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झारखंड

देवघर में तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार:गूगल पे-फोन पे के नाम पर करते...

देवघर साइबर थाना पुलिस ने तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि पथरड्डा ओपी (सारठ) क्षेत्र के सुरा-सुरा जंगल में कुछ साइबर अपराधी सक्रिय हैं। सूचना के आधार पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। जिसमें सिराजुद्दीन अंसारी (20), चंदन कुमार दास (22) और निलोय कुमार दास (23) को दबोच लिया गया। गिरफ्तार सभी आरोपी देवघर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस ने मौके से सात मोबाइल फोन और सात सिम कार्ड भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। फर्जी कस्टमर केयर बनकर करते थे ठगी प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि और बैंक अधिकारी बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। ये अपराधी फ्लिपकार्ट, अमेजन, एयरटेल बैंकिंग, गूगल पे और फोन पे के नाम पर कॉल कर लोगों से संपर्क करते थे। खुद को अधिकारी बताकर ये लोगों से बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करते और फिर खातों से पैसे उड़ा लेते थे। इतना ही नहीं, आरोपी पीएम किसान योजना, बिजली बिल और आरटीओ चालान के नाम पर फर्जी एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने की भी कोशिश करते थे। एयरटेल बैंकिंग अधिकारी बनकर एयरटेल थैंक्स ऐप के जरिए भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था। 1930 पर शिकायत कराएं दर्ज देवघर पुलिस ने इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी उपलब्धि बताया है। बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की विस्तृत जांच की जा रही है, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन अपराधियों ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया है। साथ ही, आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान कॉलर को अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड करने से बचें। यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। Source link

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अमेरिका से मिला धोखा तो चट्टान की तरह भारत संग खड़ा हुआ...

India-France Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 12 साल के कार्यकाल में 7वीं बार फ्रांस दौरे पर हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने 10 साल के कार्यकाल में चार बार पेरिस का दौरा किया. उनसे पहले अटल बिहार वाजपेयी बतौर प्रधानमंत्री अपने करीब छह साल के कार्यकाल में दो बार फ्रांस गए. इस बीच वर्ष 2000 से अब तक नौ बार फ्रांसीसी राष्ट्रपतियों ने भारत का आधिकारिक दौरा किया. इसमें मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 2018 से अब तक चार बार भारत का दौरा कर चुके हैं. दोनों देशों के बीच ये उच्च स्तरीय दौरे यूं नहीं हुए हैं. दोनों के बीच भरोसा बनाने में दशकों का समय लगा है. तब जाकर भारत और फ्रांस इस मोड़ पर पहुंचे हैं. दोनों देशों के बीच रिश्तों को इस मोड़ पर पहुंचाने में एक सबसे अहम भूमिका 1998 की घटना की रही जब अमेरिका, कनाडा, जापान सहित तमाम बड़े यूरोपीय देशों ने भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिए लेकिन फ्रांस एक सच्चे मित्र की तरह सीना तानकर नई दिल्ली के साथ खड़ा रहा. इस परीक्षा में तपकर भारत और फ्रांस की दोस्ती अटूट बन गई. दरअसल, मई 1998 का समय था. राजस्थान के पोखरण का तपता रेगिस्तान. धरती के नीचे कुछ ऐसा हुआ जिसने दुनिया की भू-राजनीति को झकझोर दिया. भारत ने पांच परमाणु परीक्षण कर खुद को खुले तौर पर परमाणु शक्ति घोषित कर दिया. नई दिल्ली में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वाभिमान का क्षण माना गया, लेकिन वाशिंगटन, टोक्यो और कई पश्चिमी राजधानियों में इसे चुनौती के रूप में देखा गया. उस वक्त देश की बागडोर अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों में थी. कुछ ही दिनों में अमेरिका ने प्रतिबंधों की झड़ी लगा दी. आर्थिक सहायता रोकने से लेकर तकनीकी सहयोग सीमित करने तक कई कदम उठाए गए. जापान, कनाडा और कुछ अन्य देशों ने भी भारत से दूरी बनानी शुरू कर दी. ऐसा लग रहा था कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकेला पड़ जाएगा. लेकिन, इसी कठिन दौर में यूरोप से एक ऐसी आवाज उठी जिसने भारत को यह एहसास कराया कि सभी पश्चिमी देश एक जैसी सोच नहीं रखते. वह आवाज फ्रांस की थी. जब दुनिया सजा देने पर उतारू थी पोखरण-2 के बाद अधिकांश पश्चिमी देशों का तर्क था कि भारत को उसके फैसले की कीमत चुकानी चाहिए. भारत पर वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को चुनौती देने के आरोप लगाए जा रहे थे. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी. तभी फ्रांस भारत के साथ खड़ा हो गया. तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने साफ संकेत दिया कि भारत को अलग-थलग करना समाधान नहीं है. पेरिस का मानना था कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझे बिना केवल प्रतिबंध की भाषा बोलना व्यावहारिक नहीं होगा. फ्रांस ने यह भी महसूस किया कि दक्षिण एशिया की जटिल सुरक्षा परिस्थितियों को यूरोप के नजरिए से नहीं समझा जा सकता. यह वह समय था जब भारत का एक पड़ोसी पाकिस्तान परमाणु चाहत रखता था और दूसरी ओर पहले से परमाणु शक्ति बन चुका चीन था. वर्ष 2013 में नई दिल्ली राष्ट्रपति फ्रांस्क्वा ओलांद के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. फोटो- रायटर भारत के खिलाफ गोलबंदी वर्ष 1998 में भारत के परमाणु परीक्ष के बाद ब्रिटेन के बर्मिंघम में जी-8 शिखर सम्मेलन आयोजित हुई. उस बैठक में भारत के खिलाफ कड़े सामूहिक रुख की चर्चा हुई. अमेरिका और उसके कुछ सहयोगी देश नई दिल्ली पर दबाव बढ़ाना चाहते थे. यह जी-8 आज का जी-7 है. उस वक्त उस समूह में रूस भी शामिल था. इस कारण उसका नाम जी-8 था. अब इस समूह में रूस नहीं है. इसलिए इसका नाम जी-7 कर दिया गया. फ्रांस और रूस बने संकटमोचक कूटनीतिक गलियारों में यह संदेश साफ था कि भारत को पूरी तरह खलनायक बना दिया जाए. लेकिन, रूस और फ्रांस संकटमोचक बनकर उभरे. फ्रांस का मानना था कि संवाद के रास्ते खुले रहने चाहिए. यही वह क्षण था जब नई दिल्ली ने पहली बार महसूस किया कि पेरिस सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहने वाला मित्र भी हो सकता है. फिर दोनों देशों के रिश्ते में एक भरोसे की बहाली हुई. यह भरोसा समय के साथ रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच गया. अटल और शिराक की नई शुरुआत पोखरण परीक्षणों के कुछ ही महीनों बाद सितंबर 1998 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी फ्रांस पहुंचे. यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई. इसी यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस ने औपचारिक रूप से ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ की शुरुआत की. यह किसी पश्चिमी देश के साथ भारत की पहली रणनीतिक साझेदारी थी. आज जब भारत की रणनीतिक साझेदारियों की लंबी सूची दिखाई देती है, तो यह याद रखना जरूरी है कि इसकी शुरुआत फ्रांस के साथ हुई थी. पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों. फोटो- रायटर राजनीति और कूटनीति में दोस्ती अक्सर परिस्थितियों के साथ बदल जाती है. लेकिन भारत-फ्रांस संबंधों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 1998 में बना भरोसा आने वाले वर्षों में लगातार मजबूत होता गया. फ्रांस उन शुरुआती देशों में शामिल रहा जिसने भारत के साथ परमाणु मुद्दों पर उच्च स्तरीय संवाद शुरू किया. बाद में जब भारत को वैश्विक परमाणु व्यवस्था में स्वीकार्यता मिलने लगी, तब उसी विश्वास ने नई संभावनाओं के दरवाजे खोले. 2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) से छूट मिलने के बाद भारत के साथ असैन्य परमाणु समझौता करने वाला पहला देश भी फ्रांस ही बना. यह कोई संयोग नहीं था. इसकी नींव एक दशक पहले उस दौर में रखी जा चुकी थी जब भारत पर प्रतिबंधों का साया था. आज भी क्यों याद की जाती है 1998 की कहानी? आज भारत और फ्रांस रक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे अनेक क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं. राफेल लड़ाकू विमान से लेकर हिंद महासागर में सहयोग तक दोनों देशों के रिश्ते लगातार गहरे हुए हैं. लेकिन, इन संबंधों की असली ताकत किसी रक्षा सौदे या संयुक्त बयान में नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक स्मृति में छिपी है जब भारत कठिन दौर से गुजर रहा था और दुनिया

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खरौंधी : पेड़ के नीचे खड़ी महिला की वज्रपात से मौत

केतार | मुकुंदपुर गांव स्थित मायर टोला में शनिवार को आंधी और बूंदाबांदी में वज्रपात से एक भेड़ चरवाहे की मौत हो गई। मृतक की पालनगर गांव निवासी राम अवतार पाल (65 वर्ष) बताया गया। अवतार रोज की तरह भेड़ों को चराने निकला था। इसी दौरान आंधी और बूंदाबांदी के बीच तेज गर्जना के साथ हुए वज्रपात की चपेट में आने से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही केतार पंचायत के मुखिया प्रमोद कुमार घटनास्थल पर पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। भास्कर न्यूज | खरौंधी प्रखंड के सुंडी गांव में शनिवार दोपहर हुई तेज बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला एवं उसकी गाय की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है तथा परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतका की पहचान सुंडी गांव निवासी रीना देवी (30 वर्ष), पति प्रमोद गुप्ता, के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार करीब तीन बजे अचानक तेज बारिश, गरज और चमक के साथ मौसम बिगड़ गया। बारिश से बचने के लिए रीना देवी अपने घर के समीप स्थित एक महुआ पेड़ के नीचे खड़ी हो गईं। उनके साथ उनकी एक गाय भी पेड़ के नीचे खड़ी थी। इसी दौरान अचानक आकाशीय बिजली पेड़ के पास गिरी, जिसकी चपेट में आने से रीना देवी और गाय दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। स्थानीय लोगों के पहुंचने तक दोनों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतका के घर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने लगे।इस हृदयविदारक घटना से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व मुखिया राजेंद्र गुप्ता ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने मृतका के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए सरकार एवं प्रशासन से आपदा राहत के तहत उचित मुआवजा और सहायता राशि देने की मांग की है। Source link

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Illegal withdrawal case… Babus who have been ‘stuck’ in the education department...

Hindi News Local Jharkhand Ranchi Illegal Withdrawal Case… Babus Who Have Been 'stuck' In The Education Department For 3 Years Will Be Transferred. रांची2 घंटे पहले कॉपी लिंक रांची झारखंड के शिक्षा विभाग में वर्षों से एक ही कार्यालय और जिले में जमे लिपिकों को लेकर बड़ी खबर है। वेतन मद में अवैध निकासी के मामलों और लगातार मिल रही शिकायतों के बीच माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा राज्यभर के क्षेत्रीय, जिला और प्रखंड स्तरीय शिक्षा कार्यालयों में कार्यरत लिपिकों के तबादले को लेकर निर्देश जारी किए हैं। अब तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही कार्यालय में कार्यरत लिपिकों का तत्काल स्थानांतरण किया जाएगा, जबकि लंबे समय से एक ही जिले में जमे कर्मचारियों को भी दूसरे जिलों में भेजा जाएगा। माध्यमिक निदेशक राजेश प्रसाद ने भेजे पत्र में कहा है कि मुख्य सचिव के निर्देशों के आलोक में वित्तीय कार्यों से जुड़े कर्मचारियों के लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहने पर रोक लगाना जरूरी है। 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट निदेशालय भेजने के लिए कहा गया है। नए निर्देश के तहत अब स्थानांतरण की कार्रवाई केवल कार्यालय बदलने तक सीमित नहीं रहेगी। लंबे समय से एक ही जिले में कार्यरत कर्मचारियों के मामले में नई व्यवस्था लागू की गई है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। निर्देश के अनुसार, यदि कोई लिपिक पिछले 12 वर्षों के दौरान प्रतिनियुक्ति अवधि सहित कुल आठ वर्ष तक एक ही जिले में कार्यरत रहा है, तो उसका स्थानांतरण संबंधित प्रमंडल के दूसरे जिले में किया जाएगा। इसके अलावा, लगातार छह वर्षों से एक ही जिले में कार्यरत कर्मचारियों का तबादला भी अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल औपचारिक स्थानांतरण कर कर्मचारियों को दोबारा पुराने कार्यालय में पदस्थापित करने या प्रतिनियुक्ति के माध्यम से उसी स्थान पर वापस भेजने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाएगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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शू रैक पर थूकने को लेकर शुरू हुआ झगड़ा, नाबालिग लड़के ने...

Last Updated:June 14, 2026, 07:40 IST Pimpri Chindwad News: यह घटना पिंपरी के मोरवाड़ी इलाके में बुधवार रात हुई. बताया जा रहा है कि लिफ्ट के पास रखे शू-रैक पर थूकने को लेकर दोनों परिवारों के बीच कहासुनी हुई थी. देखते ही देखते झगड़ा बढ़ गया और आरोपियों ने इस दंपति पर हमला कर दिया. इस दौरान नाबालिग लड़के ने महिला के पति पर चाकू से कई वार कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. लिफ्ट के बाहर रखे शू-रैक पर थूकने की बात को लेकर शुरू हुए झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया. महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ में पड़ोसियों के बीच झगड़े का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां लिफ्ट के बाहर रखे शू-रैक पर थूकने की बात को लेकर शुरू हुए झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया. आरोप है कि झगड़े के दौरान एक नाबालिग लड़के और उसके परिवार के लोगों ने पड़ोसी दंपति पर चाकू से हमला कर दिया. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है. हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए News18 हिन्दी यह सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखा रहा. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह घटना पिंपरी के मोरवाड़ी इलाके में बुधवार रात हुई. बताया जा रहा है कि लिफ्ट के पास रखे शू-रैक पर थूकने को लेकर दोनों परिवारों के बीच कहासुनी हुई थी. देखते ही देखते झगड़ा बढ़ गया और आरोपियों ने इस दंपति पर हमला कर दिया. इस दौरान नाबालिग लड़के ने महिला के पति पर चाकू से कई वार कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने इस मामले में एक महिला और एक नाबालिग लड़के के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. महिला आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नाबालिग के संबंध में कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है. हालांकि, मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आया है. आरोपी महिला के पति योगेश उभयकर ने शिकायतकर्ता परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि शिकायतकर्ता परिवार पिछले कई दिनों से उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था. उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता पक्ष ने उनके 17 वर्षीय बेटे के घर में घुसकर मारपीट की थी. फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोप-प्रत्यारोप को ध्यान में रखते हुए संत तुकाराम नगर पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की सच्चाई पता लगाने में जुटी हुई है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mumbai,Maharashtra Source link

झारखंड

जहां ट्रैफिक सिग्नल नहीं, संगीत रोक लेता है कदम, पलामू का अनोखा...

Last Updated:June 14, 2026, 07:34 IST झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर में बना लता मंगेशकर चौक लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. नगर निगम ने भारत रत्न स्वर्गीय लता मंगेशकर के सम्मान में इस चौक का निर्माण कराया है, जहां विशाल वीणा की प्रतिकृति, हरियाली और भारतीय संस्कृति को दर्शाती कलाकृतियां स्थापित की गई हैं. आधुनिक स्पीकरों पर दिनभर लता जी के सदाबहार गीत बजते रहते हैं, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को सुकून का एहसास होता है. करीब 68 लाख रुपये की लागत से विकसित यह स्थान अब मेदिनीनगर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है और संगीत प्रेमियों को खास तौर पर आकर्षित कर रहा है. Palamu News : आज के इस आधुनिक दौर में जीवन 5जी तकनीक के युग में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन पुराने दौर के संगीतो का आकर्षण आज भी दिलों में बरकरार है. खासकर स्वर कोकिला स्वर्गीय लता मंगेशकर की मधुर आवाज आज भी लोगों को मन को भावुक कर देती है. जिसे लेकर झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर में एक ऐसा ही अनोखा चौक विकसित किया गया है, जहां से गुजरने वाले लोग केवल अपना सफर तय नहीं करते, बल्कि स्वर कोकिला के गीत की मधुर दुनिया में भी खो जाते हैं. यहां बजने वाले गीत राहगीरों को आंतरिक सुकून मिलता है और कुछ पल के लिए उन्हें भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर ले जाते हैं. यह चौक लता मंगेशकर को है समर्पितदरअसल, मेदिनीनगर नगर निगम द्वारा शहरवासियों को एक विशेष सौगात के रूप में एक चौक का निर्माण कराया है. यह चौक का नाम भारत रत्न और महान गायिका लता मंगेशकर के सम्मान में “लता मंगेशकर चौक” रखा गया है. चौक के केंद्र में विशाल वीणा की प्रतिकृति स्थापित की गई है, जो कि संगीत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों को भी बड़े खूबसूरती और आकर्षक स्वरूप दिया गया है ताकि यह स्थान केवल यातायात का केंद्र न होकर सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बने. भारतीय संस्कृति की मिलती है झलक चौक और उसके आसपास विकसित ग्रीन जोन में भारतीय संस्कृति और सभ्यता को पूर्ण रूप से दर्शाने वाली कई कलाकृतियां स्थापित की गई हैं. दीवारों पर कथक नृत्य की विभिन्न मुद्राओं को दर्शाती कलात्मक प्रतिकृतियां लगाई गई हैं, जो कि भारतीय शास्त्रीय कला की सुंदर झलक प्रस्तुत करती हैं. यह स्थान आने वाले लोगों को आधुनिकता के साथ-साथ भारतीय परंपराओं से भी जोड़ता है. 68 लाख की लागत से हुआ विकासइस परियोजना का निर्माण तत्कालीन नगर आयुक्त जावेद हुसैन के कार्यकाल में लगभग 68 लाख रुपये की लागत से कराया गया है. यूनियन चर्च के सामने चर्च रोड से लेकर सद्दीक मंजिल चौक तक पाथवे, फेबर ब्लॉक, आकर्षक लाइटिंग, हरियाली और पौधारोपण के माध्यम से पूरे क्षेत्र का सौंदर्यीकरण किया गया है. महिला कॉलेज, केजी स्कूल और गर्ल्स हॉस्टल तक फैले ग्रीन जोन को भी विकसित किया गया है. यहां लगाए गए आधुनिक स्पीकरों से दिनभर मधुर गीत सुनाई देते हैं. लोगों को मिलता है सुकूनस्थानीय निवासी मनोज कुमार घोष ने लोकल18 की बताया कि शाम के समय यहां का माहौल बेहद मनमोहक होता है. लोग परिवार और मित्रों के साथ यहां समय बिताने आते हैं. वहीं शंभू कुमार ने कहा कि यह मेदिनीनगर का सबसे खास और शांत स्थान बन गया है. लता मंगेशकर की सुरीली आवाज में बजते गीत लोगों को मानसिक शांति देता हैं. हालांकि स्थानीय लोग और राहगीर यहां शेड और पेयजल जैसी अतिरिक्त सुविधाओं की मांग भी कर रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी और बारिश के दौरान लोगों को और अधिक सुविधा आसानी से मिल सके. कुल मिलाकर लता मंगेशकर चौक आज मेदिनीनगर में संगीत, संस्कृति और सुकून का नया केंद्र बनकर उभर रहा है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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रांची भींगी… राज्य में ठनके से 8 की मौत; छह दिन के...

झारखंड में मानसून के प्रवेश के दूसरे ही दिन पूरा राज्य पानी-पानी हो गया। शनिवार को राज्य के 14 जिलों में झमाझम बारिश हुई, जबकि नौ जिलों में हल्की बूंदाबांदी हुई। सिमडेगा ऐसा जिला रहा, जहां मानसून नहीं बरसा। इस दौरान ठनका गिरने से राज्य में सात लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने कहा कि छह दिन तक सभी जिलों में 40-50 किमी की रफ्तार से हवा चलेगी। ठनका भी गिरेगा। मौसम विभाग ने इसके लिए यलो अलर्ट जारी किया है। राज्य में सबसे ज्यादा 24 एमएम बारिश पूर्वी सिंहभूम जिले के दरिसाई में हुई। वहीं रांची में दोपहर 12 बजे तेज बारिश शुरू हुई, जो दोपहर तीन बजे बूंदाबांदी में तब्दील हो गई। इसके बाद शाम छह बजे फिर बारिश का दौर शुरू हुआ। बादल और बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 3.5 डिग्री तक की बढ़ोतरी हुई। ठनके से इनलोगों की गई जान आगे क्या…19 जून तक बारिश: 14 जून : राज्य में कुछ स्थानों पर बारिश-वज्रपात। 15 जून : गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार को छोड़कर अन्य जिलों में हल्की बारिश 16 जून : हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा और चतरा को छोड़ अन्य जिलों में अच्छी बारिश {17 जून : गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार को छोड़कर अन्य शेष हिस्सों में बारिश {18-19 जून : राज्य के कई हिस्सों में बारिश। ठनके से पिठोरिया के काटमकुली में निराशो देवी की मौत हो गई। उधर,गढ़वा के मुकुंदपुर गांव में राम अवतार (65) और सुंडी गांव में रीना देवी (30) की मौत हो गई। चतरा में गीता देवी, कोडरमा के मरकच्चो में अभिनीत कुमार (10), धनवार के घोसकेडीह में अभिजीत राज (10) और जामताड़ा में शोएब अंसारी (10) की जान चली गई। वहीं राजनगर के सांदिरडीह में ठनके से संजय देवगम की मौत हो गई। Source link

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झारखंड में वज्रपात और तेज बारिश का कहर:मानसून के दूसरे दिन 8...

झारखंड में मानसून के प्रवेश के दूसरे ही दिन मौसम ने भयावह रूप ले लिया। शनिवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश और वज्रपात की घटनाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। 14 जिलों में झमाझम बारिश हुई, जबकि नौ जिलों में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। सिमडेगा एकमात्र ऐसा जिला रहा, जहां बारिश नहीं हुई। इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में कुल 8 लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने अगले छह दिनों तक तेज हवा, मेघ गर्जन और वज्रपात की आशंका जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वी सिंहभूम में सबसे अधिक बारिश शनिवार को सबसे अधिक 24 मिमी बारिश पूर्वी सिंहभूम जिले के दरिसाई में दर्ज की गई। राजधानी रांची में दोपहर 12 बजे तेज बारिश शुरू हुई, जो तीन बजे तक बूंदाबांदी में बदल गई। शाम छह बजे फिर से बारिश का दौर शुरू हुआ। बादल और लगातार बारिश के कारण अधिकतम तापमान में करीब 3.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। अन्य प्रमुख शहरों में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिससे मौसम सुहावना तो हुआ, लेकिन वज्रपात ने चिंता बढ़ा दी। वज्रपात से गई 8 लोगों की जान राज्य के विभिन्न जिलों में वज्रपात की घटनाओं ने कई परिवारों को गहरा आघात दिया है। पिठोरिया के काटमकुली में निराशो देवी की मौत हो गई, जबकि गढ़वा के मुकुंदपुर में राम अवतार और सुंडी गांव में रीना देवी की जान चली गई। चतरा में गीता देवी, कोडरमा के मरकच्चो में अभिनीत कुमार, धनवार के घोसकेडीह में अभिजीत राज और जामताड़ा में शोएब अंसारी की भी मौत हो गई। इसके अलावा सरायकेला-खरसावां के राजनगर क्षेत्र में संजय देवगम की वज्रपात से मृत्यु हो गई। कई अन्य लोग झुलसकर घायल भी हुए हैं। 19 जून तक बारिश का रहेगा दौर मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में 19 जून तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 14 जून को कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात की संभावना है। 15 जून को उत्तर-पश्चिमी जिलों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। 16 जून को कुछ जिलों को छोड़कर शेष हिस्सों में अच्छी बारिश के आसार हैं। 17 जून से 19 जून तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और बारिश होती रहेगी। विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। Source link

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दुधवा घूमने का बना रहे हैं प्लान, तो यहां आने से पहले...

Last Updated:June 14, 2026, 06:42 IST लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व से पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. पार्क प्रशासन ने पर्यटकों की बढ़ती संख्या और शानदार टाइगर साइटिंग को देखते हुए पर्यटन सत्र को 15 जून के बजाय 30 जून तक बढ़ाने का फैसला किया है. इस दौरान पर्यटक बाघ, एक सींग वाले गैंडे, बारासिंघा, जंगली हाथी और अन्य दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक वातावरण में देखने का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे. लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व से पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पर्यटकों की बढ़ती संख्या और वन्य जीवों की शानदार साइटिंग को देखते हुए मौजूदा पर्यटन सत्र को 15 जून के बजाय अब 30 जून तक बढ़ाने का निर्णय लिया है. इस फैसले के बाद देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अगले पंद्रह दिनों तक दुधवा की जैव विविधता और वन्य जीवों का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे. इस बार पर्यटन सत्र के दौरान दुधवा में पर्यटकों की संख्या और राजस्व दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यही वजह है कि पार्क प्रशासन ने पर्यटकों की मांग और उत्साह को देखते हुए पर्यटन अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है. क्यों है दुधवा टाइगर रिजर्व खास दुधवा टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख वन्य जीव अभयारण्यों में गिना जाता है. प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और दुर्लभ वन्य जीवों के कारण यह पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. हर वर्ष बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं इस वर्ष भी पर्यटन सत्र के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटकों ने दुधवा का रुख किया पार्क प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस बार हजारों अधिक पर्यटक दुधवा पहुंचे हैं, जिससे राजस्व में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. जंगल सफारी से करें रोमांचकारी अनुभव इस पर्यटन सत्र में लगभग हर सप्ताह पांच दिनों तक पर्यटकों को एक या एक से अधिक बाघ देखने को मिले हैं. जंगल सफारी के दौरान टाइगर का सहज रूप से दिखाई देना पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचकारी अनुभव साबित हुआ है. यही कारण है कि सोशल मीडिया पर भी दुधवा की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए, जिससे अन्य पर्यटकों का आकर्षण भी बढ़ा सिर्फ बाघ ही नहीं, बल्कि दुधवा में मौजूद अन्य दुर्लभ वन्य जीव भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. सफारी के दौरान पर्यटकों को एक सींग वाला गैंडा, जंगली हाथी, भालू, बारासिंघा, हिरण, सांभर और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के दर्शन हुए हैं. विशेष रूप से दुधवा का बारासिंघा और गैंडा देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं. इन दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलने से पर्यटक काफी उत्साहित नजर आए. कब बंद होगा  लोकल 18 से बातचीत करते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एस. राजा मोहन ने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराधा वेमुरी के निर्देश पर इस वर्ष दुधवा का पर्यटन सत्र 30 जून से बंद कर दिया जाएगा. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh Source link

झारखंड

जिसका डर था वही हुआ, मानसून तो देने लगा धोखा, लेकिन आफत...

Today Weather News Live: मौसम वैज्ञानिक सुपर अल नीनो को लेकर जो डर दिख जता रहे थे, वह अब सच होता दिख रहा है. इस अल नीनो का असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर साफ दिखने लगा है, जिसकी रफ्तार उम्मीद से धीमी बनी हुई है. जून का आधा महीना गुजरने को है, लेकिन मानसून अभी भी देश के कई हिस्सों तक पूरी ताकत के साथ नहीं पहुंच पाया है. आम तौर पर इस वक्त तक मानसून पूरे पश्चिम बंगाल, ओडिश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को पार कर चुका होता है. हालांकि मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, मानसून अभी तक बिहार-झारखंड के कुछ ही हिस्सों तक पहुंच पाया है. हालांकि मानसून की इस धीमी चाल का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि मौसम शांत है. उल्टा देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, आंधी, बिजली और लू का ऐसा मिश्रित असर देखने को मिल रहा है, जिसने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आज पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और कुछ अन्य इलाकों में तेज आंधी-तूफान और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है. दूसरी ओर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दक्षिण छत्तीसगढ़ के और इलाकों में मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है. लेकिन मानसून की मौजूदा सुस्ती ने उत्तर भारत के बड़े हिस्से को अभी भी इंतजार में रखा हुआ है. FILE PHOTO: School children play on a flooded street during heavy monsoon rains in Mumbai July 23, 2013. Torrential rains lashed Mumbai overnight, disrupting rail traffic and causing traffic chaos in many parts of the city, local media reported. REUTERS/Vivek Prakash/File Photo वहीं देशभर में मौसम को प्रभावित करने वाले प्रमुख सिस्टमों में हरियाणा और आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, पाकिस्तान और राजस्थान के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण तथा बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत के ऊपर सक्रिय सिस्टम शामिल हैं. इन्हीं के प्रभाव से कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिलेंगी. पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में बादलों का दबदबा मानसून की धीमी प्रगति के बावजूद पूर्वोत्तर भारत में बारिश का सिलसिला लगातार जारी है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 14 जून को भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है.वहीं ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मौसम सक्रिय रहेगा. बिहार के कुछ जिलों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. ओडिशा में भारी बारिश के साथ उमस भरा मौसम लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है. दक्षिण भारत में मानसून की दस्तक तेज केरल, तटीय कर्नाटक और तमिलनाडु में मानसूनी बादल लगातार सक्रिय हैं. केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. तेलंगाना में भी गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है. मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण भारत में मानसून की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और आने वाले दिनों में यहां बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं. दिल्ली में फिर होगी गर्मी की वापसी दिल्लीवालों को फिलहाल मानसून के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से राजधानी में आंशिक बादल और कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है. लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिकने वाली. IMD के अनुसार अगले पांच दिनों में दिल्ली के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है. यानी राजधानी में एक बार फिर गर्मी और उमस लोगों की परीक्षा ले सकती है. दिल्ली-एनसीआर में शाम के समय तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन मानसून जैसी ठंडी फुहारों का इंतजार अभी जारी रहेगा. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कहीं राहत, कहीं सावधानी उत्तर प्रदेश में मौसम का असर क्षेत्रवार अलग-अलग रहेगा. पूर्वी यूपी में बादल सक्रिय रहेंगे और कई जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है. कुछ जगहों पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं. वहीं पश्चिमी यूपी में मौसम अपेक्षाकृत शांत रहेगा, हालांकि हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही गर्मी को कुछ हद तक कम कर सकती है. किसानों के लिए यह मौसम राहत लेकर आ सकता है. उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में बारिश का दौर जारी रहेगा. कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. चारधाम यात्रा मार्गों पर फिसलन और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. बिहार और झारखंड में बारिश से मिलेगी राहत बिहार में 14 जून को मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है. राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है. कुछ जिलों में भारी बारिश भी हो सकती है. झारखंड में भी बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा. इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. हालांकि मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली को लेकर सतर्क रहने को कहा है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में आंधी का अलर्ट पूर्वी राजस्थान में मौसम विभाग ने 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी जारी की है. पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी धूल भरी आंधी और गरज-चमक देखने को मिल सकती है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी तेज हवाओं और बारिश की संभावना है. मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. महाराष्ट्र में लू अभी बरकरार देश के कई हिस्से जहां बारिश का इंतजार कर रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में गर्मी अभी भी लोगों को परेशान कर रही है. मौसम विभाग ने इन इलाकों में हीटवेव की चेतावनी जारी की है. कोंकण और गोवा में हालांकि उमस के साथ हल्की बारिश देखने को मिल सकती है, लेकिन तापमान सामान्य से ऊपर बना रहेगा. कुल मिलाकर मानसून की रफ्तार भले

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