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Nizam of Hyderabad Net Worth | एलन मस्क से भी अमीर था...


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इतनी दौलत कि एलन मस्क भी रह जाएं पीछे! कौन था हैदराबाद का आखिरी निजाम?

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Mir Osman Ali KhanNet Worth: हैदराबाद के 7वें निज़ाम मीर उस्मान अली खान इतिहास के सबसे अमीर भारतीय थे. आज के हिसाब से उनकी कुल संपत्ति लगभग $630 बिलियन आंकी गई है, जो एलन मस्क और मुकेश अंबानी से भी कहीं अधिक है. साल 1937 में TIME मैग्जीन ने उन्हें दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था. उनके पास शुतुरमुर्ग के अंडे जितना बड़ा 185 कैरेट का जैकब डायमंड था, जिसे वे पेपरवेट की तरह इस्तेमाल करते थे. उनके पास 50 रोल्स-रॉयस कारें और अकूत सोने-चांदी का खजाना था, जो अब भारत सरकार के पास पूरी तरह सुरक्षित है.

आज जब हम दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की बात करते हैं, तो एलन मस्क, जेफ बेजोस या मुकेश अंबानी जैसे नाम सामने आते हैं. लेकिन भारतीय इतिहास में एक ऐसा शासक भी हुआ है जिसकी अमीरी और आलीशान जीवनशैली के सामने आज के आधुनिक अरबपति भी फीके नजर आते हैं. हम बात कर रहे हैं हैदराबाद रियासत के सातवें और अंतिम निज़ाम, मीर उस्मान अली खान की, जिनकी असीमित दौलत का अंदाजा लगाना भी आम इंसान के लिए लगभग असंभव था.

यह बात साल 1937 की है, जब दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका TIME ने मीर उस्मान अली खान को अपने कवर पेज पर जगह दी थी. इस पत्रिका ने उन्हें आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे अमीर इंसान घोषित किया था. उस दौर में उनकी अकूत संपत्ति और शाही ठाट-बाठ की चर्चा सात समंदर पार तक फैली हुई थी. निज़ाम की इस बेहिसाब दौलत की खबरों ने उस समय पूरी दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों और शासकों को हैरान कर दिया था.

निज़ाम की इस असीमित संपत्ति का सबसे बड़ा स्रोत हैदराबाद की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध गोलकुंडा हीरा खदानें थीं. ये वही खदानें हैं जिन्होंने दुनिया को कोहिनूर जैसे नायाब हीरे दिए हैं. अर्थशास्त्रियों और इतिहासकारों के अनुसार, यदि निज़ाम की उस समय की कुल संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से मूल्यांकन किया जाए, तो वह लगभग $630 बिलियन (अरब डॉलर) के बराबर बैठती है.

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निज़ाम की रईसी का सबसे हैरान कर देने वाला किस्सा उनके कार्यालय से जुड़ा है. उनके पास 185 कैरेट का जैकब डायमंड था, जो आकार में शुतुरमुर्ग के अंडे जितना बड़ा और दुनिया के सबसे महंगे हीरों में से एक माना जाता था. जहाँ दुनिया भर के लोग ऐसे कीमती रत्नों को कड़ी सुरक्षा और तिजोरियों में रखते हैं, वहीं निज़ाम इसका उपयोग अपने दफ्तर की मेज पर उड़ते हुए कागजों को दबाने के लिए एक साधारण पेपरवेट की तरह किया करते थे.

लक्ज़री गाड़ियों के शौकीन निज़ाम के काफिले में एक या दो नहीं, बल्कि करीब 50 आलीशान रोल्स-रॉयस कारें शामिल थीं. इसके अलावा उनके निजी खजाने में अनगिनत सोने की ईंटें, बेशकीमती हरे पन्ने, समुद्र से निकले दुर्लभ मोती और रूबी जैसे रत्नों का पूरा समंदर था. उनकी तिजोरियां ऐसे शाही जवाहरातों से ठसाठस भरी रहती थीं, जिनकी सही कीमत का आकलन करना लगभग नामुमकिन था.

निज़ाम के बड़प्पन और दरियादिली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को उनकी शादी के अवसर पर हीरों का एक शानदार हार उपहार में दिया था, जिसे आज भी ‘निज़ाम ऑफ हैदराबाद नेकलेस’ के नाम से जाना जाता है. साल 1948 में हैदराबाद के भारत में विलय के बाद, निज़ाम के इस ऐतिहासिक और अमूल्य खजाने का एक बड़ा हिस्सा भारत सरकार ने अपने संरक्षण में ले लिया था, जो आज भी हमारी राष्ट्रीय धरोहर के रूप में सुरक्षित है.

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