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bettiah mega job fair on 31 july west champaran employment camp details

Last Updated:July 29, 2026, 20:13 IST West Champaran Job Camp: युवाओं के लिए नौकरी का बड़ा अवसर है. पश्चिम चंपारण के बेतिया में 31 जुलाई को रोज़गार मेले का आयोजन हो रहा है. इसमें दर्जनों कंपनियाँ बेहतर सैलरी पर 18+ युवक-युवतियों को नौकरी देंगी. 10वीं से पोस्ट ग्रेजुएट तक के युवा भाग ले सकते हैं. NCS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. पश्चिम चम्पारण: एक लंबे समय के बाद ज़िले में एक बार फिर रोज़गार मेले का आयोजन हो रहा है.बड़ी बात यह है कि इस मेले में दो या चार नहीं, बल्कि दर्जनों बड़ी कंपनियां शिरकत कर रही हैं.बेहतर मानदेय पर रोज़गार के लिए 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी योग्य युवक एवं युवती अपनी भागीदारी दर्ज कर सकते हैं. ज़िला नियोजनालय से मिली जानकारी के अनुसार, जॉब कैंप में हिस्सा लेने के लिए अभ्यर्थियों का NCS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.31 जुलाई को रोजगार मेले का आयोजन जिला नियोजन पदाधिकारी शोभा कुमारी बताती हैं कि जिले के अधिक से अधिक रोजगार इच्छुक युवक-युवतियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें व्यवसायिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए 31 जुलाई को नियोजन मेले का आयोजन किया जा रहा है.मेले में निजी क्षेत्र के दर्जनों नियोजकों को आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें. सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बताते चलें कि इस जॉब कैंप का आयोजन युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, जिला नियोजनालय, पश्चिम चम्पारण द्वारा किया जा रहा है.इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित तारीख पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बेतिया के सरकारी आईटीआई छात्रावास के बगल वाले खुले मैदान में पहुंचना है. दर्जनों कम्पनियांयहां निजी नियोजकों जैसे हरिनगर चीनी मिल, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, फ्रीडम एम्प्लॉयबिलिटी एकेडमी, स्वतंत्र माइक्रो फाइनेंस, LIC ऑफ इंडिया, शिवशक्ति एजीटेक लिमिटेड, उमोजा मार्केटप्लेस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, RSG सेल्स एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड इत्यादि कम्पनियों द्वारा अभ्यर्थियों की योग्यता के अनुसार रोज़गार मुहैया कराई जाएगी. ये कागज़ात हैं अनिवार्य राहत की बात यह है कि इसमें दसवीं से लेकर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट तक के युवा भाग ले सकते हैं.ध्यान रहे कि अभ्यर्थियों को अपने साथ आधार और पैन कार्ड की कॉपी, क्वालिफिकेशनल सर्टिफिकेट्स, पासपोर्ट साइज़ फोटो, एक्सपीरियंस लेटर इत्यादि अनिवार्य रूप से लाना है.जिला नियोजन पदाधिकारी ने जिले के सभी रोजगार इच्छुक युवक-युवतियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में नियोजन मेले में शामिल होकर उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएं. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bettiah,Pashchim Champaran,Bihar Source link

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CJP Protest Bihar | CJP Protest | रूस में बैठा था किशनगंज...

होमताजा खबरदेश रूस में बैठा था बिहार का सदाकत, फिर भी NEET प्रदर्शन में दर्ज हो गई FIR! Last Updated:July 29, 2026, 19:06 IST NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़ी एफआईआर को लेकर बिहार में नया विवाद सामने आया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में किशनगंज का रहने वाला एक युवक दावा कर रहा है कि वह पिछले चार महीने से रूस में है, फिर भी उसका नाम 24 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े केस में दर्ज कर दिया गया. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. सदाकत का दावा कि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम किशनगंज जिले में दर्ज एक एफआईआर में शामिल कर दिया गया. NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोज जनता पार्टी के आह्वान पर हुए जगह-जगह हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को लेकर बिहार में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक दावा कर रहा है कि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम किशनगंज जिले में दर्ज एक एफआईआर में शामिल कर दिया गया. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं और पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है. हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. वहीं पुलिस ने भी अब तक युवक के दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है. ‘चार महीने से रूस में हूं, फिर आरोपी कैसे बन गया?’ युवक ने इस वायरल वीडियो में अपना नाम मोहम्मद सदाकत बताया है. सदाकत का कहना है कि वह किशनगंज जिले के बहादुरगंज नगर पंचायत के वार्ड नंबर-12 का रहने वाला है. उसके मुताबिक, 24 जुलाई को LRP चौक पर NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के मामले में प्रशासन ने उसका नाम एफआईआर में जोड़ दिया है. If Mohammad Sadaqat has been living in Russia for the past four months, then the circumstances under which a case was registered against him deserve a fair and transparent investigation. Source link

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Air India | टाटा एयरलाइंस कैसे बनी एयर इंडिया? JRD ने इन...

होमफोटोदेश टाटा कैसे बनी एयर इंडिया? JRD ने 4 नामों पर कराई थी वोटिंग, दिलचस्‍प है कहानी Last Updated:July 29, 2026, 18:13 IST क्या आप जानते हैं कि ‘एयर इंडिया’ नाम किसी सरकारी फैसले से नहीं, बल्कि एयरलाइन स्‍टाफ की वोटिंग से चुना गया था? 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया रखा गया. इससे पहले कंपनी के स्‍टाफ ने चार नामों में से वोट देकर ‘एयर इंडिया’ को चुना था. जानिए जेआरडी टाटा की पहली उड़ान से लेकर एयर इंडिया के नामकरण, राष्ट्रीयकरण और 69 साल बाद दोबारा टाटा समूह के पास लौटने तक की पूरी दिलचस्प कहानी. 69 साल बाद फिर टाटा के पास लौटी: करीब 69 साल तक सरकारी कंपनी रहने के बाद जनवरी 2022 में एयर इंडिया फिर से टाटा समूह के पास लौट आई. टाटा समूह ने इसे सरकार से खरीद लिया. यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे खास घटनाओं में से एक मानी जाती है. जिस कंपनी की शुरुआत जेआरडी टाटा ने की थी, वही एयर इंडिया कई दशक बाद फिर अपने मूल मालिकों के पास वापस पहुंच गई. (एआई इमेज) सरकार के पास चली गई एयर इंडिया: 1953 में भारत सरकार ने सभी बड़ी एयरलाइनों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया. इसके बाद एयर इंडिया सरकार के नियंत्रण में आ गई. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जिम्मेदारी एयर इंडिया के पास रही, जबकि घरेलू उड़ानों के लिए ‘इंडियन एयरलाइंस’ नाम की अलग सरकारी कंपनी बनाई गई. इस तरह कर्मचारियों द्वारा चुना गया ‘एयर इंडिया’ नाम देश की राष्ट्रीय एयरलाइन की पहचान बन गया. (एआई इमेज) दुनिया तक पहुंची भारत की उड़ान: 1947 में देश आजाद हुआ और उसके बाद भारत को अपनी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन की जरूरत महसूस हुई. 1948 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी और ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ बनाई. 8 जून 1948 को मुंबई से लंदन के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान रवाना हुई. इसके साथ ही एयर इंडिया ने दुनिया के विमानन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी. (एआई इमेज) Add News18 as Preferred Source on Google 29 जुलाई 1946 को मिला नया नाम: वोटिंग के नतीजे के बाद 29 जुलाई 1946 को ‘टाटा एयरलाइंस’ का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘एयर इंडिया’ कर दिया गया. इसी दिन कंपनी को एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में भी रजिस्‍टर्ड किया गया. यह भारतीय विमानन इतिहास का बड़ा पड़ाव था. अब यह सिर्फ टाटा समूह की कंपनी नहीं रही, बल्कि देश की नई पहचान के रूप में आगे बढ़ने लगी. (एआई इमेज) दूसरे दौर में एयर इंडिया बनी विजेता: पहले दौर के बाद सिर्फ दो नामों के बीच दोबारा वोटिंग कराई गई. कर्मचारियों को एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस में से एक नाम चुनना था. इस बार एयर इंडिया को 72 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 58 वोट मिले. इस तरह 14 वोटों से एयर इंडिया जीत गई. कर्मचारियों ने ऐसा नाम चुना, जो पूरे देश की पहचान बन सके. (एआई इमेज) पहले दौर में कांटे की टक्कर: वोटिंग पूरी होने के बाद जब पहले दौर के वोट गिने गए तो मुकाबला काफी दिलचस्प रहा. एयर इंडिया को 64 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 51 वोट मिले. बाकी दोनों नाम काफी पीछे रह गए. इससे साफ हो गया कि असली मुकाबला इन्हीं दो नामों के बीच है. कम अंतर होने की वजह से कर्मचारियों में अंतिम नतीजे को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई. (एआई इमेज) नाम के लिए रखे गए चार विकल्प: कंपनी ने कर्मचारियों के सामने चार नाम रखे. पहला था एयर इंडिया, दूसरा इंडियन एयरलाइंस, तीसरा ट्रांस-इंडियन एयरलाइंस और चौथा पैन-इंडियन एयरलाइंस. सभी कर्मचारियों को अपनी पसंद का नाम चुनने का मौका दिया गया. इन नामों के जरिए ऐसी पहचान बनाने की कोशिश थी, जो पूरे भारत और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सोच को भी दिखा सके. (एआई इमेज) कंपनी के कर्मचारियों से मांगी गई राय: जब नई कंपनी बनाने की तैयारी हुई तो उसके लिए नया नाम चुनने का फैसला किया गया. टाटा समूह चाहता था कि कंपनी सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान बने. इसी वजह से एक अनोखा कदम उठाया गया. कंपनी के कर्मचारियों से वोटिंग कराकर नया नाम चुनने का फैसला लिया गया. उस दौर में किसी बड़ी कंपनी में इस तरह का फैसला सभी को हैरान करने वाला था. (एआई इमेज) दूसरे विश्व युद्ध के बाद बदली सोच: द्वितीय विश्‍व युद्ध शुरू होने के साथ टाटा एयरलाइंस की उड़ानें थम गई थी. एयरलाइंस के सभी प्‍लेंस को सेना के साथ काम करने के लिए भेज दिया गया था. युद्ध खत्‍म होने के बाद पैसेंजर फ्लाइट्स का ऑपरेशन एक बार‍ फिर शुरू हुआ. एयरलाइंस की बढ़ती लोकप्रियता और रिस्‍पांस को देखते हुए कंपनी इसे सिर्फ टाटा संस का डिपार्टमेंट रखने की बजाय एक अलग सार्वजनिक कंपनी बनाने की फैसला ले लिया. (एआई इमेज) टाटा एयरलाइंस से हुई शुरुआत: भारत में हवाई यात्रा की शुरुआत 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने ‘टाटा एयरलाइंस’ के साथ की थी. शुरुआत में इसका काम कराची से मुंबई तक हवाई डाक पहुंचाना था. पहली उड़ान खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी. बाद में कंपनी ने पैंसेजर्स को भी ले जाना शुरू किया. उस समय यह टाटा समूह का ही हिस्सा थी और उसकी पहचान भी टाटा परिवार के नाम से जुड़ी हुई थी. (एआई इमेज) टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया तक का यह सफर कर्मचारियों की वोट, ऐतिहासिक फैसलों और एक राष्ट्रीय पहचान की कहानी है. जानिए कैसे बनी भारत की सबसे पहचानी जाने वाली एयरलाइन. (एआई इमेज) टाटा एयरलाइंस से हुई शुरुआत: भारत में हवाई यात्रा की शुरुआत 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने ‘टाटा एयरलाइंस’ के साथ की थी. शुरुआत में इसका काम कराची से मुंबई तक हवाई डाक पहुंचाना था. पहली उड़ान खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी. बाद में कंपनी ने पैंसेजर्स को भी ले जाना शुरू किया. उस समय यह टाटा समूह का ही हिस्सा थी और उसकी पहचान भी टाटा परिवार के नाम से जुड़ी हुई थी. (एआई इमेज) दूसरे विश्व युद्ध के बाद बदली सोच: द्वितीय विश्‍व युद्ध शुरू होने के साथ टाटा एयरलाइंस की उड़ानें थम गई थी. एयरलाइंस के सभी प्‍लेंस को सेना के साथ

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Rahul Gandhi vs Sambit Patra PC on Anti Paper Leak Bill |...

होमताजा खबरदेश ‘जेब में विक्टिम कार्ड लेकर चलते हैं राहुल गांधी’, BJP के संबित पात्रा का तंज Last Updated:July 29, 2026, 17:18 IST Rahul Gandhi vs Sambit Patra PC: लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन बिल 2026 पास हो गया है. इसके बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है. बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल संसद में खुद को भी इडियट नहीं कह सकते. पात्रा ने अमित शाह के काफिले में 30 गाड़ियों वाले राहुल के दावे को भी झूठा बताया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल हमेशा अपनी जेब में विक्टिम कार्ड लेकर चलते हैं. इसके साथ ही पात्रा ने कांग्रेस के पुराने इतिहास पर भी सवाल उठाए. पेपर लीक बिल पर घमासान तेज, राहुल गांधी और संबित पात्रा की पीसी. (PTI Photos) नई दिल्ली: मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन बिल 2026 पास हो गया है. उससे पहले, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि विपक्ष इस गंभीर मुद्दे पर राजनीति कर रहा है. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी की भाषा और उनके रवैये पर भी सवाल उठाए हैं. बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी के संसद में दिए गए बयानों को लेकर उन्हें बुरी तरह घेरा है. पात्रा ने कहा, ‘संसद के अंदर इडियट जैसे असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद को भी इडियट नहीं कह सकते हैं. पात्रा ने गृह मंत्री अमित शाह के काफिले को लेकर किए गए राहुल के दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद आकर गाड़ियों की गिनती कर लें. पात्रा ने राहुल के संसद में माइक बंद होने वाले दावे का भी जमकर मजाक उड़ाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमेशा अपनी जेब में विक्टिम कार्ड लेकर चलते हैं और झूठी सहानुभूति बटोरने की कोशिश करते हैं. संबित पात्रा ने राहुल गांधी को याद दिलाया इतिहास संबित पात्रा ने राहुल गांधी के उस दावे को पूरी तरह झूठा बताया जिसमें उन्होंने अमित शाह के काफिले में 30 गाड़ियां होने की बात कही थी. पात्रा ने राहुल को खुली चुनौती दी कि वह खुद आकर दिखाएं कि 30 गाड़ियां कहां थीं. पात्रा ने कहा, ‘जो व्यक्ति संसद में पांच मिनट शांति से नहीं बैठ सकता, वह बाहर खड़े होकर गाड़ियां कैसे गिन सकता है’. पात्रा ने साफ किया कि राहुल गांधी सिर्फ हवा-हवाई बातें करते हैं और सच्चाई से उनका कोई लेना-देना नहीं है. संसद में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि बोलते समय उनका माइक बंद कर दिया जाता है. संबित पात्रा ने इस दावे की भी पोल खोल दी. पात्रा ने बताया कि जब राहुल गांधी यह आरोप लगा रहे थे तब उनके माइक की रेड लाइट ऑन थी. रेड लाइट ऑन होने का सीधा मतलब है कि माइक पूरी तरह काम कर रहा था. पात्रा ने सवाल उठाया कि फिर माइक कैसे बंद हो सकता है. पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी की आदत हमेशा अपनी जेब में विक्टिम कार्ड रखने की हो गई है. संबित पात्रा ने सिर्फ मौजूदा विवादों पर ही नहीं बल्कि कांग्रेस के पुराने इतिहास पर भी करारा प्रहार किया. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस के समय जम्मू-कश्मीर और असम में लोगों पर गोलियां चलाई गई थीं. पात्रा ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के 800 से ज्यादा छात्रों की हत्या का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से नियमों को ताक पर रखकर काम करती आई है. संसद में बार-बार चेतावनी के बाद भी उनके नेता असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने से बाज नहीं आ रहे हैं. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए? केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने युवाओं को ‘मूर्ख’ कहा है. देश के भविष्य के लिए यह बात बेहद निराशाजनक है. उन्होंने 21 जुलाई की घटना का भी जिक्र किया. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर बैठ गए थे. विपक्ष सदन में गलत जानकारी दे रहा है. वहां कोई गोली नहीं चली थी बल्कि सिर्फ आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ था. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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सुल्तानपुर का 300 साल पुराना नागेश्वर धाम मंदिर, दर्शन से विवाह की...

Last Updated:July 29, 2026, 16:16 IST सुल्तानपुर में 300 साल पुराना नागेश्वर धाम मंदिर, सावन में श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है. यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, खासकर विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं. सुल्तानपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है, यह मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं के जलाभिषेक का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र होता है. अगर आप सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ के किसी मंदिर में जल चढ़ाने की सोच रहे हैं और आपको सुल्तानपुर आना है तो यह मंदिर आपके मनोकामनाओं को पूरा कर सकता है. सुल्तानपुरः भारत प्राचीन काल सही धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं वाला देश रहा है. यहां पर कई ऐसे धार्मिक स्थल है, जहां पर लोगों की गहरी आस्था जुडी हुई है. इस तरह एक भगवान शंकर का मंदिर यूपी के सुल्तानपुर जिले में भी है. जो सुल्तानपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है, यह मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं के जलाभिषेक का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र होता है. अगर आप सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ के किसी मंदिर में जल चढ़ाने की सोच रहे हैं और आपको सुल्तानपुर आना है तो यह मंदिर आपके मनोकामनाओं को पूरा कर सकता है. 300 वर्ष पुराना है मंदिर ग्रामीण राजेश कुमार तिवारी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि नागेश्वर धाम मंदिर का इतिहास करीब 300 वर्ष पुराना माना जाता है. उनके अनुसार यह मंदिर उनके दादा-परदादाओं के समय से इसी स्वरूप में स्थापित है. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य सुनी जाती है. कई श्रद्धालुओं का अनुभव है कि विवाह में आ रही बाधाएं भी बाबा नागेश्वरनाथ के दर्शन और मन्नत मांगने के बाद दूर हो गईं और उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं. जिसकी शादी नहीं होती है वह मांगते हैं मन्नत यह मंदिर सुल्तानपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर समरथपुर गांव में स्थित है. जिसे नागेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर के पुजारी इंद्र देव आचार्य लोकल 18 से बताते हैं कि इस मंदिर की यह मान्यता है कि यहां पर जिन लोगों की शादी नहीं हो पाती वह लोग अगर मन्नत मिलते हैं तो भगवान नागेश्वर उनकी मन्नत को पूरा करते हैं अभी तक कई ऐसे लोगों का विवाह यहां की मन्नत मांगने के बाद हो चुका है. अगर आप भी इस मंदिर तक पहुंचाना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर धनपतगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव समरथपुर होगा. यहां पर आपको यह मंदिर एक भव्य तालाब के किनारे मिल जाएगा. यहां पर कई ऐसे पेड़ हैं जो इस मंदिर को और प्राकृतिक बनाते हैं और यहां का वातावरण भी काफी पॉजिटिव रहता है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 … और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh Source link

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गोमूत्र विशेषज्ञ, अंधभक्त… प्रियंका-राहुल गांधी ने तोड़ी मर्यादा, सदन को किस राह...

होमताजा खबरदेश गोमूत्र विशेषज्ञ, अंधभक्त… प्रियंका-राहुल ने तोड़ी मर्यादा, किस राह पर सदन? Last Updated:July 29, 2026, 15:12 IST Rahul Priyanka Speech On Paper Leak Bill: पेपर लीक विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के बयानों पर जमकर हंगामा हुआ. सत्ता पक्ष ने विरोध जताया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई. लेकिन, सवाल यह है कि दोनों भाई-बहन असंसदीय भाषा का इस्तेमाल कर आखिर क्या हासिल करना चाहते हैं. लोकसभा में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के भाषणों पर जमकर हंगामा हुआ. Rahul Priyanka Speech On Paper Leak Bill: पेपर लीक के खिलाफ पेश विधेयक पर लोकसभा में मंगलवार से चर्चा चल रही है. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने अपनी-अपनी बातें रखीं. लेकिन चर्चा का केंद्र विधेयक से ज्यादा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण बन गए. मंगलवार को प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे प्रह्लाद जोशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया. इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई. अगले दिन राहुल गांधी ने बहस में हिस्सा लेते हुए सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए. अपने भाषण के दौरान उन्होंने अंधभक्त शब्द का इस्तेमाल किया. इसके अलावा उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलाने का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री ने दिया था. इन बयानों के बाद सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों पर खड़े हो गए और सदन में फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला. दरअसल, लोकतंत्र में सरकार की आलोचना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है. विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना, उसकी नीतियों की समीक्षा करना और जनता की आवाज उठाना है. लेकिन संसद केवल राजनीतिक मंच नहीं है. यह देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जहां शब्दों का चयन और बहस का स्तर दोनों ही लोकतांत्रिक परंपराओं को तय करते हैं. यही वजह है कि संसद में इस्तेमाल होने वाली भाषा हमेशा चर्चा का विषय बनती है. व्यक्तिगत टिप्पणियां, व्यंग्यात्मक संबोधन या ऐसे शब्द, जो बहस को मुद्दे से भटका दें, अक्सर पूरे विमर्श को प्रभावित करते हैं. नतीजा यह होता है कि जिस विधेयक पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, उससे ध्यान हटकर नेताओं के बयान सुर्खियां बन जाते हैं. संसदीय परंपरा इस पूरे घटनाक्रम में एक और बात ध्यान देने वाली रही. लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से आग्रह किया कि वे विधेयक के प्रावधानों पर अपनी बात रखें और चर्चा को उसी दायरे में रखें. संसदीय परंपरा भी यही कहती है कि बहस का केंद्र विधेयक, उसके प्रावधान और उसके संभावित प्रभाव होने चाहिए. लेकिन जब चर्चा का बड़ा हिस्सा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप या व्यक्तिगत टिप्पणियों में बीत जाता है, तो मूल उद्देश्य पीछे छूट जाता है. पेपर लीक जैसे मुद्दे का सीधा संबंध देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं से है. प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे सवाल इस विधेयक के केंद्र में हैं. स्वाभाविक रूप से जनता भी यही उम्मीद करती है कि संसद में इन मुद्दों पर गंभीर और तथ्य आधारित बहस हो. यह अपेक्षा केवल विपक्ष से ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष से भी समान रूप से है. संसदीय लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि असहमति कितनी सभ्य भाषा में व्यक्त की जाती है. तीखी आलोचना और कठोर सवाल लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत हमले और उत्तेजक शब्दावली बहस की गुणवत्ता को कमजोर कर सकते हैं. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में हैं. उनके हर शब्द को राजनीतिक महत्व मिलता है और उनके भाषणों पर पूरे देश की नजर रहती है. ऐसे में उनसे यह अपेक्षा भी अधिक होती है कि वे अपनी बात तथ्यों, तर्कों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप रखें. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Rahul Gandhi Speech | ‘गृहमंत्री ने पैलेट गन चलाने की अनुमित दी’;...

Rahul Gandhi Speech on Paper Leak: पेपर लीक बिल पर लोकसभा में राहुल गांधी ने आज यानी बुधवार को सरकार को घेरा. राहुल गांधी ने सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान फायरिंग का भी मुद्दा उठाया. इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान फायरिंग का आदेश गृह मंत्री ने दिया था. उनके आरोप के मुताबिक, गृहमंत्री डरे हैं. उन्होंने गोली चलाने की अनुमति दी. उन्होंने ही पैलेट गन चलाने की अनुमित दी. राहुल गांधी के इस बयान के बाद लोकसभा में खूब हंगामा हुआ. किरेन रिजिजू ने राहुल के आरोपों पर आपत्ति जताई और माफी की मांग की. साथ ही किरेन रिजिजू ने गृह मंत्री का आदेश दिखाने का चैलेंज दिया. दरअसल, संसद का मानसून सत्र चल रहा है. लोकसभा में आज यानी बुधवार को पेपर लीक बिल पर बहस हो रही है. आज 12.30 बजे राहुल गांधी ने लोकसभा में बहस में हिस्सा लिया. उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के हक में आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि सरकार से छात्रों की नाराजगी की थी. छात्रों में गुस्सा था. इसके बाद उन्होंने इडियट और अंधभक्त वाला बयान दिया. इस बयान पर इतना हंगामा हुआ कि इसे लोकसभा स्पीकर ने संसदीय कार्यवाही से ही इन शब्दों को ही हटा दिया. इसके बाद फिर राहुल गांधी बोलने उठे. अबकी बार उन्होंने सीधे अमित शाह के ऊपर आरोप लगा दिया. जिसके बाद तो हंगामा और अधिक बरप गया. अमित शाह का नाम लेकर राहुल गांधी ने लगाया आरोप राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा, ‘छात्र अपने डर से बाहर आए. उन्होंने सवाल पूछे. इस देश के कथित गृह मंत्री में सदन में आकर बैठने का साहस नहीं है. मैंने गृह मंत्री की भागती हुई कार देखी है. वह कांप रहे थे. गृह मंत्री नहीं है यहां (सदन में), क्योंकि वो डरे हुए हैं.’ राहुल गांधी ने बड़ा आरोप लगाते हुए आगे कहा, ‘गृह मंत्री डरे हैं. उन्होंने गोली चलाने की अनुमति दी. पैलेट गन चलाने की अनुमित दी.’ राहुल गांधी के इतना कहते ही हंगामा हो गया. किरेन रिजिजू ने उनके इस आरोप पर आपत्ति जताई. किरेन रिजिजू ने ऑर्डर वाला सबूत दिखाने को कहा संसदीय कार्यतमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, ‘आप ऐसे कैसे बोल सकते है. ये ठीक नहीं है. किस आधार पर आपने बोला है. किसने बताया है आपको? आप होम मिनिस्टर का ऑर्डर दिखाइए. राहुल गांधी का यह बयान संसद की कार्यवाही से निकलना चाहिए.’ इतना ही नहीं, किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी माफी की मांग की. उन्होंने कहा कि जब तक राहुल गांधी माफी नहीं मांगेंगे तब तक यह कार्यवाही नहीं चल सकती. किरने रिजिजू ने कहा, ‘राहुल गांधी यह कैसे कह सकते हैं कि गृह मंत्री ने गोली चलाने का ऑर्डर दिया.’ इस बीच कांग्रेस के सांसद नारा लगाते दिखे कि राहुल गांधी को बोलने दो. वहीं, सत्ता पक्ष राहुल गांधी से माफी की मांग करता दिखा. अखिलेश यादव बीच में क्यों कूदे? इस बीच अखिलेश यादव ने बीच-बचाव किया. उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष ने कोई गंभीर आरोप लगाया तो सरकार बता दे कि आखिर किसके ऑर्डर पर छात्रों पर फायरिंग हुई.’ इसके बाद किरेन रिजिजू ने अखिलेश से मुखातिब होते हुए कहा, ‘आप जो कह रहे हैं, वो अलग बात है. राहुल गांधी ने झूठा आरोप लगाए हैं. राहुल जी आप माफी मांग लीजिए.’ लोकसभा स्पीकर ने भी राहुल को हिदायत दी इस बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा, आप नाम नहीं ले सकते किसी का कि उन्होंने किया है, आप जांच की मांग कर सकते है. इस बीच किरेन रिजिजू ने टोका और कहा कि क्या मैं ऐसा बोल सकता हूं कि राहुल गांधी ने किसी का मर्डर किया? आप माफी मांगेंगे तो सदन चलेगा… ऐसा नहीं चलेगा. आखिर क्यों बोला ऐसा आपने, आप बताओ.’ स्पीकर ने कहा कि गृह मंत्री को लेकर राहुल की शब्द कार्यवाही में नहीं जाएगी. Source link

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शादी का खुला राज तो गर्लफ्रेंड की हत्या कर 350 किमी दूर...

Last Updated:July 29, 2026, 13:07 IST कोल्हापुर के एक गांव का एक सरपंच गर्लफ्रेंड की हत्या कर लाश को 350 किमी दूर भिवंडी लेकर आ गया. सरपंच पहले से शादीशुदा था ऐसे में प्रेम‍िका को रास्‍ते से हटाने के ल‍िए उसने हत्‍या कर दी. फ‍िलहाल पुल‍िस ने उसे ग‍िरफ्तार कर ल‍िया है. शादी का खुला राज तो गर्लफ्रेंड की हत्या कर 350 किमी दूर लाया लाश, अब जेल की चक्की पीसेगा सरपंच महाराष्ट्र के कोल्हापुर से दिल दहला देने वाला मामला सामने आ रहा है. यहां एक गांव के सरपंच ने अपनी अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या कर दी. फिर हत्या के राज को छुपाने के लिए वह लाश को 350 किलोमीटर दूर तक लेकर आया. हालांकि उसकी पहचान हो गई और पुलिस ने उसे दबोच लिया. जानकारी के मुताबिक आरोपी सरपंच शादीशुदा था और गर्लफ्रेंड से रिश्ता रखने के साथ ही उसे राज रखना चाहता था. लिहाजा उसने गर्लफ्रेंड को ही रास्ते से हटाने की योजना बना ली और उसकी हत्या कर दी. हत्या के बाद गर्लफ्रेंड की लाश को छुपाने के लिए जब उसे कोई सही जगह नहीं मिली तो वह उसे कार में डालकर 350 किलोमीटर दूर चला आया. आरोपी ने पीड़ित की लाश को कार से कोल्हापुर से चला कर भिवंडी तक ले आया, हालांकि यहां उसका पर्दाफाश हो गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and … और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mumbai,Maharashtra Source link

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Working Husband wife dispute | bombay high court | बॉम्बे हाईकोर्ट बोला...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने देशभर के उन पतियों को बड़ी राहत दी है, जिनकी पत्नियां कमा रही हैं लेकिन घर और बच्चों पर पैसा खर्च करने में आनाकानी करती हैं. जस्टिस एमएम सताये की एकल पीठ ने एक पति की याचिका पर यह आदेश दिया. बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि समानता का दावा सिर्फ अपनी सुविधा के हिसाब से नहीं किया जा सकता. जब पति और पत्नी दोनों कमा रहे हों, तो घर चलाने की जिम्मेदारी दोनों की है. दोनों पति-पत्नी को घर में खर्च करने से लेकर बच्चे की शिक्षा का खर्च मिलकर उठाना चाहिए. जस्टिस सताये की एकल पीठ ने फैमिली कोर्ट के जनवरी 2025 में दिए गए एक आदेश को रद्द करते हुए यह बात कही.साथ ही पति की याचिका पर राहत देते हुए पत्नी और नाबालिग बेटे को दी जा रही मेंटेनेंस की रकम भी आधी कर दी. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक फैमिली कोर्ट ने दंपत्ति के मामले की सुनवाई के बाद पति को आदेश दिया था कि वह पत्नी और नाबालिग बेटे को हर महीने 50 हजार रुपये मेंटेनेंस खर्च दे. जिसको पति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी. इस दौरान उसने अपनी परेशानी बताई और इस खर्च को घटाने की मांग की. जिस पर सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मेंटेनेंस को 25 हजार रुपये कर दिया. हाईकोर्ट ने पाया कि पति दो घरों की ईएमआई भर रहा है. एक अंधेरी (मुंबई) का, जहां पत्नी और बेटा रह रहे हैं, और दूसरा पनवेल (नवी मुंबई) का. जबकि खुद पति बिहार में रहकर नौकरी कर रहा है. पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी कमाती है लेकिन ईएमआई में कोई योगदान नहीं देती. पति ने हाईकोर्ट में बताया कि उसने पत्नी से कहा था कि उसके साथ बिहार आकर रहे या कम से कम पनवेल वाले घर में शिफ्ट हो जाए ताकि अंधेरी का घर बेचर आर्थिक बोझ घटाया जा सके, लेकिन पत्नी ने साफ मना कर दिया. ऐसे में पति ने भारी खर्च को देखते हुए मेंटेनेंस 50 हजार से घटाकर 25 हजार करने की मांग की थी. अदालत ने कहा कि पति की इन मांगों में कोई गलती नहीं है. अगर पत्नी अंधेरी जैसे महंगे इलाके में बिना ईएमआई दिए या अपनी जेब से योगदान दिए रहना चाहती है, तो पति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पूरा ईएमआई भरते हुए भी मेंटेनेंस कम करने की बात न करे. पीठ ने साफ कहा, “समानता का दावा चुनिंदा तरीके से नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब दोनों पक्ष कमा रहे हों. अगर जीवनशैली बनाए रखनी है, तो दोनों को अपना-अपना योगदान देना होगा.” कोर्ट ने यह भी कहा कि जब पति-पत्नी दोनों कमा रहे हों और बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलवाना चाहते हों, तो खर्च दोनों को मिलकर उठाना चाहिए. Source link

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मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ वारंट जारी, कोर्ट में पेश होने का आदेश,...

होमताजा खबरदेश मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ वारंट जारी, कोर्ट में पेश होने का आदेश क्यों हुआ? Last Updated:July 29, 2026, 11:12 IST Mallikarjun Kharge News: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ पंजाब के संगरूर की अदालत ने 15,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया है. अदालत ने उन्हें 19 सितंबर 2026 तक पेश होने का निर्देश दिया है. यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बजरंग दल की तुलना PFI से करने वाली कथित टिप्पणी से जुड़ा है. अदालत ने कहा है कि तय तारीख पर पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जा सकता है. Kharge Mallikarjun Kharge News: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मुसीबत बढ़ गई है. मल्लिकार्जुन खरगे (मल्लिकार्जुन खड़गे) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है. पंजाब में संगरूर की अदालत ने मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. उन्हें 19 सितंबर तक पेश होने को कहा गया है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ जारी यह वारंट जमानती है. हालांकि, उन्हें अदालत में पेश होकर जमानत लेनी होगी. बता दें कि कर्नाटक चुनाव के दौरान बजरंग दल की तुलना पीएफआई से करने पर मल्लिकार्जुन खरगे की मुसीबत बढ़ी है. दरअसल, यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर बजरंग दल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित संगठन PFI से की थी. तब कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा देगी. इस मामले में अब अदालती कार्यवाही चल रही है. मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अदालत इस मामले में अगला कदम उठा रही है. संगरूर की अदालत के फैसले के मुताबिक, अदालत ने मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ 15,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया है. अगर 19 सितंबर 2026 को मल्लिकार्जुन खरगे अदालत में पेश नहीं होते हैं तो फिर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा. About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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