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अमरनाथ यात्रा: तैयार हुआ मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा ग्रिड, ड्रोन-CCTV से होगी निगरानी, हर...

होमताजा खबरदेश अमरनाथ यात्रा: मल्टी लेयर्ड सुरक्षा ग्रिड तैयार, ड्रोन-CCTV से होगी निगरानी Last Updated:June 12, 2026, 19:20 IST श्री अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की है. बैठक में यात्रा मार्ग पर मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा ग्रिड बनाने, ड्रोन और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने तथा सीएपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है. श्रद्धालुओं के पंजीकरण, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं. स्थानीय लोगों और पशुओं के लिए QR कोड आधारित पहचान पत्र जारी किए जाएंगे. मौसम की स्थिति के अनुसार ही श्रद्धालुओं के जत्थों को आगे बढ़ाया जाएगा. अमरनाथ यात्रा 2026 की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. Amarnath Yatra Security Arrangements: अमरनाथ यात्रा हमेशा से पाकिस्‍तान की आंखों में खटकती रही है. शायद ही कोई साल गया हो, जब पाकिस्‍तान ने अमरनाथ यात्रा को बाधित करने के लिए कोई न कोई नापाक चाल न चली हो. पाकिस्‍तान की हर चाल को नाकाम करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी तैयारी पूरी कर ली हैं. अमरनाथ यात्रा के दौरान किसी तरह का खलल ना पड़े, इसके लिए मल्‍टी लेयर्ड‍ सिक्‍योरिटी ग्रिड तैयार किया गया है. साथ लगभग पूरे यात्रा मार्ग को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में लाया गया है. जहां पर सीसीटीवी करवेज संभव नहीं है, उन जगहों पर ड्रोन के जरिए निगरानी का बंदोबस्‍त किया गया है. इसके अलावा यात्रा मार्ग पर कोई श्रद्धालुओं के अलावा कोई दूसरा घुसपैठ न कर पाए, इसके लिए भी सुरक्षा एजेंसियों ने खास इंतजाम किए हैं. इस बार भी श्रद्धालुओं को क्‍यूआर कोड बेस्‍ड आईकार्ड जारी करने की व्‍यवस्‍था की गई है. वहीं, अमरनाथ यात्रा को लेकर हो रही तैयारियों पर केंद्र सरकार की सीधी नजर बनी हुई है. इस बाबत शुक्रवार को गृहमंत्री अमित शाह ने और जम्‍मू और कश्‍मीर पुलिस सहित सेंट्रल आर्म्‍ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के आला अधिकारियों के साथ उच्‍चस्‍तरीय समीक्षा बैठक की है. बैठक में बैठक में यात्रा मार्ग, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है. आज गृह मंत्रालय में अमरनाथ यात्रा को लेकर गृहमंत्री ने संबंधित एजेंसियों के साथ उच्‍चस्‍तरीय बैठक की है. गृहमंत्री अम‍ित शाह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सर्वोच्च सुरक्षा और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं. यात्रा मार्ग पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा ग्रिड तैयार किया है. इस ग्रिड को मजबूत बनाने के लिए कुछ अन्‍य एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है. साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया गया है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों सहित अन्‍य सर्विलांस सिस्टम के इस्‍तेमाल की तैयारी है. इसके अलावा, सुरक्षा के लिए अन्य तकनीकी संसाधनों के व्यापक इस्तेमाल की बात कही गई है. बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि यात्रा के दौरान विभिन्न सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शिविर स्थलों तथा यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी बनाए रखें, ताकि किसी भी आपात स्थिति का तुरंत समाधान किया जा सके. श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए गृहमंत्री ने पंजीकरण, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं. अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को चाकचौबंध बनाने के लिए खुद गृहमंत्री अमित शाह ने आज आला अधिकारियों के साथ बैठक की है. पशुओं का भी रजिस्‍ट्रेशन कराने के लिए दिए गए निर्देशइसके अलावा, यात्रा मार्ग से जुड़े स्थानीय लोगों और पशुओं का भी पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है. साथ ही, सभी को क्‍यूआर कोड से लैस पहचान पत्र जारी करने को कहा गया है. वहीं, मौसम को देखते हुए सुरक्षा और यात्रा संचालन की विशेष योजना तैयार की गई है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मौसम की स्थिति और पूर्वानुमान के आधार पर ही श्रद्धालुओं के जत्थों को आगे बढ़ाया जाए, ताकि किसी भी तरह के जोखिम से बचा जा सके. इसके अलावा, गृहमंत्री ने अमरनाथ यात्रा मार्ग के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के साथ सुरक्षित रूप से पर्यटन गतिविधियों का भी आनंद ले सकें. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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बुरहानपुर का यह कलाकार कर चुका है जॉनी लीवर-शक्ति कपूर संग काम,...

Last Updated:June 12, 2026, 18:25 IST फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले प्रेमचंद मावले ने लोकल 18 से कहा कि मैं 2012 में जब एक शख्स के संपर्क में आया तो उन्होंने बुरहानपुर के स्थानीय ऐतिहासिक स्थलों पर चल रही दद्दा मलखान सिंह की फिल्म की शूटिंग हो रही थी. मुझे उन कलाकारों से मिलाया. वहां पर मेरा सिलेक्शन हो गया मुझे डाकू का रोल दिया गया. मैं डाकू का रोल बहुत अच्छे से निभाया. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में आज भी कहीं ऐसे कलाकार देखने के लिए मिलते हैं की जो कई फिल्मों में काम कर चुके हैं. आज हम आपको एक ऐसे कलाकार की कहानी बता रहे हैं. बुरहानपुर के इतवारा क्षेत्र में रहने वाले प्रेमचंद मावले की 2012 में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े. उन्होंने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया. कादर खान शक्ति कपूर दद्दा मलखान सिंह और कई फिल्म डायरेक्टर के साथ उन्हें काम करने का मौका मिला. उन्होंने पार्ट टाइम काम कर करीब 5 से 10 लाख रुपए की कमाई की है. जिसे उन्होंने अपना घर बनाया और बच्चे की शादी की है. उनका कहना है कि मैं केवल कक्षा छठवीं तक पढ़ा लिखा हूं. मेरी हाइट छोटी होने के कारण मुझे फिल्मों में काम मिलता है. कलाकार ने दी जानकारीटीम को फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले प्रेमचंद मावले ने लोकल 18 से कहा कि मैं 2012 में जब एक शख्स के संपर्क में आया तो उन्होंने बुरहानपुर के स्थानीय ऐतिहासिक स्थलों पर चल रही दद्दा मलखान सिंह की फिल्म की शूटिंग हो रही थी. मुझे उन कलाकारों से मिलाया. वहां पर मेरा सिलेक्शन हो गया मुझे डाकू का रोल दिया गया. मैं डाकू का रोल बहुत अच्छे से निभाया. वहां से मुझे फिल्मी दुनिया में काम मिलना शुरू हो गया. मैं कलाकार शक्ति कपूर और कई बड़े कलाकारों के साथ काम कर चुका हूं. मेरी हाइट कम होने के कारण मुझे फिल्मी दुनिया में कम मिलते रहता है. 8 महीने फिल्मी दुनिया में करता हूं कामकलाकार प्रेमचंद मावले का कहना है कि मैने दद्दा मलखान सिंह काला और कई शॉर्ट फिल्मों में काम किया है अभी चंबल का डाकू फिल्म की शूटिंग चल रही है. उसमें भी मैं डाकू का रोल अदा कर रहा हूं मैने इस फिल्म इंडस्ट्री से 5 से 10 लाख रुपए की कमाई की है. जिस से घर बनाकर अपने बच्चों की शादी की है बाकी समय में हम्माली का काम रेणुका कृषि उपज मंडी में करते रहता हूं. जहां से मुझे अच्छा रोजगार मिलता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Burhanpur,Madhya Pradesh Source link

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Congress On Amit Shah | स्वयंभू चाणक्य, 17 अप्रैल… कांग्रेस के जयराम...

होमताजा खबरदेश स्वयंभू चाणक्य… जयराम रमेश ने शाह के ल‍िए क्‍यों क‍िया ऐसी भाषा का इस्‍तेमाल? Last Updated:June 12, 2026, 17:23 IST कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह को स्वयंभू चाणक्य कहते हुए 17 अप्रैल की हार याद दिलाई. इस बीच तृणमूल कांग्रेस के 19 सांसदों के दस्तखत वाला पत्र सामने आने से हड़कंप मच गया है. कयास लग रहे हैं कि विपक्षी पार्टियों में टूट या विलय की कोशिशें चल रही हैं. हालांकि कांग्रेस ने टीएमसी के विलय की खबरों को सिर्फ अफवाह बताया है. जयराम रमेश ने अमित शाह को बताया ‘स्वयंभू चाणक्य’. (पीटीआई फोटो) नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से पहले राजनीति उबाल मार रही है. एक तरफ, तृणमूल कांग्रेस में चुनावी हार के बाद सिर-फुटव्वल जारी है. तो दूसरी ओर, कांग्रेस मौके का फायदा उठाकर अतीत में छिटके साथियों को वापस लाना चाहती है. इस बीच, कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ‘स्वयंभू चाणक्य’ कहकर संबोधित किया है. इसके साथ ही उन्होंने 17 अप्रैल 2026 की उस घटना का जिक्र किया जब एनडीए सरकार संसद में दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई थी. जयराम रमेश का दावा है कि सरकार परिसीमन से जुड़े बिल पर बुरी तरह हार गई थी. रमेश का दावा है कि उसी हार के बाद विपक्ष को तोड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 19 सांसदों का एक रहस्यमय पत्र सामने आया है. इस पत्र के बाद से ही कयासों का बाजार गर्म है. क्या वाकई विपक्ष में बड़ी टूट होने वाली है या फिर यह किसी नए सियासी गठबंधन की शुरुआत है. जयराम रमेश ने अमित शाह पर स्वयंभू चाणक्य वाला तंज क्यों कसा? जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने गृह मंत्री की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि मानसून सत्र से पहले लोकसभा में बहुमत जुटाने का दबाव साफ दिख रहा है. उनके मुताबिक 17 अप्रैल को सरकार को बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी. उस दिन परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था. एनडीए सरकार जरूरी दो-तिहाई आंकड़ा पार नहीं कर सकी थी. रमेश का आरोप है कि इसी हार से परेशान होकर अब विपक्ष को कमजोर करने का खेल खेला जा रहा है. वे लोकतंत्र का मजाक उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इससे पहले कभी किसी ने लोकसभा में अपनी पार्टी के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की ऐसी कोशिश नहीं की, जैसी केंद्रीय गृह मंत्री इन दिनों संसद के मानसून सत्र से पहले बेचैनी से कर रहे हैं। स्वयंभू चाणक्य को 17 अप्रैल, 2026 को अपमानित होना पड़ा था, जब NDA आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा… Source link

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गिरिजा देवी, उस्ताद विस्मिल्लाह खान, वाराणसी के भारत रत्न व पद्मविभूषण के...

Last Updated:June 12, 2026, 16:20 IST वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि काशी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्मविभूषण गिरिजा देवी, सुप्रसिद्ध गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र सहित कई हस्तियां रही है. इन हस्तियों से जुड़ी कई अनमोल चींजे है जो उनके घर में पड़े है. इन सारी चींजों को संरक्षित करके उनके घर के ही एक कमरें में उन्हें सजाया जाएगा. वाराणसीः देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में कई भारत रत्न और पद्मविभूषण हस्तियां है. इन हस्तियों के संगीत और नृत्य के साथ अलग अलग विधाओं में अपना नाम देश ही नहीं बल्कि दुनिया में रोशन किया है. इन्ही नामचीन हस्तियों के नाम पर अब काशी में म्यूजियम तैयार किया जाएगा. वाराणसी नगर निगम ने इसका पूरा खाका तैयार किया है. वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि काशी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्मविभूषण गिरिजा देवी, सुप्रसिद्ध गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र सहित कई हस्तियां रही है. इन हस्तियों से जुड़ी कई अनमोल चींजे है जो उनके घर में पड़े है. इन सारी चींजों को संरक्षित करके उनके घर के ही एक कमरें में उन्हें सजाया जाएगा. 30 करोड़ होगा खर्च उनके घर का वो कमरा उनके नाम म्यूजियम के तौर पर विकसित होगा. इस काम पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे. अशोक तिवारी ने बताया कि इन हस्तियों के घर जाने वाले मार्ग का भी नगर निगम सुंदरीकरण कराएगा. ताकि संगीत प्रेमी उनके घर तक आसानी से पहुंच सकें. इन रास्तों को नगर निगम कुछ इस कदर सजायेगा की लोग उनके बारे में बेहतर तरीके से जान और समझ सकें. यह गलियां विश्वस्तरीय होगी, यहां खूबसूरत वॉल पेंटिंग्स और लाइट्स भी लगाएं जाएंगे. परिवार से बातचीत जारी अशोक तिवारी ने बताया की उन सभी महान हस्तियों के परिवार वालों से अफसर लगातार बातचीत भी कर रहें है और उनसे उनके घर के एक कमरें को म्यूजियम के तौर पर विकसित करने पर लगातार चर्चा जारी है. जैसे-जैसे उनके परिवार वालों से इसपर सहमति मिलेगी वैसे-वैसे इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा. बताते चलें कि वाराणसी में भारत रत्न,पद्मविभूषण पद्मभूषण सम्मान पाने वाले सबसे ज्यादा विभूतियां है. वाराणसी के कबीरचौरा क्षेत्र में बकायदा इसके लिए पद्म गली भी बनाई गई है. जहां बनारस संगीत घराने के कई नामचीन हस्तियां रहती थी. आज भी उन गलियों के कई घरों में संगीत का विश्वविद्यालय चलता है. अलग अलग घरों में अलग अलग विधाएं सिखाई जाती है. गुरु शिष्य परम्परा का अनूठा संगम इन गलियों में देखने को मिलता है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Varanasi,Uttar Pradesh Source link

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WW2: हिटलर के ‘समुद्री दानव’ को डुबाने में ब्रिटेन को लगे थे...

27 मई 1941 की सुबह उत्तरी अटलांटिक महासागर में इतिहास का एक सबसे नाटकीय अध्याय अपने अंतिम मोड़ पर पहुंच चुका था. कुछ ही दिन पहले जिस जर्मन युद्धपोत ने ब्रिटिश साम्राज्य की समुद्री ताकत को खुली चुनौती दी थी, वही अब चारों ओर से दुश्मन जहाजों से घिरा खड़ा था. यह था जर्मनी का महाविशाल युद्धपोत बिस्मार्क, एक ऐसा नाम जिसने कुछ ही दिनों में पूरी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास करा दिया था. फरवरी 1939 में हैम्बर्ग से लॉन्च किया गया 823 फुट लंबा बिस्मार्क उस दौर के सबसे आधुनिक और सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में गिना जाता था. एडोल्फ हिटलर को उम्मीद थी कि यह जहाज जर्मन नौसैनिक शक्ति के पुनर्जन्म का प्रतीक बनेगा. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब ब्रिटेन ने जर्मनी के समुद्री रास्तों पर कड़ी निगरानी लगा रखी थी, तब बिस्मार्क को अटलांटिक महासागर में भेजने का फैसला किया गया. योजना बेहद खतरनाक थी. खुले अटलांटिक में पहुंचकर बिस्मार्क मित्र देशों के व्यापारिक जहाजों और ब्रिटेन की आपूर्ति लाइनों पर हमला करने वाला था. यदि वह खुले समुद्र में स्वतंत्र रूप से घूमने लगता, तो ब्रिटेन की समुद्री जीवनरेखा गंभीर संकट में पड़ सकती थी. फिर आया 24 मई 1941 का दिनआइसलैंड के पास डेनमार्क स्ट्रेट में बिस्मार्क का सामना ब्रिटिश नौसेना के गौरव HMS Hood और नए युद्धपोत Prince of Wales से हुआ. इसके बाद शुरू हुई भीषण गोलाबारी ने नौसैनिक इतिहास का रुख बदल दिया. बिस्मार्क के एक घातक गोले ने HMS Hood के गोला-बारूद भंडार को भेद दिया. कुछ ही क्षणों में एक विशाल विस्फोट हुआ और ब्रिटेन का गौरव माना जाने वाला युद्धपोत दो हिस्सों में टूटकर समुद्र में समा गया. 1,418 अधिकारियों और नौसैनिकों में से केवल तीन लोग जीवित बच सके. यह ब्रिटिश नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी समुद्री त्रासदियों में से एक थी. इसी लड़ाई में Prince of Wales भी भारी दबाव में आ गया और उसे पीछे हटना पड़ा. कुछ ही घंटों में बिस्मार्क दुनिया का सबसे चर्चित युद्धपोत बन चुका था. लेकिन इस जीत की कीमत भी उसे चुकानी पड़ीलड़ाई के दौरान उसके ईंधन टैंक को नुकसान पहुंचा और तेल का रिसाव शुरू हो गया. यही रिसाव आगे चलकर उसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुआ, क्योंकि ब्रिटिश नौसेना उसके रास्ते का अनुमान लगाने में सफल हो गई. HMS Hood के डूबने की खबर ने पूरे ब्रिटेन को झकझोर दिया. इसके बाद एक ही आदेश दिया गया—”बिस्मार्क को हर हाल में खत्म करो” ब्रिटिश नौसेना ने अपने इतिहास के सबसे बड़े शिकार अभियानों में से एक शुरू किया. बिस्मार्क को खोजने के लिए लगभग 50 युद्धपोतों और सहायक जहाजों को अभियान में झोंक दिया गया. विमानवाहक पोत, क्रूजर, विध्वंसक और युद्धपोत लाखों वर्ग मील समुद्री क्षेत्र में उसकी तलाश करने लगे. करीब तीन दिनों तक अटलांटिक महासागर में पीछा चलता रहा24 मई 1941 की रात विमानवाहक पोत HMS Victorious से उड़ान भरने वाले Swordfish विमानों ने पहला हमला किया. खराब मौसम, अंधेरा और भारी एंटी-एयरक्राफ्ट फायर के बावजूद पायलटों ने बिस्मार्क तक पहुंचकर टॉरपीडो हमला किया. जहाज को कुछ नुकसान पहुंचा, लेकिन वह अभी भी भाग निकलने में सक्षम था. दो दिन बाद, 26 मई को बिस्मार्क फिर दिखाई दिया. अब वह फ्रांस के ब्रेस्ट बंदरगाह से एक दिन से भी कम दूरी पर था. अगर वह वहां पहुंच जाता, तो जर्मन हवाई सुरक्षा उसे बचा सकती थी. यहीं से इतिहास का निर्णायक मोड़ आयाविमानवाहक पोत HMS Ark Royal से 15 Swordfish विमान खराब मौसम, तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच उड़ान भरकर बिस्मार्क पर टूट पड़े. भारी गोलाबारी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दो टॉरपीडो अपने लक्ष्य तक पहुंचे. इनमें से एक टॉरपीडो बिस्मार्क के पिछले हिस्से में लगा और उसके रडर को जाम कर गया. अब दुनिया के सबसे चर्चित युद्धपोत की दिशा नियंत्रित करने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी थी. विशाल बिस्मार्क खुले समुद्र में फंस गया था. इसके बाद ब्रिटिश बेड़े ने उसे चारों ओर से घेर लिया27 मई 1941 की सुबह HMS King George V और HMS Rodney समेत ब्रिटिश युद्धपोत उसके करीब पहुंचे और अंतिम हमला शुरू हुआ. बिस्मार्क ने अंत तक जवाबी गोलाबारी की. उसके विशाल तोपखाने आखिरी क्षण तक लड़ते रहे. लेकिन अब उसके खिलाफ पूरा ब्रिटिश बेड़ा खड़ा था. करीब 90 मिनट तक चली भीषण लड़ाई में बिस्मार्क पर 700 से अधिक गोले बरसाए गए. लगातार गोलाबारी, आग, विस्फोट और टॉरपीडो हमलों ने जर्मनी के इस महाविशाल युद्धपोत को धीरे-धीरे एक तैरते हुए मलबे में बदल दिया. फिर भी उसने आखिरी सांस तक युद्ध जारी रखाआखिरकार जब जहाज को बचाना असंभव हो गया, तो उसे स्वयं डुबाने का आदेश दिया गया. इसी दौरान ब्रिटिश भारी क्रूजर HMS Dorsetshire ने भी टॉरपीडो दागे. सुबह 10 बजकर 36 मिनट पर बिस्मार्क उत्तरी अटलांटिक की गहराइयों में समा गया. 2,221 लोगों के चालक दल में से केवल लगभग 115-116 लोग ही जीवित बच पाए. 2,000 से अधिक जर्मन नौसैनिक उसके साथ समुद्र में खो गए. सिर्फ 96 घंटे पहले जिसने HMS Hood को डुबोकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था, वही बिस्मार्क अब समुद्र की तलहटी में पहुंच चुका था. लेकिन उसकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुईबिस्मार्क का अंत केवल एक युद्धपोत का डूबना नहीं था. इस घटना ने साबित कर दिया कि समुद्री युद्ध का भविष्य बदल रहा है. विमानवाहक पोतों और नौसैनिक विमानों ने दिखा दिया कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत भी अब अजेय नहीं रहा. फिर भी इतिहास में बिस्मार्क का नाम आज भी उस जहाज के रूप में दर्ज है, जिसने कुछ दिनों के लिए ही सही, लेकिन ब्रिटिश साम्राज्य की सबसे शक्तिशाली नौसेना को चुनौती दी, HMS Hood को समुद्र में दफनाया और अपने पीछे ऐसी कहानी छोड़ गया, जिसे दुनिया आज भी रोमांच के साथ पढ़ती है. Source link

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TMC Crisis Live:क्यों बिखर रही TMC, क्या अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार? सुकांत मजूमदार...

TMC Crisis Live Updates: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस अब अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजरती दिख रही है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर जो असंतोष शुरू हुआ था, वह अब खुली बगावत में बदलता नजर आ रहा है. एक समय ममता बनर्जी की सबसे मजबूत राजनीतिक दीवार मानी जाने वाली TMC अब अंदर से दरकती दिखाई दे रही है. विधायक, सांसद और पुराने नेता लगातार पार्टी लाइन से अलग होते जा रहे हैं. इसी बीच TMC सांसद अरूप चक्रवर्ती का NDA को समर्थन देने का संकेत ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ एक नेता का रुख बदलना नहीं, बल्कि TMC के अंदर तेजी से बढ़ती बेचैनी का बड़ा संकेत माना जा रहा है. पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं और विपक्ष इसे ममता युग के कमजोर पड़ने की शुरुआत बता रहा है. इस बीच तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद ने पार्टी में जारी बगावत के बीच बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को डराकर, धमकाकर और पैसे देकर तोड़ा जा रहा है. उन्होंने कहा कि ’50 लाख से 5 करोड़ रुपए तक देकर सांसदों को सेट किया गया.’ TMC में बगावत का यह दौर ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है. विधानसभा में 58 बागी विधायकों का अलग गुट बनाना, लोकसभा सांसदों के भीतर असंतोष और राज्यसभा में लगातार इस्तीफों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बारासात सांसद काकोली घोष दस्तिदार पहले ही दावा कर चुकी हैं कि करीब 20 सांसद उनके गुट के संपर्क में हैं और NDA को समर्थन देने के लिए तैयार हैं. अब अरूप चक्रवर्ती के समर्थन ने इस संकट को और गहरा कर दिया है. दूसरी तरफ अभिषेक बनर्जी से CID की लंबी पूछताछ ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. TMC अब सिर्फ विपक्ष के हमलों से नहीं, बल्कि अपने ही नेताओं की नाराजगी से घिरी हुई दिख रही है. TMC के भीतर राजनीतिक संकट के बीच अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं. फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID ने उनसे करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी उनके कई जवाबों से संतुष्ट नहीं थी. विपक्ष इसे TMC नेतृत्व पर बढ़ते दबाव के तौर पर देख रहा है. TMC Crisis Live: TMC में लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चल रही थी संसदीय पार्टी: ऋतब्रत बनर्जी टीएमसी संकट लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और TMC से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि अगर बागी सांसदों की संख्या 20 से ज्यादा भी हो जाए तो उन्हें हैरानी नहीं होगी, क्योंकि संसदीय दल को जिस तरीके से चलाया जा रहा था वह पूरी तरह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ था. ऋतब्रत ने दावा किया कि सांसदों को स्वतंत्र रूप से सवाल पूछने का अधिकार नहीं दिया जा रहा था. उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा, क्योंकि पार्टी की रिसर्च टीम पहले से सवाल तय कर रही थी. उनके मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. TMC Crisis News Live: पाप और भ्रष्टाचार की नींव पर बना TMC का किला ढह रहा: तरुण चुघ का हमला टीएमसी संक लाइव अपडेट्स: BJP नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘पाप, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, लूट और तुष्टिकरण की राजनीति पर बना TMC का जर्जर किला अब ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पश्चिम बंगाल को भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण का केंद्र बना दिया, अब जनता द्वारा सत्ता से बाहर किए जाने के बाद वही अपने कर्मों का बोझ झेल रहे हैं. TMC Crisis Live Updates: शाइना NC का ममता पर हमला: आप अब भी आंखों पर पट्टी बांधे हैं टीएमसी संकट न्यूज लाइव: शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना NC ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए ममता बनर्जी पर अभिषेक बनर्जी से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. फर्जी हस्ताक्षर विवाद और TMC के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के बयानों का जिक्र करते हुए शाइना ने कहा कि अब पार्टी के अपने नेता ही सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि लगातार बढ़ते आरोपों और नेताओं के पार्टी छोड़ने के बावजूद ममता बनर्जी संकट को स्वीकार नहीं कर रही हैं. शाइना NC ने चेतावनी दी कि अगर TMC नेतृत्व ‘जागा नहीं’ तो पार्टी अस्तित्व के संकट में फंस सकती है. TMC Crisis Live: TMC भ्रष्टाचार जांच अभी सिर्फ शुरुआत: दिलीप घोष टीएमसी संकट लाइव: पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों में चल रही CID जांच ‘सिर्फ शुरुआत’ है. जलपाईगुड़ी में बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि TMC शासन के दौरान हुए कथित अपराधों में हर स्तर के लोग शामिल रहे हैं. दिलीप घोष ने कहा कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और जैसे-जैसे सबूत सामने आएंगे, उसी के मुताबिक कार्रवाई भी होगी. TMC Crisis News Live: अभिषेक बनर्जी के उभार से TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह: सुकांत मजूमदार का दावा टीएमसी संक लाइव अपडेट्स: केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती दरार, खासकर सांसदों के बीच, अभिषेक बनर्जी के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही नाराजगी का नतीजा है. सिलीगुड़ी में बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के कई वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी की “पैराशूट एंट्री” से कभी सहज नहीं थे. मजूमदार ने यह भी कहा कि अब जब TMC सत्ता में नहीं है, तो पार्टी के भीतर दबे हुए मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. TMC Crisis Live Updates: कीर्ति आजाद बोले- कल्याण बनर्जी और अभिषेक के बीच विवाद सुलझ गया टीएमसी संकट न्यूज लाइव: तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी घमासान के बीच सांसद कीर्ति आजाद ने दावा किया है कि कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच चल रहा विवाद अब सुलझ चुका है. उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी भावुक इंसान हैं और ‘दीदी’

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बालाघाट के इस चावल के एक नहीं दो पीएम थे दीवाने, जीआई...

Last Updated:June 12, 2026, 13:08 IST चिन्नौर चावल, जो दिखने में सामान्य और स्वाद में लाजवाब है. चावल की यह किस्म बालाघाट की ही पैदाइश है. बालाघाट के वारासिवनी इलाके में इसका उत्पादन होता है. चिन्नौर चावल को पूर्व प्रधानमंत्रियों की भी पसंद बन चुका था.साल 2022 में चिन्नौर के लिए बालाघाट को जीआई टैग मिला. ये है चिन्नौर चावल की पहचान चिन्नौर चिकना और नोकदार राइस है. मध्य प्रदेश के बालाघाट को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां पर धान की खेती  प्रमुखता से की जाती है. यहां पर धान की कई पारंपरिक किस्मों की खेती होती है, जिसकी डिमांड न सिर्फ इंडिया में बल्कि विदेशों में भी काफी है. इसी में से एक है चिन्नौर चावल, जो दिखने में सामान्य और स्वाद में लाजवाब है. चावल की यह किस्म बालाघाट की ही पैदाइश है. बालाघाट के वारासिवनी इलाके में इसका उत्पादन होता है. चिन्नौर चावल को पूर्व प्रधानमंत्रियों की भी पसंद बन चुका था. इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के ग्रामीण हाट बाजार में विशेष कृषि उत्पाद में बालाघाट के चिन्नौर चावल का भी प्रदर्शन रहा. जहां पर कई देशों के प्रतिनिधि मंडल ने चावल की काफी सराहना की थी. ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिन्नौर चावल को अलग पहचान मिलने की संभावना है. इससे किसानों के एफपीओ भी बन सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी निर्यात पहले से बढ़ जाएगा. अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका चिन्नौर चावलबालाघाट के चिन्नौर को मिली थी नई पहचानबालाघाट के वारासिवनी के कायदी इलाके में चिन्नौर चावल की उपज हुई. ऐसे माना जाता है. यहां की जलवायु चावल के लिए सबसे बढ़िया है. ऐसे में साल 2019 में बालाघाट के कृषि विभाग ने चावल निदेशालय हैदराबाद में जीआई टैग का दावा किया. साल 2022 में चिन्नौर के लिए बालाघाट को जीआई टैग मिला. ये है चिन्नौर चावल की पहचान चिन्नौर चिकना और नोकदार राइस है. चावल का स्वाद मीठा है और साथ ही मुलायम लगता है. इसको पकने में काफी कम समय लगता है. इसलिए इसे खीर के लिए बेहतर माना जाता है. ठंडा होने के बाद भी यह चावल नर्म रहता है. अगर आपको असली चिन्नौर की पहचान करनी है, तो उसके पांच से छः दाने अच्छे से चबाकर खा लो तो उसका स्वाद लंबे समय तक मुंह में बना रहता है.  इनमें राइस ब्रान की मात्रा 17-18 प्रतिशत होती है. वहीं चिन्नौर धान की बात करें तो इसमें 20-21 प्रतिशत होती है. दो प्रधानमंत्रियों से जुड़ा है किस्सावारासिवनी के रहने वाले अनिल पिपरवार ने बताया कि एक समय था जब बालाघाट के कायदी से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लिए चिन्नौर चावल जाता था. उसके बाद भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बालाघाट के मलाजखंड आई थी तब उन्हें चिन्नौर चावल भेंट किए गए थे. उसके बाद भी कई बार बालाघाट से दिल्ली उनके लिए चावल भेजे गए. अब भी नाराज है चिन्नौर उत्पादक किसानअनिल पिपलेवार का कहना है कि भले ही बालाघाट के चिन्नौर चावल को जीआई टैग मिल चुका है. लेकिन उस स्तर की वैश्विक पहचान नहीं मिल सकी है. वहीं, किसानों को भी उतना लाभ नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में सरकार इस चावल को और भी बेहतर ढंग प्रचारित करना चाहिए. सबसे जरूरी है कि इसकी मार्केटिंग का ख्याल रखना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसकी खेती कर सकें. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Balaghat,Balaghat,Madhya Pradesh Source link

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ITR Update : इस साल भी 15 सितंबर है आईटीआर भरने की...

Last Updated:June 12, 2026, 12:08 IST ITR Deadline : आप भी नौकरीपेशा हैं तो इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है. कई टैक्‍सपेयर्स के मन में इस बात को लेकर गफलत चल रही है कि इस बार भी आईटीआर भरने की डेडलाइन सितंबर तक रहेगी. इस चक्‍कर में अगर आप डेडलाइन को चूक गए तो कई तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. आईटीआर भरने की डेडलाइन 2026 में 31 जुलाई रखी गई है. नई दिल्‍ली. इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है. आयकर विभाग की ओर से आईटीआर फॉर्म नोटिफाई करने के साथ ही करदाताओं के सामने रिटर्न भरने की मारामारी भी शुरू हो चुकी है. कंपनियों ने तो अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 भी जारी करना शुरू कर दिया है, जिसका मतलब है कि अब रिटर्न भरने की दौड़ पूरी तरह शुरू हो चुकी है. लेकिन, एक सवाल है जो हर बार करदाताओं के मन में जरूर उठता है. अगर वे इनकम टैक्‍स विभाग की ओर से तय की गई डेडलाइन को चूक जाते हैं तो क्‍या परेशानी सामने आ सकती है. दूसरी अहम बात ये है कि इस बार रिटर्न भरने की डेडलाइन क्‍या है. पिछले साल सरकार ने आईटीआर भरने के लिए सितंबर तक का समय दिया था. यही वजह है कि इस बार भी तमाम करदाताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस बार भी डेडलाइन वही है या फिर बदल गई है. अगर आप नौकरीपेशा हैं तो एक बात आप गांठ बांध लीजिए कि आपके लिए आईटीआर भरने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई ही है. इस बार आप सितंबर का सोचकर चूक मत जाइएगा. दूसरी बात ये कि अगर आप डेडलाइन तक आईटीआर नहीं भरते हैं तो इसके कई तरह से नुकसान हो सकते हैं. क्‍या है आईटीआर भरने की डेडलाइन सामान्‍य करदाताओं, नौकरीपेशा और एचयएफ के लिए रिटर्न भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. ऐसे बिजनेसमैन और प्रोफेशनल्‍स जिनके खातों को ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए आईटीआर की डेडलाइन 31 अगस्‍त, 2026 है. ऐसे बिजनेसमैन और पेशेवर जिनके खातों को ऑडिट की जरूरत होती है, वे 31 अक्‍टूबर तक रिटर्न भर सकते हैं. ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के तहत आने वाले टैक्‍सपेयर्स 30 नवंबर, 2026 तक अपना रिटर्न भर सकते हैं. अगर आप सामान्‍य डेडलाइन को चूक जाते हैं तो लेट पेमेंट चार्ज के साथ 31 दिसंबर, 2026 तक आईटीआर भर सकते हैं. डेडलाइन चूक गए तो क्‍या करेंआप सैलरीड पर्सन हैं या फिर एचयूएफ के रूप में आईटीआर दाखिल कर रहे हैं तो 31 जुलाई की डेडलाइन याद रखनी चाहिए. अगर आप इस डेडलाइन को चूक जाते हैं तो इनकम टैक्‍स की धारा 234एफ के तहत आप बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं. डेडलाइन के बाद रिटर्न भरने के लिए आपको लेट फीस चुकानी पडे़गी. इनकम टैक्‍स विभाग ने 5 लाख तक की सालाना कमाई पर 1,000 रुपये की लेट फीस तय की है, जबकि 5 लाख से ज्‍यादा की कमाई 5 हजार रुपये की लेट फीस लगाई जाती है. डेडलाइन चूकने पर आपको क्‍या नुकसानअगर इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की सामान्‍य डेडलाइन आप चूक गए हैं तो सेक्‍शन 234ए के तहत बकाया टैक्‍स पर ब्‍याल लगाया जा सकता है. इनकम टैक्‍स विभाग आपके नुकसान को कैरी फारवर्ड करने से इनकार कर सकता है. इतना ही नहीं आपका रिफंड आने में भी देरी हो सकती है. देरी से रिटर्न भरने पर आपको रिफंड तो मिलेगा, लेकिन आपको इस रिफंड पर मिलने वाले ब्‍याज का नुकसान हो सकता है. 31 दिसंबर के बाद आईटीआर भरते हैं तो रिफंड क्‍लेम करने का अधिकार समाप्‍त हो जाता है. इसके लिए आपको सेक्‍शन 119(2)(b) के तहत कर अधिकारियों से अपनी देरी को माफ किए जाने का आवेदन करना पड़ेगा और यह उनके ऊपर होगा कि वे आपकी बात स्‍वीकार करते हैं या नहीं. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Video: बांग्लादेशी युवक सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में घुसे और चुरा...

होमताजा खबरदेश Video: बांग्लादेशी युवक सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुसे, चुरा ले गए सब्जी Last Updated:June 12, 2026, 11:18 IST भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर अजीब टेंशन! कैमरे में कैद हुई घुसपैठियों की करतूत, हमारी जमीन से चुरा ले गए हरी सब्जियां, फसलों को तहस-नहस कर दिया. भारतीय जमीन से सब्जी चुराते और फसल बर्बाद बांग्लादेशी युवक. हिंदुस्तान-बांग्लादेश बॉर्डर पर जो सब्जियां भारत के किसान मेहनत करके उगा रहे हैं, उन्हें बांग्लादेशी लेकर भाग जाते हैं. बांग्लादेश की तरफ से आए युवक दिनदहाड़े सब्जियां लेकर भाग रहे हैं और पौधे भी उखाड़ देते हैं. बांग्लादेशी सेना के जवान भी तब कुछ करते हैं जब फसल बर्बाद होने लगती है. इसका एक वीडियो भी है, जो इस खबर में लगा है, उसे देखकर आपको सारी बात समझ आ जाएगी. दिनदहाड़े खेतों में घुसे युवक, सब्जियां तोड़कर भागेये पूरी घटना भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी कंटीली बाड़ के पास स्थित खेतों की है. ग्राउंड से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ बांग्लादेशी युवक सीमा पार करके भारतीय किसानों के खेतों तक पहुंच गए. उन्होंने खेतों में लगी ताजा हरी सब्जियों को उखाड़ा, उन्हें इकट्ठा किया और अपने साथ लेकर चले गए. ये सब कुछ दिन के उजाले में हुआ. खेतों से इस तरह फसल चोरी होने से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है. जवानों के सामने हुई हरकत, ग्रामीण नाराजइस घटना ने बॉर्डर के पास रहने वाले भारतीय ग्रामीणों को सबसे ज्यादा इसलिए परेशान किया है, क्योंकि यह चोरी सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में हुई है. वीडियो में देख सकते हैं कि जब सब्जियां तोड़ ली गईं, पौधे उखाड़ लिए गए तब जाकर बांग्लादेशी जवान लोगों को वहां से हटा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि जब ये युवक भारतीय खेतों से सब्जियां बटोर रहे थे, तब सीमा के दूसरी तरफ ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ के जवान भी वहां मौजूद थे. लोगों का कहना है कि यह पूरी हरकत साफ-साफ दिखाई दे रही थी, इसके बावजूद दूसरी तरफ से उन युवकों को रोकने या टोकने की कोई कोशिश नहीं की गई. बॉर्डर पर खेती करना मुश्किलबॉर्डर के इलाकों में खेती करना पहले से ही मुश्किल काम है, और अब इस तरह की घटनाओं ने किसानों की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ा दी हैं. किसानों का कहना है कि वे दिन-रात एक करके, पैसे लगाकर फसल तैयार करते हैं. लेकिन जब फसल कटने का वक्त आता है, तो सीमा पार से होने वाली इस चोरी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस तरह की हरकतों की वजह से सीमावर्ती गांवों में रहने वाले किसान अब अपने ही खेतों में जाने से डरने लगे हैं और वहां बेवजह का तनाव पैदा हो रहा है. किसानों ने की मांग, ‘बांग्लादेशी अधिकारियों से बात करे प्रशासन’इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और किसानों ने भारतीय प्रशासन और सुरक्षा बलों से कड़े कदम उठाने की अपील की है. ग्रामीणों का कहना है कि भारतीय अधिकारियों को इस मुद्दे पर बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ बात करनी चाहिए, ताकि वे अपने नागरिकों को ऐसी हरकतें करने से रोकें. किसानों ने मांग की है कि खेतों के आस-पास सुरक्षा और गश्त बढ़ाई जाए, जिससे किसान बिना किसी डर के अपनी जमीनों पर खेती कर सकें और सुरक्षित महसूस करें. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें ग्रामीणों का आरोप है कि जब ये युवक भारतीय खेतों से सब्जियां बटोर रहे थे, तब सीमा के दूसरी तरफ ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ के जवान भी वहां मौजूद थे. लोगों का कहना है कि यह पूरी हरकत साफ-साफ दिखाई दे रही थी, इसके बावजूद दूसरी तरफ से उन युवकों को रोकने या टोकने की कोई कोशिश नहीं की गई. बॉर्डर पर खेती करना मुश्किलबॉर्डर के इलाकों में खेती करना पहले से ही मुश्किल काम है, और अब इस तरह की घटनाओं ने किसानों की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ा दी हैं. किसानों का कहना है कि वे दिन-रात एक करके, पैसे लगाकर फसल तैयार करते हैं. लेकिन जब फसल कटने का वक्त आता है, तो सीमा पार से होने वाली इस चोरी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस तरह की हरकतों की वजह से सीमावर्ती गांवों में रहने वाले किसान अब अपने ही खेतों में जाने से डरने लगे हैं और वहां बेवजह का तनाव पैदा हो रहा है. किसानों ने की मांग, ‘बांग्लादेशी अधिकारियों से बात करे प्रशासन’इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और किसानों ने भारतीय प्रशासन और सुरक्षा बलों से कड़े कदम उठाने की अपील की है. ग्रामीणों का कहना है कि भारतीय अधिकारियों को इस मुद्दे पर बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ बात करनी चाहिए, ताकि वे अपने नागरिकों को ऐसी हरकतें करने से रोकें. किसानों ने मांग की है कि खेतों के आस-पास सुरक्षा और गश्त बढ़ाई जाए, जिससे किसान बिना किसी डर के अपनी जमीनों पर खेती कर सकें और सुरक्षित महसूस करें. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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बिना लाल मिर्च-हल्दी से बनता है राजस्थान का ये सफेद चिकन, जानें...

X न लाल रंग, न तीखे मसाले…फिर भी स्वाद में लाजवाब है राजस्थान का सफेद चिकन   Rajasthani Safed Chicken Recipe: राजस्थान अपनी समृद्ध पाक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है और सफेद चिकन (सफेद मांस) यहां के शाही व्यंजनों में खास स्थान रखता है. इस अनोखी डिश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लाल मिर्च और हल्दी का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे इसका रंग पूरी तरह सफेद बना रहता है. दही, काजू, बादाम और अन्य ड्राई फ्रूट्स से तैयार की जाने वाली इसकी क्रीमी ग्रेवी इसे बेहद स्वादिष्ट बनाती है. मेवाड़ और मारवाड़ की शाही रसोई से जुड़ा यह व्यंजन आज भी लोगों की पहली पसंद है, खासकर उन लोगों के लिए जो हल्के मसालों वाला भोजन पसंद करते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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