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लोहागढ़ किला: केतन ही नहीं कई मौतों का यहां छिपा है राज,...

होमफोटोदेश केतन ही नहीं कई मौतों का छिपा है राज, जानें 900 साल पुराने इस किले का इतिहास Last Updated:June 25, 2026, 19:47 IST महाराष्ट्र के लोनावला के पास स्थित लोहागढ़ किला फिलहाल भले ही पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्‍या को लेकर चर्चा में है. लेकिन 900 साल पुराना इस किले का अपना गौरवशाली इतिहास है. यह किला शिवाजी महाराज, मराठा-मुगल संघर्षों और शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है. विंचू काटा, चार ऐतिहासिक दरवाजे, विसापुर किले से जुड़ाव और मानसून ट्रेक इसे पर्यटकों की पहली पसंद बनाते हैं. वहीं, पिछले कुछ वर्षों में यहां सामने आए कुछ संदिग्ध मौतों के मामलों ने भी इस ऐतिहासिक किले को सुर्खियों में ला दिया था. जानिए लोहागढ़ किले से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें. महाराष्ट्र के लोनावला के पास मौजूद लोहागढ़ किला करीब 900 साल पुराने इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है. यह किला सिर्फ अपनी मजबूत बनावट के लिए ही नहीं, बल्कि वीरता, युद्ध, राजाओं के शासन, शानदार वास्तुकला और कई अनसुलझे रहस्यों के कारण भी मशहूर है. आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक किले से जुड़ी 13 बेहद दिलचस्प बातें. लोहागढ़ किला महाराष्ट्र के लोनावला के पास समुद्र तल से लगभग 1,033 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. चारों तरफ फैली पहाड़ियां, हरियाली और बादलों से घिरा यह किला पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है. इसकी मजबूत दीवारें और खूबसूरत प्राकृतिक नजारे इसे इतिहास और प्रकृति का शानदार संगम बनाते हैं. माना जाता है कि लोहागढ़ किले का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था. इसके बाद इस पर यादव वंश, बहमनी सल्तनत, निजामशाही, मराठा साम्राज्य और आखिर में अंग्रेजों का शासन रहा. कई राजाओं और साम्राज्यों का उतार-चढ़ाव देखने वाला यह किला आज भी अपने लंबे और गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है. Add News18 as Preferred Source on Google छत्रपति शिवाजी महाराज ने लोहागढ़ किले को अपनी महत्वपूर्ण सैन्य चौकियों में शामिल किया था. उन्होंने इसकी सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए नए दरवाजे, बुर्ज और दीवारें बनवाईं. इतना ही नहीं, मराठा साम्राज्य के महत्वपूर्ण खजाने और युद्ध सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए भी इसी किले का इस्तेमाल किया जाता था. लोहागढ़ किला मराठों और मुगलों के बीच हुए कई बड़े संघर्षों का गवाह रहा है. इसकी मजबूत स्थिति और ऊंची पहाड़ी पर बने होने के कारण दुश्मनों के लिए इस पर कब्जा करना आसान नहीं था. यही वजह थी कि यह पश्चिमी भारत के सबसे सुरक्षिति किलों में गिना जाता था. पेशवा शासन के दौरान नाना फडणवीस ने लोहागढ़ किले का काफी विकास कराया. उन्होंने यहां महल, मंदिर, दरबार और पानी जमा करने के लिए कई जल संरचनाएं बनवाईं थीं. उस समय यह किला सिर्फ सुरक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि प्रशासन चलाने और अहम फैसले लेने का भी प्रमुख स्थान बन गया था. साल 1818 में अंग्रेजों ने लोहागढ़ किले पर कब्जा कर लिया. इसके बाद इस किले का इस्तेमाल कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद करके रखने के लिए किया गया. अलग-अलग ऐतिहासिक विवरणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि यहां कई बंदियों को कठोर यातनाएं दी गईं और कुछ स्वतंत्रता सेनानियों की मौत भी इसी किले में हुई. लोहागढ़ किले तक पहुंचने के लिए गणेश द्वार, नारायण द्वार, हनुमान द्वार और महा द्वार से होकर गुजरना पड़ता है. ये चारों दरवाजे मजबूत पत्थरों से बनाए गए हैं और इन पर की गई नक्काशी उस समय की बेहतरीन स्थापत्य कला की झलक दिखाती है. हर दरवाजा किले की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा था. लोहागढ़ किले का सबसे खास हिस्सा ‘विंचू काटा’ है. इसकी आकृति बिच्छू की पूंछ जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया. यहां से आसपास की घाटियां, ऊंचे पहाड़, हरियाली और दूर-दूर तक फैला खूबसूरत नजारा साफ दिखाई देता है. यही वजह है कि यहां सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं. लोहागढ़ किले के अंदर लक्ष्मी कोठी, गणेश दरवाजा, नाना फड़नवीस से जुड़ी ऐतिहासिक संरचनाएं और कई पुराने अवशेष आज भी मौजूद हैं. ये इमारतें उस दौर की कला, स्थापत्य और प्रशासनिक व्यवस्था की झलक दिखाती हैं. इन्हें देखकर किले के गौरवशाली इतिहास का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है. लोहागढ़ किला एक संकरी पहाड़ी रिज के जरिए पास स्थित विसापुर किले से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि पुराने समय में दोनों किले मिलकर पूरे इलाके की सुरक्षा करते थे. अगर किसी एक किले पर हमला होता था, तो दूसरे किले से तुरंत मदद पहुंचाई जा सकती थी. लोहागढ़ किला महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय ट्रेकिंग डेस्टिनेशन में शामिल है. मालवली और भाजे गांव से शुरू होने वाला ट्रेक आसान होने के कारण नए ट्रेकर्स भी यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. खासकर मानसून में हरियाली, झरने, बादल और ठंडी हवा इस जगह की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं. अगर आप लोहागढ़ घूमने जाते हैं, तो उसके आसपास मौजूद विसापुर किला, भाजा गुफाएं, कार्ला गुफाएं, पावना झील और राजमाची प्वाइंट जैसी जगहों का भी आनंद ले सकते हैं. यही वजह है कि यह इलाका इतिहास, प्राकृतिक सुंदरता और एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों के लिए एक बेहतरीन पर्यटन स्थल माना जाता है. लोहागढ़ किला सिर्फ अपने इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ चर्चित संदिग्ध मौतों की घटनाओं के कारण भी सुर्खियों में रहा है. दिसंबर 2016 में 21 वर्षीय राहुल नराले का शव किले के पास झाड़ियों में मिला था. वहीं मार्च 2025 में 21 वर्षीय मानसी गोविंदपुरकर का शव भी इसी इलाके में मिला, जिसकी हत्या के मामले में उसके तीन परिचितों पर संदेह जताया गया था. करीब 900 साल से महाराष्ट्र की पहाड़ियों पर खड़ा लोहागढ़ किला इतिहास, वीरता और शानदार वास्तुकला की अनमोल पहचान है. शिवाजी महाराज से लेकर अंग्रेजों तक कई शासकों ने इसका इस्तेमाल किया. विंचू काटा, चार विशाल दरवाजे, विसापुर किले से जुड़ाव और खूबसूरत ट्रेक इसे खास बनाते हैं. वहीं कुछ चर्चित संदिग्ध मौतों ने भी इस किले को समय-समय पर सुर्खियों में रखा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

झारखंड

जामताड़ा में नगर पंचायत की बड़ी पहल, शुरू हुई 24 घंटे फ्री...

Last Updated:June 25, 2026, 12:47 IST वार्ड पार्षदों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में इस सेवा का शुभारंभ किया गया. इस पहल के तहत दो एंबुलेंस नगर क्षेत्र की जनता को समर्पित की गई हैं. ये एंबुलेंस 30 किलोमीटर के दायरे में दिन-रात निशुल्क सेवा देंगी. एक कॉल पर पहुंचेगी एंबुलेंस जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा नगर क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अब किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नगर पंचायत अध्यक्ष आशा गुप्ता और समाजसेवी तरुण कुमार गुप्ता की पहल पर शहर में 24 घंटे निशुल्क एंबुलेंस सेवा की शुरुआत कर दी गई है. दुमका रोड स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सभी वार्ड पार्षदों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में इस सेवा का शुभारंभ किया गया. इस पहल के तहत दो एंबुलेंस नगर क्षेत्र की जनता को समर्पित की गई हैं. ये एंबुलेंस 30 किलोमीटर के दायरे में दिन-रात निशुल्क सेवा देंगी. दरअसल, जामताड़ा में पिछले कुछ समय से एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. कई मामलों में लोगों को मरीजों को खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा, जबकि कुछ लोगों ने ट्रैक्टर के सहारे अस्पताल पहुंचने की कोशिश की. ऐसी घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे और आम लोगों की परेशानी को सामने लाया था. नगर पंचायत अध्यक्ष आशा गुप्ता ने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने नगरवासियों से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का वादा किया था. उसी वादे को पूरा करते हुए यह निशुल्क एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है. उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी, वाहन की कमी या सरकारी एंबुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने के कारण किसी भी मरीज की जान जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए. यही सोचकर इस सेवा की शुरुआत की गई है. उन्होंने बताया कि नगर क्षेत्र के भीतर 30 किलोमीटर तक किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को दिन या रात किसी भी समय एंबुलेंस की आवश्यकता होने पर यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क मिलेगी. इससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, गंभीर मरीजों और गरीब परिवारों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा. वहीं समाजसेवी तरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि हाल के दिनों में मरीजों को खटिया और ट्रैक्टर के सहारे अस्पताल ले जाने की घटनाएं बेहद दुखद थीं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का अधिकार है और समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है. इसी उद्देश्य से शहर में दो निशुल्क एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं. इस नई व्यवस्था के तहत नगर क्षेत्र का कोई भी नागरिक आपातकालीन स्थिति में 7765950812 और 9939595909 नंबर पर 24 घंटे संपर्क कर निशुल्क एंबुलेंस सेवा का लाभ उठा सकता है. शहरवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे जनहित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है. लोगों का कहना है कि समय पर एंबुलेंस मिलना कई बार किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में जामताड़ा में शुरू हुई यह निशुल्क एंबुलेंस सेवा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamtara,Jharkhand Source link

झारखंड

पश्चिमी सिंहभूम में स्कूटी की टक्कर से महिला की मौत:कुला चौक पर...

पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा थाना क्षेत्र के कुला गांव में एक सड़क दुर्घटना में 36 वर्षीय गुरुवारी बोईपाई की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह अपने पीछे छह बच्चों को छोड़ गई हैं। गुरुवार को गुरुवारी बोईपाई कुला चौक के पास सड़क किनारे लगे हैंडपंप से पानी भर रही थीं। इसी दौरान एक स्कूटी ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गईं। हादसे में उनके सिर और पैरों में गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने गुरुवारी बोईपाई को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गोइलकेरा पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, चाईबासा रेफर कर दिया। सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्कूटी चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दुर्घटना में स्कूटी चालक भी गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसका इलाज जारी है। मृतका के पति सुरेश बोईपाई दूसरे राज्य में मजदूरी करते हैं। गुरुवारी बोईपाई परिवार की मुख्य जिम्मेदारियां संभालती थीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता प्रदान करने की मांग की है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। Source link

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पलामू में प्रज्ञा केंद्र से एक लाख रुपए की लूट:दो लुटेरे सीसीटीवी...

पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र के तेतराई में गुरुवार को पंजाब नेशनल बैंक के एक प्रज्ञा केंद्र में लूटपाट की घटना हुई। बंदूक की नोक पर अपराधियों ने केंद्र से करीब एक लाख रुपये नकद लूट लिए और मौके से फरार हो गए। जानकारी के अनुसार, मेदिनीनगर-पांकी मुख्य मार्ग पर स्थित तेतराई के प्रज्ञा केंद्र में पहले एक युवक पहुंचा और खाता खोलने की जानकारी ली। इसी दौरान अचानक दूसरा युवक आया और प्रज्ञा केंद्र संचालक रविंद्र कुमार पर पिस्तौल तान दी। उसने पहले से मौजूद युवक को नकद राशि लूटने का निर्देश दिया। युवक केंद्र के अंदर घुसा और लगभग एक लाख रुपये लेकर भाग निकला। लुटेरों की संख्या दो थी। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों अपराधी मेदिनीनगर की ओर फरार हो गए। उन्होंने अपने चेहरे को गमछे से ढक रखा था। यह पूरी घटना प्रज्ञा केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। संचालक रविंद्र कुमार ने तत्काल 112 डायल कर पुलिस को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर छानबीन शुरू कर दी। इस संबंध में सीएसपी संचालक रविंद्र कुमार ने मामला दर्ज कराया है। रविंद्र कुमार ने बताया कि वह पिछले चार साल से अपने घर में ही प्रज्ञा केंद्र चला रहे हैं। आमतौर पर ग्राहकों की भीड़ रहती थी, लेकिन घटना से ठीक पहले ग्राहकों की संख्या कम हो गई थी। उन्होंने ऐसी घटना की उम्मीद नहीं की थी। अपराधियों ने मात्र दो मिनट के भीतर इस वारदात को अंजाम दिया। Source link

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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर टला बड़ा हादसा, आमने-सामने आ गए एयर इंडिया और...

Last Updated:June 25, 2026, 19:08 IST अहमदाबाद एयरपोर्ट पर एक बार फिर बड़ा हादसा टल गया. इस बार एयर इंडिया और इंडिगो के दो ए320 प्‍लेन आमने सामने थे. गमीमत रही कि समय रहते दोनों प्‍लेन्‍स को रोक लिया गया. क्‍या है पूरा मामला, जानने के लिए पढ़ें आगे…  अहमदाबाद एयरपोर्ट पर आज एक बड़ा हादसा टल गया है. Ahmedabad Airport: अहमदाबाद एयरपोर्ट पर 24 जून को एक बड़ा विमान हादसा होते-होते टल गया. एयर इंडिया और इंडिगो के दो ए320 विमान एक ही टैक्सीवे पर आमने-सामने आ गए. राहत की बात यह रही कि दोनों प्लेन समय रहते रोक दिए गए और एक बड़ा हादसा टल गया. इस मामले की जांच डीजीसीए ने शुरू कर दी है. डीजीसीए के मुताबिक, एयर इंडिया की फ्लाइट AI2493 मुंबई से अहमदाबाद पहुंची थी. प्लेन ने रनवे 23 पर सुरक्षित लैंडिंग की. इसके बाद उसे टैक्सीवे C से निकलकर टैक्सीवे P और फिर टैक्सीवे G के रास्ते इंटरनेशनल एप्रन तक जाने की इजाजत दी गई थी. जांच में सामने आया कि एयर इंडिया के क्रू ने टैक्सीवे G पर दाईं ओर मुड़ने के बजाय गलती से टैक्सीवे P पर आगे बढ़ना जारी रखा. जैसे ही क्रू को अपनी गलती का एहसास हुआ, प्लेन को तुरंत रोक दिया गया. उसी समय इंडिगो की फ्लाइट 6E-5160 अहमदाबाद से मुंबई के लिए उड़ान भरने की तैयारी में थी. यह प्‍लेन भी उसी टैक्सीवे P पर आगे बढ़ रहा था. स्थिति को देखते हुए इंडिगो के पायलट ने भी तुरंत प्‍लेन रोक दिया. दोनों विमानों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रही, इसलिए किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ. घटना के बाद एयर इंडिया के विमान को टो करके पार्किंग स्टैंड तक ले जाया गया. एयर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि टैक्सींग के दौरान विमान से अनजाने में गलत मोड़ हो गया था. हालांकि इस घटना में यात्रियों और क्रू की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा. एयरलाइन ने बताया कि मामले की जानकारी तुरंत डीजीसीए को दे दी गई थी. अब डीजीसीए पूरे मामले की जांच कर रहा है. जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आखिर यह गलती कैसे हुई. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ahmadabad,Ahmadabad,Gujarat Source link

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मुर्गी मछली से लेकर टमाटर आलू और मशरूम तक, एक एकड़ में...

होमफोटोकृषि मुर्गी मछली से लेकर टमाटर आलू और मशरूम तक, एक एकड़ में 8 प्रकार की खेती Last Updated:June 25, 2026, 17:21 IST Integrated Farming Model: झारखंड पशुपालन विभाग की तरफ से एक मॉडल तैयार किया गया है. इस मॉडल के तहत जिनके पास कम से कम एक एकड़ जमीन है, वे इस मॉडल को अपना सकते हैं. इसमें बकरी, मुर्गी, बत्तख, मछली पालन, साथ में बैंगन, टमाटर, आलू, मशरूम, अमरूद जैसी चीजों की खेती कर सकते हैं. इसके लिए अलग-अलग ब्लॉक बनेंगे और खास बात यह है कि खेत में सोलर पंप भी लगेगा. इसके लिए इच्छुक किसान ट्रेनिंग भी ले सकते हैं, जो बिल्कुल निशुल्क होती है. यह चार दिनों की ट्रेनिंग है, जो आप अपने नजदीकी कृषि विभाग में जाकर कर सकते हैं. यहां पर आपको इंटीग्रेटेड फार्मिंग की एबीसीडी बतायी जाएगी. इतना ही नहीं, वहीं से आपको सोलर पैनल, ड्रिप इरिगेशन व बीज जैसी चीजों पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी भी मिलेगी. इससे किसानों को बिजली बिल भी नहीं भरना पड़ेगा और इसी से वे सिंचाई भी कर लेंगे. ड्रिप इरिगेशन के जरिए पानी की खपत कम होगी और पशुओं का जितना भी वेस्ट होगा, वह सब खेत में खाद का काम करेगा. कृषि पदाधिकारी ओपी गुप्ता बताते हैं कि इसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग भी कहते हैं और इसमें किसानों को कभी भी एक चीज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. उनके पास विकल्पों की कमी नहीं रहेगी. इसमें किसानों को आम से लेकर अमरूद तक के पेड़ देखने को मिलेंगे. खेत के किनारे-किनारे इस तरह के फलदार पेड़ लगाए जा सकते हैं. कटहल का पेड़, पपीता, इन सारी चीजों की बाजार में काफी अच्छी डिमांड होती है. इसके अलावा ड्रिप इरिगेशन की मशीन उनके खेत में लगा दी जाएगी और इन सब पर उनको सब्सिडी भी मिलेगी. Add News18 as Preferred Source on Google 90 प्रतिशत तक सब्सिडी के बाद यह मात्र 6,000 रुपये में मिल जाएगा. इसके साथ ही मोटर भी चलाएंगे पानी पटाने के लिए. इसमें भी सोलर पैनल के जरिए बिजली की खपत होगी. ऐसे में सिंचाई को लेकर उनकी जो बहुत बड़ी टेंशन होती है, वह भी खत्म होगा. इस मॉडल में खेत में अलग-अलग क्यारियां होती हैं. एक क्यारी में टमाटर लगेगा, तो एक में बैंगन, एक में भिंडी, तो एक में आलू. इस तरीके से अलग-अलग चीजें एक ही जगह करने से उनके पास वैरायटी की कमी नहीं रहेगी और बाजार में जिस तरह की भी डिमांड होगी, उसकी पूर्ति वे कर पाएंगे. Source link

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धनबाद- 10 लाख की सुपारी देकर पिता की करवाई हत्या:BCCL में अनुकंपा...

धनबाद के बरोरा थाना क्षेत्र में हुए तुलेश्वर नोनियां हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि मृतक के मंझले बेटे विजय नोनियां ने ही भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में पिता की नौकरी पाने के लिए हत्या की साजिश रची थी। आरोप है कि विजय ने अखिलेश मल्लाह और अमित कुमार सिंह को 10 लाख रुपए की सुपारी दी थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ड्यूटी से लौटते वक्त तुलेश्वर नोनियां की हत्या की गई ताकि अनुकंपा पर बेटे को बीसीसीएल में जॉब मिल जाए। झाड़ी के पास मिला था शव ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने बताया कि पुलिस को 20 जून की सुबह लगभग 4:45 बजे चौकीदार के जरिए सूचना मिली थी कि चिटाही से बरोरा जाने वाली पीसीसी सड़क के किनारे झाड़ी के पास एक व्यक्ति का शव पड़ा है। बरोरा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू की। मृतक की पहचान तुलेश्वर नोनियां के रूप में हुई थी। पत्थर से कुचलकर हत्या की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। आरोपियों की निशानदेही पर खून लगा पत्थर भी बरामद टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस हत्याकांड में शामिल तीनों आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया खून लगा पत्थर, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, खून लगे कपड़े, गमछा और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। Source link

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प्रिंस खान गिरोह का सदस्य गिरफ्तार:चिरकुंडा में अवैध हथियार-कारतूस बरामद, रंगदारी लेने...

धनबाद पुलिस ने प्रिंस खान गिरोह से जुड़े एक सदस्य को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मो. रिजवान सिद्दिकी (पिता मो. वजीर सिद्दिकी, निवासी वृंदावनपुर, मुगमा, निरसा, धनबाद) के रूप में हुई है। पुलिस को सूचना मिली थी कि रिजवान किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की तैयारी में अपने परिचित के घर में अवैध हथियार और कारतूस जमा कर रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने संबंधित स्थान पर छापेमारी कर रिजवान को गिरफ्तार कर लिया। मौके से दो अवैध पिस्टल (एक 9 एमएम बोर मैगजीन सहित, एक 7.65 एमएम बोर मैगजीन सहित), एक देशी पिस्टल, 33 जिंदा कारतूस और एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किया गया। पुलिस पूछताछ में रिजवान ने प्रिंस खान के संगठित आपराधिक गिरोह से जुड़े होने की बात कबूली है। वह धनबाद जिले में रेलवे टेंडर से जुड़े ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने की योजना के तहत हथियार और कारतूस जमा कर रहा था। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका और उनकी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने बताया कि संगठित अपराध के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। Source link

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Ajmer News | Ajmer Famous Temple | अजमेर गुलाब बाड़ी में 5508...

होमताजा खबरधर्म अजमेर में है भगवान विष्णु का अद्भुत धाम! एक ही जगह विराजमान हैं 5508 शालिग्राम Last Updated:June 25, 2026, 17:59 IST Ajmer News : अजमेर के गुलाब बाड़ी में स्थित शालिग्राम मंदिर में 5508 शालिग्राम के छोटे-बड़े स्वरूप हैं. ये सभी 36 प्रकार के हैं. सवा ग्राम से 121 किलो तक के स्वरूप हैं. शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं के लिए यह बड़ा आकर्षण का केंद्र हैं. पुजारी आगे बताते हैं कि उनके पिताजी भगवान विष्णु के परम भक्त थे और प्रतिदिन तीनों संध्याओं में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया करते थे. उनके मन में भगवान विष्णु के एक हजार मंदिरों के दर्शन करने का संकल्प था, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका. अजमेर. अजमेर के गुलाब बाड़ी क्षेत्र में भगवान शालिग्राम का एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां एक ही परिसर में 5508 शालिग्राम विराजमान हैं. इनके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर के पुजारी सुनीत झा बताते हैं कि सनातन परंपरा में शालिग्राम को भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप माना गया है. यही वजह है कि इस धाम की विशेषता केवल शालिग्रामों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी दुर्लभता और आध्यात्मिक महत्व भी है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक साथ हजारों शालिग्रामों के दर्शन करने का अवसर मिलता है, जो अपने आप में एक अनूठा अनुभव माना जाता है. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि यहां शालिग्राम के सभी 36 प्रकार स्थापित हैं. पुजारी सुनीत झा बताते हैं कि शास्त्रों में वर्णित प्रत्येक प्रकार का शालिग्राम यहां विराजमान है, जिससे यह स्थान शोधकर्ताओं, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है. मंदिर में मौजूद शालिग्रामों का आकार भी विविध है. यहां सवा ग्राम वजन वाले छोटे शालिग्राम से लेकर 121 किलो तक के विशाल शालिग्राम दर्शनार्थ रखे गए हैं. इतनी बड़ी संख्या और विविधता में शालिग्रामों का एक साथ होना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है, जिसके कारण यह धाम अपनी अलग पहचान बना चुका है. पिता के संकल्प से शुरू हुई यात्रापुजारी आगे बताते हैं कि उनके पिताजी भगवान विष्णु के परम भक्त थे और प्रतिदिन तीनों संध्याओं में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया करते थे. उनके मन में भगवान विष्णु के एक हजार मंदिरों के दर्शन करने का संकल्प था, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका. तब परिवार ने विचार किया कि जब शालिग्राम को स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है, तो उनके पूजन और दर्शन से भी वही पुण्य प्राप्त हो सकता है. इसी भावना के साथ लगभग एक हजार शालिग्राम एकत्रित कर पूजा का क्रम शुरू किया गया. समय के साथ यह संख्या बढ़ती गई और आज यहां 5508 शालिग्राम स्थापित हैं. श्रद्धा, भक्ति और संकल्प से शुरू हुई यह यात्रा अब हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुकी है. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ajmer,Ajmer,Rajasthan Source link

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किसान अमृत इक्का का कमाल, घर में उगाया जापानी मियाजाकी आम, व्हाइट-ब्लैक...

होमफोटोकृषि किसान अमृत इक्का का कमाल, घर में उगाया जापानी मियाजाकी आम, 35 दुर्लभ विदेशी फल Last Updated:June 25, 2026, 17:30 IST Jamshedpur Amrit Dream Garden With Foreign Fruits: जमशेदपुर में जहां अधिकांश लोग पारंपरिक खेती और बागवानी करते हैं, वहीं शहर के होनहार किसान अमृत इक्का ने अपने घर परिसर में ऐसा ड्रीम गार्डन तैयार किया है, जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक हो रही है. उनके इस अनोखे बागान में देश-विदेश के दर्जनों दुर्लभ और महंगे फल देखने को मिलते हैं. खास बात यह है कि हर पौधे की देखभाल अलग तरीके से की जाती है और इसके लिए अमृत इक्का अपना अधिकांश समय बगीचे में ही बिताते हैं. अमृत इक्का बताते हैं कि खेती तो हर कोई करता है, लेकिन जो कुछ नया और अलग करने की सोच रखता है, उसकी पहचान अलग बनती है. इसी सोच के साथ उन्होंने कई वर्षों की मेहनत और खोज के बाद अपने गार्डन में विदेशी और दुर्लभ फलों के पौधे लगाए. आज उनके बगीचे में करीब 30 से 35 विभिन्न प्रजातियों के फलदार पौधे मौजूद हैं, जो अपनी खासियत और स्वाद के लिए जाने जाते हैं. उनके गार्डन का सबसे बड़ा आकर्षण जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम है, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. इसके अलावा व्हाइट डायमंड ग्वावा, ब्लैक डायमंड ग्वावा, ब्रुनेई किंग आम, हिमाचली सेव, एप्पल मैंगो, बनाना मैंगो, भगवान अनार, अरुणिका आम, आम्रपाली आम और एवोकाडो जैसे कई दुर्लभ फल भी यहां मौजूद हैं. सिर्फ आम और अमरूद ही नहीं, बल्कि उनके बगीचे में चीन की लीची, वियतनाम माल्टा संतरा, संपूर्ण नारियल, कागजी नींबू, आंवला और केजितेन जामुन जैसे पौधे भी लगे हुए हैं. केजितेन जामुन की खासियत यह है कि इसका एक फल सामान्य जामुन की तुलना में कई गुना बड़ा होता है और इसका वजन लगभग 100 ग्राम तक पहुंच सकता है. वहीं, ब्रुनेई किंग आम का एक फल करीब 2 किलो तक वजन का हो सकता है, जो लोगों को काफी आकर्षित करता है. Add News18 as Preferred Source on Google अमृत इक्का का कहना है कि हर पौधे की जरूरत अलग होती है. किसी को अधिक धूप चाहिए तो किसी को कम पानी, इसलिए इनकी देखभाल में विशेष ध्यान देना पड़ता है. वे सुबह से लेकर शाम तक अपने गार्डन में समय बिताते हैं और हर पौधे की नियमित निगरानी करते हैं. उनका मानना है कि पौधों को सिर्फ पानी और खाद ही नहीं, बल्कि प्यार और समर्पण की भी जरूरत होती है. आज उनका यह ड्रीम गार्डन न केवल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, बल्कि यह उन युवाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा है, जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कुछ नया करने का सपना देखते हैं. अमृत इक्का ने साबित कर दिया है कि जुनून, मेहनत और नए प्रयोग के बल पर घर के एक छोटे से बगीचे को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है. Source link

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