ज्यूडिशियल ऑफिसर का हनी ट्रैप, ₹5200000 की लगाई चपत, कोर्ट का आया...
होमताजा खबरDelhi ज्यूडिशियल ऑफिसर का हनी ट्रैप, ₹5200000 की लगाई चपत, कोर्ट का आया बड़ा फैसला Last Updated:June 13, 2026, 10:06 IST Honey Trap Case: ज्यूडिशियल अधिकारी के साथ कथित हनी ट्रैप के मामले में कोर्ट ने आरोपी शख्स को जमानत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रहे अधिकारी को भी फटकार लगाई है. ज्यूडिशियल ऑफिसर का हनी ट्रैप, ₹5200000 की लगाई चपत, अब कोर्ट का आया बड़ा फैसला Honey Trap Case: एक कथित हनी ट्रैप मामले में हरियाणा की एक न्यायिक अधिकारी से 52 लाख रुपये से अधिक की ठगी के आरोपी दीपक वत्स को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि आरोपी का रवैया जांच में सहयोग करने के बजाय उसे बाधित करने वाला रहा है और उसके खिलाफ अब तक जुटाए गए साक्ष्य गंभीर सवाल खड़े करते हैं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ने जांच एजेंसियों के समक्ष बातचीत और संचार के केवल चुनिंदा हिस्से ही प्रस्तुत किए, जबकि कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गईं. मामला एक डेटिंग ऐप के जरिए शुरू हुए कथित संबंध से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार आरोपी ने भावनात्मक संबंधों का लाभ उठाकर न्यायिक अधिकारी से 52 लाख रुपये से अधिक की रकम हासिल की. हालांकि, आरोपी का दावा है कि दोनों के बीच सहमति से संबंध थे और सभी वित्तीय लेन-देन स्वेच्छा से किए गए थे. सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच में कई खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया. अदालत ने कहा कि पुलिस के पास आरोपी का मोबाइल फोन होने के बावजूद शिकायतकर्ता पक्ष से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए. जांच अधिकारी को निर्देश अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह डेटिंग ऐप की पूरी चैट, व्हाट्सऐप रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा दोनों पक्षों के बीच हुई कथित मुलाकातों की जानकारी जुटाए. साथ ही पांच लाख रुपये की नकद जमा राशि और उन संस्थाओं की भी जांच की जाए जिनके माध्यम से धनराशि का लेन-देन हुआ. पीड़ित अधिकारी ने दर्ज नहीं कराया था मामला अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि प्राथमिकी स्वयं न्यायिक अधिकारी ने दर्ज नहीं कराई थी, बल्कि उनकी घरेलू सहायिका ने शिकायत दी थी. हालांकि, अधिकांश वित्तीय लेन-देन न्यायिक अधिकारी के खातों से हुए थे. अदालत ने कहा कि शिकायत में वास्तविक पीड़ित की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देती, लेकिन सामाजिक संकोच या निजी कारणों से तथ्य छिपाना जांच में सहयोग न करने का आधार नहीं बन सकता. अदालत ने माना कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत सामग्री अधूरी है और वह जांच में पूरी तरह सहयोग नहीं कर रहा है. ऐसे में मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link







