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43 साल बाद PM मोदी का नॉर्वे दौरा, ये कोई संयोग या...

नई द‍िल्‍ली. एक तरफ हॉर्मुज का संकट खत्म होने के बजाय गहराता ही जा रहा है वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 6 दिन में 5 देशों का अहम दौरा. पीएम मोदी का हर विदेश दौरा किसी ना किसी मायने में खास होता है और 5 यूरोपीय देशों का ये दौरा भी बड़ा खास है. संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा ,व्यापार, ग्रीन ग्रोथ और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है लेकिन नॉर्वे जैसे देश में भारतीय प्रधानमंत्री को दूसरी बार पहुंचने में 43 साल लग गए. हम इस सवाल को जानने की कोशिश करते हैं. जिस देश की कुल आबादी ही 56 लाख हो यानी सिर्फ दिल्ली जैसे शहर में ही 4 नॉर्वे के बराबर की आबादी समा जाए. तो आखिर ऐसा क्या खास है नॉर्वे में जो संकट की घड़ी में पीएम मोदी को यहां खींच लाया? छोटा सा नॉर्वे यूरोप का सबसे बड़ा तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादक और दुनिया के शीर्ष निर्यातकों में से एक है और हर साल ये दुनिया भर के बाजारों में ये फॉसिल फ्यूल बेचकर अरबों डॉलर कमाता है. * नॉर्वे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस निर्यातक है* यह यूरोपीय संघ की कुल गैस खपत का लगभग 30% से अधिक हिस्सा पूरा करता है. * यह वैश्विक कच्चे तेल की मांग का करीब 2% उत्पादन करता है और पश्चिमी यूरोप में सबसे बड़ा तेल निर्यातक है.* तेल और गैस नॉर्वे की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है जो इसके जीडीपी में लगभग 20 % का योगदान देता है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि नॉर्वे अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरत के लिए तेल और कोयले का काफी कम इस्तेमाल करता है.दरअसल ये देश अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में अग्रणी है. देश की लगभग 98% बिजली हाइड्रोपावर से बनती है वहीं दूसरी ओर भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन यानी Fossil fuel का भारी निर्यात करके आर्थिक रूप से भी समृद्ध भी हो रहा है. नॉर्वे की यही खासियतें पीएम मोदी को यहां खींच लाईं और दोनों देशों के बीच 30 से अधिक व्यापारिक और तकनीकी समझौते मील के पत्थर साबित होंगे. इतना ही नहीं नॉर्वे के सरकारी फंड का भारत के शेयर बाजार में 28 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश है और इसमें भी बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन जो सबसे खास डील होगी वो ग्रीन टेक्नोलॉजी और एलपीजी सप्लाई की होगी जिसकी अभी भारत को काफी जरूरत है. नॉर्वे में भारत के राजदूत ग्लोरिया गंगटे ने पहले ही संकेत दे दिया था कि पीएम के यात्रा का उद्देश्य भारत के बड़े बाजार में नॉर्डिक क्षेत्र की भागीदारी को बड़े स्तर पर बढ़ाना है. नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 19 मई को भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी पीएम मोदी हिस्सा लेंगे.इस सम्मेलन में वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा को लेकर खास चर्चा होगी. इससे पहले पीएम मोदी दूसरे देशों के साथ बड़े अहम समझौते कर चुके हैं: * संयुक्त अरब अमीरात (UAE)के साथ एलपीजी सप्लाई और रणनीतिक तेल भंडारों को लेकर अहम समझौते किए ताकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की तेल और गैस की जरूरतें पूरी होती रहें.* नीदरलैंड्स और स्वीडन के साथ सेमीकंडक्टर,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन के क्षेत्र में साझा तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी. नॉर्वे दौरे के बाद पीएम मोदी इटली जाएंगे जहां व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के अलावा रक्षा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा होगी. हॉर्मुज संकट की वजह से भारत ही नहीं पूरी दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है और अब ये बहुत ही गंभीर चुनौती की शक्ल ले चुका है. भारत के लिए भी मौजूदा हालात किसी आने वाले बड़े खतरे का संकेत दे रहा है और इसीलिए पीएम मोदी हर उन विकल्पों पर काम कर रहे हैं जिससे भारत ना सिर्फ आने वाली बड़ी चुनौतियों का सामना कर पाए बल्कि ग्रोथ के रास्ते पर भी बिना रुके आगे बढ़ता रहे. इसलिए उन्होंने जब 5 देशों को चुना को उसमें नॉर्वे को भी प्रमुखता दी जहां जून 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहली बार आधिकारिक दौरे पर गई थीं लेकिन उसके बाद इस देश पहुंचने में भारतीय प्रधानमंत्री को 43 साल लग गए. Source link

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PM Modi Foreign Visit Live: सच्चे दोस्त ने संकट में दिया साथ…...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों के दौरे के तहत स्वीडन की यात्रा पूरी कर चुके हैं. वहां से वह अब नार्वे पहुंच गए हैं. फिर वह इटली का दौरा करेंगे. भारतीय समय अनुसार सोमवार तड़के उन्होंने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. दोनों नेताओं के बीच भारत-स्वीडन संबंधों को मजबूत करने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर भारत और स्वीडन के मजबूत संबंधों की सराहना की और बैठक की जानकारी साझा की. दोनों नेताओं ने यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (ERT) को भी संयुक्त रूप से संबोधित किया. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत, स्वीडन और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों पर जोर दिया. बैठक में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया भी मौजूद रहीं. उन्होंने स्वीडन के राजा कार्ल 16 गुफ्ताफ और रानी क्वीन सिल्विया की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं दीं. PM Modi Norway Visit Live: नॉर्वे में भी पीएम मोदी को मिला सर्वोच्‍चा नागरिक सम्‍मान, ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया PM Modi Norway Visit Live: नॉर्वे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया. यह सम्मान भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर पीएम मोदी की नेतृत्व भूमिका को मान्यता देने के तौर पर देखा जा रहा है. इस सम्मान के बाद भारतीय समुदाय में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला. ये पीएम मोदी को मिला 32वां सर्वोच्‍च सम्‍मान है. PM Modi Norway Visit Live: “सैन्य टकराव से नहीं निकलता समाधान…” यूक्रेन युद्ध के बीच पीएम मोदी ने दुनिया को दिया शांति का नया मंत्र PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे में वैश्विक शांति और कूटनीति पर भारत का रुख साफ किया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे दोनों ही नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संवाद और कूटनीति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि कोई भी सैन्य टकराव अपने आप में समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता. प्रधानमंत्री ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के संकट का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे स्थिति कहीं भी हो, भारत और नॉर्वे दुनिया के इन अशांत क्षेत्रों में संघर्षों को तुरंत समाप्त करने और स्थायी शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों का लगातार समर्थन करते रहेंगे. PM Modi Norway Visit Live: सच्चे दोस्त ने संकट में दिया साथ…’ पहलगाम हमले का जिक्र कर भावुक हुए पीएम मोदी, नॉर्वे का जताया आभार PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे पहुंचने पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मिले सहयोग को याद किया. पीएम मोदी ने कहा, “मैं पिछले वर्ष ही नॉर्वे आने वाला था, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण मेरी यह यात्रा स्थगित हो गई थी. उस चुनौतीपूर्ण समय में नॉर्वे ने भारत के साथ मजबूती से खड़े रहकर अपनी सच्ची दोस्ती का परिचय दिया था. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में नॉर्वे ने भारत के प्रति जो एकजुटता दिखाई, आज इस ऐतिहासिक धरती पर कदम रखते ही वह उसके लिए पूरे देश की तरफ से आभार व्यक्त करते हैं. PM Modi Norway Visit Live: भारत-नॉर्वे के बीच खुली तरक्की की नई राह, पीएम मोदी ने बताया कैसे यह ऐतिहासिक समझौता बदलेगा दोनों देशों की किस्मत! PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच पिछले वर्ष हुए ऐतिहासिक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत और नॉर्वे के बीच साझा प्रगति और समृद्धि सुनिश्चित करने का एक मजबूत ब्लूप्रिंट है. इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खुले हैं. प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि यह रणनीतिक साझेदारी न केवल भारत और नॉर्वे के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विकास को रफ्तार देगी. PM Modi Norway Visit Live: भारत-नॉर्वे की स्‍पेस एजेंसी के बीच हुआ करार, बदलते क्‍लाइमेट चेंज पर मिलकर करेंगे काम PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के पीएम के साथ ज्‍वाइंट प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान कहा कि भारत और नॉर्वे के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक सहयोग (MoU) पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि इसरो और नॉर्वे की यह साझेदारी अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया आसमान छुएगी. इससे दोनों देशों के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) और वैश्विक इकोसिस्टम को बेहतर ढंग से समझने और सुरक्षित रखने में योगदान देंगे. भारत-नॉर्वे की यह मजबूत साझेदारी पूरी दुनिया के कल्याण के लिए फायदेमंद साबित होगी. PM Modi Norway Visit Live: 40 साल बाद आया हूं, दोस्ती का नया दौर शुरू… ओस्लो उतरते ही पीएम मोदी का एक्स पर बड़ा संदेश PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे की धरती पर कदम रखते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी खुशी जाहिर की. पीएम मोदी ने लिखा, “मैं ओस्लो पहुंच चुका हूं. हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोर द्वारा किए गए गर्मजोशी से स्वागत के लिए मैं उनका अत्यंत आभारी हूं. 40 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है.” पीएम ने विश्वास जताया कि इस ऐतिहासिक दौरे से भारत और नॉर्वे के बीच दोस्ती और मजबूत होगी. अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी वहां के राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्जा से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा, वह 19 मई को ओस्लो में आयोजित होने वाले ‘तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लेंगे और नॉर्डिक देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे. PM Modi Norway Visit Live: भारत-नॉर्वे बिजनेस समिट में दिखेगी पीएम मोदी की धमक, निवेश और तकनीक को लेकर होने वाला है बड़ा ऐलान PM Modi Norway Visit Live: विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर ‘इंडिया-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट’ को संबोधित करेंगे. इस बेहद महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करना, निवेश के नए अवसरों को तलाशना और वैज्ञानिक अनुसंधान (रिसर्च) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है. पीएम मोदी

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Ajmer News | History | नसीराबाद के सुनहरे दौर की याद है...

Last Updated:May 18, 2026, 16:57 IST Famous Lakshmi Talkies Of Ajmer: अजमेर जिले के नसीराबाद का लक्ष्मी टॉकीज कभी शहर की सबसे बड़ी पहचान माना जाता था. 1945 में शुरू हुए इस सिनेमा हॉल में फिल्म देखने के लिए लंबी कतारें लगती थीं और परिवारों के लिए यह खास अनुभव हुआ करता था. समय बदला, मल्टीप्लेक्स आए और 2017 में यहां आखिरी फिल्म दिखाई गई. आज यह इमारत भले शांत हो, लेकिन लोगों की यादों में इसकी रौनक अब भी जिंदा है. अजमेर. अजमेर जिले के नसीराबाद में स्थित लक्ष्मी टॉकीज कभी सिर्फ एक सिनेमा हॉल नहीं था, बल्कि यह शहर की पहचान और लोगों की यादों का अहम हिस्सा हुआ करता था. उस दौर में जब मनोरंजन के साधन बेहद सीमित थे, तब फिल्मों का आकर्षण लोगों को एक साथ जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया माना जाता था. लक्ष्मी टॉकीज में फिल्म देखना केवल समय बिताने का साधन नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ बिताया जाने वाला खास अनुभव हुआ करता था. यहां की हलचल, टिकट खिड़की पर लगने वाली भीड़ और नई फिल्मों को लेकर लोगों का उत्साह शहर की पहचान बन चुका था. स्थानीय निवासी पंकज बताते हैं कि लक्ष्मी टॉकीज की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी. इसे नसीराबाद का पहला और सबसे पुराना सिनेमा हॉल माना जाता है. लंबे समय तक यह शहर का एकमात्र थिएटर रहा, जहां नई फिल्म लगने पर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती थी. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकट लेने के लिए लंबी कतारें लग जाती थीं. कई बार लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था, तब जाकर फिल्म देखने का मौका मिलता था. जब सिनेमा देखना एक खास मौका हुआ करता थापंकज बताते हैं कि बचपन में वह अपने माता-पिता के साथ यहां फिल्म देखने आया करते थे. उस समय सिनेमा देखना किसी खास मौके से कम नहीं माना जाता था. परिवार के साथ बिताए गए वे पल आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं. लक्ष्मी टॉकीज केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि यहां बड़े सर्कस और दूसरे मनोरंजन कार्यक्रम भी आयोजित होते थे, जो शहर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते थे. 2017 में चली आखिरी फिल्मसमय के साथ मनोरंजन के तरीके बदलते गए. मल्टीप्लेक्स संस्कृति बढ़ी और लोगों की पसंद भी बदलने लगी. बदलते दौर और देखरेख की कमी के कारण लक्ष्मी टॉकीज की रौनक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी. आखिरकार वर्ष 2017 में यहां आखिरी फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसके बाद यह हमेशा के लिए बंद हो गया. आज भले ही लक्ष्मी टॉकीज का भवन शांत और वीरान नजर आता हो, लेकिन नसीराबाद के लोगों के दिलों में इसकी यादें अब भी जिंदा हैं. यह सिर्फ एक बंद पड़ा सिनेमा हॉल नहीं, बल्कि शहर के सुनहरे दौर और सामूहिक यादों का एक अहम हिस्सा माना जाता है. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ajmer,Ajmer,Rajasthan Source link

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महाभारत : गांधारी ने दो बार ही आंखों से हटाई थी पट्टी,...

कौरवों की मां गांधारी आंखों से देख सकती थीं. जब उनके शादी अंधे धृतराष्ट्र से हुई तो उन्हें पहले तो जबरदस्त झटका लगा लेकिन उसके बाद उन्होंने प्रण लिया कि पति की तरह अब वो भी किसी भी चीज को अपनी आंखों से नहीं देखेंगी, लिहाजा उन्होंने अपनी आंखों पूरे जीवन के लिए पट्टी बांध ली. लेकिन ये पट्टी दो मौकों पर जब उन्होंने खोली तो क्या गजब हो गया. गांधार की राजकुमारी गांधारी की शादी हस्तिनापुर के राजकुमार धृतराष्ट्र से हुई थी. वह जन्म से ही अंधे थे. उन्होंने फैसला लिया कि वह उस दुनिया को नहीं देखेंगी, जिसे उनके पति नहीं देख सकते. उन्होंने इसी प्रण की वजह से अपनी पैदा हुई संतानों को भी कभी नहीं देखा. गांधारी के बारे में कहा जाता था कि वह अंतर्ज्ञान से जानती थीं कि उनके आसपास और लोगों के मन में क्या चल रहा है. भीष्म ने गांधारी के गुणों और कुरु वंश के गौरव को देखते हुए इस विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे गांधारी के पिता सुबल ने स्वीकार कर लिया. आंख पर पट्टी बांधकर गांधारी अपने पति के साथ समान धरातल पर रहना चाहती थीं. हालांकि ये भी कहा जाता है कि गांधारी ने ऐसा करके एक नेत्रहीन व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किए जाने पर इस तरह अपना मौन विरोध जाहिर किया. तब हर कोई अवाक रह गया हालांकि गांधारी का अपनी आंखों पर पट्टी बांधने का फैसला उनके चरित्र की दृढ़ता, त्याग और पतिव्रता धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को भी दिखाता है. गांधारी आंखों पर जो पट्टी पहनी हुई थी, उसका जिक्र महाभारत में भी आया है. कम से कम दो बार उनके पट्टी उतारने का जिक्र तो आया है. वो दोनों बहुत खास क्षण थे. और जब उन्होंने आंख से पट्टी हटाई तो वो मौके ऐसे थे कि हर कोई स्तब्ध रह गया था. गांधारी ने महाभारत युद्ध के बाद युद्धक्षेत्र में अपनी आंखों से पट्टी हटाई ताकि अपने मृत पुत्रों को देख सकें. ये दूसरा मौका था जब गांधारी ने आंख से पट्टी हटाई. अपने पुत्रों को रणक्षेत्र में मृत देखकर वह अंदर ही अंदर धधक उठी थीं. (News18 AI) तब गांधारी बहुत गुस्से में थीं महाभारत के स्त्री पर्व में प्रसंग है जहां युद्ध के बाद गांधारी अपने मृत पुत्रों, विशेष रूप से दुर्योधन को देखने के लिए कुरुक्षेत्र जाती है. कुछ व्याख्याओं में कहा जाता है कि उन्होंने तब अपनी आंखों से पट्टी हटाई. उन्होंने युद्ध के मैदान में पड़ी लाशों के बीच अपने पुत्रों को मृत देखा. इस समय वह अंदर से इतने गुस्से में थीं कि उनके सामने जो आ जाता, वो गुस्से से भस्म ही हो जाता. लिहाजा उस समय कृष्ण ने पांडवों को उनके सामने नहीं आने के लिए कहा. कृष्ण ने उन्हें कैसे नियंत्रित किया जब उन्होंने पट्टी बांध ली तब कृष्ण के साथ पांडव उनसे और धृतराष्ट्र से मिलने आए. आंख पर पट्टी बांधने के लिए बावजूद गांधारी अंदर से धधक रही थीं. वह तपस्वी थीं. गांधारी की तपस्या में संयम, धैर्य और त्याग का भी समावेश था. हालांकि उस दिन अपनी तपस्या से प्राप्त दैवीय दृष्टि का उपयोग करके उन्होंने पांडवों को शाप देने की कोशिश की. कहा जाता है कृष्ण ने गांधारी की उस शक्ति को नियंत्रित किया.  पैर का अंगूठा काला पड़ गया तब गांधारी को अपनी पट्टी के निचले पोर से केवल युधिष्ठिर का पैर का अंगूठा नजर आया और वह गांधारी के ताप के कारण काला पड़ गया. तब कृष्ण के कारण ही उनका गुस्सा कृष्ण पर उतरा और पांडव बच गए. कब पहली बार गांधारी ने पट्टी हटाई महाभारत में कहा गया है कि गांधारी ने पहली बार आंख से पट्टी महाभारत युद्ध से पहले हटाई थी. तब उन्होंने पुत्र दुर्योधन को अपने सामने वस्त्रविहीन यानि नग्न आने के लिए कहा था. तब गांधारी ने बेटे दुर्योधन को बगैर वस्त्र के अपने सामने महल में आने को कहा था. लेकिन दुर्योधन निचले वस्त्र पहनकर उनके सामने आए, जिससे वह उनके शरीर के ऊपरी हिस्सों को ही पत्थर की तरह अजेय कर पाईं. (News18 AI) कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से पहले गांधारी को अपने पुत्र दुर्योधन और कौरवों के अधर्मपूर्ण रवैये के कारण चिंता थी. वह जानती थीं कि युद्ध में पांडवों की सेना, विशेष रूप से भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन में, बहुत शक्तिशाली है. मां की भावनाओं और तपस्या की शक्ति के कारण गांधारी ने दुर्योधन को युद्ध में अजेय बनाने की कोशिश की. गांधारी ने दुर्योधन को अपने पास बुलाया. उसे नग्न अवस्था में उनके सामने आने को कहा. इसका कारण यह था कि गांधारी अपनी तपस्या से प्राप्त दैवीय शक्ति का उपयोग करके दुर्योधन के शरीर को वज्र के समान कठोर करना चाहती थीं. उनकी दृष्टि में इतनी शक्ति थी कि वह जिस अंग को देख लेतीं, वह अजेय हो जाता. दुर्योधन अपनी माता के आदेश का पालन करने के लिए नग्न अवस्था में जाने को तैयार था, लेकिन रास्ते में भगवान कृष्ण ने उसे रोका. कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया कि अपनी माता के सामने पूरी तरह नग्न जाना अनुचित और लज्जाजनक है. कृष्ण के कहने पर दुर्योधन ने अपनी जंघाओं को (विशेषकर कमर के नीचे का हिस्सा) कपड़े से ढक लिया. तब दुर्योधन के शरीर को पट्टी खोलकर देखा जब दुर्योधन गांधारी के सामने आया, तब गांधारी ने अपनी आंखों की पट्टी हटाई, जो उन्होंने वर्षों से पहनी थी. उनकी तपस्या की शक्ति ऐसी थी कि उनकी दृष्टि ने दुर्योधन के शरीर के उन हिस्सों को, जिन्हें उन्होंने देखा, वज्र के समान कठोर कर दिया लेकिन चूंकि दुर्योधन ने अपनी जंघाएं ढकी हुई थीं, वह हिस्सा उनकी दृष्टि से अछूता रह गया और कमजोर रहा. यही कमजोरी बाद में युद्ध में दुर्योधन की हार का कारण बनी. भीम ने युद्ध के अंतिम चरण में (18वें दिन) दुर्योधन की जंघाओं पर गदा से प्रहार किया, जिससे वह पराजित हुआ. Source link

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राहुल गांधी कभी गाल छूकर दुलारते, तो प्रियंका हाथ मिलाती, वीडी सतीशन...

होमताजा खबरदेश राहुल कभी गाल छूकर दुलारते, तो प्रियंका हाथ मिलाती; ‘कर्ली गर्ल’ कौन? Last Updated:May 18, 2026, 12:47 IST केरल में वीडी सतीसन के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का दुलार वाला अंदाज देखने को मिला. समारोह में मौजूद एक छोटी बच्ची राहुल गांधी के पास पहुंची, जिसके बाद वे मुस्कुराते हुए उसका गाल सहलाया और लाड किया. प्रियंका गांधी ने भी बच्ची से हाथ मोड़ा और उससे हल्की-फुल्की बातचीत की. इस दौरान दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान साफ ​​नजर आई. बच्ची कौन थी और किसके साथ समारोह में आई थी, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है. वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण में एक छोटी बच्ची के साथ दिखे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी. तिरुवनंतपुरम: केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की अगुवाई में बनी यूडीएफ सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी का एक अलग ही अंदाज दिखा. शपथ ग्रहण समारोह का गवाह बनने पहुंचे राहुल और प्रियंका वहां आई एक छोटी बच्ची के साथ हल्के-फुल्के अंदाज़ में बातचीत करते दिखे. सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि फ्रॉक बहनी छोटी के बाल कर्ली (घुंघराले बाल) हैं. वह अपनी सीट से ऊठकर राहुल गांधी के पास पहुंचती है. राहुल गांधी मुस्कुराते हुए उसे दुलारते दिखते हैं. राहुल छोटी बच्ची का गाल सहलाते हुए लाड करते हैं. वहीं बगल में बैठीं प्रियंका गांधी उस छोटी बच्चे से हाथ मिलाती हैं. प्रियंका और राहुल दोनों उस छोटी बच्ची से कुछ हल्के-फुल्के अंदाज़ में बातचीत करते दिखते हैं. इस दौरान राहुल और प्रियंका के चेहरे पर मुस्कान दिख रही है. ये बच्ची कौन है, शपथ ग्रहण समारोह में उसे लेकर कौन पहुंचा था, इस बारे में फिलहाल जानकारी उपलब्ध नहीं है. #WATCH | Thiruvananthapuram: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Congress MP Priyanka Gandhi Vadra had a light-hearted interaction with a child during the swearing-in ceremony of the Keralam government Source link

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Supreme Court hearing | Supreme Court UAPA Bail | ‘किसी सभ्य समाज...

सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत जमानत को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि ‘जमानत नियम है और जेल अपवाद.’ अदालत ने साफ कहा कि यह सिद्धांत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 से निकलता है और किसी भी सभ्य समाज की बुनियाद ‘निर्दोषता की धारणा’ पर टिकी होती है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच जम्मू-कश्मीर के एक कथित नार्को-टेरर मामले में आरोपी सैयद इफ्तिखार अंदराबी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी. आरोपी करीब पांच साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है, जबकि उसके पास से कोई प्रत्यक्ष मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला UAPA की धारा 43D(5) और संविधान के तहत मिलने वाली व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण सवाल उठाता है. अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कड़े कानून जमानत के सिद्धांतों को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन वे व्यक्ति की स्वतंत्रता और हिरासत के बीच संवैधानिक संतुलन को खत्म नहीं कर सकते. उमर खालिद और शरजील इमाम मामले का जिक्र सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज करने वाले अपने ही फैसले पर भी आपत्ति जताई. अदालत ने कहा कि उस फैसले में तीन जजों की बेंच द्वारा दिए गए ‘एनआईए बनाम केए नजीब’ फैसले का सही तरीके से पालन नहीं किया गया था. कोर्ट ने कहा कि केए नजीब केस में स्पष्ट तौर पर माना गया था कि यदि ट्रायल में अत्यधिक देरी हो रही हो और आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हो, तो यह जमानत देने का आधार बन सकता है, भले ही मामला UAPA जैसे सख्त कानून के तहत क्यों न हो. ‘छोटी बेंच बड़ी बेंच के फैसले नहीं बदल सकती’ सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि छोटी बेंचें बड़ी बेंचों के फैसलों को “कमजोर, दरकिनार या नजरअंदाज” नहीं कर सकतीं. अगर किसी छोटी बेंच को बड़े फैसले पर संदेह हो, तो उसे मामला बड़ी बेंच के पास भेजना चाहिए. अदालत ने साफ किया कि ‘KA Najeeb’ का फैसला आज भी बाध्यकारी कानून है और ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की छोटी बेंचें भी इसे नजरअंदाज नहीं कर सकतीं. ‘लंबी हिरासत खुद सजा नहीं बन सकती’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुरविंदर सिंह और ग़ुल्फ़िशा फातिमा मामलों के फैसले UAPA, TADA और NDPS जैसे कड़े कानूनों में जमानत देने को लेकर पहले तय न्यायिक सिद्धांतों से अलग दिखाई देते हैं. बेंच ने कहा कि केए नजीब फैसला इसलिए दिया गया था ताकि ट्रायल से पहले लंबी जेल हिरासत खुद सजा में न बदल जाए. कोर्ट ने दोहराया कि ‘बेल नियम है और जेल अपवाद’ संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 से निकलने वाला मूल सिद्धांत है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘निर्दोष होने की धारणा’ कानून के शासन वाले हर सभ्य समाज की आधारशिला है. अदालत की इन टिप्पणियों को UAPA, TADA और NDPS जैसे सख्त कानूनों के मामलों में बेहद अहम माना जा रहा है. Source link

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Thalapathy Vijay Tamil Nadu CM News: थलापति विजय की राह में बोए...

Tamil Nadu News: तमिलनाडु में थलापति विजय की सरकार बन चुकी है. टीवीके सरकार अब वादों को पूरा करने में जुटी है. इस बीच तमिलनाडु की सियासत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जी हां, तमिलनाडु की चुनाव बाद की राजनीति में हलचल मचाने वाला खुलासा हुआ है. जी हां, थलापति विजय को सत्ता में आने से रोकने के लिए डीएमकी और एआईएडीएमके ने मिलकर गेम प्लान तैयार किया था. इसके लिए इन दोनों पार्टियों ने एक शख्स को सीएम पोस्ट भी ऑफर किया था. वह शख्स कोई और नहीं वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन थे. जी हां, वीसीके चीफ थोल थिरुमावलवन ने दावा किया है कि डीएमके और एआईएडीएमके ने सत्ता साझा करने के असाधारण फॉर्मूले तलाशे थे. इसके तहत उन्हें मुख्यमंत्री पद की पेशकश की गई थी. मकसद बस इतना कि थलापति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को सरकार बनाने से रोका जा सके. न्यूज18 तमिलनाडु से खास बातचीत में वीसीके प्रमुख ने पुष्टि की कि इस महीने सरकार गठन के ड्रामे के चरम पर दोनों द्रविड़ पार्टियों के बीच बातचीत हुई थी. यह तब हुआ था, जब विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन बहुमत के आंकड़े से पीछे थी. सीएम पद पर मीटिंग की वो कहानी थोल थिरुमावलवन ने कहा, ‘7 मई को हमें अलग-अलग निमंत्रण मिले कि सीएम स्टालिन हमसे मिलना चाहते हैं.’ वीसीके और वाम नेताओं की बैठक का जिक्र करते हुए थोल थिरुमावलवन ने कहा, ‘जब हम गए, उन्होंने प्रस्ताव रखा कि एआईएडीएमके चाहती है कि हम साथ मिलकर एडापड्डी पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री बनाएं. मैंने उनसे कहा कि डीएमके का भविष्य ही सवाल बन जाएगा. वाम दलों की भी यही राय थी.’ डीएमके और एआईएडीएमके के बीच पर्दे के पीछे खेल इन टिप्पणियों से सरकार गठन के तनावपूर्ण दौर में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच पर्दे के पीछे हुई बातचीत की अटकलों की पुष्टि होती है. लेकिन बड़ा राजनीतिक झटका थिरुमावलवन के अगले दावे से आया. वीसीके चीफ ने आगे कहा कि 8 मई को नया प्रस्ताव आया कि जिसमें मुझे उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया, जबकि पलानीस्वामी को डिप्टी सीएम. उन्होंने ‘मैंने इसे मजाक में उड़ा दिया. ऐसा कुछ तमिलनाडु में कभी नहीं हो सकता.’ थिरुमावलवन को मिला सीएम पोस्ट का ऑफर थिरुमावलवन ने दावा किया कि टीवीके को समर्थन देने का पत्र देने के बाद भी उन्हें ऑफर मिलते रहे. उन्होंने कहा, ‘टीवीके को समर्थन देने के बाद भी मुझे मुख्यमंत्री पद का ऑफर मिला.’ हालांकि, अंत में वीसीके ने विजय की पार्टी का समर्थन किया, जिससे टीवीके बहुमत के आंकड़े को पार कर गई और विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ. थोल थिरुमावलवन का दावा, डीएमके-एआईएडीएमके ने सीएम पद ऑफर किया क्यों अहम है यह खुलासायह चौंकाने वाले खुलासे ऐसे समय में आए हैं, जब एआईएडीएमके अंदरूनी संकट से जूझ रही है. पार्टी के एक बागी गुट ने ईपीएस पर आरोप लगाया है कि वे सिर्फ विजय के उभार को रोकने के लिए डीएमके से गठजोड़ करने को तैयार थे. वहीं, ईपीएस गुट का आरोप है कि बागी एआईएडीएमके विधायकों को टीवीके का समर्थन करने के बदले कैबिनेट में जगह देने का वादा किया गया था. इस विवाद में सुपरस्टार रजनीकांत का नाम भी आ गया है, जिनके बारे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि उन्होंने डीएमके-एआईएडीएमके के बीच बातचीत में अनौपचारिक रूप से मदद की. रजनीकांत ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मैं स्टालिन को 35-40 साल से जानता हूं. मुझे दुख हुआ कि वे कोलाथुर सीट से हार गए. क्या इतनी राजनीतिक तनाव के समय ऐसी बात करना संभव है?’ इन खुलासों से पता चलता है कि जब टीवीके शुरू में बहुमत से पीछे थी, तो प्रतिद्वंद्वी गुटों ने संख्या जुटाने के लिए हर संभव कोशिश की, जिससे ऐसे राजनीतिक हालात बने जो पहले कभी सोचे भी नहीं जा सकते थे. (पूर्णिमा मुरली की रिपोर्ट) Source link

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प्रेस की आजादी और अल्पसंख्यक…नीदरलैंड PM के बयान से भारत खफा, कहा-...

India on Netherlands PM Rob Jetten Remark: नीदरलैंड के पीएम की प्रेस की आजादी और अल्पसंख्यकों वाली टिप्पमी से भारत खफा है. भारत ने नीदरलैंड के पीएम रॉब जेटन के बयान को खारिज किया है. भारत ने दो टुक जवाब देते हुए साफ-साफ कहा है कि यह समझ की कमी है. डच अखबार डी वोल्क्सक्रांट के मुताबिक, पीएम जेटन ने कहा था कि डच सरकार को भारत में हो रहे घटनाक्रमों को लेकर चिंता है, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकार शामिल हैं. दरअसल, भारत ने नीदरलैंड के पीएम के बयान को खारिज कर कहा कि ऐसी चिंताएं भारत के इतिहास, लोकतंत्र और सांस्कृतिक विविधता की ‘समझ की कमी’ से पैदा होती हैं. यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान आई, जहां भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने एक डच पत्रकार की ओर से मीडिया इंटरैक्शन के दौरान उठाए गए सवालों का जवाब दिया. ‘भारत की समझ की कमी’भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जिसकी गहरी सभ्यतागत जड़ें हैं और धार्मिक सह-अस्तित्व का लंबा इतिहास है. जॉर्ज ने देश में प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर उठी चिंताओं पर जवाब देते हुए कहा, ‘ये सवाल भारत की समझ की कमी को दिखाते हैं.’ उन्होंने भारत को 5,000 साल से भी पुरानी सभ्यता बताया और इसकी भाषा, धर्म, भोजन और संस्कृति में विविधता को उजागर किया. उन्होंने कहा, ‘भारत 1.4 अरब लोगों का देश है, जो दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है. यह संस्कृति, भाषा, भोजन और धर्म के मामले में विविधता से भरा देश है.’ जॉर्ज ने यह भी कहा कि भारत अद्वितीय है क्योंकि चार प्रमुख धर्म- हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म. यहीं से शुरू हुए और आज भी फल-फूल रहे हैं. उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में भारत का रिकॉर्ड बचाते हुए देश में विभिन्न धार्मिक समुदायों की लंबी उपस्थिति की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा, ‘यहूदी धर्म भारत में 2,500 साल से भी ज्यादा समय से है. भारत शायद उन गिने-चुने देशों में से एक है, जहां यहूदी आबादी को कभी भी उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा.’ जॉर्ज ने यह भी कहा कि ईसाई धर्म यीशु मसीह के पुनरुत्थान के तुरंत बाद भारत पहुंचा और यहां लगातार बढ़ता रहा. उन्होंने आगे कहा, ‘ईसाई धर्म भारत में यूरोप से भी पहले आया था. आज यहां 3 करोड़ ईसाई हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम भी पैगंबर मोहम्मद के समय में भारत आया और यहां फला-फूला. जॉर्ज ने बातचीत के दौरान कहा, ‘पीड़ित अल्पसंख्यक हमेशा यहां आए हैं.’ डच पत्रकार का सवाल यह संवाद तब हुआ जब एक डच पत्रकार ने पूछा कि पीएम मोदी की दो दिवसीय नीदरलैंड यात्रा के दौरान संयुक्त प्रेस वार्ता क्यों नहीं हुई. पत्रकार ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और मुस्लिम व अन्य छोटे अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई. इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए जॉर्ज ने भारत के हालिया चुनावों का जिक्र किया और देश को ‘जीवंत लोकतंत्र’  बताया. भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब उन्होंने शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को लोकतंत्र की अहम विशेषता बताते हुए कहा, ‘हाल ही में हमारे यहां चुनाव हुए. 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने वोट डाला. यही भारत की खूबसूरती है.’ जॉर्ज ने यह भी कहा कि भारत ने लोकतांत्रिक सिद्धांतों से समझौता किए बिना आर्थिक प्रगति हासिल की. उन्होंने कहा, ‘हमने गरीबी मिटाने के लिए हिंसा का रास्ता नहीं चुना. हमने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए गरीबी हटाई.’ राजनयिक ने यह भी जोड़ा कि भारत दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा है, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘जब हम आजाद हुए थे, तब भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी 11 प्रतिशत थी. अब यह 20 प्रतिशत से ज्यादा है. कोई ऐसा देश बताइए जहां अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ी हो.’ उन्होंने आलोचकों से भारत को बेहतर समझने की अपील की.उन्होंने आगे कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि भारत के बारे में और जानें, ताकि आप समझ सकें कि भारत क्या है और यह कैसे आगे बढ़ रहा है.’ डच पीएम ने क्या कहा था? यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने सीधे तौर पर ये बयान दिए थे या नहीं. हालांकि, डच अखबार डी वोल्क्सक्रांट के मुताबिक, रॉब जेटन ने पीएम मोदी से मुलाकात से पहले कहा था कि डच सरकार को भारत में हो रहे घटनाक्रमों, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकार शामिल हैं, को लेकर चिंता है. रिपोर्ट में कहा गया कि जेटन ने दावा किया कि ये चिंताएं नियमित रूप से भारतीय सरकार के सामने उठाई जाती रही हैं. साथ ही जेटन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि भारत और नीदरलैंड दोनों लोकतंत्र, सुशासन और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को महत्व देते हैं. उन्होंने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे एक बाल संरक्षण विवाद का भी जिक्र किया, जो पहले की कूटनीतिक चर्चाओं में शामिल रहा है. Source link

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रांची के बिरसा मुंडा जेल में शर्मनाक खेल! महिला बंदी का यौन...

Last Updated:May 18, 2026, 08:40 IST Ranchi Birsa Munda Jail Controversy: रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में एक महिला बंदी के साथ यौन शोषण कर उसे गर्भवती किए जाने के आरोप ने झारखंड की सियासत में हलचल मचा दी है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेल के काराधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. रांची होटवार जेल में महिला कैदी के गर्भवती होने का दावा, बाबूलाल मरांडी ने सीएम सोरेन को पत्र लिख रांची. खेलगांव स्थित रांची बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) में एक महिला बंदी के साथ यौन शोषण कर उसे गर्भवती किए जाने के आरोप ने झारखंड की सियासत में हलचल मचा दी है. महिला बंदी के साथ यौन शोषण कर उसे गर्भवती किए जाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के काराधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने जेल प्रशासन पर सबूत मिटाने के भी आरोप लगाए हैं और इसको लेकर शासन को सचेत किया है. साफ है कि मामला बेहद गंभीर है और अब इसे लेकर ही नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र भी लिखा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा गया तीखा पत्र मामला सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक औपचारिक और बेहद कड़ा पत्र लिखा है. मरांडी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (X) पर भी इस पत्र को साझा करते हुए मामले को सार्वजनिक किया है. उन्होंने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि जेल की सुरक्षित सलाखों के भीतर हुई यह घटना अत्यंत शर्मनाक और मानवता को पूरी तरह से झकझोर देने वाली है. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस गंभीर आपराधिक मामले पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है. लगातार शारीरिक और मानसिक शोषण का दावा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में बाबूलाल मरांडी ने दावा किया है कि उन्हें विश्वसनीय आंतरिक प्रशासनिक स्रोतों से पुख्ता जानकारी मिली है. आरोप के अनुसार, न्यायिक अभिरक्षा में बंद एक असहाय महिला कैदी का जेल के सर्वोच्च पद पर बैठे काराधीक्षक द्वारा लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया. इसी प्रताड़ना के परिणामस्वरूप पीड़ित महिला वर्तमान में गर्भवती हो गई है. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. सबूत मिटाने और गवाहों के तबादले की आशंका बाबूलाल मरांडी ने केवल यौन शोषण का ही आरोप नहीं लगाया, बल्कि उन्होंने मामले को दबाने की प्रशासनिक साजिश का भी पर्दाफाश किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कारा महानिरीक्षक और जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मिलकर इस पूरे मामले की फाइलों को गायब करने तथा आरोपी को बचाने में जुटे हैं. पत्र के अनुसार, वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को प्रभावित करने के लिए पीड़ित महिला को बीमारी का बहाना बनाकर जेल से बाहर अलग-अलग जगहों पर भेजा जा रहा है. इसके साथ ही मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण गवाहों और कर्मचारियों का अचानक तबादला भी कर दिया गया है जेल की विश्वसनीयता पर खड़े हुए सवाल मामले में बीजेपी नेता सी पी सिंह ने कहा कि मामला सही है या नहीं इसकी पुष्टि तो नहीं कर सकता, लेकिन इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि कई ऐसे प्रकरण जेल से सामने आ चुके हैं जिनके कारण जेल की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं. कहा कि जेल के अंदर से अपराधी धड़ल्ले से फोन का इस्तेमाल करते हैं. कैदियों से मुलाकात करने वालों से पैसे वसूले जाते हैं. पैसे का बंदरबांट नीचे से ऊपर तक होता है. कांग्रेस ने मरांडी से पूछे सवाल वहीं, बाबूलाल मरांडी के आरोप पर सत्ताधारी दल कांग्रेस प्रवक्ता किशोर नाथ शाहदेव का कहना है कि बाबूलाल मरांडी ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए यह पत्र लिखा है. ऐसे में बाबूलाल मरांडी को बताना चाहिए कि उनका कौन सा सूत्र जेल में है. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इस बात में जरा भी सच्चाई है तो सरकार मामले की जांच करेगी और जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. पहले भी सुर्खियों में रहा है बिरसा मुंडा कारा बहरहाल बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा की कई खबरें सुर्खियां बटोर चुकी हैं. ईडी ने भी बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से जुड़े मामलों की जांच की है. ऐसे में महिला बंदी के साथ यौन शोषण का यह मामला राज्य की राजनीति में तूल पकड़ता नजर आ रहा है. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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Kerala CM VD Satheesan Shapath Grahan LIVE केरल में आज से कांग्रेस...

होमताजा खबरदेश सतीशन आज लेंगे केरल के CM पद की शपथ, राहुल-प्रियंका ने सुबह-सुबह पकड़ी फ्लाइट Last Updated:May 18, 2026, 07:38 IST Kerala CM VD Satheesan Shapath Grahan LIVE : कांग्रेस नेता वीडी सतीशन आज केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. वीडी सतीशन को कांग्रेस की वापसी का मुख्य चेहरा माना जा रहा था, लेकिन पार्टी आलाकमान की पसंद …और पढ़ें कांग्रेस नेता वीडी सतीशन आज केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. केरल में 10 साल के अंतराल के बाद एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है. कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार का आज शपथ ग्रहण होने वाला है, जहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीडी सतीशन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. उनके साथ 20 मंत्री भी कैबिनेट में शामिल होंगे. राज्यपाल आरवी आर्लेकर नई सरकार को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए केरल रवाना हो चुके हैं. समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे. वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली 21 सदस्यीय कैबिनेट में 14 नए चेहरों को मौका मिला है. कांग्रेस कोटे से रमेश चेन्निथला, सनी जोसेफ, के मुरलीधरन, एपी अनिल कुमार, पीसी विष्णुनाध, रोजी एम जॉन, बिंदु कृष्णा, एम लिजू, टी सिद्दीकी, केए थुलसी और ओजे जनेश मंत्री बनेंगे. IUML को पांच मंत्री पद मिले हैं. पार्टी की ओर से पीके कुन्हालिकुट्टी, केएम शाजी, वी अब्दुल गफूर, एन शम्सुद्दीन और पीके बशीर को कैबिनेट में जगह दी गई है. इसके अलावा मॉन्स जोसेफ, शिबू बेबी जॉन, अनूप जैकब और सीपी जॉन भी मंत्री पद की शपथ लेंगे. Kerala Shapath Grahan LIVE: केरल में रिजल्ट के 14 दिन बाद बनेगी नई सरकार 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF ने 102 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी. वामपंथी LDF के लगातार दो कार्यकाल के बाद कांग्रेस गठबंधन की सत्ता में वापसी हुई है. हालांकि मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पार्टी में करीब 9 दिनों तक मंथन चलता रहा. वीडी सतीशन को कांग्रेस की वापसी का मुख्य चेहरा माना जा रहा था, लेकिन पार्टी आलाकमान की पसंद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल बताए जा रहे थे. आखिरकार लंबे विचार-विमर्श के बाद सतीशन के नाम पर सहमति बनी. Location : New Delhi,Delhi Source link

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