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पंडित नेहरू से पीएम मोदी तक… रिकॉर्ड से आगे बड़ी कहानी, भारतीय...

यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्या है जो उन्हें उनके पूर्ववर्तियों से अलग बनाता है. लेकिन इस सवाल का जवाब केवल चुनावी जीत, लोकप्रियता या संगठनात्मक ताकत में नहीं छिपा है. असल कहानी भारतीय राजनीति की शैली की तब्दीली में है, जिसने संसदीय लोकतंत्र के भीतर एक तरह “विशेष शैली” की राजनीति को जन्म दिया. दरअसल, जवाहर लाल नेहरू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच की दूरी सिर्फ कालखंडों की नहीं है, यह भारतीय राजनीति के दो अलग-अलग युगों के बीच की दूरी है. नेहरू के बाद इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह जैसे बड़े नेता आए, लेकिन कोई भी नेहरू और मोदी जैसी दीर्घकालिक राजनीतिक केंद्रीयता स्थापित नहीं कर सका. सवाल यह कि जवाहर लाल नेहरू के बाद पीएम मोदी ही क्यों ऐसा कर पाए? जब चुनाव सांसद नहीं, प्रधानमंत्री चुनने का माध्यम बन गए इस संदर्भ में एक दिलचस्प तथ्य सामने आता है. दरअसल, भारतीय संविधान ने देश को संसदीय लोकतंत्र दिया. सिद्धांत यह है कि जनता सांसद चुनती है और सांसद प्रधानमंत्री चुनते हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के दौरान पिछले एक दशक में चुनावी व्यवहार का एक नया पैटर्न सामने आया है. मतदाता कई बार स्थानीय उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दों और यहां तक कि राज्य सरकार के प्रदर्शन से ऊपर उठकर राष्ट्रीय नेतृत्व के आधार पर मतदान करता दिखाई देते हैं. इसकी शुरुआत तो वर्ष 2014 में ही हो चुकी थी जब संसदीय चुनाव का स्वरूप ही भाजपा बनाम कांग्रेस कम और मोदी बनाम व्यवस्था ज्यादा हो गया था. इसके बाद आया 2019 का चुनाव, जब उम्मीदवारों का नहीं, “मजबूत नेतृत्व” का चुनाव बन गया. वर्ष 2024 में भी भाजपा के चुनाव अभियान का सबसे बड़ा चेहरा पीएम मोदी ही रहे. यहीं से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है. संसदीय ढांचे के भीतर चुनाव का चरित्र राष्ट्रपति प्रणाली जैसा होने लगा, जहां पूरा चुनाव एक व्यक्ति की स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता पर केंद्रित हो जाता है. जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड और पीएम नरेंद्र मोदी का दौर. क्या बदल गई है भारत में चुनाव लड़ने और जीतने की पूरी शैली? हालांकि इसका अर्थ यह कतई नहीं कि स्थानीय उम्मीदवारों या क्षेत्रीय मुद्दों का महत्व समाप्त हो गया. कई राज्यों में विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों के नतीजों ने दिखाया कि स्थानीय समीकरण अब भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व-केंद्रित प्रचार की प्रवृत्ति पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट दिखाई देती है. रिकॉर्ड से बड़ी कहानी पीएम मोदी के लंबे कार्यकाल की कहानी केवल चुनावी जीतों की कहानी नहीं है. यह उस राजनीतिक परिवर्तन की कहानी भी है जिसमें प्रधानमंत्री का पद पहले की तुलना में कहीं अधिक केंद्रीय और प्रभावशाली दिखाई देता है. भारत में मतदाता सांसद चुनते हैं, सांसद प्रधानमंत्री चुनते हैं, लेकिन पिछले तीन लोकसभा चुनावों में चुनावी विमर्श का बड़ा हिस्सा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व और फैसलों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा. स्पष्ट है कि यह स्थिति भारतीय संसदीय राजनीति के पारंपरिक ढांचे से कुछ अलग दिखाई देती है. यही कारण है कि दोनों नेताओं की तुलना केवल कार्यकाल की अवधि से नहीं की जा सकती. दोनों अलग-अलग ऐतिहासिक परिस्थितियों में उभरे और अलग राजनीतिक वातावरण में काम किया. जनता पर ‘जादू’ करते हैं पीएम मोदी! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक शैली की एक प्रमुख विशेषता जनता से सीधे संवाद पर जोर देना रही है. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पारंपरिक सरकारी संचार के साथ-साथ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीडियो संदेश, वर्चुअल कार्यक्रमों और देशभर में नियमित जनसभाओं का व्यापक उपयोग किया. सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से प्रत्यक्ष संवाद और डिजिटल माध्यमों के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखने की रणनीति ने उनकी सार्वजनिक पहुंच को और मजबूत किया. हालांकि भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों ने भी रेडियो, टेलीविजन और जनसभाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाई थी, लेकिन डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के इतने व्यापक और निरंतर इस्तेमाल के कारण पीएम मोदी का जनसंपर्क मॉडल अलग दिखाई देता है. सिर्फ 12 साल का कार्यकाल नहीं, पीएम नरेंद्र मोदी के लंबे कार्यकाल के पीछे छिपी भारतीय राजनीति की बड़ी कहानी संसदीय व्यवस्था, लेकिन केंद्रीकृत राजनीति राजनीति के जानकारों का मानना है कि मोदी ने चुनावी राजनीति को “केंद्रीकृत शैली” का स्वरूप दिया है. इसका अर्थ यह नहीं कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था बदल गई है, बल्कि यह कि चुनावों में मतदाता अक्सर स्थानीय उम्मीदवार की बजाय राष्ट्रीय नेतृत्व को ध्यान में रखकर मतदान करते दिखाई देते हैं.कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने स्थानीय नेतृत्व से अधिक पीएम मोदी के चेहरे को प्रमुखता दी. इससे प्रधानमंत्री का पद केवल सरकार के मुखिया का पद नहीं रहा, बल्कि चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया. नेहरू, इंदिरा और मोदी- तीन बड़े व्यक्तित्व हालांकि, भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व आधारित राजनीति नई नहीं है. जवाहर लाल नेहरू के दौर में कांग्रेस और नेहरू लगभग एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे. बाद में इंदिरा गांधी ने भी अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान को पार्टी से ऊपर स्थापित किया. “गरीबी हटाओ” अभियान से लेकर 1971 के चुनाव तक इसका प्रभाव स्पष्ट दिखा. लेकिन मोदी युग की विशेषता यह है कि यह दौर 24 घंटे चलने वाले मीडिया, सोशल मीडिया, डिजिटल संचार और प्रत्यक्ष जनसंपर्क के समय में विकसित हुआ. “मन की बात”, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशाल चुनावी रैलियां और लगातार जनसंवाद ने प्रधानमंत्री की छवि को पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक बनाया. पार्टी से सबसे बड़ा चेहरा मोदी युग की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक यह है कि भाजपा के चुनावी अभियान का केंद्र अक्सर संगठन नहीं, बल्कि नेतृत्व दिखाई देता है. भाजपा स्वयं एक मजबूत संगठन है, लेकिन चुनावी प्रचार में मोदी की लोकप्रियता उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी रही है. इसका असर विपक्षी राजनीति पर भी पड़ा. कई चुनावों में विपक्ष का अभियान भाजपा के खिलाफ कम और मोदी के खिलाफ ज्यादा दिखाई दिया. इससे चुनावी मुकाबला कई बार पार्टी बनाम पार्टी की बजाय नेता बनाम नेता का रूप लेने लगा. जवाहर लाल नेहरू से पीएम नरेंद्र मोदी तक… कैसे बदली भारतीय राजनीति और क्यों नेतृत्व बन गया चुनाव का सबसे बड़ा चेहरा क्या बदल गई है चुनाव की प्रकृति? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के

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हाथों में तस्वीर,होंठों पर मंत्र:PM मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड, उज्जैन...

होमवीडियोदेश हाथों में तस्वीर, होंठों पर मंत्र: PM मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड, उज्जैन में हुआ महामृत्युंजय जाप! X हाथों में तस्वीर, होंठों पर मंत्र: PM मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड, उज्जैन में हुआ महामृत्युंजय जाप!   12 Years Of Modi Government: भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नया इतिहास रच दिया है. लगातार तीसरी बार देश की कमान संभाल रहे पीएम मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं. उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का 73 साल पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है. नेहरू ने 13 मई 1952 से लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया था, जबकि नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब 4399 दिन पूरे कर लिए हैं. इस उपलब्धि के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला. मध्य प्रदेश के उज्जैन और भोपाल से सामने आई तस्वीरों ने सबका ध्यान खींच लिया. महाकाल की नगरी उज्जैन में महिलाओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री मोदी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया. महिलाओं के हाथों में पीएम मोदी की तस्वीरें थीं और वे बाबा महाकाल से उनके लिए आशीर्वाद मांगती नजर आईं.वहीं राजधानी भोपाल में भी विशेष पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन किया गया। इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद रहे. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल की है. ऐसे में यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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गोंडा के राजेश वर्मा ने 2 बीघा में की तरबूज की खेती,...

Last Updated:June 10, 2026, 10:19 IST Watermelon Cultivation: राजेश के अनुसार इस समय वे सागर किंग वैरायटी के तरबूज की खेती कर रहे है. यह किस्म गोंडा के मौसम में अच्छी तरह अनुकूल हो गई है, इसकी पैदावार भी अच्छी है, स्वाद में काफी मीठी है और अंदर से पूरी तरह लाल रहती है. राजेश बताते हैं कि तरबूज की यह फसल कुल 100 दिन की होती है और बुवाई के लगभग 60 दिन बाद फल आना शुरू हो जाता है. गोंडा: गोंडा जिले के विकासखंड मनकापुर के एक किसान ने पारंपरिक फसलों से हटकर तरबूज की खेती अपनाई और अब इस फसल से बेहतर कमाई कर रहे है. उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है. किसान का कहना है कि कम समय में तैयार होने वाली इस फसल से उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा मिल रहा है. लोकल 18 से बातचीत में प्रगतिशील किसान राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि पहले वे गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे. लेकिन लागत और कम मुनाफे को देखते हुए उन्होंने तरबूज की खेती शुरू करने का फैसला लिया. उन्होंने खेत की अच्छी जुताई की. आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया और तरबूज की बुवाई की. समय पर सिंचाई और सही देखभाल की वजह से फसल बेहतरीन तैयार हुई. गर्मी के मौसम में तरबूज की मांग काफी बढ़ जाती है. ऐसे में बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है. राजेश का कहना है कि फसल तैयार होते ही व्यापारी सीधे खेत पर आकर खरीदारी कर लेते है. जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि तरबूज की खेती में मेहनत तो लगती है, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर अच्छा लाभ मिलता है. इस फसल से उनकी आय पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं ज्यादा है. यही वजह है कि अब वे हर साल अपने खेत के बड़े हिस्से में तरबूज की खेती कर रहे है. राजेश ने बताया कि पहले वे पारंपरिक खेती ही करते थे. जिसमें लागत तो कम थी और मुनाफा भी बहुत कम मिलता था. फिर मनकापुर के कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक राम लखन यादव ने उन्हें तरबूज की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इसके बाद उन्होंने थोड़ी जमीन पर तरबूज की खेती शुरू की. जहां से उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ. लाभ देखकर उन्होंने तरबूज की खेती का रकबा बढ़ा दिया. राजेश ने बताया कि वे मल्चिंग विधि से तरबूज की खेती कर रहे है. इस तकनीक में फल मिट्टी के सीधे संपर्क में नहीं रहता और पानी की सतह पर होने के कारण तरबूज दिखने में सुंदर लगता है तथा रोग लगने की संभावना भी कम हो जाती है. राजेश के अनुसार इस समय वे सागर किंग वैरायटी के तरबूज की खेती कर रहे है. यह किस्म गोंडा के मौसम में अच्छी तरह अनुकूल हो गई है, इसकी पैदावार भी अच्छी है, स्वाद में काफी मीठी है और अंदर से पूरी तरह लाल रहती है. राजेश बताते हैं कि तरबूज की यह फसल कुल 100 दिन की होती है और बुवाई के लगभग 60 दिन बाद फल आना शुरू हो जाता है. राजेश के मुताबिक तरबूज एक नगदी फसल है, जिसकी खेती केवल गर्मी के मौसम में की जाती है. गर्मियों में इसकी मांग बहुत अच्छी रहती है. वे बताते है कि उनके यहां से ही माल की सप्लाई हो जाती है, उन्हें खुद बाजार में जाकर बेचने की जरूरत नहीं पड़ती. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि वे लगभग 2 बीघा में तरबूज की खेती कर रहे है और इस पर करीब 10 से 15000 रुपये तक की लागत आई है. वर्तमान में तरबूज 12 से 13 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है और उनके यहां से रोजाना लगभग 5 क्विंटल तरबूज की बिक्री हो रही है. इस तरह उन्हें तरबूज की खेती से अच्छी-खासी आमदनी होने की उम्मीद रहती है. About the Author Manish Rai काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Gonda,Uttar Pradesh Source link

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PM Modi LIVE Updates: ‘तप, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा का सम्मान’ पीएम मोदी...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. वह सबसे लंबे समय तक लगातार देश की सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं. पीएम मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. नेहरू ने जहां 13 मई 1952 को पहली बार निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी और लगातार 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे. वहीं नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री आज 4399 दिन पूरे करते हुए सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं. पीएम मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और तब से उनका ये सफर लगातार जारी है. PM Modi LIVE Updates: दशकों लंबे समर्पित नेतृत्व का सशक्त प्रमाण – पीएम मोदी के रिकॉर्ड पर अमेरिकी राजदूत की बधाई भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई. यह उपलब्धि उनके दशकों लंबे समर्पित सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व का सशक्त प्रमाण है. मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं.’ सर्जियो गोर ने अपने संदेश में पीएम मोदी के लंबे राजनीतिक सफर और नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उनका यह संदेश ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार 4,399 दिन तक पद पर रहते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. PM Modi LIVE Updates: प्रधानमंत्री के रूप में अलग पहचान बनाई… एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी को दी बधाई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 10 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बनने पर कहा, ‘देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी का अभिनंदन और ढेर सारी शुभकानाएं देता हूं, अब तक के इतिहास में नेहरू जी के कार्यकाल से आगे निकल जाएंगे ये बहुत गर्व और खुशी की बात है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 12 साल से इस देश को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं. एक भी दिन छुट्टी ना लेने वाला प्रधानमंत्री के रूप में अलग पहचान बनाई है.’ PM Modi LIVE Updates: पीएम मोदी का कार्यकाल भारत के लिए परिवर्तनकारी – अमेरिकी सिनेटर ने दी बधाई अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसद और टेक्सास से सीनेटर जॉन कॉर्निन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी है. जॉन कॉर्निन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 4,399 दिनों का नेतृत्व 140 करोड़ भारतीयों के भरोसे और लगातार तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के दम पर हासिल किया है. कॉर्निन ने कहा कि पीएम मोदी का कार्यकाल भारत के लिए परिवर्तनकारी रहा है. उन्होंने अपने संदेश में दावा किया कि मोदी सरकार के दौरान 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है. अमेरिकी सीनेटर ने भारत-अमेरिका संबंधों का भी जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं. उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व को भारत के विकास और वैश्विक प्रभाव में बढ़ोतरी का महत्वपूर्ण कारक बताया. PM Modi LIVE Updates: ‘भारत के सच्चे युगपुरुष हैं मोदी’, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री को दी बधाई भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई दी है. उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण की यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह उपलब्धि केवल लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि भारत के परिवर्तन और विकास के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामाजिक सशक्तीकरण, तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. राधाकृष्णन ने कहा कि इतिहास अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को मानव गरिमा और दास प्रथा के अंत के लिए याद करता है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी को 25 करोड़ से अधिक लोगों को अत्यंत गरीबी से बाहर निकालने और करोड़ों परिवारों में आशा, अवसर तथा सम्मान का संचार करने के लिए याद किया जाएगा. उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के सांस्कृतिक और सभ्यतागत दृष्टिकोण की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत की विरासत का सम्मान, गुमनाम नायकों को पहचान, सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति दिलाने जैसे प्रयासों ने देशवासियों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है. उन्होंने काशी तमिल संगमम, सौराष्ट्र तमिल संगमम, नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना और विदेशों से ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी जैसे कदमों का विशेष उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिल संत कनियन पूंगुंद्रनार के प्रसिद्ध वचन ‘यादुम ऊरे, यावरुम केलिर’ का उल्लेख भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का प्रभावशाली संदेश था, जिसने दुनिया के सामने भारत की सभ्यतागत सोच को मजबूती से प्रस्तुत किया. उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश के अंत में कहा कि इतिहास के एक निर्णायक दौर में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, अथक परिश्रम और ‘राष्ट्र प्रथम’ की प्रतिबद्धता के जरिए भारत की क्षमताओं और आकांक्षाओं में नया विश्वास जगाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘समकालीन भारत का सच्चा युगपुरुष’ बताते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में उनकी निरंतर राष्ट्रसेवा के लिए शुभकामनाएं दीं. PM Modi LIVE Updates: श्रीलंका समेत कई देशों को प्रेरित करता है प्रधानमंत्री मोदी का विजन- दिसानायके ने दी बधाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया के कई नेताओं ने उन्‍हें बधाई दी. अलग-अलग देशों के नेताओं ने प्रधानमंत्री के बदलाव लाने वाले शासन, ग्लोबल साउथ के लिए उनके समर्थन और सबको साथ लेकर चलने वाले और आर्थिक रूप से गतिशील भारत के उनके विजन की तारीफ की. श्रीलंका के राष्ट्रपति

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Tamil Nadu News: AIADMK को दगा दे विजय का साथ देने वाले...

Last Updated:June 10, 2026, 08:11 IST Tamil Nadu News: तमिलनाडु में AIADMK के 21 बागी विधायकों को बड़ी राहत मिल गई है. विधानसभा में विजय की TVK सरकार के समर्थन में वोट देने वाले इन विधायकों के खिलाफ अब दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई नहीं होगी. स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने बताया कि AIADMK प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी द्वारा शिकायत वापस लेने के बाद यह फैसला लिया गया. हालांकि TVK में शामिल होने वाले चार पूर्व विधायकों पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी. इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब थलापति विजय की सरकार पूरी तरह सुरक्षित हो गई है. तमिलनाडु की राजनीति में यह फैसला बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. ख़बरें फटाफट तमिलनाडु में AIADMK के 21 बागी विधायकों पर कार्रवाई टली. Tamil Nadu TVK Government: तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभिनेता विजय की अगुवाई वाली TVK सरकार अब पूरी तरह सुरक्षित हो गई है? जिस बगावत ने AIADMK को अंदर तक हिला दिया था, वही अब थलापति विजय के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक कवच बनती दिख रही है. विधानसभा में विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर 21 AIADMK विधायकों ने विजय सरकार का समर्थन किया था. उस वक्त माना जा रहा था कि इन विधायकों पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होगी और कई सीटें खाली हो सकती हैं. लेकिन अब तस्वीर बदल गई है. AIADMK प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी ने खुद स्पीकर को पत्र भेजकर शिकायत वापस ले ली, जिसके बाद 21 बागी विधायकों को बड़ी राहत मिल गई. इस फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है और यह संकेत भी दे दिया कि फिलहाल विजय सरकार को गिराना आसान नहीं होगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को सिर्फ कानूनी राहत नहीं, बल्कि रणनीतिक समझौते के रूप में भी देखा जा रहा है. क्योंकि जिन नेताओं ने विजय सरकार को बचाया, उनमें AIADMK के कई बड़े चेहरे शामिल हैं. सी वे शन्मुगम, एस पी वेलुमणि और सी विजयभास्कर जैसे नेताओं का खुलकर TVK के पक्ष में जाना AIADMK नेतृत्व के लिए बड़ा झटका था. हालांकि अब पार्टी नेतृत्व ने सख्त कार्रवाई से पीछे हटकर यह संदेश दिया है कि वह और टूट-फूट नहीं चाहता. दूसरी तरफ चार ऐसे विधायक, जिन्होंने इस्तीफा देकर TVK जॉइन किया, अभी भी कार्रवाई के घेरे में हैं. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह फैसला आने वाले दिनों में तमिलनाडु की सियासत का नया समीकरण तय करेगा? जहां 21 विधायकों को राहत मिल गई, वहीं चार पूर्व AIADMK विधायक अभी भी कार्रवाई के घेरे में हैं. स्पीकर के फैसले ने बदल दिया पूरा राजनीतिक खेल तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने साफ कहा है कि 21 AIADMK विधायकों के खिलाफ कोई अयोग्यता कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने बताया कि AIADMK नेतृत्व की ओर से शिकायत वापस लेने के बाद यह फैसला लिया गया. स्पीकर ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया और पार्टी के रुख को देखते हुए कार्रवाई बंद की गई है. विश्वास मत के दौरान इन विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए TVK सरकार का समर्थन किया था. इसके बाद माना जा रहा था कि इनकी सदस्यता जा सकती है. लेकिन अब राहत मिलने के बाद विजय सरकार की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत मानी जा रही है. स्पीकर ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वास मत के दौरान 25 बागी विधायकों द्वारा दिया गया समर्थन पूरी तरह वैध माना जाएगा. यानी भविष्य में अगर किसी पर कार्रवाई होती भी है, तब भी विश्वास मत का परिणाम प्रभावित नहीं होगा. यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे विजय सरकार के लिए बड़ी राहत मान रहे हैं. AIADMK के अंदर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है. कुछ नेता मानते हैं कि पार्टी टूटने से बचाने के लिए यह कदम जरूरी था, जबकि कई कार्यकर्ता इसे “समर्पण” की तरह देख रहे हैं. पार्टी नेतृत्व फिलहाल खुलकर विवाद बढ़ाने से बच रहा है. चार पूर्व विधायकों पर अभी भी खतरा बरकरार जहां 21 विधायकों को राहत मिल गई, वहीं चार पूर्व AIADMK विधायक अभी भी कार्रवाई के घेरे में हैं. इनमें मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा, एस जयकुमार और एसाक्की सुबाया शामिल हैं. इन नेताओं ने पहले विधानसभा से इस्तीफा दिया और बाद में TVK में शामिल हो गए. स्पीकर ने कहा कि इनके खिलाफ प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कानूनी जांच के बाद ही फैसला लिया जाएगा. यानी आने वाले दिनों में इन नेताओं की सदस्यता और राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है. विपक्ष इसे ‘चुनिंदा कार्रवाई’ बता रहा है. क्या अब सुरक्षित हो गई विजय सरकार? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फिलहाल विजय सरकार को कोई बड़ा खतरा नहीं दिख रहा. विश्वास मत पार करने के बाद अब बागी विधायकों को राहत मिलना सरकार के लिए मजबूत संकेत है. इससे यह भी साफ हो गया कि विधानसभा में TVK के समर्थन का आंकड़ा स्थिर बना रहेगा. हालांकि तमिलनाडु की राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते हैं. AIADMK के अंदर असंतोष और TVK के बढ़ते प्रभाव के बीच आने वाले महीनों में नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है. लेकिन मौजूदा हालात में थलापति विजय की सरकार पहले से ज्यादा मजबूत नजर आ रही है. About the Author Sumit KumarSenior Sub Editor सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Nizam of Hyderabad Net Worth | एलन मस्क से भी अमीर था...

होमफोटोदेश इतनी दौलत कि एलन मस्क भी रह जाएं पीछे! कौन था हैदराबाद का आखिरी निजाम? Last Updated:June 10, 2026, 07:17 IST Mir Osman Ali KhanNet Worth: हैदराबाद के 7वें निज़ाम मीर उस्मान अली खान इतिहास के सबसे अमीर भारतीय थे. आज के हिसाब से उनकी कुल संपत्ति लगभग $630 बिलियन आंकी गई है, जो एलन मस्क और मुकेश अंबानी से भी कहीं अधिक है. साल 1937 में TIME मैग्जीन ने उन्हें दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था. उनके पास शुतुरमुर्ग के अंडे जितना बड़ा 185 कैरेट का जैकब डायमंड था, जिसे वे पेपरवेट की तरह इस्तेमाल करते थे. उनके पास 50 रोल्स-रॉयस कारें और अकूत सोने-चांदी का खजाना था, जो अब भारत सरकार के पास पूरी तरह सुरक्षित है. आज जब हम दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की बात करते हैं, तो एलन मस्क, जेफ बेजोस या मुकेश अंबानी जैसे नाम सामने आते हैं. लेकिन भारतीय इतिहास में एक ऐसा शासक भी हुआ है जिसकी अमीरी और आलीशान जीवनशैली के सामने आज के आधुनिक अरबपति भी फीके नजर आते हैं. हम बात कर रहे हैं हैदराबाद रियासत के सातवें और अंतिम निज़ाम, मीर उस्मान अली खान की, जिनकी असीमित दौलत का अंदाजा लगाना भी आम इंसान के लिए लगभग असंभव था. यह बात साल 1937 की है, जब दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका TIME ने मीर उस्मान अली खान को अपने कवर पेज पर जगह दी थी. इस पत्रिका ने उन्हें आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे अमीर इंसान घोषित किया था. उस दौर में उनकी अकूत संपत्ति और शाही ठाट-बाठ की चर्चा सात समंदर पार तक फैली हुई थी. निज़ाम की इस बेहिसाब दौलत की खबरों ने उस समय पूरी दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों और शासकों को हैरान कर दिया था. निज़ाम की इस असीमित संपत्ति का सबसे बड़ा स्रोत हैदराबाद की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध गोलकुंडा हीरा खदानें थीं. ये वही खदानें हैं जिन्होंने दुनिया को कोहिनूर जैसे नायाब हीरे दिए हैं. अर्थशास्त्रियों और इतिहासकारों के अनुसार, यदि निज़ाम की उस समय की कुल संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से मूल्यांकन किया जाए, तो वह लगभग $630 बिलियन (अरब डॉलर) के बराबर बैठती है. Add News18 as Preferred Source on Google निज़ाम की रईसी का सबसे हैरान कर देने वाला किस्सा उनके कार्यालय से जुड़ा है. उनके पास 185 कैरेट का जैकब डायमंड था, जो आकार में शुतुरमुर्ग के अंडे जितना बड़ा और दुनिया के सबसे महंगे हीरों में से एक माना जाता था. जहाँ दुनिया भर के लोग ऐसे कीमती रत्नों को कड़ी सुरक्षा और तिजोरियों में रखते हैं, वहीं निज़ाम इसका उपयोग अपने दफ्तर की मेज पर उड़ते हुए कागजों को दबाने के लिए एक साधारण पेपरवेट की तरह किया करते थे. लक्ज़री गाड़ियों के शौकीन निज़ाम के काफिले में एक या दो नहीं, बल्कि करीब 50 आलीशान रोल्स-रॉयस कारें शामिल थीं. इसके अलावा उनके निजी खजाने में अनगिनत सोने की ईंटें, बेशकीमती हरे पन्ने, समुद्र से निकले दुर्लभ मोती और रूबी जैसे रत्नों का पूरा समंदर था. उनकी तिजोरियां ऐसे शाही जवाहरातों से ठसाठस भरी रहती थीं, जिनकी सही कीमत का आकलन करना लगभग नामुमकिन था. निज़ाम के बड़प्पन और दरियादिली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को उनकी शादी के अवसर पर हीरों का एक शानदार हार उपहार में दिया था, जिसे आज भी ‘निज़ाम ऑफ हैदराबाद नेकलेस’ के नाम से जाना जाता है. साल 1948 में हैदराबाद के भारत में विलय के बाद, निज़ाम के इस ऐतिहासिक और अमूल्य खजाने का एक बड़ा हिस्सा भारत सरकार ने अपने संरक्षण में ले लिया था, जो आज भी हमारी राष्ट्रीय धरोहर के रूप में सुरक्षित है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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‘पेपर आसान था, सफर मुश्किल हो गया’, DDU जंक्शन पर अभ्यर्थियों ने...

Last Updated:June 10, 2026, 06:10 IST UP Police Bharti Exam: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर अभ्यर्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं अपने घर लौटने के लिए ट्रेनों का इंतजार करते नजर आए. हालात ऐसे रहे कि सामान्य कोच ही नहीं, बल्कि एसी कोचों तक में अभ्यर्थियों की भीड़ दिखाई दी. चंदौली: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा की दूसरी पाली समाप्त होने के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर अभ्यर्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं अपने घर लौटने के लिए ट्रेनों का इंतजार करते नजर आए. हालात ऐसे रहे कि सामान्य कोच ही नहीं, बल्कि एसी कोचों तक में अभ्यर्थियों की भीड़ दिखाई दी. स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 और 8 पर यात्रियों का लगातार आना-जाना लगा रहा और अधिकांश ट्रेनों में क्षमता से अधिक भीड़ देखने को मिली. बहुत आसान था प्रश्नपत्र  परीक्षा देकर लौट रहे बलिया निवासी गोपी कुमार ने लोकल 18 से बताया कि प्रश्नपत्र बहुत आसान था. उन्होंने कहा कि सामान्य अध्ययन (जीएस) का हिस्सा थोड़ा कठिन लगा, जबकि रीजनिंग, गणित और हिंदी के प्रश्न सरल थे. उनका परीक्षा केंद्र बबुरी में पड़ा था, जहां व्यवस्थाएं संतोषजनक रहीं. उन्होंने बताया कि अब वे वाराणसी जंक्शन के लिए रवाना हो रहे हैं, लेकिन ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ होने के कारण सफर चुनौतीपूर्ण हो गया है. छात्रों को हो रही परेशानी  वहीं, बलिया के ही करण गुप्ता ने लोकल 18 से बताया कि उनका परीक्षा केंद्र चंदौली में था. परीक्षा के बाद वे वाराणसी होते हुए बलिया जाने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्टेशन पर छात्रों की संख्या बहुत अधिक है और ट्रेनों में इतनी भीड़ है कि कई अभ्यर्थी समय पर ट्रेन नहीं पकड़ पा रहे हैं. स्टेशन पर मौजूद एक युवक ने बताया कि उसने स्वयं भर्ती परीक्षा का फॉर्म नहीं भरा है, अपनी बहन को परीक्षा दिलाने आए है. उसकी बहन का परीक्षा केंद्र आजमगढ़ में पड़ा है. उसने कहा कि वे बनारस एक्सप्रेस का इंतजार कर रहा हैं, लेकिन भीड़ के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सभी ट्रेनों में उमड़ी भीड़  सतपाल यादव ने लोकल 18 से बताया कि उनका परीक्षा केंद्र बबुरी में था, जहां पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं अच्छी थीं. उन्होंने कहा कि अभी-अभी स्टेशन पहुंचे हैं और वाराणसी जाने के लिए बनारस इंटरसिटी ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो ट्रेन अभी निकली उसमें अत्यधिक भीड़ थी, जिससे उसमें चढ़ना संभव नहीं हो सका. बता दें कि पुलिस भर्ती परीक्षा के बाद डीडीयू जंक्शन पर अभ्यर्थियों की भारी भीड़ ने रेलवे प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन की चुनौती खड़ी कर दी. हालांकि अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं को लेकर संतोष जताया, लेकिन घर वापसी के दौरान ट्रेनों में उमड़ी भीड़ ने उनकी परेशानी बढ़ा दी. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chandauli,Chandauli,Uttar Pradesh Source link

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pm modi slovakia visit | Importance for India : जयपुर से कम...

होमताजा खबरदेश जयपुर से कम आबादी वाला देश, फ‍िर तीन द‍िन के ल‍िए क्‍यों जा रहे पीएम मोदी Last Updated:June 10, 2026, 05:01 IST स्लोवाकिया छोटा देश जरूर है, लेकिन यूरोप की ऑटो इंडस्ट्री, परमाणु ऊर्जा क्षमता, EU सदस्यता और रक्षा महत्व के कारण उसकी रणनीतिक कीमत काफी बड़ी है. यही वजह है कि 33 साल बाद होने जा रही किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा को भारत की यूरोप नीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्‍लोवाक‍िया के दौरे पर जाने वाले हैं. स्‍लोवाक‍िया, ज‍िसकी आबादी तकरीबन 55 लाख है, यानी जयपुर से भी कम. फ‍िर इस देश में ऐसा क्‍या है क‍ि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन द‍िन के दौरे पर जा रहे हैं. 1993 में स्लोवाकिया की आजादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी. पीएम मोदी वहां 14 से 16 जून तक रहेंगे. लगातार मीटिंग फ‍िक्‍स है. आपके मन में भी सवाल होगा क‍ि पीएम मोदी वहां इतना टाइम क्‍यों दे रहे हैं? वहां से क्‍या हास‍िल होने वाला है? स्लोवाकिया आकार में भले छोटा देश हो, लेकिन भारत के लिए उसकी रणनीतिक, आर्थिक और ज‍ियोपाल‍िट‍िकल अहमियत लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि पीएम मोदी का दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि मध्य यूरोप में भारत की बढ़ती मौजूदगी का संकेत माना जा रहा है. स्‍लोवाक‍िया क्‍यों है खास? लगभग 55 लाख आबादी वाला स्लोवाकिया दुनिया के सबसे बड़े कार मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग सेंटर में गिना जाता है. यहां Volkswagen, Kia, Jaguar Land Rover और Stellantis जैसी कंपनियों के बड़े प्लांट हैं. भारत मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में सहयोग बढ़ाना चाहता है. स्लोवाकिया European Union का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत रिश्ते भारत को मध्य और पूर्वी यूरोप के बाजारों तक बेहतर पहुंच दिला सकते हैं. भारत और यूरोपीय यून‍ियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के दौर में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देश अपने ड‍िफेंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मॉडर्न बना रहे हैं. स्लोवाकिया भी उनमें शामिल है. भारत अपनी डिफेंस कंपनियों और स्वदेशी वेपन स‍िस्‍टम का एक्‍सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में ड‍िफ‍ेंस पार्टनरश‍िप दोनों देशों के रिश्तों का बड़ा आधार बन सकता है. स्लोवाकिया अपनी बिजली का बड़ा हिस्सा परमाणु ऊर्जा से पैदा करता है. भारत भी स्वच्छ ऊर्जा और न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसलिए परमाणु तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं हैं. मध्य यूरोप में भारत अपनी मौजूदगी बढ़ाकर रणनीतिक संतुलन बनाना चाहता है. स्लोवाकिया NATO और EU दोनों का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत संबंध भारत को यूरोपीय राजनीति और सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावशाली साझेदार बनने में मदद कर सकते हैं. दुन‍िया के ल‍िए मैसेज पीएम मोदी यह दौरा दिखाता है कि भारत की विदेश नीति अब केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन या फ्रांस जैसे बड़े देशों तक सीमित नहीं है. मोदी सरकार छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रही है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का तांडव, कर्मचारियों की बेरहमी से पिटाई, CCTV...

होमवीडियोदेश पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का तांडव, कर्मचारियों की बेरहमी से पिटाई, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात X पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का तांडव, कर्मचारियों की बेरहमी से पिटाई, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात   पंजाब के फरीदकोट में एक पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी का मामला सामने आया है. कुछ युवकों ने पंप कर्मचारियों पर हमला कर उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी. घटना की पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है. पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है. इस घटना ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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40000 रिपोर्ट में क्या खोज रही माकपा, केरल में वामपंथ को क्यों...

होमताजा खबरदेश 40000 रिपोर्ट में क्या खोज रही माकपा, केरल में वामपंथ को क्यों लगा झटका? Last Updated:June 09, 2026, 23:19 IST माकपा लीडरशिप का कहना है कि सभी चुनौतियों और झटकों के बावजूद सीपीआई(एम) वामपंथी विचारधारा के साथ आगे बढ़ती रहेगी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच व्यापक संवाद स्थापित करेगी. ख़बरें फटाफट माकपा ने कांग्रेस-भाजपा की ‘मिलीभगत’ का आरोप लगाया. तिरुवनंतपुरम. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) ने आत्ममंथन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पार्टी की राज्य समिति ने चुनाव समीक्षा रिपोर्ट सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है और चुनावी नतीजों से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का फैसला किया है. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन को भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ाना है, इस पर अगस्त में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी. साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया गया है. पार्टी के अनुसार, राज्यभर की लगभग 40 हजार इकाइयों ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट जमा की है. इन रिपोर्टों के आधार पर चुनावी हार के कारणों का विश्लेषण किया गया है. पार्टी ने स्वीकार किया कि चुनाव में उसे बड़ा झटका लगा और राज्य समिति हार की गंभीरता का सही आकलन करने में पूरी तरह सफल नहीं रही. पार्टी का मानना है कि भारत समेत दुनिया भर में दक्षिणपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है, जिसका असर केरल की राजनीति पर भी देखने को मिला. पार्टी ने कहा कि एलडीएफ सरकार के कामकाज को आम तौर पर लोगों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन कुछ क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका. विशेष रूप से निर्माण क्षेत्र और पारंपरिक रोजगार से जुड़े लोगों में असंतोष देखने को मिला. कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा के वोट कांग्रेस नीत यूडीएफ को स्थानांतरित हुए, जबकि कुछ सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच अप्रत्यक्ष सहयोग भी देखने को मिला. पार्टी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा. सीपीआई(एम) के अनुसार कांग्रेस नेताओं ने लगातार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को लेकर सवाल उठाए और राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की. पार्टी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के कुछ बयानों और कांग्रेस की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की प्राथमिकता केवल सत्ता हासिल करना है. पार्टी ने यह भी माना कि सरकार की उपलब्धियों और कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में कमी रही. इसके अलावा, कुछ विवादित मुद्दों पर भी पार्टी ने आत्ममंथन किया. नेतृत्व ने स्वीकार किया कि समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले कुछ बयानों का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं किया जा सका, जिससे गलत संदेश गया. पार्टी ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादों के विपरीत फैसले लिए जा रहे हैं. निजीकरण को बढ़ावा देने और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कमजोर करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. कुछ प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं. इस बीच पार्टी ने जनता से सीधे संवाद स्थापित करने के लिए “पुथुवाझिकल” नाम से एक व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी जारी की है. इसके माध्यम से आम लोग संगठन और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अपने सुझाव दे सकेंगे. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी चुनौतियों और झटकों के बावजूद सीपीआई(एम) वामपंथी विचारधारा के साथ आगे बढ़ती रहेगी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच व्यापक संवाद स्थापित करेगी. वहीं, सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए देवास्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्माकुमार को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है. वीणा विजयन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजे गए नोटिस पर पार्टी ने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत है और वह स्वयं इसका जवाब देंगी. पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस मामले को सीपीआई(एम) से जोड़ने की किसी भी राजनीतिक कोशिश का विरोध किया जाएगा. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Thiruvananthapuram,Kerala Source link

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