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झारखंड

कोडरमा में टैंकर पलटा तो तेल लूटने उमड़ी भीड़:ट्रक ने टैंकर को...

कोडरमा घाटी के मेघातरी पंचायत स्थित बंदरचुआ के पास तेल से लदा टैंकर दुर्घटनाग्रस्त होकर सड़क पर पलट गया। हादसे के तुरंत बाद जहां राहत और बचाव कार्य की जरूरत थी, वहीं आसपास के गांवों के लोग अपने-अपने घरों से जार, बाल्टी, डेकची और जग लेकर मौके पर पहुंच गए। टैंकर से बह रहे तेल को भरने के लिए लोगों में होड़ मच गई। सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ देर के लिए यह इलाका तेल लूट का केंद्र बन गया। पीछे से टक्कर के बाद अनियंत्रित हुआ टैंकर टैंकर चालक राजकुमार ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल के हल्दिया से तेल लेकर नेपाल जा रहा था। कोडरमा घाटी के नौवां माइल के पास ढलान पर पीछे से आ रहे एक ट्रक ने टैंकर में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही टैंकर का पिछला नोजल टूट गया और ब्रेक फेल हो गया। सामने चल रहे वाहनों को बचाने के प्रयास में चालक ने टैंकर को किनारे करने की कोशिश की, लेकिन वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर ही पलट गया। इस दौरान चालक किसी तरह केबिन से बाहर निकल गया। जिससे उसकी जान बच गई। हालांकि, हादसे के तुरंत बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। पुलिस पहुंची तो भागे लोग टैंकर पलटने के साथ ही तेल तेजी से सड़क पर बहने लगा, जिसे भरने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोग बिना किसी डर के रिसाव वाले हिस्से के पास पहुंचकर तेल इकट्ठा करने लगे।सूचना मिलने के बाद कोडरमा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही अधिकांश लोग वहां से भाग निकले। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दुर्घटनाग्रस्त टैंकर को हटाने और यातायात को सामान्य करने के लिए प्रयास किए गए। Source link

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संजय, नागेश, दीना… ऑपरेशन टाइगर की आई पहली तस्वीर, कब-कहां हुई सीक्रेट...

Last Updated:June 20, 2026, 10:42 IST Uddhav Thackeray Shiv Sena News: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से जुड़ी एक तस्वीर सामने आई है, जिसने महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. यह तस्वीर शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों की है, जिससे देखकर उद्धव ठाकरे को 440 वोल्ट का झटका लगना लाजमी है. ऑपरेशन टाइगर से जुड़ी इस तस्वीर ने महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के लिहाज से आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. खबर है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसद आज दिल्ली पहुंचने वाले हैं और इसी के साथ इस पूरे ऑपरेशन का सबसे अहम चरण शुरू हो जाएगा . प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सभी बागी सांसद दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर ठहराया जाएगा, ताकि आगे की रणनीति पर मंथन किया जा सके. माना जा रहा है कि आगे की राजनीतिक दिशा और पार्टी में स्थिति को लेकर अहम फैसले यहीं तय होंगे. इसके बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से बुलेटिन जारी होने के बाद ये सांसद मीडिया के सामने आएंगे और अपनी स्थिति साफ करेंगे. ऑपरेशन टाइगर की पहली तस्वीर ने बढ़ाई हलचल इस बीच ‘ऑपरेशन टाइगर’ से जुड़ी एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसने महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. तस्वीर में हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर, मुंबई से सांसद संजय दीना पाटिल और यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख, शिवसेना के राष्ट्रीय समन्वयक अभिषेक वर्मा के साथ दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में नजर आ रहे हैं. सूत्रों का दावा है कि पिछले कई महीनों से इस पूरे ऑपरेशन की रणनीति पर काम चल रहा था. महाराष्ट्र में इसकी राजनीतिक रूपरेखा सांसद श्रीकांत शिंदे ने तैयार की, जबकि दिल्ली में समन्वय और संपर्क की जिम्मेदारी अभिषेक वर्मा संभाल रहे थे. बताया जा रहा है कि 16-17 जून की रात दिल्ली में इस रणनीति को अंतिम रूप दिया गया. निंबालकर हत्याकांड के फैसले पर भी नजर इसी बीच शिवसेना उद्धव गुट के बागी सांसद ओमराजे निंबालकर के पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड मामले में आज मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत अपना फैसला सुनाने वाली है. वर्ष 2006 में पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल सहित 8 आरोपियों के खिलाफ आज फैसला आने वाला है. पद्मसिंह पाटिल महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के सगे भाई हैं. सूत्रों के मुताबिक ओमराजे निंबालकर भी फैसले के वक्त कोर्ट में मौजूद रहेंगे. ओमराजे निंबालकर का नाम भी शिवसेना उद्धव गुट के बागी हुए सांसदों में शामिल है, जिन्होंने पाला बदलकर शिवसेना शिंदे गुट का समर्थन कर दिया है. वहीं विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि उन्होंने अपने पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में अनुकूल फैसला पाने के लिए राजनीतिक रुख बदला है. उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों की गतिविधियों, दिल्ली में हुई बैठकों और ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सामने आ रही सूचनाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है. अब सबकी नजर लोकसभा सचिवालय की अगली कार्रवाई और बागी सांसदों के संभावित मीडिया संबोधन पर टिकी हुई है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mumbai,Maharashtra Source link

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मुर्गी की यह किस्म है खास, 24 माह तक रोजाना अंडा उत्पादन...

Last Updated:June 20, 2026, 09:49 IST झारखंड के कृषि व्यापार मेले में ‘बीवी-300 लेयर’ मुर्गी की किस्म आकर्षण का केंद्र बनी. यह किस्म बिना मुर्गे के 24 महीने तक रोजाना अंडा दे सकती है. छोटी पूंजी और कम देखभाल वाले इस केज सिस्टम मॉडल से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. इससे हर महीने 15 हजार रुपये तक की कमाई हो सकती है. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड सरकार द्वारा मोराबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में किसानों और महिला समूहों को आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों से जोड़ने के लिए कई जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाए गए. मेले में विशेषज्ञों द्वारा खेती के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसरों पर प्रशिक्षण दिया गया. जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल रहे हैं. मेले में बरपोखर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधि आशीष कुमार ने बताया कि कंपनी झारखंड के सभी 24 जिलों में 100 लेयर बर्ड मॉडल (केज सिस्टम) के तहत कार्य कर रही है. इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत लाभुकों को वैज्ञानिक तरीके से मुर्गी पालन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने बताया कि इस मॉडल के तहत लाभुकों को मुर्गी पालन शुरू करने के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं. जिससे शुरुआती स्तर पर किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. कम देखभाल में अच्छा मुनाफाउन्होंने बताया कि इस योजना की कुल लागत लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये है. इसमें बीवी-300 लेयर बर्ड, केज सिस्टम, शेड, एक महीने का फीड और आवश्यक दवाइयां शामिल रहती हैं. इसके अलावा कंपनी लाभुकों को प्रशिक्षण, नियमित तकनीकी मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर वेटरनरी डॉक्टर की सहायता भी उपलब्ध कराती है. इससे नए लोगों के लिए भी मुर्गी पालन का व्यवसाय आसान हो जाता है. 24 महीने तक लगातार अंडा उत्पादन की क्षमताउन्होंने बताया कि बीवी-300 लेयर प्रजाति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अंडा उत्पादन क्षमता है. यह मुर्गी लगभग 24 महीने तक प्रतिदिन एक अंडा देने में सक्षम होती है, जिससे नियमित आय का स्रोत बनता है. उन्होंने बताया कि पहले चूजों का 90 दिनों तक ब्रूडिंग कराया जाता है. इसके बाद इन्हें लाभुकों के जिले में भेजा जाता है. जहां 25 से 30 दिनों तक स्थानीय वातावरण के अनुकूल होने के बाद मुर्गियां अंडा देना शुरू कर देती हैं. अंडा उत्पादन के लिए मुर्गे की जरूरत नहींउन्होंने बताया कि बीवी-300 लेयर मुर्गियां व्यावसायिक अंडा उत्पादन के लिए विकसित की गई हैं. इस कारण अंडा उत्पादन के लिए मुर्गे की आवश्यकता नहीं होती. जिससे पालन की लागत और देखभाल दोनों सरल हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं या व्यक्तिगत लाभुक घर पर कम जगह और कम देखभाल में इस मॉडल को अपनाकर हर महीने लगभग 15 हजार तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं. इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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दुबई में बैठे आतंकी के निर्देश पर फेंका बम, लखनऊ था अगला...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। इसके बाद लखनऊ दहलाने की साजिश थी। दुबई में बैठे तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) के सदस्य आवेश राजपूत उर्फ राणा और सहजाद उर्फ शाहनवाज आलम उर्फ भट्‌ठी ने इसका फरमान जारी कर दिया था। इसके लिए अमन अंसारी उर्फ गोलू और सैफ अंसारी 17 जून को दोपहर ट्रेन से कानपुर रवाना भी हो गया था। लेकिन रांची पुलिस ने दोनों को गझंडी स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में अमन अंसारी ने यह खुलासा किया। उसने बताया कि सितंबर 2025 में वह नौकरी के लिए मुंबई गया था। वहां से जिशान नामक एजेंट ने दुबई भेज दिया। वहां मरमुम स्टार टेक्निकल सर्विस एलएलसी कंपनी में एसी बनाने का काम मिला। वीजा समाप्त होने के बाद कंपनी के सुपरवाइजर अहमद अली ने इसी साल उसे वापस मुंबई भेज दिया। फिर वहां से झारखंड लौट आया। यहां आने के बाद अहमद अली ने ही राणा से फोन पर संपर्क कराया। उसे आरएसएस कार्यालय पर बम फेंकने के लिए तीन लड़कों को तैयार करने के लिए कहा गया। इसकी एवज में पैसे देने की बात कही गई। आरोपियों के ठिकाने पर एटीएस की छापेमारी, परिजनों से भी हुई पूछताछ झारखंड एटीएस की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह लोहरदगा स्थित सैफ अंसारी आैर अमन अंसारी के अलावा रांची में सायन सुजान के घर पर छापेमारी की। एटीएस की एक टीम ने लोहरदगा स्थित दोनों आरोपियों के घर की तलाशी ली। एक-एक सामान की जांच की। इसके बाद घर में मौजूद सैफ के बड़े भाई चांद अंसारी से लंबी पूछताछ भी की। आरोपी अमन की मां से भी कई सवाल किए। एटीएस की दूसरी टीम लोअर बाजार थाना क्षेत्र के कर्बला चौक के पथलकुदवा में सायम सुजान के घर पहुंची जहां घर के एक-एक कोने में गहन तलाशी ली। पहले गोली चलवाने की योजना थी, हथियार नहीं मिला, बदला प्लान अमन ने पुलिस को बताया कि राणा और भट्‌ठी पहले गोली चलवाकर दहशत फैलाना चाहते था। इसके लिए पाकिस्तान से हथियार रांची भेजने का प्लान था। अमन 8 जून को टाटा-अमृतसर एक्सप्रेस से अमृतसर के लिए निकला। लेकिन डालटनगंज में आनंद विहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। वह 10 जून को अमृतसर पहुंचा और राजू मेहता के होटल में रुका। इसके बाद राणा ने फोन कर बताया कि हथियार उपलब्ध नहीं हो पाया है, वापस लौट जाआे। 12 जून को वह रवाना हुआ और दिल्ली से ट्रेन पकड़कर लोहरदगा आ गया। फिर प्लान बदला। राणा ने पेट्रोल बम से हमला करने का आदेश दिया। मोबाइल अमन के पास, दुबई से वॉट्सएप चला रहा था राणा अमन अंसारी ने बताया कि अपने दोस्त हैदर अली से एक मोबाईल आैर सिमकार्ड 9334314899 लिया था। हैदर ने यह मोबाइल आैर सिमकार्ड लोहरदगा में रहने वाले एक युवक से गिरवी के रूप में रखा था। युवक ने पैसे देने में देर की तो हैदर ने वह मोबाइल अमन को बेच दिया। अमन इस नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों को फोन करने में करता था। जबकि दुबई में बैठा राणा 10 जून के बाद इसी नंबर से वाट्सएप अकाउंट बनाकर इस्तेमाल कर रहा था। वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए अमन ने ही राणा को ओटीपी उपलब्ध कराया था। अमन ने पुलिस को बताया कि दुबई से राणा ने 15 जून की रात उसके वॉट्सएप पर रांची आरएसएस कार्यालय का फोटो और लोकेशन भेजा। पेट्रोल बम फेंक कर आरएसएस कार्यालय में आग लगाने का निर्देश दिया। तय योजना के अनुसार सैफ और अमन 16 जून की रात अपने दोस्त सायम सुजान के साथ आरएसएस कार्यालय के पास पहुंचा। सैफ ने पेट्रोल बम फेंका, जबकि अमन पूरी घटना का वीडियो बना रहा था। पहला बम नहीं फटा, जिसकी सूचना राणा को दी। सुनते ही राणा भड़क गया और दूसरा बम फेंकने को कहा। दूसरा बम फेंकने के बाद धमाका हुआ तो तीनों वहां से फरार हो गए। अगले दिन सुबह राणा ने फोन कर कहा-वहां से निकलकर कानपुर चले जाओ। कानपुर से लखनऊ जाकर दूसरी घटना को अंजाम देना है। Source link

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तेलो का नेहरु प्लस टू स्कूल बदहाल, 650 छात्रों पर मात्र चार...

इस विकराल समस्या पर भाजपा तेलो मंडल अध्यक्ष सुरेश कुशवाहा ने कहा कि यह विद्यालय इस क्षेत्र के लिए गौरव है। लेकिन शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। इसके कारण विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में है। इस विकट समस्या को लेकर शिक्षा विभाग डीईओ से बात कर कर जल्द ही शिक्षकों की बहाली करवाई जाएगी। साथ ही बिल्डिंग का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि संवेदक ने दरारों को प्लास्टर और पुट्टी से छिपाने की कोशिश की, लेकिन प्लास्टर छूते ही झड़ने लगा। एक तरफ शिक्षकों के अभाव में बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है, वहीं 6.80 करोड़ खर्च करके बनी बिल्डिंग कागज की तरह चरमरा रही है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बच्चों के भविष्य और सरकारी पैसे दोनों से खिलवाड़ है। जिला शिक्षा पदाधिकारी की नाक के नीचे ये सब हो गया, लेकिन उनका ध्यान नहीं है। डीईओ से मिलकर जल्द से जल्द शिक्षकों की बहाली और भवन की जांच की मांग करूंगा। विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय चक्रवर्ती ने कहा कि शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है। भास्कर न्यूज । तेलो चंद्रपुरा प्रखंड के तेलो मध्य पंचायत में स्थित उत्क्रमित नेहरू प्लस टू उच्च विद्यालय जर्जर अवस्था में है। 1957 में स्थापित होकर क्षेत्र के हजारों छात्रों को शिक्षा देने वाला यह विद्यालय अब शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। 650 छात्रों की पढ़ाई का जिम्मा सिर्फ 4 शिक्षकों पर है, जिसमें 2 शिक्षकों के भरोसे ही रोजाना क्लास चल रही है। वहीं 6.80 करोड़ की लागत से बनी नई बिल्डिंग में हैंडओवर से पहले ही दरार हो गई है। वर्तमान में स्कूल में कुल 650 छात्र नामांकित हैं। लेकिन शिक्षक सिर्फ 4 ही पदस्थापित हैं, इनमें1 फिजिकल टीचर, 1 हिंदी टीचर,1 इतिहास टीचर और 1 हेडमास्टर हैं। हेडमास्टर अजय चक्रवर्ती को रोजाना विद्यालय एवं अन्य सरकारी कामों में उलझा रहना पड़ता है। नतीजा ये कि असल में 650 बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ 2 विषय शिक्षक ही बचते हैं। डिजिटल युग में जब स्मार्ट क्लास और लैब की बात होती है, वहां तेलो स्कूल में बच्चे बारी-बारी से क्लास में बैठकर समय गुजार रहे हैं। विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए अब तक पद सृजन नहीं होने से कला, विज्ञान, वाणिज्य संकाय के लिए एक भी विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं है। Source link

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Super El Nino impact | Monsoon Rain Alert | सूखे बांध, बादल...

मानसून को लेकर जिस बात का डर जताया जा रहा था, वह सच होता दिख रहा है. भारत में सुपर एल नीनो (Super El Nino) अपना असर दिखाने लगा है और इस कारण मानसून की चाल भी सुस्त पड़ गई है. देश में अब तक सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है. इसके चलते देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण घटकर उनकी कुल क्षमता के लगभग 27.5 फीसदी तक सिमट गया है. हालांकि मौजूदा जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत से अभी बेहतर माना जा रहा है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों और जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अगर बारिश की कमी बनी रही तो आने वाले हफ्तों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि देश के इन 166 बड़े जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता लगभग 183.6 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है. यह देश में निर्मित कुल 257.8 BCM जल भंडारण क्षमता का 71 फीसदी से अधिक हिस्सा है. ऐसे में इन जलाशयों में पानी का स्तर गिरना सीधे तौर पर सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, उद्योगों और जलविद्युत उत्पादन को प्रभावित कर सकता है. बारिश हुई कम तो बिजली होगी गुल इन 166 जलाशयों में 20 प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के बांध भी शामिल हैं. इनमें हिमाचल प्रदेश का गोबिंद सागर, पंजाब का थीन बांध, राजस्थान का राणा प्रताप सागर, ओडिशा का हीराकुंड, झारखंड का पंचेत हिल, गुजरात का उकाई और सरदार सरोवर तथा महाराष्ट्र का पेंच बांध प्रमुख हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन जलाशयों में पानी की कमी का असर केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. कई राज्यों में जलविद्युत परियोजनाएं जलाशयों के जलस्तर पर निर्भर करती हैं. उत्तर और मध्य भारत में राहत, बाकी क्षेत्रों में चिंता केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर भारत के 11 और मध्य भारत के 28 जलाशयों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर जल भंडारण दर्ज किया गया है. लेकिन पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के अधिकांश जलाशयों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. पूर्वी क्षेत्र के 27, दक्षिणी क्षेत्र के 47 और पश्चिमी क्षेत्र के 53 जलाशयों में जल भंडारण का स्तर पिछले साल की तुलना में कमजोर पाया गया है. यही कारण है कि इन क्षेत्रों में खेती और पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है. किन राज्यों में हालात बेहतर और कहां बढ़ी परेशानी राज्यवार आंकड़ों के अनुसार असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जलाशयों में पिछले साल की तुलना में बेहतर जल भंडारण दर्ज किया गया है. वहीं आंध्र प्रदेश, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जलाशयों का जलस्तर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है. इन राज्यों में अगर मानसून की रफ्तार नहीं बढ़ी तो जल संकट की आशंका गहरा सकती है. इस बार कमजोर मानसून का खतरा पिछले वर्ष मानसून ने 8 दिन पहले केरल में दस्तक दे दी थी और जून के दौरान इसकी प्रगति भी काफी अच्छी रही थी. इसका फायदा जलाशयों को मिला और शुरुआती दौर में ही उनमें पर्याप्त पानी पहुंच गया था. इसके उलट इस बार मानसून तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा और इसके बाद भी इसकी प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही. मौसम विभाग के अनुसार कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर जलाशयों के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है. खेती पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई और सिंचाई पर असर पड़ सकता है. जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होने की स्थिति में कई राज्यों को सिंचाई प्रबंधन के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं. इसके अलावा पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक उपयोग और जलविद्युत उत्पादन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. ऐसे में अब सबकी नजर मानसून की आगे की प्रगति और जुलाई में होने वाली बारिश पर टिकी हुई है, जो देश के जल भंडार और कृषि क्षेत्र के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है. Source link

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मानसून में ₹1 प्रति पौधे की दर से करें इस कड़वी चीज...

होमताजा खबरकृषि मानसून में ₹1 प्रति पौधे की दर से करें इस कड़वी चीज की खेती, कम खर्च, कम जोखिम Last Updated:June 20, 2026, 09:32 IST Best Crop For Monsoon Season: मानसून का सीजन यूं तो बहुत सी सब्जियों की खेती के लिए अच्छा होता है पर कई बार जल-जमाव और रोग लग जाने से कई फसलें चौपट भी हो जाती हैं. ऐसे में हरी मिर्च की खेती एक ऐसा विकल्प है जिसमें लागत कम आती है, फसल सुरक्षित रहने की संभावना ज्यादा होती है और हाथों-हाथ बिक्री से मुनाफा भी बढ़िया होता है. इसे एक रुपये प्रति पौधे की दर से खरीदा जा सकता है. देवघर. मानसून की दस्तक होने वाली है. खेत-खलिहान में किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं. बारिश का मौसम कई फसलों के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए यही बारिश कई बार परेशानी का कारण बन जाती है. अधिक बारिश होने पर खेतों में जलजमाव हो जाता है, जिससे टमाटर, बैंगन, फूलगोभी समेत कई सब्जियों की फसल प्रभावित हो जाती है. ऐसे में किसान ऐसी फसल की तलाश में रहते हैं, जिसमें लागत कम लगे और मुनाफा अच्छा मिले. तो आइए देवघर के कृषि एक्सपर्ट से जानते हैं कि मानसून में किस चीज की खेती करें किसान, जिससे बेहद कम लागत में अच्छा-खासा मुनाफा हो? क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञदेवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि मानसून के मौसम में हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. उन्होंने बताया कि इस समय किसान मिर्च की नर्सरी तैयार कर सकते हैं या फिर सरकारी संस्थानों से बेहद कम कीमत पर पौधे खरीद सकते हैं. कई जगहों पर किसानों को मात्र एक रुपये प्रति पौधे की दर से मिर्च के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं. ऐसे में किसान बहुत कम लागत में अपनी खेती की शुरुआत कर सकते हैं. मानसून की शुरुआती बारिश मिर्च के पौधों के विकास के लिए काफी लाभदायक होती है. हल्की और नियमित बारिश मिलने पर पौधों की बढ़वार तेजी से होती है और खेत में हरियाली छा जाती है. एक एकड़ में दो लाख तक का हो सकता है मुनाफाअंबिका जी बताते हैं कि अगर कोई किसान एक एकड़ खेत में हरी मिर्च की खेती करना चाहता है, तो लगभग पांच से छह हजार पौधों की जरूरत पड़ती है. अच्छी किस्म के पौधे, सही दूरी पर रोपाई और समय-समय पर देखरेख करने से उत्पादन काफी बेहतर होता है. मिर्च की खेती में सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी मांग पूरे साल बाजार में बनी रहती है. हरी मिर्च रोजाना घरों से लेकर होटल और ढाबों तक इस्तेमाल होती है, इसलिए किसानों को इसकी बिक्री को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती. मिर्च की खेती में करें जैविक खाद का प्रयोगउन्होंने बताया कि यदि किसान जैविक खाद, गोबर खाद और संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग करें, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती है. समय पर निराई-गुड़ाई और रोग-कीट नियंत्रण करने से फसल स्वस्थ रहती है. सही तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में किसानों को अच्छी आमदनी हो सकती है. कई किसान मिर्च की खेती से सालाना लाखों रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं. हर तरफ है मिर्च की खेती में फायदामिर्च की खेती का एक और बड़ा फायदा यह है कि अगर किसी कारणवश किसान हरी मिर्च को तुरंत बाजार में नहीं बेच पाते हैं, तो उसे सुखाकर भी बेचा जा सकता है. सूखी मिर्च की बाजार में अच्छी मांग रहती है और उसका दाम भी बेहतर मिल जाता है. यानी किसान के पास फसल बेचने के एक से अधिक विकल्प मौजूद रहते हैं. यही वजह है कि मिर्च की खेती को कम जोखिम वाली खेती भी माना जाता है. मिर्च की यह किस्म है उन्नतविशेषज्ञों का कहना है कि किसान उन्नत किस्मों का चयन करके उत्पादन और कमाई दोनों बढ़ा सकते हैं. वर्तमान समय में नांगवो की अजीता, वीएनआर, एडवांटा समेत कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनकी पैदावार अच्छी होती है और बाजार में मांग भी ज्यादा रहती है. ऐसे में मानसून के इस सीजन में अगर किसान थोड़ी वैज्ञानिक जानकारी और सही तकनीक के साथ हरी मिर्च की खेती करें, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन लेकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. बारिश के मौसम में जहां कई सब्जियां किसानों की चिंता बढ़ाती हैं, वहीं हरी मिर्च की खेती उनके लिए कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

झारखंड

प्राकृतिक खेती से पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार :...

भास्कर न्यूज|गुमला कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला (विकास भारती बिशुनपुर) द्वारा प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन योजना के अंतर्गत चयनित क्लस्टर रिसोर्स पर्सन के लिए द्वितीय चरण का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 15 से 19 जून तक आयोजित इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए सीआरपी प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। समापन समारोह के मुख्य अतिथि, जिला उद्यान पदाधिकारी, गुमला ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं है। यह पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित सीआरपी गांव स्तर पर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। वे योजना के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि, विकास भारती बिशुनपुर के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने कहा कि रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता बन गई है। मुख्य प्रशिक्षक एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. नीरज कुमार वैश्य ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक, दोनों प्रकार का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, विकास भारती के प्रतिनिधि, महिला सीआरपी, अन्य प्रतिभागी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन किसानों के सतत विकास, प्राकृतिक खेती के व्यापक प्रसार के संकल्प के साथ हुआ। Source link

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दुबई से मिला निर्देश; RSS ऑफिस में फेंका पेट्रोल बम:रांची के बाद...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। इसके बाद लखनऊ दहलाने की साजिश थी। दुबई में बैठे तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) के सदस्य आवेश राजपूत उर्फ राणा और सहजाद उर्फ शाहनवाज आलम उर्फ भट्ठी ने इसका फरमान जारी कर दिया था। इसके लिए अमन अंसारी उर्फ गोलू और सैफ अंसारी 17 जून को दोपहर ट्रेन से कानपुर रवाना भी हो गया था। लेकिन रांची पुलिस ने दोनों को गझंडी स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में अमन अंसारी ने यह खुलासा किया। उसने बताया कि सितंबर 2025 में वह नौकरी के लिए मुंबई गया था। वहां से जिशान नामक एजेंट ने दुबई भेज दिया। वहां मरमुम स्टार टेक्निकल सर्विस एलएलसी कंपनी में एसी बनाने का काम मिला। वीजा समाप्त होने के बाद कंपनी के सुपरवाइजर अहमद अली ने इसी साल उसे वापस मुंबई भेज दिया। फिर वहां से झारखंड लौट आया। यहां आने के बाद अहमद अली ने ही राणा से फोन पर संपर्क कराया। उसे आरएसएस कार्यालय पर बम फेंकने के लिए तीन लड़कों को तैयार करने के लिए कहा गया। इसकी एवज में पैसे देने की बात कही गई। दुबई से भेजा गया था फोटो और लोकेशन अमन ने पुलिस को बताया कि दुबई से राणा ने 15 जून की रात उसके वॉट्सएप पर रांची आरएसएस कार्यालय का फोटो और लोकेशन भेजा। पेट्रोल बम फेंक कर आरएसएस कार्यालय में आग लगाने का निर्देश दिया। तय योजना के अनुसार सैफ और अमन 16 जून की रात अपने दोस्त सायम सुजान के साथ आरएसएस कार्यालय के पास पहुंचा। सैफ ने पेट्रोल बम फेंका, जबकि अमन पूरी घटना का वीडियो बना रहा था। पहला बम नहीं फटा, जिसकी सूचना राणा को दी। सुनते ही राणा भड़क गया और दूसरा बम फेंकने को कहा। दूसरा बम फेंकने के बाद धमाका हुआ तो तीनों वहां से फरार हो गए। अगले दिन सुबह राणा ने फोन कर कहा-वहां से निकलकर कानपुर चले जाओ। कानपुर से लखनऊ जाकर दूसरी घटना को अंजाम देना है। मोबाइल अमन के पास, दुबई से वॉट्सएप चला रहा था राणा अमन अंसारी ने बताया कि अपने दोस्त हैदर अली से एक मोबाईल और सिमकार्ड 9334314899 लिया था। हैदर ने यह मोबाइल और सिमकार्ड लोहरदगा में रहने वाले एक युवक से गिरवी के रूप में रखा था। युवक ने पैसे देने में देर की तो हैदर ने वह मोबाइल अमन को बेच दिया। अमन इस नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों को फोन करने में करता था। जबकि दुबई में बैठा राणा 10 जून के बाद इसी नंबर से वाट्सएप अकाउंट बनाकर इस्तेमाल कर रहा था। वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए अमन ने ही राणा को ओटीपी उपलब्ध कराया था। पहले गोली चलवाने की थी योजना अमन ने पुलिस को बताया कि राणा और भट्ठी पहले गोली चलवाकर दहशत फैलाना चाहते था। इसके लिए पाकिस्तान से हथियार रांची भेजने का प्लान था। अमन 8 जून को टाटा-अमृतसर एक्सप्रेस से अमृतसर के लिए निकला। लेकिन डालटनगंज में आनंद विहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। वह 10 जून को अमृतसर पहुंचा और राजू मेहता के होटल में रुका। इसके बाद राणा ने फोन कर बताया कि हथियार उपलब्ध नहीं हो पाया है, वापस लौट जाओ। 12 जून को वह रवाना हुआ और दिल्ली से ट्रेन पकड़कर लोहरदगा आ गया। फिर प्लान बदला। राणा ने पेट्रोल बम से हमला करने का आदेश दिया। आरोपियों के ठिकाने पर एटीएस की छापेमारी झारखंड एटीएस की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह लोहरदगा स्थित सैफ अंसारी और अमन अंसारी के अलावा रांची में सायन सुजान के घर पर छापेमारी की। एटीएस की एक टीम ने लोहरदगा स्थित दोनों आरोपियों के घर की तलाशी ली। एक-एक सामान की जांच की। इसके बाद घर में मौजूद सैफ के बड़े भाई चांद अंसारी से लंबी पूछताछ भी की। आरोपी अमन की मां से भी कई सवाल किए। एटीएस की दूसरी टीम लोअर बाजार थाना क्षेत्र के कर्बला चौक के पथलकुदवा में सायम सुजान के घर पहुंची जहां घर के एक-एक कोने में गहन तलाशी ली। Source link

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इजरायल-अमेरिका का ब्रेकअप! अब डोनाल्‍ड ट्रंप के लिए ईरान-गल्‍फ अहम – america...

Last Updated:June 20, 2026, 08:40 IST Israel-America-Middle East News: अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर हमला शुरू किया था, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि इसका परिणाम क्‍या होगा. अब जब अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील हो चुका है तो पलड़ा तेहरान की तरफ ज्‍यादा झुका हुआ नजर आ रहा है. वहीं, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के लिए गल्‍फ रीजन में शांति अहम हो गया है, बजाय इसके कि इजरायल की हर बात मानी जाए. इजरायल के प्रति अमेरिका के रुख में इसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पश्चिम एशिया में आया यह बदलाव भारत के लिए फायदेमंद होने वाला है. ईरान जंग के वैसे तो कई दूरगामी प्रभाव पड़े हैं, लेकिन सबसे बड़ा परिणाम इजरायल के प्रति अमेरिकी रुख में आया बदलाव है. (फाइल फोटो/Reuters) Israel-America-Middle East News: ईरान जंग तमाम जद्दोजहद के बाद आखिरकार समाप्‍त हो गया है. अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील होने के बाद मिडिल ईस्‍ट में शांति बहाल हो गई है. दोतरफा हमले थम चुके हैं. शांति समझौते में ईरान की अधिकांश बातों को मान लिया गया. यहां तक कि लेबनान में इजरायल की तरफ से हमले नहीं किए जाएंगे, अमेरिका ने तेहरान की इस शर्त को भी मान लिया. वहीं, दूसरी तरफ इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा था. शांति समझौता होने से पहले और उसके बाद भी इजरायल ने हिजबुल्‍ला के लेबनान स्थित ठिकानों पर हमले जारी रखा. राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल की इसको लेकर तीखी टिप्‍पणियां कीं. ट्रंप ने लेबनान पर इजरायली हमले को पागलपन करार दिया था. वहीं, जेडी वेंस ने खुले तौर पर कहा कि पूरी दुनिया में एक डोनाल्‍ड ट्रंप ही हैं, जो इजरायल का साथ दे रहे हैं. वेंस ने इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू की कड़े शब्‍दों में आलोचना की है. पिछले कई दशकों में शायद यह पहला मौका है जब इजरायल के प्रति अमेरिकी रवैया इतना सख्‍त हुआ है. इसकी बड़ी वजह है कि ट्रंप सरकार गल्‍फ रीजन में किसी भी तरह से शांति और स्‍थायित्‍व का हिमायत कर रही है. इजरायल का कदम ट्रंप सरकार की इस नीति के खिलाफ जा रहा था. हालांकि, अब इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर हो गया है. गल्‍फ में शांति और स्‍थायित्‍व भारत के हित में है, क्‍योंकि यह क्षेत्र भारत के एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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