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असम के जंगलों से गायब हुआ यह जानवर कौन है, जिसको लेकर...

होमताजा खबरदेश जंगलों से गायब हुआ यह जानवर कौन है, जिसको लेकर हिमंता ने किया लंबा-चौड़ा पोस्ट Last Updated:May 23, 2026, 16:58 IST असम के जंगलों से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है. काजीरंगा-कार्बी आंगलोंग के जंगलों से कभी पूरी तरह गायब हो चुका बेहद शांत और खतरनाक शिकारी ‘ढोल’, जिसे एशियाई जंगली कुत्ता भी कहा जाता है, अब वापस लौट आया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद सोशल मीडिया पर इस बात की पुष्टि करते हुए इसे राज्य के पर्यावरण और संरक्षण प्रयासों की एक ऐतिहासिक सफलता बताया है. गुवाहटी. असम के प्राकृतिक और वन्यजीव गलियारे से एक ऐसा सुखद संदेश आया है, जिसने पूरी दुनिया के पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. कभी असम के काजीरंगा और कार्बी आंगलोंग के घने जंगलों की शान रहा और फिर धीरे-धीरे गुमनामी के अंधेरे में खो चुका बेहद चालाक और खतरनाक शिकारी कुत्ता ‘ढोल’ (Dhole/Asiatic Wild Dog) एक बार फिर अपने पुराने साम्राज्य को हासिल करने लौट आया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस अद्भुत प्राकृतिक पुनरुद्धार की कहानी को दुनिया के सामने साझा किया है, जो राज्य में पर्यावरण संतुलन की एक नई और बेहद मजबूत तस्वीर पेश करती है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस वन्यजीव सफलता की विस्तृत जानकारी देते हुए लिखा, ‘एक शांत और अत्यधिक कुशल शिकारी, ‘ढोल’ कभी हमारे जंगलों में स्वतंत्र रूप से घूमता था, लेकिन समय के साथ काजीरंगा-कार्बी आंगलोंग के परिदृश्य से यह पूरी तरह ओझल हो गया था. मगर प्रकृति के पास वापसी करने का अपना एक अनोखा तरीका होता है. वनों के दायरे को बढ़ाने, वन्यजीव गलियारों को मजबूत करने और जंगलों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के हमारे निरंतर प्रयासों के कारण आज ऐसे हालात बने हैं जहां वन्यजीव फिर से फल-फूल रहे हैं.’ Assam CM Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) posts, “A silent and highly efficient predator, the Dhole once roamed freely across our forests before fading from the Kaziranga-Karbi Anglong landscape. But nature has its own way of returning. Through consistent efforts to protect… pic.twitter.com/sHvBl2OrdL Source link

झारखंड

जमशेदपुर के रिंकू पाल बने ‘यंग क्लाइमेट चैंपियन’, पर्यावरण संरक्षण के लिए...

Last Updated:May 23, 2026, 12:56 IST झारखंड के जमशेदपुर के युवा अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं. शहर के 22 वर्षीय रिंकू पाल को ‘यंग क्लाइमेट चैंपियन’ सम्मान से सम्मानित किया गया है. मुंबई में आयोजित समारोह में उन्हें यह पुरस्कार दिया गया। सम्मान के साथ उन्हें मोमेंटो और 50 हजार रुपये की राशि भी मिली. रिंकू पाल लंबे समय से पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता को लेकर काम कर रहे हैं. वे अपने इलाके और आसपास की बस्तियों में लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते रहे हैं. जमीन स्तर पर किए गए उनके प्रयासों और सक्रियता के कारण उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है. जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर के युवाओं की पहचान अब केवल शिक्षा, खेल और उद्योग तक सीमित नहीं रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी शहर के युवा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. इसी कड़ी में शहर के युवा रिंकू पाल को “यंग क्लाइमेट चैंपियन” के सम्मान से नवाजा गया है. मुंबई में आयोजित एक विशेष समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया. पुरस्कार स्वरूप उन्हें मोमेंटो के साथ 50 हजार रुपये की राशि भी दी गई. सिर्फ 22 वर्ष की उम्र में रिंकू पाल ने जिस तरह पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता के लिए काम किया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है. अपने क्षेत्र और आसपास की बस्तियों में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रहने वाले रिंकू को यह उपलब्धि उनके जमीन स्तर पर किए गए प्रयासों के कारण मिली है. रिंकू पाल को 13वें जेस्मडब्ल्यू-टाइम्स ऑफ इंडिया अवॉर्ड्स 2026 के लिए चुना गया. यह सम्मान उन्हें झारखंड में स्थानीय स्तर पर नेतृत्व क्षमता विकसित करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए दिया गया. उनके कार्यों को सामाजिक बदलाव और सामुदायिक भागीदारी का मजबूत उदाहरण माना गया. रिंकू ‘वायु वीर’ नेटवर्क के सदस्य हैं और इसी मंच के माध्यम से वे स्वच्छ हवा, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अभियान चला रहे हैं. उनका उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि लोगों को सीधे जोड़कर व्यवहारिक बदलाव लाना है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए वे तकनीक और डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग करते हैं ताकि पर्यावरण से जुड़े संदेश अधिक लोगों तक पहुंच सकें. पिछले एक वर्ष के दौरान उन्होंने जमशेदपुर में कई कार्यक्रमों और अभियानों में भाग लिया. इनमें एयर पॉल्यूशन को लेकर जागरूकता अभियान, “अब मंथ इन माय लाइफ” और बेलडीह ग्राम स्वच्छता अभियान जैसे प्रयास शामिल रहे. खास तौर पर बेलडीह ग्राम में चलाया गया स्वच्छता अभियान काफी चर्चा में रहा, जहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने को कम करने और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया. रिंकू के प्रयासों का असर अब शहर में भी दिखाई देने लगा है. वायु गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम हो रहा है. उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर युवा ठान लें तो छोटे स्तर से शुरू हुआ प्रयास भी राष्ट्रीय पहचान बना सकता है. जमशेदपुर के लिए यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूक भविष्य की उम्मीद भी है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

झारखंड

गुमला में डकैती की योजना बनाते 6 अपराधी गिरफ्तार:पुलिस ने जमगई से...

गुमला जिले के रायडीह थाना क्षेत्र के जमगई के पास से डकैती की योजना बना रहे छह अपराधियों को हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। चैनपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्रुति अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार देर रात रायडीह पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के अनुसार, जमगई में कुछ अपराधी किस्म के लोग बड़ी डकैती की योजना बना रहे थे। इसके बाद थानेदार संदीप कुमार यादव के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया और छापेमारी की गई, जिसमें अपराधियों को मौके से धर दबोचा गया। पूछताछ के दौरान, गिरफ्तार किए गए अपराधियों ने अपनी पहचान जमगई निवासी वर्मा सिंह, पालकोट निवासी अनिल साहू, कुलमुंडा रायडीह निवासी रितेश दास और रायडीह निवासी देवलाल खड़िया के रूप में बताई। तलाशी के दौरान अनिल साहू के पास से एक देसी कट्टा, एक जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। आगे की पूछताछ में पता चला कि इस योजना में दो अन्य लोग भी शामिल थे, जिनकी पहचान सुरसंग निवासी सीताराम दास और पालकोट निवासी उमेश माझी के रूप में हुई। पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया, जिससे कुल छह अपराधी पकड़े गए। Source link

शिक्षा

हॉस्टल रूम में वॉर्डन के कथित चोरी का वीडियो वायरल:एग्जाम देने गए...

वॉर्डन का हॉस्टल रूम में घुसकर कथित चोरी करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो गाजियाबाद के ABES इंजीनिरिंग कॉलेज का है। इसमें कॉलेज का वॉर्डन छात्र के रूम में घुसकर अलमारी और बाकी सामान खंगालता हुआ दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में वॉर्डन स्टूडेंट के वॉलेट से कुछ रुपए निकालकर जेब में रखते दिखाई दे रहा है। वीडियो शेयर कर रहे यूजर्स के मुताबिक, ये घटना उस समय की है जब छात्र सेमेस्टर एग्जाम देने गए हुए थे। इसी दौरान हॉस्टल वॉर्डन सुनील कुमार, जिसे छात्र ‘मारियो’ के नाम से बुलाते हैं, कमरे में दाखिल हुआ। वीडियो में वह अलमारी, बैग और दराज खोलकर देखता नजर आता है। कुछ देर बाद वो अलमारी से छात्र का वॉलेट चेक करता है और उसमें से नकदी निकालकर जेब में रख लेता है। वीडियो में वो छात्रों के कमरे से लाइटर भी चेक करता दिखाई दे रहा है। ऑनलाइन छात्र ‘चोर वॉर्डन’ कह रहे लोग इस वीडियो को ऑनलाइन शेयर करते वॉर्डन को चोर कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, कई छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में पहले भी सामान गायब होने की शिकायतें होती रही हैं। लेकिन कभी गंभीर कार्रवाई नहीं हुई। कुछ छात्रों ने दावा किया कि परीक्षा के दौरान कमरों में चोरी की घटनाएं पहले भी हुईं। कुछ यूजर्स बोलें- ‘वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर हो रहा’ हालांकि, कई यूजर्स कंमेंट में इसे भ्रामक बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ‘हमारे हॉस्टल के दिनों में भी ऐसा होता था। ये आमतौर पर हॉस्टल में बैन गैरकानूनी चीजें ढूंढने के लिए किया जाता था। वो (वॉर्डन) कुछ चोरी नहीं कर रहा। इसे ‘साइलेंट रेड’ कहते हैं।’ एक दूसरे यूजर ने लिखा, ‘ये थोड़ा मिसलीडिंग लग रहा है। वो बस लाइटर उठा रहा है। ज्यादा संभावना यही है कि वीडियो उसने खुद रिकॉर्ड किया हो, ताकि ये दिखा सके कि वो हॉस्टल में रहने वाले लोगों पर झूठा आरोप नहीं लगा रहा।’ कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई बयान नहीं फिलहाल कॉलेज प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग वॉर्डन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है और मामले ने कॉलेज कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छिड़ गई है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… स्टूडेंट बोले-CBSE OSM में टीचर्स ने धुंधली कॉपी जांची:CBSE वेबसाइट क्रैश; री-इवैल्यूएशन फीस 100 की जगह 8000 मांग रहे सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी CBSE के ऑन स्क्रिन मार्किंग सिस्टम में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। स्कैन की हुई धुंधली कॉपी जांचने, फीस भरने के बावजूद स्टेटस पेंडिंग दिखाने से लेकर CBSE के पोस्ट-वेरिफिकेशन के सर्वर डाउन रहने और टेक्निकल ग्लिच जैसी कई खामियां सामने आई हैं। पूरी खबर पढ़ें… Source link

झारखंड

पलामू में आंगनबाड़ी के पीछे मिला एक व्यक्ति का शव:धारदार हथियार और...

पलामू जिले के हरिहरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत वैद्य बिगहा गांव में एक आंगनबाड़ी केंद्र के पीछे खेत से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ है। व्यक्ति की हत्या तेज धारदार हथियार और ईंट से कुचलकर की गई है। पुलिस के अनुसार, यह घटना शुक्रवार देर रात की प्रतीत होती है। शनिवार को स्थानीय ग्रामीणों ने शव देखा और तत्काल इसकी सूचना हरिहरगंज थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। शव को पहचान के लिए थाना लाया गया। काफी देर तक मृतक की पहचान नहीं हो सकी। मृतक की उम्र लगभग 35 से 40 वर्ष बताई जा रही है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने चौकीदार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर देवब्रत पोद्दार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच में जुट गई है। पुलिस घटनास्थल और आसपास के आवागमन रास्तों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है। फिलहाल, हत्या के कारणों और इसमें शामिल अज्ञात अपराधियों का पता लगाया जा रहा है। Source link

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₹20 लाख की मेंबरशिप, सालों की वेटिंग… रसूखदारों के जिमखाना क्लब का...

होमताजा खबरदेश 20 लाख की मेंबरशिप वाले जिमखाना क्लब का साम्राज्‍य खत्‍म, सरकार ने तय की तारीख Last Updated:May 23, 2026, 15:51 IST Delhi Gymkhana Club News: लुटियंस दिल्ली में पीएम आवास के बगल में स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार ने वापस लेने का आदेश दिया हैण्‍ भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब की लीज रद्द करते हुए उसे 5 जून तक परिसर खाली करने का अल्टीमेटम दिया है. सरकार के मुताबिक इस रणनीतिक भूखंड की जरूरत देश के रक्षा बुनियादी ढांचे (डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए है. ख़बरें फटाफट दिल्‍ली के जिमखाना क्‍लब की अंतिम गिनती शुरू. नई दिल्ली. लुटियंस दिल्ली के दिल में बसा और देश की सबसे ताकतवर शख्सियतों का पसंदीदा ठिकाना दिल्ली जिमखाना क्लब अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है. एक ऐसी जगह, जहां रसूखदारों की पीढ़ियां बीत जाती थीं, लेकिन एंट्री नहीं मिलती थी. उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों के लिए ₹20 लाख की भारी-भरकम कॉर्पोरेट मेंबरशिप देने के बाद भी लोग सालों-साल सिर्फ एक अदद सदस्यता के लिए वेटिंग लिस्ट में तरसते रहते थे लेकिन रसूख, पैसे और रूतबे का यह अभेद्य साम्राज्य अब ताश के पत्तों की तरह ढहने वाला है. केंद्र सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए इस आलीशान क्लब की सत्ता को पूरी तरह उखाड़ फेंकने का निर्णय लिया है और परिसर खाली करने की तारीख तय कर दी है. प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित इस 27.3 एकड़ के वीवीआईपी ठिकाने को अब देश की सुरक्षा और सैन्य बुनियादी ढांचे के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया जाएगा, जिससे दिल्ली के सत्ता गलियारों में बड़ा भूचाल आ गया है. केंद्रीय मंत्रालय ने आधिकारिक नोटिस जारी कर 27.3 एकड़ के इस पूरे विशाल परिसर को खाली करने का निर्देश दिया है. सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील कारणों का हवाला दिया है. आदेश में साफ कहा गया है कि यह पूरा भूखंड एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में आता है, जिसकी आवश्यकता देश के रक्षा बुनियादी ढांचे (डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि 5 जून को सरकारी अधिकारी इस जमीन का शांतिपूर्ण कब्जा वापस लेंगे और यदि इसमें कोई बाधा आई, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी. सदस्यता श्रेणी प्रारंभिक/रजिस्ट्रेशन फीस (अनुमानित) वेटिंग पीरियड / मुख्य बातें कॉर्पोरेट मेंबरशिप (Corporate)*(सबसे महंगी और प्रीमियम श्रेणी)* ₹15 लाख से ₹20 लाख+ बड़ी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय फर्मों के शीर्ष अधिकारियों के लिए। इसमें भी लंबी कतार होती है। गैर-सरकारी / निजी श्रेणी (Non-Government) ₹5 लाख से ₹10 लाख उद्योगपतियों, डॉक्टरों, वकीलों और अन्य रसूखदार नागरिकों के लिए। इसमें 15 से 25 साल तक की सबसे लंबी वेटिंग लिस्ट होती है। सरकारी श्रेणी (Government) ₹1.5 लाख से ₹2 लाख केवल सिविल सर्वेंट्स (IAS, IPS, IRS) और रक्षा बलों (Armed Forces) के अधिकारियों के लिए। इसमें वेटिंग पीरियड तुलनात्मक रूप से कम होता है। मासिक मेंटेनेंस शुल्क (Monthly Charges) बेहद मामूली शुल्क सभी श्रेणियों के सदस्यों के लिए क्लब की सुविधाओं के उपयोग और रखरखाव के एवज में हर महीने लिया जाता है। मामले से जुड़ी 5 मुख्य बातें• 27.3 एकड़ की बेशकीमती जमीन: लुटियंस दिल्ली के दिल और पीएम आवास (लोक कल्याण मार्ग) के ठीक सामने स्थित इस क्लब की 27.3 एकड़ जमीन अब पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में आ जाएगी.• रक्षा बुनियादी ढांचे का हवाला: केंद्र सरकार ने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि इस जमीन का उपयोग देश की सुरक्षा और रक्षा ढांचे को मजबूत करने जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए किया जाएगा.• लीज डीड तत्काल प्रभाव से रद्द: L&DO ने क्लब के साथ हुई लीज डीड (पट्टा विलेख) की धारा 4 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस पट्टे को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है.• इमारतों और बुनियादी ढांचे पर कब्जा: 5 जून को होने वाली इस ‘री-एंट्री’ प्रक्रिया के तहत जमीन के साथ-साथ वहां निर्मित सभी ऐतिहासिक इमारतें, खेल परिसर और अन्य ढांचे भारत के राष्ट्रपति (L&DO) के अधीन हो जाएंगे.• जबरन कार्रवाई की चेतावनी: सरकार ने क्लब प्रबंधन से बिना किसी विवाद के शांतिपूर्ण तरीके से कब्जा सौंपने को कहा है, ऐसा न होने पर कानून सम्मत बल प्रयोग की चेतावनी भी दी गई है. क्‍यों लेना पड़ा इतना सख्‍त फैसला?दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने का यह फैसला महज एक लीज विवाद या प्रशासनिक फेरबदल नहीं है बल्कि इसके गहरे रणनीतिक और सुरक्षा निहितार्थ हैं. पिछले कुछ वर्षों में वीवीआईपी इलाकों, विशेषकर प्रधानमंत्री आवास और उसके आसपास के सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. चूंकि यह क्लब पीएम आवास के बिल्कुल करीब स्थित है और यहां रोजाना सैकड़ों नागरिकों, मेहमानों और विदेशी नागरिकों की आवाजाही होती है इसलिए सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित करने की योजना पर काम कर रही थीं. इस जमीन का उपयोग आने वाले समय में रक्षा मंत्रालयों के संवेदनशील कार्यालयों या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अति-विशिष्ट विंग के विस्तार के लिए किया जा सकता है. यह कदम यह भी दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हितों के सामने सरकार किसी भी रसूखदार लॉबी के दबाव में आने वाली नहीं है. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

झारखंड

काजू से किराना तक सब मिलेगा कम दाम में, बोकारो का 40...

Last Updated:May 23, 2026, 13:30 IST Bokaro Cheapest Market: अगर कम दाम में राशन, किराना, हार्डवेयर या ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी करना चाहते हैं, तो बोकारो का सदर बाजार आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. करीब 40 साल पुराने इस बाजार में थोक और खुदरा दोनों तरह की खरीदारी सस्ते दामों में होती है. ख़बरें फटाफट बोकारो. बोकारो जिले के चास स्थित सदर बाजार जिले के सबसे पुराने और प्रमुख बाजारों में गिना जाता है. पिछले करीब 40 वर्षों से यहां रोजाना जिलेभर से व्यापारी और ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. यह बाजार खासतौर पर हार्डवेयर, राशन, किराना और ड्राई फ्रूट्स की थोक और खुदरा खरीदारी के लिए प्रसिद्ध है और दूसरे बाजारों की तुलना में यहां सामान सस्ते दामों पर मिलते हैं. 1980 से लग रही बाजारसदर बाजार के व्यापारी अनिल गोयल बताते हैं कि यह बाजार वर्ष 1980 से संचालित हो रहा है और समय के साथ इसकी पहचान लगातार बढ़ती गई है. उन्होंने कहा कि इस मार्केट में करीब 100 दुकानें संचालित हैं, जहां कम मार्जिन में ग्राहकों को सस्ते दामों में सामान उपलब्ध कराया जाता है और इस बाजार से अनौपचारिक रूप से 500 लोगों को रोजगार मिल रहा है. रोजाना लाखों का कारोबारवहीं बाजार के दूसरे दुकानदार रामविलास ने बताया कि सदर बाजार में रोजाना ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. सप्ताह में छह दिन यहां खरीदारों का जमावड़ा लगा रहता है, जबकि बुधवार को बाजार बंद रहता है. वहीं शादी, भोज और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों की खरीदारी के लिए भी यह बाजार लोगों की पहली पसंद माना जाता है और इस मार्केट में रोजाना लाखों का कारोबार होता है. दूर-दूर से लोग आते हैं खरीदारी करनेड्राई फ्रूट्स की खरीदारी के लिए सदर बाजार बेस्ट है, क्योंकि जहां दूसरे बाजार में काजू ₹500 प्रति किलो तक बिकता है, वहीं सदर बाजार में यही काजू करीब ₹400 प्रति किलो तक मिल जाता है. यही कारण है कि लोग दूर-दूर से यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं. बाजार में खरीदारी करने आए ग्राहक सिकंदर कुमार ने बताया कि कम कीमत और अच्छी गुणवत्ता के कारण सदर बाजार उनका पसंदीदा मार्केट है. यहां बोकारो सेक्टर के अलावा दूसरे प्रखंडों से भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand Source link

झारखंड

कोडरमा में एक बकरा 1.10 लाख रुपए में बिका:बकरीद में तोतापरी बकरों...

ईद उल जुहा (बकरीद) पर्व गुरुवार, 28 मई को मनाई जाएगी। कुर्बानी के इस त्योहार पर अच्छी नस्ल के बकरों की भारी मांग रहती है। कोडरमा के बाजारों में भी महंगे बकरों की मुंहमांगी कीमत पर बिक्री हो रही है। बकरीद पर बकरों (खस्सियों) की विशेष नस्लों की मांग बढ़ जाती है। कुछ खस्सी तो एक लाख रुपए से भी अधिक कीमत पर बिकते हैं। बकरा विक्रेता निसार खान ने बताया कि इस बार उन्होंने एक बकरा 1.10 लाख रुपए में बेचा। उसका वजह 108 किलो था। दो-तीन लाख रुपए का मुनाफा हो जाता है निसार खान बताते हैं कि वे हर साल बकरीद से करीब एक महीने पहले बकरों का व्यापार शुरू करते हैं। इसमें वो 10 लाख की पूंजी लगाते हैं और करीब दो-तीन लाख रुपए का मुनाफा हो जाता है। वे विभिन्न इलाकों से अलग-अलग नस्ल के बकरे लाकर उन्हें पालते हैं और फिर बेचते हैं। उनके बकरों की बाजार में काफी मांग रहती है। निसार खान के पास 15 हजार से एक लाख रुपए से अधिक कीमत के बकरे उपलब्ध हैं। उनके पास सबसे अधिक मांग तोतापरी नस्ल के बकरों की है, जो मुख्य रूप से राजस्थान में पाई जाती है। उन्होंने बताया कि वे तोतापरी नस्ल के तीन खस्सी राजस्थान से लाए थे। उस समय उनका वजन लगभग 50 किलो था, लेकिन अब उनका वजन एक क्विंटल (100 किलो) से अधिक हो गया है। ये बकरे लगभग ढाई वर्ष के हो चुके हैं। तोतापरी नस्ल के बकरों को अन्य बकरों से अलग अपने घर में रखते हैं। उनके लिए विशेष खानपान की व्यवस्था की जाती है और उनके कमरे में पंखे भी लगे होते हैं। निसार खान के अनुसार, इन खस्सियों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। अनाज, फल से लेकर काजू किशमिश तक खिलाते हैं निसार खान ने बताया कि तोतापरी नस्ल के बकरों को बकरीद के लिए तैयार करने के लिए केला, आम, संतरा जैसे फलों के साथ गेंहू, मक्का खिलाते हैं। वहीं, सुबह को ये इन बकरों को काजू, किशमिश और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट भी खिलाते हैं। सबसे ज्यादा 2024 में बेचे थे बकरे निसार मुख्य रूप से एक कपड़ा व्यवसायी हैं। 2020 में इन्होंने बकरीद के समय कुछ बकरों को बेचने से इसकी शुरुआत की थी। अच्छा मुनाफा और ज्यादा मांग होने के कारण अगले साल से इन्होंने अपने इस व्यापार को बढ़ाया और अब ये हर साल 150 से 200 बकरों का व्यापार कर लेते हैं। निसार ने सबसे अधिक 2024 में 190 बकरे बेचे थे। दो से तीन लाख का होता है मुनाफा इन्होंने बताया कि इस व्यापार के लिए इन्हें 10 लाख रुपए की पूंजी लगानी पड़ती है। जिसके पस्चात इन खस्सियों को खिलाने-पिलाने का खर्च काटकर करीब 2 से 3 लाख रुपए का मुनाफा हो जाया करता है। Source link

झारखंड

देवघर में मैट्रिक रिजल्ट खराब, शिक्षा विभाग सख्त:24 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को...

देवघर जिले में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा जारी मैट्रिक परीक्षा के खराब परिणामों को जिला शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। लगातार गिरते परीक्षा परिणाम के मद्देनजर, जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने जिले के 24 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन लगातार स्कूलों को शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने, बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई कराने के निर्देश देता रहा है। इसके बावजूद मैट्रिक और इंटर परीक्षा के परिणाम संतोषजनक नहीं रहे, जो चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि जिले के लगभग 40 से 50 प्रतिशत स्कूलों का परिणाम काफी कमजोर रहा है। मधुकर कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार द्वारा स्कूलों में स्मार्ट क्लास, मिड डे मील और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके बावजूद यदि छात्र स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं और उनका प्रदर्शन खराब हो रहा है, तो यह स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी। अन्य स्कूलों से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा उन्होंने जानकारी दी कि प्रारंभिक चरण में 24 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को बुलाकर उनसे खराब परिणामों का कारण पूछा जाएगा। इसके बाद उन अन्य स्कूलों से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, जहां छात्रों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। पूरे मामले की विभागीय समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। छात्रों के कमजोर प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए जल्द ही रिमेडियल कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, छुट्टी के दिनों में बड़े छात्रों की सहायता से छोटे बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाना और उनकी शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाना है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में जारी जैक मैट्रिक परीक्षा परिणामों में देवघर जिला राज्य स्तर पर 14वें-15वें स्थान पर खिसक गया है। पिछले वर्ष जिले की रैंकिंग 9वें-10वें स्थान के आसपास थी। जिले की इस गिरती शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। Source link

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