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Silver Crash : चांदी का भाव बीते एक साल में 60 फीसदी से भी ज्यादा गिर चुका है. बीते एक महीने में 18 फीसदी तो सप्ताहभर में 9 फीसदी तक कीमत गिरी है. एक्सपर्ट का कहना है कि निवेशकों को इसके लो लेवल पर निगाह रखनी चाहिए. अभी चांदी का भाव 47 डॉलर प्रति औंस के आसपास चल रहा है और इसके 43 से 45 डॉलर के दायरे में ही रहने की संभावना है. ऐसे में निवेशकों के पास चांदी में अपना एक्सपोजर बढ़ाने का मौका है.
चांदी का भाव महीनेभर में 18 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है.
नई दिल्ली. सोने और चांदी के बाजार ने पिछले एक साल में काफी उतार-चढ़ाव का सामना किया है. खासकर चांदी ने तो कुछ महीने पहले तक बवाल काट रखा था और जब यह 4 लाख का लेवल पार कर गई तो लगा कि 5 से भी ऊपर चली जाएगी. लेकिन, अब हालात ऐसे हैं कि चांदी का भाव महीनेभर में ही 18 फीसदी टूट चुका है. बाजार के जानकारों का कहना है कि आगे और भी गिरावट की आशंका है. लेकिन, निवेशकों के लिए ही समय है कि वे चांदी में अपना एक्सपोजर बढ़ा सकते हैं. उन्हें काफी कम कीमत पर चांदी मिल जाएगी जो लंबे समय में अच्छा रिटर्न दिला सकती है.
चांदी फिलहाल अपने एक साल के निचले स्तर पर चल रही है. नवंबर, 2025 के मुकाबले अभी इसका भाव ज्यादा नीचे आ गया है. यह गिरावट महंगाई की आशंका और केंद्रीय बैंकों की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने के डर की वजह से दिख रही है. ग्लोबल मार्केट में चांदी का हाजिर भाव 3 नवंबर को गिरकर 48.63 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर चला गया था. बाद में इसमें थोड़ा सुधार दिखा लेकिन ट्रेडिंग खत्म होने तक 1.62 फीसदी की गिरावट दिखी. चांदी के भाव में साप्ताहिक आधार पर 8.37 फीसदी तो महीनेभर में 18 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है.
घरेलू बाजार में भी नीचे आई चांदी
सिर्फ ग्लोबल मार्केट में ही नहीं, घरेलू बाजार में भी चांदी का भाव नीचे आया है. मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी का भाव 4 दिसंबर की डिलीवरी के लिए 2.17 फीसदी गिरकर 1,79,794 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया. इसकी कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आगे ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका है. इसके अलावा अमेरिका के जॉब डाटा, बेरोजगारी के आंकड़े और महंगाई के आंकड़ों का भी इस पर काफी असर पड़ रहा है. ऊपर से महंगे कच्चे तेल और भूराजनैतिक संकटों का भी असर दिख रहा है.
क्या फिर उछाल मारेगी चांदी
एवीपी कमोडिटी रिचर्स के शेधकर्ता कायनात चेनवाला का कहना है कि चांदी में गिरावट और उछाल एक चक्रीय प्रक्रिया है, जिसका मतलब है कि तेजी से बाद एक करेक्शन जरूर आता है. सेमीकंडक्टर, एआई इन्फ्रा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से भी चांदी पर दबाव दिख रहा है. चांदी के मुकाबले सोने का भाव कम उतार-चढ़ाव वाला रहा है. यही वजह रही कि पिछले दिनों सोने और चांदी का अनुपात बढ़कर 79 पहुंच गया था. यह हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा अनुपात रहा है. इस अनुपात के बढ़ने से पता चलता है कि दोनों धातुओं में औसतन किसकी कीमत ज्यादा बढ़ रही है.
किस रेंज में रहेगी चांदी की कीमत
चेनवाला का मानना है कि चांदी का भाव आने वाले समय में 47 से 50 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकता है. अगर इस लेवल पर भाव टिका रहता है तो मानकर चलिए कि निकट भविष्य में इससे सस्ता होने का अनुमान नहीं है. हालांकि, 47 डॉलर से नीचे जाने पर चांदी का भाव 43 से 45 डॉलर के आसपास रुक सकता है. खासकर अगर महंगाई और बॉन्ड यील्ड का दबाव बना रहता है. इससे नीचे चांदी का भाव जाने की फिलहाल संभावना नहीं दिखती है. लिहाजा निवेशक चांदी में अभी अपना एक्सपोजर बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं. अगले साल से चांदी का भाव आगे बढ़ने की पूरी संभावना है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…