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Earthquack Alert! भूकंप से पहले ही अलर्ट कर देगा मोबाइल का यह...

Last Updated:June 25, 2026, 14:01 IST Google Earthquack Alert! गूगल ने वेनेजुएला में भूकंप से मची तबाही के ठीक पहले ही लोगों को इसके बारे में आगाह कर दिया था. गूगल के एक खास फीचर ने वेनेजुएला के नागरिकों को मोबाइल पर संदेश भेजकर इसकी जानकारी दी थी. वहां के सोशल मीडिया पर इस बारे में तमाम पोस्‍ट भी दिख रही है, जिसमें गूगल के नोटिफिकेशन के स्‍क्रीनशॉट शेयर किए गए हैं. गूगल का खास फीचर भूकंप आने से पहले ही पहचान कर लेता है. नई दिल्‍ली. वेनेजुएला में आए भूकंप ने हजारों करोड़ का नुकसान कराया और एक लाख से ज्‍यादा जिंदगियों को भी खत्‍म कर दिया. प्राकृतिक आपदाएं अक्‍सर इतनी तेजी से आती हैं कि बचाव का मौका ही नहीं मिलता. आज तकनीकी रूप से इतना विकास होने के बावजूद अक्‍सर इन अपदाओं से बचाव नहीं हो पाता. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि समय से पहले इन अपदाओं की सूचना नहीं मिल पाती है. लेकिन, गूगल ने एक ऐसा फीचर डेवलप किया है जो आपको भूकंप आने से कुछ समय पहले ही इसकी जानकारी दे देगा. वह भी बिजली की रफ्तार से यह जानकारी आप तक पहुंच जाएगी. गूगल ने वेनेजुएला में भी जानलेवा भूकंप आने से पहले ही इसकी जानकारी लोगों के मोबाइल पर भेज दी थी. वहां के सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने इस मैसेज का स्‍क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया कि गूगल ने भूकंप आने से कुछ ही समय पहले इस बारे में जानकारी दे दी थी. सोशल मीडिया पर लोगों ने बताया है कि वेनेजुएला में दो भूकंप आए, जिसने वहां भीषण तबाही मचाई. इसमें पहले भूकंप की तीव्रता रिक्‍टर स्‍केल पर 7.4 थी, तो दूसरे की क्षमता 7.2 थी. गूगल ने इन दोनों ही भूकंप के आने से कुछ ही देर पहले लोगों के मोबाइल पर नोटिफिकेशन भेज दिया था. क्‍या था गूगल अलर्ट मेंवेनेजुएला में भूकंप आने से कुछ ही समय पहले गूगल ने मोबाइल यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजकर बताया कि कितनी दूरी पर आपदा है और कब आने वाली है. गूगल ने अपने भूकंप अलर्ट में बताया है कि करीब 6.2 रिक्‍टर स्‍केल वाला भूकंप 341 किलोमीटर की दूरी पर है. लोगों ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर इस नोटिफिकेशन का स्‍क्रीन शॉट साझा करते हुए बताया है कि गूगल ने हर मोबाइल पर इस भूकंप से जुड़ी जानकारी साझा की थी. लाइट की स्‍पीड से भेजता है अलर्टगूगल की भूकंप नोटिफिकेशन वाली सर्विस काफी खास है और यह डाटा जुटाने के बाद बिजली की गति से इसका संदेश लोगों के मोबाइल पर भेज दिया जाता है. गूगल की यह सर्विस आसपास के स्‍मार्टफोन की मदद से भूकंप की गति और दिशा का पता लगाता है. उसे जैसे ही भूकंप का पता चलता है लाइट की स्‍पीड से इसकी जानकारी मोबाइल पर भेज देता है. गूगल के पास 2 अरब मोबाइल फोन का नेटवर्क है, जिसके जरिये वह भूकंप के आंकडे़ जुटाता है. इसके बाद 2 तरह का नोटिफिकेशन भेजता है. एक हल्‍के भूकंप से जुड़ा और दूसरा तेज भूकंप से जुड़ा अलर्ट भेजा जाता है. कैसे काम करता है यह फीचरआजकल के आधुनिक मोबाइल फोन एक्‍स्‍लरोमीटर के साथ आते हैं, जो स्‍मार्टफोन की रोटेशन की पहचान करते हैं. फिर मोबाइल स्‍क्रीन को लैंडस्‍कैप मोड और नॉर्मल मोड में कन्‍वर्ट किया जाता है. यह फीचर वाइब्रेशन को भी डिटेक्‍स करता है और गूगल का सिस्‍टम इस सेंसर की मदद से भूकंप और फोन के वाइब्रेशन का पता लगाता है. गूगल का फीचर करोड़ों मोबाइल से इस डाटा को जुटाकर आकलन करता है कि यह वाइब्रेशन भूकंप का है या फिर मोबाइल का. एक बार भूकंप की पहचान हो जाने पर आसपास के मोबाइल पर लाइट की स्‍पीड से इसका संदेश भेजा जाता है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

ये जनता के टैक्स का पैसा..जामताड़ा में सड़क निर्माण पर बवाल, ग्रामीणों...

Last Updated:June 25, 2026, 12:48 IST समाजसेवी अकबर अंसारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण सड़क मिलनी चाहिए और किसी भी तरह की अनियमितता पर कार्रवाई होनी चाहिए. सड़क निर्माण पर मचा हंगामा जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा जिले की पंजनिया पंचायत में बन रही एक पीसीसी सड़क निर्माण योजना विवादों में घिर गई है. ग्रामीण विकास विभाग की ओर से करीब 20 लाख रुपये की लागत से डेराडीह से डुमरीकुहली तक सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. आरोप है कि सड़क निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा था. इसी को लेकर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य को रोक दिया. सड़क निर्माण में तय मानकों का पालन नहींग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था. ढलाई के दौरान न तो विभाग का कोई अधिकारी मौजूद था और न ही ठेकेदार का प्रतिनिधि मौके पर दिखाई दिया. ऐसे में लोगों को निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह हुआ. ग्रामीणों का आरोप है कि जल्दबाजी में घटिया तरीके से सड़क बनाई जा रही थी, जिससे भविष्य में सड़क के खराब होने की आशंका बढ़ गई है. निर्माण कार्य को लेकर विवादगौरतलब है कि इस सड़क योजना का शिलान्यास 3 मई 2026 को झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा विधायक डॉ. इरफान अंसारी ने किया था. सड़क निर्माण शुरू होने से लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन अब निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. निर्माण कार्य को लेकर विवादमौके पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि यह जनता के टैक्स का पैसा है. इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जाएगा. समाजसेवी अकबर अंसारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण सड़क मिलनी चाहिए और किसी भी तरह की अनियमितता पर कार्रवाई होनी चाहिए. पूरे मामले की निष्पक्ष जांचवहीं समाजसेवी सुभाष मिर्धा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण जिला उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपेंगे. पंचायत के मुखिया नरेंद्र मुर्मू ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य हर गांव को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ना है, लेकिन कुछ ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से योजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. सहायक अभियंता मौके पर पहुंचेमामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण विकास विभाग (आरईओ) के सहायक अभियंता मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का निरीक्षण किया. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. सड़क निर्माण कार्य पर जनता का फैसलाफिलहाल ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा. इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamtara,Jharkhand Source link

झारखंड

झरिया-बलियापुर मार्ग पर 44 करोड़ की सड़क धंसी:छह महीने से बदहाल, आवागमन...

धनबाद जिले की झरिया-बलियापुर मुख्य सड़क भू-धंसान के कारण बदहाल हो गई है। वर्ष 2022 में 44 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस सड़क का एक बड़ा हिस्सा बीच से धंस गया है, जिससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह सड़क झरिया, बलियापुर, निरसा और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन है। प्रतिदिन हजारों लोग नौकरी, व्यवसाय, स्कूल और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। सड़क खराब होने के कारण लोगों को अब लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे उनके समय और पैसा दोनों की बर्बादी हो रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क टूटे हुए कई महीने हो चुके हैं, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। प्रशासन और बीसीसीएल ने एक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की है, लेकिन बारिश के मौसम में इस रास्ते पर भी खतरा बढ़ गया है। लोगों को आशंका है कि लगातार बारिश से भू-धंसान की स्थिति और बिगड़ सकती है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। जनता अब सरकार और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत की मांग कर रही है, ताकि सुरक्षित और सुगम आवागमन बहाल हो सके। इस मामले पर धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि झरिया-बलियापुर मुख्य सड़क के निर्माण और मरम्मत के लिए आवश्यक डिपॉजिट राशि बीसीसीएल को जमा करनी है। प्रशासन ने लगभग तीन महीने पहले ही बीसीसीएल को इस संबंध में पत्र भेजा था और लगातार पत्राचार जारी है। उपायुक्त ने आगे बताया कि पथ निर्माण विभाग (RCD) द्वारा सड़क मरम्मत का अनुमान (एस्टिमेट) पहले ही तैयार कर भेजा जा चुका है। बीसीसीएल द्वारा फंड जमा करते ही सड़क का काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बैठकों में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया है और बीसीसीएल प्रबंधन को जल्द से जल्द राशि जारी करने का निर्देश दिया गया है। Source link

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छापेमारी के दौरान ट्रैक्टर लेकर भागा ड्राइवर, गड्ढे में पलटा:चालक-चौकीदार सुरक्षित, पुलिस...

गिरिडीह के बेंगाबाद में अवैध बालू खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरुवार को मोतीलेदा बालू घाट पर कार्रवाई की गई। इस दौरान जब्त एक बालू लदा ट्रैक्टर भागने के प्रयास में तेलोनारी गांव के पास एक गड्ढे में पलट गया। घटना में ट्रैक्टर चालक और उस पर सवार एक चौकीदार बाल-बाल बच गए। पुलिस ने ट्रैक्टर जब्त कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, बेंगाबाद के अंचल अधिकारी सफी आलम ने मोतीलेदा बालू घाट पर छापेमारी कर अवैध रूप से बालू ढो रहे एक ट्रैक्टर को पकड़ा था। जब्त वाहन को थाना ले जाने के लिए अंचल अधिकारी ने एक चौकीदार को ट्रैक्टर पर बैठाकर भेजा। इसी दौरान चालक ने अचानक तेज रफ्तार में ट्रैक्टर भगाने का प्रयास किया। भागने के क्रम में तेलोनारी गांव के पास चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और ट्रैक्टर सड़क किनारे गड्ढे में पलट गया। दुर्घटना में ट्रैक्टर पर सवार चालक और चौकीदार सुरक्षित रहे। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। घटना की जानकारी मिलते ही बेंगाबाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पलटे हुए ट्रैक्टर को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रही है। अंचल अधिकारी की इस कार्रवाई से अवैध बालू कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एनजीटी के नियमों की अनदेखी कर मोतीलेदा बालू घाट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों के माध्यम से बालू का उठाव किया जाता है। इस मामले में बेंगाबाद थाना प्रभारी अमन कुमार ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर ट्रैक्टर को जब्त कर थाना लाया गया है। उन्होंने पुष्टि की कि इस घटना में किसी को कोई चोट नहीं लगी है। Source link

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क्या होता है शर्ट और बुशर्ट में अंतर, शर्तिया 99 फीसदी लोग...

जिस तरह हाफपैंट और नेकर की अपनी एक दिलचस्प कहानी है, ठीक उसी तरह शर्ट और बुशर्ट का अंतर भी बहुत कम लोगों को मालूम होगा. 99 फीसदी लोग इस बारे में शायद ही जानते होंगे आज के समय में लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन असल में ये दोनों अलग होते हैं. हालांकि ये सच है कि दोनों को ही भारत में अंग्रेज लेकर आए. इसके बाद ये तेजी से लोकप्रिय हुईं. एक बात और एक जमाने में शर्ट को अंडर गारमेंट ज्यादा माना जाता था. तो इनके भारत आने और छाने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. ‘बुशर्ट’ शब्द असल में ‘बुश’ से आया है, जिसका अंग्रेजी में अर्थ होता है झाड़ियां या जंगल. शर्ट को जहां ‘अनुशासन और औपचारिकता’ से जोड़ते हैं तो बुशर्ट को ‘आराम’ से. शर्ट और बुशर्ट में क्या अंतर शर्ट को पैंट के अंदर दबाकर यानि इन करके पहनने के लिए डिजाइन किया जाता है. इसकी लंबाई थोड़ी ज्यादा होती है ताकि हाथ उठाने या झुकने पर यह पैंट से बाहर न निकले. बुशर्ट को हमेशा पैंट या ट्राउजर के बाहर पहना जाता है. इसे पैंट के अंदर इन नहीं किया जाता. शर्ट को पैंट के अंदर दबाकर यानि इन करके पहनने के लिए डिजाइन किया जाता है. इसकी लंबाई थोड़ी ज्यादा होती है बुशर्ट को बाहर पहना जाता है. (AI Photo) फॉर्मल शर्ट का निचला हिस्सा घुमावदार होता है, जिसे ‘टेल’ कहा जाता है. ये इसलिए होता है ताकि शर्ट पैंट के अंदर ठीक से टिकी रहे. इसका निचला हिस्सा बिल्कुल सीधा और सपाट होता है. चूंकि इसे बाहर ही रखना होता है, इसलिए इसका सीधा कट इसे एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित लुक देता है. शर्ट में कॉलर के नीचे एक ‘स्टैंड’ होता है, जिससे कॉलर थोड़ा कड़ा और खड़ा रहता है. इसमें गले के बिल्कुल पास भी एक बटन होता है, ताकि टाई लगाई जा सके. वहीं बुशर्ट का कॉलर ढीला-ढाला और फ्लैट होता है, जिसे ‘कैंप कॉलर’ या ‘सफारी कॉलर’ कहते हैं. यह वी-शेप में खुला रहता है. इसमें टाई लगाने की कोई जगह नहीं होती। यह पूरी तरह हवादार और आरामदायक होता है. फॉर्मल शर्ट में आमतौर पर बाईं तरफ केवल एक ही जेब होती है या कई बार एक भी नहीं होती. पारंपरिक बुशर्ट में सामने की तरफ दो या चार बड़ी जेबें होती हैं, जिनमें ऊपर से बंद करने के लिए फ्लैप और बटन लगे होते हैं. बुशर्ट की रोचक कहानी 19वीं और 20वीं सदी में जब ब्रिटिश और यूरोपीय लोग अफ्रीका या भारत के जंगलों में शिकार या खोजबीन के लिए जाते थे, तो उन्हें एक ऐसे कपड़े की जरूरत होती थी जो बेहद आरामदायक हो, जिसमें गर्मी न लगे और जिसमें सामान रखने के लिए बहुत सारी जेबें हों. इसी जरूरत के लिए जो शर्ट बनाई गई, उसे ‘बुश शर्ट’ या ‘सफारी शर्ट’ कहा गया. चूंकि इसे जंगलों और झाड़ियों में पहना जाता था, इसलिए इसका नाम बुशर्ट पड़ गया. बुशर्ट का आविष्कार कठिन मौसम और स्थितियों में पहनने वाले पोशाक के तौर पर हुई. (AI Photo) भारत में पॉपुलर भारत की गर्म जलवायु के लिए बुशर्ट एकदम मुफीद थी. आजादी के बाद, 1960 से लेकर 1980 के दशक तक भारतीय दफ्तरों के बाबू, सरकारी अफसरों और नेताओं के बीच ‘बुशर्ट और पैंट’ का कॉम्बिनेशन बेहद लोकप्रिय हुआ. दोनों को लाने का श्रेय अंग्रेजों को शर्ट और बुशर्ट दोनों को ही भारत में लाने का श्रेय अंग्रेजों और यूरोपीय व्यापारियों को जाता है. इससे पहले भारत में धोती, कुर्ता, अंगरखा और मिर्जई पहने जाते थे. आज जिसे हम फॉर्मल शर्ट कहते हैं, वह कभी कोट के नीचे पहना जाने वाला एक अदना सा कपड़ा हुआ करती थी. 18वीं और 19वीं सदी की शुरुआत तक यूरोप में शर्ट को एक ‘अंडरवियर’ की तरह माना जाता था. इसे सीधे बदन पर पहना जाता था. इसके ऊपर वेस्टकोट या कोट पहनना अनिवार्य था. समाज में बिना कोट के केवल शर्ट में दिखना अभद्रता या ‘नंगा’ होने जैसा माना जाता था. उस दौर में शर्ट पूरी सफेद होती थी. जो अमीर होते थे, उनके कॉलर हमेशा साफ और कड़े होते थे क्योंकि वे शारीरिक श्रम नहीं करते थे. यहीं से ‘व्हाइट कॉलर जॉब’ शब्द निकला. अंग्रेज जब भारत में शर्ट लेकर आए तो उन्होंने बंगाल के आफिस में क्लर्कों के लिए इसका पहनना जरूरी कर दिया. तब बंगाल के क्लर्क आमतौर पर नीचे धोती और ऊपर शर्ट पहना करते थे. (AI Photo) पहले भारत में धोती पर पहनते थे शर्ट ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी और ब्रिटिश अफसर जब भारत आए, तो वे अपनी इसी थ्री-पीस सूट और शर्ट वाली संस्कृति को साथ लेकर आए. भारतीयों के लिए शुरू में यह एक कौतुक की चीज थी. अंग्रेजों ने जब भारत में प्रशासनिक काम के लिए भारतीय क्लर्कों की फौज तैयार की, तो उनके लिए एक खास ड्रेस कोड बनाया गया. धोती के ऊपर शर्ट पहनना इसी ‘बाबू संस्कृति’ की देन है. धीरे-धीरे भारतीय पुरुषों ने कुर्ते की जगह शर्ट को अपना लिया क्योंकि इसकी फिटिंग और बटन वाले कफ काम करने में ज्यादा व्यावहारिक थे. Source link

झारखंड

सपनों का टूटना या चंद रुपयों की मजबूरी? डॉक्टर-नर्स बनने वाली टॉपर...

Last Updated:June 25, 2026, 12:29 IST NEET Solver Gang Toppers Arrested: नीट सॉल्वर गैंग से जुड़ा हैरान करने वाला अपडेट सामने आया है. झारखंड की स्टेट टॉपर पूनम और पलामू की चंचल कुमारी डमी कैंडिडेट बनकर दूसरों के नाम पर नीट परीक्षा दे रही थीं. दोनों टॉपर आखिर नीट सॉल्वर कैसे बन गईं? जानिए 18 बायोमेट्रिक कर्मियों की गिरफ्तारी और 5 राज्यों में फैले इस फर्जीवाड़े के सिंडिकेट का सच. NEET Solver Gang: नीट सॉल्वर गैंग में 2 टॉपर लड़कियां भी शामिल थीं नई दिल्ली (NEET Solver Gang Toppers Arrested). यह कहानी सिर्फ पेपर लीक या परीक्षा में होने वाले किसी आम फर्जीवाड़े की नहीं है. यह कहानी है उन चमकते सपनों के असमय टूटने और बिखरने की, जो कभी अपने राज्य और जिले की टॉपर लिस्ट में सबसे ऊपर चमके थे. नीट यूजी री-टेस्ट 2026 के दौरान जब पुलिस ने बिहार के लखीसराय में अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया तो कई गिरफ्तारियों ने चौंका दिया. इस गिरोह में कोई प्रोफेशनल अपराधी नहीं, बल्कि देश के नामी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के छात्र और ‘स्टेट टॉपर’ रहीं 2 बेटियां शामिल हैं- झारखंड की पूनम कुमारी और पलामू की चंचल कुमारी. पेशेवर अपराधियों के अपराध करने पर समाज को ज्यादा हैरानी नहीं होती. लेकिन जब देश के टॉप कॉलेज में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स और बोर्ड परीक्षा के होनहार टॉपर्स ही ‘सॉल्वर गैंग’ के मोहरे बन जाएं तो समझ जाना चाहिए कि खराबी सिर्फ परीक्षा सिस्टम में नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में भी है. कानून इन बच्चों को सलाखों के पीछे तो भेज देगा, लेकिन क्या हमारा समाज और सिस्टम इन टूटते सपनों, महंगी होती पढ़ाई और आर्थिक तंगी से घिरे युवाओं को कोई सुरक्षित रास्ता दे पाएगा? समझिए नीट यूजी सॉल्वर गैंग के नेक्सस की पूरी कहानी. आर्थिक तंगी और लगातार असफलता पड़ी भारी 2021 में पूनम कुमारी झारखंड 12वीं साइंस टॉपर थी. पिता हर महीने 7,000 रुपये वाराणसी भेजते थे, जिससे बेटी BHU में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर सके. लेकिन 3 बार नीट देने के बाद भी सफलता न मिलना, महंगी कोचिंग का खर्च और घर की गरीबी ने मिलकर पूनम पर ऐसा मानसिक और आर्थिक दबाव बनाया कि वो शॉर्टकट के खतरनाक रास्ते पर चल पड़ी. पढ़ाई का बहाना बनाकर पूनम 7 महीने से घर भी नहीं गई थी. फिर ‘मधुप्रिया’ नाम की कैंडिडेट की जगह परीक्षा देने लखीसराय पहुंच गई. चंचल कुमारी की कहानी भी अलग नहीं है. साल 2016 में पलामू जिला टॉपर बनी चंचल फिलहाल ओडिशा के एक सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज में बीएएमएस (BAMS) के फाइनल ईयर की छात्रा है. उसके 2 भाई आयुर्वेद चिकित्सक हैं और वो अपनी बहन को भी डॉक्टर बनते देखना चाहते थे. लेकिन चंद रुपयों के लालच या किसी शातिर के बहकावे में आकर चंचल ने अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी. वह ‘नंदनी राज’ नाम की मूल परीक्षार्थी की जगह डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा हॉल में बैठी थी. ‘सॉल्वर सिंडिकेट’ कैसे काम करता है? लखीसराय एसपी प्रेरणा कुमार के मुताबिक, यह खेल केवल परीक्षा हॉल में बैठकर पेपर सॉल्व करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत का बहुत बड़ा सिंडिकेट है. फर्जी पहचान पत्र: डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में एंट्री दिलाने के लिए सबसे पहले उनके फर्जी पहचान पत्र और आधार कार्ड तैयार किए जाते हैं, जिन पर चेहरा डमी कैंडिडेट का होता है और नाम असली छात्र का. बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में सेंध: इस फर्जीवाड़े का सबसे डरावना पहलू यह है कि पुलिस ने जांच के दौरान 18 बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कर्मियों को भी गिरफ्तार किया है.. यानी उंगलियों के निशान मैच कराने वाले कर्मचारी ही इस गिरोह से मिले हुए थे. अंतरराज्यीय नेटवर्क: पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के तार बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं. गिरफ्तार लोगों में दिल्ली, मधेपुरा और मुजफ्फरपुर के कई नामी मेडिकल छात्र भी शामिल हैं. समाज और माता-पिता के लिए कभी न भूलने वाला दर्द नीट फर्जीवाड़ा कांड ने परीक्षा की शुचिता तो भंग की ही है, लेकिन उससे भी ज्यादा कई हंसते-खेलते परिवारों के गर्व और प्रतिष्ठा को हमेशा के लिए दफन कर दिया है. पूनम के पिता बालेश्वर प्रसाद राणा अपनी बेटी के कृत्य से इतने दुखी और हैरान हैं कि उन्होंने कैमरे के सामने रोते हुए कहा- मेरी बेटी ने घर और पूरे गांव की इज्जत मिट्टी में मिला दी है, मैं अब उससे जेल में मिलने तक नहीं जाऊंगा. वहीं चंचल के भाई भी हैरान हैं कि उनकी बहन इस दलदल में कैसे फंस गई. क्यों दलदल की तरफ खिंच रहे हैं मेधावी स्टूडेंट्स? शिक्षाविदों और जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं. पहला कारण है नीट जैसी परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटर की लाखों की फीस. दूसरा, मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन मिलने के बाद भी हॉस्टल, किताबों और रहने का खर्च उठा पाना गरीब या मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बेहद मुश्किल होता है. जब इन स्टूडेंट्स को अपनी जरूरतों के लिए पैसों की किल्लत होती है तो सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड इनका फायदा उठाते हैं. वे इन चमकते हुए दिमागों को चंद रुपयों या तुरंत अमीर बनने का लालच देकर अपनी ढाल बना लेते हैं और मेधावी छात्र बिना अंजाम सोचे इस चक्रव्यूह में फंस जाते हैं. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

गुमला में सांप काटने से दो की मौत:अलग-अलग घटनाओं में महिला और...

गुमला जिले में गुरुवार को सांप के काटने से दो अलग-अलग घटनाओं में एक महिला और एक छात्र की मौत हो गई। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस ने शवों का पोस्टमॉर्टम कराया और मामले की छानबीन में जुट गई है। पहली घटना गुमला के कसीरा गांव के मधुबन टोली में हुई, जहां 46 वर्षीय दशरी देवी की सांप के काटने से मौत हो गई। मृतका के पुत्र दिनेश साहू ने बताया कि बुधवार-गुरुवार की देर रात खाना खाने के बाद परिवार के सभी सदस्य जमीन पर सो रहे थे। इसी दौरान उनकी मां दशरी देवी को एक जहरीले करैत सांप ने काट लिया। उन्हें तुरंत गुमला सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां गुरुवार सुबह करीब 4 बजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। माइकल दो भाइयों में सबसे छोटा था दूसरी घटना बसिया प्रखंड क्षेत्र के बेलगांव करम टोली गांव में हुई, जहां 17 वर्षीय छात्र माइकल तिर्की की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, माइकल संत जोसेफ स्कूल में इंटर का छात्र था। बुधवार-गुरुवार की मध्य रात्रि को वह भी जमीन पर सोया हुआ था, तभी उसे सांप ने डंस लिया। उसे भी सदर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। माइकल अपने दो भाइयों में सबसे छोटा था और उसके पिता एक किसान हैं। उसने इसी वर्ष मैट्रिक की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की थी। दोनों शवों का गुरुवार को पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। Source link

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रांची-आनंद विहार समेत कई स्पेशल ट्रेनों का विस्तार:यात्रियों की बढ़ती भीड़ को...

रेल मंत्रालय ने यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई स्पेशल ट्रेनों के परिचालन अवधि में विस्तार किया है। इसके तहत रांची-आनंद विहार टर्मिनल स्पेशल (02877) का संचालन 4 से 25 जुलाई तक प्रत्येक शनिवार और आनंद विहार-रांची स्पेशल (02878) का संचालन 5 जुलाई से 26 जुलाई तक प्रत्येक रविवार को किया जाएगा। दोनों ट्रेनें चार-चार अतिरिक्त ट्रिप चलेंगी। इसी तरह सांतरागाछी-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल (08611) 6 जुलाई से 28 सितंबर तक प्रत्येक सोमवार और अजमेर-सांतरागाछी स्पेशल (08612) 9 जुलाई से 1 अक्टूबर तक प्रत्येक गुरुवार को कुल 13-13 ट्रिप संचालित होंगी। इन ट्रेनों का परिचालन रांची होकर होगा, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा विकल्प मिलेंगे और वेटिंग सूची का दबाव कम होने की उम्मीद है। गोरखपुर-सम्बलपुर एक्सप्रेस में अतिरिक्त एसी कोच यात्रियों की सुविधा के लिए गोरखपुर-सम्बलपुर एक्सप्रेस (15027/28) में भी अस्थायी रूप से एक अतिरिक्त एसी 3-टियर कोच जोड़ा जाएगा। गोरखपुर से चलने वाली ट्रेन में यह सुविधा 1 से 31 जुलाई तक और सम्बलपुर से चलने वाली ट्रेन में 3 जुलाई से 2 अगस्त तक उपलब्ध रहेगी। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को राहत देना है। Source link

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कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन? जिनके पूर्व IAS पति ने BJD को किया...

होमताजा खबरदेश कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन? नवीन पटनायक की बनेंगी उत्तराधिकारी! क्यों मचा बवाल Last Updated:June 25, 2026, 11:59 IST जिस पूर्व आईएएस वीके पांडियन पर बीजेडी को बर्बाद करने का आरोप लगा, अब उन्हीं की पत्नी सुजाता कार्तिकेयन को नवीन पटनायक अपना उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी में हैं. इस खबर के सामने आते ही बीजेडी के अंदर कोहराम मच गया है. ख़बरें फटाफट नवीन पटनायक का उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में सुजाता कार्तिकेयन का नाम, पांडियन का नाम जुड़ते ही बीजेडी के अंदर मचा है भारी कोहराम आज. ओडिशा की राजनीति में एक बार फिर से वही चेहरा चर्चा में है, जिसे हाल ही में मिली हार का मुख्य कारण माना जा रहा था. नवीन पटनायक अपनी पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) को संभालने के लिए अब एक ऐसा दांव चल रहे हैं, जिससे पार्टी के अंदर और बाहर नया सियासी कोहराम मच गया है. पूर्व आईएएस वीके पांडियन की पत्नी सुजाता कार्तिकेयन के बीजेडी में शामिल होने और उन्हें नवीन पटनायक का उत्तराधिकारी बनाए जाने की सुगबुगाहट ने पार्टी के पुराने वफादारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

जामताड़ा में नगर पंचायत की बड़ी पहल, शुरू हुई 24 घंटे फ्री...

Last Updated:June 25, 2026, 11:36 IST वार्ड पार्षदों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में इस सेवा का शुभारंभ किया गया. इस पहल के तहत दो एंबुलेंस नगर क्षेत्र की जनता को समर्पित की गई हैं. ये एंबुलेंस 30 किलोमीटर के दायरे में दिन-रात निशुल्क सेवा देंगी. एक कॉल पर पहुंचेगी एंबुलेंस जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा नगर क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अब किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नगर पंचायत अध्यक्ष आशा गुप्ता और समाजसेवी तरुण कुमार गुप्ता की पहल पर शहर में 24 घंटे निशुल्क एंबुलेंस सेवा की शुरुआत कर दी गई है. दुमका रोड स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सभी वार्ड पार्षदों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में इस सेवा का शुभारंभ किया गया. इस पहल के तहत दो एंबुलेंस नगर क्षेत्र की जनता को समर्पित की गई हैं. ये एंबुलेंस 30 किलोमीटर के दायरे में दिन-रात निशुल्क सेवा देंगी. दरअसल, जामताड़ा में पिछले कुछ समय से एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. कई मामलों में लोगों को मरीजों को खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा, जबकि कुछ लोगों ने ट्रैक्टर के सहारे अस्पताल पहुंचने की कोशिश की. ऐसी घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे और आम लोगों की परेशानी को सामने लाया था. नगर पंचायत अध्यक्ष आशा गुप्ता ने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने नगरवासियों से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का वादा किया था. उसी वादे को पूरा करते हुए यह निशुल्क एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है. उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी, वाहन की कमी या सरकारी एंबुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने के कारण किसी भी मरीज की जान जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए. यही सोचकर इस सेवा की शुरुआत की गई है. उन्होंने बताया कि नगर क्षेत्र के भीतर 30 किलोमीटर तक किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को दिन या रात किसी भी समय एंबुलेंस की आवश्यकता होने पर यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क मिलेगी. इससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, गंभीर मरीजों और गरीब परिवारों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा. वहीं समाजसेवी तरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि हाल के दिनों में मरीजों को खटिया और ट्रैक्टर के सहारे अस्पताल ले जाने की घटनाएं बेहद दुखद थीं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का अधिकार है और समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है. इसी उद्देश्य से शहर में दो निशुल्क एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं. इस नई व्यवस्था के तहत नगर क्षेत्र का कोई भी नागरिक आपातकालीन स्थिति में 7765950812 और 9939595909 नंबर पर 24 घंटे संपर्क कर निशुल्क एंबुलेंस सेवा का लाभ उठा सकता है. शहरवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे जनहित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है. लोगों का कहना है कि समय पर एंबुलेंस मिलना कई बार किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में जामताड़ा में शुरू हुई यह निशुल्क एंबुलेंस सेवा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamtara,Jharkhand Source link

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