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हल्दी-मेहंदी में दुल्हन की सुंदरता निखार देता है यह आइटम, फोटो-वीडियो भी...

Last Updated:May 02, 2026, 23:39 IST उन्होंने आगे कहा कि हल्दी और मेहंदी प्लैटर भी खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. ये प्लैटर न सिर्फ रस्मों को व्यवस्थित बनाते हैं, बल्कि सजावट में भी चार चांद लगा देते हैं. इससे दुल्हन मात्र 500 रुपए में तैयार हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि ग्राहकों के लिए कस्टमाइज प्लैटर की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसे वे…. ख़बरें फटाफट पलामू: शादी-विवाह का सीजन शुरू होते ही बाजारों की रौनक देखते बनती है. खासकर हल्दी-मेहंदी रस्म को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है. परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ अब आधुनिकता का तड़का भी जुड़ गया है, जिससे इन रस्मों को और खास और यादगार बनाया जा रहा है. इसी कड़ी में पलामू जिले के बजाए बाजार में इन दिनों फ्लावर ज्वेलरी की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है. जिससे दुल्हन अपने शादी को और खास बना रही है. दरअसल, दुल्हनें अब पारंपरिक गहनों के साथ-साथ हल्दी और मेहंदी समारोह के लिए आर्टिफिशियल फूलों से बने आकर्षक आभूषणों को प्राथमिकता दे रही हैं. इन फूलों से सजने-संवरने के बाद फोटो-वीडियो काफी आकर्षक हो जाते हैं. दुल्हन और उनके दोस्त-परिजन इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर भी शेयर करते हैं. इसके लिए मांग टीका, कर्णफूल, गले का सेट, हाथों के बाला और हाथफूल जैसे कई आइटम बाजार में आते हैं. ये पूरी तरह फूलों से तैयार किए जाते हैं और दुल्हन की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं. यह पलामू जिले के मेदिनी नगर शहर के बीचों बीच स्थित रूप रंग, नैनं श्रृंगार स्टोर और क्यूट स्माइल समेत अन्य दुकानों में आसानी से मिल जाता है. रूप रंग दुकान के संचालक राजीव कुमार ने बताया कि हल्दी मेहंदी रश्म को लेकर लोगों में खास डिमांड फ्लावर ज्वेलरी सेट की है. इनकी कीमत 200 रुपये से लेकर 400 रुपये तक है, जिससे यह हर वर्ग के लोगों की पहुंच में है. यही कारण है कि इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. हल्दी-मेहंदी जैसे कार्यक्रमों में पीले वस्त्रों के साथ इन रंग-बिरंगे फूलों के गहनों का संयोजन बेहद आकर्षक लगता है, जिसे लोग सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो के जरिए खूब साझा कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि हल्दी और मेहंदी प्लैटर भी खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. ये प्लैटर न सिर्फ रस्मों को व्यवस्थित बनाते हैं, बल्कि सजावट में भी चार चांद लगा देते हैं. इससे दुल्हन मात्र 500 रुपए में तैयार हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि ग्राहकों के लिए कस्टमाइज प्लैटर की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसे वे अपनी पसंद और थीम के अनुसार सजवा सकते हैं. इनकी शुरुआती कीमत लगभग 200 रुपये बताई जा रही है. शादी वाले घर की सजावट के लिए ‘शादी वाला घर’ बोर्ड, डेकोरेशन आइटम्स और चूड़ा में फोटो कस्टमाइज जैसी सुविधाएं भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं. इन नई और आकर्षक तैयारियों के चलते पलामू का बाजार पूरी तरह से शादीमय हो गया है. बदलते ट्रेंड के साथ लोग अब हर छोटी रस्म को खास बनाने में जुटे हैं, जिससे शादी समारोह और भी यादगार बन सके. इससे बाजार भी बढ़ता है और लोगों को रोजगार भी मिलता है. About the Author Rajneesh Singh जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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सिंपल दाल-भात के कटोरे को बदल दिया प्रोटीन बाउल में, एक कैफे...

Last Updated:May 01, 2026, 09:01 IST Ranchi 2 Friend’s Unique Cafe: रांची के दो दोस्तों ने मिलकर अलग तरह का कैफे खोला है, जहां सिंपल खाने को प्रोटीन लोडेड बाउल के रूप में सर्व किया जाता है. एक कैफे से शुरू हुआ यह सफर आज 4 कैफे तक पहुंच गया है. हेल्दी खाना, वेटिंग टाइम में बुक्स पढ़ना, लूडो खेलना…ये सब इस कैफे की यूएसपी है सफलता का कारण भी. ख़बरें फटाफट रांची. रांची के आशुतोष और कपिल दोनों दोस्त हैं. दोनों ने मिलकर चार कैफे भी खोले हैं. इनका कैफे बड़ा ही यूनिक है. जिसमें प्रोटीन बाउल, राइस बाउल, रेमन बाउल ये सब मिलते हैं. इसमें चावल भी होता है, दाल भी होती है, मशरूम, पनीर, अंडा, सोयाबीन यह कुछ मिलाकर सिंपल राइस प्रोटीन बाउल तैयार करते हैं, जिसकी लोगों के बीच जबरदस्त डिमांड है. यही कारण है कि इन दोनों ने मिलकर एक कैफे से चार कैफे कर लिए हैं. एक जैसा था आइडियाआशुतोष बताते हैं हम दोनों की दोस्ती 5 साल पहले हुई है और हम दोनों ही लोगों को कुछ अच्छा और प्रोटीन खिलाने को लेकर सोच रहे थे. ऐसा लग रहा था कि कुछ ऐसी चीज लेकर आएं जो बहुत ही टेस्टी भी हो और साथ में पूरा प्रोटीन से भरपूर हो. तब जाकर हमारे दिमाग में आया कि एक बाउल निकाला जाए, जो कि एक सिंपल लंच टाइम में लोग खा पाएं और आराम से बढ़िया प्रोटीन मिल जाए. कई तरह के बाउल देखने को मिलेंगेऐसे में आपको हमारे पास कई तरह के बाउल देखने को मिलेंगे और यह बाउल बहुत ही हिट हैं. इसमें रेमन बाउल, नॉनवेज बाउल, वेज राइस इस तरह के कई सारे बाउल हमने बनाए हैं और हमारे सारे कैफे में यही मिलता है. अलग-अलग जगह कैफे खोलने का मकसद बस यह था कि लोगों को यह खाने के लिए 10 किलोमीटर या 7 किलोमीटर दूर ना आना पड़े. वह 4 किलोमीटर के बीच में ही आराम से आकर बैठकर लंच का आनंद ले सकते हैं. टेबल पर गेम्स खेलते हैं और बुक्स भी पढ़ते हैंउन्होंने आगे बताया, आपको हमारे टेबल पर क्रॉस और लूडो जैसे गेम्स देखने को मिलेंगे. जब तक खाना प्रिपेयर हो रहा है तब तक आप आराम से गेम्स खेलिए. इसके अलावा हमारे पास कई तरह की बुक्स मौजूद हैं. जिसमें मोटिवेशनल, आध्यात्मिक, पौराणिक व नॉलेज हर क्षेत्र की बुक्स हैं. जिसको जो पसंद है वह बुक लेकर आराम से आधा एक घंटा पढ़ सकते हैं, कोई डिस्टर्ब नहीं करने वाला. क्वालिटी खाने के साथ क्वालिटी टाइमकपिल बताते हैं, हमारा मकसद यह था कि खाना प्रिपेयर होने में अक्सर 15 से 20 मिनट लग ही जाते हैं. ऐसे में लोग एक बुक को आराम से 20 मिनट तक पढ़ सकते हैं. एक तो उनका नॉलेज बढ़ेगा. उनका टाइम भी वेस्ट नहीं होगा, फोन चलाने से बेटर है कि आप बुक पढ़ें या कोई गेम खेलें और साथ में बढ़िया प्रोटीन बाउल खाएं. यानी अच्छा खाना, अच्छा टाइम और अच्छा जीवन यही हमारे कैफे का उद्देश्य है और लोगों को यह काफी पसंद आ रहा है. लोगों की डिमांड हैलोगों की डिमांड को देखते हुए ही हमने ये कांटाटोली चौक के समीप नया कैफे अभिलाषा खोला है. 10 दिन पहले ही खोला है. बाकी के तीन पिछले चार साल से चल रहे हैं. ऐसे में कमाई भी अच्छी हो जाती है, लगभग लाखों में. लेकिन कमाई से ज्यादा जरूरी यह होती है हम क्या खिलाना चाहते हैं. इस चीज को लेकर ईमानदार रहें. इसी ईमानदारी के चलते एक छोटे कैफे से आज चार कैफे हम बना पाए हैं. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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झारखंड में हो रही बारिश से फसलों को फायदा:कृषि वैज्ञानिक बोले- सब्जियों,...

झारखंड के कोडरमा समेत विभिन्न जिलों में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश और अगले चार-पांच दिनों तक इसके जारी रहने की संभावना किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती है। इस बारिश से एक ओर जहां तापमान में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर यह किसानों के लिए फायदेमंद भी साबित हो रही है। कोडरमा के जयनगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार आगामी दिनों में होने वाली लगातार बारिश से किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस बारिश से खेतों में नमी आएगी, जिससे फिलहाल लगी सब्जियों को फायदा होगा और उनके विकास में मदद मिलेगी, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा। किसानों को सिंचाई के इस कार्य से राहत डॉ. अजय कुमार राय ने यह भी बताया कि अप्रैल माह की शुरुआत में पड़ी भीषण गर्मी के कारण सब्जी उत्पादक और बागवानी करने वाले किसानों को प्रतिदिन सिंचाई करनी पड़ती थी। लेकिन, पिछले दो दिनों से हुई बारिश ने किसानों को सिंचाई के इस कार्य से राहत दी है। इसके अतिरिक्त, इस बारिश से आम के फलों को भी अच्छा फायदा होगा और आम की अच्छी पैदावार की संभावना बढ़ेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जिन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ओलावृष्टि हुई है, वहां आम की फसल को थोड़ा नुकसान भी पहुंचा है। बारिश से जमीन में नमी बनी रहेगी उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दिनों में लगातार होने वाली बारिश से जमीन में नमी बनी रहेगी, जो अगले एक-दो महीने बाद तैयार होने वाली फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। डॉ. राय ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस बारिश का अधिकतम लाभ उठाएं। बारिश से होने वाले नमी से किसान खेतों में थोड़ी गहरी जुताई कर उसे फिलहाल छोड़ दें, ताकि मिट्टी के अंदर छुपे वैसे कीड़े जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हैं, वो धूप पड़ने पर नष्ट हो जाएंगे, जिससे खेतों में लगने वाली फसल का अच्छा पैदावार हो सकेगा। ढैंचा की खेती कर ले सकते हैं फायदा वहीं, कृषि वैज्ञानिक अजय रॉय ने बताया कि किसान अपने खेतों में हरी खाद तैयार कर सकते हैं। इसके लिए किसान अभी अपने खेतों में ढैंचा की बुआई कर सकते हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश इसके लिए लाभकारी होगी और 1 से डेढ़ महीने में ढैंचा से हरी खाद तैयार हो जाएगी, जो अगले 2 महीनों में खेतों में लगने वाली फसलों के लिए काफी लाभकारी होगी। क्या होता है ढैंचा ढैंचा की खेती मुख्य रूप से हरी खाद के रूप में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए की जाती है। यह एक तेज़ी से बढ़ने वाली दलहनी फसल है, जिसे 40-45 दिनों में खेत में ही जोतकर सड़ा दिया जाता है, जिससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन और कार्बनिक तत्व मिलते हैं और यूरिया की बचत होती है। ढैंचा खेती की मुख्य बातें और लाभ मिट्टी में सुधार: यह मिट्टी में कार्बनिक तत्वों और जीवांश की मात्रा बढ़ाकर उपजाऊ क्षमता में सुधार करता है। यूरिया की बचत: ढैंचा हरी खाद से मिट्टी में 80-100 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर तक बढ़ जाती है, जिससे यूरिया की जरूरत लगभग 30% तक कम हो जाती है। खरपतवार नियंत्रण: इसकी घनी वृद्धि के कारण यह अन्य खरपतवारों को उगने से रोकता है। क्षारीय/लवणीय मिट्टी का सुधार: यह लवणीय और क्षारीय मिट्टी को उपजाऊ बनाने में अत्यधिक मददगार है। समय और बुवाई: गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल से जुलाई के बीच इसकी बुवाई की जाती है। बुवाई के 40-45 दिन बाद, फूल आने से पहले इसे खेत में जोत देना चाहिए। Source link

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तालाब में डूबने से वृद्ध की मौत:26 घंटे बाद लोध फॉल के...

लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र के काठो गांव में तालाब में डूबने से 60 वर्षीय वृद्ध दुर्गा मांझी की मौत हो गई। उनका शव घटना के करीब 26 घंटे बाद गोताखोरों की मदद से बरामद किया गया। जानकारी के अनुसार, दुर्गा मांझी शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे गांव के कुछ लोगों के साथ तालाब में नहाने गए थे। नहाने के दौरान वह अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। उनके साथ मौजूद लोगों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वे गहरे पानी में समा चुके थे। घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत खोजबीन शुरू की, लेकिन तालाब की गहराई और कीचड़ के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे लोध फॉल में प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम ने तालाब से शव को बाहर निकाला। घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी मनोज कुमार और प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष बैठा मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि सरकारी प्रावधानों के तहत पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाएगा। Source link

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जमीन नहीं थी तो लीज पर ली, शुरू की गेंदा की खेती,...

होमताजा खबरकृषि लीज पर जमीन लेकर शुरू की फूलों की खेती, देवघर के टुनटुन पंडित अब कमा रहे लाखों Last Updated:May 01, 2026, 09:19 IST देवघर के टुनटुन पंडित ने खुद की जमीन न होने पर लीज पर खेत लेकर गेंदा फूल की खेती शुरू की .बाबा बैद्यनाथ मंदिर में फूलों की भारी मांग से वे सालाना करीब 7 लाख रुपये कमा रहे हैं. उनकी यह सफलता साबित करती है कि सही बाजार समझ और मेहनत से खेती भी सरकारी नौकरी से बेहतर मुनाफा दे सकती है. ख़बरें फटाफट देवघरः देवघर की मिट्टी से निकली यह कहानी आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं. यह कहानी है किसान टुनटुन पंडित जी की, जिनके पास खुद की जमीन नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय लीज पर जमीन लेकर खेती करने का फैसला किया. शुरुआत में वे छोटे-छोटे खेतों में पारंपरिक फसल जैसे धान और गेहूं की खेती करते थे, जिससे आमदनी सीमित ही रहती थी. मेहनत तो बहुत होती थी, लेकिन मुनाफा उतना नहीं मिल पाता था. ऐसे में उन्होंने कुछ नया करने की ठानी और फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ाया, जो आज उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन चुका है. लीज पर जमीन लेकर शुरू की फूल की खेतीटुनटुन पंडित जी ने देवघर में एक एकड़ जमीन लीज पर लेकर गेंदा फूल की खेती शुरू की.आपको बता दें कि इस इलाके में एक एकड़ में करीब 17 कठा जमीन होती है, जिसमें उन्होंने पूरी योजना और मेहनत के साथ फूलों की खेती को अपनाया. शुरुआत में यह फैसला थोड़ा जोखिम भरा जरूर था, लेकिन उन्होंने बाजार की मांग को समझा और उसी के अनुसार अपनी खेती को ढाला. देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-पाठ के लिए गेंदा फूल की मांग हमेशा बनी रहती है, और यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी. उन्होंने अपनी फसल को सीधे मंदिर के आसपास के बाजारों में बेचना शुरू किया, जिससे उन्हें अच्छा दाम मिलने लगा. क्या कहते हैं किसान टुनटुन पंडितकिसान टुनटुन पंडित ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचित करते हुए कहाँ की हर सप्ताह लगभग तीन क्विंटल गेंदा फूल की तोड़ाई करते हैं.अगर इसकी कीमत की बात करें तो बाजार में गेंदा फूल करीब 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। इस हिसाब से उनकी साप्ताहिक कमाई काफी अच्छी हो जाती है, और साल भर में यह आंकड़ा करीब 7 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच जाता है.खास बात यह है कि यह कमाई उन्होंने बिना अपनी जमीन के, सिर्फ लीज पर खेती करके हासिल की है. उनकी यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर सही फसल का चयन और बाजार की समझ हो, तो खेती से भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है. सिंचाई के लिए बोरिंग की है आवश्यकताटुनटुन पंडित जी बताते हैं कि गेंदा फूल की खेती में ज्यादा खर्च नहीं आता, लेकिन देखभाल और समय पर मेहनत करना बहुत जरूरी होता है. उन्होंने अपनी खेती में नियमित सिंचाई, खाद और सही समय पर तोड़ाई का विशेष ध्यान रखा, जिससे उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है. हालांकि फूलो की सिंचाई के लिए पानी परोसी के कुए से दूर से लाना पड़ता है अगर खुद के खेत मे बोरिंग हो जाये तों उत्पादन मे और वृद्धि हो सकती है फूल के साथ अन्य चीजों की भी खेती की जा सकती है.यही वजह है कि उनके फूलों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है और उन्हें बेचने में कोई परेशानी नहीं होती. आय में हुई कई गुणा बढ़ोतरी उनकी सफलता यह सिखाती है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बाजार की मांग को समझकर नई तकनीक और फसलों को अपनाएं, तो वे अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं. बिना अपनी जमीन के भी, सिर्फ हिम्मत और सही सोच के दम पर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह हर किसान के लिए एक प्रेरणा है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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प्रिंस खान का गुर्गा शैफी उर्फ मेजर रिमांड पर:पुलिस ने फिर 3...

धनबाद में कुख्यात भगोड़े प्रिंस खान के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। उसके मुख्य गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को एक बार फिर तीन दिनों के रिमांड पर लिया गया है। पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे होने के बाद कार्रवाई तेज कर दी गई है। शैफी उर्फ मेजर की गिरफ्तारी के बाद धनबाद पुलिस को पहले तीन दिनों का रिमांड मिला था। शनिवार को कोर्ट से उसे फिर तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया है। धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि 10 सदस्यीय विशेष टीम लगातार शैफी से पूछताछ कर रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस को प्रिंस खान के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। इनके आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिनमें जमीन कारोबारी भी शामिल हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई हथियार भी बरामद किए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ सफेदपोश और मीडिया से जुड़े लोगों की भी प्रिंस खान से सांठगांठ थी। ये लोग उसके संगठन को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ धमकी भरे वीडियो के प्रचार-प्रसार में भी शामिल थे। पुलिस फिलहाल पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। Source link

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गोड्डा में महिला से दिनदहाड़े चेन छिन्नतई:बाइक सवार बदमाशों ने वारदात को...

गोड्डा जिले के मेहरमा थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े एक महिला से चेन छीनतई की घटना सामने आई है। यह वारदात पत्तिचक-पिरोजपुर मार्ग पर शिव मंदिर के पास हुई, जहां दो अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने महिला के गले से सोने की चेन छीन ली और फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही मेहरमा थाना प्रभारी सौरभ कुमार ठाकुर, एसआई सत्यदीप, सुधीर टोप्पो और सहदेव प्रसाद अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित महिला से पूछताछ कर घटना की विस्तृत जानकारी ली। पीड़ित रुचि कुमारी ने बताया कि वह अपनी मां के साथ शंकरपुर स्थित मायके से बाराहाट बाजार जा रही थीं, तभी रास्ते में बाइक सवार दो युवकों ने अचानक उनके गले से चेन छीन ली। पुलिस ने इस मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आसपास के क्षेत्रों में जांच और छापेमारी की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है ताकि बदमाशों का सुराग मिल सके। हाल ही में, 17 अप्रैल को इसी थाना क्षेत्र में रंगदारी, हत्याकांड और छिनतई के मामलों में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस नई घटना ने पुलिस के लिए एक बार फिर चुनौती खड़ी कर दी है। मेहरमा थाना प्रभारी सौरभ कुमार ठाकुर ने पुष्टि की कि एक महिला से चेन छिनतई हुई है। उन्होंने बताया कि बाइक सवार बदमाशों ने इस घटना को अंजाम दिया है और मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। Source link

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24 घंटे भजन, सुबह से रात तक भंडारा…ओडिशा, पश्चिम बंगाल के भी...

जमशेदपुर. झारखंड की पहचान सिर्फ उसके जंगल, पहाड़ और खनिज संपदा से ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से भी है. यहां के गांवों में आज भी कई ऐसी परंपराएं जीवित हैं, जो लोगों को आपस में जोड़ने का काम करती हैं. इन्हीं में से एक खास परंपरा है हरि कीर्तन, जो हर साल बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है. 24 घंटे चलता है अनुष्ठानझारखंड के कई गांवों में आपको हरि मंदिर देखने को मिल जाएंगे. इन मंदिरों की खासियत यह होती है कि यहां हर साल 3, 5, 7 या 11 दिनों तक लगातार हरि कीर्तन का आयोजन होता है. इस दौरान पूरे गांव का माहौल पूरी तरह भक्ति में डूब जाता है. 24 घंटे तक चलने वाले इस अनुष्ठान में भजन, कीर्तन, ढोल-नगाड़े, नाच-गान और पूजा-पाठ का सिलसिला बिना रुके चलता रहता है. इसी परंपरा की एक झलक जमशेदपुर के जयप्रकाश आश्रम में भी देखने को मिल रही है, जहां हाल ही में हरि कीर्तन की शुरुआत हुई है. यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि झारखंड की संस्कृति और एकता को भी दर्शाता है. कब हुई दिन से रात पता नहीं चलताग्रामीण गुरुपदो महतो इस परंपरा के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि हरि कीर्तन करवाना बहुत शुभ माना जाता है. उनके अनुसार, ‘इससे गांव में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. यह आयोजन हमारे लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता.’ सच में, इन 3 से 5 दिनों के दौरान गांव का माहौल इतना जीवंत हो जाता है कि लोगों को समय का पता ही नहीं चलता. रात कब दिन में बदल जाती है और दिन कब रात में, यह महसूस ही नहीं होता. दूसरे राज्यों से भी आते कलाकाल, लगातार चलता भंडाराहरि कीर्तन की एक और खास बात यह है कि इसमें सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि झारखंड के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी कलाकार आते हैं. ये कलाकार भक्ति गीत गाकर भगवान की आराधना करते हैं और पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं. इस दौरान भोजन की भी विशेष व्यवस्था की जाती है. सुबह से लेकर रात तक भंडारा चलता रहता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं. गांव के लोग मिल-जुलकर इस आयोजन को सफल बनाते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और भी मजबूत होता है और भक्ति की लहर भी बहती है. सब हो जाता भक्तिमयहरि कीर्तन सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की जीवंत परंपरा और सामूहिक संस्कृति का प्रतीक है. यह लोगों को जोड़ने, आस्था को मजबूत करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने का एक अनोखा माध्यम है. जिस जगह पर यह आयोजन होता है, दूर-दूर से लोग इसमें शामिल होने आते हैं और पूरे क्षेत्र का माहौल ही अलग हो जाता है. यूं लगता है सब भक्तिमय हो चुका है. Source link

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हजारीबाग में पारिवारिक कलह में पत्नी की हत्या:पति ने रची लूट की...

हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में हुई महिला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। महिला के पति ने अज्ञात अपराधियों पर फायरिंग और लूट का आरोप लगाया था, वही अपनी पत्नी का हत्यारा निकला। पुलिस ने हत्याकांड के मुख्य आरोपी पति समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसपी अमन कुमार ने बताया कि घटना 26 अप्रैल की रात करीब 09:15 बजे कोले स्टेशन के पास हुई थी। मोटरसाइकिल पर सवार दंपती पर अज्ञात हमलावरों द्वारा गोलीबारी की खबर मिली थी। पति ने बताया था लूटपाट की कोशिश की थी इस हमले में मंजू देवी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनके पति विकास प्रजापति के हाथ में गोली लगी थी। विकास ने पुलिस को बताया था कि लुटेरों ने उन्हें रोककर लूटपाट की कोशिश की और विरोध करने पर फायरिंग कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच के दौरान पुलिस को शुरुआत से ही विकास के बयानों में विरोधाभास दिखा। तकनीकी साक्ष्यों और घटनास्थल के निरीक्षण के आधार पर जब विकास से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पिता के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई विकास ने पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से चल रही पारिवारिक कलह से परेशान था और अपनी पत्नी को रास्ते से हटाना चाहता था। उसने अपने पिता नरेश प्रजापति और साथियों सुनील व लालेश्वर गंजू के साथ मिलकर हत्या की पूरी योजना बनाई। खुद पर शक न हो, इसके लिए विकास ने अपने हाथ में भी गोली मरवा ली थी, ताकि यह मामला लूट और हमले का लगे। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी विकास प्रजापति (30), उसके पिता नरेश प्रजापति (56) और सहयोगी लालेश्वर गंजू (22) को गिरफ्तार किया है। इनके पास से वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर की काली यामहा मोटरसाइकिल और मृतका का पर्स बरामद किया गया है। हत्याकांड में शामिल एक अन्य आरोपी सुनील गंजू अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। Source link

झारखंड

पलामू में सड़क हादसे में होमगार्ड जवान की मौत:ड्यूटी से लौटते समय...

पलामू के विश्रामपुर थाना क्षेत्र के लालगढ़ गांव में शनिवार को एक सड़क दुर्घटना में होमगार्ड जवान जीतू मोची (58) की मौत हो गई। वे पंजीरी कला गांव के निवासी थे। परिजनों के अनुसार, जीतू मोची पिछले लगभग पांच वर्षों से पड़वा थाना क्षेत्र के रजहरा कोयलवरी में कार्यरत थे। शनिवार को वे अपनी ड्यूटी पूरी कर बाइक से अपने घर पंजीरी कला लौट रहे थे। इसी दौरान लालगढ़ गांव स्थित शिव मंदिर के पास एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद, आसपास के ग्रामीणों ने उन्हें तुरंत मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस अज्ञात वाहन की पहचान के लिए प्रयास कर रही है। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में होमगार्ड कमांडेंट दीपक कुमार ने मृतक जवान के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की और सरकारी प्रावधानों के तहत अन्य मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में होमगार्ड जवान और मृतक के परिजन मौजूद थे। Source link

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