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झारखंड

चतरा में लापता युवक का शव बालू ढेर से बरामद:परिजनों ने हत्या...

चतरा जिले के राजपुर थाना क्षेत्र में दो दिनों से लापता 18 वर्षीय युवक प्रमोद कुमार का शव बरामद होने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक गड़िया गांव निवासी देवलाल यादव का पुत्र था। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 9 बजे प्रमोद घर में खाना खा रहा था, तभी उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन पर बात करने के बाद वह परिजनों से यह कहकर घर से निकला कि उसका एक दोस्त गड़िया पुल के पास मिलने आ रहा है। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा और उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ हो गया। शनिवार सुबह जब परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की तो उसकी मोटरसाइकिल गड़िया नदी के पुल पर लावारिस हालत में खड़ी मिली, जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई। नदी किनारे बालू के नीचे मिला शव पुलिस को सूचना मिली कि कान्हाचट्टी प्रखंड के गंभारिया स्थित नदी किनारे बालू के ढेर के नीचे एक शव दबा हुआ है। मौके पर पहुंची पुलिस ने बालू हटवाकर शव को बाहर निकाला, जिसकी पहचान प्रमोद कुमार के रूप में हुई। शव मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम पसर गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्रमोद की हत्या कर साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को बालू में दबाया गया है। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल है। जांच में जुटी पुलिस, कई संदिग्ध हिरासत में घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। सदर एसडीपीओ सन्नी वर्धन के नेतृत्व में पुलिस बल ने इलाके में कैंप कर लिया है। राजपुर थाना प्रभारी संदीप कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए चतरा सदर अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने प्रमोद के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगालनी शुरू कर दी है। संदेह के आधार पर कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह मामला आपसी रंजिश का है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा, इसका खुलासा जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा। Source link

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मिर्जापुर का हींग वाला चाट, खाने के लिए लगती है लाइन, भदोही...

Last Updated:June 08, 2026, 09:17 IST Mirzapur famous Hing Chaat: हींग के चाट बनाने वाले धीरज गुप्ता ने बताया कि पिताजी के समय से यह दुकान चली आ रही है. पिताजी के द्वारा ही हींग वाले चाट के लिए मसाले को तैयार किया जाता है. इसमें शुद्ध हींग का प्रयोग होता है. इसके साथ ही गरम मसाला और कुछ सीक्रेट मसाले होते है जो घर पर पिताजी तैयार करते है. उनका उपयोग किया जाता है. उसी से हम लोग हींग के छोले और चाट बनाते है.  यह लोगों को खूब पसंद आ रहा है. मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में अगर आप भी स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं तो हींग वाले चाट बेहद ही खास है. 10 सालों से मिर्जापुर के लोगों की यह पसंद बना हुआ है. हींग वाले चार्ट को बनाने के लिए किसी खास सामान का नहीं बल्कि कुछ सीक्रेट मसाले का उपयोग किया जाता है. शुद्धता का ध्यान रखते हुए घर पर तैयार किया जाता है जो इसके स्वाद कई गुना तक बढ़ा देता है. स्वाद की दीवानगी ऐसी है कि पूर्वांचल भर से लोग इसे खाने के लिए पहुंचते है. हींग के चाट बनाने वाले धीरज गुप्ता ने बताया कि पिताजी के समय से यह दुकान चली आ रही है. पिताजी के द्वारा ही हींग वाले चाट के लिए मसाले को तैयार किया जाता है. इसमें शुद्ध हींग का प्रयोग होता है. इसके साथ ही गरम मसाला और कुछ सीक्रेट मसाले होते है जो घर पर पिताजी तैयार करते है. उनका उपयोग किया जाता है. उसी से हम लोग हींग के छोले और चाट बनाते है.  यह लोगों को खूब पसंद आ रहा है. 30 रुपए कुल्हड़ के दर से इसकी बिक्री की जा रही है. 10 सालों से यह दुकान लग रही है और यहां पर काफी संख्या में लोग कुल्हड़ वाले हींग चाट का स्वाद लेने के लिए पहुंच रहे है. स्वाद बेहद ही लाजवाबहींग वाली चाट खाने के लिए आए ग्राहक अनिल ने बताया कि हम भदोही जिले के रहने वाले है. मिर्जापुर जिले में जब भी आते है. इनके चाट के स्वाद का आनंद लिए बगैर नहीं जाते है. स्वाद बेहद ही लाजवाब है और पैसा भी बेहद कम है. ऐसा नहीं है कि पैसा बहुत ज्यादा ले रहे है. स्वाद के अनुसार पैसे का दाम कम ही है. शाम को 5 बजे दुकान लगाते हैं. हमें इंतजार रहता है कि कब यह दुकान खोलेंगे और कब हींग वाली चाट खाने का मौका मिलेगा. काफी अच्छे तरीके से तैयार करते है जो इसे बेहतर बनाता है. खाने के लिए लगाना पड़ता है नंबरआशीष ने बताया कि 10 वर्षों से हींग वाले छोले और चाट का आनंद उठा रहे है. दुकान जब से खुली हुई है तब से यहां पर आ रहे है. कारण यह है की पहली बार जब दुकान पर आए तो स्वाद बेहद ही अच्छा लगा, इसके बाद हम लगातार आते है. हींग वाले बोले और चाट खाने के बाद भले ही पेट भर जाता हो लेकिन मन नहीं भरता है. इसे बार-बार खाने का जी करता है. यही वजह है कि दुकान पर काफी भीड़ लगी रहती है और नंबर लगाने के बाद ही बोले और चाट नसीब हो पाता है. About the Author Manish Rai काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh Source link

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तेलंगाना शिफ्ट होंगे कांग्रेस के सभी 16 विधायक! झारखंड राज्यसभा चुनाव में...

Last Updated:June 08, 2026, 08:56 IST Jharkhand Rajya Sabha Chunav: झारखंड की दो सीटों पर होने जा रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल बेहद तेज हो गई है. उद्योगपति परिमल नाथवानी की निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर एंट्री और बीजेपी नेता गौरव वल्लभ की सक्रियता ने सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ गठबंधन की धड़कनें बढ़ा दी हैं. सूत्रों की खबर के मुताबिक, कांग्रेस अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें तेलंगाना ले जाने की योजना बना रही है. झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा कदम, 16 विधायकों को तेलंगाना भेजने की तैयारी रांची. झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच कांग्रेस अपने सभी 16 विधायकों को तेलंगाना भेजने की तैयारी में जुट गई है. सूत्रों के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए 18 जून को होने वाले मतदान तक कांग्रेस विधायक तेलंगाना में रह सकते हैं. हालांकि पार्टी की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. दरअसल, राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपने सभी 16 विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है. इसी कड़ी में उन्हें तेलंगाना भेजने की तैयारी की जा रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए उठाया जा रहा है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सभी कांग्रेसी विधायक वोटिंग वाले दिन यानी 18 जून तक तेलंगाना के एक रिसॉर्ट में ही रहेंगे. दरअसल, झारखंड की राजनीति में इस बाड़ेबंदी की सुगबुगाहट ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी खेमा क्रॉस वोटिंग की प्रबल संभावनाओं से बुरी तरह डरा हुआ है. विधानसभा की दलीय स्थिति और आंकड़ों का गणित बता दें कि झारखंड विधानसभा में वर्तमान में ‘इंडिया’ गठबंधन के पास कुल 56 सदस्यों का एक भारी-भरकम बहुमत है. इस सत्तारूढ़ गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के चार और भाकपा (माले) लिबरेशन के दो सदस्य शामिल हैं. दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास केवल 24 विधायक हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 21 सदस्य और लोजपा (रामविलास), आजसू (AJSU) और जदयू (JDU) के एक-एक विधायक शामिल हैं. इसके अतिरिक्त सदन में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक मौजूद है. इस संख्या बल के हिसाब से दोनों सीटें ‘इंडिया’ गठबंधन के खाते में जानी तय लग रही हैं, लेकिन परिमल नाथवानी के लिए भाजपा समर्थित 9 विधायकों के साथ एनडीए के 12 विधायकों के प्रस्तावक बनने की खबरों ने कांग्रेस को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है. महामहागठबंधन की बैठक और एकजुटता का दावा राज्यसभा चुनाव में संभावित फूट की खबरों के बीच रविवार को रांची में ‘इंडिया’ गठबंधन के बड़े नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्यसभा सांसद सरफराज अहमद ने गठबंधन में किसी भी तरह के मतभेद से साफ इनकार किया. उन्होंने दावा किया कि हमारा महागठबंधन पूरी तरह से एक है और दोनों प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित की जाएगी. ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दोनों उम्मीदवार भारी मतों से चुनाव जीतेंगे. कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव, मंत्री संजय यादव, मंत्री सुदिव्य सोनू, झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और विनोद पांडे ने संयुक्त रूप से मीडिया को बताया कि गठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय है और दोनों उम्मीदवार तय समय पर एकजुटता के साथ आगे बढ़ेंगे. कांग्रेस नेता बोले- 56 विधायक हमारे पास, क्रॉस वोटिंग नहीं इस बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने INDIA गठबंधन की एकजुटता का दावा किया है. उन्होंने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन ने सभी को एकजुट रहने का मूल मंत्र दिया है. हमारे पास संख्या बल है कि हम दोनों सीट जीतेंगे. 56 आंकड़ा चाहिए और हमारे पास 56 विधायक हैं. झामुमो और कांग्रेस के संबंध पर पहले उठे सवालों पर उन्होंने कहा, थोड़ा बहुत आपस में होता है। हमारी एक ही मंशा है कि सांप्रदायिक ताकतों को कैसे रोका जाए. हमारे गठबंधन का लक्ष्य एक है. क्रॉस वोटिंग पर प्रदीप यादव ने दो टूक कहा, पूर्व में क्रॉस वोटिंग हुई है, पर इस बार 0.1% भी ऐसे आसार नहीं हैं, हमलोग एकजुट हैं. भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, पॉलिटकल  टूर की जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर भाजपा हाथ-पैर मारेगी तो हमें घेराबंदी करनी होगी. भाजपा को उम्मीदवार नहीं देना चाहिए, क्योंकि उसके पास संख्या बल नहीं है. दोनों प्रत्याशियों का आज होगा नामांकन गठबंधन के फैसलों के मुताबिक ‘इंडिया’ गठबंधन के दोनों प्रत्याशियों का नामांकन आज होने जा रहा है. इसमें झामुमो (JMM) की तरफ से पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम पर्चा दाखिल करेंगे, तो वहीं कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी माने जाने वाले प्रणव झा मुख्य चुनावी रण में उतर रहे हैं. हालांकि नेताओं के बयानों में एकजुटता दिख रही है, लेकिन कांग्रेस आलाकमान को डर है कि नाथवानी की मजबूत पकड़ और चुनावी मैनेजमेंट के आगे उसके विधायकों का मन बदल सकता है. यही वजह है कि नामांकन की प्रक्रिया पूरी होते ही कांग्रेस नेतृत्व विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद भेजने की तैयारी है. दूसरी सीट पर बनी हुई है दिलचस्पी हालांकि, महागठबंधन के नेता दोनों उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन चुनावी गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने दूसरी सीट को दिलचस्प बना दिया है. इसी वजह से सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं. अब निगाहें आज को होने वाले नामांकन और उसके बाद की राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं. मतदान 18 जून को होगा, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि चुनावी रणनीतियों का असर कितना पड़ा और किस दल का गणित सबसे सटीक साबित हुआ. 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गिरिडीह से शुरू हुई झारखंड टी-20 लीग की ट्राफी यात्रा:रांची टाइटंस के...

झारखंड टी-20 लीग की बहुप्रतीक्षित ट्रॉफी यात्रा गिरिडीह से भव्य तरीके से शुरू हुई। रांची टाइटंस टीम की ट्रॉफी को सलूजा गोल्ड के कॉर्पोरेट कार्यालय से विधिवत रवाना किया गया। इस दौरान पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ट्रॉफी यात्रा जैसे-जैसे शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरी, क्रिकेट प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ती रही। जगह-जगह लोगों ने ट्रॉफी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके साथ तस्वीरें खिंचवाकर अपने उत्साह का इजहार किया। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और सड़कों पर लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को एक बड़े उत्सव का रूप दे दिया। 10 जून से रांची में शुरू होगी ऐतिहासिक लीग झारखंड क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आयोजित हो रही यह पेशेवर टी-20 लीग 10 जून से रांची के क्रिकेट स्टेडियम में शुरू होगी। रांची टाइटंस टीम को सलूजा गोल्ड ने खरीदा है, जिससे इस टीम को मजबूत कॉर्पोरेट समर्थन मिला है। ट्रॉफी यात्रा राज्य के विभिन्न जिलों का भ्रमण करते हुए पुनः रांची पहुंचेगी। जहां लीग का उद्घाटन मुकाबला खेला जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इस लीग का उद्देश्य राज्य के क्रिकेट को नई दिशा देना और स्थानीय खिलाड़ियों को बड़ा मंच उपलब्ध कराना है। गिरिडीह में ट्रॉफी ने कई प्रमुख मार्गों और महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण किया, जहां लोगों ने पूरे उत्साह के साथ इसका स्वागत किया। युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार, महापौर प्रमिला मेहरा, डिप्टी महापौर सुमित कुमार तथा सलूजा गोल्ड के चेयरमैन अमरजीत सिंह सलूजा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अमरजीत सिंह सलूजा ने कहा कि यह लीग झारखंड क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक पहल है, जो युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। वहीं पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने इसे राज्य के लिए गर्व का विषय बताया और कहा कि गिरिडीह की भागीदारी से यहां के खेल प्रेमियों में विशेष उत्साह है। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह लीग झारखंड के क्रिकेटरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और राज्य में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। Source link

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राज्यसभा चुनाव; BJP ने अब तक नहीं खोले पत्ते:आज महागठबंधन से बैजनाथ...

झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आज नामांकन का अंतिम दिन है। बावजूद इसके भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर जारी है। इसी बीच आज ही मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने अपने कक्ष में भाजपा विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। जिसमें उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, झामुमो और कांग्रेस ने अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। आज झामुमो के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी नामांकन दाखिल करेंगे। परिमल नाथवानी को एनडीए का समर्थन मिलने की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। बैजनाथ दो और प्रणव एक सेट में करेंगे नामांकन बैजनाथ राम के लिए दो सेट में नामांकन पत्र तैयार किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक सेट पर 10-10 विधायकों के हस्ताक्षर शामिल हैं। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा का एक सेट में नामांकन पत्र तैयार किया गया है। जिसमें कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, उपनेता राजेश कच्छप, राधाकृष्ण किशोर, शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह, नमन विक्सल कोनगाड़ी, भूषण बाड़ा, सुरेश बैठा और कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह के नाम शामिल हैं। कांग्रेस की ओर से दूसरे सेट में झामुमो विधायकों के हस्ताक्षर भी जोड़े जाने की तैयारी है। उल्लेखनीय है कि अब तक इस चुनाव के लिए कुल छह उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र खरीदे हैं। जिनमें झामुमो के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा, भाजपा के गौरव वल्लभ और निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में परिमल नाथवानी, साईं विजय रेड्डी और रवि कुमार यादव शामिल हैं, लेकिन रविवार देर रात तक भाजपा की ओर से उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं होने से सस्पेंस बरकरार है। मुख्यमंत्री बोले-एकजुट होकर गठबंधन प्रत्याशी को जिताएं कांग्रेस के पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा रविवार को फिर मुख्यमंत्री से मिले। इन नेताओं से मुलाकात के बाद हेमंत सोरेन ने देर शाम में महागठबंधन के सभी 56 विधायकों को अपने आवास पर बुलाया। बैठक में मंत्री इरफान अंसारी, चमरा लिंडा और माले विधायक अरूप चटर्जी नहीं पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में चुनाव की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी से एकजुट होकर गठबंधन के दोनों प्रत्याशियों को जिताने का आह्वान किया। तय हुआ कि दोनों प्रत्याशी बैजनाथ राम व प्रणव झा सोमवार सुबह 11 बजे नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन दल के नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में दोनों प्रत्याशी भी मौजूद थे। परिमल नाथवानी का दावा- हमारे पास 10 प्रस्तावक निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर पार्टियों की नींद उड़ा दी है। नाथवानी के आने से राज्यसभा चुनाव काफी रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। वे रविवार रात करीब 12:30 बजे रांची पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे सोमवार को दोपहर एक से दो बजे के बीच नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस दौरान उनके साथ 10 प्रस्तावक होंगे। लेकिन प्रस्तावक कौन होंगे, यह बताने से इनकार कर दिया। जब उनसे भाजपा का समर्थन मिलने संबंधी सवाल पूछा गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली। ये समीकरण बन रहे एक सीट पर झामुमो की जीत तय महागठबंधन के पास कुल 56 1- विधायक हैं। इनमें झामुमो के 34 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 28 वोट चाहिए। ऐसे में एक सीट पर झामुमो की जीत तय है। अपने प्रत्याशी को जिताने के बाद भी झामुमो के पास छह वोट बचेंगे। महागठबंधन एकजुट रहा तो कांग्रेस जीतेगी कांग्रेस के 16 विधायक 2-हैं। झामुमो के प्रथम वरीयता के 28 वोट के बाद छह वोट बचते हैं। राजद के चार व माले के दो विधायक हैं। सभी एकजुट रहे तो कांग्रेस की जीत तय है। क्रॉस वोटिंग हुई तो नाथवानी जीत जाएंगे भाजपा ने प्रत्याशी नहीं उतारा 3- है। पूर्व सांसद परिमल नाथवानी को समर्थन दे सकती है। एनडीए में भाजपा के 21 और आजसू-जदयू व लोजपा के एक-एक वोट हैं। यानी कुल 24 वोट। यानी जीत से चार वोट कम। क्रॉस वोटिंग हुई तो नाथवानी जीत सकते हैं। Source link

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कांग्रेस हाईकमान हुआ ‘ताकतवर’ तो फिर पुरानी बातें क्यों याद दिला रहे...

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की सियासत में नई हलचल मचा दी है. उनके बयानों से एक बार फिर सचिन पायलट और उनके बीच की पुरानी खींचतान चर्चा के केंद्र में आ गई है. दिलचस्प बात यह है कि यह विवाद ऐसे समय में दो उभरा है, जब कांग्रेस में संगठनात्मक तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता और राहुल गांधी की सक्रिय भूमिका के चलते पार्टी आलाकमान पहले से ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर गहलोत ने 2022 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव और राजस्थान के राजनीतिक संकट का मुद्दा फिर क्यों उठाया? क्या यह केवल अपनी छवि साफ करने की कोशिश है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? अशोक गहलोत ने जयपुर में पत्रकारों से बातचीत में साफ कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाना चाहता तो वह कभी इनकार नहीं करते. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद बेहद सम्मानजनक है और इस पद पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल जैसे दिग्गज रह चुके हैं. गहलोत ने दावा किया कि उस समय ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं कि उनकी छवि खराब हो गई और लोगों के बीच यह धारणा बन गई कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे. 2022 का वह संकट, जिसने बदल दी थी राजनीति पहली नजर में यह बयान सिर्फ अतीत की सफाई जैसा लग सकता है, लेकिन जब इसे राजस्थान कांग्रेस की मौजूदा राजनीति और पार्टी के अंदर चल रही संभावित हलचलों के संदर्भ में देखा जाए तो इसके कई राजनीतिक अर्थ निकलते हैं. दरअसल, सितंबर 2022 कांग्रेस के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ था. उस समय सोनिया गांधी के बाद पार्टी को नया अध्यक्ष चुनना था और अशोक गहलोत इस पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे. तब यह लगभग तय माना जा रहा था कि गहलोत दिल्ली जाकर संगठन की कमान संभालेंगे और राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन होगा. उस समय सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज थी. लेकिन इसी दौरान राजस्थान में ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने पूरे समीकरण बदल दिए. गहलोत समर्थक 90 से ज्यादा विधायकों ने इस्तीफे की पेशकश कर दी. पार्टी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में प्रस्ताव तक पारित नहीं हो सका. नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस नेतृत्व की योजना ध्वस्त हो गई और आखिरकार गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ से बाहर हो गए. बाद में मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बने. अब गहलोत कह रहे हैं कि उस समय जो कुछ हुआ, वह हाईकमान के खिलाफ बगावत नहीं थी. उनके मुताबिक विधायकों का विरोध सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना के खिलाफ था. गहलोत ने यह भी याद दिलाया कि 2020 में पायलट अपने समर्थकों के साथ मानेसर चले गए थे और कांग्रेस सरकार पर संकट खड़ा हो गया था. ऐसे में कई विधायक उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं थे. यहीं से इस पूरे बयान का राजनीतिक महत्व शुरू होता है. गहलोत का असली संदेश क्या है? असल में गहलोत सिर्फ अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब नहीं दे रहे, बल्कि वह कांग्रेस नेतृत्व को यह संदेश भी दे रहे हैं कि राजस्थान की राजनीति को केवल दिल्ली से बैठकर नहीं समझा जा सकता. वह यह याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि उस समय उनके साथ विधायकों का भारी समर्थन था और राजस्थान कांग्रेस में उनकी राजनीतिक पकड़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. गहलोत के इस बयान का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है. हाल ही में पुष्कर में कांग्रेस का चिंतन शिविर हुआ, जिसमें राहुल गांधी ने हिस्सा लिया. लेकिन इस कार्यक्रम में गहलोत की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी. आधिकारिक तौर पर उनकी गैरमौजूदगी की वजह खराब स्वास्थ्य बताई गई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सामान्य घटना नहीं माना जा रहा. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व राजस्थान में संगठनात्मक बदलाव पर विचार कर सकता है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कार्यकाल भविष्य में समाप्त होना है और ऐसी अटकलें हैं कि सचिन पायलट को फिर से राजस्थान की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. यदि ऐसा होता है तो यह राज्य में शक्ति संतुलन को बदल सकता है. क्या पायलट की वापसी की आहट से बेचैन हैं गहलोत? राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और पायलट के बीच का टकराव कोई नया नहीं है. पिछले कई वर्षों से दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चलती रही है. हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश करता रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले समय में पायलट को प्रदेश संगठन या विधानसभा चुनाव की तैयारी में बड़ी भूमिका मिलती है, तो गहलोत खेमे की राजनीतिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है. गहलोत के हालिया बयान को इन्हीं संभावित बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है. वह कांग्रेस नेतृत्व को यह संकेत दे रहे हैं कि राजस्थान में किसी भी बड़े फैसले से पहले उनके राजनीतिक प्रभाव और समर्थक वर्ग को ध्यान में रखना होगा. राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे समय से अदावत की चर्चा है. दिलचस्प बात यह भी है कि गहलोत ने एक तरफ सचिन पायलट को लेकर नरम रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि वह पायलट को बचपन से जानते हैं और आज भी उनके प्रति स्नेह रखते हैं. लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने यह भी कहा कि पायलट ने गलती की थी और उन्हें उसे स्वीकार करना चाहिए था. यानी गहलोत ने रिश्तों की नरमी के साथ राजनीतिक संदेश की कठोरता भी बनाए रखी. यह रणनीति अशोक गहलोत की राजनीति की पहचान रही है. वह शायद ही कभी सीधे टकराव की भाषा बोलते हैं, लेकिन उनके बयान कई स्तरों पर राजनीतिक संकेत छोड़ जाते हैं. यही वजह है कि उन्हें राजस्थान की राजनीति का ‘जादूगर’ कहा जाता है. क्या कोई बड़ा खेल करेंगे ‘जादूगर’? अब सवाल यह है कि क्या गहलोत कोई बड़ा खेल करने जा रहे हैं? फिलहाल इसके स्पष्ट संकेत नहीं हैं. गहलोत कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में नहीं माने जाते. उन्होंने हमेशा खुद को गांधी परिवार और कांग्रेस विचारधारा के साथ खड़ा दिखाया है. इसलिए किसी बड़े विद्रोह या अलग राजनीतिक रास्ते की

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पैरों में छाले, पर मन में भोले का नाम; 7000 KM की...

Last Updated:June 08, 2026, 08:17 IST यूपी के शिवभक्त रोहित कश्यप महासंकल्प पर निकले हैं. वे करीब 7000 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं. काशी से गंगाजल लेकर वे बाबाधाम पहुंच चुके हैं. अब वे पैदल ही अमरनाथ और केदारनाथ जाएंगे. इस कठिन सफर में भोलेनाथ के प्रति उनकी अटूट आस्था और हौसला देखते बन रहा है. ख़बरें फटाफट देवघर: कहते हैं कि जब आस्था दिल में बस जाए तो रास्तों की दूरी मायने नहीं रखती. वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले युवा शिवभक्त रोहित कश्यप ने ऐसा संकल्प लिया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है. भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संदेश लेकर रोहित करीब 7000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकले हैं.इसी यात्रा के दौरान वह काशी से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल चलते हुए देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच गए. करीब एक महीने तक लगातार पैदल चलने के बाद जब रोहित बाबाधाम पहुंचे तो उनके चेहरे पर अलग ही चमक दिखाई दे रही थी. यह चमक किसी उपलब्धि की नहीं, बल्कि उस आस्था की थी जिसने उन्हें हजारों किलोमीटर लंबी राह पर चलने का हौसला दिया. कंधों पर जल, पैरों में छाले और मन में भोलेनाथ का नाम लेकर उन्होंने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और विश्व शांति, मानव कल्याण तथा सनातन संस्कृति की उन्नति की कामना की. क्या कहते हैं भक्त रोहित कश्यपलोकल 18 से रोहित ने बताया कि यह यात्रा अचानक लिया गया फैसला नहीं है. इसके पीछे वर्षों की आस्था, विश्वास और एक बड़ा उद्देश्य जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि आज सनातन संस्कृति को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है. इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने पैदल यात्रा शुरू की है. रोहित कहते हैं कि जब वह रास्ते में लोगों से मिलते हैं तो उन्हें सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और धार्मिक स्थलों के महत्व के बारे में बताते हैं. रोहित कश्यप ने बताया कि वह 29 अप्रैल को अपने घर से निकले थे और उनकी यह यात्रा करीब छह महीने तक चलेगी. उन्होंने कहा कि इस पूरे सफर में उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कभी तेज धूप, कभी बारिश, तो कभी सुनसान रास्ते. लेकिन हर कठिनाई के बीच उन्हें ऐसा महसूस होता है कि स्वयं भोलेनाथ उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं.यही कारण है कि वह बिना रुके लगातार आगे बढ़ रहे हैं. बाबाधाम से जगगन्नाथ पुरी की यात्रा रोहित ने बताया कि देवघर उनके लिए बेहद खास पड़ाव था, क्योंकि बाबा बैद्यनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और यहां दर्शन करना उनके जीवन का सपना था. उन्होंने कहा कि बाबा के दरबार में पहुंचकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनकी सारी थकान पल भर में दूर हो गई हो. मंदिर में पूजा करने के बाद उन्होंने बाबा से अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने का आशीर्वाद भी मांगा. हालांकि रोहित की यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है. बाबाधाम से आगे उनका सफर और भी लंबा और कठिन होने वाला है. यहां से वह पैदल ही जगन्नाथपुरी के लिए रवाना होंगे. भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के बाद उनका अगला पड़ाव उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग होगा. इसके बाद वह हिमालय की कठिन वादियों में स्थित अमरनाथ धाम और फिर केदारनाथ धाम तक की यात्रा भी पैदल पूरी करेंगे. यह पूरा सफर लगभग 7000 किलोमीटर का होगा. रास्ते में लोग करते मददरास्ते में मिलने वाले लोगों का प्यार और सहयोग भी रोहित के लिए बड़ी ताकत बन रहा है. उन्होंने बताया कि कई जगहों पर लोग उनके रहने और खाने की व्यवस्था कर देते हैं. कुछ लोग उनकी यात्रा के बारे में सुनकर भावुक हो जाते हैं तो कुछ उनके साथ कुछ दूरी तक पैदल भी चलते हैं. यह प्रेम और सम्मान उन्हें आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देता है. रोहित की यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह विश्वास, समर्पण, धैर्य और संकल्प की ऐसी कहानी है जो हर किसी को प्रेरित करती है. आज के समय में जब लोग छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं, तब एक युवा हजारों किलोमीटर पैदल चलकर यह संदेश दे रहा है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और मन में विश्वास हो तो कोई भी राह कठिन नहीं होती. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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तीन महीने में दूसरी बार घरेलू गैस के दाम बढ़े, अब ~999.50...

सिटी एंकर महंगाई की मार झेल रहे लोगों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमत में 29 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें लागू होने के बाद अब उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए 999.50 रुपए चुकाने होंगे। इससे पहले 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद इसकी कीमत 970.50 रुपए पहुंच गई थी। तीन महीने के भीतर दूसरी बार हुई बढ़ोतरी ने गृहणियों की चिंता बढ़ा दी है। इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर बोकारो जिले के 3 लाख 50 हजार से अधिक गैस उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जिले के उपभोक्ताओं को अब हर महीने करीब एक करोड़ एक लाख रुपए से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच रसोई गैस के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया सेक्टर-9 निवासी रीना देवी ने कहा कि हर महीने किसी न किसी चीज के दाम बढ़ रहे हैं। गैस सिलेंडर पहले ही महंगा था, अब फिर 29 रुपए बढ़ा दिए गए। घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। सरकार को आम लोगों की परेशानी समझनी चाहिए। महंगाई का ज्यादा असर गृहणियों पर चास निवासी सुनीता कुमारी ने कहा कि रसोई गैस के दाम बढ़ने का सबसे ज्यादा असर गृहणियों पर पड़ता है। महीने का बजट पहले से ही तंग रहता है। अब सिलेंडर लगभग हजार रुपए का हो गया है, ऐसे में बचत करना मुश्किल हो गया है। दाम बढ़े हैं तो समय के अनुसार घटना भी चाहिए। एजेंसी में गैस सिलेंडर लेने के लिए उपभोक्ता की जुटी भीड़। बोकारो जिले में इंडेन गैस के एक लाख 95 हजार 942 उपभोक्ता हैं। वहीं एचपी गैस के एक लाख पांच हजार 267 और भारत गैस के 49 हजार 587 उपभोक्ता हैं। कुल मिलाकर जिले में 3 लाख 50 हजार 796 घरेलू गैस उपभोक्ता हैं, जिन पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ेगा। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में रसोई का खर्च और अधिक बढ़ जाएगा। महंगाई के इस दौर में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई नई बढ़ोतरी ने बोकारो के लाखों परिवारों का बजट एक बार फिर बिगाड़ दिया है। दाम बढ़ोतरी का सीधा असर घर के किचन तक Source link

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झारखंड में तेज हुई प्री मानसून एक्टिविटी:13 जून तक मेघ गर्जन, वज्रपात...

झारखंड में प्री-मानसून गतिविधियां तेजी पकड़ चुकी हैं। राज्य के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। रविवार को रामगढ़ जिले में वज्रपात की अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई। दो अन्य घायल हो गए। मृतकों में कुजू के 16 वर्षीय साहिल कुमार उर्फ तूफान और रामगढ़ प्रखंड के गंडके पाहन टोला निवासी 30 वर्षीय राजू मुंडा शामिल हैं। घायल लोगों में साहिल के पिता विनोद महतो भी शामिल हैं। इसके अलावा जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चरकपानी गांव के रहने वाले शाहजहां शेख की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी युक्त हवाओं और अनुकूल परिस्थितियों के कारण राज्य में गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। आने वाले दिनों में भी यह सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है। रांची समेत कई जिलों में उमस राजधानी रांची में रविवार को दिनभर मौसम का रंग बदलता रहा। सुबह बादल छाए रहने से लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन दोपहर बाद तेज धूप निकलने से उमस बढ़ गई और परेशानी बढ़ गई। शाम करीब तीन बजे बरियातू क्षेत्र में हल्की बूंदाबांदी भी हुई। रांची का अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, राज्य के अन्य हिस्सों में भी मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। पिछले 24 घंटे में सिमडेगा के ठेठईटांगर में 70.3 मिमी, कुरडेग में 61.4 मिमी और गोबिंदपुर में 60.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। बहरागोड़ा में 23.5 मिमी वर्षा हुई। दूसरी ओर डालटनगंज 40.9 डिग्री के साथ सबसे गर्म स्थान रहा। 13 जून तक गर्जन और बारिश के आसार मौसम विभाग ने 13 जून तक राज्य के कई जिलों में गर्जन, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। 11 जून को गोड्डा, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो और कोडरमा समेत 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की आशंका है। रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, पश्चिमी और पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और लोहरदगा में दोपहर या शाम के समय तेज गर्जन के साथ बारिश हो सकती है। वहीं, पलामू, गढ़वा और चतरा में हल्की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। पलामू में बना रहेगा गर्मी का असर बारिश की संभावना के बावजूद पलामू प्रमंडल के जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा। मेदिनीनगर, गढ़वा और चतरा में अधिकतम तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। मौसम विभाग का कहना है कि वास्तविक तापमान से 4-5 डिग्री अधिक गर्मी महसूस हो सकती है। वहीं, रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा जैसे दक्षिणी जिलों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा। यहां तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने और बीच-बीच में बारिश से राहत मिलने की संभावना है। कुल मिलाकर राज्य में अगले कुछ दिनों तक दिन में गर्मी और उमस तथा शाम या रात में बारिश और वज्रपात का दौर जारी रह सकता है। Source link

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बांग्‍लादेश बॉर्डर से भारत में घुसे, तय किया 2500 किलोमीटर तक का...

होमताजा खबरदेश बांग्‍लादेश बॉर्डर से भारत में घुसे, तय किया 2500 KM तक का सफर, अब एक्‍शन Last Updated:June 08, 2026, 07:13 IST Illegal Bangladeshi Arrested: भारत और बांग्‍लादेश की सीमा पर बाड़बंदी का काम चल रहा है, इसके बावजूद बड़ा हिस्‍सा अभी भी ओपन और अनप्रोटेक्‍टेड है. दरअसल, सीमाई क्षेत्र के दायरे में पहाड़, जंगल और नदियां भी आती हैं, जिन्‍हें सुरक्षित करना आसान काम नहीं है. घुसपैठिए इसका खूब फायदा उठाते हैं. केरल में अवैध तरीके से रह रहे बांग्‍लादेशी कपल को गिरफ्तार किया गया है. (फाइल फोटो/PTI) Illegal Bangladeshi Arrested: भारत देश में अवैध तरीके से रहने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है. खासकर बांग्‍लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्‍ती बरती जा रही है, ताकि उन्‍हें वापस उनके देश भेजा जा सके. इसी क्रम में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई की है. केरल के कोल्लम जिले में अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी दंपति को सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर गिरफ्तार किया है. आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) और मिलिट्री इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में यह गिरफ्तारी नींदाकरा क्षेत्र से की गई. अधिकारियों के अनुसार दंपति कई वर्षों से बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहा था. जांच एजेंसियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए दंपति की पहचान मिलन खान और मुकुल खंडाल के रूप में हुई है. दोनों मूल रूप से बांग्लादेश के बागेरहाट जिले के गुलशा गली इलाके के निवासी हैं, जो ढाका के पास स्थित है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मिलन खान करीब 10 वर्ष पहले भारत आया था. वह केरल के त्रिशूर जिले के चालाकुडी क्षेत्र में रह रहा था. बाद में करीब तीन वर्ष पहले वह अपनी पत्नी को भी भारत लेकर आया और दोनों कोल्लम जिले में बस गए. बताया जा रहा है कि दंपति पिछले तीन वर्षों से केरल में रह रहा था, लेकिन उनके पास भारत में रहने के लिए कोई वैध कानूनी दस्तावेज नहीं थे. बांग्‍लादेश का राष्‍ट्रीय पहचान पत्र बरामद छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को दंपति के पास से भारतीय दस्तावेज भी मिले हैं. इसके अलावा उनके पास बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र (नेशनल आईडी कार्ड) भी बरामद हुए हैं. अब एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि भारतीय दस्तावेज उन्हें कैसे और किन परिस्थितियों में मिले. मामले की गंभीरता को देखते हुए चवरा पुलिस ने दंपति को गिरफ्तार कर लिया है. उनके खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दंपति को भारत में रहने और दस्तावेज हासिल करने में किसने मदद की. सुरक्षा एजेंसियां मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मानकर हर पहलू की जांच कर रही हैं. बांग्‍लादेश बॉर्डर का हाल दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध प्रवासियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. पश्चिम बंगाल से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच कई स्थानों पर तनाव देखा जा रहा है. यहां शुक्रवार से सीमा के जीरो पॉइंट पर फंसे करीब 40 बांग्लादेशी नागरिक रातोंरात गायब हो गए, जिसके बाद दोनों देशों की सीमा पर बना गतिरोध समाप्त हो गया. सबसे ज्यादा तनाव कूचबिहार जिले के मेखलीगंज क्षेत्र के पनिशाला इलाके में पिलर नंबर-134 के पास देखने को मिला. यहां 10 लोग सीमा के जीरो पॉइंट पर फंसे हुए थे. BGB ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और दावा किया था कि भारत की ओर से उन्हें ‘अवैध रूप से वापस भेजने’ की कोशिश की जा रही है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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