Last Updated:July 15, 2026, 11:04 IST ADJ Uttam Anand Murder Case: धनबाद के बहुचर्चित जज उत्तम आनंद हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने धनबाद की सीबीआई कोर्ट की सुनाई गई सजा को सही ठहराते हुए दोनों दोषियों की अपील खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या थी. जज उत्तम आनंद हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोनों दोषियों की ताउम्र जेल की सजा बरकरार रांची. झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यानी एडीजे (ADJ) उत्तम आनंद हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने इस जघन्य हत्याकांड के दोनों मुख्य दोषियों, लखन वर्मा और राहुल वर्मा की क्रिमिनल अपील याचिकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उच्च न्यायायल ने धनबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट द्वारा दोनों अपराधियों को सुनाई गई अंतिम सांस तक जेल में रहने यानी ताउम्र कैद की सजा को बिल्कुल सही ठहराते हुए बरकरार रखा है. उच्च न्यायालय ने साफ तौर पर कहा कि यह कोई सड़क दुर्घटना या आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि न्यायाधीश को रास्ते से हटाने के लिए जानबूझकर सोची-समझी साजिश के तहत की गई जघन्य हत्या थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को सही पाया और माना कि आटो से टक्कर मारने की यह वारदात कोई आकस्मिक नहीं थी, बल्कि दोषियों ने पूरी प्लानिंग के साथ जज उत्तम आनंद को पीछे से टक्कर मारी थी, ताकि उनकी जान ली जा सके. दोषियों की तरफ से सजा को कम करने या बरी करने के लिए दायर की गई याचिका में कोई भी ठोस कानूनी आधार नहीं पाया गया, जिसके चलते कोर्ट ने उनकी अपील को सिरे से खारिज कर दिया. हाई इसके साथ ही झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत के 6 अगस्त 2022 को दिए गए फैसले पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी. वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य बने फैसले का मुख्य आधार बता दें कि इस पूरे मामले की तफ्तीश केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) ने की थी. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई द्वारा कोर्ट के समक्ष पेश किए गए वैज्ञानिक, फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों को बेहद मजबूत और सटीक माना है. जांच एजेंसी ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज की थ्री-डी मैपिंग, ऑटो की गति का विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट को अदालत के सामने पेश किया था. इन पुख्ता डिजिटल और तकनीकी सबूतों से यह पूरी तरह साबित हो गया कि ऑटो चालक ने जानबूझकर सड़क किनारे दौड़ रहे जज उत्तम आनंद को निशाना बनाया था. धनबाद सीबीआई कोर्ट का 6 अगस्त 2022 का फैसला सही झारखंड हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धनबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने 6 अगस्त 2022 को जो फैसला दिया था वह कानूनी रूप से पूरी तरह न्यायसंगत है. बता दें कि निचली अदालत ने लखन वर्मा और राहुल वर्मा को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और धारा 201 (साक्ष्य छिपाने) के तहत दोषी पाते हुए मरते दम तक जेल की कोठरी में रहने की कड़ी सजा सुनाई थी. अब जब इस मामले में उच्च न्यायालय ने भी अपना फैसला दे दिया है तो दोनों दोषियों को अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे ही गुजारनी होगी. जज उत्तम आनंद हत्याकांड के बारे में जानिए आपको बता दें कि जज उत्तम आनंद की हत्या की यह पूरी घटना 28 जुलाई 2021 की है. उस दिन इस हत्या की वारदात को तब अंजाम दिया गया जब एडीजे उत्तम आनंद कोर्ट जाने से पहले रणधीर वर्मा चौक के पास सड़क किनारे मॉर्निंग वॉक कर रहे थे. इसी दौरान पीछे से आ रहे एक ऑटो रिक्शा ने जानबूझकर बेहद करीब आकर उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे सिर में गंभीर चोट लगने के कारण अस्पताल में उनकी मौत हो गई. शुरुआत में इसे एक साधारण सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन घटना का रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख पर जांच सीबीआई को सौंपी गई. सीबीआई ने गहन वैज्ञानिक जांच के बाद खुलासा किया कि ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके सहयोगी राहुल वर्मा ने सोची-समझी साजिश के तहत जज उत्तम आनंद की हत्या की थी, जिसके बाद धनबाद की विशेष अदालत ने अगस्त 2022 में दोनों को ताउम्र कैद की सजा सुनाई थी. जज उत्तम आनंद केस में अब भी अनसुलझे हैं सवाल हालांकि, मामले में कई ऐसे पहलू भी हैं जो अनसुलझे हैं. सीबीआई की जांच के अनुसार, धनबाद के जज उत्तम आनंद की हत्या के मामले में दोनों दोषियों ने किसी मास्टरमाइंड या ठोस वजह का खुलासा नहीं किया, जिससे हत्या के मकसद पर सस्पेंस बना हुआ है. वहीं, सीबीआई का मानना था कि यह मोबाइल चोरी की कोशिश थी, जबकि परिवार को इसमें बड़े माफिया की साजिश का संदेह है. हालांकि, सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसे इरादतन हत्या मानते हुए सजा सुनाई, यह स्पष्ट करते हुए कि सजा के लिए स्पष्ट मकसद साबित करना अनिवार्य नहीं है.बहरहाल, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई के पेश किए गए वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को महत्वपूर्ण आधार माना और कहा कि इन साक्ष्यों से अभियोजन का मामला मजबूत साबित होता है और दोषसिद्धि पर कोई संदेह नहीं रह जाता. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link