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झारखंड

धनबाद होकर तिरुपति-रक्सौल एक्सप्रेस शुरू हुई:धनबाद से हर गुरुवार को शाम में...

तिरुपति से रक्सौल के बीच धनबाद होकर नियमित ट्रेन का परिचालन सोमवार 1 जून को शुरू हो गया। इससे धनबाद के लोगों को दक्षिण भारत के साथ बरौनी, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी आदि उत्तर बिहार के शहरों लिए एक नई ट्रेन मिल गई। 17433 तिरुपति-रक्सौल हर सोमवार सुबह 8:15 बजे खुलेगी और बुधवार को भोर में 3:50 बजे धनबाद होती हुई शाम 5 बजे रक्सौल पहुंचेगी। वापसी में 17434 रक्सौल-तिरुपति हर गुरुवार को भोर में 3:15 में खुलक शाम 4:15 बजे धनबाद और फिर शनिवार को सुबह में 9:30 बजे तिरुपति पहुंचेगी। अभी सभी क्लास में टिकट उपलब्ध इस ट्रेन में जनरल, स्लीपर, 3 एसी और 2 एसी के कोच होंगे। ट्रेन में टिकटों की बुकिंग शुरू हो चुकी है। अभी सभी क्लास में टिकट उपलब्ध हैं। यह ट्रेन गुंटकल, सिकंदराबाद, गोंदिया, दुर्ग, झारसुगुड़ा, राउरकेला, रांची, बोकारो स्टील सिटी, धनबाद, चितरंजन, जसीडीह, झाझा, बरौनी, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी के रास्ते चलेगी। धनबाद से तिरुपति का भाड़ा स्लीपर में 875 रुपए और थर्ड एसी में 2220 रुपए होगा। वहीं, धनबाद से रक्सौल जाने के लिए स्लीपर में 330 रुपए और थर्ड एसी में 880 रुपए देने होंगे। Source link

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Kerala Summer Vacation 2026: केरल के 5 बेस्ट हिल स्टेशन, जानें पूरा...

Last Updated:June 02, 2026, 19:32 IST Kerala Summer Vacation 2026: गर्मी की छुट्टियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो केरल आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है. मानसून से पहले का मौसम यहां की खूबसूरती को और बढ़ा देता है. मुन्नार के चाय बागान, वायनाड के जंगल, थेक्कडी की बोट सफारी, वागामोन की वादियां और नेल्लियाम्पथी की शांत पहाड़ियां पर्यटकों को खूब आकर्षित करती हैं. खास बात यह है कि दिल्ली से ट्रेन के जरिए 15 से 17 हजार रुपये के बजट में भी केरल ट्रिप पूरी की जा सकती है. जानिए केरल के 5 बेहतरीन हिल स्टेशन और वहां घूमने का पूरा खर्च. केरल घूमने का आ गया परफेक्ट टाइम: गर्मी की छुट्टियों में अगर आप किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां ठंडा मौसम, हरियाली, पहाड़ और सुकून एक साथ मिले, तो केरल आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. मानसून से पहले का मौसम यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. मुन्नार, वायनाड, थेक्कडी, वागामोन और नेल्लियाम्पथी जैसे हिल स्टेशन आपको न केवल प्रकृति के बेहद करीब ले जाएंगे, बल्कि आपकी छुट्टियों को भी शानदार बना देंगे. आइए जानते हैं केरल की 5 शानदार जगहों और वहां घूमने में आने वाले खर्च के बारे में. गर्मी की छुट्टियों में बनाएं केरल का प्लान: अगर आप इस गर्मी कहीं ठंडी और खूबसूरत जगह घूमने का सोच रहे हैं तो केरल बेहतरीन विकल्प हो सकता है. मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार केरल में मानसून 30 जून से पहले पहुंच सकता है. ऐसे में जून का महीना यहां घूमने के लिए शानदार माना जा रहा है. हरियाली, पहाड़, झीलें और शांत वातावरण केरल को परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए खास बनाते हैं. मुन्नार के चाय के बागानों और बादलों की दुनिया: करीब 1,532 मीटर की ऊंचाई पर बसा मुन्नार केरल के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में गिना जाता है. यहां की हरी-भरी पहाड़ियां, ठंडी हवाएं और दूर-दूर तक फैले चाय के बागान पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं. परिवार के साथ एराविकुलम नेशनल पार्क घूम सकते हैं, जहां दुर्लभ नीलगिरि तहर देखने को मिलता है. पोथामेडु व्यू प्वाइंट से धुंध में ढकी घाटियों का खूबसूरत नजारा भी देखा जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google वायनाड के जंगल, झरने और एडवेंचर का शानदार मेल: प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए वायनाड किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां का तापमान गर्मियों में भी 18 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. वायनाड वाइल्डलाइफ सेंचुरी में हाथी, हिरण, तेंदुए और कई दुर्लभ पक्षी देखे जा सकते हैं. चेंबरा पीक ट्रैकिंग के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय है. हरियाली से घिरा यह इलाका परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आदर्श माना जाता है. थेक्कडी में बोट सफारी और वन्यजीवों का रोमांच: थेक्कडी बच्चों और परिवारों के बीच सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक है. यहां स्थित पेरियार झील में बोट सफारी का अनुभव बेहद खास माना जाता है. नाव की सैर के दौरान झील के किनारे हाथियों और अन्य वन्यजीवों को देखा जा सकता है. मसालों के बागानों की सैर, हाथी जंक्शन में हाथियों के साथ समय बिताना और बांस राफ्टिंग जैसी एक्टिविटीज इस जगह को और आकर्षक बनाती हैं. वागामोन की रोमांटिक वादियां और सुकून भरा माहौल: करीब 1,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वागामोन अपने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है. यहां चारों ओर फैले पाइन के जंगल, झरने और बादलों से ढकी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं. थांगल पारा व्यू प्वाइंट से घाटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है. वागामोन लेक में बोटिंग और आसपास की पहाड़ियों में ट्रैकिंग का आनंद लिया जा सकता है. यह जगह परिवार और कपल्स दोनों के लिए खास मानी जाती है. नेल्लियाम्पथी में कम बजट में शानदार हिल स्टेशन का अनुभव: नेल्लियाम्पथी को अक्सर ‘दूसरा ऊटी’ कहा जाता है क्योंकि यहां कम खर्च में बेहतरीन प्राकृतिक नजारे देखने को मिलते हैं. यहां का मौसम सालभर सुहावना बना रहता है. पर्यटक ऑरेंज प्लांटेशन, इलायची के बागानों और खूबसूरत पहाड़ियों का आनंद ले सकते हैं. सीथरकुंडु व्यू प्वाइंट से घाटियों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. शांत और भीड़भाड़ से दूर छुट्टियां बिताने वालों के लिए यह शानदार जगह है. दिल्ली से केरल पहुंचने का हवाई बजट: दिल्ली से कोच्चि, कोझिकोड़ और तिरुवनंतपुरम के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं. सामान्य दिनों में फ्लाइट टिकट का किराया 8,000 से 12,000 रुपये के बीच रहता है. अगर आप यात्रा से 10 से 15 दिन पहले टिकट बुक कर लेते हैं तो बेहतर किराया मिल सकता है. समय की बचत और आरामदायक यात्रा चाहने वालों के लिए फ्लाइट सबसे सुविधाजनक विकल्प माना जाता है. कम बजट में केरल पहुंचने का आसान तरीका: अगर आप यात्रा पर कम खर्च करना चाहते हैं तो ट्रेन बेहतर विकल्प हो सकती है. दिल्ली से चलने वाली केरल एक्सप्रेस इस रूट की प्रमुख ट्रेनों में शामिल है. थर्ड एसी का किराया लगभग 2,700 रुपये प्रति व्यक्ति है. ट्रेन यात्रा लंबी जरूर होती है, लेकिन इससे यात्रा का कुल खर्च काफी कम हो जाता है और बजट यात्रियों के लिए यह सबसे पसंदीदा विकल्प माना जाता है. रहने और खाने पर कितना खर्च होगा: केरल के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर लगभग 2,000 रुपये प्रति रात के बजट में अच्छा होटल या होमस्टे मिल सकता है. खाने-पीने पर एक व्यक्ति का दैनिक खर्च 500 से 700 रुपये के बीच माना जा सकता है. स्थानीय दक्षिण भारतीय भोजन स्वादिष्ट होने के साथ-साथ किफायती भी होता है. यदि आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो पहले से होटल बुक करने पर बेहतर विकल्प मिल सकते हैं. दो रात की केरल ट्रिप का पूरा हिसाब: यदि आप दिल्ली से ट्रेन के जरिए केरल जाते हैं और वहां दो रात रुकते हैं, तो ट्रेन टिकट, होटल, भोजन, स्थानीय परिवहन और साइट सिइंग सहित कुल खर्च लगभग 15,000 से 17,000 रुपये तक आ सकता है. वहीं फ्लाइट से यात्रा करने पर यह बजट कुछ और बढ़ सकता है. कम खर्च में खूबसूरत पहाड़, हरियाली और यादगार छुट्टियों का आनंद लेने के लिए केरल शानदार विकल्प साबित हो सकता है. प्रकृति, पहाड़ और सुकून का शानदार

झारखंड

गांव में पुरानी बैठकी… 45°C में भी प्राकृतिक ठंडक, 20 इंच मोटी...

Last Updated:June 02, 2026, 16:38 IST झारखंड के देवघर प्रखंड के घोरलास गांव में आज भी एक ऐसी अनोखी ‘बैठकी’ मौजूद है, जो भीषण गर्मी में लोगों को प्राकृतिक ठंडक का एहसास कराती है. जहां शहरों में लोग गर्मी से बचने के लिए एसी और कूलर का सहारा लेते हैं, वहीं इस गांव के लोग दोपहर के समय पक्के मकानों की बजाय मिट्टी से बने पुराने ‘कोठा घर’ में बैठना ज्यादा पसंद करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बाहर का तापमान 40 से 45 डिग्री तक पहुंचने के बावजूद इस कमरे के अंदर घुसते ही ठंडक महसूस होने लगती है. यही कारण है कि गर्मी के दिनों में गांव के लोग यहां बैठकर समय बिताते हैं. गांव के 72 वर्षीय ग्रामीण सचिनानंद राय बताते हैं कि यह बैठकी साल 1935 में उनके पूर्वजों ने बनवाई थी. गांव के लोग इसे ‘दरवाजा’ के नाम से जानते हैं. पहले गांव की सामाजिक बैठकें, बातचीत और कई महत्वपूर्ण फैसले इसी जगह पर होते थे. आज भी लोग इस परंपरा को निभा रहे हैं. उनका कहना है कि बाहर तेज धूप और गर्म हवा चलती रहती है, लेकिन मिट्टी के इस कमरे के अंदर तापमान काफी कम रहता है, इसलिए लोग यहां आराम करना पसंद करते हैं. इस कमरे की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक और देसी बनावट है. ग्रामीणों के अनुसार इसकी दीवारें करीब 20 इंच मोटी हैं, जो बाहर की गर्मी को अंदर आने से रोकती हैं. कमरे की छत भी खास तरीके से बनाई गई है. छत के ऊपर खपड़ा लगाया गया है और उसके नीचे मिट्टी, खजूर के पत्ते और दूसरी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया गया है. इसी वजह से कमरे के अंदर गर्मी का असर कम महसूस होता है. ग्रामीण बताते हैं कि पुराने समय में घर बनाने के लिए सिर्फ मिट्टी का उपयोग नहीं होता था. मिट्टी में छोयागुड़, भूसा, सुरती चुना और दूसरी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर मजबूत मिश्रण तैयार किया जाता था. इस तकनीक से बने घर गर्मी में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहते थे. गांव वालों का मानना है कि पहले के लोग बिना बिजली और मशीनों के भी प्रकृति के अनुसार घर बनाना जानते थे. Add News18 as Preferred Source on Google गांव के दूसरे ग्रामीण सुबोध चन्द्र राय बताते हैं कि जब यह बैठकी बनाई गई थी, तब गांवों में एसी और कूलर जैसी सुविधाएं नहीं थीं. उस समय लोग गर्मी से बचने के लिए ऐसे मिट्टी के घरों का सहारा लेते थे. सिर्फ घोरलास गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी गर्मी के दिनों में यहां आकर दोपहर बिताते थे. उनका कहना है कि इस कमरे के अंदर घुसते ही ऐसा लगता है जैसे प्राकृतिक एसी चल रहा हो. यहां की ठंडी हवा के आगे एसी और कूलर की हवा भी फीकी लगती है. गांव की यह पुरानी बैठकी सिर्फ आराम करने की जगह नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान और देसी तकनीक का शानदार उदाहरण भी है. मिट्टी से बने ये कोठा घर आज भी लोगों को प्राकृतिक तरीके से गर्मी से राहत दे रहे हैं. आधुनिक दौर में जहां लोग मशीनों और बिजली पर निर्भर हो चुके हैं, वहीं गांव का यह देसी जुगाड़ दिखाता है कि प्रकृति के करीब रहकर भी सुकून और ठंडक पाई जा सकती है. Source link

झारखंड

चतरा में 11.5 लाख के मादक पदार्थ जब्त:अफीम और ब्राउन शुगर के...

चतरा पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 11.5 लाख रुपए के अफीम और ब्राउन शुगर जब्त किए हैं। इस अभियान में तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह सफलता दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हासिल की। सदर थाना क्षेत्र के पाराडीह जंगल से पुलिस ने ढाई लाख रुपए मूल्य की अफीम के साथ दो तस्करों को पकड़ा। सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सन्नी वर्धन ने बताया कि एसपी अनिमेष नैथानी को अफीम की खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर सदर अंचलाधिकारी अनिल कुमार, एनडीपीएस थाना प्रभारी शम्मी अंसारी और सदर थाना प्रभारी अवधेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने जंगल में घेराबंदी कर कच्चे रास्ते पर भाग रहे दो संदिग्ध युवकों को खदेड़कर पकड़ा। 522 ग्राम गीली अफीम बरामद दूसरी कार्रवाई में, गिद्धौर थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 9 लाख रुपए मूल्य के प्रतिबंधित ब्राउन शुगर के साथ एक अन्य तस्कर को गिरफ्तार किया। पुलिस की इन लगातार कार्रवाइयों से अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट के नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। चतरा जिले में अफीम, ब्राउन शुगर और अन्य नशीले पदार्थों के काले कारोबार को खत्म करने के लिए पुलिस का ‘स्पेशल ड्राइव’ अभियान जारी है। तलाशी के दौरान इनके पास से 522 ग्राम गीली अफीम और ओप्पो कंपनी के दो मोबाइल बरामद हुए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लावालौंग के हेडुम निवासी रूपेश कुमार (21) और ईटखोरी के परसौनी निवासी दीपांशु कुमार यादव (20) के रूप में हुई है। प्लास्टिक में पैक करीब 44 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद वहीं, दूसरी तरफ डीएसपी मुख्यालय सुनील कुमार सिंह ने बताया कि गिद्धौर के जपुआ मैदान में प्रतिबंधित ड्रग्स की खरीद-बिक्री होने की गुप्त सूचना पर अंचलाधिकारी अनंत शयनम विश्वकर्मा और थाना प्रभारी पुरुषोत्तम अग्निहोत्री के संयुक्त नेतृत्व में टीम ने रेड की। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जपुआ गांव के रहने वाले 22 वर्षीय दीपक कुमार को दबोच लिया। आरोपी दीपक के पास से प्लास्टिक में पैक करीब 44 ग्राम अवैध ब्राउन शुगर बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 9 लाख है। पुलिस ने उसके पास से एक वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। Source link

शिक्षा

CBSE Chairman Secretary Transferred Over On-Screen Marking Controversy; Govt Probe

Hindi News Career CBSE Chairman Secretary Transferred Over On Screen Marking Controversy; Govt Probe 11 मिनट पहले कॉपी लिंक CBSE के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद के चलते बोर्ड अध्‍यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्‍ता का तबादला कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने नए मार्किंग सिस्‍टम में आई गड़बड़‍ियों की शिकायतों के चलते ये कदम उठाया है। इसके साथ ही सरकार ने OSM सर्विस की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक समिति भी गठित की है। कैपेसिटी बिल्डिंग कमिशन की चेयरमैन एस राधा चौहान इस एक सदस्यीय कमेटी की अध्यक्ष होंगी। जांच समिति यह पता लगाएगी कि इस सिस्‍टम की खरीद और लागू करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता या गड़बड़ी तो नहीं हुई। सीनियर IAS अधिकारी राहुल सिंह 13 मार्च 2024 को CBSE के अध्यक्ष बने थे। दरअसल, 13 मई को CBSE ने 12वीं का रिजल्ट जारी किया था। इस बार पहली बार कॉपियां कंप्यूटर स्क्रीन (OSM सर्विस) पर चेक की गई थीं। रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने नंबरों को लेकर शिकायत की, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। ———— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

युवक का शव पेड़ से लटका मिला, हत्या की आशंका:शरीर पर मिले...

गुमला जिले के बृंदा पंचायत के कोयनारा टोंगरीटोली में 22 वर्षीय युवक गौरव सिंह का शव एक केला बगीचे में पेड़ से लटका मिला। इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। परिजनों और ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि युवक की हत्या कर शव को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया है। ग्रामीणों ने बृंदा पंचायत की मुखिया सत्यवती देवी को घटना की जानकारी दी। मुखिया ने तत्काल उर्मी पिकेट प्रभारी अम्पा हेंब्रम को सूचित किया। सूचना मिलते ही अम्पा हेंब्रम पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचीं और पालकोट थाना पुलिस को भी बुलाया गया। दोनों थाना क्षेत्रों की पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया गया है। दो साथियों को बाइक लेकर घर जाने को कहा था परिजन डब्लू सिंह के अनुसार, गौरव सिंह सोमवार को अपने दो साथियों के साथ मेला देखने गया था। वापसी के दौरान उसने अपने साथियों से कहा कि उसे एक लड़की का फोन आया है और वह उससे बात करते हुए घर आएगा। इसके बाद उसने दोनों साथियों को बाइक लेकर घर जाने को कहा था। मोबाइल फोन भी गायब मिला साथी घर लौट आए, लेकिन गौरव रातभर में घर नहीं पहुंचा। मंगलवार को उसका शव पेड़ से लटका मिला। पुलिस की प्रारंभिक जांच में युवक के शरीर पर कई जगह चोट के निशान पाए गए हैं। घटनास्थल पर खेत में घसीटने और मारपीट होने के संकेत भी मिले हैं। मृतक की शर्ट आधी खुली हुई थी और उसका मोबाइल फोन भी गायब बताया जा रहा है। शरीर पर खून और चोट के निशान मिलने से हत्या की आशंका और गहरी हो गई है। ग्रामीणों और परिजनों का मानना है कि यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के लिए शव को रस्सी से पेड़ पर लटकाया गया है। हालांकि, पुलिस सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच कर रही है। Source link

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Annapurna Yojana Bengal : suvendu sarkar-mamata banerjee | ‘देश में रहना है...

होमताजा खबरwest bengalKolkata ममता के बाउंसर पर सीएम सुवेंदु सरकार ने मारा सिक्सर, बंगाल में कल से खेला शुरू Last Updated:June 02, 2026, 18:21 IST कोलकाता में ममता बनर्जी के धरने के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हुगली से बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है. सुवेंदु ने एलान किया है कि कल से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अन्नपूर्णा योजना का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले घुसपैठियों को इस योजना का लाभ बिल्कुल नहीं मिलेगा. ममता बनर्जी के धरने पर सुवेंदु ने क्या कहा? कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय शह और मात का खेल चरम पर पहुंच चुका है. कोलकाता में जहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और चुनाव बाद की हिंसा के खिलाफ धरने पर बैठी थीं, उसके कुछ ही घंटे के बाद बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अन्नपूर्णा योजना (Annapurna Scheme) के तहत धन राशि जारी करने का ऐलान कर दिया. सुवेंदु ने घुसपैठ के मुद्दे पर ममता बनर्जी के कोर वोट बैंक को लेकर भी तीखा हमला बोला. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया कि भाजपा ने चुनाव के दौरान बंगाल की जनता से जो भी वादे किए थे, वे बेहद सोच-समझकर किए गए थे और सरकार अब उन्हें पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ जमीन पर उतारने जा रही है. इसी कड़ी में कल यानी बुधवार से उन सभी योग्य नागरिकों के बैंक खातों में अन्नपूर्णा योजना की राशि सीधे ट्रांसफर (Direct Benefit Transfer) कर दी जाएगी, जिन्होंने इसके आवेदन फॉर्म भरे हैं. ममता बनर्जी के सड़क आंदोलन के बीच सुवेंदु सरकार का यह कदम जनता का ध्यान सीधे कल्याणकारी योजनाओं और सुशासन की ओर मोड़ने की एक सुनियोजित रणनीति है. मीडिया से बात करते हुए सुवेंदु ने कहा- ‘कल हमलोग अन्नपुर्णा योजना का रुपया ट्रांसफर करेगा. जो लोग फॉर्म फिलअप किया है उसका पैसा कल चालू हो जाएगा. हमलोग जो बोलता है सोचकर बोलता है. जो बोलता है वो भी करता है. सबलोग सरकार का साथ दे, जो घुसपैठिया है. जो घुसपैठिया है उसको तो रुपया नहीं मिलेगा. ये लोग को रुपया नहीं मिल सकता. जो लोग देश के कानून का उल्लंघन करता है. वैक्सीन नहीं लेता है. स्कूल में भी दाखिल नहीं करता है. कहां-कहां दूसरा स्कूल में भेजता है, जहां पर दूसरा तरह से उसको ट्रेनिंग दिया जाता है. वो लोग तो पैसा नहीं मिलना. हर स्कूल में वंदे मातरम और जन गण मन अनिवार्य कर दिया है. देश में रहना है तो वंदे मातरम बोलना है. देश में रहना है तो जन गण मन गाना है. देश में रहना है तो 26 जनवरी और 15 अगस्त को सम्मान करना है. ये सनातन संस्कृति है. भारत का नाम हिंदुस्तान भी है इंडिया भी है. सांस्कृतिक कल्चर को मानकर ही चलना चाहिए. ये देश दूसरा किसी के हाथ में नहीं जा सकता है.’ #WATCH | Hooghly: West Bengal CM Suvendu Adhikari says, “Tomorrow, we will transfer the money for the Annapurana scheme to those who have filled up their forms. All promises are made after careful consideration and are executed faithfully. However, infiltrators within the system,… https://t.co/27w966FoNG pic.twitter.com/8epLMgXWbO Source link

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बोकारो का ‘मकर केंद’ बना लोगों की पहली पसंद, रसगुल्ले से भी...

Last Updated:June 02, 2026, 16:50 IST Bokaro Makar Kend: बोकारो जिला सिर्फ खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी वन उपज और पारंपरिक स्वादों के लिए भी जानी जाती है. इन्हीं प्राकृतिक सौगातों में एक है ‘मकर केंद’. जो इन दिनों खूब चर्चाओं में है. बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड और हजारीबाग के सीमावर्ती क्षेत्र के जंगलों और नदी किनारे उगने वाला यह फल इन दिनों सड़क किनारे और स्थानीय हाट-बाजारों की शान बना हुआ है. जिसे ग्राहक खूब खरीद रहे हैं. दूर से देखने पर यह चिकनी सतह और हल्के पिला रंग के कारण बिल्कुल टमाटर जैसा दिखाई देता है. लेकिन स्वाद में बहुत ही मीठा होता है और अक्सर ग्रामीण कहते हैं कि इसकी मिठास के आगे रसगुल्ला भी फैल है. यही वजह है कि लोगों को मकर केद का सालभर इंतजार रहता है. स्थानीय व्यापारी विष्णु गुंजू बताते हैं कि मकर केंद फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है. इसकी मिठास ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है. उन्होंने कहा कि इस फल को इकट्ठा करना आसान काम नहीं है. इसके लिए सुबह करीब पांच बजे ही घने जंगलों में जाना पड़ता है और कई बार जंगली हाथी और जानवरों का भी सामना करना पड़ता है. मौसम में अधिक बारिश या गर्मी हो तो फल खराब होने लगते हैं और बाजार में सही कीमत नहीं मिल पाती है. आगे विष्णु गुंजू बताते हैं कि जंगल से फल चुनने के बाद उसे साफ पानी से धोकर सड़क किनारे और स्थानीय हाट में बेचा जाता है. आमतौर पर यह 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक बिकता है और रोजाना करीब 20 से 25 किलो की बिक्री हो जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google इस काम से कई ग्रामीण महिलाएं और स्थानीय परिवार जुड़े हुए हैं, जिनकी पास खेती या रोजगार के सीमित साधन हैं और उनकी जीविका इसी पर निर्भर हैं. फल खरीद रहे ग्राहक महेंद्र प्रसाद कहते हैं कि मकर केंद झारखंड की प्राकृतिक पहचान है. इसके स्वाद में गांव की मिट्टी और जंगलों की खुशबू बसती है. यही कारण है उन्हें पूरे साल इस फल का इंतजार रहता है. जैसे ही बाजार में यह दिखाई देता है, परिवार के साथ इसका स्वाद लेने पहुंच जाते हैं, क्योंकि आज कल बाजार में रासायनिक फलों कि भरमार है. ऐसे समय में मकर केंद जैसे प्राकृतिक फल लोगों को सीधे जंगल और प्रकृति से जोड़ते हैं. Source link

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ट्रेन से उतरते समय गिरने से मजदूर की मौत:मुंबई-हावड़ा मेल से लौट...

गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के पोचरी गांव निवासी मिथुन मंडल की धनबाद-गया रेलखंड स्थित पारसनाथ रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय गिरकर मौत हो गई। यह घटना तब हुई, जब मिथुन मंडल भुसावल से मुंबई-हावड़ा मेल ट्रेन से अपने घर लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार, मिथुन मंडल गुजरात में ट्रांसमिशन लाइन से संबंधित कंपनी स्टार लाइट में सीनियर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। भुसावल से मुंबई-हावड़ा मेल ट्रेन से घर लौटते समय पारसनाथ स्टेशन पर उतरते वक्त उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गिर पड़े। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलने पर बेको पूर्वी पंचायत के पूर्व मुखिया टेकलाल चौधरी पारसनाथ स्टेशन पहुंचे और मामले की जानकारी ली। डुमरी विधायक जयराम महतो भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरी घटना का जायजा लिया। उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और प्रशासन से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। मिथुन मंडल की असामयिक मृत्यु से उनके परिवार पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि मिथुन मेहनती और मिलनसार व्यक्ति थे, जो परिवार के भरण-पोषण के लिए गुजरात में नौकरी करते थे। इस घटना के बाद पोचरी गांव में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। Source link

झारखंड

गिरिडीह में नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान चला:बड़ा चौक से गांधी...

गिरिडीह में नगर निगम ने मंगलवार को बड़ा चौक से गांधी चौक तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। शहर में बढ़ती जाम की समस्या को देखते हुए यह कार्रवाई की गई। इस दौरान सड़क किनारे से ठेले-खोमचे हटाए गए, अवैध रूप से खड़े वाहनों पर कार्रवाई हुई और कूड़े-कचरे की सफाई भी कराई गई। कई वाहनों का चालान भी काटा गया। अभियान में नगर निगम की टीम के साथ पुलिस बल और ट्रैफिक पुलिस भी मौजूद रही। जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाया गया। प्रशासन की मौजूदगी में यह कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। निगम पहले उचित स्थान की व्यवस्था करे: दुकानदार नगर निगम की इस कार्रवाई का फुटपाथी दुकानदारों ने विरोध किया। दुकानदारों का कहना था कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाया जा रहा है, जिससे उनकी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। दुकानदार शक्ति प्रसाद साहा सहित अन्य लोगों ने मांग की कि निगम पहले उनके लिए उचित स्थान की व्यवस्था करे। फुटपाथी दुकानदारों के पुनर्वास के संबंध में नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि फल एवं सब्जी विक्रेताओं समेत अन्य दुकानदारों को हटिया बाजार स्थित हटिया परिसर में दुकान लगाने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, अधिकांश दुकानदार वहां जाने को तैयार नहीं हैं। नगर निगम के सिटी मैनेजर मंजूर आलम ने बताया कि यह अभियान वरीय अधिकारियों के निर्देश पर चलाया गया है। उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि फुटपाथ पर लगने वाली दुकानों के कारण शहर में जाम की समस्या बढ़ रही है और आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। मंजूर आलम ने यह भी कहा कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने फुटपाथी दुकानदारों से हटिया परिसर में दुकान लगाने की अपील की। Source link

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