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खेती के भविष्य को बदलने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय में शोध पर...


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कृषि विभाग की शोधार्थी नेहा टमाटर की विभिन्न किस्मों और उसके हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कर रही हैं. उनके शोध का उद्देश्य ऐसी तकनीक और किस्मों की पहचान करना है, जिससे टमाटर की गुणवत्ता बेहतर हो, उत्पादन बढ़े और किसानों को अधिक मुनाफा मिल सके. टमाटर एक ऐसी फसल है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. ऐसे में इसकी बेहतर किस्मों और उत्पादन तकनीकों पर किया जा रहा शोध किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है.

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गोरखपुरः खेती को आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का कृषि विभाग लगातार नए प्रयोग और शोध कार्यों में जुटा हुआ है. यहां होने वाले शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है. इसी कड़ी में विभाग की दो छात्राएं इन दिनों ऐसे शोध कार्य कर रही हैं, जो भविष्य में किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं.

हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च

कृषि विभाग की शोधार्थी नेहा टमाटर की विभिन्न किस्मों और उसके हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कर रही हैं. उनके शोध का उद्देश्य ऐसी तकनीक और किस्मों की पहचान करना है, जिससे टमाटर की गुणवत्ता बेहतर हो, उत्पादन बढ़े और किसानों को अधिक मुनाफा मिल सके. टमाटर एक ऐसी फसल है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. ऐसे में इसकी बेहतर किस्मों और उत्पादन तकनीकों पर किया जा रहा शोध किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है.

ऑर्गेनिक यूरिया पर अध्ययन

वहीं विभाग की दूसरी शोधार्थी दिव्या मेरीगोल्ड (गेंदा) की खेती में ऑर्गेनिक यूरिया के प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं. उनके शोध का मकसद यह जानना है कि जैविक उर्वरकों के उपयोग से फूलों की गुणवत्ता, उत्पादन और लागत पर क्या असर पड़ता है. यदि यह शोध सफल होता है तो किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन का विकल्प मिल सकता है. साथ ही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

कृषि विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि, इस तरह के शोध भविष्य की खेती को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. विश्वविद्यालय में केवल यही दो शोध नहीं चल रहे हैं, बल्कि विभिन्न फसलों और कृषि तकनीकों पर लगातार अध्ययन किया जा रहा है. इससे पहले भी यहां ‘काला गेहूं समेत कई विशेष फसलों पर शोध किए जा चुके हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं.

खेती के भविष्य को बदलने की कोशिश

विशेषज्ञों के अनुसार विश्वविद्यालय में विकसित होने वाली नई तकनीकें और फसल किस्में किसानों तक पहुंचने के बाद खेती को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बना सकती हैं. यही कारण है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय का कृषि विभाग पूर्वांचल में कृषि नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है, जहां तैयार होने वाले शोध भविष्य की खेती की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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