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Indian Navy Gets Indigenous Gas Turbine Generators: रक्षा मंत्रालय ने इंडियन नेवी के कोलकाता क्लास शिप्स के लिए भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ 425 करोड़ रुपये का करार किया है. इसके तहत नेवी को 12 स्वदेशी 1.25 मेगावाट के गैस टर्बाइन जेनरेटर्स मिलेंगे. ये जेनरेटर्स 40 साल से इस्तेमाल हो रही रूसी तकनीक की जगह लेंगे. इससे शिप्स की पावर जेनरेशन क्षमता बढ़ेगी. इस डील से रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी.
भारत फोर्ज और रक्षा मंत्रालय के बीच हुआ बड़ा करार, नेवी को मिलेंगे 1.25 मेगावाट के पावरफुल जेनरेटर्स. (Photo Made with AI)
नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की ताकत और भी ज्यादा बढ़ने वाली है. रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बेहद अहम कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. यह डील पुणे की मशहूर कंपनी भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ हुई है. इस करार के तहत नेवी के कोलकाता क्लास शिप्स के लिए 12 नए गैस टर्बाइन जेनरेटर्स खरीदे जाएंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 425 करोड़ रुपये है. इन जेनरेटर्स की क्षमता 1.25 मेगावाट होगी. यह कदम रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बहुत बड़ा है. अभी तक हमारे युद्धपोतों पर बिजली पैदा करने के लिए रूसी जेनरेटर्स पर निर्भर रहना पड़ता था. यह सिलसिला 1980 के दशक से चला आ रहा था. अब स्वदेशी तकनीक से बने ये पावरफुल जेनरेटर्स पुरानी रूसी तकनीक को रिप्लेस करेंगे. इससे नेवी की ऑपरेशनल पावर कई गुना बढ़ जाएगी.
क्या है इस नई डील की सबसे खास बात जो नेवी की ताकत बढ़ाएगी?
इस डील के तहत मिलने वाले सभी गैस टर्बाइन जेनरेटर्स में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी पुर्जे इस्तेमाल होंगे. भारत फोर्ज लिमिटेड अगले पांच साल के भीतर इस पूरे कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करेगी.
नेवी के हर बड़े युद्धपोत को चलाने और उसके हथियारों को एक्टिव रखने के लिए पावर जेनरेशन की जरूरत होती है. इसके लिए शिप्स में दो से चार मरीन गैस टर्बाइन जेनरेटर्स और डीजल जेनरेटर्स का कॉम्बिनेशन लगा होता है.
नेवी को मिलेंगे 12 नए स्वदेशी गैस टर्बाइन जेनरेटर्स. (Photo Made with AI)
अब नए 1.25 मेगावाट के सिस्टम पुराने और कम क्षमता वाले जेनरेटर्स की जगह लेंगे. इससे आधुनिक रडार और कॉम्बैट सिस्टम को बिना रुके पावर सप्लाई मिलेगी.
नेवी ने क्यों लिया रूस पर अपनी निर्भरता खत्म करने का बड़ा फैसला?
भारतीय शिप्स में लंबे समय से रूसी तकनीक का इस्तेमाल होता रहा है. इनके स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस के लिए हमेशा विदेशी मदद की जरूरत पड़ती थी. पिछले तीन साल से नेवी इस निर्भरता को खत्म करने के लिए काम कर रही थी. इसके लिए BHEL और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों से लगातार बात चल रही थी.
40 साल पुरानी रूसी तकनीक की जगह लेगा नया स्वदेशी सिस्टम. (Photo Made with AI)
रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘यह खरीद अहम स्ट्रैटेजिक तकनीक में समुद्री आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी’. इसके जरिए नेवी हमेशा ऑपरेशन के लिए रेडी रहेगी. स्वदेशी प्रोडक्शन से सिस्टम का लाइफ साइकिल सपोर्ट भी आसानी से मिल सकेगा.
भारत फोर्ज कैसे करेगी इस पूरे प्रोजेक्ट को हैंडल और आगे का क्या है प्लान?
भारत फोर्ज ने बताया है कि यह डील डिफेंस एक्विजिशन प्रोसिजर 2020 के तहत मिली है. यह कॉन्ट्रैक्ट बाय इंडियन कैटेगरी में साइन हुआ है. इसके साथ ही कंपनी ने मरीन गैस टर्बाइन बिजनेस में अपनी शानदार एंट्री कर ली है. भारत फोर्ज अब गैस टर्बाइन जेनरेटर्स के लिए एक अलग इंटीग्रेशन और टेस्ट फैसिलिटी बनाएगी.
कंपनी भविष्य में बड़े पावर प्लांट्स और प्रोपल्शन सिस्टम के डिजाइन प्रोग्राम में भी हिस्सा लेगी. इससे भारतीय सशस्त्र बलों की बड़ी जरूरतें देश में ही पूरी हो सकेंगी. जेनरेटर्स के मेंटेनेंस और ओवरहाल ऑपरेशन पर भी अब पूरा कंट्रोल भारत का ही रहेगा.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) की गिनती हिंदी डिजिटल मीडिया के तेजी से उभरते चेहरों में होती है. वह News18हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज़ एडिटर की भूमिका में जुड़े हैं. प्रिंट से डिजिटल का रुख करने वाले दीपक के पास पत्र…और पढ़ें