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‘कोई भी फाइल ऑफिस से बाहर नहीं जाएगी’ नबन्ना से राइटर्स बिल्डिंग...

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक बढ़त को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्य के सभी महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंप दिया है. यह कदम राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ सहित अन्य प्रमुख भवनों से सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. सोमवार दोपहर को कोलकाता और हावड़ा की सड़कों पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सीआरपीएफ (CRPF) और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की गाड़ियाँ राज्य सचिवालय नबन्ना, राइटर्स बिल्डिंग, विकास भवन, जल संपद भवन और खाद्य भवन के बाहर खड़ी हो गईं. अधिकारियों के अनुसार, यह तैनाती इसलिए की गई है ताकि सत्ता हस्तांतरण के इस दौर में किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड या फाइलों को नष्ट न किया जा सके. नबन्ना, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय स्थित है, अब पूरी तरह से केंद्रीय बलों की निगरानी में है. फाइलें खोली जाएंगी – अमित शाह ने दी थी चेतावनी चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार हुंकार भरी थी कि भाजपा की सरकार आते ही पिछले सालों के भ्रष्टाचार की सभी ‘फाइलें खोली जाएंगी’. चुनाव आयोग का यह कदम इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है. भाजपा को आशंका थी कि चुनावी हार के डर से निवर्तमान सरकार के कुछ अधिकारी या कर्मचारी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को गायब या नष्ट कर सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भ्रष्टाचार के मुद्दों पर टीएमसी सरकार को जमकर घेरा था. कर्मचारियों के बैग की तलाशी सूत्रों के अनुसार, नबन्ना और अन्य भवनों में ड्यूटी पर आने-जाने वाले राज्य सरकार के कर्मचारियों के बैगों की कड़ी तलाशी ली जा रही है. सुरक्षा बलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी कर्मचारी को सचिवालय से बाहर कोई भी फाइल या आधिकारिक दस्तावेज ले जाने की अनुमति न दी जाए. निगरानी इतनी सख्त है कि हर कमरे और गलियारे पर पैनी नजर रखी जा रही है. राइटर्स बिल्डिंग का लौटेगा गौरव? दिलचस्प बात यह है कि वाम मोर्चा के शासनकाल में शक्ति का केंद्र रही ‘राइटर्स बिल्डिंग’, जिसे टीएमसी शासन में लगभग हाशिए पर धकेल दिया गया था, उसे फिर से सजाया जा रहा है. राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि नई भाजपा सरकार राइटर्स बिल्डिंग को फिर से मुख्य प्रशासनिक केंद्र बना सकती है. इन भवनों के जीर्णोद्धार की योजनाएं भी चर्चा में हैं. भाजपा 200 के पार चुनाव आयोग के नवीनतम अपडेट के अनुसार, बंगाल में भाजपा 208 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और कई सीटें जीत चुकी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस महज 79 सीटों पर संघर्ष कर रही है. भारी बहुमत की संभावनाओं ने प्रशासनिक फेरबदल और पुरानी फाइलों की जांच के डर को और बढ़ा दिया है. पश्चिम बंगाल के सरकारी कार्यालयों में केंद्रीय बलों की तैनाती क्यों की गई है? चुनाव आयोग ने सत्ता परिवर्तन के दौरान सरकारी दस्तावेजों और महत्वपूर्ण फाइलों को नष्ट होने या चोरी होने से बचाने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया है. किन प्रमुख भवनों की सुरक्षा बढ़ाई गई है? राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’, राइटर्स बिल्डिंग, विकास भवन, जल संपद भवन और खाद्य भवन में भारी सुरक्षा बल और क्यूआरटी तैनात किए गए हैं. सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या नए नियम लागू किए गए हैं? कर्मचारियों के बैग की सघन तलाशी ली जा रही है और किसी भी कर्मचारी को कार्यालय से कोई भी फाइल बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है. भाजपा का इन दस्तावेजों को लेकर क्या रुख रहा है? अमित शाह और पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्ता में आने पर पिछली सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी सभी फाइलें खोली जाएंगी और उनकी जांच होगी. चुनाव रुझानों में भाजपा और टीएमसी की वर्तमान स्थिति क्या है? नवीनतम रुझानों के अनुसार, भाजपा 208 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि टीएमसी केवल 79 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. Source link

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बीजेपी का वो ‘खेला’ जिससे पार नहीं पा सकी TMC, बंगाल के...

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत का सबसे अहम फैक्टर पीएम मोदी का ‘मैजिक’ रहा. पीएम नरेंद्र मोदी की बात बंगाल की जनता के दिलों में बस गई और भाजपा को इसका फायदा मिला. ऊपर से पश्चिम बंगाल में भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं की लगातार हो रही चुनावी सभाओं ने भी चुनाव का रुख भाजपा का तरफ मोड़ दिया. बंगाल का ‘काला जादू’ जो बेहद मशहूर है, जनता उसके हैंगआउट से बाहर आई और ‘मोदी मैजिक’ पर ध्यान केंद्रित करने में सफल रही. वोट भाजपा के पक्ष में पड़े और यह चुनाव परिणामों में साफ नजर आया. वैसे पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस जीत के लिए जिस तरह से पार्टी के नेताओं ने कमर कसी, उतनी ही शिद्दत से पूरे चुनाव के दौरान पार्टी के पक्ष में हवा का रूख तैयार करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मेहनत की. वैसे भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल में राजनीति की उपजाऊ जमीन तैयार करने के काम पार्टी की तरफ से बहुत पहले शुरू कर दिया गया था. नरेंद्र कप (फुटबॉल टूर्नामेंट) का आयोजन यहां किया गया था. इस पुरुष फुटबॉल टूर्नामेंट में 1200 टीमों ने भाग लिया और लगभग 18,000 खिलाड़ी सम्मिलित हुए. वहीं महिला फुटबॉल प्रतियोगिता में कुल 253 महिला टीमों ने हिस्सा लिया. दोनों ही आयोजनों में 18 से 25 वर्ष की आयु के युवा सम्मिलित हुए. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत के रूप में पहचाने जाने वाले वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान पदयात्रा, पुष्पांजलि, तिरंगा वितरण, सामूहिक गायन तथा दीप प्रज्वलन जैसे आयोजन हुए. इसमें 1 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए. यहां राज्य भर में भाजपा की तरफ से 9 परिवर्तन यात्रा आयोजित हुई. जिसमें 294 में से यहां के कुल 217 विधानसभा क्षेत्र कवर हुए. कुल 560 बड़े एवं छोटे कार्यक्रम में लगभग 7 लाख से अधिक लोग इससे जुड़े. इसके साथ ही भाजपा ने यहां बूथ सशक्तिकरण अभियान चलाया. यहां 70,671 बूथों पर बूथ समितियां बनाई गई एवं अन्य पर बूथ अध्यक्ष बनाए गए. इन बूथ समितियों पर 8,76,765 कार्यकर्ता नियुक्त किए गए. साथ ही वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव एवं वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के विश्लेषण के आधार पर 210 फोकस विधान सभाएं चिह्नित की गई. इसके साथ ही इसमें से सभी बूथों का विश्लेषण कर फोकस बूथ चिह्नित किए गए. इसके साथ ही साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार की विफलताओं एवं भ्रष्टाचार के मुद्दों पर राज्य स्तरीय आरोप-पत्र जारी किए. विधानसभा स्तर पर 220 विधानसभा क्षेत्रों में यह चार्जशीट जारी की गई. ताकि जनता इसके बारे में जान सके. पूरे बंगाल में महिला एवं युवा वर्ग के 2 करोड़ से अधिक भरोसा कार्ड भरे गए. महिलाओं के लगभग 1.60 करोड़ एवं युवाओं के 40 लाख फॉर्म भरवाए गए. श्रीरामनवमी, श्री हनुमान जन्मोत्सव एवं पोइला बैसाख के अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा 6,250 स्थानों पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगठनों के प्रमुखों से संपर्क किया गया. 2 लाख से अधिक लोगों से इस दौरान संपर्क साधा गया. इसके साथ ही 21 प्रदेशों से 9,498 बंगाली प्रवासियों ने पश्चिम बंगाल आकर भाजपा के पक्ष में प्रचार में भाग लिया. प्रदेश भर में 8,315 शक्तिकेंद्र पर नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया. इसके साथ ही 220 विधानसभाओं में रोजगार चाहने वाले युवाओं का पंजीकरण करने का अभियान ‘चाकरी चाई बांग्ला’ चलाया गया. महिलाओं को भाजपा ने अपने पक्ष में करने के लिए बूथ पर महिलाओं की 1,96,000 ड्रॉइंग रूम बैठकें आयोजित की. साथ ही 19,250 क्लब एवं एनजीओ के सदस्यों से संपर्क किया गया. इसके अलावा विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान 61 राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय नेताओं के 288 सीटों पर 600 से अधिक कार्यक्रम हुए. भाजपा की तरफ से यहां ‘ब्रिगेड चलो’ विशाल जनसभा कोलकाता में हुई, जिसमें 7.5 लाख लोगों की उपस्थिति रही. सोशल मीडिया पर भी इसको खूब प्रचारित किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए कुल 19 चुनावी सभाएं हुई एवं 2 रोड शो किए. झारग्राम में झालमुड़ी खाई, इसकी वीडियो को सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म पर 10 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा. हुगली नदी में नौका विहार एवं ठनठनीया काली बड़ी मंदिर में दर्शन करके भी वहां की जनता को पीएम मोदी ने संदेश दिया. भाजपा के पक्ष में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कुल 40 सभा, रोड शो कार्यक्रम हुए. इसके साथ उन्होंने 4 संगठनात्मक बैठकों में सभी 294 विधानसभाओं के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. गंगासागर में पूजा अर्चना एवं कपिल मुनि आश्रम में भी उनका इस दौरान जाना हुआ. जो पश्चिम बंगाल की जनता को साफ संदेश था कि वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए पुनः तैयार हो जाएं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित केन्द्रीय नेताओं की कुल 128 विधानसभाओं में कार्यक्रम हुए. इसके साथ ही भाजपा के अन्य राज्यों के 9 मुख्यमंत्रियों की यहां कुल 101 सभाएं हुई. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के स्थानीय भाजपा नेताओं जैसे प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, मिथुन चक्रवर्ती, सुकांत मजूमदार एवं दिलीप घोष सहित 25 नेताओं के कुल 232 कार्यक्रम हुए. इसके साथ हीं कोलकाता प्रेसीडेंसी में वार्ड स्तर पर वार्ड समितियों का गठन किया गया. साथ ही बूथ पर भाजपा के पक्ष में मतदान बढ़ाने के लिए पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के अलावा चिह्नित लोगों की टीम को लगाया गया. इन सबके साथ भाजपा ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए नैरेटिव भी तैयार किया, जिसमें ‘बाचते चाई, बीजेपी ताई’, ‘पलटानों दरकार चाई बीजेपी सोरकार’ के साथ ‘भय आउट, भरोसा इन’ जैसे स्लोगनों ने भाजपा के पक्ष में चुनाव का रुख मोड़ दिया. Source link

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बीजेपी ने बंगाल में लूटी 100 से ज्यादा सीटें, CRPF ने मुझे...

होमताजा खबरदेश बीजेपी ने बंगाल में लूटी 100 से ज्यादा सीटें, CRPF ने मुझे धक्का मारा: ममता Last Updated:May 04, 2026, 21:33 IST ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अवैध काम किया है. एसआईआर से लेकर ईवीएम मशीन तक पूरी तरह लूट ली गई है. ममता बनर्जी ने कहा, ‘लूट लूट लूट हुई है हम जोरदार वापसी करेंगे. चुनाव आयोग ने जानबूझकर बीजेपी को फायदा पहुंचाया है.’ ख़बरें फटाफट ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की अनैतिक जीत हुई है. (फाइल फोटो) कोलकाता. पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने कहा, “BJP ने 100 से ज़्यादा सीटें लूट लीं. चुनाव आयोग, BJP का आयोग बन गया है. मैंने CO और मनोज अग्रवाल से भी शिकायत की, लेकिन वे कुछ नहीं कर रहे हैं. क्या आपको लगता है कि यह जीत है? यह एक अनैतिक जीत है, नैतिक जीत नहीं. चुनाव आयोग ने केंद्रीय बलों, PM और गृह मंत्री के साथ मिलकर जो कुछ भी किया है, वह पूरी तरह से गैर-कानूनी है. यह लूट है, लूट है, लूट है. हम ज़ोरदार वापसी करेंगे.” TMC अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “मुझे भी अंदर जाने नहीं दिया गया… यह पक्षपाती है. आप CRPF को देख सकते हैं. उन्होंने मुझे धक्का दिया, मारा, CRPF के ठीक सामने. उन्होंने हर जगह गुंडे लगाए हैं. मैं उम्मीदवार हूँ, फिर भी उन्होंने मुझे अंदर नहीं जाने दिया.” TMC अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “मैंने शिकायत की है, मनोज अग्रवाल को भी मैंने शिकायत की, मैंने पश्चिम बंगाल CEO, RO, DEO सबको शिकायत की लेकिन वे कुछ नहीं कर रहे. उन्होंने मुझे अंदर नहीं आने दिया. मेरे पास ID कार्ड है, फिर भी वे मुझे अंदर नहीं जाने दे रहे. यह नैतिक जीत नहीं है, यह अनैतिक जीत है. चुनाव आयोग, सेंट्रल फोर्स, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने जो किया है वह पूरी तरह अवैध है. SIR से शुरू करके, EVM मशीन लूटकर इन्होंने यह सब जानबूझ कर किया है. लूट, लूट, लूट हुई है.” About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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Bengal Chunav Result: ब्रत्य बसु, सुजीत बसु, उदयन गुह… ममता के इन...

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं कह रहे बल्कि यह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उस सांगठनिक ढांचे के ढहने का प्रतीक है जिसे ममता बनर्जी ने सालों तक संजोया था. दोपहर 3 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, ममता कैबिनेट के 23 निवर्तमान मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर पीछे चल रहे हैं. यह राज्य के राजनीतिक इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है जहां एक साथ इतने मंत्रियों को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ा है. ममता के सिपहसालारों की हार का गणितसबसे चौंकाने वाला परिणाम दमदम और बिधाननगर जैसे शहरी क्षेत्रों से आया है. शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु और दमकल मंत्री सुजीत बसु जैसे कद्दावर नेता अपने गढ़ बचाने में नाकाम रहे हैं. उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक टीएमसी के मंत्रियों की हार की लहर एक समान दिखी है. उदयन गुह (दिनहाटा) और शशि पांजा जैसे चेहरों का पिछड़ना यह दर्शाता है कि सत्ता विरोधी लहर ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सीधे चोट पहुंचाई है.हालांकि, इस चुनावी आपदा के बीच फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट) और शोभनदेव चटर्जी (बालीगंज) जैसे कुछ ही नाम रहे जो अपनी साख बचाने में सफल होते दिख रहे हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के रुझानों के अनुसार, ममता बनर्जी सरकार के कई दिग्गज मंत्री अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पीछे चल रहे हैं। यहाँ पिछड़ने वाले प्रमुख मंत्रियों और अपनी सीट बचाने वाले नेताओं की सूची दी गई है: पिछड़ने वाले मंत्रियों की लिस्‍टब्रत्य बसु: शिक्षा मंत्री, हारेमानस भूंइया: सिंचाई मंत्री, सबंग केंद्र से पीछे हैं.शशिकान्त महाता: उपभोक्ता संरक्षण मंत्री, सालबनी केंद्र से पीछे चल रहे हैं.स्नेहाशीष चक्रवर्ती: परिवहन मंत्री, हुगली के जांगीपाड़ा केंद्र से पीछे हैं.पुलक राय: जनस्वास्थ्य तकनीकी मंत्री, उलुबेरिया दक्षिण केंद्र से पीछे हैं.प्रदीप मजूमदार: पंचायत मंत्री, दुर्गापुर पूर्व केंद्र से पीछे चल रहे हैं.बीरबाहा हांसदा: वन मंत्री, बिनपुर केंद्र से पीछे हैं.इंद्रनील सेन: तकनीकी शिक्षा मंत्री, चंदननगर केंद्र से पीछे चल रहे हैं.सबिना यास्मिन: सिंचाई राज्य मंत्री, मोथाबाड़ी केंद्र से पीछे हैं.सुजीत बसु: दमकल मंत्री, बिधाननगर केंद्र से पीछे हैं.चंद्रीमा भट्टाचार्य: स्वास्थ्य एवं वित्त राज्य मंत्री, दमदम उत्तर केंद्र से पीछे हैं.उदयन गुह: उत्तर बंगाल विकास मंत्री, दिनहाटा केंद्र से पीछे चल रहे हैं.सिद्दीकुल्लाह चौधरी: पुस्तकालय मंत्री, मंतेश्वर केंद्र से पीछे चल रहे हैं.सत्यजीत बर्मन: निवर्तमान स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री, हेमदाबाद केंद्र से पीछे हैं.शशि पांजा- हारेचंद्रिमा भट्टाचार्य- हारेबंकिम हाजरा- हारेअरूप बिस्वास- हारेउदयन गुहा- हारे जीत की राह पर अग्रसर मंत्रीफिरहाद हकीम: कोलकाता पोर्ट से टीएमसी प्रत्याशी, भारी मतों से जीत की ओर बढ़ रहे हैं.शोभनदेव चटर्जी: बालीगंज से टीएमसी प्रत्याशी, भारी अंतर से जीत की ओर अग्रसर हैं. क्यों हारे टीएमसी के दिग्गज?1. सत्ता विरोधी लहर : मंत्रियों के खिलाफ उनके निर्वाचन क्षेत्रों में भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों को लेकर गहरा असंतोष था, जिसका लाभ विपक्ष को मिला。 2. विभागों का खराब प्रदर्शन: शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्रियों का पिछड़ना यह बताता है कि जनता ने नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर नाराजगी जताई है. 3. संगठनात्मक दरार: मंत्रियों के अपनी सीटों पर पिछड़ने का मतलब है कि बूथ स्तर पर टीएमसी का मैनेजमेंट इस बार विफल रहा. सवाल-जवाब दोपहर 3 बजे तक की गणना के अनुसार टीएमसी के कितने मंत्री पीछे चल रहे थे? चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार ममता बनर्जी कैबिनेट के कुल 23 निवर्तमान मंत्री अपनी सीटों पर पीछे चल रहे थे। शिक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की क्या स्थिति रही? शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु दमदम से और स्वास्थ्य एवं वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य दमदम उत्तर सीट से पीछे चल रही थीं। क्या टीएमसी का कोई मंत्री जीत की राह पर भी है? हां, कोलकाता पोर्ट से फिरहाद हकीम और बालीगंज से शोभनदेव चटर्जी जैसे मंत्री भारी मतों से जीत की ओर अग्रसर हैं। उत्तर बंगाल में टीएमसी के किस प्रमुख मंत्री को हार का सामना करना पड़ रहा है? उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुह दिनहाटा केंद्र से पीछे चल रहे हैं। Source link

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Last Updated:May 04, 2026, 19:29 IST Vaibhav Suryavanshi Childhood Photos: 6 साल की उम्र में पहनी पहली जर्सी और आज आईपीएल के मैदान पर छक्कों की बरसात. तस्वीरों में देखिए टीम इंडिया के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी का बचपन और उनके संघर्ष की वो कहानी, जो आज करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. वर्ष 2017 की एक यादगार तस्वीर आज भी लोगों को भावुक कर देती है. उस समय वैभव सूर्यवंशी महज 6 साल के थे और अपने पिता संजीव सूर्यवंशी के साथ क्रिकेट मैच देखने गए थे. मैदान में खिलाड़ियों को जर्सी पहने देखकर उनके मन में भी वैसी ही इच्छा जगी. उन्होंने जिद की कि उन्हें भी जर्सी पहननी है. उनकी इस मासूम जिद को देखकर वहां मौजूद लोगों ने उन्हें क्रिकेट जर्सी पहनाई. उसी पल को कैमरे में कैद कर लिया गया. यह तस्वीर आज उनके शुरुआती क्रिकेट प्रेम और सपनों की पहली झलक मानी जाती है. वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी स्वयं भी खिलाड़ी रहे हैं, जिससे घर का माहौल पहले से ही खेल के प्रति प्रेरित करने वाला था. वैभव अक्सर अपने पिता के साथ मैच देखने जाया करते थे और वहीं से उनके अंदर क्रिकेट के प्रति रुचि विकसित हुई. उस समय वे खुद मैदान में खेलने नहीं उतरे थे, बल्कि खेल को करीब से समझ रहे थे. उनके अंदर धीरे-धीरे क्रिकेटर बनने का सपना आकार लेने लगा. पिता का मार्गदर्शन और सहयोग उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा. इस खास पल को पटोरी के वरिष्ठ पत्रकार सह क्रिकेटर फुटबॉलर चंदन सांडिल्य ने अपने कैमरे में कैद किया था. यह तस्वीर दरभंगा के नागेंद्र झा स्टेडियम में आयोजित 2017 की एक क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान ली गई थी. उस समय यह एक सामान्य घटना थी, लेकिन आज वही तस्वीर एक बड़े सफर की शुरुआत का प्रतीक बन गई है. चंदन सांडिल्य ने बताया कि उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बच्चा आगे चलकर क्रिकेट की दुनिया में इतना बड़ा नाम करेगा. Add News18 as Preferred Source on Google आज वैभव सूर्यवंशी आईपीएल जैसे बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और कम उम्र में ही अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. उनकी बल्लेबाजी शैली, खासकर छक्के लगाने की क्षमता, उन्हें भीड़ से अलग करती है. उन्होंने अपनी पहली ही आईपीएल पारी में छक्का लगाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था. आज वह लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. बचपन में पिता के साथ मैच देखने वाला यह बच्चा आज खुद क्रिकेट मैदान का चमकता सितारा बन गया है, जिसकी कहानी हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देती है. समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड क्षेत्र के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी आज कम उम्र में ही क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं.।लेकिन उनकी सफलता की कहानी जितनी बड़ी है, उतनी ही दिलचस्प उनकी बचपन की यादें भी हैं. जब उनकी पुरानी तस्वीरों पर नजर डालते हैं, तो एक मासूम बच्चा नजर आता है, जिसकी आंखों में सपने और क्रिकेट के प्रति गहरी लगन साफ झलकती है. यही जुनून धीरे-धीरे उनके जीवन का लक्ष्य बन गया. बचपन से ही उन्हें खेल के प्रति विशेष रुचि थी, जो आगे चलकर उनके करियर की नींव बनी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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तमिलनाडु में नया अध्याय: कोलाथुर में गिरा स्टालिन का किला, पेरम्बूर और...

चेन्नई. तमिलनाडु की राजनीति में इस बार नतीजों ने ऐसा मोड़ लिया है, जिसने पूरे सियासी समीकरण को झकझोर दिया है. राज्य के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन का अपना मजबूत गढ़ माने जाने वाले कोलाथुर से हारना सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि सत्ता से जाने का भी सीधा संकेत है. वहीं दूसरी ओर, अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने दोनों सीटों (पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व) पर जीत दर्ज कर यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति में एक नया चेहरा तेजी से उभर रहा है. यह नतीजा सिर्फ जीत-हार का आंकड़ा नहीं, बल्कि तमिलनाडु में बदलते जनमत, नई राजनीतिक आकांक्षाओं और पारंपरिक दलों के सामने खड़ी चुनौती की कहानी भी कहता है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा, जो डीएमके के लिए एक महत्वपूर्ण झटका है और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक नाटकीय बदलाव का संकेत देता है. यह चौंकाने वाली हार अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के व्यापक उदय के बीच हुई. टीवीके के वीएस बाबू ने कोलाथुर से जीत हासिल की. उन्होंने 68,419 वोट हासिल किए और स्टालिन को 7,731 वोटों के अंतर से हराया. टीवीके के उम्मीदवार विजय धामू ने भी रॉयपुरम निर्वाचन क्षेत्र से चौंकाने वाली जीत दर्ज की, जो एक ऑटो चालक हैं. उन्होंने एआईएडीएमके के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री डी. जयकुमार और डीएमके के सुबैर खान, जो पूर्व मंत्री रहमान खान के बेटे हैं, को हराया. इस जीत को व्यापक रूप से जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण के प्रतीक और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं के स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है. जैसे ही टीवीके का प्रभावशाली प्रदर्शन स्पष्ट हुआ, राजनीतिक और मनोरंजन जगत से बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई. अभिनेत्री काजल अग्रवाल ने विजय की शानदार और प्रभावशाली जीत की सराहना करते हुए जनसमर्थन की व्यापकता को रेखांकित करने के लिए उनके एक प्रतिष्ठित फिल्म संवाद का उल्लेख किया. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में इस परिणाम को उनकी दूरदर्शिता, दृढ़ता और जनता के साथ गहरे जुड़ाव का प्रमाण बताया. आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी विजय को बधाई देते हुए कहा कि परिणाम तमिलनाडु के मतदाताओं की विकसित होती आकांक्षाओं को दर्शाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि टीवीके के उदय से राज्य की राजनीतिक गतिशीलता में एक नया आयाम जुड़ गया है और उन्होंने आशा व्यक्त की कि विजय जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे. इस बीच, एआईएडीएमके के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी एक बड़ी व्यक्तिगत जीत के लिए तैयार नजर आ रहे थे. Source link

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West Bengal Election: किस फेज में किस पार्टी ने बेहतर परफॉर्म किया

TMC-BJP Performance in Both Phase: पश्चिम बंगाल में इस बार ‘भगवा’ लहराया है. टीएमसी की बुरी हार हुई है. दोफेज में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 92.47% मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ताजा रुझानों में भाजपा 294 सीटों में से 199 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि टीएमसी 90 सीटों से भी नीचे आ गई है. आइए देखते हैं कि दोनों चरणों में पार्टियों का प्रदर्शन कैसा रहा. पहला चरण (23 अप्रैल 2026): उत्तर बंगाल और भाजपा का ‘विजय रथ’ पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान हुआ था. यहां रिकॉर्ड 93.19% वोटिंग दर्ज की गई. भाजपा का दबदबा: पहले चरण में भाजपा ने अपनी पकड़ बहुत मजबूत रखी. विशेष रूप से उत्तर बंगाल के जिलों में, जहाँ भाजपा ने पहले भी बेहतर प्रदर्शन किया था, इस बार लगभग ‘क्लीन स्वीप’ जैसी स्थिति नजर आ रही है. चाय बागान और औद्योगिक क्षेत्रों के मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में जमकर मतदान किया. टीएमसी की स्थिति: टीएमसी को यहां स्थानीय सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा. विकास के मुद्दों और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते ममता बनर्जी का जादू यहां बेअसर रहा. दूसरा चरण (29 अप्रैल 2026): दक्षिण बंगाल में सेंधमारी दूसरे चरण में 8 जिलों की 142 सीटों पर मतदान हुआ. इसमें कोलकाता और उसके आसपास के इलाके शामिल थे, जिन्हें पारंपरिक रूप से टीएमसी का गढ़ माना जाता रहा है. यहाँ 91.66% मतदान हुआ. कड़ा मुकाबला: दूसरे चरण में उम्मीद थी कि टीएमसी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाएगी, लेकिन रुझान बताते हैं कि भाजपा ने यहाँ भी टीएमसी को कड़ी टक्कर दी है. दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों में भाजपा ने कल्याणकारी योजनाओं के दम पर पैठ बनाई. हाई-प्रोफाइल सीटें: भवानीपुर और कोलकाता की शहरी सीटों पर भी भाजपा के उम्मीदवारों ने टीएमसी के दिग्गजों की नींद उड़ा दी है. हालांकि, कोलकाता के कुछ शहरी क्षेत्रों में टीएमसी ने अपनी बढ़त बनाए रखी है, लेकिन वह सरकार बचाने के लिए पर्याप्त नहीं दिख रही है. फेज-वाइज तुलना: किसने मारी बाजी? यदि दोनों चरणों की तुलना करें, तो भाजपा ने पहले चरण (Phase 1) में टीएमसी के मुकाबले कहीं अधिक ‘बेहतर’ परफॉर्म किया है. पहले चरण की बढ़त ने ही भाजपा को वह मनोवैज्ञानिक लाभ दिया, जिससे दूसरे चरण में टीएमसी के गढ़ में घुसना उनके लिए आसान हो गया. भाजपा: पहले चरण में जबरदस्त बढ़त, दूसरे चरण में टीएमसी के गढ़ में ऐतिहासिक सेंधमारी. टीएमसी: पहले चरण में भारी नुकसान, दूसरे चरण में कुछ शहरी सीटों पर अपनी साख बचाने की कोशिश. कुल मिलाकर, 2026 का चुनाव बंगाल में ‘परिवर्तन’ का चुनाव साबित हुआ है. भाजपा ने दोनों ही चरणों में योजनाबद्ध तरीके से काम किया और मतदाताओं के एक बड़े वर्ग, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को अपने पाले में करने में सफल रही. रिकॉर्ड तोड़ मतदान प्रतिशत ने सत्ता पक्ष के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया है. पहले और दूसरे चरण में कुल कितनी सीटों पर मतदान हुआ? पहले चरण (23 अप्रैल) में 152 सीटों पर और दूसरे चरण (29 अप्रैल) में 142 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ. किस चरण में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया? पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ 93.19% मतदान दर्ज किया गया, जबकि दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग हुई. रुझानों के अनुसार भाजपा और टीएमसी कितनी सीटों पर आगे चल रही हैं? भाजपा 176-192 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं टीएमसी 92-94 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है. उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के चुनावी मिजाज में क्या अंतर देखा गया? उत्तर बंगाल (Phase 1) में भाजपा का प्रदर्शन एकतरफा रहा, जबकि दक्षिण बंगाल (Phase 2) में कड़ा मुकाबला देखने को मिला, हालांकि यहाँ भी भाजपा ने टीएमसी के गढ़ में बड़ी सेंध लगाई. Source link

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Bypoll Election 2026: उपचुनावों में त्रिपुरा-नागालैंड-गुजरात में BJP की प्रचंड जीत, बारामती...

होमताजा खबरदेश त्रिपुरा-नागालैंड-गुजरात में BJP की प्रचंड जीत, बारामती में कौन जीता Last Updated:May 04, 2026, 15:09 IST By Election Latest Update: देश के पांच राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणामों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नागालैंड, त्रिपुरा और गुजरात की सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर ली है. महाराष्ट्र की सबसे चर्चित बारामती सीट पर एनसीपी उम्मीदवार सुनेत्रा पवार अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से काफी आगे चल रही हैं. वहीं, कर्नाटक की दो सीटों पर कांग्रेस ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए बढ़त बनाई हुई है. मतगणना के साथ ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और परिणाम पल-पल बदल रहे हैं. 5 राज्यों में 7 सीटों पर उप-चुनाव; किसने मारी बाजी. Bypoll Results 2026 LIVE: देश के पांच राज्यों – कर्नाटक, गुजरात, नागालैंड, त्रिपुरा और महाराष्ट्र की सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना आज सुबह 8 बजे से जारी है. अब तक के रुझानों और नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा का विजय रथ पूर्वोत्तर और पश्चिम भारत में मजबूती से आगे बढ़ रहा है, जबकि कर्नाटक में कांग्रेस ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार, भाजपा ने तीन महत्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल कर ली है: नागालैंड (कोरीडांग): यहां भाजपा उम्मीदवार दाओचियर आई. इमचेन ने शानदार जीत दर्ज की है. त्रिपुरा (धर्मनगर): भाजपा के जाहर चक्रवर्ती ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पटखनी देते हुए जीत हासिल की है. गुजरात (उमरेठ): भाजपा उम्मीदवार हर्षदभाई गोविंदभाई परमार ने यहाँ भगवा लहराया और जीत अपने नाम की. बारामती में सुनेत्रा पवार का जलवा महाराष्ट्र की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट बारामती पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर उनकी पत्नी और एनसीपी उम्मीदवार सुनेत्रा अजित पवार 121528 वोटों से आगे चल रही हैं. बारामती में उनकी यह बढ़त अजित पवार की विरासत और उनके प्रभाव को दर्शाती है. वहीं, महाराष्ट्र की ही राहुरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार अक्षय शिवाजीराव कर्डिले बढ़त बनाए हुए हैं, जिससे राज्य में महायुति गठबंधन की स्थिति मजबूत नजर आ रही है. कर्नाटक में कांग्रेस की वापसी के संकेत जहां एक तरफ भाजपा तीन राज्यों में जीत चुकी है, वहीं कर्नाटक उपचुनाव में कांग्रेस ने मजबूती दिखाई है. बागलकोट सीट से उमेश हुल्लप्पा मेटी और दावनगेरे दक्षिण सीट से समर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन लगातार बढ़त बनाए हुए हैं. इन दो सीटों पर कांग्रेस की लीड ने भाजपा की क्लीन स्वीप की उम्मीदों को चुनौती दी है. मतगणना के इस महामुकाबले के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, ताकि शांतिपूर्ण तरीके से प्रक्रिया संपन्न हो सके. इन उपचुनावों के परिणाम न केवल स्थानीय समीकरण तय करेंगे, बल्कि आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेंगे. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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चुनाव परिणाम 2026 लाइव अपडेट्स और मुख्य बातें: TMC के श्यामली रॉय...

पश्‍च‍िम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में विधानसभा क्षेत्र में, न्‍यूज 18 लाइव र‍िजल्‍ट हब के ताजा आंकड़ों के अनुसार, BJP के निर्मल कुमार धारा 12:30 PM बजे आगे चल रहे हैं. इंदास पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से एक है. इस सीट को ग्रामीण सीट माना जा सकता है और यह पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में आती है. इस सीट का रिजर्वेशन स्टेटस शेड्यूल्ड कास्ट है. इंदास विधानसभा सीट बिष्णुपुर (शेड्यूल्ड कास्ट) लोकसभा सीट में आती है. 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में, इंदास में गुरुवार, 9 अप्रैल, 2026 को वोटिंग होगी और वोटों की गिनती सोमवार, 4 मई, 2026 को होगी. 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए इंदास विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट में कुल 2,45,267 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनमें से 1,24,899 पुरुष, 1,20,368 महिला और 0 थर्ड जेंडर के थे. 2021 के विधानसभा चुनाव में, कुल 2,42,367 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनमें से 1,23,165 पुरुष, 1,19,201 महिला और 1 थर्ड जेंडर का था. 2016 के विधानसभा चुनाव में, कुल 2,19,065 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनमें से 1,13,074 पुरुष, 1,05,990 महिला और 1 थर्ड जेंडर का था. 2011 के चुनावों में, इस चुनाव क्षेत्र में कुल 1,88,746 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनमें से 98,909 पुरुष, 89,837 महिलाएं और 0 थर्ड जेंडर थे. इस विधानसभा क्षेत्र में सर्विस वोटरों की संख्या 2021 में 571, 2016 में 560 और 2011 में 365 थी. इस चुनाव क्षेत्र में 2026 में वोटर जेंडर रेश्यो (प्रति 1000 पुरुष वोटरों पर महिला वोटरों की संख्या) 964 था, 2021 में यह 968, 2016 में 937 और 2011 में 908 था.इंदास विधानसभा क्षेत्र के ज्योग्राफिक कोऑर्डिनेट्स 23°07’14.2″N 87°35’33.4″E हैं. यह चुनाव क्षेत्र पश्चिम बंगाल के दक्षिण पश्चिम बंगाल क्षेत्र के बांकुरा जिले में आता है.2026 में, इंडिया में कुल 2,45,267 योग्य वोटर थे, जिनमें से 1,24,899 पुरुष और 1,20,368 महिलाएं और 0 थर्ड जेंडर थे. 2026 में वोटर जेंडर रेश्यो हर 1,000 पुरुष वोटरों पर 964 महिला वोटर था. 2021 में, कुल 2,42,367 वोटर थे, जिनमें से 1,23,165 पुरुष, 1,19,201 महिलाएं और 1 थर्ड जेंडर का वोटर था. 2016 में, कुल 2,19,065 वोटर थे, जिनमें से 1,13,074 पुरुष, 1,05,990 महिला और 1 थर्ड जेंडर के वोटर थे. 2011 में, कुल 1,88,746 वोटर थे, जिनमें से 98,909 पुरुष, 89,837 महिला और 0 थर्ड जेंडर के वोटर थे. 2021 में सर्विस वोटरों की संख्या 571 थी. 2016 में, 560 सर्विस वोटर थे, और 2011 में 365 थे.2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में, BJP के निर्मल कुमार धारा ने इस सीट पर TMC की रुनु मेटे को 7220 वोटों के अंतर से हराया, जो कुल डाले गए वोटों का 3.35% था. 2016 में, TMC के गुरुपद मेटे इस सीट पर जीते थे, उन्होंने CPIM के दिलीप कुमार मलिक को 18837 वोटों के अंतर से हराया था, जो इस सीट पर डाले गए कुल वोटों का 9.55% था. 2011 के विधानसभा चुनावों में, TMC के गुरुपद मेटे ने CPIM के शांतनु कुमार बोरा को 4005 वोटों के अंतर से हराकर यह सीट जीती थी, जो इस सीट पर डाले गए कुल वोटों का 2.3% था.2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस सीट पर BJP के निर्मल कुमार धारा को 48.75% वोट मिले थे. 2016 के विधानसभा चुनाव में TMC के गुरुपद मेटे को 48.14% वोट मिले थे, 2011 के विधानसभा चुनाव में TMC के गुरुपद मेटे को इंडास में 49.05% वोट मिले थे.इंदास विधानसभा सीट पर 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार, 23 अप्रैल, 2026 को वोट डाले जाएंगे. वोटों की गिनती सोमवार, 4 मई, 2026 को होगी. 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव में, इस सीट पर दूसरे चरण में गुरुवार, 1 अप्रैल, 2024 को वोट डाले गए थे और नतीजे रविवार, 2 मई, 2021 को घोषित किए गए थे. 2016 के राज्य विधानसभा चुनाव में, इस सीट पर दूसरे चरण में सोमवार, 11 अप्रैल, 2016 को वोट डाले गए थे और नतीजे गुरुवार, 19 मई, 2016 को घोषित किए गए थे. 2011 के चुनाव में, इस सीट पर पांचवें चरण में शनिवार, 7 मई, 2011 को वोट डाले गए थे और नतीजे शुक्रवार, 13 मई, 2011 को घोषित किए गए थे. Source link

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28 राज्यों में से 21 में CM… नॉर्थ, वेस्ट, ईस्ट सब जगह...

नई दिल्ली. देश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दबदबा लगातार मजबूत होता नजर आ रहा है. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि देश के अधिकांश हिस्सों में बीजेपी या उसके नेतृत्व वाले एनडीए की सरकारें हैं, जबकि विपक्ष खासकर कांग्रेस का प्रभाव सीमित होता जा रहा है. उत्तर भारत में बीजेपी का वर्चस्व साफ दिखता है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली में पार्टी की सरकार है, जबकि हिमाचल प्रदेश में वह सत्ता में वापसी की कोशिश में है. पंजाब में एनडीए को मजबूत करने की रणनीति जारी है और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. पश्चिम भारत में भी बीजेपी का मजबूत किला कायम है. महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और गोवा में पार्टी की सरकारें हैं, जिससे इस क्षेत्र में उसका राजनीतिक प्रभाव बेहद मजबूत बना हुआ है. पूर्वी भारत में भी पार्टी का विस्तार जारी है. ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल में बीजेपी या उसके सहयोगियों की सरकार है, जबकि झारखंड में पार्टी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और भविष्य में सत्ता हासिल करने की संभावना जताई जा रही है. मध्य भारत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में बीजेपी की सरकार है, जो इस क्षेत्र में पार्टी की मजबूत पकड़ को दर्शाता है. नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी और एनडीए का प्रदर्शन उल्लेखनीय है. असम, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, जबकि सिक्किम में एनडीए की सरकार है. मिजोरम में हालांकि पार्टी विपक्ष में है. देश के 6 में से 5 हिस्से में बीजेपी का परचम:उत्तर भारत में 4 CM – उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली में बीजेपी सरकार.पश्चिम भारत में 4 CM – महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, गोवा.पूर्व भारत में 3 CM – ओडिशा, बिहार, बंगाल में सरकार.मध्य भारत में 2 CM – मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार.नॉथ ईस्ट में 5 CM – असम, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार. दक्षिण भारत में बीजेपी का कोई सीएम नहींदक्षिण भारत में बीजेपी की स्थिति अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. फिलहाल पार्टी की अपनी कोई सरकार नहीं है, लेकिन आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में एनडीए की सरकार है. कर्नाटक और तेलंगाना में पार्टी मजबूत स्थिति में है और भविष्य में सत्ता में आने की उम्मीद जता रही है. तमिलनाडु और केरल में भी पार्टी अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटी है. बीजेपी का बढ़ता वर्चस्वदेश के कुल 30 विधानसभा क्षेत्रों (28 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश) में बीजेपी के पास 18 मुख्यमंत्री हैं, जबकि एनडीए के 3 मुख्यमंत्री हैं. दूसरी ओर, विपक्ष के पास करीब 9 राज्यों (तमिलनाडु को लेकर) में सरकार है. कांग्रेस की स्थिति खासतौर पर कमजोर होती दिख रही है. उसके पास सिर्फ 4 राज्यों में सरकार है, जिनमें से 3 दक्षिण भारत में और 1 उत्तर भारत (हिमाचल प्रदेश) में है. Source link

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