Mumbai Local Train News: मुंबई में लोकट ट्रेन अटकने से हाहाकार, ट्रेनें...
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा में सोमवार को आई बड़ी तकनीकी खामी तीन लोगों की मौत का कारण बन गई. दरअसल यहां कांजुरमार्ग स्टेशन के पास सिग्नलिंग रूम में आग लगने और ओवरहेड वायर से जुड़ी तकनीकी परेशानी के कारण लोकल ट्रेनों की आवाजाही घंटों तक प्रभावित रही. ट्रेनें रुकने से परेशान कई यात्री पटरियों पर उतरकर पैदल अगले स्टेशन की ओर चलने लगे. इसी बीच मुंबई में रेलवे ट्रैक पर तीन लोगों की मौत की खबर सामने आई. इनमें से दो लोग घाटकोपर-विक्रोली रूट पर मृत पाए गए, जबकि भांडुप में एक कॉलेज छात्र की एसी लोकल ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई. मध्य रेलवे ने पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए हैं. दरअसल सोमवार सुबह करीब 9:30 से 10 बजे के बीच कांजुरमार्ग स्टेशन के पास सिग्नलिंग व्यवस्था में गंभीर खराबी सामने आई. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग रूम में आग लगने से सिग्नल बंद पड़ गए. इसके चलते कांजुरमार्ग और आसपास के ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही रुक गई. इससे पहले सुबह 9:23 बजे मुलुंड और ठाणे के बीच डाउन स्लो लाइन पर ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) से एक तार लटकता हुआ पाया गया था. इस समस्या को ठीक करने के लिए सुबह करीब 10 बजे ओवरहेड उपकरणों से जुड़ा ब्लॉक लिया गया था. इस खराबी को लगभग एक घंटे की कोशिश के बाद दूर कर लिया गया, लेकिन इसी दौरान कांजुरमार्ग में सिग्नलिंग फेल होने से संकट और बढ़ गया. अप-डाउन, स्लो-फास्ट लाइन… सबपर असर सिग्नलिंग सिस्टम ठप होने के कारण अप और डाउन दोनों दिशाओं की धीमी और तेज रफ्तार वाली लोकल सेवाएं प्रभावित हुईं. कुछ स्थानों पर ट्रेनें एक घंटे से ज्यादा समय तक पटरियों पर खड़ी रहीं. मध्य रेलवे की मुख्य लाइन पर मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से ठाणे, कल्याण और आगे के इलाकों की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कांजुरमार्ग से भांडुप के बीच पांचवीं और छठी लाइन सहित कुल छह लाइनों पर करीब 24 सिग्नल प्रभावित हुए. पांचवीं और छठी लाइन का इस्तेमाल लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन के लिए भी किया जाता है. सिग्नलिंग व्यवस्था प्रभावित होने के बाद रेलवे ने ट्रेनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाई. विखरोली और भांडुप के बीच डाउन लोकल और फास्ट लाइन तथा अप स्लो और फास्ट लाइन पर विशेष परिचालन व्यवस्था लागू की गई. कुछ ट्रेनों को विशेष अनुमति के तहत चलाया गया, ताकि सेवाओं को पूरी तरह बंद रखने के बजाय सीमित परिचालन जारी रखा जा सके. ट्रेनें रुकीं तो पटरियों पर उतरने लगे यात्री सोमवार सुबह दफ्तर जाने के लिए भारी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर पहुंचे. हालांकि लंबे समय तक ट्रेनें आगे नहीं बढ़ने और हालात की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई. कुछ यात्रियों ने दावा किया कि ट्रेनों के अंदर या स्ट्रेशनों पर आगे की स्थिति को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि ट्रेन कब चलेगी. ऐसे में काफी देर तक इंतजार करने के बाद कई यात्री ट्रेन से उतरकर पटरियों पर पैदल चलने लगे. इससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई. रेलवे प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे ट्रेन से उतरकर पटरियों पर न चलें, क्योंकि इससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है. एसी लोकल की चपेट में आकर कॉलेज छात्र की मौत ट्रेनों की आवाजाही बाधित रहने के बीच भांडुप स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म नंबर 3 के पास रेलवे ट्रैक पार कर रहे एक कॉलेज छात्र को मुंबई से ठाणे होते हुए कल्याण की दिशा में जा रही एसी लोकल ने टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक ट्रेन के साथ करीब 15 से 20 फीट तक घिसटता चला गया. इस दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई. वहीं एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, घाटकोपर-विखरोली रेलखंड पर भी दो लोग मृत पाए गए हैं. मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला के मुताबिक, डाउन फास्ट लाइन को शाम 4:10 बजे ट्रेनों का परिचालन सुचारू रूप से बहाल कर दिया गया. इसके बाद अप फास्ट लाइन शाम 4:46 बजे, डाउन स्लो लाइन शाम 5:30 बजे और अप स्लो लाइन शाम 6:18 बजे बहाल कर दी गई. रेलवे ने दिए जांच के आदेश मध्य रेलवे ने इस गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग रूम में आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच मरम्मत का काम पूरा होने के बाद की जाएगी. फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सिग्नलिंग व्यवस्था किस तरह प्रभावित हुई और सेवाओं को बहाल करने में इतना समय क्यों लगा. इस बीच रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेन रुकने की स्थिति में पटरियों पर उतरने के बजाय रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें. तकनीकी खराबी के कारणों और पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सिग्नलिंग व्यवस्था में गड़बड़ी किस वजह से हुई. Source link