भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

ताज़ा खबर

Ethanomics : एथनॉल मिलाने पर ऐसे ही नहीं अड़ी है सरकार, देख...

Last Updated:July 10, 2026, 22:40 IST Ethanol Saving : सरकार ने एथनॉल मिलाने का बचाव ऐसे ही नहीं किया है. बीते 10 साल से आंकड़े बताते हैं कि इस प्रोग्राम से सरकार को करीब 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है और कच्चे तेल के आयात में भी 31 करोड़ टन की कमी आई है. सरकार ने यह भी दावा किया है कि एथनॉल मिलाने के फैसले को जल्दबाजी में नहीं लागू किया गया है. एथनॉल मिलाने से सरकार को 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. नई दिल्ली. सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण यानी ईबीपी कार्यक्रम का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि इस योजना से न केवल चीनी उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि किसानों की कमाई बढ़ी है और वित्तवर्ष 2014-15 से अब तक देश को 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि एथनॉल अब कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है. इससे अतिरिक्त फसलों के लिए नए बाजार बने हैं और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है. उन्होंने बताया कि वित्तवर्ष 2014-15 से 2026 के बीच एथनॉल आपूर्ति के जरिए 31 करोड़ टन से अधिक कच्चे तेल की जरूरत कम हुई है, जिससे 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई. इस दौरान लगभग 93 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी भी आई है. गन्ना किसानों को मिल रहा समय पर भुगतानश्रीवास्तव ने कहा कि गन्ना आधारित एथनॉल से शुरू हुए ईबीपी कार्यक्रम ने गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है और चीनी उद्योग को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाया है. उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों का बकाया अब ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर है. उन्होंने बताया कि 2014-15 से 2020-21 के बीच केंद्र ने चीनी मिलों को करीब 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, लेकिन 2021-22 के बाद से अतिरिक्त चीनी को एथनॉल उत्पादन में उपयोग किए जाने के कारण निर्यात सब्सिडी की जरूरत ही नहीं पड़ी. मक्का उत्पादक भी कर रहे कमाईसचिव ने कहा कि एथनॉल उत्पादन में मक्का प्रमुख कच्चा माल बनकर उभरा है, जो 2024-25 में तेल मार्केटिंग कंपनियों को आपूर्ति का 47 फीसदी रहा और मौजूदा आपूर्ति वर्ष में अब तक 36 फीसदी योगदान दे रहा है. इससे मक्का किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है. उन्होंने बताया कि देश में एथनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 के लगभग 21 करोड़ लीटर से बढ़कर अब करीब 2,000 करोड़ लीटर हो गई है. ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत चावल में टूटे दानों की सीमा 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के हालिया फैसले से बेहतर गुणवत्ता का चावल मिलेगा और अतिरिक्त टूटे चावल का उपयोग एथनॉल उत्पादन जैसे औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा. जल्दबाजी में नहीं लिया है फैसलाजीईएमए के अध्यक्ष सीके जैन ने कहा कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम व्यापक शोध के बाद लागू किया गया है और यह जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं है. उन्होंने कहा कि ई20 मिश्रण पर 2014 से 2018 के बीच चार वर्षों तक अध्ययन किया गया, जिसमें वाहनों को लंबी दूरी तक चलाकर परीक्षण किया गया है. ई20 पेट्रोल को सभी इंजनों के लिए सुरक्षित पाया गया और इसे तकनीकी अध्ययन, पायलट परियोजनाओं एवं नीतिगत चर्चाओं के बाद लागू किया गया. उन्होंने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के खराब होने के संबंध में आ रही शिकायतों पर कहा कि इस विषय पर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि भ्रांतियों पर. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

CISF को मिली स्पेशल पावर, पश्चिम बंगाल से झारखंड तक कांपे माफिया...

होमताजा खबरदेश CISF को मिली ऐसी स्पेशल पावर, पश्चिम बंगाल से झारखंड तक कांपे माफिया Last Updated:July 10, 2026, 21:51 IST CISF Action Agains Mafia: स्‍पेशल पॉवर मिलने के बाद सीआईएसएफ ने पश्चिम बंगाल से झारखंड तक स्‍पेशल ऑपरेशन शुरू किए हैं. बीते पांच दिनों से जारी इस ऑपरेशन ने कोल माफिया के बीच हड़कंप मचा दिया है. आलम यह है कि बीते पांच दिनों में सीआईएसएफ ने कई लोगों को गिरफ्तार कर करोड़ों रुपए का माल जब्‍त किया है. क्‍या है पूरा मामला, जानने के लिए पढ़ें आगे… सीआईएसएफ ने एमएमडीआर एक्‍ट के तहत मिली स्‍पेशल पावर के तहत कई बड़े ऑपरेशन शुरू किए हैं. CISF Action Agains Mafia: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को मिली स्‍पेशल पावर का असर माफिया में दिखने लगा है. सीआईएसएफ के एक्‍शन से पश्चिम बंगाल से लेकर झारखंड तक माफिया कांप उड़े है. आलम यह है कि अब माफिया के पास बोरिया-बिस्‍तर बांध कर भागने के सिवाय कोई दूसरा रास्‍ता नहीं बचा है. जी हां, यहां पर हम बात कर रहे हैं केंद्र सरकार की ‘जीरो कोल लीकेज’ मुहिम के तहत सीआईएसएफ की तरफ से शुरू किए गए एक्‍शन की. एमएमडीआर एक्ट के तहत मिले नए अधिकारों के बाद सीआईएसएफ अब अवैध कोयला खनन, भंडारण और ट्रांसपोर्ट करने वाले माफिया के खिलाफ सीधा एक्‍शल ले रही है. सीआईएसएफ के इस एक्‍शन का असर झारखंड और पश्चिम बंगाल के तमाम इलाकों में साफ नजर आने लगा है. दरअसल, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 यानी एमएमडीआर एक्ट की धारा 22, 23बी और 24 के तहत सीआईएसएफ के नामित अधिकारियों को स्‍पेशल पॉवर दी गई है. स्‍पेशल पॉवर मिलने के बाद अब सीआईएसएफ सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध खनन और कोयले की चोरी करने वालों पर सीधे कानूनी कार्रवाई भी सक्षम है. इसी स्‍पेशल पॉवर का इस्तेमाल करते हुए सीआईएसएफ ने 4 जुलाई से 8 जुलाई 2026 के बीच झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई कोयला क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ज्‍वाइंट ऑपरेश चलाया है. सीआईएसएफ के सीनियर ऑफिसर के अनुसार, इस अभियान में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के इलाकों में छापेमारी की गई है. इस कार्रवाई के दौरान 428.34 मीट्रिक टन से ज्यादा अवैध कोयला बरामद किया गया है. इसके अलावा 4 एफआईआर भी दर्ज की गईं हैं. साथ ही, एक हाइवा ट्रक, 13 से ज्यादा मोटरसाइकिलें और अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण भी जब्त किए गए हैं. सीआईएसएफ ने इस गोरखधंधे में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ एमएमडीआर एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. सबसे बड़ी कार्रवाई बीसीसीएल के धनबाद इलाके में हुई है. सीआईएसएफ ने बीसीसीएल धनबाद के अंतर्गत आने वाले कतरास, बसंतीमाता (कारगिल), कुस्तौर, सिजुआ, जियलगोरा, बरोरा, गोविंदपुर और एनटीएसटी क्षेत्रों में इंटेल के आधार पर छापेमारी की है. यहां ड्रोन की मदद से निगरानी के सा‍थ-साथ जमीन पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया था. बीसीसीएल धनबाद में हुई इस कार्रवाई में 319.54 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद किया गया है. साथ ही कोयले से भरा एक ट्रक और कई मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं हैं. पश्चिम बंगाल के ईसीएल सीतलपुर इलाके में भी सीआईएसएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया था. सीक्रेट इंटेल के आधार पर सीआईएसएफ ने राजमहल, सालानपुर, चित्रा, चापापुर-2 ओसीपी, सोनपुर-बाजारी और कुनुस्तोरिया इलाकों में छापेमारी की थी. इस ऑपरेशन में सिर्फ कोयला ही नहीं पकड़ा गया, बल्कि कोयला डिपो, धर्मकांटे, ट्रांसपोर्ट से जुड़े डॉक्‍यूमेंट और प्रोडक्‍शन रिकॉर्ड की जांच भी की गई है. इस कार्रवाई में 85.93 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद किया गया है. साथ ही, कई वाहनों को जब्त कर घुसपैठ करने वालों को भी पकड़ा गया है. झारखंड के सीसीएल पिपरवार क्षेत्र में रूटीन चेकिंग के दौरान सीआईएसएफ ने एक हाइवा ट्रक को पकड़ा, जिसमें अवैध तरीके से कोयला छिपाकर ले जाया जा रहा था. यहां 13.62 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद किया गया. ट्रक को जब्त कर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया है. इसी तरह सीसीएल करगली क्षेत्र में भी स्‍पेशल ऑपरेशन चलाया गया. यहां 9.25 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद हुआ. साथ ही अवैध खनन में इस्तेमाल हो रही 7 मोटरसाइकिलें भी जब्त कर ली गईं हैं. सीआईएसएफ बोली- अभी तो सिर्फ शुरूआत है…सीआईएसएफ का कहना है कि इन अभियानों में सिर्फ पारंपरिक तरीके नहीं अपनाए गए, बल्कि आधुनिक तकनीक का भी पूरा इस्तेमाल किया गया. ह्यूमन इंटेलिजेंस, ड्रोन सर्विलांस, ट्रांसपोर्ट रूट्स की ट्रैकिंग, सप्राइज चेक, जीपीएस बेस्‍ड डॉक्‍युमेंटेशन, ट्रांसपोर्टेशन रिकॉर्ड की जांच भी की जा रही है. साथ ही, धर्मकांटों की पर भी सीआईएसएफ की टीमें लगातार अपनी नजर बनाए हुए हैं. यह सिर्फ शुरुआत है. आगे भी कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया लिमिटेड, उसकी सहायक कंपनियों, राज्य सरकारों और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर ऐसे ऑपरेशन लगातार चलाए जाएंगे. अवैध खनन, कोयले की चोरी और तस्करी में शामिल किसी भी शख्‍स के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. – सीआईएसएफ About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

गुमला-रांची बस किराया 180 करने पर आपत्ति, एसडीओ को सौंपा ज्ञापन

गुमला|गुमला–रांची मार्ग पर 6 जून 2026 से लागू नई बस किराया सूची में बढ़ोतरी को लेकर नागरिकों ने अनुमंडल पदाधिकारी, गुमला को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में किराया सूची की निष्पक्ष समीक्षा और आवश्यक संशोधन की मांग की गई है। नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर रोजाना हजारों लोग यात्रा करते हैं। नई दरों से यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ज्ञापन के अनुसार नई सूची में गुमला–रांची का किराया 150 रुपये से बढ़ाकर 180 रुपए तय किया गया है। यात्रियों का दावा है कि इस मार्ग पर पहले वास्तविक किराया 140 रुपये प्रचलित था। उनका कहना है कि बस एसोसिएशन ने पूर्व किराया 140 की जगह 150 रुपये दिखाकर बढ़ोतरी को आधार दिया। नागरिकों ने समान मानकों के आधार पर किराया 160 रुपये तय करने को अधिक उचित बताया है। ज्ञापन में अन्य मार्गों के किराये का भी हवाला दिया गया है। गुमला-खूंटी और गुमला–मनोरा मार्ग पर किराया 140 से 160 रुपए किया गया है। गुमला से चंदवा, महुवादांड और रेंगारी जैसे मार्गों पर 150 रुपए के पुराने किराए को बढ़ाकर लगभग 170 रुपए किया गया है। इसके मुकाबले रांची-गुमला मार्ग पर 40 रुपए की सीधी बढ़ोतरी कर 28.57 प्रतिशत वृद्धि बताई गई है। नागरिकों के अनुसार यह बढ़ोतरी अधिकांश अन्य मार्गों से अधिक है। किराया सूची के विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा गया है कि ज्यादातर मार्गों पर वृद्धि 15 से 17 प्रतिशत के बीच है। कुछ मार्गों पर इससे कम बढ़ोतरी हुई है। वहीं कुछ मार्गों पर 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। Source link

झारखंड

चित्तरंजन: देशबंधु महाविद्यालय में एबीवीपी का स्थापना दिवस मना, राष्ट्र निर्माण का...

भास्कर न्यूज | चित्तरंजन चित्तरंजन के देशबंधु महाविद्यालय परिसर में गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का स्थापना दिवस हर्षोल्लास और राष्ट्रभक्ति के माहौल में मनाया गया। महाविद्यालय में यह पहला अवसर था जब इस संगठन का स्थापना दिवस इतने व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम ने महाविद्यालय में छात्र राजनीति और वैचारिक गतिविधियों के एक नए अध्याय की शुरुआत का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण और ध्वजारोहण के साथ हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तरंजन शाखा के प्रभारी प्रणव सिन्हा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहे। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों पर चर्चा करते हुए छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्र हितों में एबीवीपी की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वर्तमान विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में पूर्व छात्र भी शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान परिसर देशभक्ति के नारों और गीतों से गूंजता रहा। सुभाजीत द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा का संचार कर दिया। कार्यक्रम का संचालन शिवा दास ने किया। इस दौरान आरएसएस कार्यकर्ता विभास हालदार विशेष रूप से उपस्थित रहे। Source link

ताज़ा खबर

65, 49, 56… ये स‍िर्फ नंबर नहीं, द‍िल्‍ली-एनसीआर वालों के ‘अच्‍छे द‍िन’...

दिल्ली एनसीआर वालों, आपको कुछ पता चला? कुछ बदलाव महसूस हुआ? 50 घंटे से चमत्‍कार हो रहा है. द‍िल्‍ली एनसीआर की आबोहवा में एक ऐसा जादुई बदलाव आया है, जिसका इंतजार आप वर्षों से कर रहे थे. करीब तीन साल के लंबे अंतराल के बाद, दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’ श्रेणी में पहुंच गई है. लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने पिछले 48 से 50 घंटों में हवा में मौजूद प्रदूषण को धो डाला है. नतीजा एयर क्‍वाल‍िटी इंडेक्‍स यानी AQI 65, 49, 56, 48 पर जा पहुंचा है. ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले करोड़ों लोगों के फेफड़ों के लिए संजीवनी है. बुधवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 59 था, जो गुरुवार को घटकर 48 पर आ गया. और शुक्रवार को 65 दर्ज क‍िया गया. कुछ ऐसा ही नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम का भी सीन रहा. एयर क्‍वाल‍िटी इंडेक्‍स के पैमाने पर 0 से 50 के बीच के AQI को अच्छा माना जाता है. यह हवा का सबसे साफ स्तर है. वैसे तो 51 से 48 तक आना सिर्फ कुछ अंकों का खेल लग सकता है, लेकिन ज‍िस दिल्ली में प्रदूषण का स्‍तर 600 तक पहुंच जाता है, वहां AQI 50 के नीचे आना चमत्‍कार से कम नहीं. आप जानकर हैरान होंगे क‍ि दिल्ली को यह ‘अच्छी’ हवा आखिरी बार 10 सितंबर 2023 को नसीब हुआ था. उस वक्त दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन चल रहा था. कड़े ट्रैफिक प्रतिबंधों, निर्माण कार्यों पर रोक और भारी बारिश ने मिलकर उस वक्त प्रदूषण को नीचे ला दिया था. लेकिन आज, बिना किसी लॉकडाउन या सरकारी पाबंदी के, सिर्फ कुदरत की मेहरबानी से दिल्ली की हवा इतनी साफ हुई है. यह चमत्कार हुआ कैसे? पिछले 50 घंटों से दिल्ली में जो साफ हवा बह रही है, उसके पीछे का साइंस बहुत सीधा है. मानसूनी बारिश एक तरह से नेचुरल एयर प्यूरीफायर की तरह काम कर रही है. साइंस भाषा में इस प्रॉसेस को वेट डिपोजिशन या वॉशआउट इफेक्ट कहते हैं. जब आसमान से बारिश की बूंदें वायुमंडल से होकर नीचे गिरती हैं, तो वे अपने साथ हवा में तैर रहे खतरनाक कणों को समेट लेती हैं. इनमें PM 2.5, PM 10, धूल, कालिख और अन्य जहरीले रसायन शामिल होते हैं. बारिश इन सबको धोकर जमीन पर ला देती है. इससे हवा में मौजूद पर्टिकुलेट मैटर यानी सूक्ष्म कण अचानक से गिर जाते हैं. इसके अलावा, लगातार बारिश होने से सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल भी पूरी तरह से बैठ जाती है. सूखे महीनों में ये धूल दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण होती है. इसके साथ ही, मानसून की तेज हवाएं एक जगह रुके हुए प्रदूषण को दूर तक बिखेर देती हैं, जिससे हवा और भी साफ हो जाती है. शहरों का एयर क्वालिटी मॉनिटर द‍िल्‍ली 65 गाज‍ियाबाद 56 ग्रेटर नोएडा 49 गुरुग्राम 91 मेरठ 47 आंकड़े-CPCB एक्‍सपर्ट क्‍या कह रहे? सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की साइंट‍िस्‍ट अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, अभी जो सुधार द‍िख रहा, वो बताता है क‍ि कुदरत खुद को क‍ितनी तेजी से साफ कर लेती है. लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सिर्फ मौसम के भरोसे हम दिल्ली के प्रदूषण संकट का समाधान नहीं कर सकते. लेकिन यह हमेशा के ल‍िए नहीं है. हमें नीत‍ियां बदलनी होंगी. 11 साल का ‘काला’ इत‍िहास केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड CPCB के आंकड़े पर नजर डालें तो 11 साल का ‘काला’ इत‍िहास नजर आता है. साल 2015 से लेकर आज तक यानी इन 11 सालों में दिल्ली ने केवल 15 ‘अच्छे’ हवा वाले दिन देखे हैं. अगर इसका औसत निकालें, तो दिल्ली को साल में बमुश्किल एक या दो दिन ही साफ हवा मिलती है. आंकड़े दे रहे गवाही 2015, 2016 और 2018: ये वो साल थे जब दिल्ली के लोगों को पूरे 365 दिनों में एक भी दिन ‘अच्छी’ हवा नसीब नहीं हुई. पूरा साल प्रदूषण के साये में बीता. कई बार तो प्रदूषण 500 से ऊपर चला गया. 2017: जुलाई के अंत में भारी बारिश के बाद केवल 2 दिन हवा ‘अच्छी’ श्रेणी में आई. 2019: अगस्त महीने में मूसलाधार बारिश के बाद फिर से 2 दिन हवा साफ रही. 2020: यह दिल्ली के लिए सबसे साफ साल था. इस साल 5 दिन AQI 50 के नीचे रहा. इनमें से एक दिन कोविड-19 के कारण लगे सख्त देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान था, और बाकी चार दिन मानसून के दौरान. 2021: 18 अक्टूबर को लगातार हुई बारिश ने AQI को 46 पर ला दिया था. 2022: सितंबर और अक्टूबर के महीने में 3 दिन हवा साफ रही. 2023: 10 सितंबर को G-20 की पाबंदियों और बारिश के मेल से 1 दिन हवा ‘अच्छी’ रही. पैटर्न बहुत क्‍लीयरद‍िल्‍ली-एनसीआर में हवा साफ तब तक नहीं होती, जबतक मूसलाधार बार‍िश न हो. या फ‍िर लॉकडाउन जैसी स्‍थ‍ित‍ि न बने. वरना सर्दियों में दिल्ली गैस चैंबर बन जाती है. ठंड के कारण हवा भारी हो जाती है और प्रदूषक तत्व जमीन के करीब ही फंस कर रह जाते हैं. गाड़ियां, कारखाने और पराली का धुआं मिलकर एक खतरनाक स्मॉग बना देते हैं जो हफ्तों तक नहीं हटता. दूसरी तरफ, मानसून में बिल्कुल उल्टा होता है. बारिश हवा को धो देती है, नमी धूल को उड़ने नहीं देती और तेज हवाएं धुएं को बिखेर देती हैं. Source link

झारखंड

पलामू के किसानों के लिए बड़ी खबर, झारखंड सरकार दे रही पशुपालन...

होमताजा खबरकृषि पलामू के किसानों के लिए बड़ी खबर, झारखंड सरकार दे रही पशुपालन का मौका Last Updated:July 10, 2026, 21:01 IST बकरा विकास योजना में पलामू जिले के लिए 732 लाभुकों का लक्ष्य तय किया गया है. इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित लाभुक को आठ बकरियां और दो बकरे दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करने पर किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. पलामू: बदलते दौर में खेती के साथ पशुपालन अपनाकर किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं. बदलते मौसम, अनिश्चित बारिश और खेती की बढ़ती लागत के बीच पशुपालन किसानों के लिए अतिरिक्त और स्थायी आमदनी का मजबूत जरिया बन रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. पलामू जिले को भी बकरी, सूकर, मुर्गी और भेड़ पालन योजनाओं के लिए लक्ष्य आवंटित कर दिया गया है. जिला पशुपालन विभाग का कहना है कि इन योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. बकरा विकास योजनाजिला पशुपालन पदाधिकारी प्रभाकर सिन्हा ने लोकल18 को बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार का आदेश जिले को मिल चुका है. इसके तहत बकरा विकास योजना में पलामू जिले के लिए 732 लाभुकों का लक्ष्य तय किया गया है. इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित लाभुक को आठ बकरियां और दो बकरे दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करने पर किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का भी बेहतर माध्यम बन सकता है. सूकर विकास योजनाप्रभाकर सिन्हा ने बताया कि जिले को सूकर विकास योजना के तहत 168 लाभुकों का लक्ष्य मिला है. वहीं, लो इनपुट लेयर (अंडा देने वाली मुर्गी) योजना के लिए 172, ब्रॉयलर मुर्गी पालन योजना के लिए 332 और भेड़ पालन योजना के लिए 144 लाभुकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और पशुपालन के माध्यम से नियमित आय उपलब्ध कराना है. एक नई और महत्वाकांक्षी योजनाप्रभाकर सिन्हा के अनुसार कि इस वर्ष विभाग ने एक नई और महत्वाकांक्षी योजना भी शुरू की है. इसके तहत इच्छुक पशुपालक 100 बकरियों और 5 बकरों की इकाई स्थापित कर सकेंगे. इस योजना का उद्देश्य बड़े स्तर पर व्यवसायिक बकरी पालन को बढ़ावा देना है. विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान इस योजना से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं और इसे सफल व्यवसाय बना सकते हैं. पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभप्रभाकर सिन्हा के मुताबिक जिला स्तरीय चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभ दिया जाएगा. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अभी से अपने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें. साथ ही पशुपालन के लिए आधारभूत व्यवस्थाएं भी शुरू कर दें. समय पर तैयारी करने वाले किसानों को योजना का लाभ मिलने के बाद पशुपालन शुरू करने में आसानी होगी और वे कम समय में अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

झारखंड

बिल्डर निशित के घर फायरिंग से भागे चोर:अखिलेश के घर चोरी, वीआईपी...

पहली घटना, रात 12.30 बजे : एनके कंस्ट्रक्शन के बिल्डर निशित केसरी के घर में चोरी की कोशिश हुई, दूसरी, 2.30 बजे: त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन के मालिक अखिलेश पांडेय के घर चोर घुसे, गहने-नगद चुराए राजधानी की पॉश कॉलोनी अशोकनगर में बुधवार देर रात अपराधियों ने एक ही रात दो बड़ी वारदातों को अंजाम दिया। दोनों घटनास्थल अरगोड़ा थाना से महज 200 मीटर की दूरी पर हैं। पहली घटना रात करीब 12.30 से करीब 2.25 बजे के बीच रोड नंबर-5बी स्थित एनके कंस्ट्रक्शन के बिल्डर निशित केसरी के घर में हुई, जहां चोरी की कोशिश के दौरान हुई फायरिंग में उनके सरकारी बॉडीगार्ड मुखदेव पासवान घायल हो गए। इस घटना के कुछ देर बाद रात करीब 2.30 बजे रोड नंबर-4बी स्थित त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन के बिल्डर अखिलेश पांडेय के घर में चोरी की वारदात हुई। उस समय अखिलेश पांडेय रांची से बाहर थे। उनके भाई गजेंद्र पांडेय ने बताया कि चोरी का आकलन किया जा रहा है। अनुमान है करोड़ों रुपए की संपत्ति चोरी हुई है। इसमें लाखों रुपए के सोने-चांदी के गहने भी शामिल हैं। गुरुवार शाम परिवार ने चोरी से संबंधित विस्तृत जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई। पुलिस ने दोनों घटनाओं से साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। रेकी की आशंका जानकारी के अनुसार चोर पीछे की बाउंड्री फांदकर घर में घुसा और पिलर के सहारे ऊपर पहुंचा। जिस तरीके से उसने वारदात को अंजाम दिया, उससे आशंका है कि उसने पहले घर की रेकी की थी। उसे यह भी पता था कि कीमती सामान किस कमरे में रखा है। सीसीटीवी कैमरों से बचने की कोशिश के बावजूद उसकी कई तस्वीरें कैद हुई हैं। फुटेज में वह काले कपड़े और मंकी कैप पहने दिखाई दे रहा है। परिवार का कहना है कि संभव है उसने किसी स्प्रे का इस्तेमाल किया हो, ताकि घर के लोग सोए रहें। चोर करीब काफी देर घर में रहा। बड़े बेटे के शादी की चल रही तैयारी: घर में बड़े बेटे आशु पांडेय की शादी की तैयारियां चल रही थीं। अप्रैल में उनकी रिंग सेरेमनी हुई थी और जल्द शादी होनी थी। इसी कारण घर में जेवर और नकदी रखी थी। घर में पेंटिंग, प्लंबिंग समेत कई काम चल रहे थे और करीब 20 लोग काम कर रहे थे। वारदात के समय पूरा परिवार घर में था। नीचे दो सुरक्षा गार्ड भी तैनात थे, लेकिन चोर सभी को चकमा देकर घर में घुसा और वारदात को अंजाम देकर निकल गया। निशित के घर फायरिंग में बॉडीगार्ड घायल रोड नंबर-5बी स्थित बिल्डर निशित केसरी के घर में भी बुधवार की देर रात 12.30 से 2.25 बजे के बीच चोरी की कोशिश हुई। मरम्मत का काम होने के कारण घर के बाहर बांस लगा था। उसी के सहारे एक चोर छत पर पहुंचा और जिम के रास्ते कमरे में घुसा। उसने दरवाजे का लॉक तोड़ दिया। आवाज होने पर निशित केसरी की पत्नी ने मोबाइल पर सीसीटीवी कैमरे का फुटेज देखा। एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया। उस समय उनके दो निजी और एक सरकारी बॉडीगार्ड घर में मौजूद नहीं थे। निशित केसरी ने पास के फ्लैट में मौजूद सरकारी बॉडीगार्ड मुखदेव पासवान को फोन किया। निशित ने भी लाइसेंसी हथियार से फायरिंग की। बॉडीगार्ड ने भी AK-47 से फायर किया। आरोप है कि दीवार के बाहर छिपे दूसरे चोर ने बॉडीगार्ड मुखदेव पर गोली चलाई, जो उनके पैर के अंगूठे को छूते हुए निकल गई। इसके बाद वे फरार हो गए। अरगोड़ा थाना से 200 मीटर दूर हुई घटना, पुलिस ने दो विशेष टीम बनाई अशोकनगर में कई आईएएस, आईपीएस व वीआईपी के आवास हैं। यहां से अरगोड़ा थाना 200 मीटर दूर है। 24 घंटे सुरक्षा गार्ड रहते है। Source link

झारखंड

पालकोट में बाइक-बोलेरो की टक्कर में दो युवक घायल, सिर में चोट...

गुमला| पालकोट थाना क्षेत्र के पम्पापुर कॉलेज मोड़ के समीप बुधवार शाम एक मोटरसाइकिल और बोलेरो वाहन के बीच हुई सीधी भिड़ंत में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद दोनों घायलों को उपचार के लिए पालकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां अस्पताल की व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। प्राप्त जानकारी के अनुसार पोजेगा गांव निवासी प्रवीण सिंह 22 वर्ष पिता प्रभु सिंह व बीरेंद्र कुल्लू 23 वर्ष पिता एतवा कुल्लू, मोटरसाइकिल से पोजेगा से पालकोट की ओर आ रहे थे। इसी दौरान पम्पापुर कॉलेज मोड़ के समीप सामने से आ रही बोलेरो से उनकी बाइक की सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों युवक हवा में उछलकर सड़क के दूसरी ओर जा गिरे। हादसे में दोनों को सिर, हाथ-पैर व शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक सवार दोनों लोग शराब के नशे में धुत थे, बाइक के लापरवाही के कारण घटना घटी है। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को एक निजी वाहन के माध्यम से पालकोट अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि अस्पताल तक जाने वाले मार्ग की बदहाल स्थिति के कारण वाहन सीधे अस्पताल परिसर तक नहीं पहुंच सका। बताया जाता है कि सड़क की जगह कीचड़ और गीली मिट्टी होने के कारण घायलों को कुछ समय तक बीच रास्ते में सड़क किनारे गीली मिटी में ही रखना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों घायल दर्द से तड़पते रहे और काफी देर बाद एक वार्ड बॉय स्ट्रेचर लेकर पहुंचा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल के भीतर ले जाया गया। घायलों के परिजन और स्थानीय लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल में दुर्घटना जैसी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में उस समय कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था और न ही तत्काल मरीजों को रेफर करने के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध थी। Source link

ताज़ा खबर

Indian Wedding Non-Veg Fight। Marriage Food fights। न दहेज, न दूल्‍हा-दुल्‍हन का...

होमताजा खबरदेश न दहेज, न दूल्‍हा-दुल्‍हन का विवाद… फिर क्‍यों बेवजह शादी में चल रहे लात-घूंसे Last Updated:July 10, 2026, 20:45 IST आजकल शादियां दहेज या रस्मों के बजाय डाइनिंग टेबल पर चिकन-मटन और रसगुल्ले जैसी चीजों के लिए टूट रही हैं. ओडिशा के बालेश्वर में मटन न मिलने पर नाबालिगों ने केटरिंग कर्मी पर जानलेवा हमला कर दिया जबकि आगरा%नवादा में रसगुल्ले के चक्कर में जमकर लात-घूंसे चले. चलिए हम आपको ऐसे ही कुछ किस्‍सों के बारे में बताते हैं. ख़बरें फटाफट शादी में नए तरह के विवाद सामने आ रहे हैं. भारतीय शादियों में अब वह दौर बीत चुका है जब फेरों की रस्में, सात वचन या दहेज के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ करते थे. आज के दौर में शादियां किसी गंभीर सामाजिक मुद्दे पर नहीं बल्कि डाइनिंग टेबल पर परोसे जाने वाले नॉन-वेज खान-पान के चक्कर में टूटने की दहलीज पर पहुंच रही है. जी हां, यह सुनने में भले ही अजीब और मजाकिया लगे लेकिन आजकल बारात और घराती पक्ष के बीच होने वाली खूनी झड़पों की सबसे बड़ी वजह चिकन-मटन की कमी बन चुकी है. थाली में पसंदीदा पीस न मिलने या मटन खत्म होने जैसी मामूली बातों पर देखते ही देखते मैरिज होम जंग का मैदान बन जाते हैं. जयमाला के स्टेज पर जहां कुछ पलों पहले मुस्कुराहटें बिखरी होती हैं, वहां कुछ ही देर में कुर्सियां, लात-घूंसे और बेल्ट चलने लगती हैं. आइए आपको बताते हैं ऐसे ही हैरान कर देने वाले किस्‍से जहां शादी की खुशियां सिर्फ एक लेग पीस और नली की भेंट चढ़ गईं. बालेश्‍वर, ओडिशा, 24 जून 2026: ओडिशा के बालेश्वर (रेमुना) में की रात एक शादी समारोह में मटन न परोसे जाने से नाराज होकर चार नाबालिगों ने केटरिंग कर्मी पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया. चिकन करी परोसे जाने और मटन की मांग पूरी न होने पर हुए इस विवाद में कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे नाजुक हालत में कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है. पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर चारों आरोपी किशोरों को पकड़कर अंगुल के बाल सुधार गृह भेज दया है. आगरा, यूपी, 19 नवंबर 2023: उत्तर प्रदेश के आगरा में शादी समारोह के दौरान दावत में गुलाब जामुन कम पड़ने को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई. रसगुल्ला खाने की मामूली बात पर शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते लात-घूंसों और लाठी-डंडों में बदल गया, जिससे मैरिज होम जंग का मैदान बन गया. इस खूनी संघर्ष में एक महिला सहित छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें पुलिस ने अस्पताल भेजा. पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर कानूनी जांच शुरू कर दी है. नवादा, बिहार, 25 फरवरी 2026: बिहार के नवादा में शादी समारोह के दौरान मिठाई काउंटर पर रसगुल्ला कम पड़ने को लेकर दूल्हा और दुल्हन पक्ष के लोग आपस में भिड़ गए. मामूली कहासुनी से शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया, जिससे मैरिज हॉल में चीख-पुकार मच गई. दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिसका पूरा वीडियो होटल के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गया. सोशल मीडिया पर इस बेतुकी लड़ाई का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और पुलिस अब इस घटना की जांच में जुट गई है. कानपुर, यूपी, 13 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के कानपुर (बिलौरी) में 11 अप्रैल को एक निकाह समारोह के दौरान चिकन करी में लेग पीस खत्म होने पर बाराती भड़क गए. लड़की पक्ष के चाचा द्वारा आप लोगों ने ही खा लिए कहने पर बरातियों का ईगो हर्ट हो गया और दोनों पक्षों में जमकर लात-घूंसे चल गए. बात निकाह टूटने और बारात वापस ले जाने तक पहुंच गई. हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दोनों पक्षों में सुलह कराई. छानबीन में लेग पीस से भरा डोंगा अंदर कमरे में सुरक्षित मिला, जिसके बाद बरातियों को खाना परोसा गया और निकाह की हैप्पी एंडिंग हुई. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

पुरी जाना हुआ आसान, दक्षिण-पूर्व रेलवे चलाएगा 5 स्पेशल ट्रेनें, देखें शेड्यूल

Last Updated:July 10, 2026, 09:32 IST Jamshedpur To Puri Rath Yatra: जगन्नाथ रथयात्रा के लिए दक्षिण-पूर्व रेलवे ने 5 स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा की है. ये ट्रेनें 15, 17, 23 और 25 जुलाई को चलेंगी, जिससे झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के श्रद्धालुओं को सुविधा होगी. अगर पहली बार पुरी जा रहे हैं तो यह सुविधा आपके बहुत काम आ सकती है. जमशेदपुर. भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल होने और पुरी धाम के दर्शन करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है. यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दक्षिण-पूर्व रेलवे ने पांच विशेष ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है. इन ट्रेनों के चलने से झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के हजारों श्रद्धालुओं को पुरी तक पहुंचने में बड़ी सुविधा मिलेगी. रेलवे का उद्देश्य त्योहार के दौरान यात्रियों को आरामदायक और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना है. इन तारीखों पर चलेंगी ट्रेनेंरेलवे के अनुसार 15, 17, 23 और 25 जुलाई को अलग-अलग रूटों पर स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी. इनमें शालीमार-पुरी-शालीमार, राउरकेला-पुरी-राउरकेला, टाटानगर-बदामपहाड़-पुरी तथा बड़बिल-पुरी-बड़बिल स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं. ये ट्रेनें यात्रियों को सीधे पुरी तक पहुंचाने में मदद करेंगी, जिससे सामान्य ट्रेनों में होने वाली भीड़ से राहत मिलेगी. सबसे बड़ी सुविधा यह ट्रेनटाटानगर और आसपास के इलाकों के यात्रियों के लिए सबसे बड़ी सुविधा टाटानगर-बदामपहाड़-पुरी स्पेशल ट्रेन होगी. यह ट्रेन टाटानगर से सुबह लगभग 10:55 बजे रवाना होगी और शाम करीब 7:35 बजे पुरी पहुंचेगी. वहीं, वापसी में यह ट्रेन पुरी से शाम 5:30 बजे खुलेगी और अगले दिन सुबह टाटानगर पहुंचेगी. इससे यात्रियों को समय के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाने में आसानी होगी. ये भी हैं ऑप्शनइसी तरह राउरकेला-पुरी स्पेशल ट्रेन शाम 7:40 बजे राउरकेला से रवाना होकर अगले दिन सुबह 9:45 बजे पुरी पहुंचेगी. वापसी में यह ट्रेन पुरी से सुबह 3 बजे खुलेगी और दोपहर बाद राउरकेला पहुंचेगी. शालीमार-पुरी स्पेशल ट्रेन भी यात्रियों के लिए एक बेहतर विकल्प होगी, जो शाम के समय रवाना होकर अगले दिन सुबह पुरी पहुंचेगी. इसके अलावा बड़बिल-पुरी-बड़बिल स्पेशल ट्रेन भी निर्धारित तिथियों पर संचालित होगी. अगर पहली बार जा रहे हैं पुरीअगर आप पहली बार पुरी जा रहे हैं, तो यह अवसर आपके लिए खास हो सकता है. रथयात्रा के दौरान पूरा पुरी शहर भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है. लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के भव्य रथों के दर्शन करने पहुंचते हैं. ऐसे में स्पेशल ट्रेनों के संचालन से यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान और सुविधाजनक हो जाएगी. समय रहते करा लें आरक्षणरेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय रहते अपना आरक्षण करा लें, क्योंकि रथयात्रा के दौरान सीटों की मांग काफी बढ़ जाती है. अगर आप भी इस वर्ष जगन्नाथ धाम के दर्शन का सपना देख रहे हैं, तो ये स्पेशल ट्रेनें आपके सफर को आरामदायक, सुरक्षित और यादगार बना सकती हैं. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

Scroll to Top