Last Updated:
Ranchi Best Dhaba: वैसे तो आपको रांची में कई मशहूर ढाबे मिलेंगे, लेकिन कुछ ढाबे ऐसे हैं जो क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी का फेवरेट माना जाता है. जहां आप 200 रुपये में अंडा करी से लेकर चिकन करी तक खा सकते हैं. आइये जानते हैं इन ढाबों के बारे में.
झारखंड की राजधानी रांची से थोड़ी दूर आप जाएंगे तो रांची में कुछ ऐसे फेमस ढाबे हैं. जहां पर धोनी तक आते हैं. जैसे नूनू होटल है. यहां पर धोनी अक्सर आते हैं. यहां पर तो खाट पर खाना परोसा जाता है. इसके अलावा आप रांची टाटा रोड पर डीके ढाबा में. यहां स्वाद के दीवानों की भीड़ लगी रहती है.
जहां पर मात्र ₹200 में आपको एग करी से लेकर चिकन करी तक मिल जाएगा और इतना टेस्टी की लोग खासतौर पर इसे खाने 40 किमी दूर से आते हैं. इसके अलावा ओरमांझी का महतो ढ़ाबा व दामी विलेज ढ़ाबा यह सारे ढाबे रांची के कुछ चुनिंदा और फेमस ढाबे में से एक है.
दामी विलेज की बात करें तो यह ढाबा कम और रेस्टोरेंट अधिक लगता है. यहां की खास बात यह है कि यहां पर आप सस्ते दामों में ही एक से बढ़कर एक व्यंजन का लुफ्त उठा सकते हैं. पीछे एकदम घना जंगल है और बीच में गार्डन एरिया में बैठकर मौसम का मजा लेते हुए लोग खाने का लुफ्त उठाते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
अगर महतो ढाबा की बात की जाए तो यह तो चारों तरफ पहाड़ी से घिरा हुआ है. यहां के संचालक सुदीप बताते हैं कि यहां ऊपर में रूफटॉप है, यानी कि ऊपर में बैठकर आप चारों पहाड़ी का नजारा देखते हुए खाने का आनंद ले सकते हैं. खासतौर पर बिहार से जो लोग आते हैं, वह इस होटल में तो जरूर लंच या डिनर करते हैं. यहां खासतौर पर तंदूरी आइटम से लेकर नॉनवेज आइटम का जबरदस्त क्रेज़ है.
नूनू होटल की बात करें तो टाटा- रांची रोड में स्थित इस होटल में तो महेंद्र सिंह धोनी अपने स्ट्रगल के दिनों में आते थे और आज भी आते हैं. आज भी दो-चार महीने में उनको यहां पर चिकन चिल्ली का लुफ्त उठाते हुए अपने दोस्तों के साथ देखा जाता है. यहां के मैनेजर मिश्रा बताते हैं कि जब धोनी टाटा जाते थे, तो खेलने के लिए तब यहीं रुकते थे और चिकन चिली उनका फेवरेट है.
इसके अलावा यहां चाऊमीन और दाल तड़का उनका काफी फेवरेट है. वह कई बार अपने दोस्त आरपी सिंह और भी क्रिकेटर को साथ में लेकर आए हैं. अब तो वह अपने कई सारे दोस्तों को लेकर आते हैं. यहां कड़कनाथ मुर्गा भी बनता है, मछली अगर आप एक बार खाएंगे तो बार-बार आएंगे. क्योंकि, हमारा अपना खुद का पनीर होता है.