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Indian Army: अग्निवीरों को मिल रही हर चुनौती से लड़ने की ट्रेनिंग,...


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अग्निवीरों को बनाया जा रहा ‘रणबांकुरा’, कठिन ट्रेनिंग से तैयार हो रहे जांबाज

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युद्ध के मैदान में मौत को मात देने और बारूद के साए में पलक झपकते ही दुश्मन की गर्दन मरोड़ने के लिए भारतीय सेना के जांबाज इस वक्त जमीन से लेकर आसमान तक एक बेहद खौफनाक और आक्रामक महा-ट्रेनिंग से गुजर रहे हैं. भारतीय सेना ने अपने दो सबसे घातक विंग्स, अग्निवीरों और शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स की ऑपरेशनल एक्सीलेंस को लेकर जानकारी साझा की है.

अग्निवीरों को बनाया जा रहा 'रणबांकुरा', कठिन ट्रेनिंग से तैयार हो रहे जांबाजZoom

डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है.

नई दिल्ली. भारतीय सेना ने अग्निवीरों को ट्रेनिंग देने की जानकारी साझा की है. भारतीय सेना की ओर से कहा गया कि हर बाधा को पार करना ऑपरेशनल एक्सीलेंस (काम में बेहतरीन प्रदर्शन) की दिशा में एक कदम है. डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कठिन बाधा-पार प्रशिक्षण (ऑब्सटेकल ट्रेनिंग) से गुजरना पड़ता है. इससे उनमें सहनशक्ति, फुर्ती, मानसिक मजबूती और दबाव में काम करने का आत्मविश्वास पैदा होता है.

सेना की ओर से कहा गया कि युद्ध के मैदान की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का अनुभव कराने के लिए डिजाइन की गई यह ट्रेनिंग तेजी से फैसला लेने, टीमवर्क और मुश्किल हालात में डटे रहने की क्षमता को बढ़ाती है. साथ ही, यह मिलिट्री ऑपरेशन के लिए जरूरी अनुशासन और लड़ने का जज्बा भी पैदा करती है.

सेना ने कहा कि हकीकत के करीब, चरणबद्ध और मिशन पर केंद्रित ट्रेनिंग के जरिए, हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया प्रेरित युवा रंगरूटों को ऐसे आत्मविश्वासी और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों में बदल रहा है, जो आधुनिक युद्ध के मैदान की चुनौतियों का हिम्मत और दृढ़ संकल्प के साथ सामना कर सकें. आज पार की गई हर बाधा कल के लिए एक योद्धा को और मजबूत बनाती है.

वहीं, भारतीय सेना ने शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स के ‘स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स’ के बारे में जानकारी दी. सेना की ओर से कहा गया कि मिशन की सफलता की शुरुआत जबरदस्त तैयारी से होती है. शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स ने हाल ही में एक गहन ‘स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स’ (एसएचबीओ) अभ्यास किया. इसमें उन्होंने ज्यादा जोखिम वाले आतंकवाद-विरोधी मिशनों के लिए अपनी ऑपरेशनल तैयारी को बेहतर बनाने के मकसद से, शहरी इलाके में बंधकों को छुड़ाने जैसे मुश्किल हालात का अभ्यास किया.

सेना ने कहा कि इस अभ्यास में टैक्टिकल हेलीकॉप्टर इंसर्शन (जैसे स्लिदरिंग, एसटीआईई और लो-होवर ड्रिल) के जरिए जमीन और हवा के बीच बेहतरीन तालमेल दिखाया गया. इसके बाद छत पर सटीक तरीके से उतरने और कमरे के अंदर तेजी से और सटीक कार्रवाई (सीक्यूबी) करने का अभ्यास किया गया.

सेना ने बताया कि हर चरण में असली ऑपरेशन जैसे हालात में तेजी, तालमेल, सटीकता और मजबूत टीमवर्क की जरूरत थी. ऐसे में असल और मिशन पर केंद्रित ट्रेनिंग से तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता मजबूत होती है और लड़ने की कुशलता बढ़ती है. इससे यह भी पक्का होता है कि भारतीय सेना के पैराट्रूपर्स किसी भी आपात स्थिति में तेज़ी और असरदार ढंग से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहें. कड़ी ट्रेनिंग, सटीक हमला, मिशन पूरा करना.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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