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Mumbai Local Train News: मुंबई में लोकट ट्रेन अटकने से हाहाकार, ट्रेनें...

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा में सोमवार को आई बड़ी तकनीकी खामी तीन लोगों की मौत का कारण बन गई. दरअसल यहां कांजुरमार्ग स्टेशन के पास सिग्नलिंग रूम में आग लगने और ओवरहेड वायर से जुड़ी तकनीकी परेशानी के कारण लोकल ट्रेनों की आवाजाही घंटों तक प्रभावित रही. ट्रेनें रुकने से परेशान कई यात्री पटरियों पर उतरकर पैदल अगले स्टेशन की ओर चलने लगे. इसी बीच मुंबई में रेलवे ट्रैक पर तीन लोगों की मौत की खबर सामने आई. इनमें से दो लोग घाटकोपर-विक्रोली रूट पर मृत पाए गए, जबकि भांडुप में एक कॉलेज छात्र की एसी लोकल ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई. मध्य रेलवे ने पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए हैं. दरअसल सोमवार सुबह करीब 9:30 से 10 बजे के बीच कांजुरमार्ग स्टेशन के पास सिग्नलिंग व्यवस्था में गंभीर खराबी सामने आई. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग रूम में आग लगने से सिग्नल बंद पड़ गए. इसके चलते कांजुरमार्ग और आसपास के ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही रुक गई. इससे पहले सुबह 9:23 बजे मुलुंड और ठाणे के बीच डाउन स्लो लाइन पर ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) से एक तार लटकता हुआ पाया गया था. इस समस्या को ठीक करने के लिए सुबह करीब 10 बजे ओवरहेड उपकरणों से जुड़ा ब्लॉक लिया गया था. इस खराबी को लगभग एक घंटे की कोशिश के बाद दूर कर लिया गया, लेकिन इसी दौरान कांजुरमार्ग में सिग्नलिंग फेल होने से संकट और बढ़ गया. अप-डाउन, स्लो-फास्ट लाइन… सबपर असर सिग्नलिंग सिस्टम ठप होने के कारण अप और डाउन दोनों दिशाओं की धीमी और तेज रफ्तार वाली लोकल सेवाएं प्रभावित हुईं. कुछ स्थानों पर ट्रेनें एक घंटे से ज्यादा समय तक पटरियों पर खड़ी रहीं. मध्य रेलवे की मुख्य लाइन पर मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से ठाणे, कल्याण और आगे के इलाकों की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कांजुरमार्ग से भांडुप के बीच पांचवीं और छठी लाइन सहित कुल छह लाइनों पर करीब 24 सिग्नल प्रभावित हुए. पांचवीं और छठी लाइन का इस्तेमाल लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन के लिए भी किया जाता है. सिग्नलिंग व्यवस्था प्रभावित होने के बाद रेलवे ने ट्रेनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाई. विखरोली और भांडुप के बीच डाउन लोकल और फास्ट लाइन तथा अप स्लो और फास्ट लाइन पर विशेष परिचालन व्यवस्था लागू की गई. कुछ ट्रेनों को विशेष अनुमति के तहत चलाया गया, ताकि सेवाओं को पूरी तरह बंद रखने के बजाय सीमित परिचालन जारी रखा जा सके. ट्रेनें रुकीं तो पटरियों पर उतरने लगे यात्री सोमवार सुबह दफ्तर जाने के लिए भारी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर पहुंचे. हालांकि लंबे समय तक ट्रेनें आगे नहीं बढ़ने और हालात की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई. कुछ यात्रियों ने दावा किया कि ट्रेनों के अंदर या स्ट्रेशनों पर आगे की स्थिति को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि ट्रेन कब चलेगी. ऐसे में काफी देर तक इंतजार करने के बाद कई यात्री ट्रेन से उतरकर पटरियों पर पैदल चलने लगे. इससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई. रेलवे प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे ट्रेन से उतरकर पटरियों पर न चलें, क्योंकि इससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है. एसी लोकल की चपेट में आकर कॉलेज छात्र की मौत ट्रेनों की आवाजाही बाधित रहने के बीच भांडुप स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म नंबर 3 के पास रेलवे ट्रैक पार कर रहे एक कॉलेज छात्र को मुंबई से ठाणे होते हुए कल्याण की दिशा में जा रही एसी लोकल ने टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक ट्रेन के साथ करीब 15 से 20 फीट तक घिसटता चला गया. इस दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई. वहीं एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, घाटकोपर-विखरोली रेलखंड पर भी दो लोग मृत पाए गए हैं. मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला के मुताबिक, डाउन फास्ट लाइन को शाम 4:10 बजे ट्रेनों का परिचालन सुचारू रूप से बहाल कर दिया गया. इसके बाद अप फास्ट लाइन शाम 4:46 बजे, डाउन स्लो लाइन शाम 5:30 बजे और अप स्लो लाइन शाम 6:18 बजे बहाल कर दी गई. रेलवे ने दिए जांच के आदेश मध्य रेलवे ने इस गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग रूम में आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच मरम्मत का काम पूरा होने के बाद की जाएगी. फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सिग्नलिंग व्यवस्था किस तरह प्रभावित हुई और सेवाओं को बहाल करने में इतना समय क्यों लगा. इस बीच रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेन रुकने की स्थिति में पटरियों पर उतरने के बजाय रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें. तकनीकी खराबी के कारणों और पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सिग्नलिंग व्यवस्था में गड़बड़ी किस वजह से हुई. Source link

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Guwahati Hotel shooting : गुवाहाटी के होटल में अंधाधुंध फायरिंग, 4 लोगों...

होमताजा खबरदेश गुवाहाटी के होटल में अंधाधुंध फायरिंग, 4 लोगों की मौत, मौके पर पुलिस कमिश्नर Last Updated:October 26, 2026, 22:24 IST असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित होटल बिलास इन में सोमवार शाम अंधाधुंध गोलीबारी की घटना में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं. मृतकों में दो महिलाएं भी शामिल बताई जा रही हैं. गोलीबारी की खबर मिलते ही पुलिस कमिश्नर पर मौके पर पहुंचे गए हैं. ख़बरें फटाफट होटल बिलास इन में हुई अंधाधुंध गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई. असम के गुवाहाटी से बड़ी खबर आ रही है. शहर के एक होटल बिलास इन में गोलीबारी की खबर है, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं. यह घटना सोमवार 26 अक्टूबर की रात 9 बजे हुई. गोलीबारी की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और आरोपियों की तलाश कर रही है. मृतकों की पहचान भी अभी तक नहीं हो सकी है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मृतकों में दो महिलाओं भी शामिल बताई जा रही हैं. मौके पर पहुंचे पुलिस कमिश्नर, आरोपियों की तलाश जारी घटना की सूचना मिलते ही गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर पार्थ सारथी महंत घटनास्थल पर पहुंचे. घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कई एंबुलेंस भी मौके पर भेजी गईं. पुलिस ने घटनास्थल पर जांच शुरू कर दी है और गोलीबारी के पीछे की वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. पुलिस कमिश्नर पार्थ सारथी महंत ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. अब तक चार शव बरामद किए गए हैं. पुलिस जल्द ही आरोपियों को पकड़ लेगी.’ फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि होटल में गोलीबारी किस वजह से हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे. पुलिस आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रही है. घटना में घायल लोगों की सही संख्या, उनकी स्थिति और मृतकों की पहचान को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है. पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की उम्मीद है. यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… About the Author साद बिन उमर साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं. कहां से … और पढ़ें Location : Guwahati,Kamrup Metropolitan,Assam First Published : October 26, 2026, 22:09 IST Source link

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फॉर्म 6 नहीं बदला, SIR पर भी सर्वसम्मति से आदेश; ज्ञानेश कुमार...

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिका पर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने याचिका को एक न्यूज रिपोर्ट पर आधारित बताते हुए कहा कि इसमें लगाए गए आरोपों का आधार सीमित है. आयोग के मुताबिक, हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है. चुनाव आयोग का यह जवाब ऐसे समय आया है, जब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबर के बाद विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में SIR के मुद्दे पर आयोग के भीतर कथित मतभेदों का जिक्र किया गया था. इस मामले पर कल ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. SIR के तीनों आदेशों पर सर्वसम्मति का दावा चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए SIR से जुड़े तीनों आदेश आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए फैसले थे. आयोग ने यह भी साफ किया कि किसी फाइल पर विचार के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों की ओर से लिखे गए नोट, सवाल या सुझाव को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए. चुनाव आयोग के मुताबिक, सामान्य प्रक्रिया में किसी फाइल की जांच पहले एक चुनाव आयुक्त और फिर दूसरे चुनाव आयुक्त करते हैं. इसके बाद फाइल मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने रखी जाती है. रूरी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जाती है और उसे बाद में फाइल पर दर्ज किया जाता है. आयोग ने चेतावनी दी कि अगर कोई अधिकारी अपने निर्धारित अधिकारों से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. Form 6 में बदलाव नहीं, SIR घोषणा अलग दस्तावेज Form 6 और SIR प्रक्रिया को लेकर आयोग ने कहा कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. आयोग के अनुसार, इसमें बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और SIR के लिए इस्तेमाल की जा रही घोषणा एक अलग दस्तावेज है. हालांकि, आयोग ने यह स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में दस्तावेजों को जिस तरह प्रदर्शित किया जा रहा था, उससे यह भ्रम पैदा हो सकता था कि Form 6 में बदलाव किया गया है. इस समस्या को दूर करने के लिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को Form 6 और घोषणा-पत्र के दो अलग हिस्सों में बांटने की बात कही गई, ताकि यह व्यवस्था कागजी फॉर्म के अनुरूप हो सके. SIR में मैपिंग नहीं होने पर हर मतदाता को पेश नहीं होना होगा चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है, उनके संबंध में आयोग ने कहा कि ऐसे सभी मतदाताओं को अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं होना पड़ेगा. आयोग के मुताबिक, बूथ लेवल अधिकारी (BLO) संबंधित मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर सकते हैं. व्यक्तिगत सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और जहां संभव हो, उसे ऑनलाइन आयोजित करने को प्राथमिकता दी जाएगी. ECINet पर भी आयोग ने दी सफाई ECINet प्लेटफॉर्म को लेकर आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने या हटाने के लिए निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) का आदेश जरूरी है. आयोग के अनुसार, ERO के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम न तो जोड़ा जा सकता है और न ही हटाया जा सकता है. आयोग ने यह भी बताया कि ECINet की व्यवस्था के अनुपालन की जांच के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई है. गोवा के 97 मतदाताओं को लेकर क्या कहा? गोवा के आंकड़ों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि जिन 97 मतदाताओं के नाम कथित तौर पर छूट जाने की बात कही गई थी, उनमें से 88 का नाम पहले ही मतदाता सूची में दर्ज किया जा चुका था. आयोग के मुताबिक, छह मतदाता विदेश में थे, जबकि तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे. पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों पर आयोग ने कहा कि ये मामले पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में दायर किए थे. आयोग ने हलफनामे में कहा कि इन मामलों को उसके सामने नहीं लाया गया था. ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर आयोग की दलील चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिका की विचारणीयता पर भी सवाल उठाया. आयोग का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है. आयोग ने यह भी कहा कि उसने किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया के साथ साझा नहीं किया और न ही उसे जारी करने की अनुमति दी. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को चुनौती देने वाली याचिकाओं का उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस तरह की चुनौतियों को खारिज कर चुका है. दशहरे की छुट्टियों का हवाला देते हुए आयोग ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है. उसने सुप्रीम कोर्ट से विस्तृत और प्रत्येक बिंदु का अलग-अलग जवाब देने वाला हलफनामा दाखिल करने की इजाजत भी मांगी है. अब इस मामले में कल होने वाली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम होगा. Source link

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CJI SuryaKant SIR Case News: 30000000 नाम कटे, फॉर्म-6 पर सवाल… सुप्रीम...

Last Updated:October 26, 2026, 18:59 IST Supreme Court CJI Surya Kant SIR Case Hearing: महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 3 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिकाकर्ता ने फॉर्म-6 की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. CJI सूर्यकांत की बेंच ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, लेकिन उसका पक्ष सुने बिना समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया. मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी. महाराष्‍ट्र एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई (फाइल फोटो) नई द‍िल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सोमवार को सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद पी.दातार ने दलील दी कि महाराष्ट्र में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 3 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने का दावा है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उनसे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने को कहा जा रहा है, जबकि यह फॉर्म नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए होता है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग (ईसीआई) का पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश नहीं दिया जा सकता. महाराष्ट्र में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामलामहाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देते हुए अरुण आनंदगिरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और उन्हें दोबारा सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया में परेशानी हो रही है. सोमवार को सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले में चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर के लिए तय की है. करीब 3 करोड़ नाम हटने का दावा, फॉर्म-6 पर सवालयाचिकाकर्ता के वकील अरविंद पी. दातार ने कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र में करीब 9 करोड़ मतदाता हैं. उनके मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लगभग 33 प्रतिशत यानी करीब 3 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं. उन्होंने दावा किया कि इनमें से करीब 1.22 करोड़ नाम तार्किक विसंगतियों के आधार पर हटाए गए. दातार ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने पहले भी चुनाव में वोट डाला है, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 क्यों भरना पड़ रहा है? यह फॉर्म नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है. वकील ने दलील दी कि इस फॉर्म में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि वह पहले किसी मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं रहा है. ऐसे में पहले से पंजीकृत रहे लोगों के लिए यह प्रक्रिया कानूनी परेशानी पैदा कर सकती है. CJI सूर्यकांत ने क्यों नहीं बढ़ाई समय-सीमा?सुनवाई के दौरान वकील ने मांग की कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाई जाए. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मामले का समाधान नहीं हो जाता, अंतिम मतदाता सूची को प्रकाशित करने की प्रक्रिया रोक दी जाए. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने चुनाव आयोग का पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले संबंधित पक्ष को सुनना जरूरी है. बेंच ने यह भी संकेत दिया कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की समीक्षा करने के बाद उचित निर्देशों पर विचार किया जा सकता है. अब कब आएगी अंतिम वोटर लिस्ट?महाराष्ट्र में संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को प्रकाशित की गई थी. दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 26 अक्टूबर तक बढ़ाई गई थी. इन दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर तक चलेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जानी है. सुप्रीम कोर्ट पहले भी SIR कराने के चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रख चुका है. कोर्ट ने कहा था कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की संवैधानिक और कानूनी शक्तियों के तहत आता है. हालांकि, इस मामले में याचिकाकर्ता ने नाम हटाने और उन्हें दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. अब 5 नवंबर की सुनवाई में चुनाव आयोग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है. About the Author अरुण बिंजोला अरुण बिंजोला वर्तमान में News18 हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी… और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : October 26, 2026, 18:59 IST Source link

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NewsClick funding case in Supreme Court। ED challenge High Court order in...

ED के मुताबिक, इस निवेश के बदले कंपनी को प्रति शेयर ₹11,510 के प्रीमियम पर शेयर दिए गए. जांच एजेंसी का आरोप था कि इस निवेश के जरिए डिजिटल न्यूज वेबसाइटों में विदेशी निवेश की 26 प्रतिशत सीमा और उससे जुड़े नियमों को दरकिनार करने की कोशिश की गई. ED ने यह भी आरोप लगाया कि विदेश से आए पैसे का इस्तेमाल पत्रकारों, फ्रीलांसरों और अन्य लोगों को वेतन, कंसल्टेंसी फीस और किराया देने में किया गया. एजेंसी ने इस फंडिंग को कथित तौर पर भारत के खिलाफ सामग्री तैयार करने से जोड़ा. ED ने क्या कार्रवाई की?9 फरवरी 2021 को ED ने न्यूज़क्लिक के कार्यालय और उससे जुड़े लोगों के कुल 11 ठिकानों पर तलाशी ली. इस दौरान प्रबीर पुरकायस्थ के आवास से अलग-अलग देशों की विदेशी मुद्रा जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब ₹2.62 लाख बताई गई. उनका लैपटॉप और ईमेल से संबंधित सामग्री भी जब्त की गई. इसके बाद 26 अगस्त 2022 को ED ने प्रबीर पुरकायस्थ के मकान और कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट समेत करीब ₹4.93 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया. इस कार्रवाई की पुष्टि संबंधित प्राधिकरण ने की. हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 जून 2021 को जांच पर रोक लगाते हुए ED को कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था. नेविल रॉय सिंघम की भूमिका को लेकर ED का दावाED की जांच में नेविल रॉय सिंघम को इस पूरे फंडिंग नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया. सिंघम अमेरिकी नागरिक हैं और श्रीलंकाई मूल के बताए जाते हैं. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि उनके चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) से करीबी संबंध हैं और वह अलग-अलग देशों में कई संगठनों के जरिए फंडिंग करते हैं. ED का दावा है कि सिंघम ने प्रबीर पुरकायस्थ के जरिए न्यूज़क्लिक को फंडिंग उपलब्ध कराई और कंपनी की गतिविधियों को लेकर गलत जानकारी देकर विदेशी धन हासिल किया. एजेंसी के मुताबिक, इस फंडिंग का मकसद भारत में सूचना के स्तर पर ऐसा अभियान चलाना था, जिससे सरकार और देश की संस्थाओं की छवि प्रभावित हो. जांच में कोरोना महामारी से निपटने के सरकार के तरीके, कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन और कश्मीर के नक्शे जैसे विषयों पर प्रकाशित सामग्री का भी उल्लेख किया गया. यह ED के आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं. इनसे अपने आप यह साबित नहीं होता कि न्यूज़क्लिक पर प्रकाशित हर संबंधित खबर किसी विदेशी एजेंडे के तहत तैयार की गई थी. ईमेल और चीन से जुड़े कार्यक्रमों का जिक्रED ने अपनी जांच में नेविल रॉय सिंघम और प्रबीर पुरकायस्थ के बीच हुए ईमेल संवादों का भी हवाला दिया है. एजेंसी के मुताबिक, इन संवादों में चीन से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और कुछ अन्य पत्रकारों तथा वामपंथी संगठनों से जुड़े लोगों की बातचीत का जिक्र है. जांच एजेंसी ने बेनी कुरुविला, उर्वशी सरकार, रेनेटा पोर्टो बुग्नी, मनोलो डी लॉस सैंटोस, टिंग्स चक और विजय प्रसाद समेत कई लोगों के नामों का उल्लेख किया है. ED का दावा है कि चीन में बनी दो फिल्मों—‘Red Star over China’ और ‘The Secret of China’—की डबिंग और सबटाइटलिंग को लेकर भी बातचीत हुई थी. एजेंसी ने इन गतिविधियों को चीन की छवि बेहतर बनाने के कथित प्रयासों से जोड़ा. हालांकि, किसी ईमेल में नाम आने या किसी कार्यक्रम में सहयोग करने भर से किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती. इसके लिए संबंधित साक्ष्यों और उनकी कानूनी जांच का महत्व है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 वाले मामले में FIR और ECIR रद्द की इस मामले में 29 मई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की FIR और ED की ECIR रद्द कर दी. अदालत ने माना कि इस मामले में IPC की धारा 420 यानी धोखाधड़ी, धारा 406 यानी आपराधिक विश्वासघात और धारा 120-B यानी आपराधिक साजिश के जरूरी तत्व नहीं बनते. इस फैसले के बाद ED ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की ED की दलील है कि हाईकोर्ट ने ईमेल और बयानों समेत जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया. एजेंसी का यह भी कहना है कि जांच पर लंबे समय तक लगी रोक के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी और हाईकोर्ट ने रिट याचिका के स्तर पर ही मामले के तथ्यों का विस्तृत मूल्यांकन कर दिया. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में ED की चुनौती का नतीजा महत्वपूर्ण होगा 2023 में UAPA के तहत दर्ज हुआ दूसरा मामलान्यूज़क्लिक से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला 17 अगस्त 2023 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की FIR से शुरू हुआ. इसमें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए. ED ने 17 अक्टूबर 2023 को इस FIR के आधार पर अलग ECIR दर्ज की. इस मामले में आरोप है कि न्यूज़क्लिक को अप्रैल 2018 से विदेश से करोड़ों रुपये मिले. जांच में नेविल रॉय सिंघम और अमेरिका तथा ब्राजील में स्थित कुछ संस्थाओं के जरिए कथित फंडिंग का आरोप लगाया गया. FIR में यह भी आरोप है कि विदेशी धन का इस्तेमाल चीन के हितों से जुड़ी खबरों और अभियानों को बढ़ावा देने के लिए किया गया. आरोपों में कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत से अलग या विवादित क्षेत्र के रूप में पेश करने, किसानों के आंदोलन को लंबा खींचने, कोरोना महामारी से निपटने के भारत सरकार के प्रयासों को बदनाम करने और 2019 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने की कथित साजिश जैसे मुद्दे शामिल हैं. इन आरोपों की सत्यता का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है. पत्रकारों के बयानों की जांच *ED ने न्यूज़क्लिक से जुड़े दो पत्रकार के बयान दर्ज किए.एजेंसी के मुताबिक, दोनों को कंपनी से भुगतान मिला था. ED ने इनमें से एक पत्रकार के कुछ पोस्ट और लेखों में भारत के नक्शे को लेकर प्रकाशित सामग्री पर भी सवाल उठाए. एजेंसी का आरोप है कि कुछ सामग्री में कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को इस तरह दिखाया गया, जिससे उनकी भारतीय संप्रभुता पर सवाल खड़े होते हैं. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 30 मार्च 2024 को पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. 30 अप्रैल 2024 को अदालत ने इसका संज्ञान लिया. उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़ी अर्जी

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Kesar Mango Price: अद्भुत चमत्कार! बारिश की कमी, भीषण गर्मी और समय...

होमफोटोदेश अद्भुत चमत्कार! बारिश की कमी, भीषण गर्मी और समय से पहले आ गया केसर आम Last Updated:October 26, 2026, 17:57 IST Gujarat Kesar Mango: गुजरात के पोरबंदर में इस बार प्रकृति का अनोखा नजारा देखने को मिला. आमतौर पर अप्रैल-मई में बाजार में आने वाला केसर आम अक्टूबर में ही नीलामी के लिए पहुंच गया. 10 किलो के एक बक्से की कीमत 14,500 रुपये लगी, जबकि चार बक्से कुल 53,500 रुपये में बिके. जानिए बारिश की कमी और भीषण गर्मी के बीच समय से पहले आम पकने की पूरी कहानी… पोरबंदर: गुजरात का केसर आम अपने स्वाद और खुशबू के लिए देश ही नहीं, दुनिया भर में मशहूर है. आमतौर पर इसका सीजन अप्रैल के आसपास शुरू होता है और मई में यह अपने चरम पर पहुंचता है. लेकिन इस बार प्रकृति का ऐसा अनोखा रंग देखने को मिला कि सर्दियों की शुरुआत से पहले ही केसर आम बाजार में पहुंच गया. गुजरात के पोरबंदर मार्केटिंग यार्ड में शरद पूर्णिमा के अगले दिन नीलामी के लिए केसर आम के चार बक्से लाए गए. हर बक्से में 10 किलो आम थे. कहां से आए आम के चार बक्से?ये आम गुजरात के बरडा क्षेत्र के रानावव और हनुमानगढ़ गांवों से लाए गए थे. इन्हें पोरबंदर मार्केटिंग यार्ड स्थित सुदामा फ्रूट कंपनी में नीलामी के लिए रखा गया. आम के सामान्य सीजन से कई महीने पहले इनका बाजार पहुंचना व्यापारियों के लिए हैरानी की बात थी. नीलामी की शुरुआत नारियल फोड़कर और मिठाइयां बांटकर की गई. व्यापारियों ने इसे प्रकृति का अनोखा करिश्मा बताया. एक बक्से की कीमत लगी ₹14,500नीलामी में 10 किलो के एक बक्से के लिए 14,500 रुपये की बोली लगी. इस हिसाब से आम की कीमत 1,450 रुपये प्रति किलो रही. दो अन्य बक्से 28,500 रुपये में बिके, यानी 1,425 रुपये प्रति किलो की दर से. वहीं, चौथे बक्से की कीमत 10,500 रुपये लगी, जो 1,050 रुपये प्रति किलो के बराबर है. चारों बक्सों की कुल बिक्री 53,500 रुपये में हुई. इनमें से एक बक्सा राजकोट और दूसरा पोरबंदर के व्यापारी ने खरीदा, जबकि दो बक्से ब्रिटेन (UK) निर्यात करने के लिए खरीदे गए. Add News18 as Preferred Source on Google बारिश की कमी और भीषण गर्मी बनी वजहसुदामा फ्रूट कंपनी के नितिन दसानी के अनुसार, इस बार मानसून के दौरान बारिश की कमी और उसके बाद पड़ी भीषण गर्मी के कारण आम के पेड़ों पर श्रावण महीने में ही समय से पहले फूल आ गए थे. इन्हीं असामान्य मौसमी परिस्थितियों के चलते आम समय से पहले पक गए और बाजार तक पहुंच गए. हालांकि, यह सामान्य सीजन से अलग घटना है और इससे केसर आम के पूरे उत्पादन या मौसम के बारे में कोई व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. आमतौर पर अप्रैल-मई में आता है केसर आम:गुजरात के गिर-सोमनाथ और आसपास के इलाकों में पैदा होने वाला केसर आम अपनी खास पहचान रखता है और बड़ी मात्रा में विदेशों में भी भेजा जाता है. आमतौर पर गर्मियों में बाजार में आने वाला यह फल अक्टूबर में नीलामी के लिए पहुंचा, जिसने कारोबारियों और ग्राहकों को हैरान कर दिया. अब इस असामान्य समय पर हुई नीलामी की वजह से पोरबंदर का यह केसर आम चर्चा में है. लेटेस्ट कॉमर्स डील्स, खास डिस्काउंट और बेहतरीन शॉपिंग ऑफर देखने के लिए कंपेयर इंड‍िया✅देखें. First Published : October 26, 2026, 17:50 IST Source link

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तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री गिरफ्तार, डीएमके नेता पर प्राइवेट स्कूलों से...

होमताजा खबरदेश तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री गिरफ्तार, स्कूलों से 100 करोड़ घूस लेने का केस Last Updated:October 26, 2026, 17:18 IST तमिलनाडु के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी को निजी स्कूलों को लाइसेंस सहित दूसरी सरकारी मंजूरियां दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. जांच एजेंसियों को शक है कि इस कथित रिश्वत मामले से 177 निजी स्कूल प्रभावित हुए. डीएमके नेता पर निजी स्कूलों को लाइसेंस दिलाने के नाम पर 100 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप तमिलनाडु के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. चेन्नई पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने उन्हें निजी स्कूलों को लाइसेंस सहित दूसरी सरकारी मंजूरियां दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों को शक है कि इस कथित रिश्वत मामले से 177 निजी स्कूल प्रभावित हुए. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के वरिष्ठ नेता अनबिल महेश पर भ्रष्टाचार और विश्वासघात से जुड़े आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, पूर्व मंत्री ने आरोपों से इनकार किया है और अपने खिलाफ दर्ज मामले को चुनौती दी है. क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक, निजी स्कूलों के प्रबंधन से कथित तौर पर सरकारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC), लाइसेंस, मान्यता और नवीनीकरण जैसी मंजूरियां दिलाने के नाम पर पैसे वसूले गए. जांचकर्ताओं ने इस कथित योजना से जुड़े 177 स्कूलों की पहचान की है. पुलिस का आरोप है कि इस मामले में जुटाए गए डिजिटल सबूतों और पूछताछ के दौरान दर्ज बयानों से पूर्व मंत्री की भूमिका के संकेत मिले हैं. इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार, 26 अक्टूबर को अनबिल महेश की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने गिरफ्तारी पर रोक की उनकी मांग स्वीकार नहीं की. पूर्व मंत्री ने इस मामले में दर्ज FIR को रद्द कराने के लिए भी अदालत का रुख किया है. इस बीच, DMK ने सीएम विजय की सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. वहीं, अनबिल महेश ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया है. About the Author साद बिन उमर साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं. कहां से … और पढ़ें Location : Chennai,Tamil Nadu First Published : October 26, 2026, 17:08 IST इस बीच, DMK ने सीएम विजय की सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. वहीं, अनबिल महेश ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया है. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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‘इस्तीफा देकर मंत्री बनना सियासत का हिस्सा’: AIADMK के 6 बागी MLA...

होमताजा खबरदेश ‘इस्तीफा देकर मंत्री बनना सियासत का हिस्सा’: AIADMK के बागी MLA को राहत Last Updated:October 26, 2026, 16:20 IST Supreme Court News: तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक का दामन छोड़कर सत्तारूढ़ टीवीके की नाव पर सवार हुए छह बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है. पार्टी व्हिप की धज्जियां उड़ाने और इस्तीफा देकर पाला बदलने वाले इन नेताओं को पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका को शीर्ष अदालत ने सीधे खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा मद्रास हाईकोर्ट का आदेश. (पीटीआई) Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को अन्नाद्रमुक के छह विधायकों के खिलाफ दायर एक याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट देने के बाद स्वेच्छा से विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और बाद में सत्तारूढ़ ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) में शामिल हो गए थे. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वकील के. सुथन द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया. इस याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सुथन की जनहित याचिका खारिज कर दी गई थी. पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “कोई इस्तीफा देता है और मंत्री बन जाता है, यह राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है.” हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को जनहित याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें ‘चुनाव व्यय सुरक्षा’ तंत्र बनाने और अन्नाद्रमुक छोड़कर जाने वाले छह सदस्यों को पांच साल के लिए अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया गया था. अदालत ने कहा कि विधानसभा सीट से इस्तीफा देने का अधिकार संवैधानिक व्यवस्था का ही एक हिस्सा है, और न्यायिक आदेश के जरिए इस पर कानून से बाहर की कोई अतिरिक्त शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं. मद्रास हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें उन्होंने अन्नाद्रमुक के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे. ये विधायक बाद में सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो गए थे. उसने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि वह अन्नाद्रमुक के सचेतक कृष्णमूर्ति की उस याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लें, जिसमें एस जयकुमार, मारागथम कुमारवेल, पी सत्यभामा और एसक्की सुबैया को विधानसभा से अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया गया है. क्रमशः पेरुंदुरई, मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों से चुने गए एस जयकुमार, मारागथम कुमारवेल और पी सत्यभामा ने 25 मई, 2026 को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. अंबासमुद्रम निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित एसक्की सुबैया ने इसके अगले दिन इस्तीफा दिया था, जबकि सी. विजयभास्कर (विरालिमालाई) और एम. आर. विजयभास्कर (करूर) ने क्रमशः 16 और 29 जून को इस्तीफा दिया था. वे सभी अप्रैल में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के टिकट पर चुने गए थे. इस्तीफा देने के बाद, वे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके में शामिल हो गए. छह अक्टूबर को हुए उपचुनाव में, टीवीके उम्मीदवारों के तौर पर मारागथम कुमारवेल और सत्यभामा ने क्रमशः मदुरांतकम तथा धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों से जीत हासिल की. पीठ ने कृष्णमूर्ति की याचिका, और साथ ही ‘देसिया मक्कल शक्ति काची’ द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया था. इसने कहा कि विधायकों द्वारा सौंपे गए इस्तीफे स्वेच्छा से दिए गए थे, और ये संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुरूप थे. About the Author राकेश रंजन कुमार राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : October 26, 2026, 16:20 IST Source link

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अलग नारा, अलग ध्‍वज, बंगाल को बांग्लादेश बनाने की थी योजना, सुवेंदु...

होमताजा खबरwest bengalKolkata बंगाल को बांग्लादेश बनाने की थी योजना, सुवेंदु ने ममता बनर्जी पर साधा नि‍शाना Last Updated:October 26, 2026, 15:19 IST मुख्‍यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर बंगाल को वृहत्तर बांग्लादेश बनाने की योजना का बनाने का आरोप लगाते हुए जमकर न‍िशाना साधा. उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति और राष्ट्रवाद की समझ न होने की बात कही. अध‍िकारी ने लोगों से पीएम मोदी के साथ रहने की अपील की. सुवेंदु अधि‍कारी ने ममता बनर्जी की पूर्व सरकार पर बंगाल को बांग्‍लादेश बनाने की योजना बनाने का आरोप लगाया. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा. अधिकारी ने ममता बनर्जी का नाम लिए बिना उनकी सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि उसे ‘‘राष्ट्रवाद की कोई समझ नहीं थी’’ और उसकी योजना राज्य को ‘‘वृहत्तर बांग्लादेश’’ में बदलने की थी. अधिकारी यहीं नहीं रुके उन्‍होंने पिछली सरकार पर राज्य के लिए एक अलग गीत तैयार करने, एक ध्वज डिजाइन कराने और पड़ोसी देश बांग्लादेश के नारे ‘जय बांग्ला’ को अपनाने का भी आरोप लगाया. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यहां भाजपा के एक पार्टी कार्यालय के लिए भूमि पूजन के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘बंगाल की पिछली सरकार को राष्ट्रवाद की कोई समझ नहीं थी, उसने तुष्टीकरण की राजनीति की और राज्य को वृहत्तर बांग्लादेश में बदलने की योजना बनाई.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए उसने राज्य के लिए एक अलग गीत तैयार किया, एक ध्वज डिजाइन कराया और बांग्लादेश के नारे ‘जय बांग्ला’ को अपनाया.’’ सुवेंदु अधिकारी ने लोगों से एकजुट रहने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े रहने की अपील की. मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि बंगाल में ‘दिमागी नक्सलियों’, ‘टुकड़े-टुकड़े’ गिरोह, कॉकरोच और दीमकों को ‘‘पनपने न दिया जाए’’. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and … और पढ़ें Location : Kolkata,West Bengal First Published : October 26, 2026, 15:19 IST Source link

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करवा चौथ पर भद्रा का साया या पूजा में कोई बाधा नहीं,...

अंबालाः करवा चौथ पर व्रत रखने की तैयारी कर रही महिलाओं के मन में इस बार भद्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल किसी को व्रत की तारीख को लेकर असमंजस है, तो कोई पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय के समय की जानकारी जुटा रहा है. ऐसे में महिलाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि भद्रा का समय कब है और करवा चौथ की पूजा किस समय करनी चाहिए. बता दे कि ज्योतिष आचार्य की माने तो भद्रा को लेकर महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि भद्रा 28 अक्टूबर की रात को है, जबकि 29 अक्टूबर को महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं.महिलाओं को किसी भी तरह के भ्रम में न पड़ने और व्रत से जुड़ी जानकारी पंचांग के अनुसार देखें. जाने मुहुर्त का सही समय वही इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए पंडित आरके शर्मा ने बताया कि करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं.परंपरा के अनुसार, व्रत वाले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सरगी ग्रहण करती हैं. इसके बाद दिनभर उपवास रखा जाता है और शाम को करवा चौथ की पूजा तथा कथा की जाती है. रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं. उन्होंने कहा कि करवा चौथ पर पूजा के शुभ समय को लेकर भी महिलाओं में उत्सुकता बनी हुई है, ओर 29 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक पूजा करने और करवा चौथ की कथा सुनने का समय बताया गया है. हालांकि, पूजा का सही मुहूर्त स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार सत्यापित करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के निकलने का इंतजार सबसे खास माना जाता है, इसलिए रात 8 बजकर 15 मिनट के बाद चांद निकलने की संभावना जताई जा रही हैं.चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं, अर्घ्य देती हैं और अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत तथा सुखी जीवन की कामना करती हैं, इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है.चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में बदल सकता है, इसलिए महिलाओं को अपने क्षेत्र के अनुसार समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए. पंजाब में इस परंपरा से शुरू होती है करवा चौथ पंजाब में करवा चौथ की शुरुआत सरगी की परंपरा के साथ होती है, सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं. महिलाएं सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करती हैं। शाम के समय सोलह श्रृंगार करके महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं. कई स्थानों पर फेरी की रस्म भी निभाई जाती है, जिसमें महिलाएं एक घेरे में बैठकर पूजा की थाली एक-दूसरे को देती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई क्षेत्रों में गौर माता की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है.करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं इस रस्म के माध्यम से अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं, व्रत खोलते समय पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाने और मिठाई खिलाने की रस्म को भी प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है.इस परंपरा का भाव यही है कि पति-पत्नी जीवनभर एक-दूसरे का ख्याल रखें और उनके रिश्ते में प्रेम तथा मिठास बनी रहे.करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है. ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को तारीख, भद्रा और पूजा के मुहूर्त को लेकर सही जानकारी हासिल करनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी असमंजस के अपनी धार्मिक परंपराएं निभा सकें. Source link

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