(रिपोर्ट- उदित मिश्रा) 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों ने देश की राजनीतिक व्यवस्था को चौंका दिया. 4 मई को चुनाव आयोग ने नतीजे घोषित किए, जिसमें तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके), जो महज दो साल पुरानी पार्टी है, तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 59 साल से जारी द्रविड़ वर्चस्व का सिलसिला खत्म कर दिया. इन नतीजों से तमिलनाडु में पहली बार त्रिशंकु विधानसभा बनी. एआईएडीएमके ने विपक्ष का दर्जा डीएमके को गंवा दिया. निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कोलाथुर सीट हार दी, जिसे उन्होंने लगातार तीन बार जीता था. 5 मई को तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन ने इस्तीफा दे दिया. टीवीके के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार विजय ने पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट दोनों सीटों पर जीत दर्ज की. रविवार यानी 10 मई को विजय तमिलनाडु के सीएम बन गए. बीजेपी की नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में उभरने की कहानी पार्टी मशीन और बूथ स्तर के प्रबंधन पर आधारित थी. टीवीके ने इसे लगभग हूबहू अपनाया. पिछले साल फरवरी में टीवीके ने बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान की घोषणा की, जिसमें 70,000 से ज्यादा बूथ एजेंट नियुक्त करने और पार्टी की आंतरिक संरचना को 2026 विधानसभा चुनावों के लिए तैयार करने की योजना थी. फरवरी 2024 में लॉन्च के बाद, पार्टी ने नई संगठनात्मक संरचना बनाई, जिसमें 10 डिप्टी जनरल सेक्रेटरी, 10 जोनल इंचार्ज और 5 ऑर्गनाइजेशनल सेक्रेटरी नियुक्त किए, जो सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों की देखरेख करते हैं. टीवीके ने तमिलनाडु को दक्षिण, उत्तर, डेल्टा (पूर्व) और कोंगु (पश्चिम) क्षेत्रों में बांटकर जोनवार बूथ कमेटी मीटिंग्स की योजना बनाई, जिनकी निगरानी विजय खुद करते थे. पार्टी ने राज्य में दो करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा बीजेपी का खास टूल ‘पन्ना प्रमुख’ सिस्टम है, जिसमें एक पार्टी कार्यकर्ता वोटर लिस्ट के एक पन्ने (करीब 30 वोटर) का जिम्मेदार होता है. टीवीके के 70,000 बूथ एजेंट 234 विधानसभा क्षेत्रों में इसी तरह का वोटर कवरेज आर्किटेक्चर है. टीवीके ने चेन्नई में महत्वपूर्ण रणनीति बैठकें की, जिसमें राज्य कार्यकारिणी और जिला सचिवों को बुलाया गया, और बूथ स्तर पर सक्रियता और फील्ड गतिविधियों के समन्वय पर फोकस किया गया. बीजेपी की गहराई में सफलता का बड़ा कारण आरएसएस है, जो दशकों पुराना कैडर नेटवर्क है और जमीनी स्तर पर भरोसा कायम करता है. टीवीके के पास इसका समकक्ष था, विजय के फैन क्लब. जुलाई 2009 में, अभिनेता विजय ने अपने फैन क्लबों, जिनकी संख्या तमिलनाडु में करीब 85,000 बताई जाती है, को विजय मक्कल इयक्कम (विजय का जन आंदोलन) नामक कल्याण संघ के तहत संगठित किया. इस संघ ने 2011 के चुनावों में एआईएडीएमके गठबंधन का समर्थन किया. कुछ समय तक निष्क्रिय रहने के बाद, संगठन ने 2021 में स्थानीय निकाय चुनावों में 169 सीटों में से 115 सीटें जीत लीं. ये साधारण फैन क्लब नहीं थे. ये एक अनुशासित और संगठित नेटवर्क में बदल गए, जो तमिलनाडु में फैला हुआ था. 1990 के दशक से यह नेटवर्क लगातार बनाया गया. जो शुरुआत में फिल्मी प्रशंसा थी, वह धीरे-धीरे संगठित सामाजिक गतिविधियों में बदल गई, जैसे रक्तदान शिविर, गरीबों के लिए कल्याण कार्य और आपदा राहत. इन प्रयासों से भरोसा बना और सामाजिक पूंजी तैयार हुई. यही पूंजी बाद में राजनीतिक आधार बन गई. रविवार को विजय का होगा शपथ समारोह. फैन क्लब पहले से ही स्थानीय समुदायों से जुड़कर मुद्दों को समझ रहे थे और जमीनी स्तर की जानकारी जुटा रहे थे. जब पार्टी औपचारिक रूप से बनी, तो यह ग्राउंडवर्क तुरंत ऑपरेशनल ताकत में बदल गया. इसी वजह से टीवीके ने राजनीतिक क्षेत्र में तैयार जमीनी उपस्थिति के साथ प्रवेश किया. यही बीजेपी ने 2012 से 2014 के बीच किया, पहले से मौजूद विचारधारा नेटवर्क को चुनावी मशीन में बदल दिया. टीवीके ने यह फैनबेस के जरिए किया, न कि धार्मिक-सांस्कृतिक नेटवर्क के जरिए. बीजेपी ने 2014 में प्रशांत किशोर का इस्तेमाल किया और फिर कई राज्य चुनावों में. टीवीके ने भी यही किया. चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने टीवीके के शीर्ष नेताओं के साथ कई बैठकें कीं, जिसमें पार्टी के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई. किशोर ने पार्टी नेतृत्व को विस्तृत SWOT विश्लेषण रिपोर्ट दी, जिसमें पार्टी की ताकत, कमजोरियां और सुधार के क्षेत्र बताए गए. रिपोर्ट में वोट शेयर बढ़ाने का रोडमैप दिया गया, जिसे किशोर ने 15% से 20% तक बताया. वरिष्ठ टीवीके नेताओं ने बताया कि रिपोर्ट ‘एक व्यापक दस्तावेज है, जो पार्टी की मौजूदा स्थिति का 360 डिग्री विश्लेषण करता है और चुनाव में संभावनाएं सुधारने के सुझाव देता है.’ किशोर ने इस विचार को खारिज किया कि टीवीके को एआईएडीएमके की जरूरत है, और कहा कि पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी. ‘टीवीके के पास 2026 में तमिलनाडु चुनाव जीतने का बड़ा मौका है,’ उन्होंने कहा, ‘इस वीडियो को संभालकर रखिए और नतीजों के वक्त चलाइए.’ फिलहाल पार्टी ने किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है. (फाइल फोटो PTI) डिजिटल दबदबा, एल्गोरिदम बनाम सड़क बीजेपी का 2014 का चुनाव भारत का पहला सोशल मीडिया चुनाव कहा गया. टीवीके ने 2026 में तमिलनाडु में यही किया. टीवीके के डिजिटल आर्किटेक्ट सीटीआर निर्मल कुमार बीजेपी और एआईएडीएमके दोनों के डिजिटल वार रूम के अनुभवी थे. उनके पास आक्रामक, एल्गोरिदम-आधारित सोशल मीडिया इकोसिस्टम बनाने का विशेष ज्ञान था. विश्लेषकों ने टीवीके के मजबूत डिजिटल अभियान को विजय की सफलता का बड़ा कारण बताया, जिसमें पार्टी ने खुद को भ्रष्टाचार मुक्त और नया विकल्प बताया, जबकि द्रविड़ शासन के प्रति लोगों में थकावट महसूस हो रही थी. टीवीके की अक्टूबर 2024 की विक्रवंडी कांफ्रेंस में करीब 3 लाख लोग जुटे और इसे हर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीम किया गया, जैसा बीजेपी की मोदी रैलियों में होता है. टीवीके ने समझा कि ध्यान की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा, दिखने वाला कार्यक्रम पूरे न्यूज साइकिल को बदल सकता है. रणनीतिक धैर्य, 2024 छोड़ो, 2026 पर कब्जा करो बीजेपी की सबसे कम सराही गई रणनीति रही है कि कौन सी लड़ाई छोड़नी है. मोदी की बीजेपी ने उन राज्य चुनावों में ज्यादा विस्तार नहीं किया, जहां उनका आधार नहीं था, और संसाधन जीतने योग्य लक्ष्यों के लिए बचाए. विजय ने साफ किया कि टीवीके 2024 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि 2026 के लिए जमीनी समर्थन बनाने पर ध्यान देगी.