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Ansiba Hassan Complaint | Ansiba Hassan Movie | कौन है ये खूबसूरत...

होमताजा खबरदेश कौन है ये खूबसूरत अभिनेत्री अनसिबा हसन, जिसने साथी कलाकार पर किया केस? Last Updated:June 09, 2026, 20:02 IST Actress Ansiba Hassan : मलयालम सिनेमा की मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री अनसिबा हसन इन दिनों केरल में भारी चर्चा का विषय बनी हुई हैं. एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) की पूर्व संयुक्त सचिव अनसिबा ने अपने ही साथी अभिनेता टिनी टॉम के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद वे खुद पुलिस स्टेशन पहुंचीं. Mollywood News: केरल के फिल्म उद्योग यानी मलयालम सिनेमा से इन दिनों एक के बाद एक बड़ी और चौंकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं. अभिनेताओं और एसोसिएशन के बीच आंतरिक खींचतान अब खुलकर पुलिस थानों की दहलीज तक पहुंचने लगी है. ताजा मामला केरल के कोच्चि शहर से सामने आया है, जहां फिल्म ‘दृश्यम’ (Drishyam) फेम बेहद खूबसूरत और चर्चित अभिनेत्री अनसिबा हसन (Ansiba Hassan) पूरे राज्य में चर्चा और विवाद का केंद्र बन गई हैं. अनसिबा ने अपने ही सह-कलाकार और इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता टिनी टॉम (Tini Tom) के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है, जिसके बाद केरल की राजनीति और सिनेमाई हलकों में हलचल तेज हो गई है. सोमवार को इस मामले में उस समय नया मोड़ आया जब खुद अभिनेत्री अनसिबा हसन कोच्चि के कडावंथरा पुलिस स्टेशन में पुलिस अधिकारियों के सामने पेश हुईं. मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों के सबसे बड़े संगठन ‘एएमएमए’ की पूर्व संयुक्त सचिव रह चुकीं अनसिबा हसन ने पिछले दिनों अभिनेता टिनी टॉम के खिलाफ एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी. क्यों केरल की यह खूबसूरत अभिनेत्री थाने पहुंची? अभिनेत्री द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर कडावंथरा पुलिस ने इस मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. जांच के इसी सिलसिले में पुलिस ने अनसिबा हसन को पूछताछ और उनके दावों की पुष्टि के लिए स्टेशन बुलाया था, जहां वे अपने वकीलों के साथ उपस्थित हुईं और अपना बयान दर्ज कराया. हालांकि, शिकायत के तकनीकी पहलुओं और आरोपों की प्रकृति को पुलिस ने अभी पूरी तरह गोपनीय रखा है. #WATCH | Kochi, Keralam: Actor Ansiba Hassan, former joint secretary of AMMA (Association of Malayalam Movie Artistes), appeared before the Kadavanthra police station, as part of the preliminary investigation into a complaint she filed against fellow actor Tini Tom. pic.twitter.com/I9pGeUtK2b Source link

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बंगाल में मंद‍िर का नाम क्‍यों बदला? ओड‍िशा के मुख्‍यमंत्री ने की...

होमताजा खबरदेश बंगाल में मंद‍िर का नाम क्‍यों बदला? ओड‍िशा के मुख्‍यमंत्री ने की थी श‍िकायत Last Updated:June 09, 2026, 18:59 IST ओड‍िशा की बीजेपी सरकार एक मंद‍िर का नाम बदलवाने पर अड़ गई और आख‍िरकार बंगाल की सुवेंदु सरकार को फैसला लेना ही पड़ा. ममता सरकार में बने मंद‍िर का नाम आनन फानन में बदल द‍िया गया. बंगाल के दीघा में बना जगन्‍नाथ मंद‍िर. स्‍टेशनों, कॉलोन‍ियों का नाम बदलते तो आपने सुना होगा, लेकिन अब मंद‍िर का नाम बदला गया है. जी हां, ममता बनर्जी जब बंगाल की सीएम थीं, तो उन्‍होंने एक मंद‍िर बनवाया, और नाम रख द‍िया ‘जगन्‍नाथ धाम’, ओड‍िशा के सीएम ने इस पर आपत्‍त‍ि जताई. उन्‍होंने कहा क‍ि धाम तो स‍िर्फ चार हैं और जगन्‍नाथ धाम ओड‍िशा में है. इसल‍िए यह नाम ठीक नहीं. तब तो ममता नहीं मानीं और उन्‍होंने बीजेपी की आप‍त्‍त‍ियों को स‍िरे से खार‍िज कर द‍िया. लेकिन जैसे ही बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी, ओड‍िशा की सरकार फ‍िर हरकत में आई. इस बार बकायदा पुरी ने बीजेपी सांसद संबित पात्रा सीएम का पत्र लेकर खुद सुवेंदु अध‍िकारी के पास पहुंच गए. और आख‍िरकार ‘जगन्‍नाथ धाम’ से धाम शब्‍द हटाकर ‘जगन्‍नाथ मंद‍िर’ कर द‍िया गया. भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से अपनी मुलाकात पर कहा, अप्रैल 2025 में तत्कालीन बंगाल सरकार ने दीघा में जो जगन्नाथ मंदिर की स्थापना की थी, उसे जगन्नाथ धाम का नाम दिया था. हमें जगन्नाथ मंदिर के प्रचार-प्रसार में कोई आपत्ति नहीं है. हर जगह जगन्नाथ मंदिर खुलना चाहिए क्योंकि प्रभु के भक्त हर जगह हैं लेकिन धाम केवल चार ही हैं. उस समय हमारे मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और हम सभी ने इस बात की आलोचना की थी कि ‘धाम’ नाम नहीं होना चाहिए… आज मैं एक दूत बनकर, मुख्यमंत्री की चिट्ठी को लेकर बंगाल आया और मैंने ये चिट्ठी बंगाल के मुख्यमंत्री को सौंपी. उसके बाद आज निर्णय हुआ कि ‘धाम’ शब्द हटा दिया जाएगा और यह केवल जगन्नाथ मंदिर होगा… जगन्‍नाथ धाम चार धामों में से एक ओडिशा में स्थित जगन्‍नाथ मंद‍िर को हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक माना जाता है. सनातन परंपरा में बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी को ही चार धाम का दर्जा प्राप्त है. इसी वजह से ओडिशा के धार्मिक संगठनों, संतों और राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई कि दीघा के मंदिर को जगन्नाथ धाम कहना धार्मिक परंपरा के खिलाफ है और इससे भ्रम पैदा हो सकता है. उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर चिंता जताई थी. ओडिशा सरकार का तर्क था कि किसी नए मंदिर को धाम कहना उचित नहीं है, क्योंकि श्री जगन्नाथ धाम की पहचान सदियों से पुरी से जुड़ी हुई है. राज्य सरकार ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार तक अपनी आपत्ति पहुंचाई थी. सांस्‍कृ‍त‍िक पहचान से जुड़ा मामला यह विवाद सिर्फ नाम का नहीं था, बल्कि धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ था. ओडिशा में बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि श्री जगन्नाथ धाम की पहचान पुरी से अलग नहीं की जा सकती. ऐसे में दीघा मंदिर से धाम शब्द हटाने के फैसले को ओडिशा सरकार और जगन्नाथ भक्तों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, इससे दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चल रहे एक संवेदनशील विवाद के शांत होने की भी उम्मीद बढ़ गई है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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माओवादियों की खतरनाक तैयारी बेनकाब; जंगल से निकले बम, ग्रेनेड और राइफलें…...

होमताजा खबरदेश माओवादियों की खतरनाक तैयारी बेनकाब; जंगल से निकले बम, ग्रेनेड और राइफलें Last Updated:June 09, 2026, 17:49 IST मलकानगिरी के एसपी विनोद पाटिल ने बताया कि सरेंडर करने वाले माओवादियो ने खुफिया जानकारी दी थी, जिसके बाद पुलिस और बीएसएफ ने जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया. मैथिली थाना क्षेत्र के किरमिती जंगल में सुरक्षा बलों ने अभियान चलाया, जहां माओवादियों के एक गुप्त ठिकाने का पता चला. वहां काफी मात्रा में हथियार छिपाकर रखे गए थे. ख़बरें फटाफट सुरक्षाबलों ने जंगल से हथियारों का जखीरा बरामद किया है. (एएनआई) ओडिशा. सुरक्षा बलों ने ओडिशा-छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्र में माओवादियों के एक गुप्त ठिकाने से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, उपकरण और अन्य सामान बरामद किया. एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. मलकानगिरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनोद पाटिल ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर जिला स्वैच्छिक बल (डीवीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने मंगलवार सुबह मैथिली थाना क्षेत्र के किरमिती और कटुआपदार के वन क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया. यह क्षेत्र ओडिशा-छत्तीसगढ़ की सीमा पर बस्तर जिले के दुर्वा थाना क्षेत्र से सटा हुआ है. एसपी ने कहा कि तलाशी अभियान के दौरान भारी मात्रा में हथियार, आईईडी, ग्रेनेड और अन्य सामान बरामद किए गए. पुलिस के अनुसार, बरामद किए गए सामान में एक इंसास लाइट मशीन गन (एलएमजी), दो इंसास राइफल, दो टिफिन बम, आठ किलोग्राम आईईडी, एक ग्रेनेड, एक एके मैगजीन, गन पाउडर, बैटरी और एक इलेक्ट्रिक डेटोनेटर शामिल हैं. ऐसा संदेह है कि ये विस्फोटक और अन्य सामग्रियां माओवादी कैडर के लिए थीं जिनका उद्देश्य निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा बलों के खिलाफ इस्तेमाल करना और अपनी विनाशकारी गतिविधियों को अंजाम देना था. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Malkangiri,Odisha Source link

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India Warns Pakistan : PoK Protests | ‘दुनिया देख रही है, इंसाफ...

होमताजा खबरदेश ‘दुनिया देख रही है, इंसाफ होगा’, PoK में बर्बरता पर भारत की पाक को चेतावनी Last Updated:June 09, 2026, 16:46 IST पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली जैसे बुनियादी हकों की आवाज उठा रही जनता पर मुनीर की सेना खून की होली खेल रही है. सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 30 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है. इस बर्बरता पर भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दी है कि PoK में हो रहे जुल्म को पूरी दुनिया देख रही है और मानवाधिकारों के इस हनन के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जवाबदेह होना पड़ेगा. विदेश मंत्रालय की पाकिस्तान को चेतावनी नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में इस समय जुल्म और हैवानियत का खूनी खेल चल रहा है. रोटी, बिजली और हक की आवाज उठाने वाले बेकसूर नागरिकों पर मुनीर की सेना गोलियां बरसा रही है. पाकिस्तान की आर्मी अब तक 30 से ज्यादा लोगों की लाशें बिछा चुकी है और 200 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. अब पीओके के लोगों की चीख-पुकार सुनकर भारत दहाड़ पड़ा है. विदेश मंत्रालय ने इस बर्बरता पर पाकिस्तान को सीधी और सख्त चेतावनी दी है कि दुनिया सब देख रही है और इंसाफ होना चाहिए. PoK मुनीर ने बिछाईं 30 लाशें! कब्जे वाले कश्मीर को अपना बताने वाले पाकिस्तानी हुक्मरान आज अपने ही लोगों के खून के प्यासे हो चुके हैं. रावलकोट शहर में खुलेआम नागरिकों पर गोलियां बरसाई गई हैं. सड़कों पर चारों तरफ लाशें बिछी हुई हैं और मुनीर सरकार इस बर्बरता को छुपाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. भारत की खुली चेतावनी: ‘दुनिया देख रही है, इंसाफ होगा!’ इस खूनी खेल के बाद अब भारत ने पाकिस्तान को बहुत ही कड़े शब्दों में ललकारा है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ-साफ कह दिया है कि PoK में जो कुछ भी हो रहा है, उसे पूरी दुनिया देख रही है. भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह अपने अत्याचारों और जुल्मों के लिए तैयार रहे, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे इन पापों के लिए जरूर जिम्मेदार ठहराएगा! भारत की इस दो टूक चेतावनी से इस्लामाबाद में हड़कंप मचना तय है. पाकिस्तान में नाकामी छुपाने के लिए फर्जी खबरों का ड्रामा! भारत ने पाकिस्तान के उस गंदे खेल को भी बेनकाब कर दिया है, जिसके तहत वो अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने दुनिया को बताया है कि पाकिस्तान लगातार फर्जी खबरों, एडिटेड वीडियो और झूठे प्रोपेगैंडा का सहारा ले रहा है. ये सब अपनी इज्जत बचाने और मानवाधिकारों के भयानक उल्लंघन से लोगों का ध्यान भटकाने का एक घटिया तरीका है. पाकिस्तान का ये झूठ अब किसी भी हाल में काम नहीं आने वाला है और दुनिया उनके काले कारनामों को देख रही है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है! भारत ने एक बार फिर दुनिया को ये स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है. PoK में जो बेकसूर नागरिक मारे जा रहे हैं और उन पर जो जुल्म हो रहा है, उस पर भारत की पैनी नजर है. पाकिस्तान चाहे जितने झूठ फैला ले, चाहे जितने पैंतरे बदल ले लेकिन उसके अत्याचारों का सच अब दुनिया से छुप नहीं सकता. मानवाधिकारों की सरेआम धज्जियां! PoK में इंटरनेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, ताकि जुल्म की ये खौफनाक तस्वीरें बाहर न आ सकें. वहां के लोगों का जीना मुहाल हो रखा है. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर बैन लगाकर लोगों की आवाज को हमेशा के लिए कुचलने की कोशिश की जा रही है. महंगाई, बेरोजगारी और बिजली की भारी किल्लत से जूझ रही जनता जब भी अपने हक के लिए सवाल पूछती है, तो उन्हें गोलियों से भून दिया जाता है. ये मानवाधिकारों का सबसे बड़ा और नंगा रूप है जो पाकिस्तान में चल रहा है. About the Author Utkarsha Srivastava Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of News18 Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

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खेती के भविष्य को बदलने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय में शोध पर...

Last Updated:June 09, 2026, 15:55 IST कृषि विभाग की शोधार्थी नेहा टमाटर की विभिन्न किस्मों और उसके हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कर रही हैं. उनके शोध का उद्देश्य ऐसी तकनीक और किस्मों की पहचान करना है, जिससे टमाटर की गुणवत्ता बेहतर हो, उत्पादन बढ़े और किसानों को अधिक मुनाफा मिल सके. टमाटर एक ऐसी फसल है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. ऐसे में इसकी बेहतर किस्मों और उत्पादन तकनीकों पर किया जा रहा शोध किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है. ख़बरें फटाफट गोरखपुरः खेती को आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का कृषि विभाग लगातार नए प्रयोग और शोध कार्यों में जुटा हुआ है. यहां होने वाले शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है. इसी कड़ी में विभाग की दो छात्राएं इन दिनों ऐसे शोध कार्य कर रही हैं, जो भविष्य में किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं. हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कृषि विभाग की शोधार्थी नेहा टमाटर की विभिन्न किस्मों और उसके हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट पर रिसर्च कर रही हैं. उनके शोध का उद्देश्य ऐसी तकनीक और किस्मों की पहचान करना है, जिससे टमाटर की गुणवत्ता बेहतर हो, उत्पादन बढ़े और किसानों को अधिक मुनाफा मिल सके. टमाटर एक ऐसी फसल है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. ऐसे में इसकी बेहतर किस्मों और उत्पादन तकनीकों पर किया जा रहा शोध किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है. ऑर्गेनिक यूरिया पर अध्ययन वहीं विभाग की दूसरी शोधार्थी दिव्या मेरीगोल्ड (गेंदा) की खेती में ऑर्गेनिक यूरिया के प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं. उनके शोध का मकसद यह जानना है कि जैविक उर्वरकों के उपयोग से फूलों की गुणवत्ता, उत्पादन और लागत पर क्या असर पड़ता है. यदि यह शोध सफल होता है तो किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन का विकल्प मिल सकता है. साथ ही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. कृषि विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि, इस तरह के शोध भविष्य की खेती को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. विश्वविद्यालय में केवल यही दो शोध नहीं चल रहे हैं, बल्कि विभिन्न फसलों और कृषि तकनीकों पर लगातार अध्ययन किया जा रहा है. इससे पहले भी यहां ‘काला गेहूं समेत कई विशेष फसलों पर शोध किए जा चुके हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. खेती के भविष्य को बदलने की कोशिश विशेषज्ञों के अनुसार विश्वविद्यालय में विकसित होने वाली नई तकनीकें और फसल किस्में किसानों तक पहुंचने के बाद खेती को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बना सकती हैं. यही कारण है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय का कृषि विभाग पूर्वांचल में कृषि नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है, जहां तैयार होने वाले शोध भविष्य की खेती की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Gorakhpur,Uttar Pradesh Source link

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10 जून को टूटेगा नेहरू का दशकों पुराना रिकॉर्ड… वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश...

होमवीडियोदेश EXCLUSIVE: 10 जून को टूटेगा नेहरू का दशकों पुराना रिकॉर्ड… वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने बताई बड़ी वजह X EXCLUSIVE: 10 जून को टूटेगा नेहरू का दशकों पुराना रिकॉर्ड… वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने बताई बड़ी वजह   EXCLUSIVE INTERVIEW: 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के लिए एक खास तारीख बनने जा रही है. इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे, जो अब तक देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम दर्ज था. रिकॉर्ड है लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहने का. दरअसल, जवाहरलाल नेहरू ने 1952 के पहले आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और 27 मई 1964 तक लगातार इस पद पर रहे. उनका यह कार्यकाल 4398 दिनों का माना जाता है. वहीं नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला था. अब 10 जून 2026 को उनके लगातार प्रधानमंत्री रहते हुए 4399 दिन पूरे हो जाएंगे और इसी के साथ वे इस रिकॉर्ड में नेहरू से आगे निकल जाएंगे. इस मुद्दे पर राज्यसभा के उपसभापति और वरिष्ठ पत्रकार रह चुके हरिवंश ने न्यूज 18 इंडिया से खास बातचीत में कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की यात्रा का भी महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक देश की नीतियां और शासन व्यवस्था उस सोच से प्रभावित रहीं जिसे अक्सर ‘नेहरूवियन कंसेंसस’ कहा जाता है. उनके मुताबिक 2014 के बाद भारतीय राजनीति और शासन में एक नया दौर शुरू हुआ. बातचीत के दौरान हरिवंश ने नेहरू के कार्यकाल, उनकी नीतियों और उस दौर की चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कई ऐतिहासिक घटनाओं, नेताओं के संस्मरणों और पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा कि नेहरू के योगदान के साथ-साथ उनके फैसलों पर गंभीर बहस भी होती रही है. वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को एक अलग राजनीतिक और प्रशासनिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Sonia Gandhi Emotional Politics | pm modi | mamata mayawati | मोदी...

Sonia Gandhi Emotional Politics : नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को आयोजित इंडिया गठबंधन की महाबैठक से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने भारतीय राजनीति के कई पुराने पन्नों को एक बार फिर से पलट दिया है. बैठक के दौरान जब तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी हॉल में पहुंचीं, तो वहां मौजूद कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने बेहद गर्मजोशी के साथ आगे बढ़कर उन्हें गले लगा लिया. सोनिया ने ममता को जादू की झप्पी दी. इस भावुक पल को देखकर वहां मौजूद राहुल गांधी ने हाथ जोड़े और ममता बनर्जी के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान तैर गई. साल 2018 में कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण में बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ भी सोनिया की गाल मिलाते एक तस्वीर आइकॉनिक बनी थी, लेकिन कुछ ही महीनों के बाद दोनों के रास्ते जुदा हो गए. भारतीय राजनीति में जब-जब विपक्ष एक मंच पर आता है, तब-तरह की तस्वीरें और समीकरण देश का ध्यान खींचते हैं. लेकिन कुछ तस्वीरें ऐसी होती हैं जो सिर्फ राजनीति नहीं बदलतीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं. अतीत में ऐसा ही एक ऐतिहासिक और बेहद भावुक पल कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान देखने को मिला था. उस वक्त पूरा विपक्ष बेंगलुरु के मंच पर एकजुट था, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर अखबारों की सुर्खियों तक केवल एक ही लम्हा छाया रहा था, वह था बसपा सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी का एक-दूसरे को बेहद गर्मजोशी और आत्मीयता से गले लगाना. 8 साल बाद एक बार वैसी ही तस्वीर आई है, जो सुर्खियां बटोर रहा है. लेकिन मोदी युग में इस तस्वीर के मायने बदल गए हैं. मोदी युग में इमोशनल तस्वीर के मायने बदल गए! सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर गंभीर चर्चा छिड़ गई है कि क्या सोनिया और ममता का मिलन रंग अलग गुल खिलाएगा? मोदी दौर की इस बेहद व्यावहारिक और आक्रामक राजनीति में क्या सोनिया गांधी का यह इमोशनल दांव वाकई रंग लाएगा? इतिहास गवाह है कि सोनिया गांधी ने अतीत में भी कई बार क्षेत्रीय क्षत्रपों को साधने के लिए इसी तरह के भावुक और आत्मीय कदम उठाए हैं, लेकिन वक्त बदलने के साथ ही वे सारे समीकरण ताश के पत्तों की तरह बिखर गए. जब मायावती ने झटक दिया था सोनिया गांधी का हाथ सोनिया गांधी की इस ‘इमोशनल पॉलिटिक्स’ के इतिहास को खंगालें तो उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ हुआ वाकया सबसे पहले जेहन में आता है. बेंगलुरु के बाद दिल्ली में भी एक बार फिर से सोनिया और मायावती एक राजनीतिक मंच नजर आए. विपक्ष को एकजुट करने की कवायद चल रही थी, तब सोनिया गांधी ने मंच पर मायावती के प्रति अपनी आत्मीयता दिखाते हुए उनके ‘गाल से गाल टकराए’ थे और उन्हें गले लगाने की कोशिश की थी. लेकिन अपनी सख्त और कड़क राजनीति के लिए मशहूर मायावती को सोनिया का यह भावुक अंदाज रास नहीं आया. मायावती ने बेहद असहज होते हुए तुरंत सोनिया गांधी का हाथ झटक दिया था और खुद को उनसे दूर कर लिया था. कब-कब काम नहीं आई सोनिया की ‘जादू की झप्पी’ वह तस्वीर चीख-चीखकर बयां कर रही थी कि क्षेत्रीय क्षत्रप कांग्रेस के इस बड़े भाई वाले और भावुक रवैये को अपने सियासी वजूद के लिए एक खतरे के रूप में देखते हैं. बाद के दिनों में भी बसपा और कांग्रेस के रिश्ते कभी सामान्य नहीं हो सके. ममता बनर्जी और मायावती के अलावा भी सोनिया गांधी ने कई बड़े नेताओं के साथ इस तरह के भावुक रिश्ते बनाने की कोशिश की, जो बाद में बुरी तरह फेल साबित हुए. के. चंद्रशेखर राव (KCR): तेलंगाना राज्य के गठन के समय बीआरएस तत्कालीन टीआरएस प्रमुख केसीआर ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. उस वक्त केसीआर ने सोनिया गांधी को ‘तेलंगाना की मां’ बताते हुए उनके पैर छुए थे और सोनिया ने उन्हें गले लगाया था. लेकिन जैसे ही राज्य का गठन हुआ, केसीआर ने कांग्रेस से पूरी तरह दूरी बना ली और दस साल तक राज्य में कांग्रेस को हाशिए पर रखा. टीएमसी में अगले 24 से 48 घंटे के अंदर एक और बड़ी टूट हो सकती है. मुलायम सिंह यादव: साल 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरी थी, तब सोनिया गांधी ने 272 सांसदों के समर्थन का दावा किया था. उस समय मुलायम सिंह यादव के साथ उनकी बेहद करीबी तस्वीरें सामने आई थीं. लेकिन आखिरी वक्त पर मुलायम सिंह ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाकर समर्थन देने से इनकार कर दिया, जिसने सोनिया को गहरे सियासी संकट में डाल दिया था. ममता के साथ इस ‘झप्पी’ के मायने? सोमवार को सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच जो गर्मजोशी दिखी, उसके पीछे दोनों नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक मजबूरियां और जरूरतें हैं. जानकार बताते हैं ममता बनर्जी इस समय अपने जीवन के सबसे बड़े सांगठनिक संकट से जूझ रही हैं. पश्चिम बंगाल में सत्ता जाने के बाद उनकी पार्टी के भीतर सांसदों की महाबगावत की खबरें आम हैं. ऐसे कठिन दौर में दिल्ली आकर सोनिया गांधी के गले मिलना ममता के लिए अपनी प्रासंगिकता और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख को बचाए रखने का एक बड़ा सहारा है. वहीं सोनिया गांधी जानती हैं कि ‘मोदी दौर’ की मजबूत भाजपा से सीधे टकराने के लिए कांग्रेस को इन क्षेत्रीय क्षत्रपों के अनुभवों की सख्त जरूरत है. नरेंद्र मोदी के इस दौर में राजनीति पूरी तरह से आंकड़ों, कैडर और जमीन पर मिलने वाले नतीजों पर शिफ्ट हो चुकी है. ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अतीत के कड़वे अनुभवों के बाद, सोनिया गांधी का यह भावुक दांव क्या ममता बनर्जी को कांग्रेस के करीब रख पाएगा, या फिर दिल्ली से कोलकाता लौटते ही यह जादू की झप्पी एक बार फिर पुराने सियासी ठंडे बस्ते में चली जाएगी. Source link

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‘नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना भारतीय लोकतंत्र के विकास को दर्शाता है’, HD...

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने पीएम मोदी और एनडीए सरकार की तारीफ की है. देवेगौड़ा ने एक विशेष लेख के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक कार्यकाल के महत्व को रेखांकित किया है, जिसमें उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सर्वाधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. इस लेख में देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जवाहरलाल नेहरू, दोनों के कार्यकालों तथा उनके समय की समकालीन परिस्थितियों की एक तुलनात्मक समीक्षा भी प्रस्तुत की है. ‘मोदी इसलिए इतने सफल हैं क्योंकि वे सोच-समझकर फैसले लेते हैं’ शीर्षक वाले लेख में एच.डी. देवेगौड़ा ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं. यह जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड से भी आगे है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह इस तथ्य का प्रमाण है कि भारत में लोकतंत्र न केवल कायम रहा, बल्कि लगातार मजबूत भी हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 में कई समान रूप से प्रतिभाशाली और समर्पित लोगों में से नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री चुना गया था और यह सब असाधारण परिस्थितियों में हुआ था. असल में जनता पर महात्मा गांधी के नैतिक प्रभाव ने ही इस नियुक्ति को सुनिश्चित किया था. इसके बाद नेहरू 1952 के पहले आम चुनाव में महात्मा गांधी का आशीर्वाद और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रतिष्ठा, दोनों को साथ लेकर उतरे थे. उस समय, कांग्रेस पार्टी का एकाधिकार था. उसे किसी राजनीतिक मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा. हालांकि आम चुनाव में 53 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया, लेकिन उनकी मौजूदगी और असर बहुत कम था. उस समय से लेकर 2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक, भारत एक बहुत अलग देश बन गया. आकार, विविधता और अर्थव्यवस्था के मामले में तो यह लगभग पहचान में न आने लायक हो गया. देवेगौड़ा ने लिखा कि यह कहना आकर्षक तो लगता है, लेकिन पूरी तरह उचित नहीं कि 2014 या 2024 की तुलना में 1952 में प्रधानमंत्री चुना जाना आसान था. उन्होंने कहा कि जब वह 1996 में प्रधानमंत्री बने थे, तब तक राजनीतिक परिस्थितियां, चुनावी पैमाना और प्रतिस्पर्धा पूरी तरह बदल चुके थे. देश अधिक जागरूक, अधिक जुड़ा हुआ और अधिक परिपक्व हो चुका था. देवेगौड़ा ने कहा, ‘नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के प्रधानमंत्रियों के लिए कोई विशेष चमक-दमक या रुतबा नहीं था. दूसरों के पास आगे बढ़ने के लिए कोई विशेषाधिकार, खानदानी रसूख या संरक्षण उपलब्ध नहीं था. नरेंद्र मोदी और मेरे मामले में हमारे पास वह सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी भी नहीं थी, जिसका कई अन्य प्रधानमंत्रियों ने लाभ उठाया था.’ उन्होंने कहा, ‘मेरा कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चला. मैं केवल 11 महीने तक प्रधानमंत्री रहा. मैं सोचता हूं कि पीएम मोदी किस आशीर्वाद से बिना किसी थकान के शीर्ष पर बने हुए हैं. न तो उनमें कोई थकान दिखाई देती है और न ही उन्हें चुनने वाले लोगों में. पद पर रहते हुए उनका स्टैमिना और सहनशक्ति वास्तव में विशेष है.’ एच.डी. देवेगौड़ा ने आगे लिखा, ‘यदि केवल राजनीतिक मुकाबले की बात करें तो 1952 के चुनावों में 53 पार्टियां मैदान में थीं, जबकि 2024 में मोदी का मुकाबला 2,593 पार्टियों से था. नेहरू के समय मतदाताओं की संख्या 17 करोड़ थी, जो 2014 तक बढ़कर 83 करोड़ हो गई. भारत की आबादी, जो 1952 में 34 करोड़ थी, आज 146 करोड़ से अधिक है.’ उन्होंने आगे कहा कि एक और बात जिसने मेरा ध्यान खींचा, वह यह है कि नेहरू की कैबिनेट में भारत की सामुदायिक, सांस्कृतिक और जातीय विविधता की झलक नहीं मिलती थी. यहां तक कि जब नेहरू प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तीसरे और आख़िरी कार्यकाल में थे, तब भी उनकी कैबिनेट में ज़्यादातर ऊंची जाति के पुरुष ही थे. नेहरू ने काका केलकर कमीशन की रिपोर्ट को ठुकरा दिया था, जिसमें दबे-कुचले और पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने की कोशिश की गई थी. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी की मौजूदा कैबिनेट अधिक विविधतापूर्ण है. इसमें 27 ओबीसी, 10 एससी और 5 एसटी सदस्य हैं. महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है. उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी ने अप्रैल 2026 में संसद की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव गंभीरता से रखा है, ताकि महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व मिल सके और देश अधिक मजबूत संघ के रूप में आगे बढ़ सके. उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित कराया जा चुका है. देवेगौड़ा ने कहा कि आज का भारत नेहरू के समय की तुलना में कहीं अधिक मुखर और सक्रिय लोकतंत्र है. जाति, संवैधानिक अधिकारों, नागरिक अधिकारों, लैंगिक समानता और पर्यावरण जैसे मुद्दों को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि नेहरू के समय देश की बड़ी आबादी अशिक्षित थी और लोकतांत्रिक सरकार से अपेक्षाओं को लेकर भी स्पष्ट समझ नहीं थी. आज के नागरिक, हमारे देश और लोकतंत्र की भलाई के लिए ज़्यादा पढ़े-लिखे और जागरूक हैं. उनकी नज़र से कुछ भी नहीं बचता. उन्होंने कहा, ‘जवाहरलाल नेहरू को अधिक से अधिक आधा दर्जन अखबारों से ही जूझना पड़ता था, जबकि पीएम मोदी को हर समय लाखों लोगों की नजरों का सामना करना पड़ता है. क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आलोचना बिना पुष्टि वाली, अनुचित और बहुत कठोर व व्यक्तिगत भी हो सकती है. साथ ही, उन्हें मुख्यधारा की प्रेस की चौबीसों घंटे होने वाली आलोचना और कभी-कभी दुश्मनी का भी सामना करना पड़ता है. नेहरू के समय में टेलीविजन न्यूज नहीं थी.’ देवेगौड़ा ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री मोदी को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि उनकी देखरेख में भारत एक मजबूत लोकतंत्र बना हुआ है. भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाए रखने की उनकी कोशिशें, उनकी कल्याणकारी नीतियां और सैन्य टकराव के समय निर्णय लेने की क्षमता विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. देशहित के मामलों में उन्होंने कभी समझौता नहीं किया.’ उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी केवल देश के कार्यकारी प्रमुख ही नहीं रहे हैं, बल्कि देश के प्रमुख मार्गदर्शक भी रहे हैं. उन्होंने लगातार संवेदनशीलता के साथ समाज के हर वर्ग से संवाद किया है. मैं उनका ‘मन की बात’ कार्यक्रम कभी नहीं छोड़ता. मैं उन

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Delhi monsoon forecast | IMD monsoon prediction | Delhi NCR weather |...

होमफोटोदेश दिल्‍ली-NCR वालों! निकाल लो छतरी-रेनकोट, आने वाला है मानसून,IMD ने बता दी डेट Last Updated:June 09, 2026, 11:51 IST नई दिल्‍ली. दिल्ली-एनसीआर में मानसून अब ज्यादा दूर नहीं है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 25 से 30 जून के बीच दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में दक्षिण-पश्चिम मानसून पहुंच सकता है. इसके साथ ही लंबे इंतजार के बाद लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है. दिल्ली-एनसीआर में मानसून अब ज्यादा दूर नहीं है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 25 से 30 जून के बीच दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में दक्षिण-पश्चिम मानसून पहुंच सकता है. इसके साथ ही लंबे इंतजार के बाद लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है(PTI) . पिछले साल यानी 2025 में मानसून 29 जून को दिल्ली पहुंचा था, जो सामान्य डेट 27 जून से दो दिन बाद था. इस बार भी मौसम विभाग ने 25 से 30 जून के बीच मानसून पहुंचने का अनुमान जताया है(PTI). इस वर्ष मानसून ने केरल में 1 जून के बजाय 4 जून को दस्तक दी, यानी सामान्य से तीन दिन देरी से. इसके बावजूद मौसम विभाग को उम्मीद है कि मानसून जून के अंतिम सप्ताह तक दिल्ली पहुंचेगा और इसके बाद हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर की ओर तेजी से पहुंचेगा(PTI). Add News18 as Preferred Source on Google मानसून के इंतजार के बीच दिल्ली में गर्मी का असर बरकरार है. दो दिन बाद आसमान में आंशिक बादल छाए रहने और गरज-चमक की संभावना मौमस विभाग ने भी जताई गई है(PTI). मानसून के इंतजार के बीच दिल्ली में गर्मी का असर बरकरार है. दो दिन बाद आसमान में आंशिक बादल छाए रहने और गरज-चमक की संभावना मौमस विभाग ने भी जताई गई है(PTI). 11 जून के आसपास मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है. आईएमडी ने गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है, जबकि 12 जून तक यह दौर जारी रह सकता है. बारिश के बाद अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है.. (PTI) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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अब डोसा बनाने के लिए नहीं करना होगा इंतजार, जानिए इंस्टेंट तरीका...

Last Updated:June 09, 2026, 10:47 IST बन डोसा एक आसान और हेल्दी नाश्ते का विकल्प है, जिसे सिर्फ 1 कप सूजी से तुरंत तैयार किया जा सकता है. बिना ज्यादा तैयारी और बिना किसी फर्मेंटेशन के यह डोसा बन जाता है. इसका मुलायम और हल्का कुरकुरा स्वाद बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आता है. व्यस्त सुबह के लिए यह एक परफेक्ट इंस्टेंट ब्रेकफास्ट रेसिपी है. भारतीय घरों में डोसा लंबे समय से सबसे पसंदीदा नाश्तों में से एक माना जाता है. आमतौर पर लोग मसाला डोसा, सादा डोसा या रवा डोसा खाना पसंद करते हैं, लेकिन अगर आप डोसे का एक अलग और दिलचस्प रूप चखना चाहते हैं, तो बन डोसा आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह खास डोसा देखने में पैनकेक जैसा लगता है और अपने नरम, स्पंजी टेक्सचर तथा हल्के मीठे स्वाद के कारण बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. बन डोसा दक्षिण भारतीय व्यंजनों से प्रेरित एक अनोखी रेसिपी है, जिसे बहुत कम सामग्री में आसानी से तैयार किया जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए लंबी तैयारी या फर्मेंटेशन की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि व्यस्त सुबह में भी इसे झटपट बनाया जा सकता है. इसके अलावा बच्चों के टिफिन, शाम के हल्के नाश्ते या वीकेंड ब्रंच के लिए भी यह एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google सबसे पहले एक बड़े बाउल में सूजी, दही, चीनी और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद धीरे-धीरे पानी डालते हुए एक स्मूद और गाढ़ा घोल तैयार करें. घोल की कंसिस्टेंसी पैनकेक बैटर जैसी होनी चाहिए. अब इसे लगभग 15 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए. इस बीच एक छोटी कड़ाही में घी गर्म करें. उसमें राई, करी पत्ते, उरद दाल और चना दाल डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. जब तड़का अच्छी खुशबू देने लगे, तो उसे तैयार घोल में डालकर अच्छी तरह मिला दें. अब घोल में स्वादानुसार नमक और एक चुटकी बेकिंग सोडा डालें. मिश्रण को हल्के हाथों से फोल्ड करें. इसके बाद गर्म तवे पर एक कलछी घोल डालें, लेकिन इसे फैलाएं नहीं. बन डोसा सामान्य डोसे की तुलना में थोड़ा मोटा रखा जाता है. तवे को ढककर मध्यम आंच पर पकाएं. जब नीचे की सतह सुनहरी और हल्की कुरकुरी हो जाए. तो इसे पलट दें और दूसरी तरफ से भी गोल्डन ब्राउन होने तक सेंक लें. यह हल्का मीठा और स्पंजी बन डोसा नारियल की चटनी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है. वहीं, मीठा पसंद करने वाले लोग इसे शहद के साथ भी परोस सकते हैं. स्वाद और बनावट का यह अनोखा मेल एक बार खाने के बाद बार-बार बनाने का मन कर देगा. अगर आप रोजाना के नाश्ते में कुछ नया और खास शामिल करना चाहते हैं, तो बन डोसा की यह आसान रेसिपी जरूर ट्राई करें. आपको हेल्दी और टेस्टी दोनों का मजा मिलेगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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