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पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का तांडव, कर्मचारियों की बेरहमी से पिटाई, CCTV...

होमवीडियोदेश पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का तांडव, कर्मचारियों की बेरहमी से पिटाई, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात X पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का तांडव, कर्मचारियों की बेरहमी से पिटाई, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात   पंजाब के फरीदकोट में एक पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का मामला सामने आया है. कुछ युवकों ने पंप कर्मचारियों पर हमला कर उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी. घटना की पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है. पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है. इस घटना ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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40000 रिपोर्ट में क्या खोज रही माकपा, केरल में वामपंथ को क्यों...

होमताजा खबरदेश 40000 रिपोर्ट में क्या खोज रही माकपा, केरल में वामपंथ को क्यों लगा झटका? Last Updated:June 09, 2026, 23:19 IST माकपा लीडरशिप का कहना है कि सभी चुनौतियों और झटकों के बावजूद सीपीआई(एम) वामपंथी विचारधारा के साथ आगे बढ़ती रहेगी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच व्यापक संवाद स्थापित करेगी. ख़बरें फटाफट माकपा ने कांग्रेस-भाजपा की ‘मिलीभगत’ का आरोप लगाया. तिरुवनंतपुरम. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) ने आत्ममंथन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पार्टी की राज्य समिति ने चुनाव समीक्षा रिपोर्ट सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है और चुनावी नतीजों से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का फैसला किया है. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन को भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ाना है, इस पर अगस्त में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी. साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया गया है. पार्टी के अनुसार, राज्यभर की लगभग 40 हजार इकाइयों ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट जमा की है. इन रिपोर्टों के आधार पर चुनावी हार के कारणों का विश्लेषण किया गया है. पार्टी ने स्वीकार किया कि चुनाव में उसे बड़ा झटका लगा और राज्य समिति हार की गंभीरता का सही आकलन करने में पूरी तरह सफल नहीं रही. पार्टी का मानना है कि भारत समेत दुनिया भर में दक्षिणपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है, जिसका असर केरल की राजनीति पर भी देखने को मिला. पार्टी ने कहा कि एलडीएफ सरकार के कामकाज को आम तौर पर लोगों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन कुछ क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका. विशेष रूप से निर्माण क्षेत्र और पारंपरिक रोजगार से जुड़े लोगों में असंतोष देखने को मिला. कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा के वोट कांग्रेस नीत यूडीएफ को स्थानांतरित हुए, जबकि कुछ सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच अप्रत्यक्ष सहयोग भी देखने को मिला. पार्टी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा. सीपीआई(एम) के अनुसार कांग्रेस नेताओं ने लगातार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को लेकर सवाल उठाए और राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की. पार्टी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के कुछ बयानों और कांग्रेस की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की प्राथमिकता केवल सत्ता हासिल करना है. पार्टी ने यह भी माना कि सरकार की उपलब्धियों और कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में कमी रही. इसके अलावा, कुछ विवादित मुद्दों पर भी पार्टी ने आत्ममंथन किया. नेतृत्व ने स्वीकार किया कि समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले कुछ बयानों का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं किया जा सका, जिससे गलत संदेश गया. पार्टी ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादों के विपरीत फैसले लिए जा रहे हैं. निजीकरण को बढ़ावा देने और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कमजोर करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. कुछ प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं. इस बीच पार्टी ने जनता से सीधे संवाद स्थापित करने के लिए “पुथुवाझिकल” नाम से एक व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी जारी की है. इसके माध्यम से आम लोग संगठन और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अपने सुझाव दे सकेंगे. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी चुनौतियों और झटकों के बावजूद सीपीआई(एम) वामपंथी विचारधारा के साथ आगे बढ़ती रहेगी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच व्यापक संवाद स्थापित करेगी. वहीं, सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए देवास्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्माकुमार को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है. वीणा विजयन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजे गए नोटिस पर पार्टी ने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत है और वह स्वयं इसका जवाब देंगी. पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस मामले को सीपीआई(एम) से जोड़ने की किसी भी राजनीतिक कोशिश का विरोध किया जाएगा. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Thiruvananthapuram,Kerala Source link

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पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाएगी, अमित शाह खुद...

होमताजा खबरदेश पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाएगी, सिंधु जल संधि पर भारत का नया रुख Last Updated:June 09, 2026, 23:33 IST भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किये गए हमले और 26 लोगों की हत्या के अगले दिन पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कदमों के तहत 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है. ख़बरें फटाफट पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था. (पीटीआई) नई दिल्ली: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि आने वाले सालों में पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली से कोई पानी न मिले. पाटिल ने कहा कि संधि को खत्म नहीं किया गया है, बल्कि उसे रोक दिया गया है, और सीमा पार पानी के बहाव को रोकने की कोशिशें चल रही हैं. उन्होंने कहा, “यह संधि अभी भी कायम है; बल्कि, इसे अभी रोक दिया गया है. और जब से प्रधानमंत्री मोदी ने यह फैसला लिया है, तब से हर कोशिश की जा रही है कि वहां पानी की एक बूंद भी न जाए.” पाटिल ने कहा कि सरकार के सबसे ऊंचे स्तर पर इस मामले पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के निर्देशों के तहत, गृह मंत्री अमित शाह भी व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी कर रहे हैं, और हम इस पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. मेरा मानना ​​है कि काम तय समय-सीमा के भीतर आगे बढ़ रहा है. यह पक्का है – आने वाले सालों में पानी की एक बूंद भी नहीं जाएगी; मैं आपको इतना तो बता ही सकता हूं.” उनके ये बयान पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत के 1960 की संधि को रोकने के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद आए हैं. इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने संधि के तहत गठित मध्यस्थता अदालत (Court of Arbitration) के अधिकार क्षेत्र को मानने से इनकार कर दिया था. ट्रिब्यूनल द्वारा “अधिकतम पोंडेज” (maximum pondage) के मुद्दे पर हाल ही में दिए गए फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस अदालत को गैर-कानूनी तरीके से गठित मानता है और इसके किसी भी फैसले को नहीं मानेगा. जायसवाल ने कहा, “भारत इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह से खारिज करता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने गैर-कानूनी तरीके से गठित CoA (मध्यस्थता अदालत) के पिछले सभी फैसलों को मजबूती से खारिज किया था.” उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही, फैसला या निर्णय “अमान्य और शून्य” (null and void) है. भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि मध्यस्थता तंत्र संधि का उल्लंघन करके स्थापित किया गया था और उसने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े विवादों पर अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी है. इस बीच, पाकिस्तान में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. कराची में अभी पानी की भारी किल्लत है, और खबरों के मुताबिक शहर के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में पानी की आपूर्ति बाधित है. राजनीतिक नेताओं ने इस संकट के लिए प्रशासनिक विफलताओं को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि पाकिस्तान सिंधु प्रणाली के तहत भविष्य में पानी के बहाव को लेकर बढ़ती अनिश्चितता से जूझ रहा है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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एक्‍सक्‍लूस‍िव: टीएमसी में नया ट्विस्ट! सांसद पार्थ भौमिक ने दिल्ली का वो...

होमताजा खबरदेश टीएमसी में नया ट्विस्ट! पार्थ भौमिक ने छोड़ा दिल्ली का पार्टी दफ्तर वाला बंगला Last Updated:June 09, 2026, 23:34 IST ममता की पार्टी में नया खेला सामने आ गया है. पार्टी सांसद पार्थ भौमिक ने वह सरकारी बंगला खाली कर दिया है, ज‍िसे लंबे समय से द‍िल्‍ली में टीएमसी हेडक्‍वार्टर के रूप में जाना जाता था. इसी जगह बागी गुट मीटिंग क‍िया करता था. द‍िल्‍ली में टीएमसी का पावर सेंटर छ‍िना. टीएमसी में एक नया ट्व‍िस्‍ट आ गया है.टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक ने नई दिल्ली स्थित अपना वह सरकारी बंगला खाली कर द‍िया है, जहां से अब तक टीएमसी का द‍िल्‍ली दफ्तर चलता था. भौमिक ने इस बंगले की जगह एक फ्लैट आवंटित करने की मांग की थी, जिसे अब लोकसभा सचिवालय ने हरी झंडी दे दी है. न्यूज18 के पास वो डॉक्‍यूमेंट मौजूद है, ज‍िसमें इसकी जानकारी है. दिल्ली के लुटियंस जोन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थित बंगला नंबर 20 अब तक तृणमूल कांग्रेस का पावर सेंटर हुआ करता था. पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रहे और अब टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक का यह बंगला लंबे समय से दिल्ली में पार्टी के मुख्य दफ्तर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. लेकिन अब इस पते से टीएमसी का नाम हटने जा रहा है. क्‍योंक‍ि पार्थ भौमिक की मांग पर लोकसभा सचिवालय ने 9 जून को सांसद पार्थ भौमिक को नया बंगला दे द‍िया है. पार्थ भौमिक को अब कहां म‍िला बंगला पार्थ भौमिक को अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित बंगला नंबर 20 (टाइप VI आवास) की जगह ‘हुगली’ (टाइप VII आवास) में फ्लैट नंबर 501 आवंटित किया गया है. संसदीय आवास नियमों के तहत, लोकसभा सचिवालय ने सांसद को इस नए आवंटन को स्वीकार या अस्वीकार करने और अगले आठ दिनों के भीतर कब्जे से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया है. क्यों छिना बागी गुट का सबसे बड़ा ‘वार रूम’? पार्थ भौमिक के इस बंगले से शिफ्ट होने का मतलब सीधा और साफ है क‍ि टीएमसी दिल्ली में अपना बना-बनाया ठिकाना खोने जा रही है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड का यह बंगला टीएमसी के असंतुष्ट और बागी सांसदों का सबसे बड़ा वार रूम या ऑपरेशनल बेस हुआ करता था, जहां बैठकर पार्टी लाइन से अलग रणनीतियां बुनी जाती थीं. भौमिक के इस फैसले से बागी गुट के हाथ से दिल्ली की वो रणनीतिक जमीन खिसक गई है, जहां से वो अपनी सियासी गोटियां फिट करते थे. क्या यह ‘घर वापसी’ है या किसी नए तूफान की आहट? राजनीति में कोई भी कदम यूं ही नहीं उठाया जाता, खासकर तब जब मामला किसी बागी खेमे के बड़े चेहरे से जुड़ा हो. पार्थ भौमिक का लुटियंस दिल्ली के बड़े बंगले को छोड़कर फ्लैट में जाने का फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है. क्या यह टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व के दबाव में उठाया गया कदम है, या बागी गुट कोई नई और गुप्त रणनीति तैयार कर रहा है जिसके लिए उन्हें इस पुराने दफ्तर की जरूरत नहीं रही? वजह जो भी हो, लेकिन इस एक सचिवालय आदेश ने यह साफ कर दिया है कि टीएमसी के भीतर की अंदरूनी जंग अब एक बेहद दिलचस्प और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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तेलंगाना के खेत में 20 मगरमच्छ के बच्चे और 60 अंडे,

होमताजा खबरदेश खेत में रेंग रहे थे दर्जनों मगरमच्छ के बच्चे, पास जाकर खुला चौंकाने वाला राज Last Updated:June 09, 2026, 23:48 IST तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के मेलागिरी पेट गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब किसानों को एक खेत के पास करीब 20 मगरमच्छ के नवजात बच्चे और लगभग 60 अंडे दिखाई दिए. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी बच्चों व अंडों को सुरक्षित रेस्क्यू कर मंजिरा बांध स्थित मगरमच्छ प्रजनन केंद्र भेज दिया. प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने आशंका जताई है कि दो मादा मगरमच्छों ने पास-पास अपने घोंसले बनाए थे. तेलंगाना. संगारेड्डी जिले के मेलागिरी पेट गांव में सोमवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब ग्रामीणों और स्थानीय किसानों को एक खेत के पास भारी संख्या में मगरमच्छ के बच्चे और उनके अंडे दिखाई दिए. इलाके से गुजर रहे किसानों की नजर अचानक एक खेत पर पड़ी जहां करीब 20 मगरमच्छ के नवजात बच्चे रेंग रहे थे. थोड़ा और पास जाने पर उन्हें वहां लगभग 60 अंडे भी नजर आए. एक साथ इतने मगरमच्छों को देखकर ग्रामीण हैरान रह गए. किसानों ने बिना कोई देरी किए तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी. खबर मिलते ही वन अधिकारियों की टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गई. उन्होंने बेहद सावधानी बरतते हुए सभी 20 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया और सभी 60 अंडों को भी अपने कब्जे में ले लिया. शुरुआती जांच और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने बचाए गए सभी बच्चों और अंडों को तुरंत मंजिरा बांध स्थित मगरमच्छ प्रजनन केंद्र भेज दिया ताकि वहां उनकी सही तरीके से देखभाल और संरक्षण हो सके. वन अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में एक दिलचस्प बात सामने आई है. अधिकारियों के मुताबिक घटनास्थल की स्थिति को देखकर लगता है कि दो मादा मगरमच्छों ने एक-दूसरे के बिल्कुल करीब अपने घोंसले बनाए थे. मेलागिरी पेट गांव के पास ही मेलागिरी पेट परियोजना नाम की एक लघु सिंचाई परियोजना स्थित है. अधिकारियों को अंदेशा है कि मगरमच्छ पानी से बाहर निकलकर अंडा देने और घोंसला बनाने के लिए इस सुरक्षित सूखी जगह पर आए होंगे. हालांकि, वन विभाग की टीम ने इलाके में दो घंटे से अधिक समय तक सर्च ऑपरेशन चलाया लेकिन उन्हें कोई भी बड़ा मगरमच्छ दिखाई नहीं दिया. इस वजह से गांव वालों में अब भी दहशत का माहौल है. ग्रामीणों को डर है कि बड़े मगरमच्छ आसपास ही छिपे हो सकते हैं और वे किसी पर भी हमला कर सकते हैं. ग्रामीणों ने वन अधिकारियों से पुरजोर अपील की है कि वे वयस्क मगरमच्छों को भी जल्द से जल्द ढूंढकर वहां से सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करें. अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है और बड़े मगरमच्छों की तलाश जारी रखी है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Hyderabad,Telangana Source link

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वोट चोरी नहीं, अब सीट चोरी… राज्यसभा चुनाव में हाई वोल्टेज ड्रामा,...

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भाजपा का घेराव किया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह नामांकन रद्द होना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है और लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, सचिन पायलट और अन्य नेता भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचे. केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा कि यह लोकतंत्र का बुनियादी मामला है. हम तब तक यहीं बैठे रहेंगे जब तक वे हमें अंदर जाने की इजाजत नहीं देते. हम बहुत जिम्मेदार लोग हैं. पूर्व मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और सांसद यहां मौजूद हैं. पार्टी इस मुद्दे को हाईकोर्ट में चुनौती देगी या सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी, इस बारे में उसके नेताओं ने कुछ भी स्पष्ट नहीं बताया लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता और पार्टी के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने सुझाव दिया कि यह ऐसा मामला है जिसे सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए. कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि हमारी उम्मीदवार (मीनाक्षी नटराजन) के खिलाफ कोई एफआईआर या चार्जशीट नहीं है. उन्होंने बिना किसी वजह के हमारी उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया. हम यहां आए, लेकिन हमें अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है. हमने 2 घंटे पहले लिखित में जानकारी दी थी. जिस सीट पर हम जीत रहे थे, हमारी उम्मीदवार का नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया है. यहां कोई हमसे मिलने को तैयार नहीं है. वे कह रहे हैं कि चुनाव आयोग में कोई अधिकारी नहीं है. ऐसा पहली बार हुआ है कि सिर्फ एक नोटिस की वजह से राज्यसभा उम्मीदवार का नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया हो. उनके खिलाफ कोई केस या एफआईआर नहीं है. दूसरी ओर, मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह सब तब शुरू हुआ जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने जरूरी संख्या बल न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा. यह साफ हो गया कि वे संविधान और लोकतंत्र को कुचलने वाली राजनीति कर रहे थे. वे साफ तौर पर राज्यसभा चुनाव में हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने पहले मध्य प्रदेश में चुनावों को प्रभावित किया था. यह सिर्फ राज्यसभा सीट या किसी खास उम्मीदवार की बात नहीं है. यह ‘भारत की सोच’ और लोकतंत्र के लिए उस व्यापक संघर्ष की बात है जिसके लिए हमारे नेता राहुल गांधी आज देश के लिए एक अहम लड़ाई लड़ रहे हैं. सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र बचेगा, क्या भारत का संघीय ढांचा कायम रहेगा और क्या एक-पार्टी सिस्टम और तानाशाही थोपने की कोशिश नाकाम होगी. नटराजन ने भोपाल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जब सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं थी और भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतार दिया तभी यह स्पष्ट हो गया था कि भाजपा लोकतंत्र और संविधान को ‘कुचलने’ के प्रयास में है. नटराजन ने कहा, “अभी तक तो मामला वोट चोरी तक सीमित था, अब यह सीट चोरी हो गया है… जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायक एकजुट हैं तो उन्होंने उस कानूनी नोटिस की आड़ ली जिसे संज्ञान में ही नहीं लिया गया.” नटराजन ने कहा कि यह महज एक उम्मीदवारी के बारे में नहीं है, देश में एक गंभीर स्थिति है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत से इसका मुकाबला करेगी. इन घटनाओं से जुड़े कानूनी और चुनाव संबंधी आरोपों और जिस तरह से हमारे कानूनी विशेषज्ञों ने स्थिति को संभाला, उसे देखते हुए अधिकारी कानूनी आधार को यूं ही खारिज नहीं कर सकते थे और न ही कर सकते हैं. फिर भी, जो हुआ वह पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष का काम था. मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन रद्द होने पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई. भाजपा विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि इसे संविधान की जीत के तौर पर देखा जाना चाहिए क्योंकि गलत जानकारी इसी मंच पर सामने आई थी. नतीजतन, कांग्रेस पार्टी की असलियत सामने आ गई और मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया. अगर आपने यह फॉर्म ही ठीक से नहीं भरा है, तो संविधान के प्रति आपका सम्मान कहां है. भाजपा नेता राकेश सिंह ने कहा कि सच की जीत हुई है. उन्होंने जान-बूझकर यह बात छिपाई थी. फॉर्म अधूरा था और उन्होंने गलत जानकारी दी थी. रिटर्निंग ऑफिसर ने इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया. इसलिए, अब हम कह सकते हैं कि सच और ईमानदारी की जीत हुई है. मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं. आपराधिक मामले को जानबूझकर छिपाया गया था और गलत जानकारी दी गई थी. न्याय हुआ है और हमारे पार्टी कार्यकर्ता महेश केवट को लोगों का आशीर्वाद मिला है. भाजपा को लोकतंत्र में भरोसा है. वकील संकेत गुप्ता ने कहा कि सभी को यह समझना होगा कि भारतीय जनता पार्टी ने यह कानूनी लड़ाई कानूनी तरीकों से लड़ी. यह लड़ाई न्याय के अनुसार, चुनाव आयोग की गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लड़ी गई. मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना में एक केस चल रहा है. उन्हें इसकी जानकारी थी, और इसी जानकारी के साथ उन्होंने अपने वकील के जरिए जवाब दाखिल किया था. चूंकि उन्होंने एक आपराधिक मामले में जवाब दाखिल किया था, इसलिए यह जानकारी सामने आई. हमने फैसला और चुनाव आयोग की गाइडलाइंस पेश कीं. आज रिटर्निंग ऑफिसर ने फैसला सुनाया कि मीनाक्षी नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई. भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव, हमारी राज्य की लीडरशिप और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी की पूरी लीडरशिप ने मुझ जैसे एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी सौंपी है. इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं. भाजपा ने मुझे यह मौका और जिम्मेदारी दी है. जब भगवान श्री राम वनवास पर गए थे, तो उन्होंने केवट और निषाद राज को गले लगाया था.

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लैंडिंग से पहले बेकाबू हुआ पैसेंजर, गुस्‍से में तोड़ डाली प्‍लेन की...

होमताजा खबरदेश लैंडिंग से पहले बेकाबू हुआ पैसेंजर, गुस्‍से में तोड़ी प्‍लेन की विंडो, फिर… Last Updated:June 09, 2026, 22:00 IST Air India Flight Incident: चंडीगढ़ से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक पैसेंजर ने लैंडिंग से ठीक पहले प्लेन की खिड़की का शीशा तोड़ दिया. फ्लाइट AI1879 सेफली आईजीआई एयरपोर्ट पर लैंड करा लिया गया. वहीं आरोपी पैसेंजर को सीआईएसएफ के हवाले कर दिया गया है. फ्लाइट में बेकाबू हुए पैसेंजर ने प्‍लेन की विंडो ही तोड़ डाली. (प्रतीकात्‍मक इमेज) Airport News. एयर इंडिया की दिल्‍ली आ रही एक फ्लाइट में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्‍लेन में मौजूद एक पैसेंजर आपे से बाहर हो गया. पूरी तरह से बेकाबू हो चुके इस पैसेंजर प्‍लेन की विंडो पर तब तक वार करता रहा, जब तक विंडो का अंदरूनी शीशा टूट नहीं गया. इस दौरान, फ्लाइट क्रू ने पैसेंजर को काबू करने की खूब कोशिश की, लेकिन उनकी हर कोशिश बेकार साबित हुई. गनीमत रही कि फ्लाइट को सुरक्षित तरीके से दिल्‍ली एयरपोर्ट पर लैंड कर दिया गया. इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. सूत्रों के अनुसार, यह मामला रविवार को चंडीगढ़ से दिल्‍ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI1879 का है. प्‍लेन ने दिल्‍ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए डिसेंडिग शुरू ही की थी, तभी एक पैसेंजर अचानक से बेकाबू हो गया. पहले उसने तेज-तेज चीखना शुरू कर दिया. फ्लाइट में मौजूद अन्‍य पैसेंजर और क्रू मेंबर ने जब उसे समझाने की कोशिश की, तो शांत होने की वजह ज्‍यादा भड़क गया. अपना गुस्‍सा दिखाने के लिए उसने विंडो के शीशे पर हमला करना शुरू कर दिया. वह शीशे के टूटने तक लगातार उसपर वार करता रहा. वहीं, फ्लाइट का शीशा टूटने ही पैसेंजर के बीच हड़कंप मच गया. क्रू-मेंबर ने एक तरफ इस पैसेंजर पर काबू पाने की कोशिशें शुरू कर दीं. वहीं दूसरी तरह इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी कॉकपिट में मौजूद पायलट्स को दी गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए पायलट्स ने यह घटनाक्रम एटीसी के जरिए एयरपोर्ट ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (एओसीसी) और सिक्‍योरिटी ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (एसओसीसी) से साझा की. जानकारी मिलते ही सीआईएसएफ के कमांडोज एक्टिव हो गए. फ्लाइट के लैंड होते के बाद फ्लाइट क्रू ने आरोपी पैसेंजर को सीआईएसएफ के हवाले कर दिया. खाकी देखते ही बदल गए पैसेंजर के सुरमामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पैसेंजर लगातार आक्रामक व्यवहार कर रहा था और क्रू की चेतावनियों को नजरअंदाज कर रहा था. हालांकि जैसे ही उसे सीआईएसएफ के हवाले किया गया, उसका रवैया पूरी तरह से बदल गया. वह बार-बार माफी मांगने लगा और अपने व्यवहार पर अफसोस जताने लगा. बावजूद इसके, एयर इंडिया ने इस पूरे वाकिए के बारे में ब्‍यूरो ऑफ स‍िविल एविएशन सिक्‍योरिटी (बीसीएएस) और डायरेक्‍टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को रिपोर्ट भेज दी है. साथ ही, आरोपी पैसेंजर को अनरूली पैसेंजर की लिस्‍ट में डालने की कवायद भी शुरू कर दी गई है. पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिशसीआईएसएफ कर्मियों को देखते देखते ही बार-बार माफी मांगने वाले इस पैसेंजर ने एक बार फिर अपना रुख बदल लिया. सोमवार को मौका मिलते ही उसने पुलिस की निगरानी से निकलकर भागने की कोशिश की. हालांकि सीआईएसएफ की क्विक रिएक्‍शन टीम (क्‍यूआरटी) की एक्‍शन लेते हुए एक बार फिर दबोच लिया. इसके बाद उसे दोबारा पुलिस के हवाले कर दिया गया. पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह मूल रूप से पटना का रहने वाला है. पूछताछ के दौरान उसके माता-पिता ने पुलिस को बताया कि वह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहा है. परिवार ने अधिकारियों से अनुरोध किया था कि उसे पटना जाने की अनुमति दी जाए, लेकिन जांच पूरी होने तक ऐसा नहीं किया गया. 7 जून को चंडीगढ़ से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI1879 में एक पैसेंजर ने एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. क्रू ने निर्धारित सिक्‍योरिटी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए दिल्ली एयरपोर्ट की संबंधित एजेंसियों को सूचना दे दी गई थी. पूरी घटना के दौरान फ्लाइट, क्रू और बाकी पैसेंजर्स की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया. ऐसे मामलों में एयरलाइंस जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी है. कोई भी पैसेंजर ऐसा व्यवहार, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा या यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती हो, उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. घटना की जानकारी एविएशन रेगुलेटर को दे दी गई है और आगे की प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की जा रही है. – प्रवक्‍ता एयर इंडिया About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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JEE Advanced 2026: जेईई रिजल्‍ट पर उठे सवाल, पेपर-1 और पेपर-2 के...

Last Updated:June 09, 2026, 20:57 IST JEE Advanced 2026 Result: जेईई एडवांस्‍ड 2026 के रिजल्‍ट को लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं जिसके बाद अब IIT रुड़की ने इस पूरे विवाद पर जवाब दिया है. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्‍या है और आईआईटी ने क्‍या कहा है? ख़बरें फटाफट JEE Main Exam, JEE Advanced 2026: जेईई एडवांस्‍ड पर आईआईटी ने दी सफाई. JEE Advanced 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है. कई छात्रों ने दावा किया कि उनके Paper-1 और Paper-2 के अंकों में बेहद बड़ा अंतर देखने को मिला है. कुछ मामलों में यह अंतर 100 से ज्यादा अंकों का था. इसे लेकर छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हालांकि अब IIT रुड़की ने इस पूरे विवाद पर जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसा अंतर किसी गड़बड़ी, नकल या मूल्यांकन त्रुटि का संकेत नहीं है बल्कि इसे सांख्यिकीय सिद्धांतों की मदद से समझा जा सकता है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्कोर रिजल्ट आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई छात्रों और अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा किए. इसी दौरान अनन्या चोपड़ा नाम की एक यूजर ने एक छात्र का उदाहरण पोस्ट किया, जिसमें छात्र को Paper-1 में -3 अंक और Paper-2 में 104 अंक मिले थे.पोस्ट में कहा गया कि दोनों पेपर एक ही दिन आयोजित हुए सिलेबस भी एक जैसा था, फिर भी अंकों में इतना बड़ा अंतर कैसे हो सकता है. इसके बाद कई अन्य छात्रों ने भी अपने स्कोर साझा किए जिनमें 100 से अधिक अंकों का अंतर दिखाई दिया. 60 हजार छात्रों की परीक्षा में ऐसे मामले असामान्य नहीं लाइव हिन्दुस्‍तान की रिपोर्ट के मुताबिक इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए IIT कानपुर के निदेशक और प्रोफेसर मनोज अग्रवाल ने कहा कि पहली नजर में ऐसे स्कोर चौंकाने वाले जरूर लग सकते हैं, लेकिन बड़े स्तर की परीक्षाओं में यह पूरी तरह संभव है.उन्होंने बताया कि जब किसी परीक्षा में करीब 60 हजार छात्र शामिल होते हैं तो कुछ मामलों में बेहद असामान्य परिणाम सामने आ सकते हैं. यह सांख्यिकीय रूप से संभव है और इसे किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता. IIT रुड़की ने ईमेल के जरिए दी सफाई छात्र निकुंज गुप्ता ने IIT रुड़की की ओर से प्राप्त ईमेल जवाब को सार्वजनिक किया. संस्थान ने कहा कि लगभग 60 हजार अभ्यर्थियों वाली परीक्षा में दोनों पेपरों के अंकों में बड़ा अंतर पूरी तरह अपेक्षित है.IIT रुड़की ने अपने जवाब में कहा कि इस तरह के अंतर को सांख्यिकी के प्रसिद्ध सिद्धांत Chebyshev’s Inequality (चेबिशेव असमानता)की मदद से समझा जा सकता है. संस्थान के अनुसार यह केवल गणितीय संभावना का मामला है और इसे किसी भी तरह की अनियमितता से जोड़ना सही नहीं होगा. About the Author Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्‍यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्‍सेस स्‍टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Ansiba Hassan Complaint | Ansiba Hassan Movie | कौन है ये खूबसूरत...

होमताजा खबरदेश कौन है ये खूबसूरत अभिनेत्री अनसिबा हसन, जिसने साथी कलाकार पर किया केस? Last Updated:June 09, 2026, 20:02 IST Actress Ansiba Hassan : मलयालम सिनेमा की मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री अनसिबा हसन इन दिनों केरल में भारी चर्चा का विषय बनी हुई हैं. एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) की पूर्व संयुक्त सचिव अनसिबा ने अपने ही साथी अभिनेता टिनी टॉम के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद वे खुद पुलिस स्टेशन पहुंचीं. Mollywood News: केरल के फिल्म उद्योग यानी मलयालम सिनेमा से इन दिनों एक के बाद एक बड़ी और चौंकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं. अभिनेताओं और एसोसिएशन के बीच आंतरिक खींचतान अब खुलकर पुलिस थानों की दहलीज तक पहुंचने लगी है. ताजा मामला केरल के कोच्चि शहर से सामने आया है, जहां फिल्म ‘दृश्यम’ (Drishyam) फेम बेहद खूबसूरत और चर्चित अभिनेत्री अनसिबा हसन (Ansiba Hassan) पूरे राज्य में चर्चा और विवाद का केंद्र बन गई हैं. अनसिबा ने अपने ही सह-कलाकार और इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता टिनी टॉम (Tini Tom) के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है, जिसके बाद केरल की राजनीति और सिनेमाई हलकों में हलचल तेज हो गई है. सोमवार को इस मामले में उस समय नया मोड़ आया जब खुद अभिनेत्री अनसिबा हसन कोच्चि के कडावंथरा पुलिस स्टेशन में पुलिस अधिकारियों के सामने पेश हुईं. मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों के सबसे बड़े संगठन ‘एएमएमए’ की पूर्व संयुक्त सचिव रह चुकीं अनसिबा हसन ने पिछले दिनों अभिनेता टिनी टॉम के खिलाफ एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी. क्यों केरल की यह खूबसूरत अभिनेत्री थाने पहुंची? अभिनेत्री द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर कडावंथरा पुलिस ने इस मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. जांच के इसी सिलसिले में पुलिस ने अनसिबा हसन को पूछताछ और उनके दावों की पुष्टि के लिए स्टेशन बुलाया था, जहां वे अपने वकीलों के साथ उपस्थित हुईं और अपना बयान दर्ज कराया. हालांकि, शिकायत के तकनीकी पहलुओं और आरोपों की प्रकृति को पुलिस ने अभी पूरी तरह गोपनीय रखा है. #WATCH | Kochi, Keralam: Actor Ansiba Hassan, former joint secretary of AMMA (Association of Malayalam Movie Artistes), appeared before the Kadavanthra police station, as part of the preliminary investigation into a complaint she filed against fellow actor Tini Tom. pic.twitter.com/I9pGeUtK2b Source link

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बंगाल में मंद‍िर का नाम क्‍यों बदला? ओड‍िशा के मुख्‍यमंत्री ने की...

होमताजा खबरदेश बंगाल में मंद‍िर का नाम क्‍यों बदला? ओड‍िशा के मुख्‍यमंत्री ने की थी श‍िकायत Last Updated:June 09, 2026, 18:59 IST ओड‍िशा की बीजेपी सरकार एक मंद‍िर का नाम बदलवाने पर अड़ गई और आख‍िरकार बंगाल की सुवेंदु सरकार को फैसला लेना ही पड़ा. ममता सरकार में बने मंद‍िर का नाम आनन फानन में बदल द‍िया गया. बंगाल के दीघा में बना जगन्‍नाथ मंद‍िर. स्‍टेशनों, कॉलोन‍ियों का नाम बदलते तो आपने सुना होगा, लेकिन अब मंद‍िर का नाम बदला गया है. जी हां, ममता बनर्जी जब बंगाल की सीएम थीं, तो उन्‍होंने एक मंद‍िर बनवाया, और नाम रख द‍िया ‘जगन्‍नाथ धाम’, ओड‍िशा के सीएम ने इस पर आपत्‍त‍ि जताई. उन्‍होंने कहा क‍ि धाम तो स‍िर्फ चार हैं और जगन्‍नाथ धाम ओड‍िशा में है. इसल‍िए यह नाम ठीक नहीं. तब तो ममता नहीं मानीं और उन्‍होंने बीजेपी की आप‍त्‍त‍ियों को स‍िरे से खार‍िज कर द‍िया. लेकिन जैसे ही बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी, ओड‍िशा की सरकार फ‍िर हरकत में आई. इस बार बकायदा पुरी ने बीजेपी सांसद संबित पात्रा सीएम का पत्र लेकर खुद सुवेंदु अध‍िकारी के पास पहुंच गए. और आख‍िरकार ‘जगन्‍नाथ धाम’ से धाम शब्‍द हटाकर ‘जगन्‍नाथ मंद‍िर’ कर द‍िया गया. भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से अपनी मुलाकात पर कहा, अप्रैल 2025 में तत्कालीन बंगाल सरकार ने दीघा में जो जगन्नाथ मंदिर की स्थापना की थी, उसे जगन्नाथ धाम का नाम दिया था. हमें जगन्नाथ मंदिर के प्रचार-प्रसार में कोई आपत्ति नहीं है. हर जगह जगन्नाथ मंदिर खुलना चाहिए क्योंकि प्रभु के भक्त हर जगह हैं लेकिन धाम केवल चार ही हैं. उस समय हमारे मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और हम सभी ने इस बात की आलोचना की थी कि ‘धाम’ नाम नहीं होना चाहिए… आज मैं एक दूत बनकर, मुख्यमंत्री की चिट्ठी को लेकर बंगाल आया और मैंने ये चिट्ठी बंगाल के मुख्यमंत्री को सौंपी. उसके बाद आज निर्णय हुआ कि ‘धाम’ शब्द हटा दिया जाएगा और यह केवल जगन्नाथ मंदिर होगा… जगन्‍नाथ धाम चार धामों में से एक ओडिशा में स्थित जगन्‍नाथ मंद‍िर को हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक माना जाता है. सनातन परंपरा में बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी को ही चार धाम का दर्जा प्राप्त है. इसी वजह से ओडिशा के धार्मिक संगठनों, संतों और राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई कि दीघा के मंदिर को जगन्नाथ धाम कहना धार्मिक परंपरा के खिलाफ है और इससे भ्रम पैदा हो सकता है. उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर चिंता जताई थी. ओडिशा सरकार का तर्क था कि किसी नए मंदिर को धाम कहना उचित नहीं है, क्योंकि श्री जगन्नाथ धाम की पहचान सदियों से पुरी से जुड़ी हुई है. राज्य सरकार ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार तक अपनी आपत्ति पहुंचाई थी. सांस्‍कृ‍त‍िक पहचान से जुड़ा मामला यह विवाद सिर्फ नाम का नहीं था, बल्कि धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ था. ओडिशा में बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि श्री जगन्नाथ धाम की पहचान पुरी से अलग नहीं की जा सकती. ऐसे में दीघा मंदिर से धाम शब्द हटाने के फैसले को ओडिशा सरकार और जगन्नाथ भक्तों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, इससे दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चल रहे एक संवेदनशील विवाद के शांत होने की भी उम्मीद बढ़ गई है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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