार्थी दिव्या मेरीगोल्ड (गेंदा) की खेती में ऑर्गेनिक यूरिया के प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं. उनके शोध का मकसद यह जानना है कि जैविक उर्वरकों के उपयोग से फूलों की गुणवत्ता, उत्पादन और लागत पर क्या असर पड़ता है. यदि यह शोध सफल होता है तो किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन का विकल्प मिल सकता है. साथ ही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. कृषि विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि, इस तरह के शोध भविष्य की खेती को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. विश्वविद्यालय में केवल यही दो शोध नहीं चल रहे हैं, बल्कि विभिन्न फसलों और कृषि तकनीकों पर लगातार अध्ययन किया जा रहा है. इससे पहले भी यहां ‘काला गेहूं समेत कई विशेष फसलों पर शोध किए जा चुके हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. खेती के भविष्य को बदलने की कोशिश विशेषज्ञों के अनुसार विश्वविद्यालय में विकसित होने वाली नई तकनीकें और फसल किस्में किसानों तक पहुंचने के बाद खेती को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बना सकती हैं. यही कारण है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय का कृषि विभाग पूर्वांचल में कृषि नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है, जहां तैयार होने वाले शोध भविष्य की खेती की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Gorakhpur,Uttar Pradesh Source link

झारखंड

2 सीट, 3 उम्मीदवार और झारखंड राज्यसभा चुनाव के उलझे समीकरण, क्या...

रांची. झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव अचानक दिलचस्प हो गया है. कागज पर महागठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक संख्या बल मौजूद है, लेकिन भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी की एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह बदल दिया है.  दरअसल, कागज पर आंकड़े अभी भी महागठबंधन के पक्ष में हैं. लेकिन राजनीति में कई बार चुनाव संख्या से नहीं, संदेश और प्रबंधन से तय होते हैं. यही वजह है कि झारखंड का राज्यसभा चुनाव इस बार सिर्फ दो सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि महागठबंधन की एकजुटता और कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत की परीक्षा बन गया है.  इसी कारण राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा बैद्यनाथ राम या परिमल नथवानी की नहीं, बल्कि प्रणव झा की जीत की राह कितनी आसान या कठिन है, इस पर हो रही है. दो सीटें, तीन उम्मीदवार और यहीं से शुरू हुआ खेल झारखंड के इस सियासी उलझन को ऐसे समझिए कि झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है. मैदान में झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी हैं. नथवानी पहले भी झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और इस बार भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतारने के बजाय उन्हें समर्थन देने का फैसला किया है. बस यहीं से मुकाबला सीधा नहीं रहा, क्योंकि अब यह दो सीटों के लिए तीन प्रभावशाली उम्मीदवारों की लड़ाई बन चुका है. क्या है झारखंड विधानसभा का मौजूदा गणित? दरअसल, इस पूरे खेल को और बेहतर तरीके से समझने के लिए झारखंड विधानसभा की सीटों के अंकगणित को समझना जरूरी है. झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 27 से 28 प्रथम वरीयता (First Preference) के वोटों की आवश्यकता होती है. सदन की मौजूदा स्थिति में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास पर्याप्त संख्या बल है, जिससे उनके उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित मानी जा रही है. जेएमएम अपने दम पर अपने उम्मीदवार को जिताने की स्थिति में है. लेकिन, असली पेंच कांग्रेस के हिस्से वाली दूसरी सीट पर आकर फंस गया है. चुनाव में जीत के लिए कितने वोट चाहिए? दरअसल, 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत होती है. दो सीटों के लिए कुल 56 वोट चाहिए. महागठबंधन के पास झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक हैं. यानी कुल 56 विधायक. सैद्धांतिक रूप से यह संख्या दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त है. लेकिन राजनीति में गणित हमेशा अंकगणित नहीं होता. ऐसे दिलचस्प बन गया शह-मात का खेल दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास केवल 24 विधायक हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 21 सदस्य और लोजपा (रामविलास), आजसू (AJSU) और जदयू (JDU) के एक-एक विधायक शामिल हैं. इसके अतिरिक्त सदन में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक मौजूद है. इस संख्या बल के हिसाब से दोनों सीटें ‘इंडिया’ गठबंधन के खाते में जानी तय लग रही हैं, लेकिन परिमल नाथवानी के लिए भाजपा पूरा जोर लगाती हुई दिख रही है, ऐसे में सियासी शह-मात का खेल दिलचस्प बन पड़ा है. प्रणव झा के पास वोटों की भारी कमी कांग्रेस के पास विधानसभा में अपने विधायकों की संख्या इतनी नहीं है कि वे अकेले दम पर प्रणव झा को राज्यसभा भेज सकें. जेएमएम के अपने उम्मीदवार को सुरक्षित करने के बाद, कांग्रेस के पास गठबंधन के कोटे से पर्याप्त अतिरिक्त वोट नहीं बच रहे हैं. प्रणव झा को जीत दर्ज करने के लिए न केवल जेएमएम के बचे हुए अतिरिक्त वोटों की जरूरत है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (RJD), वामपंथी दलों (CPI-ML) और निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर भी पूरी तरह निर्भर रहना पड़ रहा है. इस बिखरे हुए वोट बैंक को एकजुट रखना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है. प्रणव झा के नाम पर क्यों हुआ था विवाद? यहां यह भी बता दें कि कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किया तो झामुमो के भीतर असहजता दिखाई दी. कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से दोनों सीटों पर झामुमो की दावेदारी जताई थी. यहां तक कि यह भी कहा गया कि कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित करने से पहले पर्याप्त परामर्श नहीं किया. बाद में दोनों दलों के बीच बातचीत हुई और एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने का फार्मूला तय हुआ. हालांकि राजनीति के जानकारों का मानना है कि विवाद भले सुलझ गया हो, लेकिन उसने गठबंधन के भीतर मौजूद असहजता को भी उजागर कर दिया. परिमल नाथवानी की एंट्री और बीजेपी का दांव इस कमजोर कड़ी को भांपते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति के तहत निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को परोक्ष रूप से अपना समर्थन दे दिया है. बीजेपी के पास अपने अतिरिक्त वोट हैं, जो वे नाथवानी के पाले में डाल सकती है. इसके साथ ही परिमल नाथवानी की अपनी मजबूत आर्थिक और राजनीतिक पकड़ रही है, जिसके कारण वे सत्ता पक्ष के असंतुष्ट विधायकों और अन्य निर्दलीयों को अपने पाले में खींचने की क्षमता रखते हैं. बीजेपी समर्थित इस निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आ जाने से मुकाबले में क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाएं काफी बढ़ गई हैं. गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी का नुकसान राजनीति के जानकारों का मानना है कि जेएमएम और कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंदरूनी तालमेल की कमी रही है. जेएमएम ने पहले ही अपने उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत सुनिश्चित कर ली, जिससे कांग्रेस पूरी तरह बैकफुट पर आ गई. प्रणव झा को प्रियंका गांधी का आशीर्वाद तो प्राप्त है, लेकिन झारखंड की स्थानीय जमीनी राजनीति और विधायकों के बीच उनकी स्वीकार्यता वैसी नहीं बन पाई जैसी जरूरत थी. असंतुष्ट विधायक इस स्थिति का फायदा उठाकर पाला बदल सकते हैं, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस उम्मीदवार को उठाना पड़ सकता है. हार की कगार पर कांग्रेस के संकटमोचक राजनीति के जानकारों की नजर में मौजूदा जोड़-घटाव और विधायकों के रुख को देखते हुए प्रणव झा के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े तक पहुंचना असंभव सा प्रतीत हो रहा है. परिमल नाथवानी को मिलने वाला बीजेपी का खुला समर्थन और अन्य छोटे दलों का झुकाव कांग्रेस

झारखंड

धनबाद के बहियारडीह में उपद्रवियों का हमला, फायरिंग:घर-दुकान में तोड़फोड़, पुलिस वाहन...

धनबाद में पानी की समस्या को लेकर मंगलवार को जमकर विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला हिंसक झड़प में बदल गया, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया। घटना बाघमारा अनुमंडल अंतर्गत सोनारडीह ओपी क्षेत्र के जोगीडीह और बहियारडीह गांव के बीच हुई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। डीएसपी अजीत कुमार विमल ने बताया कि जोगीडीह की महिलाओं ने पानी की समस्या को लेकर सड़क जाम किया था। अवैध खनन गतिविधियों से पानी की आपूर्ति बाधित डीएसपी के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप है कि बहियारडीह के कुछ लोग अवैध खनन गतिविधियों में संलिप्त हैं और उन्हीं की वजह से क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ और बाद में झड़प में बदल गया। दूसरे पक्ष ने बहियारडीह के दीपक कुमार साव के घर और दुकान पर हमला कर दिया। पुलिस के पहुंचने के बाद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। प्रारंभिक जांच में विपक्षी पक्ष की ओर से दो राउंड फायरिंग किए जाने की बात सामने आई है। घटनास्थल से पुलिस ने दो खोखा भी बरामद किए हैं। पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल डीएसपी ने बताया कि कुछ महिलाओं द्वारा आक्रोशित होकर पुलिस वाहन पर पथराव किए जाने की भी जानकारी मिली है, जिससे बरोरा थाना की पेट्रोलिंग गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई और उसका शीशा टूट गया। मामले में पुलिस ने तीन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। डीएसपी ने कहा कि दोनों पक्षों की भूमिका की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अवैध खनन के आरोपों की भी जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अवैध गतिविधियों को तत्काल बंद कराया जाएगा। Source link

Scroll to Top