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झारखंड

रामगढ़ में गैस रिसाव से चार युवकों की मौत:बंद खदान में उत्खनन...

रामगढ़ जिले के गिद्दी-रामगढ़ सीमावर्ती वन क्षेत्र में एक बंद खदान में गैस रिसाव से चार लोगों की मौत हो गई। यह घटना तब हुई, जब ये लोग खदान के भीतर उत्खनन कार्य कर रहे थे। मृतकों की पहचान आशीष रजवार (25), किशोर रवानी (35), देवा कुमार बेदिया (25) और डब्लू बेदिया (30) के रूप में हुई है। घटना के वक्त सबसे पहले एक युवक गैस रिसाव की चपेट में आया और वहीं बेहोश होकर गिर गया। एक बचाने में तीन भी आए चपेट में उसके बाकी तीन साथी उसे बचाने के लिए खदान में उतरे तो वो भी जहरीली गैस की चपेट में आकर वहीं गिर। उनके एक अन्य साथी ने गांव वालों को घटना की सूचना दी। सूचना मिलने पर ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे। चारों युवकों को तत्काल पुलिस की मदद से अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने इनमें से दो को अस्पताल पहुंचने पर मृत बताया। वहीं अन्य दो ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी किए गए तैनात घटना के बाद, पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है। मृतकों के परिजन भी वहां पहुंच गए हैं। चारों शवों का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। स्थानीय लोगों ने बताया कि एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में बाकी तीन लोग भी गैस रिसाव की चपेट में आ गए। उनका कहना है कि इस क्षेत्र की बंद खदानों में गैस रिसाव की समस्या गंभीर है। Source link

झारखंड

बोकारो से चलने वाली बसों का बढ़ा किराया:रांची का नॉन-एसी किराया 250...

बोकारो में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ा है। ईंधन के दाम बढ़ने से बसों का किराया बढ़ा दिया गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और छोटे व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बोकारो से रांची मार्ग पर किराए में अंतर देखा जा रहा है। यात्री ईबु उल्लाह ने बताया कि सरकारी वातानुकूलित 2×2 बसों में 300 रुपए किराया लिया जा रहा है, जबकि निजी बसें इसी रूट पर 350 रुपए वसूल रही हैं। उन्होंने एक ही मार्ग पर किराए में इस असमानता पर सवाल उठाया। बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर बसें चलाना संभव नहीं निजी बस कंडक्टर मोहम्मद अशरफ ने किराए में वृद्धि का कारण डीजल की बढ़ती कीमतें बताईं। उन्होंने कहा कि परिचालन लागत बढ़ने के कारण बोकारो-रांची मार्ग पर प्रति यात्री 50 रुपए किराया बढ़ाना पड़ा है। अशरफ के अनुसार, बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर बसें चलाना संभव नहीं था। टाटा रूट के टिकट काउंटर संचालक मोफीज उद्दीन ने जानकारी दी कि टाटा, गोड्डा, साहिबगंज और ललमटिया जैसे कई अन्य मार्गों पर भी किराए में 50 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन और बस संचालकों को मिलकर एक समान किराया दर निर्धारित करना चाहिए, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। धनबाद और रामगढ़ रूटों पर भी किराए में वृद्धि दर्ज की गई है। टिकट कंडक्टर मोहम्मद हुसैन के मुताबिक, रामगढ़ का नॉन-एसी किराया 150 रुपए से बढ़कर 180 रुपए हो गया है। इसी तरह, रांची का नॉन-एसी किराया 250 रुपए से बढ़ाकर 280 रुपए कर दिया गया है। बोकारो के निवासियों ने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन किराए की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता के जीवन और घरेलू बजट पर गंभीर असर पड़ेगा। Source link

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vaibhav suryavanshi special talent revealed by uncle in samastipur thanked to bcci

होमखेलक्रिकेट वैभव सूर्यवंशी का स्पेशल टैलेंट आया सामने! चाचा ने खोला राज,BCCI का जताया आभार Last Updated:June 13, 2026, 15:09 IST Vaibhav Suryavanshi: IPL के बाद बेबी बॉस यानी वैभव सूर्यवंशी के लिए लगातार खुशियां ही मिल रही है. इंडिया ए टीम में चयन होने के बाद बीसीसीआई ने टी-20 टीम के साथ इंडियन टीम में चयन हुआ है. उन्होंने मात्र 15 साल 15 दिन में चयनित होकर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा. समस्तीपुर के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद विश्व क्रिकेट में तहलका मचा दिया है. उनकी सफलता पर उनके चाचा ने कई राज खोले हैं. साथ ही नई खुशी के लिए बीसीसीआई का धन्यवाद कहा है. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: समस्तीपुर जिले के ताजपुर से निकलकर क्रिकेट के क्षेत्र में तेजी से पहचान बना रहे कम उम्र की खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. हाल ही में टीम इंडिया में उनके चयन की खबर सामने आने के बाद हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर वैभव के अंदर ऐसी कौन सी खास बात थी जिसने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचा दिया. इस सवाल का जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने वैभव के छोटे चाचा राजीव सूर्यवंशी से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि बचपन से ही वैभव बाकी बच्चों से अलग थे. खेल के प्रति उनका जुनून, घंटों अभ्यास करने की आदत और खुद को हर दिन बेहतर बनाने की जिद ही उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आई है. परिवार को हमेशा विश्वास था कि एक दिन वह बड़ा नाम जरूर करेंगे. चाचा ने कहा-भारतीय क्रिकेट बोर्ड का आभारवैभव के छोटे चाचा राजीव सूर्यवंशी ने कहा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने जिस भरोसे के साथ उनके भतीजे को टीम में जगह दी है. उसके लिए पूरा परिवार आभारी है. उन्होंने कहा कि बोर्ड के चयनकर्ताओं ने वैभव के अंदर छिपे हुनर को पहचाना और उन्हें सही अवसर दिया. राजीव बताते हैं कि अगर वैभव ने आईपीएल में अपना दमदार प्रदर्शन नहीं किया होता तो शायद आज यह दिन देखने को नहीं मिलता. IPL में जिस तरह उन्होंने बड़े-बड़े गेंदबाजों के सामने बेखौफ बल्लेबाजी की. लगातार रन बनाए और अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया. उसी ने चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर खींचा. यही वह मंच था जिसने वैभव को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई. वजह है आईपीएल का प्रदर्शनराजीव सूर्यवंशी ने आगे कहा कि पिछले दो आईपीएल सीजन वैभव के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुए. उन्होंने कहा कि आईपीएल में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड और कई बड़े गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी ने साबित कर दिया कि वैभव बड़े मंच के खिलाड़ी हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान रॉयल्स भले खिताब नहीं जीत पाई हो, लेकिन पूरे सीजन में चर्चा सिर्फ वैभव की बल्लेबाजी की रही. यही वजह बनी कि भारतीय टीम प्रबंधन ने उनके खेल को गंभीरता से देखा और उन्हें टीम इंडिया में जगह देने का फैसला किया. आज समस्तीपुर ही नहीं, पूरा बिहार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar Source link

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बिल्ली पालने की सोच रहे हैं? पशु चिकित्सक ने बताए 7 जरूरी...

Last Updated:June 13, 2026, 14:26 IST पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, बिल्ली खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि घर में उसके रहने के लिए पर्याप्त जगह हो. साथ ही परिवार के किसी सदस्य को बिल्ली के बालों से एलर्जी तो नहीं है, इसकी भी जांच कर लेनी चाहिए. उन्होंने बताया कि बिल्लियों को घूमने-फिरने और खेलने के लिए खुली जगह की जरूरत होती है, इसलिए उनके लिए आरामदायक और पर्याप्त जगह की व्यवस्था करना जरूरी है. इससे बिल्ली स्वस्थ और सक्रिय रहती है. बोकारो: आजकल लोगों में पालतू बिल्लियां पालने का शौक तेजी से बढ़ रहा है. खासकर देसी और विदेशी नस्ल की बिल्लियों की मांग लगातार बढ़ रही है. हालांकि, कई लोग बिना पूरी जानकारी और जांच-पड़ताल के बिल्ली खरीद लेते हैं, जिसके कारण बाद में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में बोकारो के चास स्थित एक पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने बिल्ली खरीदने और उसकी देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं. डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बिल्ली खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि घर में उसके रहने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है या नहीं. इसके साथ ही यह भी जान लेना जरूरी है कि परिवार के किसी सदस्य को बिल्ली के बालों से एलर्जी तो नहीं है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि बिल्लियों को घूमने-फिरने और खेलने के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होती है. इसलिए उनके लिए खुले और आरामदायक स्थान की व्यवस्था करनी चाहिए. साथ ही उनकी साफ-सफाई और शौच की उचित व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है. डॉ. अनिल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पर्शियन या अन्य विदेशी नस्ल की बिल्ली खरीदने की योजना बना रहा है, तो उसके लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. विदेशी नस्ल की बिल्लियां अधिक तापमान को आसानी से सहन नहीं कर पातीं, जिससे उनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसलिए उनके लिए ठंडा और आरामदायक माहौल उपलब्ध कराना बेहतर होता है. जरूरत पड़ने पर एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था भी की जा सकती है. डॉ. अनिल ने सलाह दी कि बिल्ली खरीदने से पहले उसकी शारीरिक जांच अवश्य कर लेनी चाहिए. बिल्ली के दांत, कान और आंखों की अच्छी तरह जांच करें. शरीर पर किसी प्रकार के घाव, कटने या चोट के निशान नहीं होने चाहिए, क्योंकि ये आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का कारण बन सकते हैं. नई बिल्ली को घर लाने के बाद शुरुआती दिनों में वह डरी-सहमी रह सकती है. कई बार वह सोफे, बिस्तर या घर के किसी कोने में छिप जाती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. उसे नए माहौल में खुद को ढालने के लिए समय देना चाहिए. इसके लिए डॉ. अनिल कुमार ने ‘3-3-3 नियम’ अपनाने की सलाह दी है. इसके तहत पहले 3 दिनों तक बिल्ली को नए माहौल को समझने का समय दें. अगले 3 सप्ताह में उसे घर और परिवार के सदस्यों के साथ घुलने-मिलने का अवसर दें. वहीं पहले 3 महीनों तक उसके साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाने पर ध्यान केंद्रित करें. उन्होंने कहा कि बिल्ली को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर वैक्सीनेशन और डी-वॉर्मिंग कराना बेहद जरूरी है. साथ ही उसके खेलने के लिए खिलौनों की व्यवस्था भी करनी चाहिए, क्योंकि बिल्लियों को खेलना और नई चीजों को खरोंचना पसंद होता है. डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, देसी और विदेशी दोनों नस्ल की बिल्लियों को अच्छी तरह पाला जा सकता है. हालांकि, देसी बिल्लियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है, जबकि विदेशी नस्ल की बिल्लियों को अधिक देखभाल और विशेष वातावरण की आवश्यकता पड़ती है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand Source link

झारखंड

आजमगढ़ में हाईवे पर ट्रेलर से टकराई अर्टिगा कार:4 लोगों की मौत,...

आजमगढ़-वाराणसी नेशनल हाईवे पर अर्टिगा कार सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद कार में सवार 5 लोग अंदर फंस गए। स्थानीय लोगों और पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने 4 लोगों को मृत घोषित कर दिया। जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि सभी यात्री झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले थे। अंबेडकरनगर स्थित किछौछा दरगाह से कर लौट रहे थे। हादसे की सूचना मिलते ही मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया। हादसा शनिवार सुबह देवगांव कोतवाली क्षेत्र के बरडीहा मोड़ के पास हुआ। अब जानिए पूरा मामला… झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर (डालटनगंज) क्षेत्र के मोहनिया गांव के रहने वाले 5 लोग अर्टिगा कार से अंबेडकरनगर स्थित किछौछा दरगाह गए थे। सभी यहां से कार में सवार होकर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी कार नेशनल हाईवे पर सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में पीछे से जा घुसी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद वाहन में सवार सभी लोग अंदर फंस गए। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस और स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर घायलों को बाहर निकाला। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से सभी को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने हाजी अब्दुल रज्जाक (59), अरबाज खान (22), सोहराब (55) और मोहम्मद कैफ (57) को मृत घोषित कर दिया। वहीं, घायल अजमल आलम की हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजते हुए परिजनों को सूचना दे दी है। हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। Source link

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घर में अकेली रह रही वृद्धा को मार; लूटे गहने:हजारीबाग के पकरी...

हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत पंकरी बरवाडीह गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां 85 वर्षीय वृद्ध महिला मगनी मोसोमात की अपराधियों ने घर में घुसकर हत्या कर दी। मृतका स्वर्गीय चौधरी साव की पत्नी थीं। घर में अकेली रहती थीं। बताया जा रहा है कि देर रात अज्ञात अपराधी उनके घर में दाखिल हुए और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। सुबह घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जहां वृद्धा का शव घर के भीतर पड़ा मिला। घटना के बाद पूरे गांव में भय और दहशत का माहौल बन गया है। ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की है। हाथ के गहने गायब, लूट के बाद हत्या की आशंका घटना को लेकर परिजनों ने बताया कि मगनी मोसोमात के हाथों में चांदी के कुछ गहने थे, जो घटना के बाद से गायब हैं। इस आधार पर आशंका जताई जा रही है कि अपराधियों ने लूटपाट की मंशा से घर में घुसे और विरोध करने पर वृद्धा की हत्या कर दी। मृतका के दो पुत्र हैं, जो अलग-अलग जगहों पर रहते हैं। वृद्धा घर में अकेली रहती थीं। इस कारण अपराधियों ने उन्हें आसान निशाना बनाया। मृतका के बड़े पुत्र पचू साव ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस जघन्य अपराध में शामिल लोगों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि परिवार को फिलहाल किसी पर सीधा संदेह नहीं है। टेक्निकल टीम और डॉग स्क्वॉड की मदद से हुई जांच घटना की सूचना मिलते ही बड़कागांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। थाना प्रभारी दीपक सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए टेक्निकल टीम और डॉग स्क्वॉड को भी बुलाया गया है, ताकि साक्ष्य जुटाकर जल्द अपराधियों तक पहुंचा जा सके। पुलिस हत्या के कारणों और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने के लिए हर संभव पहलू पर जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। Source link

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झुंझुनूं के इस गांव ने कर दिखाया कमाल! जनसहयोग से करोड़ों जुटाकर...

Last Updated:June 13, 2026, 14:09 IST Jhunjhunu Hindi News: झुंझुनूं जिले का एक गांव आज जनसहयोग और सामुदायिक भागीदारी का अनूठा उदाहरण बनकर उभरा है. गांव के लोगों ने विकास कार्यों के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय आपसी सहयोग और जनभागीदारी का रास्ता चुना. ग्रामीणों ने मिलकर करोड़ों रुपये की राशि जुटाई और गांव में सड़क, पेयजल, शिक्षा, सामुदायिक भवन, धार्मिक स्थल तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास कराया. इसके परिणामस्वरूप गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई और यह क्षेत्र अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है. ग्रामीणों की एकजुटता और विकास के प्रति समर्पण ने साबित कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं. आज यह गांव न केवल आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है. Jhunjhunu News: झुंझुनूं जिले का भोड़की गांव केवल एक साधारण ग्रामीण नहीं, बल्कि जनसहयोग और सामाजिक एकता का उदाहरण है. गुढ़ागौड़जी क्षेत्र में स्थित यह गांव करीब 550 वर्षों का गौरवशाली इतिहास अपने भीतर समेटे हुए है. यहां के लोगों ने विकास के लिए कभी केवल सरकार पर निर्भर रहने की बजाय स्वयं आगे बढ़कर योगदान दिया और अपने गांव की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया. इसी सोच ने भोड़की को पूरे राजस्थान में एक मॉडल के रूप में स्थापित किया है. भोड़की गांव के विकास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य जनसहयोग से किए गए हैं. गांव में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई गोशाला और करीब 80 लाख रुपये की लागत से तैयार खेल मैदान इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं. ग्रामीणों ने बिना किसी बड़े सरकारी बजट का इंतजार किए आपसी सहयोग, दान और सामूहिक प्रयासों से इन परियोजनाओं को साकार किया. यही कारण है कि आज भोड़की आत्मनिर्भर गांव के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है. गांव का इतिहास भी बेहद रोचक और गौरवशाली रहा है. स्थानीय निवासी राजकुमार सैनी के अनुसार प्राचीन समय में यहां भोड़ा गुर्जर नाम का एक ग्वाला निवास करता था. उस दौर में नवाबों का शासन था. वर्ष 1735 में शार्दूल सिंह के पुत्र जोरावर सिंह ने भोड़ा गुर्जर की सहायता से नवाब को पराजित कर इस क्षेत्र में अपना शासन स्थापित किया. इस घटना के बाद इस स्थान को भोड़ा की बस्ती के नाम से जाना जाने लगा, जिसने आगे चलकर भोड़की का स्वरूप धारण कर लिया. Add News18 as Preferred Source on Google समय के साथ भोड़की गांव का विस्तार हुआ और इसका प्रशासनिक महत्व भी बढ़ा. पहले इसे भोड़ाकी कहा जाता था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों की बोलचाल में इसका नाम भोड़की हो गया. वर्तमान में भोड़की एक पंचायत मुख्यालय है, जिसके अंतर्गत बड़ापाना, कचौलिया जोहड़, ढाब जोहड़ और धमाणा जोहड़ जैसे कई राजस्व गांव शामिल हैं. शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं की बात करें तो यहां आजादी से पहले वर्ष 1932 में पुलिस चौकी स्थापित हो चुकी थी और वर्ष 1936 में विद्यालय भी शुरू हो गया था. गांव में स्थित जमवाय ज्योति गोशाला सामाजिक सेवा और गौसंरक्षण का बड़ा केंद्र बन चुकी है. गोशाला के अध्यक्ष शिवराम गोदारा के अनुसार वर्ष 2015 में ग्रामीणों और भामाशाहों के सहयोग से इसकी स्थापना की गई थी. स्थापना के बाद से लेकर अब तक गोशाला के विकास, पशुओं की देखभाल, भवन निर्माण और अन्य सुविधाओं पर 5 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है. यह गोशाला न केवल क्षेत्र में गौसेवा का केंद्र है, बल्कि जनसहयोग की शक्ति का भी जीवंत उदाहरण मानी जाती है. खेलों के क्षेत्र में भी भोड़की गांव ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. गांव के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किए गए खेल मैदान पर अब तक लगभग 80 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं. स्टेडियम समिति के अध्यक्ष हरलाल गढ़वाल बताते हैं कि यह पूरा कार्य ग्रामीणों और दानदाताओं के सहयोग से संभव हुआ है. इस मैदान के बनने से गांव के युवाओं को खेल प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है और कई खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना रहे हैं. भोड़की गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान जमवाय माता मंदिर से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि गांव के धमाणा जोहड़ में माता का शिला स्वरूप प्राकृतिक रूप से धरती से प्रकट हुआ था. इसके बाद श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ी और धामाराम द्वारा यहां मंदिर का निर्माण करवाया गया. मंदिर के निकट स्थित धमाणा तालाब भी धार्मिक महत्व रखता है. आज जमवाय माता मंदिर भोड़की की पहचान बन चुका है और नवरात्र के दौरान यहां लगने वाले मेले में देशभर से हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

झारखंड

चारा घोटाले से जुड़े 38 लाख के जेवर नहीं लौटेंगे, झारखंड हाई...

Last Updated:June 13, 2026, 11:23 IST Fodder Scam Ranchi HC News: चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें आरोपी एसबी सिन्हा के घर से जब्त 38 लाख रुपये के जेवरात को लौटाने का निर्देश दिया गया था. चारा घोटाला मामले में सीबीआई को बड़ी राहत रांची. झारखंड उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए एसबी सिन्हा के घर से जब्त किए गए करीब 38 लाख रुपये के जेवरात लौटाने के निचली अदालत के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है. सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एसबी सिन्हा के पुत्र रवि सिन्हा समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. बता दें कि यह पूरा मामला चारा घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई की छापेमारी से जुड़ा है . जांच के दौरान तत्कालीन पशुपालन विभाग के अधिकारी एस.बी. सिन्हा के ठिकानों से लाखों रुपये मूल्य के कीमती आभूषण जब्त किए गए थे. बता दें कि हाल ही में सीबीआई की विशेष अदालत ने इन आभूषणों को उनके परिजनों को वापस सौंपने का आदेश जारी किया था. निचली अदालत के इसी फैसले के खिलाफ सीबीआई ने झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया था और यह दलील दी कि यह संपत्ति घोटाले की अवैध कमाई से अर्जित की गई हो सकती है, इसलिए इसे वापस नहीं किया जाना चाहिए . मिली जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि 13 और 14 मई 1999 को एसबी सिन्हा के घर से जेवरात जब्त किए गए थे. जांच एजेंसी का कहना है कि एसबी सिन्हा का निधन 1999 में और उनकी पत्नी रमा सिन्हा का निधन 2011 में हो गया था. सीबीआई के अनुसार रमा सिन्हा ने अपने जीवनकाल में इन जेवरों पर स्त्रीधन के रूप में कोई दावा पेश नहीं किया. यहां यह भी बता दें कि रवि सिन्हा ने वर्ष 2024 में विशेष सीबीआई अदालत में जेवर वापस करने की मांग करते हुए आवेदन दिया था, लेकिन उनके दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. इसी मामले में सीबीआई ने निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. उसी याचिका पर सुनवाई करते हुए HC ने निचली अदालत के आदेश पर स्टे लगा दिया है. हाई कोर्ट ने रोक लगाते हुए मांगा जवाब सीबीआई की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले की पूरी सुनवाई मुकम्मल नहीं हो जाती, तब तक ये आभूषण मालखाने या सरकारी अभिरक्षा में ही रहेंगे. इसके साथ ही अदालत ने दिवंगत सिन्हा के बेटे रवि सिन्हा और अन्य को नोटिस तामील करते हुए पूछा है कि क्यों न निचली अदालत के इस आदेश को स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाए. चारा घोटाले का अहम हिस्सा थे एसबी सिन्हा मालूम हो कि बिहार और झारखंड के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में शुमार चारा घोटाले में पशुपालन विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एस.बी. सिन्हा को किंगपिन यानी मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक माना जाता था. हालांकि, मामले की कानूनी प्रक्रिया के दौरान ही उनका निधन हो गया था. बहरहाल, हाई कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Ranchi,Jharkhand Source link

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ऋषिभिट्टा पहाड़ी के चेकडैम में हाथियों की जलक्रीड़ा:गिरिडीह से धनबाद आया 25...

धनबाद के टुंडी प्रखंड की ऋषिभिट्टा पहाड़ी पर इन दिनों जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड डेरा डाले हुए है। गिरिडीह क्षेत्र से आए लगभग 25 हाथियों का यह दल पिछले एक महीने से यहां मौजूद है। इस झुंड में पांच छोटे हाथी भी शामिल हैं। हाथियों की उपस्थिति के कारण आसपास के ग्रामीण सतर्क हैं, जबकि वन विभाग उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। शुक्रवार को ऋषिभिट्टा पहाड़ी पर बने चेकडैम में हाथियों की जलक्रीड़ा देखी गई। छोटे हाथियों ने भी पानी में उछल-कूद कर आनंद लिया दो बच्चों सहित सात हाथी पानी में उतरकर खेलते हुए नजर आए। हाथियों ने अपनी सूंड में पानी भरकर एक-दूसरे पर उड़ेला और काफी देर तक चेकडैम में मस्ती करते रहे। छोटे हाथियों ने भी पानी में उछल-कूद कर आनंद लिया। पहाड़ी के आसपास घने बांस के जंगल हैं वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ऋषिभिट्टा पहाड़ी हाथियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गई है। यहां पर्याप्त मात्रा में भोजन और पानी उपलब्ध है। पहाड़ी के आसपास घने बांस के जंगल हैं, जो हाथियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। यही कारण है कि हाथियों का झुंड यहां कुछ समय तक रुकना पसंद करता है। डीएफओ विकास पालीवाल ने बताया कि गिरिडीह, जामताड़ा और हजारीबाग क्षेत्रों से हाथियों का आवागमन सामान्य है। इसे देखते हुए वन विभाग ने पहाड़ी पर चेकडैम का निर्माण कराया है। वनकर्मियों और मशालियों की एक टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना और मानव-हाथी संघर्ष को रोका जा सके। Source link

झारखंड

लातेहार के चंदवा में कोयला लोड हाइवा दुकान में घुसा:हादसे में चार...

लातेहार जिले के चंदवा स्थित इंदिरा गांधी चौक पर शनिवार तड़के करीब 4 बजे एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। बालूमाथ की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार कोयला लोड हाइवा अनियंत्रित होकर मैक्लुस्कीगंज से आ रहे एक ट्रक से टकरा गई और चौक पर स्थित एसके सुपर मार्ट दुकान में जा घुसी। इस हादसे में हाइवा चालक सहित चार लोग घायल हो गए। घायलों की पहचान हाइवा चालक कार्तिक कुमार, रिंकू यादव, जोभा भुईयां और श्री राम दुबे के रूप में हुई है। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि हाइवा और ट्रक दोनों बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि दुकान को भी काफी नुकसान पहुंचा। लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा दुर्घटना के बाद एनएच-75 (रांची–मेदिनीनगर मार्ग), एनएच-99 (रांची–चतरा मार्ग) और चंदवा–मैक्लुस्कीगंज सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़क पर हाइवा फंसे होने के कारण चारों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त हाइवा को हटाया जा सका। इसके बाद सुबह लगभग 9 बजे यातायात व्यवस्था बहाल हुई। इस दौरान चंदवा शहर में भारी वाहनों का भीषण जाम लगा रहा। सूचना मिलते ही पुनि सह थाना प्रभारी अशोक कुमार के नेतृत्व में चंदवा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारु करने में सहयोग किया और वाहनों के आवागमन को नियंत्रित करते हुए स्थिति को सामान्य कराया। पुलिस ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त हाईवा में लदा कोयला वैध था या अवैध, इसकी जांच की जा रही है। मामले की सभी पहलुओं से जांच जारी है। Source link

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