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लातेहार में हुआ सड़क हादसा; 2 युवक मरे:तीखे मोड़ पर आपस में...

लातेहार सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत कोने पिकेट के आगे खुटगड़ी गांव के पास तीखे पर कार और बाइक की सीधी टक्कर हो गई। हादसे में बाइक सवार दो युवकों की जान चली गई। वहीं बाइक को चपेट में लेने के बाद कार पास ही पेड़ से जा टकराई। प्राप्त जानकारी के अनुसार कार संख्या JH03 AW 6472 सरयू की ओर से लातेहार आ रही थी, जबकि बाइक पर सवार दो युवक लातेहार से सरयू की ओर जा रहे थे। इसी दौरान खुटगड़ी गांव के पास आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। अब तक मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। हादसे के बाद पेड़ से टकराई कार मिली जानकारी के अनुसार टक्कर के बाद कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। इससे कार और बाइक दोनों के परखच्चे उड़ गए। हादसे के तुरंत बाद कार में सवार दोनों व्यक्ति मौके से फरार हो गए। दुर्घटना की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों ने देखा कि दोनों युवक गंभीर हालत में सड़क पर पड़े हुए हैं। जब उनकी जांच की गई तो दोनों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी। इस हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शवों की पहचान कराने का प्रयास जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस को जानकारी दी। सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। थाना प्रभारी प्रमोद सिन्हा ने बताया कि फरार कार सवारों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। दुर्घटनाग्रस्त कार के आधार पर वाहन मालिक और चालक की जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं, मृतकों की पहचान के लिए आसपास के थाना क्षेत्रों को भी सूचना भेजी गई है। घटना की जानकारी मिलने पर प्रखंड उपप्रमुख राजकुमार प्रसाद और पूर्व मुखिया जुलेश्वर लोहरा भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। Source link

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गिरिडीह में छत के रास्ते घुस उड़ा लिए पैसे-जेवर:घर से 200 मीटर...

गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत नवडीहा ओपी के चोरगत्ता गांव में शुक्रवार देर रात एक बड़ी चोरी की घटना सामने आई है। चोरों ने घर में घुसकर लाखों रुपए के जेवरात, नकदी और जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज चुरा लिए। यह घटना मदन चौधरी के घर में उस समय हुई, जब परिवार के सभी सदस्य गर्मी के कारण छत पर सो रहे थे। परिजनों ने बताया कि चोर घर के पीछे की ओर से छज्जे के सहारे छत पर चढ़े और फिर अंदर उतरकर मुख्य दरवाजा खोल लिया। इसके बाद उन्होंने घर में रखे लगभग 25 लाख रुपए के जेवरात और 50 हजार रुपए नकद पर हाथ साफ कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद चोर आराम से फरार हो गए। सुबह जब परिवार के लोग नीचे उतरे तो घर का सामान बिखरा देख उनके होश उड़ गए। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखें… चोरी के पीछे पुराने विवाद का कनेक्शन घटना के बाद पीड़ित परिवार ने जमीन से जुड़े दस्तावेज चोरी होने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि जेवर और नकदी की चोरी तो सामान्य बात हो सकती है, लेकिन जमीन के कागजात चुराए जाना किसी साजिश की ओर इशारा करता है। मदन चौधरी के पुत्र संतोष कुमार चौधरी ने बताया कि वर्ष 2007 से गांव के कुछ लोगों के साथ उनका जमीन संबंधी विवाद चल रहा है। उन्होंने अभिमन्यु चौधरी, राजदेव चौधरी, अभिनाश चौधरी, महेश चौधरी, प्रदीप चौधरी, फुलेंद्र चौधरी और मनोज चौधरी पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि जमीन के कागजात चोरी होने के पीछे इन्हीं लोगों की भूमिका हो सकती है। घटना के बाद घर से करीब 200 मीटर दूर एक बक्सा और जेवर रखने का खाली डिब्बा भी बरामद किया गया है। आवेदन मिलने के बाद होगी कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही नवडीहा ओपी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। ओपी प्रभारी सबिता कुमारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में जेवरात, नकदी और जमीन से जुड़े कागजात चोरी होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार से आवेदन मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इधर, पीड़ित परिवार ने बताया कि उनका जीवनयापन ट्रक चलाकर और खेती-बाड़ी पर निर्भर है। Source link

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जब ‘बाघ देश’ पलामू में मचता था पक्षियों का कत्लेआम, पेरिस की...

Last Updated:June 13, 2026, 11:40 IST आज देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने वाला पलामू टाइगर रिजर्व कभी ‘बाघ देश’ के नाम से मशहूर था. उस दौर में यहां बाघों और अन्य वन्यजीवों की भरमार थी. अपनी समृद्ध जैव-विविधता और घने जंगलों के कारण पलामू की पहचान देश ही नहीं, दुनिया भर में थी. यहां के जंगल वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय माने जाते थे.  पलामू: झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व आज देश-विदेश के पर्यटकों के बीच खास पहचान बना चुका है. प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के कारण यह लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. हालांकि, पलामू का इतिहास आज से कहीं अधिक समृद्ध और रोचक रहा है. एक समय ऐसा भी था जब यह क्षेत्र ‘बाघ देश’ के नाम से जाना जाता था. उस दौर में पलामू न केवल बाघों और अन्य वन्यजीवों की बड़ी आबादी के लिए प्रसिद्ध था, बल्कि अपनी अनूठी जैव-विविधता के कारण भी दुनिया भर में चर्चित था. अनेक प्रकार के पक्षियों की भरमारपलामू जिले के विशेषज्ञ डॉ. डी. एस. श्रीवास्तव ने लोकल18 को बताया कि यह कहानी सैकड़ों वर्ष पुरानी है. उस समय पलामू के घने जंगल, तालाब, आहर और प्राकृतिक जलस्रोत वन्यजीवों और पक्षियों के लिए आदर्श आवास माने जाते थे. यहां बाघ, हिरण और अनेक प्रकार के पक्षियों की भरमार थी. इन्हीं पक्षियों में किंगफिशर भी शामिल था, जो अपने आकर्षक और रंग-बिरंगे पंखों के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध था. उस समय यह पक्षी क्षेत्र के लगभग हर जलस्रोत के आसपास आसानी से देखा जा सकता था. चमकीले पंखों की विदेशों में मांगउन्होंने बताया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में पलामू के जंगलों में किंगफिशर पक्षियों की बड़ी संख्या मौजूद थी. लेकिन इनके सुंदर और चमकीले पंखों की विदेशों में काफी मांग थी. इसी कारण पटना के मीरशिकार टोली से शिकारी दल पलामू पहुंचते थे और बड़ी संख्या में इन पक्षियों का शिकार करते थे. पक्षियों को पकड़कर उनके रंगीन पंख निकाले जाते थे, जिन्हें व्यापारिक माध्यमों से फ्रांस की राजधानी पेरिस भेजा जाता था. पेरिस की महिलाओं के फैशनेबल हैटबताया जाता है कि उस दौर में पेरिस की महिलाओं के फैशनेबल हैट और परिधानों को सजाने के लिए इन रंग-बिरंगे पंखों का इस्तेमाल किया जाता था. केवल किंगफिशर ही नहीं, बल्कि अन्य पक्षियों और वन्यजीवों के अंगों का भी व्यापार होता था. स्थानीय स्तर पर चैनपुर और शाहपुर क्षेत्र के बहेलिया समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में पक्षियों का शिकार करते थे. शिकार किए गए पक्षियों की खाल और पंखों को सुखाकर व्यापारियों को बेच दिया जाता था. वैश्विक फैशन उद्योग की मांगडॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, इन तथ्यों का उल्लेख वर्ष 1895 के सर्वे एवं सेटलमेंट रिकॉर्ड में मिलता है. तत्कालीन अधिकारी डी.एच.आई. सैंडर्स द्वारा तैयार पलामू संबंधी पहली रिपोर्ट में भी ऐसी गतिविधियों का जिक्र किया गया है. पलामू का यह इतिहास न केवल इसकी समृद्ध जैव-विविधता की कहानी बताता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह वन्यजीवों और पक्षियों का शिकार कभी वैश्विक फैशन उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता था. आज जब वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है, तब पलामू का यह इतिहास प्रकृति और जैव-विविधता के संरक्षण के महत्व की महत्वपूर्ण याद दिलाता है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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एंबुलेंस नहीं मिली, ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाते हुई मौत:जामताड़ा सिविल सर्जन...

जामताड़ा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एंबुलेंस सेवा की विफलता के कारण एक मरीज की जान चली गई। जामताड़ा प्रखंड के शहरबेरा गांव निवासी 43 वर्षीय मोनू टुडू की शुक्रवार रात करीब 8 बजे तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, लेकिन काफी देर तक कोई सहायता नहीं मिली। आरोप है कि कॉल तक रिसीव नहीं किया गया। मरीज की हालत लगातार गंभीर होती देख परिजनों और ग्रामीणों ने मजबूरी में उन्हें खटिया पर लादकर ट्रैक्टर के माध्यम से सदर अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। समय पर मदद मिलती तो बच सकती थी जान मृतक की पत्नी और ग्रामीणों ने कहा कि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो मोनू टुडू की जान बचाई जा सकती थी। सहिया मीणा मुर्मू ने बताया कि रात करीब 8:40 बजे 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया गया था, लेकिन फोन की घंटी बजती रही। किसी ने कॉल नहीं उठाया। गांव की सड़क खराब होने और रात का समय होने के कारण मरीज को ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाना पड़ा। मृतक की पोती रूपलता हांसदा ने भी अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के जिले में ही लोगों को बुनियादी सुविधा तक नहीं मिल रही है। उन्होंने सीधे तौर पर एंबुलेंस नहीं मिलने को ही अपने दादाजी की मौत का कारण बताया। जिले में 13 एंबुलेंस, 5 ही कर रहा काम सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद ने स्वीकार किया कि जिले में एंबुलेंस की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि जामताड़ा में कुल 13 एंबुलेंस हैं, जिनमें से केवल 5 ही चालू हालत में हैं, जबकि 8 एंबुलेंस खराब पड़ी हैं। कई एंबुलेंस छोटी-छोटी तकनीकी खराबियों के कारण बंद हैं। संबंधित एजेंसी समय पर मरम्मत नहीं करा रही है। इस संबंध में विभाग और एजेंसी को पत्र भी लिखा गया है। घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस तरह की घटनाएं आगे भी दोहराई जाती रहेंगी। Source link

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धनबाद के युवक की मुंबई में मौत:काम के दौरान करंट की चपेट...

धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र अंतर्गत जयनगर गांव निवासी 26 वर्षीय विकास कुमार महतो की महाराष्ट्र के मुंब में दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। वह वहां बिजली मिस्त्री के रूप में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, विकास महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित सद्गुरु इलेक्ट्रिकल्स ट्रेडर्स में काम करते थे। शुक्रवार को वह बिजली लाइन पर मरम्मत का कार्य कर रहे थे, तभी अचानक तेज करंट की चपेट में आ गए। करंट लगते ही वह गंभीर रूप से झुलस गए और जमीन पर गिर पड़े। आसपास मौजूद सहकर्मियों ने तुरंत उन्हें बचाने का प्रयास किया और इलाज के लिए ले जाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद कंपनी प्रबंधन ने परिजनों को फोन कर हादसे की सूचना दी, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। शव गांव पहुंचते ही मची चीख-पुकार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर रात एंबुलेंस से विकास का शव उनके पैतृक गांव जयनगर लाया गया। शव के गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव में मातम का माहौल है। विकास अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन छोटी पुत्रियां हैं, जिनका भविष्य अब संकट में पड़ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि विकास मेहनती और मिलनसार स्वभाव के थे तथा परिवार के बेहतर भविष्य के लिए बाहर रहकर काम कर रहे थे। सांसद पहुंचे गांव, मुआवजा दिलाने का दिया भरोसा घटना की जानकारी मिलने पर शनिवार को धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो जयनगर गांव पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। सांसद ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर कंपनी की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि परिवार को उचित मुआवजा मिल सके। साथ ही उन्होंने राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। Source link

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सस्ते में मिलेगा ‘शगुन’ वाला यूनिक गिफ्ट! रांची की इसी गली में...

Last Updated:June 13, 2026, 10:34 IST रांची के अपर बाजार स्थित महावीर चौक पर बजट-फ्रेंडली शादी के गिफ्ट्स की कई दुकानें मौजूद हैं. यहां मात्र ₹50 से ₹500 की रेंज में आकर्षक शो-पीस, फोटो फ्रेम, ब्राइडल किट और कस्टमाइज्ड शगुन गिफ्ट मिलते हैं. कम बजट में बेहतरीन और यूनिक उपहार खरीदने के लिए यह जगह बिल्कुल परफेक्ट है. शादी के इस सीजन में अगर आप बजट के अनुकूल गिफ्ट की तलाश में हैं, तो रांची के अपर बाजार स्थित महावीर चौक के समीप आ सकते हैं. यहां आपको बजट-फ्रेंडली शो-पीस, फोटो फ्रेम और अन्य उपहारों की 10 से 12 दुकानें एक ही कतार में मिल जाएंगी. कम खर्च में बेहतरीन गिफ्ट खरीदने के लिए यह जगह बिल्कुल परफेक्ट है. यहां मात्र ₹50 से ₹500 की रेंज में एक से बढ़कर एक उपहार उपलब्ध हैं. गैलरी गिफ्ट स्टोर के संचालक अमित ने बताया कि उनके पास ₹50 से शो-पीस की शुरुआत हो जाती है. इसके अलावा, राधा-कृष्ण का बड़ा फोटो फ्रेम सिर्फ ₹200 में मिल जाएगा. जिसे वे तुरंत पैक भी करके देते हैं. अगर आपका बजट ₹400 से ₹500 का है, तो यहां घर सजाने के लिए खूबसूरत पॉट और आर्टिफिशियल फ्लावर्स मिल जाएंगे. प्रदीप गैलरी स्टोर के संचालक प्रदीप ने बताया कि इस रेंज में राधा-कृष्ण, गणेश जी की प्रतिमा और कपल डांसिंग जैसे कई बड़े आकार के शो-पीस उपलब्ध हैं. ये दिखने में काफी आकर्षक और उपहार देने के लिए बेहतरीन हैं. Add News18 as Preferred Source on Google यदि आप दुल्हन को उपहार देना चाहते हैं, तो ₹500 के अंदर ब्राइडल चूड़ी सेट और उसका पूरा किट उपलब्ध है. वहीं, दूल्हे के लिए टाई, पर्स और पेन का एक शानदार कॉम्बो सेट मिल जाएगा. इन दुकानों पर शादी के गिफ्ट के लिए कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं. जिन्हें आप अपनी पसंद और बजट के अनुसार आसानी से चुन सकते हैं. यहां आप अपनी पसंद के अनुसार कोई भी पांच चीजें चुनकर गिफ्ट कस्टमाइज भी करवा सकते हैं. इन चीजों को एक खूबसूरत, डिजाइनर और रंग-बिरंगी चुनरी में बांधकर बिल्कुल ‘शगुन’ की तरह तैयार कर दिया जाता है. इस कस्टमाइज्ड गिफ्ट पैक की कीमत भी ₹500 के अंदर ही होती है. कम बजट में एक बेहद यूनिक, पारंपरिक और खूबसूरत उपहार देने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है. Source link

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यूपी में पलामू के चार लोग मरे; एक घायल:किछौछा शरीफ से लौटते...

उत्तर प्रदेश के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत देवगांव इलाके में शुक्रवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में झारखंड के पलामू जिले के चार लोगों की मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। उसमें सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना में एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे की कुछ तस्वीरें देखें… मृतकों में शहर के जाने-माने कारोबारी शामिल इस हादसे में मेदिनीनगर के तीन कारोबारियों की जान चली गई। मृतकों में मेदिनीनगर स्थित किताब घर के संचालक हाफिज रज्जाक, जनता मेडिकल से जुड़े कैश अंसारी, सब्जी मंडी के व्यवसायी शोहराब राईन और कार चालक शामिल हैं। कार चालक की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। उसकी शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है। वहीं, चूड़ी कारोबारी अजमल इस दुर्घटना में घायल हुए हैं। उनका इलाज चल रहा है। शादी के बाद गए थे किछौछा शरीफ प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभी लोग शुक्रवार को बिहार के डेहरी में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। शादी समारोह के बाद वे उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल किछौछा शरीफ की यात्रा पर निकले थे। वहां से वापस लौटते समय रात करीब 12:30 बजे उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। बताया जा रहा है कि ट्रक की गति काफी तेज थी, जिससे टक्कर के बाद गंभीर हादसा हो गया। मेदिनीनगर में मचा कोहराम शनिवार सुबह करीब 8 बजे जैसे ही इस हादसे की सूचना मेदिनीनगर पहुंची, पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और रिश्तेदार घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। उधर, स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य चलाया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों को मेदिनीनगर लाया जाएगा। Source link

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अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचना शीर्ष प्राथमिकता : बसंत

दुमका | सदर प्रखंड में शुक्रवार को कल्याण विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में दुमका के विधायक बसंत सोरेन ने लाभुकों के बीच विभिन्न योजनाओं से संबंधित परिसंपत्तियों का वितरण किया। कार्यक्रम में कला केंद्र के लिए वाद्य यंत्र, जाहेर थान के लिए पूजा सामग्री, सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत पेंशन स्वीकृति पत्र, पशुपालन विभाग की ओर से बत्तख, दिव्यांगजनों के लिए ट्राईसाइकिल का वितरण किया गया। विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार की प्राथमिकता गांव-गांव तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। सामाजिक सुरक्षा, स्वरोजगार, सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कला केंद्र के वाद्य यंत्रों से हमारी संस्कृति और परंपरा मजबूत होगी। पेंशन और ट्राईसाइकिल से जरूरतमंद लोगों को सीधी राहत मिलेगी। Source link

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कांपटीटिव एग्जाम हो या सिलेबस की किताब, बाजार से 50% तक कम...

Last Updated:June 13, 2026, 09:23 IST Jamshedpur’s Famous Book Street: जमशेदपुर के स्टूडेंट्स को सिलेबस से लेकर कांपटीटिव एग्जाम तक, किसी भी तरह की, कोई भी किताब चाहिए हो वे पुस्तक गली का रुख करते हैं. यहां किताबों की कम से कम 35 दुकानें हैं जहां हर तरह की बुक, बाजार से काफी कम कीमत पर मिल जाती है. यह मार्केट साकची गोलचक्कर के करीब, पुराने बस स्टैंड के पास है. यहां दूसरे शहरों से भी स्टूडेंट्स बुक्स लेने आते हैं. जमशेदपुर को स्टील सिटी के नाम से जाना जाता है, लेकिन यह शहर शिक्षा और पुस्तकों के प्रति अपने प्रेम के लिए भी खास पहचान रखता है. शहर में एक ऐसी प्रसिद्ध ‘पुस्तक वाली गली’ है, जहां हर दिन सैकड़ों विद्यार्थी, अभिभावक और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा पहुंचते हैं. इस गली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कक्षा 1 से लेकर रेलवे, एसएससी, बैंकिंग, यूपीएससी, जेपीएससी, बीपीएससी, नीट, जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. कई किताबें बाजार कीमत से 50 प्रतिशत तक कम दर पर मिल जाती हैं, जिससे विद्यार्थियों को काफी राहत मिलती है. करीब 35 से अधिक पुस्तक दुकानों से सजी यह गली किताबों का खजाना कही जाती है. यहां पहुंचते ही चारों तरफ पुस्तकों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं. स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की गाइड, प्रश्न बैंक, मॉडल पेपर, सामान्य ज्ञान, साहित्य, उपन्यास और बच्चों की कहानी की किताबें तक उपलब्ध हैं. यही कारण है कि यह जगह विद्यार्थियों और पुस्तक प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं मानी जाती. इस गली की एक और खास बात इसकी व्यवस्थित व्यवस्था है. दुकानों में किताबों को विषय, कक्षा और परीक्षा के अनुसार इस तरह सजाया गया है कि ग्राहक को अपनी जरूरत की पुस्तक ढूंढने में परेशानी नहीं होती. अगर कोई विद्यार्थी किसी विशेष किताब का नाम बताता है, तो दुकानदार लाखों पुस्तकों के बीच से कुछ ही मिनटों में वह पुस्तक निकालकर दे देते हैं. वर्षों के अनुभव और पुस्तकों की गहरी जानकारी के कारण यहां के दुकानदार विद्यार्थियों को सही पुस्तक चुनने में भी मदद करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google यहां देश के प्रमुख प्रकाशकों की किताबें उपलब्ध रहती हैं. एनसीईआरटी, अरिहंत, किरण पब्लिकेशन, लूसेंट, मैकग्रा हिल, एस. चंद, ऑक्सफोर्ड, पेंगुइन, राजकमल प्रकाशन, भारती भवन और प्रभात प्रकाशन जैसी नामी प्रकाशन संस्थाओं की पुस्तकें यहां आसानी से मिल जाती हैं. कई दुकानदार सीधे प्रकाशकों और वितरकों से किताबें मंगाते हैं, जिससे कीमतें अपेक्षाकृत कम रहती हैं और विद्यार्थियों को अधिक विकल्प मिलते हैं. इस पुस्तक बाजार की पहचान केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं है. यहां झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार से भी लोग किताबें खरीदने पहुंचते हैं. दुकानदारों के अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों से नई-नई पुस्तकें लगातार यहां आती रहती हैं, जिससे विद्यार्थियों को लेटेस्ट एडिशन और अपडेटेड स्टडी मैटीरियल उपलब्ध हो पाता है. आज के डिजिटल दौर में भी यह पुस्तक वाली गली विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का एक मजबूत केंद्र बनी हुई है. कम कीमत, पुस्तकों की विशाल वैरायटी और अनुभवी दुकानदारों की मदद इसे खास बनाती है. बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का सपना देखने वाले हजारों युवाओं के लिए यह गली सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि उनके सपनों को उड़ान देने वाली एक महत्वपूर्ण जगह है. Source link

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डहरटोला की दो अवैध कोयला खदानें फिर डोजर से किया बंद

भास्कर न्यूज | दुमका गोपीकांदर अंचल क्षेत्र के ओड़मो गांव के डहरटोला में संचालित दो अवैध कोयला खदानों की डोजरिंग शुक्रवार को खनन निरीक्षक गौरव कुमार, मंजीत दुबे, रेंजर एलआर रवि, सीओ विजय प्रकाश मरांडी और थाना प्रभारी सुमित कुमार भगत की संयुक्त टीम ने कराई है। अवैध खदानों की डोजरिंग करने के बाद टीम सिलंगी गांव पहुंची और यहां पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा अंचल क्षेत्र के आमझारी बालू घाट को अवरुद्ध करने की कार्रवाई की। जानकारी के मुताबिक सबसे पहले टीम डहरटोला में अवैध तरीके से संचालित दो अवैध कोयला खदानों को डोजरिंग कर बंद कराने की कार्रवाई की। इससे पूर्व कोयला खदानों में बनाए गए सुरंग में आवाज देकर मौजूद लोगों की जानकारी ली गई। सुरंग में किसी के मौजूद नहीं होने के बाद आश्वस्त होकर जेसीबी से मिट्टी भर दोनों खदानों को बंद कराया गया। प्रशासन की ओर से इससे पूर्व भी करीब छह बार इन दोनों खदानों को डोजरिंग कर बंद कराने की कार्रवाई की जा चुकी है लेकिन डोजरिंग के कुछ ही दिन बाद अवैधा धंधेबाज फिर से अवैध खदानों को चालू कर लेते हैं। डोजरिंग की कार्रवाई के दौरान एसआई धर्मल मांझी, सीआई विक्रम विक्रांत, कर्मचारी पीटर सोरेन, वन विभाग से साकेत कश्यप सहित पुलिस बल मौजूद थे।अवैध खनन पर नकेल कसने निकली टीम सिलंगी गांव पहुंच कर बांसलोई नदी से बालू तस्करी को रोकने के लिए पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा अंचल के आमझारी गांव के दो बालू घाटों का रास्ता काट कर निकासी अवरुद्ध करने की कार्रवाई की। दोनों बालू घाटों से बालू तस्करी किया जाता था। हालांकि दोनों ही बालू घाट पर जब जेसीबी रास्ता काटने की कार्रवाई की जा रही थी तो कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंच कर कार्य को बंद करवा दिया। ग्रामीणों का साफ कहना था कि वे लोग बालू बेचकर ही जीवन यापन करते हैं। बाद में पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दोनों बालू घाट का रास्ता अवरुद्ध किया गया ताकि बालू का उठाव रोका जा सके। इससे पूर्व भी दुमका की खनन टास्क फोर्स की टीम ने दोनों बालू घाटों का रास्ता बंद कराने की कार्रवाई की थी लेकिन इसके अगले ही दिन मिट्टी भरकर बालू का उठाव फिर से चालू कर दिया गया था। Source link

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