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पलामू के एक परिवार के छठे सदस्य की मौत:19 जून से शुरू...

पलामू के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार के छह सदस्यों की 19 दिनों के भीतर मौत हो गई है। यह सिलसिला 19 जून से शुरू हुआ था। मंगलवार रात रिम्स में भर्ती लाखो देवी ने भी दम तोड़ दिया, जो इस परिवार की छठी मृतक है। परिवार का सातवां सदस्य अभी भी रिम्स में इलाजरत है, जबकि कुल नौ सदस्यों में से अब केवल तीन ही बचे हैं। इधर, स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आर्गेमोन (कंटीले) मिले विषाक्त सरसों तेल के सेवन से ड्रॉप्सी बीमारी के कारण उनकी हालत बिगड़ी थी। 6 जुलाई को लाखो देवी की रिम्स में हुई मौत इस परिवार में पहली मौत 19 जून को मुखिया कुलदीप महतो की हुई थी। इसके अगले दिन 20 जून को उनकी बेटी बबिता कुमारी का निधन हो गया। 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी ने भी दम तोड़ दिया। 28 जून को कुलदीप की बहू श्वेता और बेटे नकुल मेहता की मौत हुई। नवीनतम मौत 6 जुलाई को कुलदीप की पत्नी लाखो देवी की रिम्स में हुई। स्वास्थ्य विभाग ने परिवार में हो रही लगातार मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए उनके घर के खाने-पीने के सामानों की लैब जांच कराई थी। जांच में सरसों के तेल में आर्गेमोन (कंटीले) तेल की मिलावट पाई गई। पता चला है कि इस परिवार ने लगभग डेढ़ महीने पहले अपने खेत के सरसों से तेल निकलवाया था। परिवार के नौ सदस्यों में से अब केवल तीन ही बचे हैं। कुलदीप का एक बेटा अनुज मेहता मजदूरी के सिलसिले में गांव से बाहर रहने के कारण स्वस्थ है। वहीं, कुलदीप का पोता और सुनील का पुत्र अपनी नानी के घर पर था, जिससे वह भी सुरक्षित है। घर में निकाले गए तेल के उपयोग पर रोक मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सिक्का गांव के 195 घरों के 1378 लोगों का स्वास्थ्य सर्वे किया। इसमें संदिग्ध लगने पर 59 लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया था। सभी स्वस्थ पाए गए। वहीं, विभाग ने स्थानीय प्रशासन को दूषित तेल के इस्तेमाल से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने की सलाह दी है। इसके अलावा कृषि विभाग को सरसों की फसलों में उगने वाले कटेली जैसे जहरीले खरपतवार को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने की सिफारिश की गई है। Source link

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टाटा-कांड्रा रोड पर हादसा; दो युवकों की गई जान:आक्रोशित लोगों ने किया...

सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना क्षेत्र स्थित टाटा-कांड्रा मुख्य मार्ग पर मंगलवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में दो युवकों की जान चली गई। घटना छोटा गम्हरिया के निर्मल पथ के सामने घटी। जहां एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार युवकों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। पुलिस के अनुसार ट्रक (MH12LT-8538) ने बाइक (JH05DN-3281) को इतनी जोर से टक्कर मारी कि दोनों युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में 22 वर्षीय मोहम्मद निसार की मौत हो गई। वह कपाली ओपी के अंसार नगर का रहने वाला था। दूसरे युवक ने अस्पताल में तोड़ा दम हादसे में घायल दूसरे युवक गौसनगर के 18 वर्षीय मोहम्मद रेहान को स्थानीय लोगों ने तत्काल निजी एंबुलेंस से टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) पहुंचाया। हालांकि गंभीर रूप से घायल रेहान ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि दोनों युवक फॉल्स सीलिंग का काम करते थे। देर रात काम खत्म कर अपने घर लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार हादसे के बाद काफी देर तक न तो एंबुलेंस मौके पर पहुंची और न ही पुलिस। जिससे घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल सका। इस देरी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। आक्रोशित लोगों ने किया सड़क जाम, चालक फरार घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने प्रशासन की लापरवाही का आरोप लगाते हुए टाटा-कांड्रा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सूचना मिलने पर गम्हरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक और बाइक को जब्त कर लिया है। वहीं हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। Source link

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Who is Bridge Man of india Girish Bharadwaj: 300 पुलों से लेकर...

होमताजा खबरदेश 300 पुलों से लेकर गांव में वर्कशॉप तक, कौन हैं ‘ब्रिज मैन’ गिरीश भारद्वाज? Last Updated:July 08, 2026, 12:40 IST Who is Bridge Man of india Girish Bharadwaj: ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर पद्मश्री गिरीश भारद्वाज का 76 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने अपने जीवन में 300 से अधिक कम लागत वाले सस्पेंशन ब्रिज बनाकर देश के सैकड़ों दूरदराज गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा. कर्नाटक के सुलिया से शुरू हुआ उनका सफर लाखों ग्रामीणों के लिए उम्मीद की नई राह बन गया. उनके बनाए पुलों ने बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और ग्रामीणों की आवाजाही को आसान बनाया. उनके निधन पर कर्नाटक समेत कई राज्यों में लोगों ने श्रद्धांजलि दी. जानिए कौन थे गिरीश भारद्वाज और क्यों उन्हें भारत का ‘ब्रिज मैन’ कहा जाता था. ख़बरें फटाफट पद्मश्री गिरीश भारद्वाज, जिन्हें ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता था, का निधन हो गया. (फोटो X) नई दिल्ली: किसी इंजीनियर की पहचान आमतौर पर ऊंची इमारतों, बड़े हाईवे या विशाल परियोजनाओं से होती है. लेकिन कर्नाटक के गिरीश भारद्वाज ने यह साबित किया कि असली इंजीनियरिंग वह है, जो सबसे दूर बसे उस गांव तक पहुंचे जहां विकास की सड़क आज भी नहीं पहुंची. उन्होंने करोड़ों रुपए की परियोजनाओं की जगह ऐसे छोटे-छोटे सस्पेंशन ब्रिज बनाए, जिन्होंने हजारों ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी. बच्चे स्कूल पहुंचने लगे, मरीज समय पर अस्पताल जाने लगे और गांवों का संपर्क शहरों से जुड़ गया. यही वजह है कि उन्हें देशभर में ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना गया. अब 76 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने उन हजारों गांवों को भी भावुक कर दिया है, जिनकी जिंदगी उनके बनाए पुलों की वजह से बदल गई थी. पद्मश्री सम्मान से सम्मानित गिरीश भारद्वाज का मंगलवार तड़के कर्नाटक के सुलिया स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह कुछ समय से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे. उनके निधन पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार समेत कई नेताओं और सामाजिक संगठनों ने श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि गिरीश भारद्वाज केवल इंजीनियर नहीं थे, बल्कि ऐसे तकनीकी नवोन्मेषक थे जिन्होंने दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया. उनके जाने से देश ने एक दूरदर्शी और समाजसेवी इंजीनियर खो दिया. गिरीश भारद्वाज के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. गिरीश भारद्वाज के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. इसके अलावा मैसूर विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की. उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘सेतु बंधु’ बनाने की भी घोषणा की गई थी. उनकी इंजीनियरिंग को केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना गया. आज भी उनके बनाए अधिकांश पुल हजारों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं. कई ऐसे गांव हैं जहां पहले लोग नाव या तैरकर नदी पार करते थे. अब वहीं बच्चे सुरक्षित स्कूल जाते हैं और मरीज समय पर अस्पताल पहुंचते हैं. गिरीश भारद्वाज हमेशा कहते थे कि पुल केवल दो किनारों को नहीं जोड़ता, बल्कि लोगों के जीवन में नए अवसर भी लाता है. यही सोच उन्हें बाकी इंजीनियरों से अलग बनाती थी. About the Author Sumit KumarSenior Sub Editor सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें पढ़ें- भारत के वो 5 राज्य जहां इनकम है सबसे ज्यादा, दूसरे पर कर्नाटक लेकिन पहले पर कौन? वर्ल्ड बैंक ने बताया गिरीश भारद्वाज के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. इसके अलावा मैसूर विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की. उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘सेतु बंधु’ बनाने की भी घोषणा की गई थी. उनकी इंजीनियरिंग को केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना गया. आज भी उनके बनाए अधिकांश पुल हजारों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं. कई ऐसे गांव हैं जहां पहले लोग नाव या तैरकर नदी पार करते थे. अब वहीं बच्चे सुरक्षित स्कूल जाते हैं और मरीज समय पर अस्पताल पहुंचते हैं. गिरीश भारद्वाज हमेशा कहते थे कि पुल केवल दो किनारों को नहीं जोड़ता, बल्कि लोगों के जीवन में नए अवसर भी लाता है. यही सोच उन्हें बाकी इंजीनियरों से अलग बनाती थी. गिरीश भारद्वाज को ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ क्यों कहा जाता था? उन्हें यह उपाधि इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने देश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में कम लागत वाले सस्पेंशन फुटब्रिज बनाकर हजारों गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा. उनके पुलों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया. उनके बनाए पुलों की सबसे बड़ी खासियत क्या थी? उनके पुल कम लागत में तैयार होते थे, स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन किए जाते थे और इन्हें बनाने में अपेक्षाकृत कम समय लगता था. यही कारण था कि जहां बड़े पुल बनाना संभव नहीं था, वहां भी उनका मॉडल सफल साबित हुआ. गिरीश भारद्वाज की सबसे बड़ी विरासत क्या मानी जाती है? उनकी सबसे बड़ी विरासत केवल सैकड़ों पुल नहीं, बल्कि वह सोच है जिसमें इंजीनियरिंग को समाज सेवा का माध्यम बनाया गया. उन्होंने दिखाया कि छोटी तकनीकी पहल भी लाखों लोगों का जीवन बदल सकती है और विकास को गांवों तक पहुंचा सकती है. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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आलू टिक्की नहीं, इस पापड़ी चाट के दीवाने हैं लोग, जसीडीह की...

देवघर. बाबा बैद्यनाथ धाम की नगरी देवघर सिर्फ धार्मिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लजीज व्यंजनों के लिए भी दूर-दूर तक मशहूर है. अगर आप देवघर के जसीडीह पहुंचे और यहां की मशहूर पापड़ी चाट का स्वाद नहीं चखा, तो समझिए आपकी यात्रा अभी अधूरी है. जसीडीह में वर्षों पुरानी दो ऐसी दुकानें हैं, जहां बनने वाली स्पेशल पापड़ी चाट लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. यहां आलू टिक्की से ज्यादा लोग पापड़ी चाट खाना पसंद करते हैं. यही वजह है कि रोजाना शाम होते ही दुकानों पर ग्राहकों की लंबी कतार लग जाती है. स्थानीय लोगों के अलावा दूसरे जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले लोग भी इस चाट का स्वाद लेने जरूर पहुंचते हैं. सावन में बढ़ जाती है रौनकसावन के महीने में इन दुकानों की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धालु सीधे जसीडीह की इन मशहूर दुकानों का रुख करते हैं. खासकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता और आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालु हर साल यहां पहुंचकर पापड़ी चाट का स्वाद लेना नहीं भूलते. कई श्रद्धालु तो ऐसे भी हैं, जो हर सावन में दर्शन के साथ-साथ इस चाट का स्वाद लेने की परंपरा निभाते आ रहे हैं. यही वजह है कि वर्षों से यह चाट जसीडीह की पहचान बन चुकी है. क्या कहते हैं दुकानदारलोकल 18 से बातचीत करते हुए दुकानदार प्रकाश राउत ने बताया कि उनकी दुकान पिछले 45 वर्षों से लोगों की सेवा कर रही है. 1980-81 में इस दुकान की शुरुआत उनके पिता ने की थी और अब दूसरी पीढ़ी के रूप में वह इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उस समय कीमत मात्र 5 रुपये थी. उन्होंने बताया कि समय बदल गया, लेकिन स्वाद वही पुराना रखा गया है. उनकी दुकान पर भेलपूरी, चाट और कई तरह के स्नैक्स मिलते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग हमेशा पापड़ी चाट की रहती है. सिर्फ 40 रुपये में मिलने वाली यह चाट स्वाद और क्वालिटी की वजह से लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. कई ग्राहक तो वर्षों से लगातार उनकी दुकान पर आ रहे हैं और अब अपने बच्चों को भी यही स्वाद चखाने लाते हैं. ग्राहक लौटता जरूर हैवहीं, जसीडीह के ही दूसरे पुराने दुकानदार रमेश जी ने बताया कि वह करीब 40 वर्षों से पापड़ी चाट बना रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी दुकान की पहचान ही पापड़ी चाट है. जिले के हर कोने से लोग यहां पहुंचते हैं और बाहर से आने वाले पर्यटक भी एक बार इसका स्वाद जरूर चखते हैं. उनके अनुसार, स्वाद का सबसे बड़ा राज ताजी सामग्री, संतुलित मसाले और बनाने का वर्षों पुराना अनुभव है. यही कारण है कि एक बार यहां की चाट खाने वाला ग्राहक दोबारा जरूर लौटकर आता है. क्या है मशहूर पापड़ी चाट की खास रेसिपीअगर इस मशहूर पापड़ी चाट की रेसिपी की बात करें, तो सबसे पहले उबले हुए आलू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके साथ ताजे टमाटर को बारीक काटकर नमक, भुना जीरा पाउडर, नींबू का रस, भुजिया, दो-तीन प्रकार का नमकीन मिक्सचर और अन्य खास मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद एक प्लेट में कुरकुरी पापड़ी सजाई जाती है. उस पर मीठी चटनी डाली जाती है और फिर तैयार आलू-टमाटर का मसालेदार मिश्रण फैलाया जाता है. आखिर में ऊपर से भुजिया और मसाले डालकर इसे ग्राहकों को परोसा जाता है. खट्टा, मीठा और हल्का तीखा स्वाद इस पापड़ी चाट को बाकी चाट से बिल्कुल अलग बना देता है. पापड़ी चाट सिर्फ स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि खास पहचान बन चुकी हैयही वजह है कि जसीडीह की यह पापड़ी चाट आज सिर्फ एक स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि देवघर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक खास पहचान बन चुकी है. बाबा धाम के दर्शन के बाद लोग इस स्वाद को अपनी यात्रा का अहम हिस्सा मानते हैं. स्वाद, परंपरा और वर्षों का भरोसा ही इन दुकानों को आज भी लोगों की पहली पसंद बनाए हुए है. Source link

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धनवार के होटल डिस्कवरी में देह व्यापार:गिरिडीह पुलिस ने दो महिला-दो पुरुष...

गिरिडीह जिले के धनवार नगर पंचायत स्थित होटल डिस्कवरी में कथित देह व्यापार की सूचना पर प्रशासन ने छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान होटल के एक कमरे से दो महिलाओं और दो पुरुषों को संदिग्ध अवस्था में हिरासत में लिया गया। कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। प्रशासन को पहले से ही इस होटल में अवैध गतिविधियों के संचालन की गुप्त सूचना मिल रही थी। इसी आधार पर योजनाबद्ध तरीके से टीम गठित कर होटल में दबिश दी गई। हिरासत में लिए गए सभी लोगों से पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए धनवार थाना लाया गया। कार्रवाई से जुड़ी तस्वीरें देखें… चला सर्च अभियान, कई बिंदुओं पर जांच छापेमारी अभियान का नेतृत्व खोरीमहुआ एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार, धनवार बीडीओ देवेंद्र कुमार दास और थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। पुलिस टीम ने होटल के विभिन्न कमरों की बारीकी से तलाशी ली। संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए होटल को तत्काल सील कर दिया। सीआई सह दंडाधिकारी अभिषेक कुमार को मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया, जिनकी मौजूदगी में मंगलवार रात करीब आठ बजे होटल डिस्कवरी को विधिवत सील कर दिया गया। जांच के दौरान पुलिस होटल के रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित अवैध गतिविधियां कब से संचालित हो रही थीं। मैनेजर से पूछताछ, संचालक फरार पुलिस ने होटल के मैनेजर प्रदीप साहू को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। होटल संचालक मौके से फरार बताया जा रहा है। जिसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार, होटल डिस्कवरी के खिलाफ पूर्व में भी दो बार इसी तरह की शिकायतों पर छापेमारी की जा चुकी थी। तब संचालक को कई बार चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद अवैध गतिविधियों की शिकायतें लगातार मिलती रहीं। इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए होटल को सील कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। Source link

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कोडरमा PHC में मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव की तैयारी:बारिश की वजह...

कोडरमा में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। सदर प्रखंड के पथरडीह पंचायत स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती का प्रसव मोमबत्ती की रोशनी में कराने की तैयारी की जा रही थी। गरईंडीह गांव निवासी नीलम कुमारी प्रसव पीड़ा होने पर पीएचसी पहुंची थी। जहां बिजली आपूर्ति ठप थी। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद एएनएम जनता देवी ने अंधेरे के बीच मोमबत्ती जलाकर प्रसव कराने की तैयारी शुरू कर दी। यह नजारा देख महिला के परिजन स्तब्ध रह गए। उन्होंने तत्काल इसका विरोध जताया। परिजनों ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की घोर लापरवाही बताते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधि को सूचना दी। मुखिया प्रतिनिधि पहुंचे, पीएचसी में जड़ा ताला सूचना मिलते ही मुखिया प्रतिनिधि सदानंद यादव मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि वास्तव में बिना बिजली के प्रसव कराने की तैयारी की जा रही थी। इसके बाद उन्होंने तुरंत पहल करते हुए प्रसूता को गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में भर्ती करवाया। वहां सुरक्षित तरीके से महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। फिलहाल मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। घटना से नाराज मुखिया प्रतिनिधि ने पीएचसी में ताला जड़ दिया और चेतावनी दी कि जब तक दोषी कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक केंद्र बंद रहेगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर आंदोलन की भी बात कही। कटी हुई थी बिजली, इनवर्टर रूम का चाबी नहीं था मामले में एएनएम जनता देवी ने सफाई देते हुए बताया कि सूचना मिलने पर वह तत्काल केंद्र पहुंचीं, लेकिन वहां बिजली नहीं थी। पूछताछ करने पर बताया गया कि बारिश के कारण करंट का खतरा होने से मेन कनेक्शन काट दिया गया है। वहीं इनवर्टर रूम की चाबी दूसरी कर्मी मंजू देवी के पास थी। वह बिहार के नवादा में एक कार्यक्रम में गई हुई थीं। इस पर मुखिया प्रतिनिधि ने सवाल उठाते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े स्थान पर आवश्यक संसाधनों की चाबी साथ ले जाना गंभीर लापरवाही है। इधर, सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। Source link

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Baruipur Encounter | Baruipur Rape Murder Case | आधी रात को बरुईपुर...

Baruipur Encounter: पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही अपराधियों से निपटने का तरीका भी बदल गया. बंगाल के बरुईपुर रेप-मर्डर कांड का हिसाब हो गया. बरुईपुर में बच्ची से रेप के बाद हत्या करने वाले आरोपी को पुलिस ने ठोक दिया है. जी हां, पश्चिम बंगाल पुलिस ने 12 साल की बच्ची से रेप और मर्डर केस के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को मंगलवार की आधीर रात को एनकाउंटर में मार गिराया. पुलिस उसे क्राइम सीन पर घटना को फिर से समझने यानी री-कंस्ट्रक्शन के लिए ले जा रही थी. तभी आरोपी ने चालाकी दिखाई और अपनी मौत को दावत दे दी. अब सवाल है कि आखिर आधी रात को ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को उसका एनकाउंटर ही करना पड़ गया? दरअसल, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर में पिछले हफ्ते एक नाबालिग बच्ची का शव मिला था. जांच में पता चला कि बच्ची का पहले रेप हुआ था. उसके बाद उसे मारकर तालाब में फेंक दिया गया था. बरुईपुर रेप-मर्डर कांड से बंगाल उबल उठा था. इसे लेकर सियासत भी होने लगी थी. मगर पुलिस ने अब उसके आरोपी को मौत के घाट उतार दिया है. बंगाल के बरुईपुर रेप कांड में तीन आरोपी अब तक अरेस्ट हुए हैं. गिरफ्तार तीन आरोपियों में से एक मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल को मंगलवार की रात को करीब 12 बजे के बाद एनकाउंटर में मार गिराया गया. कैसे हुआ दरिंदे का एनकाउंटर पुलिस के मुताबिक, यह एनकाउंटर तब हुआ, जब आरोपी प्रभाष मंडल पुलिस की सर्विस राइफल छीनकर भागने की कोशिश कर रहा था. घटना को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए उसे मंगलवार रात अपराध वाली जगह पर ले जाया गया था. वहां, उसने कथित तौर पर उसे ले जा रहे पुलिसकर्मियों में से एक की सर्विस राइफल छीन ली और भागने की कोशिश की. पुलिस ने बताई एनकाउंटर की पूरी कहानी पुलिस ने कहा, ‘7 जुलाई की रात करीब 12:45 बजे बरुईपुर पुलिस स्टेशन के केस नंबर 1350/26 के जांच अधिकारी अपनी टीम और आरोपी प्रभाष मंडल के साथ बरुईपुर पुलिस स्टेशन से निकले. वे बरुईपुर पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले सूर्यपुर में घटना वाली जगह पर क्राइम सीन का रिकंस्ट्रक्शन करने जा रहे थे. सूर्यपुर में घटना वाली जगह पर क्राइम सीन का रिकंस्ट्रक्शन शुरू करने से ठीक पहले आरोपी प्रभाष मंडल ने एक पुलिसकर्मी से हथियार छीन लिया. इसके बाद हमारी टीम पर एक राउंड गोली चलाई और मौके से भागने की कोशिश की. पुलिस की जवाबी फायरिंग में आरोपी प्रभाष मंडल घायल हो गया और उसे तुरंत बारुईपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया. ’ रविवार को मिला था बच्ची का शव गौरतलब है कि रविवार सुबह बरुईपुर के सूर्यपुर इलाके में एक तालाब से 12 साल की नाबालिग लड़की का शव मिला था. आरोप है कि उसके साथ रेप और हत्या की गई थी. लड़की का शव मिलने के बाद इलाके में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए और तनाव फैल गया. स्थानीय लोगों ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की. मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई और उसी शाम प्रवास को सबसे पहले गिरफ्तार किया गया. कैसे पकड़े गए आरोपी इसके बाद उससे पूछताछ के आधार पर मामले के अन्य दो आरोपियों  दिवाकर सरकार और आनंद सरदार – को गिरफ्तार किया गया. आनंद सरदार ही इस मामले का मुख्य आरोपी और नाबालिग लड़की के खिलाफ हुए अपराध का मास्टरमाइंड था. पुलिस को स्थानीय लोगों ने बताया कि शनिवार दोपहर लापता होने से पहले मृतका को आरोपियों के साथ देखा गया था. जांच के दौरान अधिकारियों को इलाके से सीसीटीवी फुटेज मिला, जिसमें आरोपी प्रभाष को नाबालिग के साथ देखा गया था. प्रभाष को एनकाउंटर वाली जगह क्यों ले गई पुलिस उसी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी प्रभाष को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का दावा था कि प्रभाष जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और विरोधाभासी जवाब दे रहा था. पुलिस घटना को फिर से समझना चाहती थी और घटनाओं के क्रम में प्रवास की भूमिका की भी जांच करना चाहती थी. इसी मकसद से जांच अधिकारी उसे मंगलवार की देर रात घटना वाली जगह पर ले गए. घटना को दोबारा दोहराने की इस प्रक्रिया के दौरान आरोपी ने साथ आए एक पुलिसकर्मी की सर्विस राइफल छीनकर भागने की कोशिश की. जब उसने उस सर्विस राइफल से पीछा कर रहे पुलिसकर्मियों पर गोली चलाई, तो पुलिसकर्मियों ने भी जवाबी फायरिंग की. Source link

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बाजार से महंगे बाम, स्प्रे क्यों खरीदना, घर पर बनाएं पेन किलर...

Last Updated:July 08, 2026, 08:56 IST Homemade Pain Killer For Knee Pain: घुटनों के दर्द के लिए आए दिन बाजार से महंगे बाम और स्प्रे खरीदते हैं तो एक बार घर पर बनाया हुआ यह खास तेल भी ट्राई करें. इसे कुछ खास मसालों के साथ बनाया जाता है. अगर गंभीर परेशानी नहीं है तो इस तेल की मालिश से दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है. ख़बरें फटाफट रांची. घुटनों में दर्द होने पर अक्सर घरों में एक तेल बनाया जाता है, जो एकदम पेन किलर का काम करता है. इसमें सरसों का तेल, अजवाइन, लौंग, लहसुन और मेथी, इन 5 चीजों को मिलाकर अच्छे से गैस पर पकाया जाता है और फिर इसका तेल तैयार किया जाता है. इस तेल से घुटने की मालिश करने पर घुटने के दर्द में काफी राहत मिलती है. हालांकि राहत इस बात पर भी निर्भर करती है कि दर्द किस वजह से है. अगर कोई गंभीर समस्या नहीं है तो इस तेल की हल्की मालिश से दर्द से निजात मिलती है. घरों में अक्सर महिलाएं इसी तरह का पेन किलर तेल बनाती हैं. रांची के आयुर्वेदिक डॉक्टर वीके पांडे बताते हैं कि यह तेल आप आसानी से घर पर बना सकते हैं. दरअसल, लहसुन, अजवाइन और मेथी की तासीर काफी गर्म होती है और इनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. जो खासतौर पर घुटने की सूजन और दर्द में काफी राहत दिलाते हैं. ऐसे घर पर तैयार करें पेन किलर तेलरांची की गृहिणी उषा बताती हैं, मेरे घुटने में काफी दर्द होता है और कट-कट की आवाज आती है. ऐसे में यही तेल लगाकर काफी आराम मिलता है. दिन में केवल दो बार, पांच-पांच मिनट के लिए ही लगाती हूं और दिनभर राहत रहती है. महंगे से महंगे बाहर के पेन किलर तेल इसके सामने फेल हैं. इसके लिए सबसे पहले आपको सरसों का तेल लेना होगा. जितना आप तेल बनाना चाहते हैं, उसके मुताबिक ले सकते हैं. इसके बाद इस तेल को गैस पर चढ़ा लें या फिर इंडक्शन पर चढ़ा लें और इसे गर्म होने दें. अब इसमें पिसा हुआ लहसुन डालें. लहसुन की 10-12 बड़ी कलियां होनी चाहिए. इसके बाद इसमें एक चम्मच मेथी डालनी है, एक चम्मच अजवाइन डालनी है. उसके बाद इसमें थोड़ी सी लौंग डालनी है. 4-5 तेज पत्ता ले लीजिए और इन सभी को डालकर तेल को अच्छे से पकाएं, जब तक तेल आधा न हो जाए. स्टोर करके रख लेंआप इसे स्टोर करके रख लीजिए. स्टोर करते समय इसमें जितनी भी चीजें आपने डाली हैं, उन्हें बाहर नहीं फेंकना है या फिर छानना नहीं है. बल्कि, जिस डिब्बे में आप इसे रखेंगे, उसमें यह सारी चीजें भी साथ में डाल दीजिए. ताकि समय के साथ इनका अर्क तेल में घुलते रहें. इससे आप शरीर में कहीं भी दर्द हो, सिर्फ घुटने ही नहीं, वहां थोड़ा सा तेल लगाकर 5 मिनट मालिश कर लीजिए और फिर देखिए आपका दर्द छूमंतर होता है कि नहीं. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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कोडरमा के गांधी चौक पर सुबह-सुबह हादसा:बेकाबू कार ने मारी टक्कर, नाश्ते...

कोडरमा के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत गांधी चौक के पास बुधवार सुबह एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित कार ने सड़क किनारे बैठे लोगों को टक्कर मार दी। इस हादसे में तीन लोग घायल हो गए, जबकि एक नाश्ते का ठेला भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की रफ्तार काफी तेज थी। चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को संभालने में जुट गए। शादी समारोह में आया था युवक जानकारी के अनुसार, रितेश कुमार नामक युवक कोडरमा में एक धर्मशाला में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने आया था। बुधवार सुबह वह अपने एक रिश्तेदार की कार की चाबी लेकर उसमें बैठ गया और बिना किसी सूचना के बाजार की ओर निकल पड़ा। गांधी चौक पहुंचते ही उसका कार से नियंत्रण हट गया और सड़क किनारे बैठे तीन लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दीपक कुमार राम, शिवा सिंह और उमेश कुमार घायल हो गए, जिन्हें मामूली चोटें आई हैं। टक्कर इतनी तेज थी कि कार आगे बढ़ते हुए सड़क किनारे लगे नाश्ते के ठेले से जा टकराई। जिससे ठेला पलट गया। कार पास की दीवार से टकराकर रुक गई। हिरासत में लिया गया चालक घटना के दौरान ही मौके से गुजर रही कोडरमा थाना की पेट्रोलिंग टीम ने भीड़ देख तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने घायलों को तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा, जहां उनका उपचार जारी है। वहीं कार चालक रितेश कुमार को हिरासत में लेकर थाने लाया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि चालक नशे में था, जिसके कारण उसने वाहन पर नियंत्रण खो दिया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को कब्जे में लेकर थाने भिजवा दिया है। Source link

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जमीन को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प:चतरा में जम कर हुई...

चतरा के प्रतापपुर बाजार में मंगलवार की रात जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच अचानक हिंसक झड़प हो गई। शुरुआत में मामूली कहासुनी से हुई। विवाद देखते ही देखते उग्र हो गया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते सड़क पर ईंट-पत्थर चलने लगे। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने जान बचाने के लिए इधर-उधर भागकर शरण ली। स्थानीय लोगों के अनुसार, झड़प इतनी तेजी से हुआ कि कुछ देर के लिए पूरा बाजार क्षेत्र रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। इस दौरान कई दुकानों के शटर गिरा दिए गए। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखें… महिलाएं सहित आधा दर्जन घायल इस हिंसक झड़प और पत्थरबाजी में महिलाओं सहित करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को स्थानीय स्तर पर उपचार के लिए ले जाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उपद्रव के दौरान बाजार की कुछ दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है। सैलून का शीशा पूरी तरह टूटकर चकनाचूर हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल हो गया। लोग देर रात तक घरों में दुबके रहे। स्थानीय युवक ऋषि कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पुराना जमीन विवाद चल रहा था, जो मंगलवार की शाम अचानक भड़क उठा। पुलिस ने संभाला मोर्चा, निषेधाज्ञा लागू घटना की सूचना मिलते ही प्रतापपुर थाना पुलिस अलर्ट मोड में आ गई। तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। थाना प्रभारी आलोक रंजन चौधरी भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और उपद्रवियों को खदेड़ते हुए हालात पर काबू पाया। फिलहाल पुलिस द्वारा पूरे बाजार और आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्ती की जा रही है। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विवादित जमीन को सील कर दिया है। अनुमंडल दंडाधिकारी के निर्देश पर इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से आवेदन प्राप्त हुए हैं। उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। Source link

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